फेसबुक-गूगल जैसी कंपनियों पर अब लगेगा ये नया टैक्स

फेसबुक, गूगल और अमेजॉन जैसी कंपनियों पर अब नया टैक्स लगाने की...

Last Modified:
Tuesday, 30 October, 2018
digital service tax

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

फेसबुक, गूगल और अमेजॉन जैसी कंपनियों पर ‘डिजिटल सर्विस टैक्स’ लगाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूके सरकार ने यूके में रेवेन्यू जुटा रहीं ऐसी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर यह टैक्स लगाने का निर्णय लिया है।  

बताया जाता है कि सोमवार को जारी शीतकालीन बजट में ‘Exchequer’ के चांसलर फिलिप हैमंड (Philip Hammond) ने दो प्रतिशत टैक्स लगाने की घोषणा की है। इस मामले में सलाह-मशविरा की समय अवधि पूरी होने के बाद अप्रैल 2020 में यह प्रभाव में आ जाएगा। यह टैक्स सिर्फ सर्च इंजन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस से जुटाए गए रेवेन्यू पर लगाया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैक्स यूके के छोटे स्टार्ट-अप पर नहीं लगाया जाएगा, बल्कि ऐसी डिजिटल सर्विस कंपनियों पर लगाया जाएगा, जो साल भर में कम से कम 500 मिलियन पौंड का ग्लोबल रेवेन्यू जुटाती हैं।

बताया जाता है कि यह निर्णय इस बहस के बीच लिया गया है कि यूएस की टेक्नोलॉजी कंपनियां कई बिलियन पौंड कमाई करने के बावजूद यूके में बहुत कम टैक्स का भुगतान करती हैं। इस समय कंपनियां यूके में हुए प्रॉफिट पर ही टैक्स का भुगतान करती हैं। आरोप है कि कम टैक्स देने के लिए टेक्नोलॉजी कंपनियां कम प्रॉफिट दिखाती हैं।

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इन गंभीर आरोपों में घिरी अमेजॉन, बाबा रामदेव ने संभाली बायकॉट की कमान

सोशल मीडिया पर कंपनी को करना पड़ रहा है लोगों के गुस्से का सामना

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
Amazon Ramdev

जानी-मानी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन एक बार फिर मुश्किल में है। उस पर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। सोशल मीडिया पर अमेजॉन के बायकॉट की मुहिम शुरू हो गई है। इस बार इस अभियान की कमान योगगुरु बाबा रामदेव के हाथों में है। बाबा ने #अमेजनमाफीमांगे, #AmazonInsultsHindu जैसे हैशटैग के साथ अपने ट्विटर हैंडल पर कंपनी के खिलाफ कई सवाल उठाए हैं।

दरअसल, हिंदू देवताओं की तस्वीर वाले टॉयलेट सीट कवर, योगा मैट, कपड़े के जूते, कालीन और अन्य उत्पाद अमेजॉन की ऑनलाइन सूची में दिख रहे थे। यह खबर सामने आते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर पर हजारों प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। थोड़े ही वक़्त में कंपनी के खिलाफ 24,000 से ज्यादा ट्वीट किए गए।

‘बायकॉट अमेजॉन’ ट्विटर पर सबसे अधिक ट्रेंड कर रहा था। कुछ लोगों ने अपने ट्वीट में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी टैग किया, ताकि अमेजॉन पर दबाव बनाया जा सके। बाबा रामदेव सहित सभी लोगों का कहना है कि हिंदू धर्म के अपमान के लिए कंपनी पर कार्रवाई होनी चाहिए। उधर, अमेजॉन का कहना है कि उसके सभी विक्रेताओं को कंपनी के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। जो ऐसा नहीं करता, उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, जिन उत्पादों को लेकर सवाल उठाया जा रहा है, उन्हें ऑनलाइन स्टोर से हटाने का काम शुरू हो चुका है।

बाबा रामदेव ने अपने ट्वीट में अमेजॉन पर मौजूद उत्पादों की फोटो भी शेयर की है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं वाले टॉयलेट सीट कवर, जूते आदि नज़र आ रहे हैं। बाबा के ट्वीट को 11 हजार के आसपास लाइक मिले हैं, जबकि लगभग सात हजार बार उसे रीट्वीट किया गया है। इसके अलावा डेढ़ हजार लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें से अधिकांश में कंपनी के खिलाफ गुस्सा है।

बाबा रामदेव द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

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इस मामले में बीजेपी ने सोशल मीडिया पर जताया ज्यादा भरोसा, अन्य पार्टियों को छोड़ा पीछे

17वीं लोकसभा के लिए सातवें चरण के तहत 19 मई को डाले जाएंगे वोट

Last Modified:
Thursday, 16 May, 2019
BJP

देश में इन दिनों 17वीं लोकसभा के गठन के लिए मतदान प्रक्रिया चल रही है। सात चरणों में होने वाली इस प्रक्रिया के छह चरण पूरे हो चुके हैं, जबकि सातवें चरण के तहत 19 मई को वोट डाले जाएंगे। इस दौरान राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार-प्रसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस बार विभिन्न राजनीतिक दलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपने ‘हथियार’ के रूप में काफी इस्तेमाल किया है और इन प्लेटफॉर्म्स पर काफी विज्ञापन दिए हैं।

यदि राजनीतिक दलों द्वारा विज्ञापन पर किए गए खर्च की बात करें तो इनमें बीजेपी अव्वल रही है। इस लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म (गूगल से लेकर फेसबुक पर) पर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। सिर्फ गूगल और उसकी सहयोगी कंपनियों पर ही बीजेपी ने विज्ञापन पर 17 करोड़ रुपए का खर्चा किया है। डीएमके ने गूगल पर करीब चार करोड़ रुपये का खर्च किया है। हालांकि, कांग्रेस की बात करें तो उसने काफी कम खर्च किया है और इसने सिर्फ 2.7 करोड़ रुपये के विज्ञापन दिए हैं।

विभिन्न पॉलिटिकल पार्टिंयां गूगल पर 27 करोड़ रुपये के विज्ञापन दे चुकी हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो भाजपा ने विज्ञापन पर कांग्रेस से करीब 500 फीसदी ज्यादा खर्च किया है। वहीं, फेसबुक पर किए गए खर्च की बात करें तो बीजेपी ने फरवरी से 11 मई तक विज्ञापनों पर चार करोड़ का खर्चा किया है, जबकि इस दौरान कांग्रेस ने 1.3 करोड़ का खर्चा किया था।

अभी तो आखिरी चरण के तहत 19 मई को वोटिंग होनी है। इस चरण में वाराणसी की सीट भी शामिल है, जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन खर्च के मामले में  बीजेपी का आंकड़ा और आगे जा सकता है. यानी इसके द्वारा किए जाने वाले खर्च में और बढ़ोतरी हो सकती है। बताया जाता है कि बीजेपी के आधिकारिक पेज के अलावा पार्टी के समर्थन में फेसबुक पर विभिन्न नामों से चल रहे कई पेज भी विज्ञापनों पर काफी खर्च कर रहे हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो करने के लिए यहां क्लिक कीजिए

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वॉट्सऐप यूजर्स हो जाएं सावधान, जल्द से जल्द कर लें ये काम

सुरक्षा खामी के कारण लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल हो गया है जासूसी सॉफ्टवेयर

Last Modified:
Tuesday, 14 May, 2019
Whatsapp

सोशल मीडिया के इस दौर में इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप लोगों की जिंदगी का अनिवार्य अंग बन चुका है। इसका इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी यह संवेदनशील हो गया है। पिछले दिनों सोशल मीडिया खासकर वॉट्सऐप पर फेक न्यूज की बढ़ती घटनाओं को लेकर काफी कदम उठाए गए थे। इसमें फॉरवर्ड मैसेज डिस्प्ले होने के साथ ही एक बार में भेजने वाले मैसेज की अधिकतम संख्या पांच कर दी गई थी।

लेकिन अब वॉट्सऐप को लेकर नया खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक ने स्वीकार किया है कि उसके इस ऐप में सुरक्षा खामी के कारण लोगों के मोबाइल में एक जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइली कंपनी द्वारा विकसित इस सॉफ्टवेयर को वॉट्सऐप कॉल के द्वारा फोन में इंस्टॉल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यूजर द्वारा कॉल का जवाब न देने पर भी यह सॉफ्टवेयर उनके फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है। कनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं को निशाना बनाया गया है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कितने लोगों को इस तरह के साइबर हमले का शिकार बनाया गया है। माना जा रहा है कि इस साइबर हमले के निशाने पर चुनिंदा लोग हैं। फिलहाल, रविवार तक फेसबुक के इंजीनियर इस सुरक्षा चूक को सही करने में जुटे थे। फेसबुक ने यूजर्स से नए वर्जन को अपडेट करने के लिए कहा है। बताया जाता है कि फेसबुक को अपडेट करने के साथ ही डाउनलोड फोल्डर में किसी संदिग्ध फाइल (जिसे आपने डाउनलोड न किया हो) के मिलने पर उसे डिलीट कर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। इसके अलावा संभव होने पर यूजर्स अपना फोन रीसेट भी कर सकते हैं।

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राजनीति के चटकारे वाला इस ‘गैर-राजनीतिक सर्वे’ में राहुल आगे, मोदी रहे पीछे

ट्विटर पर ‘अ-पॉलिटिकल हैरी पॉटर’ नामक यूजर ने पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे ऑनलाइन सर्वे किये हैं

Last Modified:
Monday, 13 May, 2019
Rahul

चुनावी मौसम में बहस, हार-जीत के दावे तो आपने बहुत सुने होंगे। इसके अलावा खबरिया चैनलों के आंकलनों पर भी आपकी नज़र गई होगी। इन आंकलनों ने किसी की आस जगाई होगी, तो किसी को निराशा की ओर धकेला होगा। इसलिए हम आपके सामने कुछ ऐसा रखने जा रहे हैं, जिसे सोशल मीडिया पर ख़ासा पसंद किया जा रहा है, जो गैर-राजनीतिक है, लेकिन राजनीति के चटकारे के साथ। ताकि आपना चुनावी जायका बना रहे। ट्विटर पर ‘अ-पॉलिटिकल हैरी पॉटर’ नामक यूजर ने पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे ऑनलाइन सर्वे किये हैं, जिन्हें जानने के बाद आपके चेहरे पर मुस्कान आना तय है, फिर भले ही आप किसी भी पार्टी का समर्थन क्यों न करते हों।

उदाहरण के तौर पर सबसे ताजा सर्वेक्षण में लोगों से पूछा गया है ‘यदि आपको अपने बच्चे को घर पर अकेला छोड़कर जाना हो, तो आप निम्न में से किस पर भरोसा करेंगे? विकल्प के रूप में नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, प्रज्ञा ठाकुर और अमित शाह का नाम दिया गया है। इस ऑनलाइन सर्वे के लिए करीब 61 हजार वोट आये हैं, और सबसे ज्यादा वोट मिले हैं राहुल गांधी को। सर्वे में शामिल 71 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वो अपने बच्चे को अकेला घर पर छोड़कर जाने के मामले में राहुल पर भरोसा करेंगे। दूसरे सबसे ज्यादा वोट नरेंद्र मोदी को मिले हैं, 23 फीसदी यूजर्स ने इस मामले में उन पर विश्वास जताया है। जबकि अमित शाह की परफॉरमेंस इस सर्वे में खाफी ख़राब रही। उन पर केवल 2% लोगों ने भरोसा दिखाया है, जो प्रज्ञा ठाकुर से भी 2% कम है।

मोदी के मुकाबले राहुल को तवज्जो देने के लोगों ने अपने-अपने कारण दिए हैं, जिन्हें वहीं जाकर पढ़ने में आनंद आएगा। इसके अलावा ‘अ-पॉलिटिकल हैरी पॉटर’ का एक अन्य सर्वे भी काफी रोचक है। इस सर्वेक्षण में पूछा गया है कि यदि आप केबीसी की हॉट सीट पर बैठे हों और एक सवाल पर अटक जाएं, तो निम्न में से किसी कॉल करेंगे’? विकल्प में स्मृति ईरानी और आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मार्लेन के नाम दिए गए हैं। ऐसे वक़्त में जब सियासी बयानबाजी दिलों को आहत कर रही है, इस तरह के सर्वे ‘स्माइल टॉनिक’ की भूमिका निभा रहे हैं। लिहाजा, हम भी यही चाहेंगे कि आप इसे मजाक की तरह लें और कुछ देर के लिए ही सही मुस्कुराएं।
 

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Linkedin यूजर्स के लिए बहुत काम का है ये नया फीचर, जानें कैसे

तीन साल पहले फेसबुक ने भी जारी किया था ऐसा ही फीचर

Last Modified:
Thursday, 09 May, 2019
Linkedin

सोशल नेटवर्किग साइट ‘लिंक्डइन’ (Linkedin) ने अपना यूजर बेस बढ़ाने के लिए नई कवायद की है। दरअसल, ‘लिंक्डइन’ ने अपने यूजर्स के लिए अब नया फीचर जारी किया है। यह फीचर फेसबुक के फीचर की तरह है, जिसमें किसी भी पोस्ट को लाइक करने के साथ आप उसमें अपना रिएक्शन भी शामिल कर सकते हैं।

इसके लिए ‘लिंक्डइन’ की ओर से ‘लाइक’ (Like) के अलावा अब चार नए रिएक्शन ‘लव’ (Love), ‘सेलिब्रेट’(Celebrate), ‘इनसाइटफुल’ (Insightful) और ‘क्यूरियस’ (Curious) जोड़े गए हैं। यानी आप कोई भी पोस्ट पसंद आने पर अपने हिसाब से उस पर अपना रिएक्शन दे सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ किसी भी पोस्ट पर नजर आने वाले लाइक बटन को कुछ देर दबाकर रखना होगा, जिसके बाद ये सभी रिएक्शन दिखाई देने लगेंगे, जिसके बाद आप अपनी मर्जी से कोई भी रिएक्शन चुन सकते हैं।

गौरतलब है कि फेसबुक भी यूजर्स की पसंद को ध्यान में रखते हुए करीब तीन साल पहले ऐसा ही फीचर लेकर आई थी। माना जा रहा है कि मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने यूजर्स को आकर्षित करने के लिए ही ‘लिंक्डइन’ की ओर से ये नए रिएक्शन जोड़े गए हैं।

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सोशल मीडिया पर कम हुई चुनावी गर्मी, चर्चा में रहे ये ट्वीट

ट्वीट ही नहीं, चुनाव से संबंध रखने हैशटैग व उनसे जुड़े कमेंट में भी कमी आई है

Last Modified:
Tuesday, 07 May, 2019
Twitter

लोकसभा चुनाव के अंतिम पड़ाव में भी नेताओं के भाषण माहौल को गर्मा रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर चुनावी गर्मी अब कम होती दिखाई दे रही है। पिछले पांच चरणों के आंकड़ों पर यदि नज़र डालें तो साफ़ हो जाता है कि ट्विटर यूजर्स का चुनाव के प्रति प्रेम उतना नहीं रहा, जितना शुरुआत में था। सोमवार को चुनाव का पांचवा चरण संपन्न हुआ। इस दौरान चुनाव से जुड़े कुल 1,78,198 ट्वीट हुए, जो चौथे चरण की तुलना में काफी कम थे। चौथे चरण में यह संख्या 2,20,107 थी। केवल ट्वीट ही नहीं, चुनाव से संबंध रखने हैशटैग, उनसे जुड़े कमेंट में भी कमी आई है।

दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा उपलब्ध कराये गए आंकड़ों के अनुसार,  पहले चरण में लोकसभा चुनाव से जुड़े कैंपेन, ट्वीट में 99,794 यूनिक यूजर्स ने भाग किया था, दूसरे फेज में यह संख्या गिरकर 84,659 पहुँच गई। इसके बाद जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ता गया, ट्विटर यूजर्स की उसमें दिलचस्पी कम होती गई।

मसलन, तीसरे चरण में यूनिक यूजर्स 79,645 थे, चौथे चरण में 69,371 और पांचवें चरण में यह केवल 56,392 रह गए। इसी तरह हैशटैग की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई। पहले चरण में जहां चुनाव से संबंधित 123 हैशटैग किये गए, वहीं पांचवें चरण में मात्र 91। वैसे पांचवें फेज़ में पांच हैशटैग #LokSabhaElections2019, #HarBoothParModi, #Phase5, #VotingRound5 और #MainHindustanHoon टॉप पर रहे।

अगर रीट्वीट की बात करें तो इसमें भाजपा नेता तेजेंद्र बग्गा ने सबको पछाड़ दिया। उन्होंने 6 मई को एक विडियो के साथ #RajivGandhiChorHai हैशटैग वाला ट्वीट किया था। इस ट्वीट को सबसे ज्यादा बार रीट्वीट किया गया। दूसरे नंबर पर इंडिया टुडे का वो ट्वीट रहा, जिसमें एक टीएमसी नेता के बारे में बताया गया था कि कैसे वो बुजुर्ग मतदाताओं के नाम पर खुद वोटिंग काउंटर में प्रवेश कर रहा है।

तीसरा सबसे लोकप्रिय ट्वीट पीयूष गोयल का रहा। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था, ‘अमेठी में एक अस्पताल है, जिसके ट्रस्टी नामदार परिवार के सदस्य हैं, कुछ दिन पहले एक गरीब आयुष्मान कार्ड लेकर अपना इलाज कराने के लिये गया। अमेठी के उस अस्पताल ने मरीज को मना कर दिया, क्योंकि उसके हाथ में मोदी का दिया हुआ आयुष्मान का कार्ड थाः PM @NarendraModi जी।’ कुल मिलाकर कहा जाए तो चुनाव के आगे बढ़ने का असर चुनावी ट्वीट पर पड़ रहा है। अगले चरण तक इसमें कुछ और गिरावट देखने को मिल सकती है।

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‘चौकीदार’ से विदेशी मीडिया हुआ कंफ्यूज, पढ़िए कैसे?

मोदी सरकार के लगभग सभी मंत्रियों और सांसदों ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगा रखा है

Last Modified:
Thursday, 02 May, 2019
Media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैं भी चौकीदारअभियान को देश में भले ही ज़बरदस्त सफलता मिली हो, लेकिन विदेशी मीडिया को इस अभियान ने कंफ्यूज कर दिया है। और इस कंफ्यूजन की वजह है सबका एकदम से चौकीदारबन जाना। मोदी सरकार के लगभग सभी मंत्रियों और सांसदों ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगा रखा है। ये चौकीदारसामान्य बोलचाल से लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुँच गया है। मसलन, ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी। ऐसे में विदेशी पत्रकार और मीडिया संस्थान समझ ही नहीं पा रहे हैं कि चौकीदारहै क्या भला। इसी के चलते अमेरिका के कई मीडिया समूहों ने अपनी खबर में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को चौकीदार सुषमा स्वराजके रूप में संदर्भित किया। वैसे, भाजपा समर्थक यदि चाहें तो इसे भी एक उपलब्धि के रूप में देख सकते हैं, लेकिन इतना तो साफ़ है कि चौकीदारने सात समुंदर पार बैठे पत्रकारों का सिर ज़रूर चकरा दिया है।

दरअसल, स्वराज ने 29 अप्रैल की शाम को वेस्ट चेस्टर, ओहियो में एक सिख परिवार के चार सदस्यों की हत्या पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। स्वराज ने घटना पर दुःख जताते हुए कहा था कि यह हेट क्राइम नहीं है। इसके बाद कई मीडिया संस्थानों ने इनके ट्वीट को अपनी खबर में जगह दी। अमेरिका के CBS न्यूज़ से जुड़े  WKRC TV ने गफलत के चलते स्वराज का पूरा नाम चौकीदार सुषमा स्वराजलिख डाला। इसी तरह अमेरिका के लोकप्रिय ABC न्यूज़ से संबद्ध WCPO भी चौकीदारके पीछे की भावना को भांपने में नाकाम रहा और भारतीय विदेश मंत्री के ट्विटर अकाउंट पर लिखे चौकीदारको उनके पूरे नाम में शामिल कर लिया। इतना ही नहीं NBC न्यूज़ के WLWT और फॉक्स नेटवर्क के Fox19 ने भी सुषमा स्वराज को चौकीदार सुषमा स्वराजकहकर संबोधित किया।

हालांकि, इस बारे में अमेरिकी के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान CNN की समझ को लेकर भी गफलत का माहौल है। ट्विटर पर कई यूजर्स ने CNN की रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट शेयर किये हैं, जिसमें ओहियो की घटना के संबंध में भारतीय विदेश मंत्री का नाम चौकीदार सुषमा स्वराजलिखा दिख रहा है। CNN की इस न्यूज़ को बाद में अपडेट भी किया गया, इसलिए संभव है कि CNN भी चौकीदारके भाव को समझ नहीं पाया। कंसल्टेंट गौतम घोष ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसके बारे में उन्होंने लिखा है ‘CNN को लगता है कि सुषमा स्वराज का पूरा नाम चौकीदार सुषमा स्वराज है।

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क्या पीएम मोदी ने भाषण में दी गाली? रूबिका ने यूं संभाला मोर्चा

दरअसल, गौरव पांधी ने अपने ट्वीट में लिखा ‘प्रधानमंत्री जी यह किस तरह की भाषा है? क्या देश के प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना शोभा देता है?

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Rubika Liyaquat

यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर भाषण चर्चा का विषय बन जाता है, लेकिन हाल ही में गुजरात की जनता से उनका संबोधन खूब सुर्खियाँ बंटोर रहा है। मोदी द्वारा गुजराती में दिए गए इस भाषण को उन लोगों द्वारा भी बार-बार सुना जा रहा है, जो गुजराती भाषा नहीं जानते। इसकी वजह है खुद को पॉलिटिकल एनालिस्ट और कांग्रेस का समर्थक बताने वाले गौरव पांधी का एक ट्वीट। इस ट्वीट में उन्होंने पीएम के उक्त भाषण का एक हिस्सा पोस्ट किया और साथ ही आरोप लगाया कि पीएम ने भाषण में गाली का इस्तेमाल किया है। जब यह ट्वीट एबीपी न्यूज़ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत की नज़र में आया, तो वो प्रतिक्रिया देने से खुद को नहीं रोक सकीं। इसके बाद रूबिका और गौरव के बीच शब्दों के बाण चले, जिनपर अन्य यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।

दरअसल, गौरव पांधी ने अपने ट्वीट में लिखा ‘प्रधानमंत्री जी यह किस तरह की भाषा है? क्या देश के प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना शोभा देता है? विश्वास नहीं हो रहा, कम-से-कम अपनी कुर्सी का तो सम्मान कीजिये।" वीडियो के ऊपर लिखा गया है 'मोदी ने रैली में कहा ‘बीसी’। इस ट्वीट को अब तक करीब साढ़े तीन हजार बार रीट्वीट किया जा चुका है। 

इसके जवाब में रूबिका ने गौरव को फटकार लगाते हुए कहा ‘मुझे यकीन है कि आपको गुजराती का ग भी नहीं आता। ध्यान से सुनने कि ज़हमत उठाएँगे तो समझ में आएगा ‘लड़ाई पाणी नी थवेन छे’ सुनाई देगा ‘थ व ए न छे’ और हाँ सुनने की प्रक्रिया के समय मोदी नफ़रत का चश्मा ज़रूर साइड में उतारकर रखिएगा क्योंकि वो लगाए रखने से सही सुनने पर असर पड़ सकता है।’ रूबिका के इस जवाब को सोशल मीडिया यूजर ने काफी पसंद किया और गौरव को गलत आरोप लगाने के लिए आड़े हाथ लिया। रूबिका लियाकत के ट्वीट को साढ़े छह हजार से ज्यादा रीट्वीट किया जा चुका है।

आप पीएम की स्पीच नीचे विडियो पर क्लिक कर सुन सकते हैं...



रूबिका के जवाबी हमले के बाद गौरव पांधी ने एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा ‘मुझे गुजराती का *ग* उतना आता है जितना आपको journalism ka ज ... आपकी तरह झूठ नहीं कहा कि स्मृति ईरानी ने MA किया है और टॉनिक मोदी कौनसा पीते हैं’। 

इस पर रूबिका ने कहा ‘हाहा इसे झूठ नहीं ज़ुबान फिसलना कहते हैं मैं आपकी तरह झूठी अकड़ में नहीं कि ग़लती पर क़ायम रहूँ। और रही बात journalism के ज की तो फिर से कान खोल कर सुन लीजिए- सवाल कभी छोटा या बड़ा नहीं होता’। दरअसल, स्मृति ईरानी की क्वॉलिफिकेशन का जिक्र करते हुए रूबिका एमए बोल गई थीं। इसी बात को पकड़कर गौरव ने उन्हें निशाना बनाया, लेकिन रूबिका ने बड़े ही शालीन तरीके से जवाब दिया।



वहीं, आजतक ने अपने फैक्ट चैक में यह साफ़ किया है कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में गाली का इस्तेमाल नहीं किया। 15 सेकेंड के वायरल विडियो में पीएम पानी की समस्या के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं, लेकिन विडियो के अंत में मोदी के कुछ शब्दों को बार-बार दोहरा कर सुनाया गया है, जिसके चलते ऐसा प्रतीत होता है कि पीएम गाली दे रहे हैं। मोदी की यह स्पीच गुजराती में है और वे थाड़ी तेजी से बोल रहे हैं। हालांकि पीएम मोदी की ओरिजनल स्पीच को जब ध्यान से सुना गया तो आजतक ने पाया कि पीएम ने गाली नहीं दी।

मोदी ने स्पीच में गुजराती में कहा ‘लोको एम कहे छे भविष्य मा लड़ाई पाणी नी थवेन छे, आल्या बधा कहो छो पाणी लड़ाई थवाएन छेओ तो पाछी पाणी पेहला पाल केम न बांधिए..’ असल में पीएम ने गुजराती का एक मुहावरा बोला जिसका अर्थ है ‘अगर हमें पता है कि भविष्य में पानी को लेकर लड़ाई होने वाली है तो इसके लिए पहले से सावधानी क्यों न बरती जाए।‘ 

वायरल वीडियो में ‘लड़ाई थवाएन छे’ शब्दों को बार बार दोहराया गया है, ताकि यह गाली की तरह सुनाई दे। इन शब्दों का अर्थ गूगल ट्रास्लेशन की मदद ढूंढने पर पाया गया कि इसका अर्थ होता है ‘होने वाली है।‘ 

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फेसबुक तैयार कर रही है नया फीचर, इस तरह करेगा काम

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स को नई सुविधा देने जा रही है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
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सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स को नई सुविधा देने जा रही है। इसके तहत फेसबुक न्यूज फीड और स्टोरी फीचर को आपस में मिलाकर एक नया फीचर तैयार कर रही है। ‘स्नैपचैट’ और ‘इंस्टाग्राम’ की तरह यह अपने प्लेटफॉर्म पर एक ही फीचर की सुविधा देगी।

दरअसल, ऐप रिसर्चर जेन मनचुन ने दोनों फीचर को मिलाकर एक सिंगल इंटरफेस को एंड्रॉयड यूजर्स के लिए तैयार किया था। फिलहाल फेसबुक न्यूज फीड और स्टोरी दो अलग-अलग फीचर हैं, जिसे यूजर्स इस्तेमाल कर रहे हैं। न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नए डिजायन में स्टोरी और न्यूज फीड को मिलाकर एक विकल्प दिया जाएगा, जिसमें टेक्स्ट, पिक्चर, विडियो और स्पॉन्सर्ड पोस्ट नजर आएंगी।

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क्या आपने अभिसार शर्मा का नोट बांटने वाला विडियो देखा है, जानें हकीकत

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से...

Last Modified:
Wednesday, 27 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में अभिसार एक बुजुर्ग के हाथ में कुछ देते हुए नज़र आ रहे हैं, जिसे उनके आलोचक पैसे करार दे रहे हैं। विडियो को अब तक सैकड़ों बार शेयर किया जा चुका है और इसे लेकर पत्रकार पर लगातार हमले भी हो रहे हैं।

देखें ये फर्जी वायरल विडियो-

हालांकि, असलियत कुछ और ही है। जिस विडियो को वायरल किया जा रहा है, वो अभिसार के पूरे विडियो का एक हिस्सा मात्र है। इसमें जानबूझकर केवल उसी भाग को दिखाया गया है, जिसमें अभिसार बुजुर्ग किसान के हाथ में कुछ थमा रहे हैं। चूंकि वायरल विडियो में यह स्पष्ट नहीं है कि वो पैसे हैं या कुछ और इसलिए आलोचक यह दावा करने में लगे हैं कि अभिसार ने पैसों के बल पर लोगों को सरकार के खिलाफ बोलने पर विवश किया। वैसे, अभिसार शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर पूरा विडियो पोस्ट करके यह साफ़ कर दिया है कि उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने अपने ट्वीट में उस यूजर का भी जिक्र किया है, जिसके इशारे पर यह सबकुछ चल रहा है।

अभिसार ने लिखा है ‘दोस्तों यह है पूरा विडियो, इसमें यह साफ़ दिख रहा है कि ग्रामीण ने मुझे न्यूज़पेपर की एक क्लिपिंग दी, जिसे मैंने बाद में उसे वापस कर दिया, लेकिन MODIfiedVikas समर्थित ट्रोल्स फर्जी प्रोपेगंडा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। (कोई आश्चर्य नहीं) फर्जी चौकीदारों झूठ से बचो’। अभिसार द्वारा पोस्ट किये गए विडियो को देखने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित ग्रामीण अख़बार में प्रकाशित गन्ना किसान और मिल मालिकों से जुड़ी एक खबर की कटिंग अभिसार को देता है, जिसे वह ज़ूम करके भी दिखाते हैं। इसके बाद वह कैमरे की तरफ मुड़ते हैं और अख़बार की कटिंग वापस ग्रामीण को थमा देते हैं।

विडियो के साथ छेड़छाड़ करने वाले शख्स ने बड़ी ही चालाकी से केवल उसी भाग को काटकर अलग किया, जिसमें अभिसार न्यूज़ पेपर कटिंग वापस करते नज़र आ रहे हैं, ताकि यह प्रसारित किया जा सके कि उन्होंने किसान को सरकार पर सवाल उठाने के लिए रिश्वत दी है। वहीं, विकास पांडे (MODIfiedVikas) नामक यूजर ने भी अभिसार के आरोप का जवाब दिया है। विकास ने लिखा है ‘इसके बॉस यूट्यूबर ने मुझे आईटी सेल का हेड बताया और अब इसके मुझे अपने दुश्मनों का सरदार। और कितने अच्छे दिन चाहिए मित्रों’? इतना ही नहीं, उसने यहां तक लिखा है कि अभिसार को कांग्रेस से एक हजार रुपए मिले होंगे और उन्होंने ग्रामीण को केवल 100 दिए, एक झटके में 900 का घोटाला’। जिस पर अभिसार ने ट्वीट किया है ‘तुम्हारे पास अपने दावे को सिद्ध करने के लिए कोई सबूत है? मैं मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के मामले में तुम्हारे करीब आ रहा हूं, यह मानहानि और उत्पीड़न है। मेरे पास सबूत है कि वो न्यूज़पेपर की क्लिपिंग है, उम्मीद है तुम्हारे पास भी है कि ये पैसा है’?

इस फर्जी विडियो को लेकर कई पत्रकार अभिसार शर्मा के समर्थन में उतर आये हैं। न्यूज़24 की एंकर साक्षी जोशी ने ट्वीट किया है ‘अभिसार आपने असली विडियो सामने लाकर बहुत अच्छा किया, ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए।’ इसी तरह लेखिका प्रेरणा बक्शी ने लिखा है ‘बीजेपी आईटी सेल को इस तरह एक ईमानदार पत्रकार की छवि धूमिल करने के लिए फर्जी खबर फैलाने पर शर्म आनी चाहिए।’ दरअसल, अभिसार शर्मा लोकसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश में जनता का मिजाज समझने गए थे। इसी दौरान ग्रामीणों से बातचीत में एक किसान ने उन्हें अख़बार में प्रकाशित खबर की क्लिपिंग दिखाई, जिसके बाद यह विवाद खड़ा हो गया।

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