रजत शर्मा के खाते में जुड़ी एक और उपलब्धि, मिला ये सम्मान

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ के प्रेजिडेंट रजत शर्मा को दुबई में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया प्रतिष्ठित अवॉर्ड

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 07 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 07 November, 2019
Rajat Sharma

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ (डीडीसीए) के प्रेजिडेंट रजत शर्मा के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। उन्हें बुधवार को दुबई में प्रतिष्ठित ‘द ट्रेल ब्लेजर अवॉर्ड’ (The Trailblazer Award)  से सम्मानित किया गया है।

यह भी पढ़ें: अरनब गोस्वामी के बाद अब आया रजत शर्मा का नंबर, सरकार ने यूं दी अहमियत

दुबई में ‘एशियन बिजनेस लीडरशिप फोरम’ (ABLF) में उन्हें यह अवॉर्ड प्रदान किया गया। इस बारे में रजत शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर यह जानकारी दी है। इसके साथ ही उन्होने इस सम्मान के लिए यूएई के संस्कृति, युवा और सामाजिक विकास मंत्री शेख नाहयान बिन मुबारक अल नाहयान और ‘एशियन बिजनेस लीडरशिप फोरम’ की जूरी को धन्यवाद भी अदा किया है। बता दें कि यह अवॉर्ड हर साल एशिया के उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए बिजनेस की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

रजत शर्मा का यह ट्वीट आप यहां पढ़ सकते हैं।

बता दें कि रजत शर्मा को पिछले दिनों ही निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (एनबीए) का दोबारा प्रेजिडेंट चुना गया है। हाल ही में वह ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation)  के बोर्ड में बतौर वाइस प्रेजिडेंट भी चुने गए हैं।

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PM से पूछे सवाल का अंजना ओम कश्यप को 6 महीने बाद मिला जवाब!

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘आजतक’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर ने इस बारे मेंं एक ट्वीट भी किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 22 November, 2019
Last Modified:
Friday, 22 November, 2019
Anjana

तारीख थी 17 मई 2019, लोकसभा चुनाव के आखिरी दौर के लिए चुनाव प्रचार खत्म हो चुका था, 19 मई को आखिरी दौर की वोटिंग होनी थी। ऐसे में मोदी और शाह दोनों काफी कॉन्फिडेंट थे। मीडिया वालों को मेसेज मिला कि पीएम मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। ये अलग बात है कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सारे सवालों के जवाब बीजेपी प्रेजिडेंट अमित शाह ने ही दिए। पीएम मोदी ने ‘आज तक’ की मशहूर एंकर अंजना ओम कश्यप के सवाल का जवाब भी नहीं दिया, लेकिन आज 6 महीने 4 दिन बाद अंजना कश्यप को वह जवाब मिल गया है कम से कम अंजना ने तो यही दावा किया है।

दरअसल अंजना कश्यप का सवाल साध्वी प्रज्ञा से जुड़ा था। साध्वी प्रज्ञा भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरी थीं और नाथूराम गोडसे पर अपने बयान को लेकर चर्चा में थी और मोदी भी उन पर बयान दे चुके थे कि वह उन्हें मन से कभी माफ नहीं करेंगे। ऐसे में अंजना कश्यप ने पीएम मोदी से इजाजत मांगी कि मेरा सवाल आपके लिए है, क्या आप जवाब देंगे तो मोदी जी ने अमित शाह की तरफ इशारा किया कि हमारे लिए अध्यक्ष ही सब कुछ होते हैं।

तब अंजना कश्यप ने अपने सवाल में ना केवल मोदी को याद दिलाया कि उन्होंने किस तरह से साध्वी प्रज्ञा को मन से कभी माफ ना करने की बात कही थी। ऐसे में अंजना ने सवाल किया कि चुनावों में अगर साध्वी प्रज्ञा जीत गईं तो क्या बीजेपी उनका स्वागत करेगी या बाहर का रास्ता दिखाइएगी?

पर उस वक्त मोदी के बजाय अमित शाह ने सवाल का जवाब दिया था लेकिन आज जब साध्वी प्रज्ञा का नाम फिर से चर्चा में है क्योंकि डिफेंस मिनिस्ट्री ने अपनी एक कमेटी में जिन‌ 21 संसद सदस्यों का नाम रखा है उसमें साध्वी प्रज्ञा का नाम भी शामिल है। ऐसे में अंजना कश्यप ने‌‌ एक वीडियो शेयर किया है और साथ में ट्वीट किया है, ' जवाब आज मिला साध्वी प्रज्ञा को इनाम मिला'।

जो वीडियो अंजना ने शेयर किया है उसकी शुरुआत होती है पीएम मोदी के 2 मार्च के इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के भाषण से, जिसमें वह कह रहे हैं कि आज तक बड़े ही अच्छे सवाल पूछता है और उसके बाद 17 मई का वह वीडियो लगा रखा है, जिसमें अंजना पहले मोदी से इजाजत मांगती है और बाद में इजाजत न मिलने पर अमित शाह से ही प्रज्ञा ठाकुर को लेकर यह सवाल पूछती हैं। जो लोग अंजना कश्यप पर गोदी मीडिया जैसे तमाम आरोप लगाते रहते हैं, उनको ये ट्वीट और वीडियो जरूर देखना चाहिए, हो सकता है उनकी अंजना के बारे में राय बदल जाए।

वैसे आपको बता दें कि इस कमेटी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कुल 21 सदस्य हैं। इनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, फारूक अब्दुल्ला, ए. राजा, सुप्रिया सुले, मीनाक्षी लेखी, राकेश सिंह, शरद पवार, जेपी नड्डा आदि शामिल हैं।

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एबीपी न्यूज ने अपने नाम से प्रचारित इन खबरों से किया किनारा, दी सफाई

सोशल मीडिया के दौर में किसी खबर की पुष्टि करना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
ABP News

आजकल फेक न्यूज के मामले बढ़ते जा रहे हैं। तमाम कवायदों के बावजूद फेक न्यूज का खतरा हर समय बना रहता है। सोशल मीडिया के दौर में किसी खबर की पुष्टि करना कई बार काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे ही एक मामले में हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ को बाकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ’सफाई’ देनी पड़ी है।

बताया जाता है कि सोशल मीडिया पर ‘एबीपी न्यूज’ के नाम से एक खबर चल रही है। इस खबर में कहा गया है कि एक दिसंबर से जियो सर्विस और महंगी होंगी। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि एक दिसंबर से 24 पैसे महंगी होंगी जियो कॉल।

अब ‘एबीपी न्यूज’ ने बाकायदा आपने ट्विटर हैंडल पर इन खबरों का स्क्रीनशॉट लगाते हुए ट्वीट कर सफाई दी है कि ‘एबीपी न्यूज’ के नाम से सोशल मीडिया पर यह गलत और भ्रामक तस्वीर/खबर प्रचारित की जा रही है। इस खबर से ‘एबीपी न्यूज’ का कोई लेना-देना नहीं है।

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दो नए केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद टीवी चैनल्स को मिला अब ये आदेश

जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन बाद 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए हैं। लद्दाख में कारगिल और लेह जिलों को शामिल किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 21 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 21 November, 2019
Channel

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स को देश के नए राजनैतिक नक्शे (political map) का इस्तेमाल करने के आदेश दिए हैं। 31 अक्टूबर को दो नए केंद्र शासित प्रदेश-जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गठन के बाद ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ (Survey of India) ने दो नवंबर को इस नए नक्शे को जारी कर दिया है। अपने आदेश में  सूचना प्रसारण मंत्रालय का कहना है, ‘यह नक्शा भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तैयार किया है और इस नक्शे को उनकी वेबसाइट से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। सभी टीवी चैनल्स अब केवल इस नए नक्शे का ही प्रयोग करें।’

बता दें कि राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद राज्य को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया है। साथ ही, प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन बाद 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए हैं। लद्दाख में कारगिल और लेह जिलों को शामिल किया गया है। इसके बाद देश का नया नक्शा भी जारी किया गया है।

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नए रूप में और जमकर रंग बिखेर रहे हैं अभिज्ञान प्रकाश

अभिज्ञान ने टीवी पत्रकारिता से इतर सोशल मीडिया पर लगातार मुद्दों को लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और उनके इस प्रयोग को काफी पसंद किया जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Abhigyan Prakash

मशहूर व वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश ने भले ही ‘एनडीटीवी’ को अलविदा कह दिया हो, लेकिन खबरों की दुनिया से उनका मजबूत नाता बना हुआ है। ‘एनडीटीवी’ पर अप्रैल के अंत में अपना आखिरी शो करने के कुछ दिनों बाद से ही वह न्यूज चैनल ‘एबीपी’ पर नेशनल एक्सपर्ट के तौर पर विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते नजर आने लगे हैं। हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में मजबूत पकड़ रखने वाले अभिज्ञान ‘एबीपी’ के साथ ही ‘सीएनएन न्यूज18’ और ‘सीएनबीसी आवाज’ के जरिये राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।

दूसरी ओर,अभिज्ञान ने टीवी पत्रकारिता से इतर सोशल मीडिया पर लगातार मुद्दों को लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और उनके इस प्रयोग को काफी पसंद किया जा रहा है। लोकसभा चुनावों के दौरान जिस तरह से उन्होंने एक शहर से दूसरे शहर घूमकर जनता की नब्ज को टटोलने का प्रयास किया, वो काबिले तारीफ है। उत्तर प्रदेश की सियासत की बारीकियां को समझने वाले चुनिंदा पत्रकारों में अभिज्ञान ने लोकसभा चुनावों के दौरान ‘यूपी से यूपी तक’ नाम की जो सीरीज की, उसमें उन्होंने मौजूदा आकलनों से हटकर बीजेपी की बड़ी जीत का दावा किया था, जो उनकी राजनैतिक परिपक्वता को भी दर्शा रहा है। अपनी सीरीज के दौरान अमेठी के चुनावों को लेकर उन्होंने राहुल की हार और स्मृति ईरानी की जीत का आकलन भी किया था, जो दर्शाता है कि वह यूपी के लोगों का मन पढ़ना बखूबी जानते हैं।  

अभिज्ञान का अपना यूट्यूब चैनल है, जहां वह सियासी विश्लेषण से लेकर हर गंभीर मुद्दे पर अपनी बेवाक राय प्रस्तुत करते हैं। पॉइंट’ शो में उन्होंने कांग्रेस के हाल से लेकर दिल्ली के प्रदूषण तक पर बात की है। अभियान प्रकाश की सबसे खास बात यह है कि वो तथ्यों वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। वह केवल बोलने के लिए नहीं बोलते, बल्कि इसलिए बोलते हैं कि उनके पास जनता को बताने के लिए वो सबकुछ है, जो जनता सुनना चाहती है। अभियान ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक अच्छा प्रयोग किया है। वो अपनी बात को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रखते हैं। यानी एक ही विषय पर दो अलग-अलग विडियो स्टोरी बनाते हैं। इससे पता चलता है कि अपने काम और दर्शकों की सहूलियत को लेकर वह कितने संजीदा हैं।

यूट्यूब के अलावा, अभिज्ञान ट्विटर, लिंक्डइन और फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। फेसबुक पर उन्होंने अपने नाम से एक पेज बनाया है, जहां हर रोज कुछ न कुछ नया मिलता है। इस पेज से अब तक चार लाख के आसपास लोग जुड़ चुके हैं। इसी तरह उनके यूट्यूब चैनल से भी लगातार हजारों सबस्क्राइबर्स जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही उनकी अपनी वेबसाइट भी है।‘एनडीटीवी’ के दौर में अभिज्ञान का शो ‘मुकाबला’ इसलिए बेहद पसंद किया जाता था कि वह निष्पक्षता का दामन थामे रहते थे। उन्हें कभी किसी पार्टी पर निशाना साधते या किसी का पक्ष लेते नहीं देखा गया। उनका यही अंदाज आज भी कायम है।

दिल्ली की जहरीली हवा पर ‘अभिज्ञान का पॉइंट’ देखने के बाद आपको इसका अहसास हो जाएगा। पिछले कुछ दिनों से अभिज्ञान इस विषय को उठाये हुए हैं और केवल सिस्टम की खामियां ही नहीं गिना रहे, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं कि उन्हें अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम बढ़ाने चाहिए। उदाहरण के लिए, केजरीवाल सरकार की ऑड-ईवन स्कीम पर भाजपा सवाल उठा रही है। कई पत्रकारों ने भी इस स्कीम को कठघरे में खड़ा किया है, लेकिन अभिज्ञान ने इसे बेहद संतुलित तरीके से पेश किया। उन्होंने न अतिरंजित बुराई की और न बेवजह बड़ाई की। उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया कि प्रदूषण कम करने को लेकर ऑड-ईवन का इतिहास अच्छा नहीं रहा है। यानी इससे दिल्ली को जहरीली हवा से मुक्ति नहीं दिलाई जा सकती। साथ ही उन्होंने इसकी अच्छाई को भी रेखांकित किया कि सड़कों पर वाहनों का बोझ कम हो जाता है, जाम जैसी स्थितियों में भी कमी आती है और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलता है।

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम पर भी अभिज्ञान ने जोरदार और सटीक विश्लेषण किया है। करीब दो दशकों से अधिक समय से सियासी गलियों में घूमकर खबर तलाशने वाले अभिज्ञान का राजनीतिक अनुमान अमूमन गलत नहीं जाता। कई विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों पर उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई है। महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच रिश्तों में अलगाव की बात अभिज्ञान लगातार कहते रहे, जो अंतत: सही साबित हुई। ऐसे में यदि अभिज्ञान भाजपा और शिवसेना के रिश्तों के बारे में कुछ कह रहे हैं, तो फिर उसे सुना जाना चाहिए।

यदि आप अभिज्ञान की पत्रकारिता के कद्रदान हैं, तो टीवी का रिमोट बदलने के बजाय अब किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लॉग इन कर उनके साथ जुड़ सकते हैं। अभिज्ञान प्रकाश के यूट्यूब चैनल से जुड़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। 

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NDTV के लिए बजी खतरे की घंटी, जब सामने आई ये रिपोर्ट

30 सितंबर 2019 को समाप्त हुई तिमाही और छह महीने के अन-ऑडिट वित्तीय परिणामों ने बढ़ाई चिंता

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
NDTV

मीडिया समूह ‘एनडीटीवी’ (NDTV)  की आर्थिक स्थिति इन दिनों कुछ अच्छी नहीं चल रही है। 30 सितंबर 2019 को समाप्त हुई तिमाही और छह महीनों के अन-ऑडिट (un-audit) वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कंपनी को कुल 10.16 करोड़ और इस अवधि में1.17 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी की जितनी संपत्ति है, उससे लगभग 88.92 करोड़ रुपए ज्यादा तो देनदारियां हो गई हैं। ‘एनडीटीवी’ की ऑडिटिंग करने वाली फर्म ‘BSR & Associates LLP’ की रिपोर्ट बताती है, ‘कंपनी के लिए यह काफी चिंता की बात है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि अनिश्चितता की स्थिति को दूर करने के लिए कंपनी की ओर से कुछ कदम उठाए गए हैं।’

इस ब्रॉडकास्टर की वित्तीय स्थिति के बारे में सीए मनीष मल्होत्रा का कहना है, ‘कंपनी की वर्तमान संपत्ति में कमी हो रही है और पिछले तीन महीनों की बैलेंस शीट के अनुसार कंपनी की देनदारियां बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कॉस्ट और सैलरी बढ़ने के साथ ही कंपनी की आय में कमी के कारण इसके प्रॉफिट में कमी आई है। कंपनी ने नुकसान दर्ज किया है और यदि ऐसा जारी रहा तो कंपनी को अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट यानी परिचालन लागत को कम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

मल्होत्रा के अनुसार,’पिछली वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के ग्रॉस रेवेन्यू में करीब 28 प्रतिशत की कमी आई है और इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में यह करीब 38 प्रतिशत कम है।‘ उनका कहना है, ‘इस वित्तीय वर्ष के कुलछमाही रेवेन्यू को देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष की छमाही के मुकाबले 13388 लाख रुपए से घटकर यह 11811 लाख रुपए रह गया है।’

इससे पहले एनडीटीवी’ उस समय चर्चाओं में आया था, जब ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड’ (SEBI) ने ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर मैनेजमेंट में दो साल तक कोई भी पद लेने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही दोनों पर दो साल के लिए प्रतिभूति मार्केट (securities market) से जुड़े रहने पर भी रोक लगा दी गई थी। इनके खिलाफ व्यापारिक नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की गई थी। इससे पहले 14 मार्च 2018 को तीनों प्रमोटर्स- प्रणॉय रॉय, राधिका रॉय और ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’ (RRPR Holdings Pvt. Ltd) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

इस मामले में 26 अगस्त 2017 और दिसंबर 2017 को शिकायतें मिलने के बाद सेबी की ओर से मामले का जांच की गई थी। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स और डायरेक्टर प्रणॉय रॉय व राधिका राय ने ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ (सेबी) अधिनियम 1992 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही एनडीटीवी के शेयरहोल्डर्स द्वारा लोन एग्रीमेंट के बारे में दी गई जानकारी में भी नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया है। इस बारे में ‘एनडीटीवी’ प्रमोटर प्रणॉय राय से संपर्क किया है, पर फिलहाल उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

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जब जेएनयू के छात्रों को चैनल की रिपोर्टर ने बोला, 'फाड़ कर रख देंगे'

जेएनयू में बढ़ी हुई फीस और अन्य मांगों को लेकर जेएनयू के छात्रों ने संसद तक किया था प्रोटेस्ट मार्च

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
TV Reporter

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन जेएनयू में बढ़ी हुई फीस और अन्य मांगों को लेकर जेएनयू के छात्रों ने संसद तक प्रोटेस्ट मार्च किया और उसके बाद जो पुलिस लाठीचार्ज हुआ, उसको लेकर तमाम तरह की सोशल मीडिया पोस्ट, विडियोज और मीडिया रिपोर्ट्स आप सबने देखी होंगी। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है एक ऐसे विडियो की, जिसमें जेएनयू के छात्रों से घिरी एक टीवी रिपोर्टर गुस्से में कह रही है, 'फाड़ के रख देंगे, बदतमीजी मत करना'।

‘जी न्यूज’ की दो रिपोर्टर जब जेएनयू पहुंची थीं, तब एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। तमाम लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि ‘जी न्यूज’ की दुश्मनी उन महिला रिपोर्टरों से निकालने की क्या जरूरत थी। जेएनयू के छात्रों को महिलाओं से सभ्य तरीके से व्यवहार करना चाहिए था लेकिन अब ऐसा ही वाकया जेएनयू के बाहर दिल्ली की सड़कों पर जेएनयू के प्रोटेस्ट मार्च के दौरान हुआ तो मामला उलट गया। इस बार ‘जी न्यूज’ के बजाय ‘सुदर्शन चैनल’ की रिपोर्टर थीं, नाम था आंचल यादव। बैटलफील्ड भी बदल गया था, वह जेएनयू केंपस नहीं था, बल्कि लुटियन जोन की दिल्ली की सड़कें थीं।

जब बाकी रिपोर्टर्स की तरह आंचल यादव भी जेएनयू प्रोटेस्ट के दौरान छात्र-छात्राओं के बीच वॉक थ्रू करने लगीं,  बाइट्स लेने लगी तो जेएनयू के छात्रों ने ‘जी न्यूज’ वाला ‘फार्मूला’ आंचल यादव पर भी आजमाया लेकिन वह भूल गए कि वो‌ चारों तरफ से पुलिस के जवानों से घिरे हैं और वह जेएनयू केंपस में भी नहीं हैं। इस दौरान आंचल यादव ने वह किया, जिसकी उम्मीद नहीं थी।  जब एक छात्र ने आंचल को बुरी तरह से झटका तो वह एकदम आपा खो बैठी और ऑन कैमरा बोली, ‘'फाड़ के रख देंगे, बदतमीजी मत करना, हम सुदर्शन न्यूज के हैं।‘

इसके बाद ‘सुदर्शन न्यूज’ ने यह क्लिप निकालकर बाकायदा एक शो बना डाला,‌ इसका नाम रखा 'पंगा मत लेना, यह सुदर्शन न्यूज है'। ‘सुदर्शन न्यूज’ के सर्वेसर्वा सुरेश चाह्वाणके ने यह विडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया और लिखा, ‘सुदर्शन के शेरनी की दहाड़ से #JNU के बदमाशों का क्या हुआ देखिये। पंगा मत लेना, सुदर्शन है।‘ इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए आंचल यादव ने दिखा, 'आपके नेतृत्व में ये दहाड़ हमेशा बरकरार रहेगी सर। इन देशद्रोहियों को इन्हीं की भाषा में जवाब देना जरूरी था।

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धर्म की वजह से महिला पत्रकार को छोड़नी पड़ी नौकरी.

सहकर्मियों के व्यवहार से परेशान होकर आखिर महिला पत्रकार ने दे दिया इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Female Journalist

आए दिन की मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर एक ईसाई महिला पत्रकार ने आखिरकार अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। यह मामला पाकिस्तान का है और 38 साल की इस महिला पत्रकार का नाम गोनिला गिल है। गोनिला गिल ‘दुनिया न्यूज’ में काम करती थीं। वह लाहौर प्रेस क्लब में इकलौती पंजीकृत ईसाई पत्रकार हैं।

बताया जाता है कि गोनिला गिल ने एक मुस्लिम हुसनैन जमील से शादी की थी, लेकिन इस्लाम धर्म नहीं अपनाया था। इस बात को लेकर कार्यस्थल पर सहयोगियों द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। यही नहीं, उन्हें उनके धर्म की आस्था को लेकर अपमानित भी किया जाता था। लगातार हो रहीं इस तरह की हरकतों से परेशान होकर आखिर गोनिला गिल ने इस्तीफा दे दिया।

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न्यूज नेशन के आउटपुट हेड का इस्तीफा, कई तरह की चर्चा

पिछले हफ्ते इस्तीफा देने के बाद से ही उन्होंने ऑफिस आना भी छोड़ दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
News Nation

हिंदी टीवी न्यूज में अपनी ही गति से चल रहे चैनल ‘न्यूज नेशन’ से खबर है कि वहां आउटपुट टीम की कमान संभाल रहे वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभान सोलंकी ने संस्थान को अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले हफ्ते इस्तीफा देने के बाद से ही उन्होंने ऑफिस आना भी छोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था के नजरिए से मीडिया के लिए ये मुश्किल समय है, ऐसे में अधिकांश मीडिया संस्थान कॉस्ट कटिंग के रास्ते खोजने की जुगत में हैं।

बताया जा रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ में भी एक मीटिंग के अंतर्गत घटते रेवेन्यू पर चिंता जताई गई थी। इस मीटिंग के दूसरे दिन ही चंद्रभान ने इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि उनके पास किसी और संस्थान से अच्छा ऑफर है, इसलिए उन्होंने मुश्किल समय में संस्थान को अलविदा कहना ही उचित समझा है।

वैसे इससे पहले चैनल के असाइनमेंट हेड ब्रजमोहन भी संस्थान को अलविदा कह चुके हैं। बताया ये भी जा रहा है कि शायद चैनल में कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है, जिसके चलते पुराने लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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मुशर्रफ जैसा 'दांव' चलाया कुरैशी ने लेकिन इस भारतीय पत्रकार ने यूं कर दिया फेल

करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तान में उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने के लिए भारत से कई मीडिया समूहों के पत्रकार गए थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
journalist

आपको याद होगा परवेज मुशर्रफ का वह आगरा दौरा, जिसमें मुशर्रफ को अटल बिहारी बाजपेयी से मिलने से पहले भारतीय मीडिया के दिग्गजों से मिलना था और वह मीटिंग शुरू हुई कि अचानक मुशर्रफ की टीम ने वह मुलाकात पाकिस्तान के चैनलों पर लाइव दिखानी शुरू कर दी और यह बात केवल मुशर्रफ को पता थी। मुशर्रफ ने भारतीय मीडिया के दिग्गजों के सामने कश्मीर को लेकर भारतीय सरकार की खामियां और ज्यादतियां गिनानी शुरू कर दीं। मुशर्रफ विदेशी मेहमान थे और बड़े ओहदे पर थे तो भारतीय पत्रकार लिहाज कर गए और सुनते रहे। लेकिन वह मुशर्रफ की चालाकी को नहीं समझ पाए और पाकिस्तान के टीवी चैनल्स ने चलाया कि भारतीय मीडिया के दिग्गज भी कश्मीर में भारतीय सरकार की ज्यादतियों को बखूबी जानते हैं, तभी मुशर्रफ की बात का विरोध नहीं किया।

मुशर्रफ का यह दांव उस वक्त पाकिस्तकान की जनता व इंटरनेशनल मीडिया में काफी तारीफें बटोर गया, लेकिन करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन कार्यक्रम में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यही दांव आजमाया, जिसे एक भारतीय पत्रकार ने फेल कर दिया।

हालांकि, यह कहानी 9 नवंबर की है और ज्यादातर पत्रकारों को पता भी चल चुकी है, लेकिन इस हफ्ते की सबसे सुपरहिट कहानी है तो samachar4media एक पत्रकार की कूटनीतिक चतुराई को देश के कोने-कोने के पत्रकारों तक पहुंचाना चाहती है, पत्रकारिता के छात्रों तक पहुंचाना चाहती है। हम जिस पत्रकार की बात कर रहे हैं, उनका नाम है संजीव त्रिवेदी जो News24 से जुड़े हैं। वह लगभग दो दशक से नेशनल मीडिया में काम कर रहे हैं और अपनी ब्रेकिंग खबरों से ज्यादा खबरों के विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। आमतौर पर संजीव त्रिवेदी को तीसरे फ्रंट की राजनीति को कवर करने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी को जवाब दिया, उससे तमाम राष्ट्रवादी पत्रकार भी सीख ले सकते हैं।

दरअसल हुआ यूं कि करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तान में उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने के लिए भारत से कई मीडिया समूहों के पत्रकार वहां गए थे। उन्हें गवर्नर हाउस में ठहराया गया था कि अचानक से वहां एंट्री होती है महमूद कुरैशी की। उनका यह दौरा अप्रत्याशित था, किसी भी भारतीय पत्रकार को उसकी जानकारी नहीं थी। अचानक से कुरैशी भारत सरकार पर आरोप लगाने लगे कि वह कैसे कश्मीरियों पर ज्यादती कर रही है, सारे भारतीय पत्रकार एकदम से सकते में आ गए। एक बार तो लगा कि कई फिर से आगरा जैसा कांड ना हो जाए, क्योंकि पाकिस्तानी चैनल्स के कैमरे चालू थे।

इसी बीच संजीव त्रिवेदी ने कमान संभाल ली और तमाम सिक्योरिटी गार्ड्स से घिरे कुरैशी से उल्टा सवाल पूछ डाला कि करतारपुर कॉरिडोर के कार्यक्रम में आप खालिस्तान को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं? अचानक हुए सवाल से कुरैशी सकपका गए। संजीव त्रिवेदी ने उनके सिक्योरिटी ऑफिसर्स की टेढ़ी निगाहों के बावजूद अपने सवाल जारी रखे। कुरैशी ने उन्हें उंगली दिखाते हुए गुस्से में कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन संजीव नहीं रुके।

फाइनली कुरैशी को वहां से जाना पड़ा, लेकिन बाद में संजीव त्रिवेदी ने यह विडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया तो भारत समेत दुनिया के तमाम पत्रकारों ने इसे शेयर किया और संजीव की तारीफ की। हजारों रिट्वीट और लाइक्स संजीव को इस विडियो के लिए मिल चुके हैं।

आप भी यह विडियो यहां देख सकते हैं-

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वरिष्ठ खेल पत्रकार नीरज झा ने इस बड़े पद पर शुरू किया नया सफर

पत्रकार विधांशु कुमार के साथ मिलकर 'विराट: द मेकिंग ऑफ ए चैम्पियन' नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं नीरज झा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Neeraj Jha

‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) से एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर ये है कि खेल पत्रकार नीरज झा ने बतौर हेड (प्रोग्रामिंग और प्रॉडक्शन) के पद पर जॉइन किया है। एक टीवी जर्नलिस्ट/शो प्रड्यूसर और लाइव स्पोर्ट ब्रॉडकास्टर के रूप में विभिन्न देशों में काम करने का नीरज झा को करीब 20 साल का अनुभव है।

‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) को जॉइन करने से पहले वह करीब दो साल से फ्रीलॉन्स स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर के रूप में काम कर रहे थे। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से रेडियो और टीवी जर्नलिज्म की पढ़ाई करने वाले नीरज झा ‘Seetalk' नामक एक एनजीओ के को-फाउंडर भी रह चुके हैं।

नीरज झा ने वर्ष 2001 में अपने करियर की शुरुआत ‘TRANS WORLD INTERNATIONAL’ के साथ की थी। यहां वह ‘Zee News’ के लिए आधा घंटे का न्यूज बुलेटिन प्रड्यूस करते थे। करीब 11 महीने बाद ही उन्होंने यहां से अलविदा कहकर वर्ष 2002 में ‘ईटीवी भारत’ का दामन थाम लिया और प्रड्यूसर व प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव के तौर पर करीब दो साल काम किया। जून 2004 में यहां से बाय बोलकर वह करेसपॉन्डेंट/एसोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर ‘Zee News’ से जुड़ गए।

इस मीडिया संस्थान में करीब सवा साल काम करने के बाद नीरज झा ‘TAJ TV’ (Ten Sports, Ten Cricket, Ten Action)  के साथ जुड़ गए। यहां उन्होंने करीब साढ़े 12 साल लंबी पारी खेली और फिर फ्रीलॉन्स स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर के रूप में काम शुरू कर दिया। अब उन्होंने अपनी नई पारी ‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) के साथ शुरू की है। नीरज झा ने खेल पत्रकार विधांशु कुमार के साथ मिलकर  'विराट: द मेकिंग ऑफ ए चैम्पियन' नाम से एक किताब भी लिखी है।

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