फेसबुक-गूगल जैसी कंपनियों पर अब लगेगा ये नया टैक्स

फेसबुक, गूगल और अमेजॉन जैसी कंपनियों पर अब नया टैक्स लगाने की...

Last Modified:
Tuesday, 30 October, 2018
digital service tax

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

फेसबुक, गूगल और अमेजॉन जैसी कंपनियों पर ‘डिजिटल सर्विस टैक्स’ लगाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूके सरकार ने यूके में रेवेन्यू जुटा रहीं ऐसी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर यह टैक्स लगाने का निर्णय लिया है।  

बताया जाता है कि सोमवार को जारी शीतकालीन बजट में ‘Exchequer’ के चांसलर फिलिप हैमंड (Philip Hammond) ने दो प्रतिशत टैक्स लगाने की घोषणा की है। इस मामले में सलाह-मशविरा की समय अवधि पूरी होने के बाद अप्रैल 2020 में यह प्रभाव में आ जाएगा। यह टैक्स सिर्फ सर्च इंजन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस से जुटाए गए रेवेन्यू पर लगाया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैक्स यूके के छोटे स्टार्ट-अप पर नहीं लगाया जाएगा, बल्कि ऐसी डिजिटल सर्विस कंपनियों पर लगाया जाएगा, जो साल भर में कम से कम 500 मिलियन पौंड का ग्लोबल रेवेन्यू जुटाती हैं।

बताया जाता है कि यह निर्णय इस बहस के बीच लिया गया है कि यूएस की टेक्नोलॉजी कंपनियां कई बिलियन पौंड कमाई करने के बावजूद यूके में बहुत कम टैक्स का भुगतान करती हैं। इस समय कंपनियां यूके में हुए प्रॉफिट पर ही टैक्स का भुगतान करती हैं। आरोप है कि कम टैक्स देने के लिए टेक्नोलॉजी कंपनियां कम प्रॉफिट दिखाती हैं।

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फेसबुक तैयार कर रही है नया फीचर, इस तरह करेगा काम

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स को नई सुविधा देने जा रही है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स को नई सुविधा देने जा रही है। इसके तहत फेसबुक न्यूज फीड और स्टोरी फीचर को आपस में मिलाकर एक नया फीचर तैयार कर रही है। ‘स्नैपचैट’ और ‘इंस्टाग्राम’ की तरह यह अपने प्लेटफॉर्म पर एक ही फीचर की सुविधा देगी।

दरअसल, ऐप रिसर्चर जेन मनचुन ने दोनों फीचर को मिलाकर एक सिंगल इंटरफेस को एंड्रॉयड यूजर्स के लिए तैयार किया था। फिलहाल फेसबुक न्यूज फीड और स्टोरी दो अलग-अलग फीचर हैं, जिसे यूजर्स इस्तेमाल कर रहे हैं। न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नए डिजायन में स्टोरी और न्यूज फीड को मिलाकर एक विकल्प दिया जाएगा, जिसमें टेक्स्ट, पिक्चर, विडियो और स्पॉन्सर्ड पोस्ट नजर आएंगी।

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क्या आपने अभिसार शर्मा का नोट बांटने वाला विडियो देखा है, जानें हकीकत

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से...

Last Modified:
Wednesday, 27 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में अभिसार एक बुजुर्ग के हाथ में कुछ देते हुए नज़र आ रहे हैं, जिसे उनके आलोचक पैसे करार दे रहे हैं। विडियो को अब तक सैकड़ों बार शेयर किया जा चुका है और इसे लेकर पत्रकार पर लगातार हमले भी हो रहे हैं।

देखें ये फर्जी वायरल विडियो-

हालांकि, असलियत कुछ और ही है। जिस विडियो को वायरल किया जा रहा है, वो अभिसार के पूरे विडियो का एक हिस्सा मात्र है। इसमें जानबूझकर केवल उसी भाग को दिखाया गया है, जिसमें अभिसार बुजुर्ग किसान के हाथ में कुछ थमा रहे हैं। चूंकि वायरल विडियो में यह स्पष्ट नहीं है कि वो पैसे हैं या कुछ और इसलिए आलोचक यह दावा करने में लगे हैं कि अभिसार ने पैसों के बल पर लोगों को सरकार के खिलाफ बोलने पर विवश किया। वैसे, अभिसार शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर पूरा विडियो पोस्ट करके यह साफ़ कर दिया है कि उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने अपने ट्वीट में उस यूजर का भी जिक्र किया है, जिसके इशारे पर यह सबकुछ चल रहा है।

अभिसार ने लिखा है ‘दोस्तों यह है पूरा विडियो, इसमें यह साफ़ दिख रहा है कि ग्रामीण ने मुझे न्यूज़पेपर की एक क्लिपिंग दी, जिसे मैंने बाद में उसे वापस कर दिया, लेकिन MODIfiedVikas समर्थित ट्रोल्स फर्जी प्रोपेगंडा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। (कोई आश्चर्य नहीं) फर्जी चौकीदारों झूठ से बचो’। अभिसार द्वारा पोस्ट किये गए विडियो को देखने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित ग्रामीण अख़बार में प्रकाशित गन्ना किसान और मिल मालिकों से जुड़ी एक खबर की कटिंग अभिसार को देता है, जिसे वह ज़ूम करके भी दिखाते हैं। इसके बाद वह कैमरे की तरफ मुड़ते हैं और अख़बार की कटिंग वापस ग्रामीण को थमा देते हैं।

विडियो के साथ छेड़छाड़ करने वाले शख्स ने बड़ी ही चालाकी से केवल उसी भाग को काटकर अलग किया, जिसमें अभिसार न्यूज़ पेपर कटिंग वापस करते नज़र आ रहे हैं, ताकि यह प्रसारित किया जा सके कि उन्होंने किसान को सरकार पर सवाल उठाने के लिए रिश्वत दी है। वहीं, विकास पांडे (MODIfiedVikas) नामक यूजर ने भी अभिसार के आरोप का जवाब दिया है। विकास ने लिखा है ‘इसके बॉस यूट्यूबर ने मुझे आईटी सेल का हेड बताया और अब इसके मुझे अपने दुश्मनों का सरदार। और कितने अच्छे दिन चाहिए मित्रों’? इतना ही नहीं, उसने यहां तक लिखा है कि अभिसार को कांग्रेस से एक हजार रुपए मिले होंगे और उन्होंने ग्रामीण को केवल 100 दिए, एक झटके में 900 का घोटाला’। जिस पर अभिसार ने ट्वीट किया है ‘तुम्हारे पास अपने दावे को सिद्ध करने के लिए कोई सबूत है? मैं मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के मामले में तुम्हारे करीब आ रहा हूं, यह मानहानि और उत्पीड़न है। मेरे पास सबूत है कि वो न्यूज़पेपर की क्लिपिंग है, उम्मीद है तुम्हारे पास भी है कि ये पैसा है’?

इस फर्जी विडियो को लेकर कई पत्रकार अभिसार शर्मा के समर्थन में उतर आये हैं। न्यूज़24 की एंकर साक्षी जोशी ने ट्वीट किया है ‘अभिसार आपने असली विडियो सामने लाकर बहुत अच्छा किया, ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए।’ इसी तरह लेखिका प्रेरणा बक्शी ने लिखा है ‘बीजेपी आईटी सेल को इस तरह एक ईमानदार पत्रकार की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी खबर फैलाने पर शर्म आनी चाहिए।’ दरअसल, अभिसार शर्मा लोकसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश में जनता का मिजाज समझने गए थे। इसी दौरान ग्रामीणों से बातचीत में एक किसान ने उन्हें अख़बार में प्रकाशित खबर की क्लिपिंग दिखाई, जिसके बाद यह विवाद खड़ा हो गया।

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गच्चा खा गईं मधु पूर्णिमा किश्वर, अब हो रही छीछालेदर

अपने एक ट्वीट को लेकर लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर घिर

Last Modified:
Monday, 25 March, 2019
Madhu Kishwar

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

अपने एक ट्वीट को लेकर लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर घिर गई हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल, किश्वर ने हाल ही में तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के लोकसभा चुनावों को लेकर जारी किये गए घोषणापत्र के संबंध में ट्वीट किया था।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था कि घोषणा-पत्र के पेज 85 और 112 के अनुसार अतिक्रमण की गई वक्फ संपत्तियों को वक्फ बोर्ड को फिर से सौंप दिया जाएगा, जबकि मंदिर की जमीनों पर अतिक्रमण के मामले में उन्हें नियमित करके अतिक्रमणकारियों को स्वामित्व सहित हस्तांतरित किया जाएगा। जायज है इस ट्वीट से यह बताने की कोशिश की गई कि डीएमके हिंदू विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में जब डीएमके समर्थक या नेताओं को इसका पता चला तो उन्होंने मधु किश्वर की आलोचना शुरू कर दी। इसके अलावा आम ट्विटर यूजर्स भी उन पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाने लगे।

कई लोगों ने किश्वर का ध्यान इस ओर खींचा। उन्हें बताया गया कि पार्टी की वेबसाइट पर घोषणा पत्र की जो कॉपी मौजूद है, उसमें केवल 76 पृष्ठ हैं। ऐसे में पेज 85 और 112 का कोई सवाल ही नहीं उठता, जिसका जिक्र लेखिका ने अपने ट्वीट में किया है। डीएमके प्रवक्ता मनुराज एस ने भी किश्वर के ट्वीट को फेक न्यूज़ करार देते हुए लिखा है, ‘घोषणा पत्र में पेज 85 और 112 हैं ही नहीं, आपको स्पष्टीकरण देना चाहिए।’ इसी तरह प्रवक्ता सरावनन अन्नादुरई ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘हमारे 2019 के घोषणापत्र में 112 नहीं केवल 76 पृष्ठ हैं। यह ट्वीट नफरत फैलाता है, इसलिए चौकीदार मधु किश्वर से अनुरोध है कि इसे हटा दें।’

वहीं फैक्ट चेकिंग साइट ऑल्ट न्यूज़ ने भी अपनी पड़ताल में पाया है कि डीएमके के 2019 के घोषणापत्र में कहीं भी वक्फ बोर्ड या मंदिर भूमि पर अतिक्रमण का जिक्र नहीं है। धार्मिक मामले से संबंधित एकमात्र खंड घोषणा-पत्र के आखिर में पेज 69 पर है, जिसका शीर्षक है ‘धर्मों और धार्मिक सद्भाव की रक्षा’।

दरअसल, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और मंदिर की जमीनों के संरक्षण की बात तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले 2016 के पार्टी घोषणापत्र में की गई थी। पेज 84 पर ‘अल्पसंख्यकों का कल्याण’ नामक शीर्षक तले कहा गया था कि ‘वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अतिक्रमणों से मुक्त कराया और संरक्षित किया जाएगा’। जहां तक मंदिर की जमीनों के संरक्षण का सवाल है, 2016 के घोषणापत्र के पेज 111 पर ‘हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग’ शीर्षक के तहत साफ कहा गया था कि ‘मंदिर की भूमि पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्राप्त होने वाले किराए को विनियमित करने और एकत्र करने के अलावा, मंदिरों की खाली भूमि के संरक्षण के लिए एक भूमि बैंक की स्थापना की जाएगी। साथ ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में उच्चस्तरीय समिति का गठन उन लोगों की मांग पर विचार करने के लिए किया जाएगा, जो मंदिर की जमीन को कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदने की पेशकश कर रहे हैं’। प्रारंभिक तौर पर तो ऐसा ही लगता है कि मधु पूर्णिमा किश्वर ने डीएमके के 2016 वाले घोषणापत्र की संपादित या कहें कि छेड़छाड़ की गई कॉपी को वायरल होते देखा और उसे ट्वीट कर दिया, यदि उन्होंने सही-गलत का पता लगाने का प्रयास किया होता, तो न उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता और न ही अपने बचाव में दलीलें पेश करनी पड़तीं।

 

समाचार4मीडिया सभी से अपील करता है कि किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें। सोशल मीडिया पर फर्जी ख़बरें एक बीमारी की तरह फैल रहीं हैं और चुनावी मौसम में इस संक्रमण के प्रसार की आशंका और भी बढ़ जाती है, लिहाजा सही-गलत जाने बिना कुछ भी शेयर-पोस्ट करने से बचें। अन्यथा बेवजह आपको शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी।

‘ऑल्ट न्यूज़’ की खबर को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

https://www.altnews.in/madhu-kishwar-makes-false-claim-quotes-page-112-of-a-76-page-dmk-manifesto/

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चुनावी जंग में राजनीतिक दलों ने फेसबुक को कुछ यूं बनाया ‘हथियार’

आजकल सोशल मीडिया का दौर है और कोई भी इस प्लेटफॉर्म पर पीछे...

Last Modified:
Friday, 22 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

आजकल सोशल मीडिया का दौर है और कोई भी इस प्लेटफॉर्म पर पीछे नहीं रहना चाहता है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव का दौर शुरू होने के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राजनीति अथवा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों वाले विज्ञापनों की तादात बढ़ती जा रही है। अंग्रेजी अखबार ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) में छपी एक खबर के अनुसार, फरवरी से लेकर अब तक फेसबुक पर इस तरह के 30000 से ज्यादा विज्ञापन दिए गए हैं। फेसबुक की विज्ञापन लाइब्रेरी रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर 6.54 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया गया है। इस रिपोर्ट में लाइब्रेरी के साप्ताहिक डाटा के साथ उन विज्ञापनों का डाटा भी शामिल होता है, जो देश के लोगों द्वारा देखे गए हैं। बताया जाता है कि फेसबुक की इस कवायद का उद्देश्य विज्ञापन के मामले में पारदर्शिता को बढ़ाना है।  

इस रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी का इस लिस्ट में सबसे ऊपर नंबर है। राजनीतिक विज्ञापनों के मामले में ‘माय फर्स्ट वोट फॉर मोदी’ पेज सबसे आगे है। इस पर 2765 विज्ञापन हैं। दूसरे नंबर पर 2429 विज्ञापनों के साथ ‘भारत के मन की बात’ और तीसरे नंबर पर 2153 विज्ञापनों के साथ ‘नमो सपोर्टर्स’ है।  

विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा खर्च के मामले में ‘भारत के मन की बात’ पेज रहा। डाटा के अनुसार, फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापन पर खर्च होने वाले प्रत्येक छह रुपए में एक रुपए इस पर खर्च किया गया। पिछले सप्ताह भी इसके द्वारा सबसे ज्यादा खर्च किया गया था। 10 मार्च से 16 मार्च के बीच ‘भारत के मन की बात’ द्वारा 20 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किया गया।    

गौरतलब है कि फेसबुक डाटा इस बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराता है कि सबसे ज्यादा किसे सर्च किया गया। डाटा के अनुसार, भाजपा इस लिस्ट में पहले, कांग्रेस दूसरे स्थान पर है। तीसरे नंबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चौथे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम है। वहीं, ट्विटर के डाटा से पता चलता है कि पिछले सात दिन में कांग्रेस और बीजेपी के ऑफिशयल अकाउंट से कोई ट्वीट नहीं किया गया है।

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पुण्य प्रसून ने ट्वीट से बताई ‘डील’ की बात, पीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने का सुझाव!

मंगलवार की रात 8.53 मिनट पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक ट्वीट किया...

Last Modified:
Wednesday, 20 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
मंगलवार की रात 8.53 मिनट पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक ट्वीट किया, जिसे सुबह 11 बजे बाद सूर्या समाचार के उनकी विदाई को लेकर हो रही चर्चा का नैरिटिव बदलने की कोशिश माना जा रहा है। सवाल ये भी उठ रहा है कि सुबह 11 बजे की इस बात पर प्रसून ने करीब दस घंटे बाद काफी सोच-समझकर रिएक्ट किया है।

रात नौ बजे प्रसून अपना शो जय हिंद करते थे, पर कल ये शो तो नही हुआ, हां पर इसके टाइम पर एक ट्वीट जरूर किया गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। 
अपने इस ट्वीट के जरिए प्रसून लिखते हैं...

इस ट्वीट के बाद से प्रसून को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे में चर्चा ये भी है कि शायद विक्टिम फैक्टर के जरिए साहनुभूति बटोरने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

वैसे चैनल के मालिकान के बारे में ये बात मीडिया गलियारों में आम है कि वे अनप्रफेशनल है और इसीलिए कई संपादक उसके साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाए हैं। ऐसे में ये कहना कि सरकार के दवाब के चलते ऐसा हुआ है, बड़ा ही सामान्य सा तथ्य है  क्योंकि अगर ये ठीक है कि सरकार के दवाब के चलते ही पुण्य की पिछली नौकरी गई थी तो क्या पुण्य ने नए मालिकान को ये बताया नहीं था कि सरकार का दवाब उन पर आएगा, वो उसे झेलने के लिए तैयार रहें। क्या पुण्य प्रसून ने कोई ऐसा कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया था जिसके चलते इतनी जल्दी अगर उन्हें और उनकी टीम को निकाल जाएगा, तो एक बड़ा मुआवजा देना पड़ेगा। बड़ा सवाल ये भी है कि तब करीब 30 लोगों की टीम के साथ पुण्य यहां आए थे, तो क्या वो इतने कच्चे भरोसे के चलते यहां आए थे कि करीब डेढ़ महीने के अंदर ही उनकी लगभग पूरी टीम को 'विदाई पत्र' थमा दिया गया।

माना जा रहा है कि या तो पुण्य एक बार फिर से  'गच्चा' खा गए हैं, वो एक बार फिर मैनिजेरियल स्किल्स में फेल रहे या फिर इलेक्शन सीजन में टीवी पर दिखने के लालच में उन्हें कई तथ्यों पर आंखें मूंद ली थीं। अब असली मुश्किल उस टीम के लिए है, जो अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ कुछ बड़ा करने के चलते यहां आई थी। रिस्क तो था इसमें, पर ये रिस्क इतनी जल्दी हकीकत में बदल जाएगा, ये शायद किसी ने नहीं सोचा होगा।

इस मसले पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के एक ट्वीट के जवाब में लिखते हैं कि इसे शहादत और चौकीदार के डर का रंग ना दीजिए संजय जी !! पुण्य के जाने से पहले भी वो जगह पत्रकारों के लिए नहीं थी,ये सब जानते समझते हुए भी वो वहाँ गए।ऐसे ही वो पहले सहारा भी गए थे।वहा् से क्यों बाहर निकले?तब भी मोदी ही वजह थे क्या?हर बात को मोदी के नाम पर शहादत कहना सही नहीं है।

इसी क्रम में वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार अनंत विजय ने एक ट्वीट के जरिए अजीत अंजुम के ट्वीट  का संदर्भ देते हुए लिखा है कि अच्छा हुआ आपने त्वरित टिप्पणी कर दी अन्यथा कुछ लोग अघोषित आपातकाल का नैरेटिव बनाने में लगे थे।


मीडिया विश्लेषक अभिषेक श्रीवास्तव फेसबुक पर लिखते हैं कि मान लिया कि पुण्य प्रसून को एबीपी न्यूज़ से नरेंद्र मोदी के कहने पर निकलने पर मजबूर किया गया। मान लिया कि प्रसून को सूर्या समाचार से सरकार ने ही निकलवाया और मालिक ने इसके बदले करोडों की डील कर ली। मान लिया कि भारतीय मीडिया में पुण्यं प्रसून बाजपेयी इस वक्त सरकार की आंख में गड़ने वाला सबसे कीमती और सबसे मारक कांटा हैं। हम यह भी मान लेते हैं कि प्रसून आगे किसी और मंच से बोलेंगे तो उस मंच को भी सरकार ध्वस्तकरवा देगी। चलिए यह सब मान लिया? अब किया क्या जाए? मने, प्रसून क्या करें?

ऐसी भयावह स्थिति में उनके पास दो रास्ते? बचते हैं। पहला, स्वेच्छाे से संस्थाोगत पत्रकारिता से संन्यास ले लें। यह बैकट्रैक होगा। नकारात्मचक होगा। दूसरा रास्ता सकारात्मक है। जब यह माहौल बन ही चुका कि सरकार उन्हें  पत्रकारिता नहीं करने दे रही तो वे इस बात को लेकर व्यापक जनमानस के बीच जाएं और जनता को मीडिया पर सरकारी हमले की सच्चाई से अवगत करावें। इसके लिए मौसम भी अनुकूल है और दस्तूर भी।

मैं पुण्य प्रसून से सार्वजनिक रूप से मांग करता हूं कि वे बनारस से नरेंद्र मोदी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्यांशी के रूप में प्रतीकात्मक चुनाव लड़ें और लोगों को इस बहाने मीडिया की हकीकत से रूबरू करावें। इतना तो तय है कि यह चुनाव मोदी को हराने के लिए नहीं होगा क्योंकि मोदी को बनारस से हराना मुमकिन नहीं। हां, चुनाव के प्लेटफॉर्म का टैक्टिकल इस्तेमाल देश भर की जनता को एक संदेश देने के लिए ज़रूर किया जा सकता है कि असल लड़ाई इस देश में अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अभिव्यक्ति की पाबंदी, तानाशाही बनाम लोकतंत्र, की है।

इस मांग से यदि मित्रगण सहमत हैं तो बात को आगे बढ़ावें। नहीं सहमत हैं तो उसका वाजिब तर्क दें।
 

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FactCheck: Republic Tv पर रिटायर्ड मेजर के फर्जी विडियो की खुली पोल, जब सामने आई ये सच्चाई

अरनब गोस्वामी के सलाहकार और ‘रिपब्लिक टीवी’ के एंकर मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या पर फर्जी न्यूज़...

Last Modified:
Monday, 18 March, 2019
Fake News

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

अरनब गोस्वामी के ‘रिपब्लिक टीवी’ के एंकर मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या पर फर्जी न्यूज़ फैलाने का आरोप है। आर्या ने कुछ दिन पहले अपने ट्विटर हैंडल पर एक विडियो शेयर किया था, जिस पर काफी यूजर्स ने सवाल उठाये। हालांकि, मेजर आर्या पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उल्टा उन्होंने सवाल उठाने वालों को पाकिस्तानी कहकर बात टाल दी। जब विडियो पर ज्यादा बवाल हुआ, तो फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने इसकी पड़ताल की और परिणाम वही निकला, जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी। यानी मेजर आर्या विडियो की जो कहानी बयां कर रहे थे, वो पूरी तरह से गलत है।

गौरव आर्या ‘रिपब्लिक टीवी’ पर प्रसारित होने वाला शो ‘पेट्रीअट’ होस्ट करते हैं। इस शो में वह सेना और उससे जुड़े पहलुओं एवं गतिविधियों पर बात करते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने एक विडियो पोस्ट किया था, जिसे उन्होंने बलूचिस्तान का करार दिया था। विडियो में दिखाया गया था कि कमांडो कुछ लोगों को पीट रहे हैं, जिन्होंने सेना की वर्दी पहनी हुई है। आर्या ने कैप्शन में लिखा था कि 27 फरवरी को बलूच रिपब्लिक आर्मी के फ्रीडम फाइटरों ने बलूचिस्तान के मांड क्षेत्र में पाक सेना की 3 चौकियों पर हमला किया। हमला इतना भयानक था कि फ्रंटियर कॉर्प्स के सैनिक भाग खड़े हुए। उन्हें बाद में पाक आर्मी के एसएसजी द्वारा पकड़ा गया और बेरहमी से उनकी पिटाई की गई। देखें बिना कपड़ों के पाक आर्मी’।

 

जब यह विडियो तेजी से वायरल होने लगा तो कुछ लोगों ने मेजर को इस हकीकत से वाकिफ कराने का प्रयास किया कि जिस विडियो को वो बलूचिस्तान का बता रहे हैं, वो दरअसल पाकिस्तानी सैनिकों की ट्रेनिंग से जुड़ा है, लेकिन मेजर ने इसे अनसुना कर दिया। उल्टा उन्होंने सवाल उठाने वालों को एक तरह से पाकिस्तानी ही कह डाला। आर्या ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा कि ‘अज्ञानी पाकिस्तानी मेरे द्वारा पोस्ट किये गए विडियो पर टिप्पणी कर रहे हैं कि ये एसएसजी का प्रशिक्षण है, लेकिन ऐसा नहीं है। यातना सहने का प्रशिक्षण अत्यधिक तकनीकी प्रक्रिया है और इसमें अत्यधिक मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और भावनात्मक तनाव शामिल होता है। यह ऐसा नहीं है कि डंडा लिया और ठोक दिया’।

 

इसके बाद ऑल्ट न्यूज़ ने विडियो की पड़ताल शुरू और पाया कि यह विडियो काफी पहले से ही यूट्यूब पर है, जबकि आर्या उसे 27 फरवरी के बाद की घटना बता रहे हैं। यानी इस लिहाज से देखा जाये तो मेजर आर्या का दावा पूरी तरह से गलत है। ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट कहती है कि विडियो में दिखाए गए सभी सैनिक पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के कमांडो हैं, जो दूसरे सैनिकों को यातना सहने के अभ्यास का प्रशिक्षण दे रहे हैं। ऑल्ट न्यूज़ ने ‘SSG cammando training’ कीवर्ड्स से यूट्यूब पर खोज की तो पता चला कि यह विडियो 5 फरवरी 2019 को ‘Pak Army SSG training’ शीर्षक से पोस्ट किया गया था। जबकि गौरव आर्या ने दावा किया गया है कि यह विडियो  उन पाकिस्तानी सैनिकों की पिटाई की घटना से संबंधित है, जो 27 फरवरी को चौकी छोड़कर भाग गए थे। इस तरह से यदि आर्या का दावा सही है तो ये विडियो 5 फरवरी को कैसे अपलोड हो गया? इस विडियो के एक-एक फ्रेम को देखने पर ज्ञात होता है कि एक कमांडो की टी-शर्ट के पीछे ‘इंस्ट्रक्टर (instructor)’ शब्द लिखा हुआ है, जो एक तात्कालिक संकेत है कि यह एक प्रशिक्षण प्रक्रिया है। 

ऑल्ट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं-

https://www.altnews.in/major-gaurav-arya-tweets-misleading-video-defends-the-misinformation/

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बड़े टीवी पत्रकारों ने की अभद्र टिप्पणियां, महिला एंकर भी बीच में कूदीं

ये काफी दिलचस्प मामला है और पत्रकारिता के लिए शर्मिंदगी भरा भी...

Last Modified:
Monday, 18 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
ये काफी दिलचस्प मामला है और पत्रकारिता के लिए शर्मिंदगी भरा भी। एक दूसरे को पत्रकार सीधे तौर पर दलाल, सूअर जैसी गालियों से नवाज रहे हैं और ट्विटरत्ती मजे ले रहे हैं। ये वाकया टीवी9 भारतवर्ष के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी और 2014 के चुनावी कैम्पेन में मोदी का इंटरव्यू डीडी न्यूज के लिए लेने वाले एंकर अशोक श्रीवास्तव से जुड़ा है और झगड़े की जड़ में है चौकीदार।

मामला नरेन्द्र मोदी के चौकीदार कैम्पेन से जुड़ा है। जैसे ही ये कैम्पेन शुरू हुआ विनोद कापड़ी, अजीत अंजुम और संजीव पालीवाल ने मोदी के तथाकथित हितचिंतक पत्रकारों के खिलाफ ट्वीट करे शुरू कर दिए। विनोद कापड़ी ने एक ट्वीट में लिखा, ‘इंतज़ार है कि तमाम एंकर और रिपोर्टर भी अपने ट्विटर प्रोफ़ाइल में ‘मैं भी चौकीदार’ लिख कर साफ़ साफ़ बता ही दें कि वो इस चुनाव में खुल कर एक राजनैतिक दल के साथ खड़े हैं’।

इस ट्वीट पर अशोक श्रीवास्तव ने बिना नाम लिए कमेंट करते हुए लिखा, ’पर कुछ पत्रकार कुछ भी नहीं लिख सकते। क्योंकि "दलाल पत्रकार" लिखा हुआ अच्छा नहीं लगेगा‘।’ जवाब देने मैदान में कूद गईं विनोद की पत्नी और न्यूज 24 की एंकर साक्षी जोशी, जो आजकल अपना नाम ट्विटर पर ‘जागरूक मतदाता साक्षी जोशी’ लिख रही हैं। साक्षी ने अशोक को जवाब दिया, ‘तुम्हें लिखने की ज़रूरत नहीं। सबको पता है धंधा बनाकर रख दिया है’।

उसके बाद अशोक श्रीवास्तव ने कापड़ी की एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, ‘वैसे वो पत्रकार कौन था जिसे कुछ साल पहले एक फाइव स्टार होटल की पार्किंग में एक महिला एंकर के साथ आपत्तिजनक अवस्था में होटल के चौकीदारों ने पकड़ लिया था और फिर खूब धुनाई की थी ’। 

ये पढ़कर अब साक्षी जोशी अशोक श्रीवास्तव की वॉल पर भी आ गईं और आते ही चेतावनी भरा मैसेज लिख डाला, ‘Name with proof or face defamation ashok Shrivastava . I am waiting.’। 

ऐसे में एक ट्विटरत्ती ने लिखा, ‘Madam aaj aap ki poll khul gayi। तो साक्षी ने जवाब दिया, ‘Vaise hum husband wife hain. Aapko ye poll khulna lagta hai! Go n check what r u parents doing right now!’।

इधर विनोद कापड़ी ने अशोक की इसी ट्वीट को रिट्वीट करते हुए सीधे सीधे लिख डाला, ‘तुम जैसे चारण, चाटुकार और सरकार के टुकड़ों में पलने वाले पत्रकार झूठी ख़बरें ही फैला सकते है और यही करते रहेंगे। लगे रहो। इसके बाद कोई संवाद नहीं,as George Bernard shaw said: “ I learned long ago, never to wrestle with a pig. You get dirty, and besides, the pig likes it. “। 

साथ में साक्षी जोशी भी उतर आईं और विनोद की वॉल पर लिखा, ‘’ Good decision. I think u must file defamation against this pig. And he is doing services for govt in the guise of a journalist. Laga reh bhai. Par ticket nahi milegi. Tere se pehle bahot hain line mein’’।

अब अशोक श्रीवास्तव इसके बाद खामोश हैं और विनोद-साक्षी भी अपनी अपनी बात लिखकर खामोश हो गए हैं, लेकिन ट्विटरत्ती मैदान में हैं और तीनों की ही जमकर छीछालेदर कर रहे हैं। 
 

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फोटो कहीं फेक तो नहीं, पहचान करेगा वॉट्सऐप का ये नया फीचर

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या बढ़ती जा रही है। हालांकि, इससे निपटने के लिए...

Last Modified:
Friday, 15 March, 2019
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

आज के दौर में फेक न्यूज की समस्या बढ़ती जा रही है। हालांकि, इससे निपटने के लिए तमाम कवायद भी की जा रही है। कुछ इसी तरह की कवायद करते हुए इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ‘वॉट्सऐप’ फर्जी जानकारी को पकड़ने के लिए ‘सर्च इमेज’ टूल लेकर आ रहा है। ‘हिन्दुस्तान’ में छपी खबर के अनुसार, यह टूल उपयोगकर्ता को फोटो सत्यापित करने की सुविधा देगा।

तकनीकी जानकारी देने वाली वेबसाइट वॉट्सऐप बीटा इंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी सर्च इमेज फीचर पर काम कर रही है। उसकी मदद से उपयोगकर्ता अपनी मौजूदा चैट से सीधे गूगल पर इमेज को आसानी से खोज पाएंगे। बताया जाता है कि चैट में आई तस्वीर को चुनने के बाद आपको यह फीचर दिखेगा। यह फीचर फिलहाल स्टेबल वर्जन में उपलब्ध नहीं है, बल्कि यह अभी बीटा वर्जन में है। वॉट्सऐप सर्च फीचर इमेज को सर्च करने के लिए गूगल एपीआई का इस्तेमाल करेगा।

पूरी दुनिया में फेक न्यूज और गलत जानकारी की वजह से कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं। इसके कारण वॉट्सऐप और फेसबुक कड़ी आलोचना का सामना कर चुके हैं। इसके बाद फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप ने अखबार, रेडियो और टीवी चैनल पर विज्ञापन देकर फर्जी जानकारी को फैलाने से रोकने की सलाह दी थी। अब उसके बाद वॉट्सऐप ने ‘सर्च इमेज’ नामक यह अगला कदम उठाया है, ताकि गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके।

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जानें, क्यों मोदी ने अरुण पुरी,संजय गुप्त,रजत शर्मा,सुधीर चौधरी,अंजना कश्यप,रूबिका को किया टैग

लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ जहां सियासी पार्टियां अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं...

Last Modified:
Wednesday, 13 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।.

लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ जहां सियासी पार्टियां अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं आम जनता को वोटिंग के लिए प्रेरित करने के अभियान भी शुरू हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद भी यह बीड़ा उठाया है। पीएम की तरफ से न केवल लोगों से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की जा रही है, बल्कि उन्होंने इस अभियान में मीडिया से भी योगदान देने को कहा है।

बुधवार को मोदी ने मीडिया सहित लगभर हर क्षेत्र की हस्तियों को ट्वीट किये। नए साल पर प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेकर विपक्ष के निशाने पर आईं एएनआई की संपादक स्मृति प्रकाश, टाइम्स नाउ की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार और न्यूज़ पोर्टल ‘स्वराज्य’ के सीईओ प्रसन्ना विश्वनाथन को किये गए अपने ट्वीट में मोदी ने लिखा है ‘मैं आप सब से 2019 के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए लोगों को जागरूक करने का अनुरोध करता हूं। आप जनता की आवाज़ हैं और मतदान जागरुकता में आपका योगदान देश की 130 करोड़ आबादी के लिए लाभकारी होगा।’

अपने एक अन्य ट्वीट में पीएम ने कुछ पत्रकारों को टैग करते हुए कहा है ‘मैं रूबिका लियाकत, अंजना ओम कश्यप,  सुधीर चौधरी, राहुल कंवल और रिपब्लिक टीवी की टीम से यह अपील करता हूं कि वो मतदान को लेकर जागरूकता फैलाएं और लोगों खासकर युवाओं को बताएं कि वोट डालना कितना ज़रूरी है।’

इसके बाद मोदी ने मीडिया जगत के कुछ बड़े नामों से भी इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा, टाइम्स ग्रुप के एमडी विनीत जैन, ज़ी ग्रुप प्रमुख सुभाष चंद्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया है ‘मैं मीडिया जगत के दिग्गजों से कहना चाहता हूं कि बड़े मतदान प्रतिशत की ज़रूरत को रेखांकित करें। ऐसा करने से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी और हमारे राष्ट्र के विकास को बल मिलेगा’।

 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दैनिक जागरण के एडिटर इन चीफ संजय गुप्ता, इंडिया टुडे के चेयरमैन अरुण पुरी, नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी, मात्रभूमि और ईनाडू जैसे मीडिया संस्थानों से भी लोकतंत्र के पर्व में आम जनता की भागीदारी बढ़ाने में सहयोग देने की अपील की है। हालांकि, पीएम की इस अपील में जिन पत्रकारों के नाम शामिल नहीं हैं, उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर मजाक भी किया जा रहा है। द स्किन डॉक्टर नामक यूजर ने बरखा दत्त की फोटो को इस कैप्शन के साथ शेयर किया है ‘तुझे याद न मेरी आई, किसी से अब क्या कहना..’।


 

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बॉलिवुड एक्ट्रेस को नेटवर्क18 के एडिटर अमिश देवगन ने यूं दिखाया आईना

कई सेलेब्रिटीज ऐसे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पसंद नहीं और वो पुलवामा की घटना के बाद हुई...

Last Modified:
Thursday, 07 March, 2019
Amish Devgan

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

कई सेलेब्रिटीज ऐसे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पसंद नहीं और वो पुलवामा की घटना के बाद हुई एयर स्ट्राइक का पूरा क्रेडिट इंडियन एयरफोर्स को दे रहे हैं और वहीं अभिनंदन की पाक से रिहाई का क्रेडिट पूरी तरह पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की ‘गुडविल’ को दे रहे हैं। लेकिन मशहूर एक्ट्रेस हुमा कुरैशी का एक ऐसा ही ट्वीट राष्ट्रवादी पत्रकारों में गिने जाने वाले अमिश देवगन को पसंद नहीं आया। उन्होंने हुमा की ट्विटर पर जमकर क्लास लगाई।

अमिश देवगन ‘जी बिजनेस’ के पूर्व एडिटर हैं और फिलहाल ‘न्यूज 18 इंडिया’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर हैं और सुपरहिट डिबेट शो 'आर-पार' शो के होस्ट हैं। वे साथ ही ‘नेटवर्क 18’ के हिंदी बिजनेस न्यूज चैनल पर भी डिबेट शो ‘टक्कर’ पेश करते हैं। अमिश ऐसे चुनिंदा टीवी पत्रकार हैं, जो मेनस्ट्रीम न्यूज और बिजनेस न्यूज दोनों पर मजबूत पकड़ रखते हुए रोजाना दोनों चैनलों पर शो करते हैं।

हुमा कुरैशी के जिस ट्वीट पर अमिश देवगन ने ऐतराज किया, पहले वो ट्वीट पढ़िए, ‘’India did the right thing by sending out a message that we will not tolerate terrorism. And Pakistan did the right thing by sending our Hero Wing Cmdr #Abhinandan back home! Let’s hope all leaders of India&Pakistan can figure a way to lead us towards peace #NoTerrorism #NoWar’’।

 

साफ था देश मे बहुत से लोगों को ये एप्रोच पसंद नहीं आ रही कि अभिनंदन की रिहाई का क्रेडिट पाकिस्तान को दिया जाए, जेनेवा कन्वेंशन के तहत ये होना ही था और सऊदी अरब व अमेरिका का दवाब बनाने के लिए भारत सरकार ने जो मेहनत की, उसको तो क्रेडिट मिला ही नहीं। इमरान खान को हीरो बना दिया गया, ये भी भूल गए कि हमारे 44 जवानों को पाक परस्त आतंकियों ने ही मारा है, एक अभिनंदन के लिए उन 44 की जानों को भूल जाना भी ठीक नहीं।

ऐसे में अमिश देवगन ने हुमा को जवाब में लिखा, ‘’ Are we forcing war or Pakistan is sponsoring terror war from last 40yrs on mynation . Please restrain yourself when you just type a tweet rather than understanding issue . We are fighting terror war from many decades now @narendramodi has decided not to take any more #JaiHind’’।

 

उसके बाद हुमा कुरैशी ने जवाब में एक टाइप किया हुआ पेज चिपकाया। हालांकि, ये पेज अभी हुमा की टाइम लाइन पर नहीं दिख रहा है, लेकिन अमिश की टाइम लाइन पर जाकर आप देख सकते हैं। जिसमें पहली ही लाइन है- ‘शेम ऑन यू सर’, इस पेज में हुमा ने ये भी लिखा कि आप पीएम मोदी को टैग करके मुझे डराने की कोशिश कर रहे हैं, आप शायद ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। तो अमिश ने भी कड़ा जवाब दिया कि पब्लिसिटी वाली बात कहकर तुमने खुद को एक्सपोज कर दिया। हमारा खून खौलता है जब तुम्हारे पीस लवर्स हमारे सैनिकों को मारने के लिए आतंकी भेजते हैं। आतंक के खिलाफ ट्वीट करो, वॉर के खिलाफ नहीं और अपनी पीआर टीम से इसे बेहतरी से समझो।

 

हुमा ने एक और ट्वीट के जरिए ये साबित करने की कोशिश की क्योंकि वो वॉर के खिलाफ हैं और मामले को पूरा नहीं समझती हैं, इसलिए वो पीएम मोदी से और सरकार से रिक्वेस्ट कर रही हैं कि इस मसले को शांतिपूर्ण हल ढूंढें, क्या आप इसीलिए मुझ पर अटैक कर रहें है, क्या आपको इसी से परेशानी है? और इसे बिना बायस के समझिए। तो अमिश देवगन ने जवाब दिया कि पाकिस्तान ने हमारे इतने जवान मार दिए और हम शांतिपूर्ण हल ढूंढें। ये नए दौर का हिंदुस्तान है हुमाजी, घर में घुसेगा भी और मारेगा भी। हालांकि अमिश ये कहना नहीं भूले कि हुमा एक अच्छी एक्ट्रेस हैं। उसके बाद अमिश देवगन ने हुमा कुरैशी को आईना दिखाने की कोशिश करते हुए कुछ ट्वीट और किए।

फिर हुमा को समझाने अशोक पंडित भी मैदान में उतर आए और हुमा के लिए लिखा कि पीस की रिस्वेस्ट मोदी से नहीं, इमरान खाने से करनी चाहिए। शुरुआत पाकिस्तान ने की है, इंडिया ने नहीं और जिन लोगों ने क्राइम किया लेक्चर उनको दो, विक्टिम्स को नहीं। फिलहाल हुमा ने ट्विटर पर इस मसले से ब्रेक ले लिया है, शायद उनको अंदाजा नहीं था कि देश में इस वक्त जो क्रोध उफान पर है, उनकी शांति की ट्वीट और पाकिस्तान की तारीफ इतनी भारी पड़ जाएगी।

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