कुछ इस तरह वॉट्सऐप ने कैमरे को बनाया और बेहतर...

इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन वॉट्सऐप टेक्स्ट और इमोजी फीचर्स में बदलाव के बाद अब नया फीचर लाया है

Last Modified:
Friday, 07 July, 2017
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन वॉट्सऐप टेक्स्ट और इमोजी फीचर्स में बदलाव के बाद अब नया फीचर लाया है। यह नया फीचर अपने कैमरे को और बेहतर बनाने के लिए है। इस  मोस्ट अवेटेड फीचर का नाम है ‘Night Mode’. इस फीचर के जरिए यूजर अंधेरे में भी बेहतर फोटो क्लिक कर सकते हैं।

वॉट्सएप में इन-ऐप कैमरे को ओपन करने पर यूजर को राइट साइड में ऊपर एक चांद का आइकन दिखाई देगा। ये ऑइकन फ्लैश आइकन के बिल्कुल बगल में मौजूद होगा। इसको ऑन करने के लिए यूजर्स को आइकॉन पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद Enable का ऑप्शन दिखाई देगा।

बता दें कि वॉट्सएप के कैमरा में लाइट की कमी को दूर करने के लिए फ्लैश लाइट का ऑप्शन पहले से ही दिया गया है, लेकिन रात में कई बार फ्लैश लाइट से आंखों पर तेज लाइट पड़ती है, जिससे कई बार फोटो लेते वक्त आंखें बंद हो जाती हैं। और तो और अभी ज्यादातर मोबाइल में फ्रंट कैमरा में फ्लैश लाइट ऑप्शन भी नहीं होता है।

फिलहाल वॉट्सऐप का नया नाइट मोड ऑप्शन सिर्फ आईओएस इस्तेमाल करने वाले वॉट्सऐप के वर्जन 2.17.10 यूजर्स के लिए ही मौजूद है, लेकिन जल्द ही एंड्रायड फोन यूजर्स भी नाइट मोड फीचर का मजा ले सकेंगे।


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न्यूज कंटेंट के लिए गूगल पब्लिशर्स को देगी 1 बिलियन डॉलर, 200 के साथ किया सौदा

दिग्गज टेक कंपनी गूगल अगले तीन साल में कुछ देशों के पब्लिशर्स को उनके न्यूज कंटेंट के लिए एक बिलियन डॉलर का भुगतान करेगी

Last Modified:
Friday, 02 October, 2020
googlenews

दिग्गज टेक कंपनी गूगल अगले तीन साल में कुछ देशों के पब्लिशर्स को उनके न्यूज कंटेंट के लिए एक बिलियन डॉलर का भुगतान करेगी। गूगल ने इसके लिए कुछ देशों के 200 पब्लिकेशंस के साथ एक लाइसेंसिग सौदा किया है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक ब्लॉगपोस्ट के जरिए गुरुवार को इस बात की जानकारी दी है।

गुरुवार से शुरू हुए गूगल के इस प्रोजेक्ट के बारे में कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया  कि ‘गूगल न्यूज शोकेस’ (Google News Showcase) की शुरुआत सबसे पहले जर्मनी और ब्राजील में होगी। कंपनी ने इसके लिए Der Spiegel, Stern, Die Zeit जैसे समाचार पत्रों के साथ समझौता किया है। इसके अलावा कंपनी ने ब्राजील में Folha de S.Paulo, Band और Infobae के साथ पार्टनरशिप की है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ब्राजील, कनाडा और जर्मनी के लगभग 200 पब्लिकेशंस ने इस प्रॉडक्ट के लिए करार किया है। इस प्रॉडक्ट को बेल्जियम, भारत और नीदरलैंड में भी पेश किया जाएगा।

यह न्यूज शोकेस फिलहाल केवल एंड्रॉयड पर उपलब्ध गूगल न्यूज एप पर उपलब्ध होगा। लेकिन, जल्द ही इसे आईओएस के लिए भी लॉन्च किया जाएगा। गूगल की योजना इस फीचर को गूगल डिस्कवर एप और गूगल सर्च में भी देने की है।  

इस प्रॉडक्ट में पब्लिशर्स अपनी स्टोरी चुन सकेंगे और उन्हें प्रेजेंट कर सकेंगे। यहां पब्लिशर्स फीचर आर्टिकल्स पर भी फोकस करेंगे, जिनमें टाइमलाइन, बुलेट्स और रिलेटेड आर्टिकल्स शामिल होंगे। इसके अलावा, इनमें दूसरे कॉम्पोनेंट जैसे- वीडियो, ऑडियो और डेली ब्रीफिंग भी होंगे।

इसी साल जून में गूगल ने ‘गूगल न्यूज शोकेस’ का ऐलान किया था, जो गूगल की न्यूज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (News Licensing Programme) का हिस्सा होगा। कंपनी का कहना है कि ये रीडर्स और पब्लिशर्स के फायदे के लिए बनाया गया है।

न्यूज इंडस्ट्री में फेसबुक के साथ गूगल विज्ञापन के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है। विज्ञापनों का यह हिस्सा पहले न्यूज इंडस्ट्री के पब्लिशर्स के पास जाता था। गूगल का यह कदम पब्लिशर्स को यह बताने के लिए है कि वह उच्च गुणवत्ता की पत्रकारिता के लिए और संकट से गुजर रहे इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए वह भुगतान करने को तैयार है।

इसमें शामिल पब्लिशर इस बात का निर्णय कर सकेंगे कि प्लेटफॉर्म पर उनका कंटेंट किस तरह दिखाई दे। ऐसे लोग जिन्होंने सब्स्क्रिप्शन नहीं लिया है, उनके लिए पेड कंटेंट को मुफ्त उपलब्ध कराने के लिए कुछ पब्लिशर्स को गूगल भुगतान करेगा।

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अपने एम्प्लॉयीज के कार्यों से खुश ShareChat, की बड़ी घोषणा

एक तरफ जहां, लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान की वजह से कई कंपनियों से कॉस्ट कटिंग और छंटनी की खबरें सामने आईं, वहीं अब एक ऐसी कंपनी भी है, जो अपने एम्प्लॉयीज के किए गए कार्यों से काफी खुश है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2020
Share Chat

एक तरफ जहां, लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान की वजह से कई कंपनियों से कॉस्ट कटिंग और छंटनी की खबरें सामने आईं, वहीं अब एक ऐसी कंपनी भी है, जो ऐसे समय पर अपने एम्प्लॉयीज के किए गए कार्यों से काफी खुश है। ये कंपनी है भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (ShareChat), जिसने अब अपने कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का फैसला किया है।

लिहाजा शेयरचैट ने अपने कर्मचारियों को कंपनी के प्रति उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को देखते हुए ही उन्हें पुरस्कृत करने के लिए ईसॉप (कर्मचारी शेयर विकल्प) पूल में 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर और अतिरिक्त बढ़ाए हैं। इसके साथ ही अब शेयरचैट का कुल ईसॉप (ESOP) पूल $ 3.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया है।

साथ ही कंपनी ने ईसॉप रखने वाले अपने मौजूदा कर्मचारियों को 50 प्रतिशत बोनस देने की भी घोषणा की है। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘ईसॉप योजना को वेतनमान वाले प्रत्येक कर्मचारी के लिए बढ़ाया गया है, जिसमें प्रशासनिक कर्मचारी भी शामिल हैं। ‘शेयरचैट’ और हाल ही में लॉन्च किए गए शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म ‘मौज’, दोनों ने ही जोरदार वृद्धि हासिल की। लिहाजा एम्प्लॉईज की कड़ी मेहनत को मान्यता देने के लिए यह निर्णय लिया गया।’

बयान के मुताबिक यह योजना मौजूदा कर्मचारियों पर लागू होगी, जो 30 जून 2020 तक कंपनी के वेतनमान पर थे। इस समय शेयरचैट में 400 से अधिक कर्मचारी हैं।

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खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत है ये मीडिया माध्यम, सर्वे में हुआ खुलासा

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ नाम से आज अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट न्यूज कंज्यूमर्स के सर्वे पर आधारित है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
media

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ नाम से आज अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट न्यूज कंज्यूमर्स के सर्वे पर आधारित है और विभिन्न न्यूज मीडिया की विश्वसनीयता के साथ-साथ ‘फेक न्यूज’ की समग्र धारणा को मापता है। यह सर्वे देश के केंद्र शासित प्रदेशों और 17 राज्यों के 2,400 शहरी समाचार उपभोक्ताओं (Urban news consumers ) (15 वर्ष से ऊपर) के बीच आयोजित किया गया था।

इस रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकला है कि शहरी भारत में समाचार विश्वसनीयता सूचकांक (News Credibility Index) केवल 39% है। अर्थात, 61% समाचार उपभोक्ता फेक न्यूज को देखते हैं, जोकि चिंताजनक है।

62% पर मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक (Media Credibility Index) के साथ प्रिंट मीडिया सबसे ऊपर है। इसके बाद रेडियो नंबर आता है और फिर टेलीविजन का। डिजिटल मीडिया की तुलना में पारंपरिक मीडिया (Traditional media) की अधिक विश्वसनीयता है। वहीं सोशल मीडिया की बात की जाए तो खबरों के लिए सबसे विश्वसनीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्विटर है, जिसकी विश्वसनीयता सूचकांक 53% है।

रिपोर्ट और इसके निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए ऑरमैक्स मीडिया के फाउंडर व सीईओ शैलेश कपूर ने कहा कि फेक न्यूज से संबंधित चिंताएं विश्व स्तर के साथ-साथ भारत में भी चर्चा का विषय रही है। गुजरते वक्त के साथ फेक न्यूज की  समस्या बहुत ही बड़ी होती जा रही है। भारत में यह सर्वे  इस बढ़ती चिंता को मापने के लिए आयोजित किया गया था। साथ ही यह समझने के लिए भी कि क्या कुछ मीडिया दूसरों की तुलना में बेहतर कर रही हैं। हम हर छह महीने में इन मेजर्स को समझने की योजना बनाते हैं, ताकि हम यह तुलना कर सकें कि फेक न्यूज के बारे में समाचार उपभोक्ताओं की धारणा समय के साथ कैसे बदल रही है।

समाचार विश्वसनीयता सूचकांक (News Credibility Index) और मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक (Media Credibility Index) समाचार उपभोक्ताओं (खबरें देखने वालों का) का एक प्रतिशत है, जो फेक न्यूज को एक बड़ी परेशानी के तौर पर नहीं देखते हैं।

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हेट स्पीच के मामलों में कार्यवाही को लेकर फेसबुक इंडिया के MD अजीत मोहन ने कही ये बात

‘फेसबुक इंडिया’ के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन का कथित तौर पर कहना कि यह प्लेटफॉर्म हेट स्पीच यानी घृणा फैलाने वाली सामग्री से किसी तरह का फायदा नहीं उठाता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 16 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2020
Ajit Mohan

‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन का कथित तौर पर कहना कि यह प्लेटफॉर्म हेट स्पीच (hate speech) यानी घृणा फैलाने वाली सामग्री से किसी तरह का कोई फायदा नहीं उठाता है। एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार के साथ बातचीत के दौरान अजीत मोहन का कथित रूप से यह भी कहना था, ‘यह न हमारे लिए अच्छा है और न इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के लिए। हेट स्पीच से कहीं कोई फायदा नहीं है।’

इस दौरान मोहन ने राजनीतिक नेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा नफरत भरे संदेश पोस्ट करने पर प्रतिबंध नहीं लगाने के आरोपों को लेकर भी अपनी बात रखी। यह पूछे जाने पर कि बीजेपी नेता पर बैन लगाने में देरी क्यों की गई, मोहन ने कथित तौर पर कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर किसी को बैन किए जाने का मुद्दा ‘जटिल’ है और विवाद बढ़ने पर फेसबुक बैन लगाने की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर चुका था।  

अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (Wall Street Journal) द्वारा यह लिखे जाने के बाद कि सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के दबाव में नेता को बैन नहीं किया गया, फेसबुक ने इस महीने की शुरुआत में उक्त नेता पर बैन लगा दिया था।

करीब 20 महीने पूर्व फेसबुक में इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाले अजीत मोहन ने कथित रूप से कहा कि पिछले तीन सालों में घृणा फैलाने वाली सामग्री पर अंकुश लगाने की दिशा में फेसबुक की प्रतिबद्धता दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जून तिमाही में इस प्लेटफॉर्म से घृणास्पद कंटेंट के 22 मिलियन से अधिक पीस हटाए गए हैं।

बता दें कि इससे पहले अजीत मोहन ने फरवरी में दिल्ली दंगों के दौरान नफरत फैलाने वाले कंटेंट को हटाने में नाकाम रहने के मामले में दिल्ली विधानसभा समिति द्वारा जारी समन को लेकर मंगलवार को कथित तौर पर वापस लेने के लिए बोल दिया था।

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कोविड-19 से प्रभावित छोटे व्यवसायों की कुछ इस तरह मदद करेगी फेसबुक

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोविड-19 से प्रभावित हुए छोटे व्यवसायों को सपोर्ट करने की अपनी मुहिम के तहत 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान (grant) की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 15 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2020
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ (Facebook) ने कोविड-19 (COVID-19) से प्रभावित हुए छोटे व्यवसायों को सपोर्ट करने की अपनी मुहिम के तहत 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान (grant) की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत भारत समेत 30 से ज्यादा देशों के 30 हजार से ज्यादा छोटे व्यवसायों को शामिल किया गया है। फेसबुक की ओर से इस कार्यक्रम के लिए अब भारत में आवेदन मांगे गए हैं।

अनुदान को प्राप्त करने के लिए पात्रता की शर्तों के अनुसार, बिजनेस ने कोविड-19 की चुनौतियों का सामना किया हो। एक जनवरी तक उसमें दो से 50 एम्प्लॉयीज कार्यरत रहे हों। वह बिजनेस एक साल से ज्यादा समय से चल रहा हो। फेसबुक इंडिया के ऑफिस के आसपास-नई दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में स्थित होना चाहिए। आवेदन 21 सितंबर तक भेजे जा सकते हैं।

फेसबुक के अनुसार, यह कार्यक्रम प्रभावित व्यवसायों को उनके कार्यबल (वर्कफोर्स) को मजबूत रखने में मदद करने के साथ ही किराए और परिचालन लागतों में मदद करेगा। इसके साथ ही ज्यादा कस्टमर्स से जुड़ने में भी सहायक होगा।

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फेसबुक इंडिया में इस बड़े पद पर जिम्मेदारी निभाएंगे अरुण श्रीनिवास

पिछले कुछ महीनों के दौरान फेसबुक में मार्केटिंग, पार्टनरशिप, कम्युनेशंस और अन्य वर्टिकल्स में सीनियर लेवल पर कई नियुक्तियां की गई हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
Arun Srinivas

‘फेसबुक’ (Facebook) इंडिया ने अरुण श्रीनिवास को डायरेक्टर (ग्लोबल बिजनेस ग्रुप) के पद पर नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों के दौरान फेसबुक में मार्केटिंग, पार्टनरशिप, कम्युनेशंस और अन्य वर्टिकल्स में सीनियर लेवल पर कई नियुक्तियां की गई हैं।

इस पद पर अपनी भूमिका के तहत श्रीनिवास देश के प्रमुख ब्रैंड्स, एजेंसियों के साथ भारत के प्रमुख चैनल्स में फेसबुक के राजस्व में वृद्धि करने के लिए कंपनी के रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देंगे।श्रीनिवास को OLA, Unilever और Reebok जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड्स के साथ सेल्स और मार्केटिंग में काम करने का करीब 24 साल का अनुभव है।

इसके अलावा वह निवेश फर्म WestBridge Capital Partners के साथ भी काम कर चुके हैं, जहां पर वह कंज्यूमर वर्टिकल का नेतृत्व करते थे। फेसबुक इंडिया से पहले वह OLA में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और OLA Mobility में ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

श्रीनिवास ने अपने करियर की शुरुआत Reebok के साथ की थी और फिर Unilever का रुख कर लिया, जहां पर उन्होंने 15 साल से ज्यादा समय तक अपनी भूमिका निभाई। श्रीनिवास ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’, कोलकाता से पढ़ाई की है।

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संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए फेसबुक इंडिया के MD अजीत मोहन, उठाए गए ये मुद्दे

इन दिनों राजनीतिक पूर्वाग्रह के आरोपों का सामना कर रही है सोशल मीडिया क्षेत्र की यह दिग्गज कंपनी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2020
Ajit Mohan

सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए 'फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन कथित रूप से संसदीय समिति के सामने उपस्थित हुए। बताया जाता है कि डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सिक्योरिटी और यूजर्स के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति के प्रमुख व कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने फेसबुक और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों को बुलाया था।

थरूर ने अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि तेलंगाना में बीजेपी के एक नेता की विभाजनकारी पोस्ट पर फेसबुक ने कार्रवाई नहीं की। इस मौके पर बीजेपी एमपी निशिकांत दुबे ने कहा कि कांग्रेस संसदीय पैनल पर अपना एजेंडा आगे बढ़ा रही है और उन्होंने इस संसदीय पैनल के चेयरमैन पद से थरूर के इस्तीफे की मांग की।

बता दें कि फेसबुक पर इन दिनों राजनीतिक पूर्वाग्रह के आरोप लग रहे हैं। इसी के तहत कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वॉल स्ट्रीट जनर्ल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए फेसबुक और वॉट्सऐप पर अलोकतांत्रिक होने का आरोप लगाया था। वहीं, बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के CEO को लिखा पत्र, लगाए ये गंभीर आरोप

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2020
ravishsankar

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। फेसबुक की राजनीतिक दलों से साठगांठ के आरोपों के बीच उनका ये पत्र काफी अहम है। उन्होंने अपने पत्र में भारत की राजनीतिक प्रक्रिया में फेसबुक के कर्मचारियों के कथित हस्तक्षेप को उजागर किया है।

जुकरबर्ग को भेजे पत्र में रविशंकर प्रसाद ने लिखा कि फेसबुक इंडिया की टीम राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव करती है और यहां के कर्मचारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि फेसबुक इंडिया की टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक खास राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं।

उन्होंने यह भी लिखा कि फेसबुक पर कर्मचारियों का एक समूह अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ मिलकर भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की छवि को धूमिल कर रहा है और विचारधाराओं के प्रति उसका झुकाव दिखाई दे रहा है।

प्रसाद ने पत्र में लिखा कि साल 2019 के चुनाव से पहले फेसबुक इंडिया मैनेजमेंट ने दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के फेसबुक पेज डिलीट कर दिए या उनकी रीच कम कर दी गई। फेसबुक को ‘ट्रांसनेशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म’ कहते हुए प्रसाद ने लिखा कि फेसबुक को संतुलित, निष्पक्ष और विविध विचारधाराओं वाला होना चाहिए।  उन्होंने लिखा कि फेसबुक को संतुलित व निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि किसी भी संस्थान में काम करने वाले व्यक्तियों की पसंद और नापसंद हो सकती है, लेकिन एक संस्थान की पब्लिक पॉलिसी पर इसका कोई असर नहीं होना चाहिए।

पत्र में उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं यह बताना चाहता हूं कि हाल ही में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां फेसबुक का उपयोग अराजक और कट्टरपंथी लोगों द्वारा किया गया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करना, लोगों की भर्ती करना और हिंसा के लिए उन्हें एकत्रित करना रहा है। हालांकि, अभी तक हम ऐसे लोगों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। क्या इस तरह की हरकत उन्हीं स्वार्थी समूहों द्वारा की गई है, जो भारत में राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं?

पत्र में अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल'  के आरोपों को खारिज कर दिया गया, जिसमें दावा किया गया था कि जब चुनावों में कांग्रेस की हार हुई थी तो भारत में फेसबुक के शीर्ष पदाधिकारी अंखी दास ने आंतरिक कार्यालयी संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब तारीफ की थी और कहा था कि यह तीस साल की कड़ी मेहनत का परिणाम है। खबर में दावा किया गया है कि अंखी दास ने 2014 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत से एक दिन पहले उनके सोशल मीडिया कैंपन को लेकर पोस्ट किया था।

रविशंकर प्रसाद ने लिखा, 'इस मामले को लेकर मैंने कई बार फेसबुक मैनेजमेंट को मेल किया लेकिन कोई रेस्पॉन्स नहीं आया। यह कतई स्वीकार नहीं है कि करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर व्यक्ति विशेष की राजनीतिक प्रतिबद्धता को थोपा जाए।'

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फेसबुक इंडिया की महिला अधिकारी को अमेरिकी अखबार ने कुछ यूं ‘कठघरे’ में किया खड़ा

‘फेसबुक इंडिया’ की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टंर अंखी दास द्वारा भेजे गए इंटरनल मैसेज को लेकर अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2020
Ankhi Das

राजनीतिक पूर्वाग्रह से जुड़े विवादों में घिरीं ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास द्वारा भेजे गए इंटरनल मैसेज को लेकर अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में अखबार के हवाले से कहा गया है कि अंखी दास ने 2014 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत से एक दिन पहले उनके सोशल मीडिया कैंपन को लेकर पोस्ट किया। इन मैसेज में उनके सोशल मीडिया कैंपेन को लेकर कथित रूप से पीएम मोदी की तारीफ की गई थी।

मीडिया में चल रहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ का कहना है कि अन्य में में अंखी दास ने चुनाव में कांग्रेस की हार पर लिखा, 'आखिरकार, तीस साल के जमीनी काम से भारत को स्टेट सोशलिज्म से मुक्ति मिल गई।' वहीं, दूसरी तरफ जीत के लिए नरेंद्र मोदी को स्ट्रॉन्गमैन बताया गया, जो सत्तारूढ़ दल के प्रति दास के पूर्वाग्रह का स्पष्ट संकेतक था। वहीं, फेसबुक ने अंखी दास का बचाव करते हुए कहा है कि इन मैसेज का गलत संदर्भ समझा गया है। फेसबुक के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है, ‘यह संदेश राजनीतिक पूर्वाग्रह को प्रदर्शित नहीं करते हैं।’

बता दें कि पिछले दिनों ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट में अंखी दास का जिक्र करते हुए कहा था कि फेसबुक भारत में बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच के मामलों में नियम में ढील बरतता है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि फेसबुक और वॉट्सऐप इनके कब्जे में हैं, जिसके जरिये ये नफरत और फेक न्यूज फैलाते हैं।

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ऐसा हुआ तो मीडिया व यूजर्स को न्यूज शेयर करने से रोक देगा फेसबुक

सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया में मीडिया संस्थानों व यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म और इंस्टाग्राम पर न्यूज शेयर करने से रोक देने की धमकी दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2020
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सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया में मीडिया संस्थानों व यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म और इंस्टाग्राम पर न्यूज शेयर करने से रोक देने की धमकी दी है। फेसबुक का कहना है कि यदि देश की सरकार ने डिजिटल दिग्गजों पर किसी तरह का शुल्क लागू किया तो ये कार्रवाई की जा सकती है। 

फेसबुक का कहना है कि यह हमारी पहली पसंद नहीं है लेकिन जो देश में किया गया है उसके परिणाम में यह कदम उठाया गया है। 

बता दें कि इस माह की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गूगल और फेसबुक को उनके न्यूज से जेनरेट होने वाले रेवेन्यू को ऑस्ट्रेलिया की मीडिया के साथ साझा करने के निर्देश दिए थे।

वहीं दूसरी तरफ हाल ही में ऐसी खबरें सामने आईं थीं कि सर्च इंजन गूगल भी ऑस्ट्रेलिया में अपनी फ्री सेवाएं बंद करने वाला है। गूगल ने चेताया है कि ऑस्ट्रेलिया से मुफ्त सर्च सेवाओं को वापस लिया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया ने जब से गूगल से ये कहा है कि उसे न्यूज कंटेंट का इस्तेमाल करने के लिए स्थानीय मीडिया संस्थानों को पैसे का भुगतान करना चाहिए, तब से ऑस्ट्रेलियाई सरकार और गूगल के बीच तनातनी बनी हुई है।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का यह आदेश दुनिया में इस तरह का पहला कदम है जो गूगल और फेसबुक जैसे डिजिटल दिग्गजों के खिलाफ उठाया नियामक और राजनीतिक रूप से मोर्चा खोल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जोश फ्राइडेनबर्ग ने  बताया कि दोनों बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को देश की मीडिया के साथ चलना होगा।  

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