गूगल ने लिया ये बड़ा फैसला, आमजन के लिए बंद की ये सर्विस ...

गूगल ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल उसने अपने सोशल नेटवर्क...

Last Modified:
Tuesday, 09 October, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

गूगल ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल उसने अपने सोशल नेटवर्क गूगल+ (गूगल प्लस) को बंद करने की सोमवार को घोषणा कर दी है। गूगल ने 5 लाख यूजर्स के डेटा हैक होने के बाद यह कदम उठाया है।

गूगल के मुताबिक, 5 लाख गूगल प्लस अकाउंट में संभावित बग पाया गया था जो उनका डेटा पब्लिक कर सकता है। गूगल ने कहा कि हालांकि इस सोशल नेटवर्किंग साइट को बंद करने से पहले उसने उस बग को ठीक कर लिया था, जिसकी वजह से करीब 5 लाख के अकाउंट में निजी डेटा में सेंध लगाई गई थी।  

'दी वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने सिक्योरिटी कारणों का हवाला देते हुए यह नहीं बताया है कि दरअसल ये बग कैसा है और क्या हुआ है?

रिपोर्ट के मुताबिक, एक सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के कारण 2015 से 2018 के बीच बाहरी डेवलपर्स ने गूगल प्लस प्रोफाइल के डेटा में सेंध लगाई थी।  

गूगल के मुताबिक, प्रभावित डेटा में ऑप्शन गूगल प्लस प्रोफाइल में दिए गए नाम, ईमेल, व्यवसाय, जेंडर और ऐज जैसे पर्सनल डेटा शामिल हैं। गूगल ने कहा है,'हमें ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं मिला है कि डेवेलपर इस बग यानी खामी की जानकारी रखता है या फिर उन्होंने इसका गलत इस्तेमाल किया है।  

गूगल के मुताबिक, गूगल प्लस को सिर्फ आम यूजर्स के लिए बंद किया जा रहा है, लेकिन एंटरप्राइज यूजर्स के लिए यह चालू रहेगा, क्योंकि कंपनियों के लिए इसे ज्यादा यूज किया जाता है।

अमेरिका की दिग्गज इंटरनेट कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए गूगल+ का सूर्यास्त हो गया है। यह सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक को चुनौती देने में विफल रही थी।

गूगल के एक प्रवक्ता ने गूगल+ बंद करने की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि गूगल+ को बनाने से लेकर प्रबंधन में काफी चुनौतियां थीं जिसे ग्राहकों के आशा के अनुरूप तैयार किया गया था लेकिन इसका कम इस्तेमाल किया जाता था।

 

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न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने सवाल क्या पूछा, पूरी पार्टी ही पीछे पड़ गई

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Chitra Tripathi

बिहार में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला रखा है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा है और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं। हालांकि, इतने संवेदनशील मामले में भी राजनीति जोरो पर है जिसका खामियाजा उन पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है, जो सिर्फ बदहाल व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनमें चित्रा त्रिपाठी भी शामिल हैं। 

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। निशाना बनाने वाले इस बात से खफा हैं कि चित्रा केवल राज्य सरकार पर सवाल उठा रहीं हैं केंद्र सरकार पर नहीं। इस ट्रोलिंग की शुरुआत तब हुई जब चित्रा ने बच्चों की मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए कुछ ट्वीट किये। उन्होंने लिखा कि ‘बिहार में ना सत्ता पक्ष-ना विपक्ष है। चुनाव में 39 सीटें पाकर #सत्ता नशे में है @RJDforIndia को एक भी नहीं मिली तो पार्टी गर्मी की छुट्टी मना रही है @ichiragpaswan की पार्टी का कहना है बीमारी लाइलाज है सच-गरीबों को वोट मानने वाले नेता संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं।’ 

चित्रा के इस ट्वीट पर राजद नेता अलोक कुमार मेहता ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा ‘@chitraaum जी, विपक्ष गर्मी छुट्टी नहीं मना रहा है बल्कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर कार्रवाई कर रहा है, जरूरत है तो आप पत्रकार बिरादरी से कि आप ऐसे मामलों पर हमारा साथ दे!! मुजफ्फरपुर बालिका गृह की घटना पर मीडिया के रुख को देख लें’? 

इसके बाद राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, जिसमें कहा गया कि तीन दिन पहले @RJDforIndia ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मुज़फ़्फ़रपुर भेजा था। शिष्टमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगा। आगे के कार्यक्रम भी तय है। राजद आरोप-प्रत्यारोप से बच पीड़ित परिजनों की संवेदना का ख़्याल रख सकारात्मक राजनीति कर रहा है’। इन जवाबी ट्वीट के बाद चित्रा ने एक ऐसा सवाल पूछा जो राजद समर्थकों को भीतर तक चुभ गया। उन्होंने पूछा कि पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कहां हैं?
    
तेजस्वी यादव का नाम उछलते ही रमेश यादव नामक राजद समर्थक ने चित्रा त्रिपाठी पर हमले शुरू कर दिए। उसने अपने पहले ट्वीट में लिखा ‘बेशर्म दलाल मीडिया 2 सौ ज्यादा बच्चे मरे है सवाल @narendramodi से पूछना चाहिये, पांच साल आपका आयुष्मान योजना गया कहां, सवाल सरकार से पूछना चाहिये तो दलाली मीडिया विपक्ष से पूछ रहा है? @chitraaum @ModiLeDubega।’ 

जिसका चित्रा ने माकूल जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘यादव जी,एक तो मुझे टैग करते समय भाषा की मर्यादा रखें। दूसरा किससे सवाल करना है और किससे नहीं ये मुझे तय करने दें। मेरे ट्वीट पढ़े, ऐसा नहीं है कि सवाल सिर्फ RJD से था। बेशर्म और दलाल आपके घर में बोली जाने वाली भाषा होगी। अपनी मां बहन से कहियेगा ऐसे,मुझसे नहीं।’ 

चित्रा इतने पर ही शांत नहीं हुईं, उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘और हां,@yadavtejashwi के साथ फोटो लगायें हैं तो थोड़ा उनसे सीख लीजिये कि बोलते समय क्या ध्यान रखते हैं। नेता के साथ फोटो खींचा कर चापलूसी नहीं करते, थोड़ा उसकी अच्छाइयों को सीखते भी हैं।’


हालांकि, बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। इस बार गुरप्रीत वालिया नामक यूजर ने रमेश यादव के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए लिखा ‘वाह @yadavtejashwi कहा है ये तो पूछ लिया मोदी जी कहां है? अब तक आए क्यू नही? कब आएंगे? एक भी ट्वीट किया क्या अब तक? ये ना पूछा गया तुमसे, मीडिया के हाल देखो, बुरे दिनों में भी विपक्ष से अधिक सवाल करते है सत्ता की बजाए।’ 

जिसके जवाब में चित्रा ने गुरप्रीत की फोटो को आधार बनाते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा ‘शीशे के सामने खड़े होकर सेल्फी खिंचने से फुर्सत मिल जाये तो मेरे ट्वीट पढ़ लेना।’ गुरप्रीत के बाद राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर नवल किशोर ने चित्रा त्रिपाठी पर हमला बोला। उनके अल्फाज थे ‘चाटुकारिता की हर सीमा इसी जन्म में लाँघने की कसम खा ली है क्या??? कुछ हिम्मत उधार ले लीजिए सता से सवाल पूछने के लिए। पत्रकारी जीवन ऐसे ही बर्बाद न कीजिए’। जिस पर चित्रा का जवाब रहा ‘डॉ नवल किशोर, अच्छा लगा ट्वीट पढ़कर। मुझे नहीं पता आप किस चीज के लिये डॉक्टर लगाते हैं,लेकिन मरीजों का इलाज करने वाले हैं तो जाकर मासूमों को बचाइये मुजफ्फरपुर में। ट्विटर पर आपकी गाली मैं खा लूंगी, इससे भी घटिया बोलेंगे सुन लूंगी,लेकिन पहले बच्चों को बचाइये मुजफ्फरपुर जाइये।’


चित्रा त्रिपाठी ने भी शायद यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें एक के बाद एक इस तरह नेताओं और समर्थकों के हमले झेलने होंगे। राजद नेता शैलेश कुमार ने भी चित्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया ‘आप भूल गयी कि बिहार में सबसे ज़्यादा विधायक एनडीए गठबंधन के है। 99% लोकसभा सांसद NDA गठबंधन के है। क्या आपने @SushilModi PM @narendramodi से सवाल पूछा? हिम्मत नहीं है क्योंकि नौकरी चली जाएगी? पक्षकार पत्रकार विपक्ष को लोकतंत्र ना सिखाए’। 

इसके बाद उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘PM @narendramodi, स्वास्थ्य मंत्री @drharshvardhan, @AmitShahOffice को टैग करने में डर लग रहा है ना? मोदी जी ने अभी तक संवेदना भी प्रकट नहीं की है। अपना पुश्तैनी ज्ञान ज़रा उधर भी बाँट दिजीए। डरिए ना, लोकतंत्र है। सत्ता से सवाल करिए।’ जिसके जवाब में चित्रा ने कहा ‘आज तो पूरी @RJDforIndia आ गई है मुझे कोसने के लिये। ये एक जुटता बच्चों की जान बचाने के लिये दिखाईये साहब। काहे के नेता हैं आप? 2014 में MP थे? और इतनी निर्लज्जता? जनता जितायेगी तभी! 80 विधायक तो आपके भी हैं ना? उनको किसने चुना था? इसी जनता ने। अगले साल फिर चुनाव है ध्यान रखियेगा। बहुत ज्यादा डरी हुई हूं। घर से निकल भी नहीं पा रही। बोलना तो छोड़ दीजिये, कैसे MP रहे हैं आप भई, हैरान हूं।’

हालांकि, हमले और जवाबी हमले का सिलसिला यहीं ख़त्म नहीं हुआ। राजद समर्थक और नेता चित्रा को निशाना बनाते रहे और वह बखूबी उसका सामना करती रहीं।

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टीम इंडिया को जीत की बधाई देना मंत्रीजी को पड़ा भारी

बिहार के साथ-साथ देश भर में 100 मासूमों की मौत की चर्चा है, लेकिन चूँकि यह मामला बिहार का है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

 

बिहार के साथ-साथ देश भर में 100 मासूमों की मौत की चर्चा है, लेकिन चूँकि यह मामला बिहार का है इसलिए स्थानीय प्रशासन और सरकार से संवेदनशील होने की अपेक्षा ज्यादा की जाती है। यही वजह है कि जब राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को मात देने के लिए भारतीय टीम की तारीफ की, तो लोगों को यह पसंद नहीं आया। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य मंत्री को निशाना बनाने वालों को टीम इंडिया की जीत से ख़ुशी नहीं पहुंची, लेकिन उनकी नज़र में मंत्रीजी को जीत का जश्न मनाने से पहले बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है। गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है।

16 जून को भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई थीं। लोग सारे काम भूलकर टीवी से चिपके रहे। जैसे ही मैच के परिणाम की घोषणा हुई देशभर में जश्न मनने लगा। सोशल मीडिया पर भी बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का ट्वीट भी शामिल था, जिसके बाद उनकी आलोचना होने लगी। दरअसल, भारत की जीत पर अपनी ख़ुशी बयां करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा, ‘पाकिस्तान को धूल चटाने पर टीम इंडिया के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई व आगामी मुक़ाबलों के लिए शुभकामनाएं!’ मंत्रीजी के इस ट्वीट पर आजतक के पत्रकार आशुतोष मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ‘100 से ज्यादा बच्चों की मौत की बधाई किसे? इतना ध्यान अस्पतालों पर क्यों नहीं? इसके बाद जो जैसे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को निशाने बनाने की होड़ लग गई। एक के बाद एक यूजर्स अपनी नाराज़गी जताने लगे।

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा ‘जानकर ख़ुशी हुई कि आप रोमांचित हुए, लेकिन आप उस एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं, जिसके चलते 100 बच्चों की मौत हो गई।’ इसके साथ ही स्वाति ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार को टैग करते हुए लिखा कि आपके स्वास्थ्य मंत्री क्रिकेट के बारे में ट्वीट करने में व्यस्त हैं।
  
 इसी तरह एक अन्य यूजर ने लिखा ‘ये बिहार के निर्लज्ज स्वास्थय मंत्री हैं। जितनी दिलचस्पी ये मैच में दिखा रहे हैं अगर उतनी दिलचस्पी उस काम में दिखाते जिसके लिए जनता ने इन्हें चुना है, तो मुज्जफरपुर से कुछ अच्छी ख़बरें आ रही होती। वहीं आशुतोष महंत नामक यूजर ने ट्वीट किया ‘150 बच्चे मर गए हैं और आप यहां बधाई दे रहे हैं, आप बिहार के स्वास्थ्य मंत्री है या मौत के सौदागर।’

 

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फेसबुक दे रही है पैसे कमाने का सुनहरा मौका, करना होगा सिर्फ ये काम

सिर्फ 18 साल या उससे अधिक की उम्र वाले ही उठा सकेंगे इस स्कीम का लाभ

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स के लिए नया रिसर्च ऐप लेकर आई है। 'स्टडी बाई फेसबुक' (Study By Facebook) नाम के इस ऐप की घोषणा फेसबुक ने मंगलवार को की है। यह ऐप यूजर्स के फोन पर नजर रखेगा कि वह किस ऐप पर कितना समय बिता रहा है। जो यूजर्स इस ऐप को डाउनलोड कर अपने फोन को ट्रैक करने की अनुमति देंगे, उन्हें फेसबुक की ओर से पैसे दिए जाएंगे। फेसबुक का यह भी कहना है कि इस ऐप को वही यूजर्स डाउनलोड कर सकेंगे, जिनकी उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होगी। यानी नाबालिग इस ऐप को डाउनलोड नहीं कर सकेंगे।

फेसबुक की ओर से कहा गया है कि शुरुआती दौर में यह ऐप सिर्फ अमेरिका और भारत में उपलब्ध होगा और सोशल मीडिया पर इस ऐप को प्रमोट किया जाएगा। इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए साइनअप करना होगा। जांच के बाद फेसबुक यूजर्स को इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए इनवाइट करेगा। इसके साथ ही फेसबुक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजर्स के डाटा की सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा जाएगा और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इस प्रोग्राम के तहत यूजर्स का कम से कम डाटा लिया जाएगा और ऐप के कंटेंट से किसी प्रकार का डेटा नहीं लिया जाएगा।

दरअसल कंपनी का मानना है कि मार्केट रिसर्च में यह ऐप काफी काम आता है, क्योंकि इससे यूजर्स की पसंद का पता लगाया जा सकता है और इसके बाद कंपनी को उसी की पसंद की चीजें डिलीवर करने में आसानी रहती है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अपनी जानकारी शेयर करने पर यूजर्स को कितने पैसे दिए जाएगे। हालांकि, पिछली बार जब फेसबुक ने इसी तरह का प्रोग्राम शुरू किया था तो यूजर्स को 20 डॉलर प्रति माह दिए गए थे।

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सरकार के खिलाफ सवाल पूछने पर महिला पत्रकार की पिटाई के 'सच' से उठा पर्दा

सच्चाई सामने आने पर कुछ सोशल साइट्स ने हटाईं मामले से जुड़ी पोस्ट

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
Nitika Journalist

सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर खबर सच नहीं होती, यह एक बार फिर साबित हो गया है। फेसबुक सहित कई सोशल साइट्स पर एक जख्मी महिला की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसे मुंबई की वरिष्ठ पत्रकार नितिका राव बताया जा रहा है। फोटो में नजर आ रही महिला नितिका ही हैं, लेकिन उनके बारे में जो बातें कहीं गई हैं, उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं।

वायरल पोस्ट में कहा गया है कि नितिका एयरफोर्स के गायब एयरक्राफ्ट के विषय में सरकार से सवाल पूछने की गलती कर बैठीं, जिसके चलते उन पर प्राणघातक हमला हुआ जबकि हकीकत कुछ और ही है। बूमलाइव डॉट कॉम (www.boomlive.in) ने जब इस बारे में नितिका राव से बात की तो पूरा मामला ही पलट गया। नितिका ने सोशल मीडिया पर किये जा रहे दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

नितिका ने बताया कि उन पर हमला सरकार से सवाल पूछने के चलते नहीं, बल्कि एक बिल्डर के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से हुआ। दरअसल, नितिका ठाणे जिले के कल्याण में किसानों के हक के लिए लड़ाई लड़ रही हैं, जिस वजह से एक स्थानीय बिल्डर उनसे नाराज था और हमला उसी नाराजगी का परिणाम है।

बूम से बातचीत में नितिका राव ने कहा कि उन पर हुए हमले का सरकार से सवाल पूछने से कोई रिश्ता नहीं है। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में किसानों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं, बतौर पत्रकार नहीं। इसलिए जो कुछ हुआ, उसके लिए बिल्डर जिम्मेदार है, कोई और नहीं।

9 जून से सोशल मीडिया पर घायल नितिका की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। कहा जा रहा है कि सरकार से सवाल पूछने के चलते राइट विंग कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की। कई लोगों ने तो इसके लिए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग तक कर डाली। इतना ही नहीं पंजाब एवं चंडीगढ़ पत्रकार संघ द्वारा भी नितिका से संबंधित फेसबुक पोस्ट की निंदा की गई। अब जब हकीकत सामने है, तो सभी खामोश हैं।

कुछ सोशल साइट्स से नितिका से जुड़ी पोस्ट भी हटा दी गई है। नितिका राव फ्रीलांस पत्रकार हैं और किसानों के अधिकारों के लिए भी काम करती हैं। इस खबर से एक बार फिर यह सीख मिलती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वालीं ख़बरों पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए।

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जानें, क्यों क्रिकेट वर्ल्ड कप नहीं दिखा पाएंगी कई वेबसाइट्स, रेडियो और इंटरनेट चैनल्स

चार सितंबर तक दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल करना होगा अपना जवाब

Last Modified:
Tuesday, 11 June, 2019
Websites

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए 60 वेबसाइट्स और कुछ रेडियो स्टेशनों को क्रिकेट विश्व कप 2019 की लाइव स्ट्रीमिंग करने से रोक दिया है। चैनल-2 ग्रुप कॉरपोरेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को अंतरिम आदेश के तहत यह रोक लगाई है। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले से स्ट्रीमिंग के जरिये फ्री में मैच देखने और सुनने वाले क्रिकेट प्रशंसकों को झटका लग सकता है। चैनल-2 ग्रुप कॉरपोरेशन की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि 30 मई से 14 जुलाई तक हो रहे विश्व कप के ऑडियो कवरेज के अधिकार उसके पास हैं।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेआर मिढ़ा की बेंच ने इन 60 वेबसाइट्स, 14 रेडियो चैनल्स और लगभग 30 इंटरनेट और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और केंद्र को नोटिस जारी कर चार सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले अपने अंतरिम आदेश में गूगल जैसे सर्च इंजनों, एयरटेल और वोडाफोन जैसे इंटरनेट और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नियमों का उल्लंघन करने वाली वेबसाइट्स के लिंक हटाने या बंद करने का निर्देश दिया था, जहां क्रिकेट विश्व कप का ऑडियो कवरेज अनधिकृत रूप से उपलब्ध है।

बेंच का यह भी कहना था, ‘तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता के हित में एकपक्षीय आदेश जारी करना जरूरी है। याचिकाकर्ता ने विश्व कप 2019 के आयोजक आईसीसी बिजनेस कॉरपोरेशन के साथ ऑडियो अधिकार समझौता किया था।‘ चैनल-2 समूह के वकील जयंत मेहता और सुभालक्ष्मी सेन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि ये प्लेटफॉर्म चैनल-2 से अधिकृत नहीं हैं और न ही चैनल ने इन्हें क्रिकेट वर्ल्ड कप के ऑडियो और रेडियो प्रसारण का लाइसेंस दिया है। इसके साथ ही उनका यह भी कहना था कि चैनल-2 ग्रुप के पास इस तरह के ऑडियो और रेडियो प्रसारण का अधिकार है।

वकील की दलील को सही मानते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'बचाव पक्ष, उनके साझेदार, उनके अधिकारी, कर्मचारी, एजेंट्स और प्रतिनिधित्व, फ्रेंचाइजी और सभी को आईसीसी विश्व कप-2019 की ऑडियो और रेडियो कवरेज से रोका जाता है।' हालांकि, ऐसी वेबसाइट्स और रेडियो स्टेशनों को थोड़ी राहत देते हुए अदालत का यह भी कहना था, 'इस अंतरिम आदेश में शामिल कोई भी बचाव पक्ष 15 मिनट के अंतर के साथ स्कोर बता सकता है।‘ उल्लेखनीय है कि क्रिकेट वर्ल्ड कप 30 मई से इंग्लैंड में चल रहा है और 14 जुलाई तक चलेगा।

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जानें, खबरों के बाजार में किस तरह दोनों हाथों से पैसे बटोर रहा है Google

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट पर गूगल ने नहीं दी है कोई प्रतिक्रिया

Last Modified:
Monday, 10 June, 2019
Google

मीडिया और पत्रकारों के लिए समय कुछ खास अच्छा नहीं चल रहा है। कई छोटे-बड़े अखबार बंद हो चुके हैं और सैकड़ों मीडियाकर्मियों की नौकरी जा चुकी है। लेकिन खबरों के इस बाजार में गूगल दोनों हाथों से पैसे बंटोर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल यानी 2018 में गूगल ने ‘सर्च’ और ‘गूगल न्यूज’ से जितनी कमाई की, वह पूरी अमेरिकी न्यूज मीडिया की कमाई के लगभग बराबर है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में ‘न्यूज मीडिया एलायन्स’ (एमएनए) के आंकड़ों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि 2018 में गूगल को 4.7 अरब डॉलर की आय हुई, जबकि यूएस न्यूज इंडस्ट्री ने डिजिटल एडवर्टाइजिंग से 5.1 अरब डॉलर कमाए। एनएमए अमेरिका के 2,000 से भी ज्यादा अखबारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।

एनएमए के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी डेविड शेवर्न का कहना है कि जिन पत्रकारों ने यह कंटेट (न्यूज) तैयार किया, उन्हें 4.7 अरब डॉलर का कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि इस अनुमान में गूगल की उस आय का मूल्य नहीं जोड़ा गया है, जो उसे किसी उपभोक्ता के लेख को पसंद या क्लिक करने से हर बार जुटाई जाने वाली निजी जानकारी से होती है। यदि इसे भी शामिल किया जाए तो कमाई का आंकड़ा काफी आगे पहुंच जाएगा। वहीं, गूगल ने इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।

आज के समय में गूगल के ट्रेंडिंग प्रश्नों पर लगभग 40 प्रतिशत क्लिक्स खबरों के लिए होते हैं, जिन्हें कंपनी खुद तैयार नहीं करती। यानी एक तरह से देखा जाए तो गूगल पत्रकारों या मीडिया प्रतिष्ठानों के काम से अपनी जेब भर रहा है। गूगल और फेसबुक समाचार के वितरण को नियंत्रित करते हैं और बाहरी ट्रैफिक का 80 प्रतिशत इन दो कंपनियों के माध्यम से विभिन्न समाचार वेबसाइटों तक पहुंचाया जाता है।

न्यूयॉर्क मैगजीन के अनुसार, अमेरिका में 2004 से लेकर अब तक कई स्थानीय अखबार बंद हो चुके हैं और 2008 से 2017 तक न्यूज रूम के रोजगार में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी तरह भारत में भी मीडिया के हाल अच्छे नहीं हैं। कुछ संस्थान बंद हो गए हैं तो कुछ अपने स्टाफ में लगातार कमी कर रहे हैं।

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सोशल मीडिया में बयानबाजी करने पर तीन कांग्रेसी मुश्किल में

अपना पक्ष रखने के लिए तीनों को दिया गया 15 दिन का समय

Last Modified:
Saturday, 01 June, 2019
Congress

सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने के लिए कांग्रेस के तीन पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। उन पर हिमाचल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने का आरोप है। जिन पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें नादौन से विवेक कटोच, पांवटा से अजगर अली और ऊना से अजय जगोता के नाम शामिल हैं।

बताया जाता है कि निलंबित किए गए तीनों पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए अब 15 दिन का समय दिया गया है। 15 दिन के भीतर इन तीनों पदाधिकारियों का जवाब मिलने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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वॉट्सऐप लाएगा ये नया फीचर, कर सकेंगे खूब प्रमोशन

वॉट्सऐप की ओर से वर्ष 2020 में की जाएगी नए फीचर की शुरुआत

Last Modified:
Tuesday, 28 May, 2019
WhatsApp

फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप में अगले साल से यूट्यूब और फेसबुक की तरह विज्ञापन भी दिखाई देंगे। कंपनी ने नीदरलैंड में हुई फेसबुक मार्केटिंग समिट में स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2020 से वॉट्सऐप के स्टेटस पेज पर विज्ञापन भी दिखाई देने लगेंगे। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि वर्ष 2020 के किस महीने से इसकी शुरुआत होगी।

फेसबुक के हेड ऑफ मीडिया (सोशल एडवर्टाइजिंग) ओलिवियर पोंटेविले ने अपने ट्वीट में इस समिट की तस्वीर को शेयर कर विज्ञापन के फॉर्मेट को भी शो किया है। बताया जाता है कि विज्ञापन दिखाई देने वाले इस फीचर को वॉट्सऐप के स्टेटस टैब में जोड़ा जा रहा है। इसके द्वारा एडवर्टाइजर्स अपने विज्ञापन को दिखा सकते हैं।

विज्ञापन देने के इच्छुक लोगों को स्टेटस टैब में जाकर इसे शेयर करना होगा। वॉट्सऐप स्टेटस में यूजर्स टेक्स्ट, फोटोज, वीडियोज और एनिमेटेड GIF को शेयर कर सकते हैं, जो कि 24 घंटों के लिए एक्टिव रहता है। विज्ञापन पूरी स्क्रीन पर दिखाई देंगे और ये एक लिंक के साथ होंगे। बताया जाता है कि वॉट्सऐप में इस फीचर को जोड़ने की मुख्य वजह फेसबुक के एडवर्टाइजिंग सिस्टम का दायरा बढ़ाना है।

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ABP News: काउंटिंग के दिन दिखाया दम, कुछ यूं बना नंबर 1

दर्शकों को जोड़े रखने के लिए न्यूज चैनल की ओर से की गई थी विशेष तैयारी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
ABP News

देश में लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए गए। इस चुनावी महाकुंभ की कवरेज में सभी न्यूज चैनल्स ने अपने-अपने स्तर पर व्युअर्स को जोड़े रखने के लिए तमाम कवायद कीं। इसके तहत ‘एबीपी न्यूज’ ने दर्शकों की पसंद के ध्यान रखते हुए टेलिविजन के साथ ही डिजिटल के मोर्चे पर भी अपनी दमदार मौजूदगी बनाए रखी। इसी का परिणाम रहा कि मतगणना वाले दिन इसका यूट्यूब चैनल नंबर वन बन गया।

इस दिन अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकलते हुए इसके लाइव यूजर्स की संख्या 8.3 लाख तक पहुंच गई। दरअसल, मतगणना के दौरान न्यूज उपभोग करने वालों की संख्या डिजिटल के मोर्चे पर काफी बढ़ गई थी, इसी का परिणाम रहा कि एबीपी के यूट्यूब चैनल को काफी ट्रैफिक मिला। इस बारे में

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है, ‘अपनी व्युअर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हमने डिजिटल मीडियम के साथ नया प्रयोग किया। इसके तहत हमने न्यूजरूम से हो रहे प्रसारण को यूट्यूब पर भी दिया, ताकि हमारे व्युअर्स कहीं आने-जाने के दौरान अपने स्मार्टफोन पर भी इन चुनावी नतीजों को देख सकें।’

 

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सोशल मीडिया पर ऐश्वर्या राय का यूं मजाक उड़ाया विवेक ओबरॉय ने

एक समझदार और संवेदनशील व्यक्ति अपने पुराने संबंध/प्रेम/दोस्ती की खुलेआम चर्चा करने में भी संकोच करता है

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Vivek Oberoi

ऐसे हीरो होते हैं हमारे देश में. कुंठाओं से भरे हुए, पतित और गलीच..

बॉलीबुड के अभिनेता विवेक ओवरॉय ने अपने ट्विवटर हैंडल अकाउंट से पवन सिंह को क्रेडिट देते हुए ये तस्वीर साझा की है. जाहिर है तस्वीर में एक्जिट पोल स्लग लगाया गया है तो इशारा किस तरफ है. लेकिन जिस बेशर्मी से इन्होंने एश्वर्या राय बच्चन को डिमीन करने की हरकत की है वो ये समझने के लिए काफी है कि समाज का आदर्श कौन बनने जा रहा है ?

एक समझदार और संवेदनशील व्यक्ति अपने पुराने संबंध/प्रेम/दोस्ती की खुलेआम चर्चा करने में भी संकोच करता है, निजता की रक्षा करता है लेकिन फिर वही बात कि जब समझदार होने की परिभाषा ही उलट गयी हो तो..

देखें विवेक ओबरॉय का ट्वीट

(मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार की फेसबुक वॉल से)

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