जानें, क्यों मोदी ने अरुण पुरी,संजय गुप्त,रजत शर्मा,सुधीर चौधरी,अंजना कश्यप,रूबिका को किया टैग

लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ जहां सियासी पार्टियां अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं...

Last Modified:
Wednesday, 13 March, 2019
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो।.

लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ जहां सियासी पार्टियां अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं आम जनता को वोटिंग के लिए प्रेरित करने के अभियान भी शुरू हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद भी यह बीड़ा उठाया है। पीएम की तरफ से न केवल लोगों से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की जा रही है, बल्कि उन्होंने इस अभियान में मीडिया से भी योगदान देने को कहा है।

बुधवार को मोदी ने मीडिया सहित लगभर हर क्षेत्र की हस्तियों को ट्वीट किये। नए साल पर प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेकर विपक्ष के निशाने पर आईं एएनआई की संपादक स्मृति प्रकाश, टाइम्स नाउ की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार और न्यूज़ पोर्टल ‘स्वराज्य’ के सीईओ प्रसन्ना विश्वनाथन को किये गए अपने ट्वीट में मोदी ने लिखा है ‘मैं आप सब से 2019 के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए लोगों को जागरूक करने का अनुरोध करता हूं। आप जनता की आवाज़ हैं और मतदान जागरुकता में आपका योगदान देश की 130 करोड़ आबादी के लिए लाभकारी होगा।’

अपने एक अन्य ट्वीट में पीएम ने कुछ पत्रकारों को टैग करते हुए कहा है ‘मैं रूबिका लियाकत, अंजना ओम कश्यप,  सुधीर चौधरी, राहुल कंवल और रिपब्लिक टीवी की टीम से यह अपील करता हूं कि वो मतदान को लेकर जागरूकता फैलाएं और लोगों खासकर युवाओं को बताएं कि वोट डालना कितना ज़रूरी है।’

इसके बाद मोदी ने मीडिया जगत के कुछ बड़े नामों से भी इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा, टाइम्स ग्रुप के एमडी विनीत जैन, ज़ी ग्रुप प्रमुख सुभाष चंद्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया है ‘मैं मीडिया जगत के दिग्गजों से कहना चाहता हूं कि बड़े मतदान प्रतिशत की ज़रूरत को रेखांकित करें। ऐसा करने से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी और हमारे राष्ट्र के विकास को बल मिलेगा’।

 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दैनिक जागरण के एडिटर इन चीफ संजय गुप्ता, इंडिया टुडे के चेयरमैन अरुण पुरी, नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी, मात्रभूमि और ईनाडू जैसे मीडिया संस्थानों से भी लोकतंत्र के पर्व में आम जनता की भागीदारी बढ़ाने में सहयोग देने की अपील की है। हालांकि, पीएम की इस अपील में जिन पत्रकारों के नाम शामिल नहीं हैं, उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर मजाक भी किया जा रहा है। द स्किन डॉक्टर नामक यूजर ने बरखा दत्त की फोटो को इस कैप्शन के साथ शेयर किया है ‘तुझे याद न मेरी आई, किसी से अब क्या कहना..’।


 

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जानिए, क्यों ट्विटर पर राहुल कंवल और दैनिक भास्कर की हो रही आलोचना

सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

Last Modified:
Monday, 13 January, 2020
rahulkanwal

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू होने और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में 5 जनवरी को हुई हिंसा के बाद से सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स एक्टिव हैं। वे आए दिन किसी न किसी को ढूंढकर निशाना बना रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल और हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ हैं।

दरअसल, राहुल कंवल और दैनिक भास्कर को ट्रोल किए जाने की वजह बताने से पहले ये बता दें कि ‘इंडिया टुडे’ की स्पेशल इन्वे​स्टिगेटिव टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश JNU Tapes में संभावित हमलावरों की पहचान की है। इस स्टिंग ऑपरेशन में एबीवीपी कार्यकर्ता अक्षत अवस्थी ने हिंसा के लिए खुद लड़के जुटाने की बात स्वीकारी है, जिसके बाद से ही उसके पत्रकारों को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना भी बनाया जा रहा है। स्टिंग ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले जमशेद खान और नितिन जैन के बाद कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और अब राहुल कंवल पर शाब्दिक हमले हो रहे हैं।

अब बात करते हैं राहुल कंवल को ट्रोल किए जाने के पीछे की वजह पर। दरअसल, यूं तो जेएनयू में 5 जनवरी को छात्रों के साथ हुई हिंसा के कुछ दिनों बाद से ही राहुल कंवल ट्विटर पर पर ट्रोल किए जा रहे हैं। लेकिन इस बार वे ‘वंदे मातरम’ को लेकर ट्रोल हो रहे हैं। ट्विटर पर उनका एक विडियो तेजी से वायरल किया जा रहा है, जिसमें वह न्यूज रूम में दो शख्स से बात करते दिखाई दे रहे हैं। इस विडियो में उन्होंने प्रशांत भूषण का भी नाम लिया है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'सर आपने वंदे मातरम के नारे लगाए... वह एंटी नेशनल है।'

दरअसल, इस विडियो के सामने आते ही #RahulKanwalExposed और  #VandeMataram ट्रेंड कराया जा रहा है। इस ट्रेंड के साथ ही राहुल कंवल की आलोचना भी की जा रही है और उनकी पत्रकारिता पर कई लोग सवाल भी उठा रहे हैं।

 

 

 

 

वहीं, विडियो वायरल होने के बाद राहुल कंवल ने एक ट्वीट को रिट्वीट कर जवाब भी दिया, जिसमें दावा किया कि जिस विडियो क्लिप को ट्विटर पर जमकर शेयर किया जा रहा है, वह अधूरा है। हालांकि इसके बाद राहुल कंवल ने विडियो का पूरा हिस्सा जारी किया और लोगों को सच्चाई से अवगत कराया। बता दें कि यह विडियो फरवरी, 2016 यानी करीब चार साल पुराना है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि एसआईटी ने उन वकीलों को बेनकाब किया था, जिन्होंने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने कन्हैया कुमार को अदालत में पेश किए जाने के दौरान पीटा, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। वकीलों ने वंदे मातरम कहते हुए कन्हैया कुमार को पीटा। किसी को पीट देना और फिर वंदे मातरम गा देना राष्ट्र विरोधी है और यह मैं फिर कहूंगा। जय हिंद।

वहीं दूसरी तरफ, दैनिक भास्कर भी ट्रोलर्स के निशाने पर है। ट्रोलर्स बायकाट दैनिक भास्कर’ (#BoycottDainikBhaskar)  हैशटैग चलाकर इसे ट्रेंड कराने में कामयाब रहे। दरअसल 11 जनवरी यानी शनिवार को ग्वालियर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में जनजागरण मंच द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसी रैली की कवरेज को दैनिक भास्कर ने अपने अखबार में जगह दी, जिसकी हेडिंग थी- ‘सीएए का समर्थन...500 मीटर लंबी रैली, 4 किलोमीटर पैदल चले लोग’  

बस ‘500 मीटर लंबी रैली’ वाली बात ट्रोलर्स को दिल पर लग गई और सवाल खड़े करते हुए अखबार को निशाने पर ले लिया। ट्रोलर्स का कहना है कि रैली 500 मीटर नहीं, बल्कि इससे बहुत ही ज्यादा बड़ी थी।  

 

 

 

 

 

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सोशल मीडिया पर घिरे वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, यूं मानी गलती

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Shekhar Gupta

‘द प्रिंट’ की एक खबर को लेकर वेबसाइट के एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता मुश्किल में घिर गए हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने खबर में हुई गलती पर खेद प्रकट किया, लेकिन इसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने शेखर गुप्ता की माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, आईआईटी कानपुर के जिस प्रोफेसर ने फैज की नज्म ‘हम देखेंगे‘ गाने वाले छात्रों के खिलाफ पिछले महीने शिकायत दर्ज कराई थी, वह वशी शर्मा ही हैं। शेखर गुप्ता के न्यूजपोर्टल ‘द प्रिंट’ ने इस संबंध में हाल ही में एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसमें प्रोफेसर को ‘लव जिहाद’ और मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा गया था कि वह दलितों के उत्थान के भी पक्षधर नहीं हैं।

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया। शर्मा ने अपने ट्वीट में शेखर गुप्ता, खबर लिखने वाले प्रशांत श्रीवास्तव और उन्नति शर्मा को टैग करते हुए लिखा, ‘मैं आपके रिपोर्टर के साथ बातचीत का अनकट ऑडियो पोस्ट कर रहा हूं, कृपया ध्यान से सुनें और जो लिखा गया है उससे तुलना करें।’ प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये, जिसके बाद शेखर गुप्ता आगे आये और उन्होंने खबर में हुई गलती के लिए खेद प्रकट किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर वशी मंत शर्मा के प्रोफाइल में हमने गलती से उन्हें भी ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो दलित उत्थान की निंदा करता है। हम इस गलती पर खेद प्रकट करते हुए उनसे माफी मांगते हैं’।

हालांकि, शेखर गुप्ता की माफी का प्रोफेसर पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शेखर को जवाबी ट्वीट में वशी मंत शर्मा ने कहा, ‘शेखर गुप्ता मुझे आपकी माफी स्वीकार नहीं है। आपने तब माफी मांगी, जब मैंने आपके पत्रकार के साथ अपनी बातचीत सामने लाकर आपका झूठ उजागर किया।’

इसके साथ ही प्रोफेसर ने ‘द प्रिंट’ की खबर में अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप की सफाई भी दी है। सोशल मीडिया पर ‘इस गलती’ के लिए द प्रिंट और शेखर गुप्ता को निशाना बनाया जा रहा है। पेशे से वकील अनिरुद्ध नामक यूजर ने तो प्रोफेसर को शेखर गुप्ता पर केस करने की सलाह दी है।   

‘द प्रिंट’ द्वारा भूल सुधार के बाद प्रकाशित की गई स्टोरी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

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डिजिटल मैगजींस के सबस्क्राइबर्स का पैसा वापस करेगा Google, जानिए वजह

कंपनी की ओर से वर्ष 2012 में शुरू की थी यह सर्विस, बाद में इसे गूगल न्यूज में मिला दिया गया था

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Google News

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ के सबस्क्राइबर्स गूगल न्यूज ऐप पर मैगजींस का डिजिटल वर्जन नहीं पढ़ सकेंगे। दरअसल, ‘गूगल’ ने निर्णय लिया है कि वह अपने गूगल न्यूज ऐप पर मैंगजींस की पीडीएफ पढ़ने के लिए शुरू की गई ‘print replica’ सर्विस को बंद कर रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि गूगल ने महसूस किया है कि लोग इस सर्विस पर ‘Rolling Stone’ अथवा ‘Conde Nast Traveller’ जैसी मैगजींस के अलावा ऑनलाइन अखबार भी नहीं पढ़ रहे हैं, इसलिए इस सर्विस को बंद करने का निर्णय लिया गया है।   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में कंपनी की ओर से गूगल न्यूज यूजर्स को ई-मेल भेजकर बताया जा रहा है कि नया इश्यू अब नहीं आएगा। इसके साथ ही सबस्क्राइबर्स द्वारा किए गए भुगतान को वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

बता दें कि गूगल न्यूज के ‘print replica’ मैगजींस में प्रिंट एडिशंस का पीडीएफ वर्जन होता है, जिसे यूजर्स स्मार्टफोन अथवा कंप्यूटर पर पढ़ सकते हैं। अब यह सर्विस बंद होने के बाद यदि पाठक किसी मैगजीन का ई-वर्जन (इंटरनेट संस्करण) पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें उस मैगजीन की वेबसाइट पर जाना होगा। इस बारे में यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजकर बताया जाएगा कि गूगल न्यूज में print replica मैगजींस को बंद किया जा रहा है।

हालांकि, पाठकों द्वारा पूर्व में सबस्क्राइब किए गए मैगजींस के सभी इश्यू गूगल न्यूज एप पर एक्सेस किए जा सकते हैं। गूगल की ओर से कहा गया है कि लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए अब गूगल न्यूज में उस पब्लिकेशन को सर्च करना होगा अथवा उस पब्लिकेशन की वेबसाइट पर जाना होगा। बता दें कि गूगल ने ‘प्ले मैगजींस एप’ के द्वारा वर्ष 2012 में पाठकों को मैगजीन कंटेंट उपलब्ध कराना शुरू किया था। बाद में कंपनी ने इसका नाम बदलकर ‘प्ले न्यूजस्टैंड’ कर दिया और इसे ‘गूगल न्यूज’ में मिला दिया।

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ट्रोलर्स के निशाने पर आया दैनिक भास्कर, चलाया जा रहा ये अभियान

सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर पर पक्षपात और जातिवाद का आरोप लगाते हुए उसके बहिष्कार की अपील की जा रही है

Last Modified:
Friday, 03 January, 2020
dainik bhaskar

दैनिक भास्कर के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की वजह है वह होर्डिंग जो अखबार ने अपने प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश में लगवाये हैं। सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर पर पक्षपात और जातिवाद का आरोप लगाते हुए उसके बहिष्कार की अपील की जा रही है।

दरअसल, भास्कर समूह ने अपनी न्यूज़ वेबसाइट ‘दैनिक भास्कर डॉट कॉम’ के प्रचार के लिए जातिवादी राजनीति पर चोट करने वाले होर्डिंग लगवाये हैं। मीडिया हाउस को उम्मीद होगी कि इस तरह का प्रचार लोगों को आकर्षित करेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भास्कर का यह दांव इसलिए उल्टा पड़ गया क्योंकि उसके प्रचार में एक तरह से अखिलेश यादव और मायावती पर कटाक्ष किया गया है।

जायज है, उनके समर्थकों के लिए यह हजम करना मुश्किल है। लिहाजा, सोशल मीडिया पर भास्कर समूह के बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है। तेजपाल यादव नामक यूजर ने ‘गंदी पत्रकारिता’ लिखकर भास्कर के होर्डिंग ट्वीट किये हैं, साथ ही मीडिया समूह के बहिष्कार की मांग भी की गई है। इस ट्वीट को तेजी से रीट्वीट किया जा रहा है और कमेन्ट करने वालों में से अधिकांश ने भास्कर पर निशाना साधा है।

 

सोशल मीडिया पर भास्कर के जो होर्डिंग शेयर किये गए हैं उनमें लिखा है ‘ना माया का जाल, ना अखिलेश का क्लेश। अब सिर्फ सच चलेगा, यूपी में खबरें न दबेंगी, न रुकेंगी’। इसी तरह दूसरा होर्डिंग कहता है ‘ना दलितों की रानी, न यादवों की कहानी। अब सिर्फ सच चलेगा, यूपी में खबरें न दबेंगी, न रुकेंगी’।

प्रचार के इस अंदाज के पीछे भास्कर की मंशा भले ही जातिवादी राजनीति पर चोट करना हो, लेकिन उस पर खुद जातिवादी होने के आरोप लगाये जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भास्कर के बहिष्कार का अभियान चल रहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने मीडिया समूह का समर्थन भी किया है, लेकिन विरोध करने वालों की संख्या ज्यादा है।

कपिल कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा है ‘#BoycottDainikBhaskar वैसे तो इसको गिने चुने लोग ही पढ़ते हैं, पर फिर भी इसने इतनी तो कोशिश करी कि खुलकर बता दिया, हम #बहुजन विरोधी व #सरकार की नुमाइंदगी करते हैं। ये एक नहीं है, ऐसे बहुत हैं। दुर्भाग्यपूर्ण! सत्ता का शोर सर चढ़ कर बोलेगा ऐसे? पत्रकारिता और चाटुकारिता में फर्क है।’    

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अजीत अंजुम ने ट्रोलर्स को सिखाया सबक, कई पत्रकारों ने दिया साथ

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह का ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वालों को निशाना बनाया है

Last Modified:
Thursday, 02 January, 2020
ajit anjum

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह का ट्वीट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वालों को निशाना बनाया है।

दरअसल, स्वरा पर उनके एक ट्वीट को लेकर लगातार हमले हो रहे हैं। ट्रोलर्स उनके लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें सभ्य विरोध की श्रेणी में कतई शामिल नहीं किया जा सकता। अंजुम और रोहणी की तरह कुछ अन्य पत्रकारों ने भी स्वरा भास्कर का समर्थन करते हुए विरोधियों को आड़े हाथों लिया है। यहां तक कि स्वरा की विचारधारा से इत्तेफाक न रखने वाले भी एक महिला के खिलाफ इस्तेमाल हुए शब्दों को लेकर उद्देलित हैं।

दरअसल, अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 2019 की विदाई और नए साल के आगमन को लेकर एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है ‘2019 की मुख्य अभिव्यक्ति!! अलविदा 2019- मैं तुम्हें बहुत ज्यादा याद नहीं करूंगी!!! हैलो 2020! ऐसा***मत करना, जिसके चलते मेरी स्थिति ऐसी हो जाए’!! इस ट्वीट के माध्यम से स्वरा जो भी संदेश देना चाह रही हों, लेकिन ट्रोलर्स को यह बिलकुल भी पसंद नहीं आया।

स्वरा पहले से ही नागरिकता संशोधन कानून की खिलाफत करके विरोधियों के निशाने पर हैं और इस ट्वीट से विरोधियों को उन पर हमला तेज करने का मौके मिल गया। ‘सोनू हिंदू’ नामक यूजर ने स्वरा के ट्वीट का आपत्तिजनक जवाब दिया। इसी तरह ‘कुलदीप’, ‘तेजू जोशी’ और कई अन्य यूजर्स ने मर्यादित विरोध की परिभाषा की धज्जियां उड़ाते हुए अभिनेत्री के लिए अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया।

‘तेजू जोशी’ ने स्वरा की एक तस्वीर शेयर करते हुए उस पर जो कुछ लिखा है, उसे यहां दोहराया नहीं जा सकता। एक महिला के खिलाफ चलाये जा रहे इस अभियान की भनक जब वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और रोहणी सिंह को लगी, तो दोनों खुद को रोक नहीं सके और ट्रोलर्स को जमकर सबक सिखाया।

अंजुम ने लिखा ‘आप @ReallySwara के इस ट्वीट के सारे अश्लील कॉमेंट पढ़कर उनके बॉयोडाटा देख लीजिए। एक ही 'संस्कारी कुल' के हैं सब। ये सब मानसिक व्यभिचारी स्वयंभू 'देशभक्त' हैं। पता नहीं अपने आसपास की लड़कियों को ये लोग किस नज़र से देखते होंगे। धिक्कार है ऐसे लोगों पर’।

इसी तरह रोहणी सिंह स्वरा के ट्वीट पर लिखा,‘इस ट्वीट के जवाब देखिए। मुझे आश्चर्य है कि क्या इस तरह की यौन बलात्कार की कल्पनाओं को पोस्ट करने वाले पुरुषों के परिवार जानते हैं कि उनके बीच संभावित बलात्कारी हैं। मुझे लगता है कि समय आ गया है कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाना चाहिए’। 

‘दन्यूज़मिनट’ की एडिटर-इन-चीफ धन्या राजेंद्रन, पत्रकार प्रशांत कुमार सहित कई अन्य यूजर्स ने भी स्वरा भास्कर को निशाना बनाने के लिए ट्रोलर्स को आड़े हाथों लिया है।  

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एडिटर्स गिल्ड के खिलाफ कई वरिष्ठ पत्रकारों ने खोला ‘मोर्चा’, जानें वजह

संभवत: यह पहला मौका है जब एक साथ कई पत्रकारों ने खुलकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं

Last Modified:
Monday, 30 December, 2019
Editor Guild

वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाने वाले भाजपा नेता के खिलाफ ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ आगे आया है। गिल्ड ने भाजपा की आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के विवादस्पद ट्वीट पोल पर कड़ा एतराज जताते हुए उनसे माफी मांगने और तुरंत अपना ट्वीट डिलीट करने को कहा है।

एडिटर्स गिल्ड के इस कदम पर जहां राजदीप ने खुशी जाहिर की है, वहीं कुछ अन्य पत्रकारों ने गिल्ड पर पक्षपात का आरोप लगाया है। नाराज पत्रकारों का कहना है कि एडिटर्स गिल्ड को सभी मामलों में ऐसी सक्रियता दिखानी चाहिए। संभवत: यह पहला मौका है जब एक साथ कई पत्रकारों ने खुलकर एडिटर्स गिल्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं।

वहीं, ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने एडिटर्स गिल्ड को पिछले साल लिखे गए पत्र की याद दिलाते हुए आड़े हाथों लिया है। उन्होंने लिखा है ‘प्रिय एडिटर्स गिल्ड, ट्विटर पोल को लेकर आपका त्वरित बयान केवल आपके ढोंग (hypocrisy) में मेरे विश्वास को मजबूत करता है। आपको दिनांक 4.12.18 को लिखे पत्र के जवाब का मुझे अभी भी इंतजार है’। चौधरी ने ट्वीट के साथ पत्र की कॉपी भी पोस्ट की है। अपने इस पत्र में चौधरी ने कांग्रेस द्वारा बेवजह ‘जी न्यूज’ को निशाना बनाये जाने का जिक्र किया था।

यह भी पढ़ें: राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार

‘न्यूज18’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी एडिटर्स गिल्ड की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है ‘गिल्ड ने अच्छा काम किया, लेकिन केवल चुनिंदा पत्रकारों के मामले में ही ऐसा क्यों किया जाता है? गिल्ड उस वक्त क्यों खामोश रहा जब कांग्रेस प्रवक्ता ने ऑन एयर मुझसे अपशब्द कहे। एडिटर्स गिल्ड को सभी के साथ एक समान पेश आना चाहिए’। गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने लाइव टीवी डिबेट के दौरान अमिश को दलाल तक कह डाला था।

अमिश देवगन के ट्वीट पर कमेंट करते हुए ‘एबीपी न्यूज’ के वरिष्ठ पत्रकार विकास भदौरिया ने भी गिल्ड पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि गिल्ड अपने पदाधिकारियों को छोड़कर अन्य पत्रकारों के मामले में खामोश रहता है। मालूम हो कि राजदीप सरदेसाई भी एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष चुके हैं। कई अन्य पत्रकारों ने भी गिल्ड के इस भेदभावपूर्ण रवैये पर एतराज जताया है। उनका कहना है कि अगस्त में जब ‘एबीपी गंगा’ के रिपोर्टर नीतिश कुमार पाण्डेय के साथ प्रियंका गांधी के सहयोगी ने दुर्व्यवहार किया था, तब गिल्ड ने कोई बयान जारी करके नाराजगी क्यों नहीं जताई? अब एडिटर्स गिल्ड इन आरोपों पर क्या जवाब देता है ये देखने वाली बात होगी।

गौरतलब है कि राजदीप सरदेसाई ने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये थे। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया। राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात करते हुए कहा था कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया था। इसके बाद भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल शुरू कर दिया था। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए?

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राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार

किसी विषय पर दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है, लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है

Last Modified:
Friday, 27 December, 2019
Rajdeep sardesai

किसी एक विषय पर दो लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है। लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है। लोग यह तक भूल जाते हैं कि पत्रकार भी उनकी तरह इंसान हैं। नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कुछ ऐसा ही माहौल है। वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। वजह महज इतनी है कि उन्होंने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया।

राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘सीएए विरोधी हर रैली में मैंने तिरंगा और महात्मा गांधी की फोटो देखी, जबकि कानून के समर्थकों की रैली में तिरंगे के साथ-साथ भगवा झंडा भी दिखाई दिया। इस बारे में सोचें।’

राजदीप ने अपने विचार व्यक्त किये, लेकिन यह कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को नागवार गुजरा। भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने तो राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल ही शुरू कर डाला। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए? हालांकि, राजदीप ने मालवीय को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने जवाबी ट्वीट में कहा ‘मेरे मित्र, इस बेशर्मी भरे भड़काऊ अभियान को आगे बढ़ाएं। मेरा नया साल का संकल्प शांत रहना है! आपका नववर्ष शांतिपूर्ण और खुशहाल हो।’

वहीं, कई पत्रकारों ने अमित मालवीय को अपने इस असभ्य पोल के लिए आड़े हाथ लिया। ‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता ने मालवीय से पूछा,‘राजदीप ने कब आईएसआई या किसी अन्य आतंकी संगठन का समर्थन किया और जब नहीं किया तो फिर ऐसे पोल का क्या औचित्य’?

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में राजदीप के साथ ही एडिटर गिल्ड को टैग करते हुए लिखा ‘मालवीय को इसके लिए कोर्ट में घसीटा जाना चाहिए।’ इसी तरह ‘न्यूज24’ की एसोसिएट एडिटर साक्षी जोशी ने स्वाति के ट्वीट के जवाब में लिखा ‘और ऐसा तब हुआ जब उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर एक शो किया और लगातार भाजपा प्रवक्ता से पूछा कि पीएम झूठ क्यों बोलते हैं’!

‘द हिंदू’ की नेशनल एडिटर सुहासनी हैदर और ‘एनडीवी इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने भी राजदीप को निशाना बनाने वालों को निशाना बनाया। उमाशंकर ने पूछा है, ‘अमित मालवीय की मानसिक हालत दयनीय है। उन्हें मानसिक अस्पताल में ले जाने की जरूरत है। सवाल है कि इलाज कहां और कब संभव है?               

इस बारे में लोगों का मानना है कि पत्रकारों को भी यह अधिकार है कि वह सरकार के फैसले या किसी अन्य विषय पर अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। यदि उनकी सोच या विचार आपकी सोच के विपरीत हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि आप उन्हें जिस भाषा में चाहें जवाब दें। आपके पास भी विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका सभ्य और शालीन होना चाहिए।

'माय टेक' में राजदीप सरदेसाई ने सीएए और एनआरसी को लेकर क्या कहा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं-

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‘असभ्य विरोध’ पर रूबिका ने लगाई ऐसी फटकार, हो रही तारीफ

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पक्ष-विपक्ष में माहौल तैयार किया जा रहा है

Last Modified:
Friday, 20 December, 2019
Rubika Liyaquat

लोकतंत्र में विरोध हर नागरिक का अधिकार है। यदि आप सरकार के किसी फैसले से खुश नहीं हैं तो विरोध कर सकते हैं। किसी की बातें आपको चुभती हैं तो विरोध कर सकते हैं। किसी के ख्याल आपको ठेस पहुंचाते हैं तो विरोध कर सकते हैं, लेकिन शर्त केवल यही है कि विरोध का तरीका सभ्य होना चाहिए।

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पक्ष-विपक्ष में माहौल तैयार किया जा रहा है। कानून का समर्थन करने वाले, विरोधियों को मानसिक विकलांग करार दे रहे हैं और विरोधी इस कानून के समर्थकों की सोच पर उंगली उठा रहे हैं। इस समर्थन-विरोध के ‘खेल’ में शब्दों की मर्यादा तार-तार हो रही है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत को भी इस तार-तार होती मर्यादा से दो-चार होना पड़ा। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ने अपनी एक फोटो ट्विटर पर शेयर की, जिसमें वह मुस्लिम टोपी में नजर आ रहे हैं। संजय झा की फोटो पर कई लोगों ने कमेंट किए, जिनमें रूबिका भी शामिल थीं। उन्होंने लिखा, ‘संजय जी टोपी पहनने से कौम का भला होना होता तो आपकी सरकार में खूब टोपियां पहनी गईं, इफ्तार पार्टियां रखी गई। अब तक कौम हर पैमाने पर ऊपर उठ गई होती, मुसलमान बच्चे खूब पढ़ लिख गए होते, औरतें ट्रिपल तलाक़ की सलाखों से आजाद हो गई होती! इसे टोपी पहनना नहीं टोपी पहनाना कहते हैं।’

रूबिका ने शब्दों की मर्यादा में रहकर नपे-तुले अंदाज में अपनी बात कही, लेकिन उनका यह अंदाज में कुछ लोगों को नागवार गुजरा। संभव है एबीपी की पत्रकार के विचारों ने उन्हें आहत किया हो, मगर इसके विरोध में उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, उसकी इजाजत सभ्य समाज नहीं देता। तौसीफ नामक यूजर ने रूबिका के ट्वीट पर कमेंट करते हुए लिखा ‘अगर BJP और RSS के बेड पर सोने से कौम का भला होता तो तुम बहुत सो ली हो और तुमसे पहले भी बहुत सोई हैं’।

क्या इसे महज विरोध या असहमति कहा जा सकता है? एक महिला के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग तौसीफ जैसे लोगों की घृणित सोच को दर्शाता है। यही वे लोग हैं जिन्होंने विचारों को व्यक्त करने के सोशल प्लेटफार्म को इस कदर गंदा कर दिया है कि अब इससे दूर रहने की नसीहतें दी जाने लगी हैं। तौसीफ के इस कमेंट का रूबिका ने करारा जवाब दिया। उन्होंने लिखा ‘तौसीफ़ आपकी मां को मेरा सलाम कहना और सेक्स, बेड, सोने से फुर्सत मिल जाए तो CAA को अच्छे से पढ़ लेना, पढ़ने के बावजूद समझ न आए तो नीचे लिखी लाइन को रट लेना, NRC अभी लागू नहीं हुआ, CAA का हिंदुस्तानी मुसलमान से कोई वास्ता नहीं।’

रूबिका लियाकत के इस जवाबी ट्वीट को हजारों बार रीट्वीट किया जा चुका है और साढ़े आठ हजार के आसपास कमेंट हैं, जिनमें से अधिकांश में तौसीफ को उसकी विकलांग मानसिकता के लिए निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया पर रूबिका को किस तरह लोगों का समर्थन मिल रहा है, वह आप यहां दिए गए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।  

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नेटवर्क18: ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने एम्पलॉइज को किया ईमेल, दीं ये हिदायतें

मीडिया समूह के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने संस्थान के एंप्लाइज को लिखा ई-मेल, गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर नौकरी से धोना पड़ सकता है हाथ

Last Modified:
Tuesday, 17 December, 2019
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) में ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने संस्थान के कर्मचारियों से सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर काफी सावधानी बरतने के लिए कहा है। इसके लिए उन्होंने संस्थान के स्टाफ के लिए कुछ गाइडलाइंस तय की हैं। उन्होंने कहा है कि ये गाइडलाइंस ‘नेटवर्क18’ के सभी कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टर्स और पत्रकारों पर लागू होंगी। ये गाइडलाइंस फेसबुक, ट्विटर, स्नैपचैट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और अन्य डिजिटल व सोशल मीडिया ऐप, पेज और साइट्स पर की जाने वाली पोस्ट पर लागू होंगी।

इस बारे में राहुल जोशी ने स्टाफ को एक ई-मेल भी किया है। इस ई-मेल में राहुल जोशी का कहना है कि किसी भी मीडिया संस्थान की कार्यप्रणाली में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका होती है। इससे न सिर्फ स्टोरीज के बारे में जानकारी मिलती है, बल्कि लोगों के साथ नए अंदाज में संपर्क बढ़ाता है और डिजिटल व टीवी मीडिया के ट्रैफिक को बढ़ाने में काफी मदद मिलती है। यदि इसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह काफी अच्छा माध्यम है, लेकिन सोशल मीडिया पर एक गलत पोस्ट हमारी अखंडता और निष्पक्षता को काफी प्रभावित करती है, जिससे प्रतिष्ठा धूमिल होती है।

इस ई-मेल में राहुल जोशी का यह भी कहना है कि इन गाइडलाइंस का उल्लघंन ‘नेटवर्क18’ की आचार संहिता का उल्लंघना माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि किसी भी तरह की शंका होने पर ‘स्टैंडर्ड्स और प्रैक्टिसेज टीम’ (Standards & Practices Team) से S&P@nw18.com पर संपर्क किया जा सकता है।

इस बारे में राहुल जोशी द्वारा स्टाफ को किए गए ई-मेल को आप हूबहू यहां पढ़ सकते हैं।

Dear all,

Social media is a big part of how we work as a news organisation. It helps us track stories, drives traffic to our digital and TV properties and enables engagement with audiences in new and creative ways. When used wisely, social media is a force multiplier like no other. Conversely it can also severely affect the ability of our crews on the ground if thoughtless posts go viral and damage our reputation for integrity and fairness.

Which is why I am for the umpteenth time sharing our guidelines for social media use. They apply to all Network18 employees, contractors and journalists and include posts on existing platforms such as Facebook, Twitter, Snapchat, YouTube, Instagram, WhatsApp and all other forms of digital and social media apps, pages or sites.

Cheers,

Rahul

​AVOID AIRING PERSONAL VIEWS ON CONTENTIOUS TOPICS

Don't air personal views on news stories or openly state political preferences or say anything that could compromise your impartiality. Having the tagline ‘views are mine and do not represent my employer’ in your profile DOES NOT PROTECT Network18 from appearing biased. Remember, even if your opinions or actions are posted using personal accounts or handles, you still represent the Network18 Group. On all social media platforms, you represent both yourself and the group.

DO NOT RESPOND TO TROLLS OR POST ON BEHALF OF NETWORK18

If you are attacked, trolled or challenged on social media, don't jump into the debate. With regard to accusations of questionable reporting, threats, bullying and other similar issues, alert your senior colleagues who, in turn, will as needed alert the social, PR and legal teams. Always refer media inquiries to Network18’s spokespersons and do not speak on the company's behalf.

DO NOT COMMENT ON WORK-RELATED MATTERS

unless you are an official spokesperson or have the legal approval by the Network18 Group to do so. In addition, talking about revenue, future plans, pricing decisions, unannounced financial results or similar matters will land you and/or the company into serious trouble. Steer clear of discussing the company's financials and predictions of future performance at all costs.

DON'T USE ETHNIC SLURS, PERSONAL INSULTS, OBSCENITY, OR ENGAGE IN ANY CONDUCT THAT WOULD NOT BE ACCEPTABLE AT THE WORKPLACE

Respect your audience. Respect others’ privacy. Avoid topics that may be considered objectionable or inflammatory (like religion or politics).

AVOID PUTTING OUT UNVERIFIED STORIES OR INFORMATION

Do not use social media platforms to spread unverified sensitive information, regardless of whether other journalists or media outlets have published the reports. Our social media posts must always meet Network18’s editorial standards of accuracy, fairness and attribution. If you think such a story wouldn’t go on Network18’s broadcast or digital platforms, you shouldn’t be posting it on social media either.

NEVER DISCLOSE CONFIDENTIAL OR PROPRIETARY INFORMATION

pertaining to the Network18 Group, its employees and associates on social media platforms. Or for that matter, anywhere. Disclosure of trade secrets, technical, business or financial information, or property, owned by or licensed to the group and/or any of its subsidiaries, affiliates and related entities is strictly prohibited.  This also includes information regarding Network18’s services, processes, personnel, finances, business plans, customers, employees and any information relating to the company's business that is not in the public domain.

DO NOT PUT OUT NEGATIVE/ MISLEADING TWEETS, POSTS OR  ARTICLES ABOUT RIVALS

Remember always that any actions by employees could expose the Network 18 group to potential litigation from rivals and and liabilities.

LIKES AND REACTIONS ARE OPINION

Twitter Likes and Facebook Reactions are also opinion. It is similar to retweeting on Twitter and sharing on other social networks. What you like and what you choose from a Reaction button are construed as the equivalent of expressing your opinion.

PRIVATE IS NOT ALWAYS PRIVATE

Private social conversations are not always private. Conversations within closed social network groups are not always as private as you might believe them to be. Very often screenshots of conversations within closed social networking groups are shared over the open internet.

PRESENTING THE CORRECT PICTURE

Your profile picture on social image is the first place where you project your image. Do not use as a profile picture any image that may be construed as Insulting, hurtful or obscene.

DO NOT OPERATE A BLOG OR WEBSITE WITHOUT APPROVAL

You can have your own website or blog, but you should notify your supervisor about it to clear it as a ‘non-conflict’ area and to  assess potential risks. Your supervisor may then choose to have it cleared at another level, or by the Standards & Practices team. Also, any potential blogs should be offered first to Network18 websites. In fact, before launching on new social platforms in your professional capacity, please consult with the Standards & Practices Team.

DO NOT VIOLATE OTHERS' INTELLECTUAL PROPERTY RIGHTS

Respect copyright—if it isn’t yours, don't use it. It is the owner’s choice to share his/her material with the world, not yours. Before posting someone else's work, check with the owner first. This covers all copyrights (issued or not), trademarks (registered or not), trade names, domain names, designs, trade secrets, knowhow and any third-party proprietary information.

DON'T CITE OR REFERENCE CLIENTS, PARTNERS OR EMPLOYEES OF NETWORK18 WITHOUT THEIR APPROVAL

Using your public voice to trash or embarrass your employer, your customers or your co-workers is a strict no-no.

VERIFY BEFORE YOU LINK

Avoid posting unverified content, EVEN ONES WITH DISCLAIMERS. These could include memes, viral videos, spoofs, morphed images, satires, jokes and other explicit content.  Add context when sharing posts or tweets from individuals or news organizations to avoid being misinterpreted. It does not matter if you include ‘Retweets are not endorsements’ in your bio.  Information on social networks needs to be verified like any other information. If you mistakenly retweet or forward erroneous information, correct your mistake in a subsequent tweet or update and make an effort to provide a more accurate link.

DO NOT OPERATE UNDER AN ALIAS

Do not use a fake name or identity on any website or blog in order to participate in biased public behavior. Despite your alias, it is still YOUR opinion. And your real identity and occupation could come to light later on. While using professional designations on social media profiles, mention exact designation (editor, copy-editor, producer etc.) and the specific department/branch (CNBC, IBNLive, Pradesh18, news18, khabar18) you are part of.

ASK BEFORE YOU ACT

If you are not sure if certain conduct is appropriate or legal, consult the Standards & Practices Team, or simply don’t engage in the conduct. And while there may be more on the not-to-do list, use these guidelines to help you identify other things that you should avoid.

CORRECT YOUR MISTAKE

In case you have posted something that wasn't true, be the first to respond to your own mistake. Serious errors need to be brought to the attention of the legal team at S&P@nw18.com

Finally, two simple rules will help you navigate social media without mishaps — Err on the side of caution and use your Common Sense.

Remember that you are responsible for your actions. Violating these guidelines will be a violation of Network18’s code of conduct and could attract disciplinary action including loss of your association with the group. Whenever in doubt, feel free to reach out to the Standards & Practices Team at S&P@nw18.com

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जानें, क्यों PIB को इस ट्वीट पर सार्वजनिक रूप से जताना पड़ा खेद

पत्र सूचना कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि इस बारे में उचित कार्रवाई की जा रही है

Last Modified:
Tuesday, 17 December, 2019
PIB

अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दिल्ली पुलिस के साथ झड़प में शामिल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में रविवार को किए गए ट्वीट को लेकर ‘पत्र सूचना कार्यालय’ (PIB) ने खेद जताया है। ‘पीआईबी’ की सोशल मीडिया टीम के सदस्य एवं जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व छात्र द्वारा रविवार को कथित रूप से किए गए इस ट्वीट में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई थी।

इस ट्वीट के महज एक घंटे बाद ही पीआईबी ने खेद जताते हुए कहा 'हमारी सोशल मीडिया टीम के एक सदस्य ने जामिया मिलिया में स्थिति को लेकर गलती से ‘पीआईबी’ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर अपनी व्यक्तिगत टिप्पणियां ट्वीट कर दी थीं। इस गलती पर हमें गहरा खेद है। इस बारे में उचित कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि इस ट्वीट में कहा गया था, 'मुझे बस जामिया को जंग के मैदान में तब्दील होते देखना ही रह गया था। छात्रों के खिलाफ हिंसा बंद करो।' हैशटैग के साथ लिखा गया था, ‘अपने पूर्व संस्थान में मैं खून बहने नहीं दे सकता।'

गौरतलब है कि नए नागरिता कानून को लेकर देश भर में जमकर हंगामा हो रहा है। इस मामले में जामिया के छात्र कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।  

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