सोशल मीडिया जहां ट्रेलर है, वहीं पुस्तकालय पूरी फिल्म है: पूरन डावर

पुरानी पीढ़ियां किताबों को अपना दोस्त समझती थी.....

Last Modified:
Monday, 09 April, 2018
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

पुरानी पीढ़ियां किताबों को अपना दोस्त समझती थी। बुजुर्गों की मानें तो पहले के लोग दिन के कई घंटे पुस्तकालय में गुजार देते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी किताबों से बहुत दूर हो चुकी है। इस पीढ़ी के कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्होने पुस्तकालय का दरवाजा तक नहीं देखा। बदलते दौर में आज लाइब्रेरी को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसके लिए पाठक को सजग रहना है, इसी उद्देश्य से आराधना संस्था द्वारा पालीवाल पार्क स्थित जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी में शनिवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 

किताबें झांकती हैं, बंद अलमारी के शीशों से.. गुलजार द्वारा कहीं गई यह लाइनें आज के दौर में सार्थक साबित हो रही हैं। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे शहर के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी पूरन डावर ने कहा कि सोशल मीडिया जहां एक ट्रेलर की तरह है,  तो वहीं पुस्तकालय पूरी फिल्म की मानिंद है। उन्होंने नगर निगम से इसके सरंक्षण हेतु अंगीकृत होने पर बाह्य व्यवस्था आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन और आंतरिक व्यवस्था आराधना संस्था को देने की भी घोषणा की। श्री डावर ने कहा कि एक जमाना था जब घंटाघर और लाइब्रेरी हर शहर की शान होती थी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से जहां आप किसी भी विषय पर सतही जानकारी प्राप्त करते हैं, तो किताबों के जरिए आप गहन अध्ययन कर पूरा ज्ञान अर्जित करते हैं।

संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए संस्थाध्यक्ष पवन आगरी ने कहा कि एनरॉयड फ़ोन और इंटरनेट की दुनियाँ में लाइब्रेरी अपने पाठकों की बाट जोह रही है, जो कि चिंताजनक है।

संगोष्ठी का बेहतरीन संचालन करते हुए संस्था महासचिव डॉ ह्रदेश चौधरी ने कहा कि लाइब्रेरी में युवा पीढ़ी का रुझान रुचिकर किताबों के माध्यम से ही संभव है।

मुख्य वक्ता के रूप में पधारे ऑनलाइन मीडिया एक्सपर्ट अभिषेक मेहरोत्रा ने कहा कि आज सोशल मीडिया और लाइब्रेरी एक दूसरे के पूरक बन चुके हैं और जो खतरा पुस्तकों पर इंटरनेटी दुनिया की वजह से मंडरा रहा था वो काफी हद तक अब टल चुका है। आज की सोशल मीडिया के दौर में मैं मानता हूं कि हमारी पढ़ने की आदत खत्म नहीं हुई है, सिर्फ रूप बदला है। पर जब यहां विषय लाइब्रेरी का है तो मेरा मानना है कि जैसा कि डार्विन थ्योरी कहती है कि सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट। तो अब समय आ चुका है कि हमारी पारंपरिक लाइब्रेरीज को मॉर्डन और अपडेट होना पड़ेगा। देश में कुछ पुस्तकालय ऐसे भी रहे हैं, जिन पर हम सभी को नाज़ होना चाहिए. मसलन करनाल का पाश पुस्तकालय, जिसे पुलिसकर्मी आम लोगों के लिए चलाते थे. यह अपने आप में ऐसा इकलौता पुस्तकालय था, जिसके एक हजार आजीवन सदस्यों में से सात सौ सदस्य पुलिस वाले थे. इसे करनाल पुलिस के जवानों ने उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए अपने चार साथियों की याद में बनाया था. बाद में यहाँ एक मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर काफी विवाद हुआ. ठीक ऐसे ही रेड लाइट एरिया में रहने वाली महिलाओं के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर में एक महिला द्वारा जुगनू नामक पुस्तकालय चलाया जाता था. कहने का मतलब है कि जब व्यक्तिगत प्रयासों से इतने अच्छे पुस्तकालयों को आकार दिया जा सकता है, तो फिर सरकार के पास तो पर्याप्त संसाधन हैं.

आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के के.सी.जैन के कहा कि लाइब्रेरी अध्ययन करने के साथ-साथ विचार विमर्श का भी केंद्र होती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया गंभीर चिंतन करने का प्लेटफॉर्म नहीं है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजेन्द्र मिलन और विशिष्ट अतिथि के सी जैन ने पुस्तकालय संरक्षण हेतु की जा रही आराधना संस्था की इस पहल की सराहना की।

धन्यवाद ज्ञापन संस्था उपाध्यक्ष संजय बैजल ने किया। इस अवसर पर संस्था के घरों से एकत्रित करीब 200 साहित्यिक पुस्तकें भी जॉन्स पब्लिक लाइब्रेरी को उनके लाइब्रेरियन राजीव सिंह के माध्यम से दान दी गईं।

संगोष्ठी में आनंद राय, डॉ यशोयश, शैलेन्द्र नरवार, धनवान गुप्ता, ज्ञानेश शर्मा, अंजलि स्वरूप, रश्मि गुप्ता, रेनू गर्ग, संगीता अग्रवाल, दीप्ति भार्गव, अलका अग्रवाल, अर्चना सिंघल, मीना सिंह, पूनम द्विवेदी, कुसुम रावत, मीरा देवी, नीलम गुप्ता, प्रेमलता मिश्र, भावना मेहरा, ललिता करमचंदानी, पूजा अग्रवाल, मनीषा बघेल प्रमुख रूप से मौजूद थे।


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ZEE5 लाया ऐसा शॉर्ट वीडियो शेयरिंग ऐप, भूल जाएंगे TikTok

भारत में 59 चाइनीज ऐप्स को बैन होने कर दिया गया है, जिसके बाद अब ‘मेड इन इंडिया’ ऐप्स की  की डिमांड तेजी से बढ़ी है

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2020
ZEE5-HIPI

भारत में 59 चाइनीज ऐप्स को बैन होने कर दिया गया है, जिसके बाद  अब ‘मेड इन इंडिया’ ऐप्स की  की डिमांड तेजी से बढ़ी है। इसी कड़ी में अब ओटीटी प्लेटफॉर्म‘जी5’ (ZEE5) ने अपना शॉर्ट वीडियो शेयरिंग ऐप ‘हाईपाई’ (HiPi) लॉन्च कर दिया है।

बताया जा रहा है कि यह ऐप पूरी तरह से भारतीय है। इसे TikTok का एक बेहतर ऑप्शन माना जा रहा है।

ZEE5 ने इस ऐप को केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मूवमेंट के तहत देश में डेवलप किया है। ZEE5 के इस शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म ऐप HiPi में कई सारे फीचर्स दिए गए हैं।

HiPi ऐप के नाम को लेकर ZEE5 का कहना है कि यह यूथफुल और केयरफ्री विजन को रिफ्लेट करता है। यह ऐसा प्लेस है जिसमें यूजर अपनी क्रिएटिविटी और फ्रीडम एक्सप्रेस कर सकते हैं। HiPi ऐप में यूजर्स बिना किसी डर के निर्विवाद और अनौपचारिक रूप से अपने पोस्ट शेयर कर सकते हैं। ZEE5 की HiPi ऐप में यूजर्स अपनी क्रिएटिविटी को एक्सप्रेस कर इस प्लेटफॉर्म में टैलेंट को एक्सप्रेस कर सकते हैं। यह ऐप यूजर्स को अपनी क्रिएटिविटी के साथ-साथ स्टारडम को भी दिखाने का एक बेहतर प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है।

कंपनी का कहना है कि HiPi में बहुत से एक्साइटिंग फीचर्स है, जिनकी मदद से यूजर्स अपनी क्रिएटिविटी को दिखा सकते हैं। केंद्र सरकार की तरफ से टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप्स को भारत में बैन किए जाने के बाद HiPi ऐप यूजर्स के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। HiPi ऐप में यूजर्स टिकटॉक की तरह 15 सेकेंड से 90 सेकेंड के वीडियो पोस्ट कर सकते हैं। ZEE5 ने इस ऐप सुपर इंटरटेनमेंट ऐप नाम दिया है जो डिजिटल वीडियो के लिए वन स्टॉप डेस्टिनेशन होगी।

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फेसबुक कुछ यूं ओरिजनल खबरों को देगी प्राथमिकता

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक अब विश्वसनीय खबरों को बढ़ावा देने के लिए मूल खबरों को प्राथमिकता देगी

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2020
facebook

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक अब विश्वसनीय खबरों को बढ़ावा देने के लिए मूल खबरों को प्राथमिकता देगी। एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए उसने इस बात की जानकारी दी है। ब्लॉग में बताया गया है कि वह अब अपनी न्यूज फीड में उच्चतर पारदर्शी लेखकों के जरिए मूल रिपोर्टिंग को रैंक करेगी। यह फीचर केवल न्यूज कंटेंट पर लागू होगा।

पोस्ट में कहा गया है कि मूल रिपोर्टिंग दुनिया भर के लोगों को सूचित करने, एक न्यूज स्टोरी को ब्रेक करने, गहन खोजबीन के साथ रिपोर्ट बनाने, नए तथ्यों और डेटा को उजागर करने, संकट के समय में महत्वपूर्ण अपडेट साझा करने या फिर आंखो देखी रिपोर्ट प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पोस्ट में कहा गया है कि अच्छी पत्रकारिता वर्षों की मेहनत और विशेषज्ञता से आती है और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि फेसबुक पर इसे प्राथमिकता दी जाए।

फेसबुक किसी खास विषय पर तमाम आर्टिकल्स को देखकर और अक्सर ओरिजिनल सोर्स के रूप में बताए गए आर्टिकल्स की पहचान कर इस कदम को सुनिश्चित करेगी।

पोस्ट में कहा गया है कि वे पब्लिशर्स जो अपनी वेबसाइट्स पर ऑथर्स और एडिटोरियल स्टाफ के बारे में जानकारी (उनका पूरा नाम) अपडेट नहीं करते हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। फेसबुक ने कहा कि ऐसा पाया गया है कि जो पब्लिशर्स इस तरह की जानकारी शेयर नहीं करते हैं, उनमें अकसर पाठकों की विश्वसनीयता की कमी देखने को मिलती है। फेसबुक पर लोग क्या देखना पसंद नहीं करते हैं, इसके बारे में फेसबुक ने बताया कि लोगों को ऐसे कंटेंट या विज्ञापन से नफरत होती है, जो क्लिक करवाकर किसी वेबसाइट पर ले जाकर जाल में फंसाते हैं।

फेसबुक ने इस मुहिम की शुरुआत अंग्रेजी खबरों से की है। हालांकि इसके बाद भविष्य में अन्य भाषाओं में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा।

ब्लॉग में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कदम से मूल खबरों और रिपोर्टिंग का डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ेगा। फेसबुक ने इस बात को लेकर आश्वस्त किया है कि इस तरह के अपडेट्स के परिणामस्वरूप डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान न्यूज पब्लिशर्स को न्यूज फीड में किसी भी तरह का कोई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

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चीन को झटका, Tik Tok, UC ब्राउजर समेत 59 चाइनीज ऐप्स बैन

भारत ने देश में 59 चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस लिस्ट में जिन 59 चाइनीज ऐप को प्रतिबंधित किया गया है

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
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भारत ने देश में 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस लिस्ट में जिन 59 चाइनीज ऐप्स को प्रतिबंधित किया गया है, उनमें Tik Tok, UC ब्राउजर समेत कई ऐप्स शामिल हैं। कहा गया है कि ये ऐप्स भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक हैं।

इन ऐप की वजह से डेटा पर सुरक्षा को लेकर चिंता जतायी जा रही थी। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन ऐप्स को बैन करने का फैसला लिया है।

प्रतिबंधित किए गए ऐप्स की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं-

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शेफ विकास खन्ना ने BBC एंकर की बोलती कुछ यूं की बंद, जवाब के लोग हो गए कायल

भारतीय मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से हटकर इन दिनों समाज सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
bbc-vikas

भारतीय मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से हटकर इन दिनों समाज सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अमेरिका में रहते हुए, उन्होंने भारत में लॉकडाउन के दौरान गरीबों की मदद की। अपने 'फीड इंडिया’ अभियान के तहत वे अमेरिका से भारत में हजारों गरीबों को भोजन प्रदान कर रहे हैं। हालाकिं इन दिनों विकास खन्ना सुर्खियों में हैं और इसकी वजह बीबीसी को दिया उनका एक इंटरव्यू है, जिसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस इंटरव्यू में ‘भूख’ को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उनके द्वारा दिए जवाब की प्रशंसा कर रहे हैं, क्योंकि उनका जवाब सुनने के बाद एंकर की ही बोलती बंद हो गई।

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में विकास खन्ना अपने इस अभियान के बारे में बात कर रहे थे। इसी बीच बीबीसी एंकर ने उनसे पूछा, ‘अब आप एक प्रसिद्ध शेफ के रूप में जाने जाते हैं। आपने ओबामा के लिए कुक किया। आपने विश्व प्रसिद्ध शेफ गॉर्डन रामसे के शो में अभिनय किया। भले ही आपकी यात्रा एक गरीब परिवार से शुरू हुई हो, लेकिन आपने बहुत कुछ हासिल किया है। क्या आपके अंदर भूख के प्रति जागरूकता भारत में भूख को देखकर आई है?  

इस सवाल पर विकास खन्ना ने जवाब दिया कि उनकी भूख की समझ भारत से नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क से आई है। उन्होंने कहा, ‘नहीं, मेरी भूख की समझ भारत से नहीं आई क्योंकि मैं अमृतसर में पैदा हुआ और पला-बढ़ा। वहां बड़े कम्युनिटी किचन (लंगर) में सबको खाना मिलता है। जहां पूरा शहर खा सकता है, लेकिन मेरी भूख की समझ न्यूयॉर्क से आई। एक ब्राउन किड के लिए अमेरिका में ऊंचे सपनों के साथ आना आसान नहीं है। 9/11 के बाद हमें जॉब मिलना और भी कठिन था। जब मैं न्यूयॉर्क आया तो संघर्ष के दिनों में यहां मैंने भूख का सही मतलब जाना। 

अब उनके इसी जवाब की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें लोग विकास खन्ना के शांत तरीके से दिए गए जवाब की तारीफ कर रहे हैं।

 

 

 

 

 

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अब बोलने पर काम करेगा ट्विटर का ये नया फीचर

फिलहाल यह सुविधा सिर्फ आईओएस फोन पर सीमित लोगों के लिए उपलब्ध है, जल्द ही इसे सभी आईओएस फोन धारकों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा

Last Modified:
Friday, 19 June, 2020
Twitter

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर लेकर आया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अब ऑडियो ट्वीट्स भी पोस्ट कर सकते हैं। प्रत्येक वॉइस ट्वीट में 140 सेकेंड्स तक का ऑडियो पोस्ट किया जा सकता है। फिलहाल यह सुविधा आईओएस (IOS) फोन धारकों के लिए शुरू की गई है।

ट्विटर ने एक ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से इस नए फीचर की घोषणा की है। इस ब्लॉग में कहा गया है, ‘हम एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहे हैं। इसमें आप अपनी आवाज में ट्वीट पोस्ट कर सकते हैं। अपनी आवाज में ट्वीट करना लगभग वैसे ही होगा जैसे आप टेक्स्ट ट्वीट करते हैं। इसके लिए सबसे पहले स्टार्ट पर जाना होगा, फिर ट्वीट कंपोजर ओपन करना होगा और नए आइकॉन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपको बॉटम में रिकॉर्ड बटन के साथ आपका प्रोफाइल फोटो दिखाई देगा। इस बटन को दबाकर आप अपनी आवाज रिकॉर्ड कर सकते हैं।’

ब्लॉग के अनुसार, प्रत्येक वॉइस ट्वीट में 140 सेकेंड्स तक का ऑडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है। यदि किसी को और ज्यादा कुछ कहना है तो इसके लिए भी सुविधा दी गई है। इसके तहत पहले ट्वीट की 140 सेकेंड्स की समय सीमा पूरी होने पर अपने आप एक नया ट्वीट स्टार्ट हो जाएगा। एक बार आपकी बात पूरी होने पर ‘Done’ बटन पर क्लिक कर आप रिकॉर्डिंग को खत्म कर सकते हैं और ट्वीट करने के लिए कंपोजर स्क्रीन पर वापस जा सकते हैं। लोग आपके वॉइस ट्वीट को अन्य ट्वीट्स के साथ उनकी टाइम लाइन पर देख सकेंगे। इस ट्वीट को सुनने के लिए इमेज पर क्लिक करना होगा। इसके बाद यह आपकी टाइम लाइन में नीचे एक नई विंडो में सुनाई देने लगेगा। आप अपने फोन पर कोई दूसरा काम करते हुए भी इसे सुन सकते हैं।

बताया जाता है कि वॉइस ट्वीट की यह सुविधा अभी सिर्फ आईओएस फोन पर सीमित लोगों के लिए उपलब्ध है, लेकिन आने वाले दिनों में आईओएस फोन धारक कोई भी व्यक्ति अपनी आवाज में ट्वीट कर सकेगा।

 

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Google में प्रभाकर राघवन का कद बढ़ा, मिली ये जिम्मेदारी

गूगल के एडवर्टाइजिंग बिजनेस की कमान अब जेरी डिस्कलर (Jerry Dischler) के हाथों में होगी, जो राघवन को रिपोर्ट करेंगे

Last Modified:
Monday, 08 June, 2020
Prabhakar Raghavan

जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ (Google) ने प्रभाकर राघवन को प्रमोट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें अब हेड (सर्च और असिस्टेंट) बनाया गया है। अपनी नई भूमिका में एडवर्टाइजिंग और कॉमर्स बिजनेस की जिम्मेदारी भी उनके तहत होगी। बताया जाता है कि वह बेन गोम्स (Ben Gomes) की जगह ये जिम्मेदारी संभालेंगे, जिन्हें कंपनी में नई भूमिका दी जा रही है।   

राघवन ने वर्ष 2012 में गूगल जॉइन किया था। राघवन को वर्ष 2018 में कंपनी का हेड (एडवर्टाइजिंग और कॉमर्स बिजनेस) नियुक्त किया गया था। इस भूमिका में उनके पास सर्च, डिस्प्ले और वीडियो एडवर्टाइजिंग, एनालिटिक्स, शॉपिंग, पेमेंट्स और ट्रैवल सेगमेंट की देखरेख की जिम्मेदारी थी। एडवर्टाइजिंग बिजनेस की कमान संभालने से पहले राघवन वाइस प्रेजिडेंट (Google Apps और  Google Cloud) के पद पर काम कर रहे थे।

गूगल के एडवर्टाइजिंग बिजनेस का काम अब जेरी डिस्कलर (Jerry Dischler) संभालेंगे और वह राघवन को रिपोर्ट करेंगे। जेरी फिलहाल कंपनी के एडवर्टाइजिंग बिजनेस की प्रॉडक्ट और इंजीनियरिंग टीम की कमान संभाल रहे हैं।

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जानें, फेसबुक की नीतियों को लेकर क्या बोले CEO मार्क जुकरबर्ग

पुलिस हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद अमेरिका में नस्लीय तनाव फैला हुआ है।

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
Facebook

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि वह कंपनी की नीतियों की समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव भी करेंगे। हालांकि, जुकरबर्ग ने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है, लेकिन यह आश्वासन जरूर दिया है कि कंटेंट के प्रति अपने दृष्टिकोण को लेकर फेसबुक और अधिक पारदर्शी होगी। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पोस्ट्स के खिलाफ किसी तरह का कदम न उठाने को लेकर फेकबुक को तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि पुलिस हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद अमेरिका में नस्लीय तनाव फैला हुआ है। ऐसे में ट्रंप ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ (Black Lives Matter) आंदोलन के प्रदर्शनकारियों को एक पोस्ट में ‘ठग’ कहा था। उनका यह भी कहना था कि जब लूट शुरू होती है, तब शूटिंग शूरू होती है (When the looting starts, the shooting starts)।

उस समय जहां जुकरबर्ग ने कंपनी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन का एक कारण बताया, वहीं फेसबुक के कई कर्मचारियों ने इस पर अपना विरोध जताया था। इनमें से कई लोगों ने तो अपना इस्तीफा तक सौंप दिया था। मार्क जुकरबर्ग द्वारा की गई फेसबुक पोस्ट को आप यहां देख सकते हैं।

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गूगल ने बताई वजह, क्यों हटाए Play Store से कुछ Apps

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ ने पिछले दिनों अपने प्ले स्टोर से दो ऐप्स ‘मित्रों’ (Mitron) और ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ (Remove China Apps) को हटा दिया है।

Last Modified:
Friday, 05 June, 2020
Google Play

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ ने पिछले दिनों अपने प्ले स्टोर से दो ऐप्स ‘मित्रों’ (Mitron) और ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ (Remove China Apps) को हटा दिया है। बताया जाता है कि ‘मित्रों’ ऐप पर कॉपी किए जाने के आरोप लग रहे थे, वहीं, ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ की ओर से गूगल की कुछ नीतियों का उल्लंघन किया जा रहा था।

अपने इस कदम को लेकर गूगल को सोशल मीडिया पर तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। इस बारे में गूगल के वाइस प्रेजिडेंट (एंड्रॉयड और गूगल प्ले) समीर सामत (Sameer Samat) की ओर से एक स्टेटमेंट जारी किया गया है।  

उन्होंने कहा है, ‘गूगल प्ले की ग्लोबल पॉलिसियों को इस तरह बनाया गया है कि कंज्यूमर्स को एक सुरक्षित अनुभव मिल सके और डेवलपर्स को अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिल सके। इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में हमने टेक्निकल पॉलिसी के उल्लंघन करने पर एक विडियो ऐप को हटा दिया है। हमारे पास डेवलपर्स की मदद के लिए एक स्थापित प्रक्रिया है, ताकि वे इन मुद्दों को हल कर सकें और अपने ऐप्स को दोबारा से इस प्लेटफॉर्म पर ला सकें। हमने डेवलपर को कुछ गाइडेंस दिया है। एक बार वे इन मुद्दों को हल कर लेते हैं तो ऐप को वापस प्ले स्टोर पर लिया जा सकता है।’

उनका कहना है कि जब कोई ऐप अन्य ऐप को हटाने की पैरवी करता है या इस तरह की हरकतों को बढ़ावा देता है, तो गूगल इसे डेवलपरों और उपभोक्ताओं के अपने समुदाय के हितों के प्रतिकूल मानती है। समीर सामत की ओर से यह भी कहा गया है कि नीतियों का उल्लंघन करने पर गूगल प्ले की ओर से हाल ही में कई ऐप्स को हटाया गया है। उनका यह भी कहना है कि हमने पूर्व में लगातार कई देशों में अन्य ऐप्स के खिलाफ इस नीति को लागू किया है, ऐसा ही हमने यहां पर भी किया है।

 

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सीनियर रिपोर्टर की दिलेरी पर ट्रोलर्स ने उठाए सवाल, तमाम पत्रकारों ने लगा दी क्लास

जितेंद्र दीक्षित को उनकी बेहतरीन खबरों के कई बार सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन इस बार वे अपनी ही कवरेज को लेकर ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
jitendra

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र को एक और मुसीबत का सामना करना पड़ा। दरअसल 129 साल बाद पहली बार मुंबई में इतना भयानक तूफान (निसर्ग) आया, जिसने करीब पांच घंटे तक मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में तबाही मचाई। बताया जा रहा है कि करीब 120 किलोमीटर की रफ्तार से आए इस तूफान से महाराष्ट्र में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में इस तरह के तूफान के बीच रिपोर्टिंग कर पाना पत्रकारों के लिए बेहद मुश्किल भरा होता है।

वहीं दर्शकों तक निसर्ग तूफान के पल-पल की खबर को कवर करने के लिए एबीपी न्यूज ने अपने 16 रिपोर्टर मैदान पर उतार दिए, जिनमें से एक थे एबीपी न्यूज के जाने-माने पत्रकार जितेंद्र दीक्षित। वैसे तो जितेंद्र दीक्षित को उनकी बेहतरीन खबरों के कई बार सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन इस बार वे अपनी ही कवरेज को लेकर ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए और उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जाने लगा। दरअसल, इस वीडियो में वे बहुत ही तेज हवाओं के बीच निसर्ग तूफान की जानकारी लोगों तक पहुंचाते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि खुद को संभाले रख पाना उनके लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा था। उनके पैर लड़खड़ा रहे थे।

लिहाजा ट्रोलर्स ने उनकी इस जोखिम भरी रिपोर्ट को ट्रोल कराने के लिए बैकग्राउंड में खड़े कुछ लोगों का सहारा लिया और यह बताने की कोशिश की कि पीछे खड़े लोग साधारण तरीके से काम कर रहे हैं, लेकिन रिपोर्टर कटी पतंग की तरह रिपोर्ट कर रहे हैं। हालांकि जैसे ही पहले एक ट्रोलर ने ये ट्वीट किया वह तमाम पत्रकारों के निशाने पर आ गए।

 

 

 

 

जवाब देने के लिए इस बीच जितेंद्र दीक्षित का एक और वीडियो ट्विटर पर शेयर किया गया, जो लाइव ऑन एयर होने से पहले का है, जिसमें जितेंद्र लड़खड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं और वे खुद को संभालने के लिए पास में खड़ी कार का सहारा लेते हैं और बार-बार लाइव रिपोर्टिंग के लिए खुद को तैयार करते हैं।

अरब सागर से निसर्ग का आगमन बेहद तूफानी और डरावना था। ऐसे में रिपोर्टर ने बेहद ही दिलेरी से अपनी रिपोर्टिंग को अंजाम दिया, जोकि सराहनीय था।  

एबीपी न्यूज के मैनेजिंग एडिटर रजनीश आहूजा ने निसर्ग की कवरेज कर रही टीम की तारीफ करते हुए ट्वीटर पर लिखा, ‘घरों में बैठकर आलोचना करना आसान है, लेकिन वे लोग कभी नहीं समझ पाएंगे कि इन स्थितियों में रिपोर्टिंग करना कितना मुश्किल है। महाराष्ट्र में एबीपी की टीम ने शानदार काम किया है।’  

पत्रकार मृत्युंजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘कोरोना से पीड़ित है उनका इलाज संभव है पर जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नही उनका क्या  इलाज? तबियत खराब, शुगर लेवल की कमी, बिना खाए पिए सुबह 7 से रात 8 बजे तक जोश के साथ ग्राउंड पर डटे रहे। जितेंद्र दीक्षित आप पर गर्व है व आप टीवी पत्रकारों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं।

हालांकि इस पर ‘साम टीवी’ के एडिटर नीलेश खरे ने लिखा, ‘जितेंद्र मेरे पुराने साथी हैं, 20 साल से मैंने उनकी पत्रकारिता देखी है। जान की बाजी लगाकर उन्होंने कई खबरें समाज तक पहुंचाई हैं। तथ्यों को बिना जाने इस प्रकार से उन पर टिप्पणी करना गलत है और मूर्खतापूर्ण।  मृत्युंजय आप सही कह रहे हैं। हम सब जितेंद्र दीक्षित के साथ हैं।

वहीं ‘आजतक’ की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने ट्वीट किया, ‘जिन्हें मैं जानती हूं उनमें से एक हैं जितेंद्र दीक्षित, जो जान की बाजी लगाकर पैशन के साथ अपना काम करते हैं। अच्छी स्टोरी के लिये रात-दिन में फर्क नहीं करते। ऐसे रिपोर्टर के बारे में टिप्पणी करने वाले लोगों को मूर्ख कहा जा सकता है, जिनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।’

जवाब में वरिष्ठ पत्रकार निखिल कुमार दुबे ने लिखा, ‘भौतिकी विज्ञान की पढ़ाई इसीलिए जरूरी है। अतार्किक बातें न लिखने में मदद मिलती है। जितेंद्र की जगह और पीछे काम करने वाले कि जगह का फर्क बयान का आधार बदल देगी। जितेंद्र दीक्षित खबर ही करते हैं, वो नाटकीयता से दूर रहते हैं।

पत्रकार ब्रजेश राजपूत ने ट्वीट किया, ‘तेज हवाओं में खुले में खड़े होकर लाइव रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल होती है, 2014 में हमने हुद हुद तूफान के दौरान देखा था जब घर में रहना सुरक्षित नहीं तो बाहर रहना जान जोखिम में डालना है।

 

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फेसबुक के वर्किंग कल्चर में हो सकता है ये बड़ा बदलाव!

लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि घर से अथवा दूर बैठकर काम करना जल्द एक बढता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
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इन दिनों पूरी दुनिया कोरोनावायरस (कोविड-19) के कहर का सामना कर रही है। कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर तमाम कंपनियां अपने एंप्लाईज से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करा रही हैं। इन सबके बीच अब सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि वर्ष 2030 तक कंपनी के करीब आधे एंप्लाईज घरों से ही काम करने लगेंगे। फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान उन्होंने यहां तक कहा कि कंपनी अपने तमाम एंप्लाईज को स्थायी रूप से घर से काम करने की इजाजत देगी।

जुकरबर्ग की ओर से यह भी कहा गया है, ‘हम अपने काम को अब इस तरह शिफ्ट कर रहे हैं कि लोग चुन सकते हैं कि वे कहां से बेहतर काम कर सकते हैं। हम इस दिशा में तकनीकी रूप से काम करना जारी रखे हुए हैं। एक बार यह महामारी गुजरने के बाद मुझे उम्मीद है कि दूर बैठकर अथवा घर से काम करना जल्द ही एक बढ़ता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है।’

फेसबुक की ओर से एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि नई टेक्नोलॉजी हमें आपस में जुड़े रहने और प्रॉडक्टिव यानी उत्पादक बने रहने में मदद कर रही है। बता दें कि ‘गूगल’ अपने एंप्लाईज को इस पूरे साल घर से काम करने की छूट दे रही है। ‘अमेजॉन’ और ‘माइक्रोसॉफ्ट’ भी इस साल कम से कम अक्टूबर तक ऐसा करना जारी रखेंगी।

 

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