अंजना ओम कश्यप को लिखा डॉक्टर्स का ये खत हो रहा है वायरल

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है

Last Modified:
Thursday, 20 June, 2019
anjana

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बात हो रही है। कुछ उन्हें सही बता रहे है, तो कई ने उनकी रिपोर्टिंग स्टाइल को कठघरे में खड़ा किया है। 
ऐसे में अब मेडिकल फेटरनिटी द्वारा लिखित एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फेसबुक पर बेहद सक्रिय डॉक्टर सुभाष शल्या ने ये पत्र शेयर किया है, जिसके बाद से लगातार लोग इस पर कमेंट कर रहे हैं। हम इस पत्र की सत्यता को प्रमाणित नहीं कर रहे हैं, बस इसमे उठे मुद्दों से आपको अवगत करा रहे हैं। 
आप ये पत्र नीचे पढ़ सकते हैं...
To
Anjana Om Kashyap
Aaj tak

Dt. 18.06.2019
Mrs. Kashyap 
You entered ICU with your shoes, camera, camera person, Mike, and all equipments did you care enough to change your clothes in protocol to ICU. 

Above it you shouted on doctor on duty for whom every life is precious. You must have came to Patna in flight , traveling to muzzafarpur via ac van but that doctor works day and night there with minimum standards. Did you care to ask questions to minister, MLA, MPs of that area.

No you won't ever bcz you all are filling your banks with their money. But that doctor reached at that point via merit and for him a life is life. We doc never ever kill patient intentionally. 
Do you know how much effort we put in to reach here? Cracking PMT among 15 lakhs candidate we qualify, reaching college we study day and night writing this letter i am sitting in library with my medicine book.

Then qualify pg entrance in which for 1.5 lakh 5000 gets qualified and you dare to ask our morality? Where are your morals when you journalist lick the foots of politicians?

We stand doing duty for continuously 24-36 hours on regular basis with a bare minimum salary of 50-60 k and you raisw questions about our character? 

You must thank your luck that on that day a doc like me wasn't on duty otherwise i would have made sure to throw you out of my ICU.

We are the backbone of medicine without facilities we treat we diagnose we bring people out of death so next time while questioning my morality look inside yours first. And if have problem ask govt to spend 10% of GDP on health, but no you can't do that bcz your media houses run bcz of government. 

If you want to debate come in open field we will have and make sure that day you leave aside the shield of journalism 

We were we are we will remain to be brightest brain bcz we know how to defeat death.
Singing off
On behalf of medical fraternity.
 

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गूगल ने बताई वजह, क्यों हटाए Play Store से कुछ Apps

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ ने पिछले दिनों अपने प्ले स्टोर से दो ऐप्स ‘मित्रों’ (Mitron) और ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ (Remove China Apps) को हटा दिया है।

Last Modified:
Friday, 05 June, 2020
Google Play

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ‘गूगल’ ने पिछले दिनों अपने प्ले स्टोर से दो ऐप्स ‘मित्रों’ (Mitron) और ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ (Remove China Apps) को हटा दिया है। बताया जाता है कि ‘मित्रों’ ऐप पर कॉपी किए जाने के आरोप लग रहे थे, वहीं, ‘रिमूव चाइना ऐप्स’ की ओर से गूगल की कुछ नीतियों का उल्लंघन किया जा रहा था।

अपने इस कदम को लेकर गूगल को सोशल मीडिया पर तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। इस बारे में गूगल के वाइस प्रेजिडेंट (एंड्रॉयड और गूगल प्ले) समीर सामत (Sameer Samat) की ओर से एक स्टेटमेंट जारी किया गया है।  

उन्होंने कहा है, ‘गूगल प्ले की ग्लोबल पॉलिसियों को इस तरह बनाया गया है कि कंज्यूमर्स को एक सुरक्षित अनुभव मिल सके और डेवलपर्स को अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिल सके। इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में हमने टेक्निकल पॉलिसी के उल्लंघन करने पर एक विडियो ऐप को हटा दिया है। हमारे पास डेवलपर्स की मदद के लिए एक स्थापित प्रक्रिया है, ताकि वे इन मुद्दों को हल कर सकें और अपने ऐप्स को दोबारा से इस प्लेटफॉर्म पर ला सकें। हमने डेवलपर को कुछ गाइडेंस दिया है। एक बार वे इन मुद्दों को हल कर लेते हैं तो ऐप को वापस प्ले स्टोर पर लिया जा सकता है।’

उनका कहना है कि जब कोई ऐप अन्य ऐप को हटाने की पैरवी करता है या इस तरह की हरकतों को बढ़ावा देता है, तो गूगल इसे डेवलपरों और उपभोक्ताओं के अपने समुदाय के हितों के प्रतिकूल मानती है। समीर सामत की ओर से यह भी कहा गया है कि नीतियों का उल्लंघन करने पर गूगल प्ले की ओर से हाल ही में कई ऐप्स को हटाया गया है। उनका यह भी कहना है कि हमने पूर्व में लगातार कई देशों में अन्य ऐप्स के खिलाफ इस नीति को लागू किया है, ऐसा ही हमने यहां पर भी किया है।

 

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सीनियर रिपोर्टर की दिलेरी पर ट्रोलर्स ने उठाए सवाल, तमाम पत्रकारों ने लगा दी क्लास

जितेंद्र दीक्षित को उनकी बेहतरीन खबरों के कई बार सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन इस बार वे अपनी ही कवरेज को लेकर ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
jitendra

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र को एक और मुसीबत का सामना करना पड़ा। दरअसल 129 साल बाद पहली बार मुंबई में इतना भयानक तूफान (निसर्ग) आया, जिसने करीब पांच घंटे तक मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में तबाही मचाई। बताया जा रहा है कि करीब 120 किलोमीटर की रफ्तार से आए इस तूफान से महाराष्ट्र में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में इस तरह के तूफान के बीच रिपोर्टिंग कर पाना पत्रकारों के लिए बेहद मुश्किल भरा होता है।

वहीं दर्शकों तक निसर्ग तूफान के पल-पल की खबर को कवर करने के लिए एबीपी न्यूज ने अपने 16 रिपोर्टर मैदान पर उतार दिए, जिनमें से एक थे एबीपी न्यूज के जाने-माने पत्रकार जितेंद्र दीक्षित। वैसे तो जितेंद्र दीक्षित को उनकी बेहतरीन खबरों के कई बार सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन इस बार वे अपनी ही कवरेज को लेकर ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए और उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जाने लगा। दरअसल, इस वीडियो में वे बहुत ही तेज हवाओं के बीच निसर्ग तूफान की जानकारी लोगों तक पहुंचाते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि खुद को संभाले रख पाना उनके लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा था। उनके पैर लड़खड़ा रहे थे।

लिहाजा ट्रोलर्स ने उनकी इस जोखिम भरी रिपोर्ट को ट्रोल कराने के लिए बैकग्राउंड में खड़े कुछ लोगों का सहारा लिया और यह बताने की कोशिश की कि पीछे खड़े लोग साधारण तरीके से काम कर रहे हैं, लेकिन रिपोर्टर कटी पतंग की तरह रिपोर्ट कर रहे हैं। हालांकि जैसे ही पहले एक ट्रोलर ने ये ट्वीट किया वह तमाम पत्रकारों के निशाने पर आ गए।

 

 

 

 

जवाब देने के लिए इस बीच जितेंद्र दीक्षित का एक और वीडियो ट्विटर पर शेयर किया गया, जो लाइव ऑन एयर होने से पहले का है, जिसमें जितेंद्र लड़खड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं और वे खुद को संभालने के लिए पास में खड़ी कार का सहारा लेते हैं और बार-बार लाइव रिपोर्टिंग के लिए खुद को तैयार करते हैं।

अरब सागर से निसर्ग का आगमन बेहद तूफानी और डरावना था। ऐसे में रिपोर्टर ने बेहद ही दिलेरी से अपनी रिपोर्टिंग को अंजाम दिया, जोकि सराहनीय था।  

एबीपी न्यूज के मैनेजिंग एडिटर रजनीश आहूजा ने निसर्ग की कवरेज कर रही टीम की तारीफ करते हुए ट्वीटर पर लिखा, ‘घरों में बैठकर आलोचना करना आसान है, लेकिन वे लोग कभी नहीं समझ पाएंगे कि इन स्थितियों में रिपोर्टिंग करना कितना मुश्किल है। महाराष्ट्र में एबीपी की टीम ने शानदार काम किया है।’  

पत्रकार मृत्युंजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘कोरोना से पीड़ित है उनका इलाज संभव है पर जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नही उनका क्या  इलाज? तबियत खराब, शुगर लेवल की कमी, बिना खाए पिए सुबह 7 से रात 8 बजे तक जोश के साथ ग्राउंड पर डटे रहे। जितेंद्र दीक्षित आप पर गर्व है व आप टीवी पत्रकारों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं।

हालांकि इस पर ‘साम टीवी’ के एडिटर नीलेश खरे ने लिखा, ‘जितेंद्र मेरे पुराने साथी हैं, 20 साल से मैंने उनकी पत्रकारिता देखी है। जान की बाजी लगाकर उन्होंने कई खबरें समाज तक पहुंचाई हैं। तथ्यों को बिना जाने इस प्रकार से उन पर टिप्पणी करना गलत है और मूर्खतापूर्ण।  मृत्युंजय आप सही कह रहे हैं। हम सब जितेंद्र दीक्षित के साथ हैं।

वहीं ‘आजतक’ की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने ट्वीट किया, ‘जिन्हें मैं जानती हूं उनमें से एक हैं जितेंद्र दीक्षित, जो जान की बाजी लगाकर पैशन के साथ अपना काम करते हैं। अच्छी स्टोरी के लिये रात-दिन में फर्क नहीं करते। ऐसे रिपोर्टर के बारे में टिप्पणी करने वाले लोगों को मूर्ख कहा जा सकता है, जिनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।’

जवाब में वरिष्ठ पत्रकार निखिल कुमार दुबे ने लिखा, ‘भौतिकी विज्ञान की पढ़ाई इसीलिए जरूरी है। अतार्किक बातें न लिखने में मदद मिलती है। जितेंद्र की जगह और पीछे काम करने वाले कि जगह का फर्क बयान का आधार बदल देगी। जितेंद्र दीक्षित खबर ही करते हैं, वो नाटकीयता से दूर रहते हैं।

पत्रकार ब्रजेश राजपूत ने ट्वीट किया, ‘तेज हवाओं में खुले में खड़े होकर लाइव रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल होती है, 2014 में हमने हुद हुद तूफान के दौरान देखा था जब घर में रहना सुरक्षित नहीं तो बाहर रहना जान जोखिम में डालना है।

 

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फेसबुक के वर्किंग कल्चर में हो सकता है ये बड़ा बदलाव!

लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि घर से अथवा दूर बैठकर काम करना जल्द एक बढता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Facebook

इन दिनों पूरी दुनिया कोरोनावायरस (कोविड-19) के कहर का सामना कर रही है। कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर तमाम कंपनियां अपने एंप्लाईज से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करा रही हैं। इन सबके बीच अब सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि वर्ष 2030 तक कंपनी के करीब आधे एंप्लाईज घरों से ही काम करने लगेंगे। फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान उन्होंने यहां तक कहा कि कंपनी अपने तमाम एंप्लाईज को स्थायी रूप से घर से काम करने की इजाजत देगी।

जुकरबर्ग की ओर से यह भी कहा गया है, ‘हम अपने काम को अब इस तरह शिफ्ट कर रहे हैं कि लोग चुन सकते हैं कि वे कहां से बेहतर काम कर सकते हैं। हम इस दिशा में तकनीकी रूप से काम करना जारी रखे हुए हैं। एक बार यह महामारी गुजरने के बाद मुझे उम्मीद है कि दूर बैठकर अथवा घर से काम करना जल्द ही एक बढ़ता हुआ ट्रेंड बनने जा रहा है।’

फेसबुक की ओर से एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि नई टेक्नोलॉजी हमें आपस में जुड़े रहने और प्रॉडक्टिव यानी उत्पादक बने रहने में मदद कर रही है। बता दें कि ‘गूगल’ अपने एंप्लाईज को इस पूरे साल घर से काम करने की छूट दे रही है। ‘अमेजॉन’ और ‘माइक्रोसॉफ्ट’ भी इस साल कम से कम अक्टूबर तक ऐसा करना जारी रखेंगी।

 

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ShareChat ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को दिखाया बाहर का रास्ता, पर रखे ये दो ऑप्शन

वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है, जिनमें अब सोशल मीडिया फर्म शेयरचैट का नाम भी शामिल हो गया है। शेयरचैट ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
Share Chat

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को कम करने लिए लागू किए लॉकडाउन का असर अब कई कंपनियों पर भी पड़ने लगा है। ऐसे में वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कई कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है, जिनमें अब सोशल मीडिया फर्म शेयरचैट का नाम भी शामिल हो गया है। शेयरचैट ने अपने 101 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि निकाले गए एम्प्लॉयीज उसकी पूरी टीम का एक चौथाई हिस्सा हैं।

शेयरचैट  मात्र 5 साल पुरानी कंपनी है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ऐडवर्टाइजिंग मार्केट को काफी नुकसान हुआ है, जिसका सीधा असर अब इस कंपनी पर भी पड़ते हुए दिखाई दे रहा है।

शेयरचैट के सीईओ अंकुश सचदेवा ने कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में लिखा कि हम मजबूर हैं। इस साल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अप्रत्याशित रहेगा, इसलिए कंपनी ने लागत में कटौती करने का फैसला किया है।  इस ई-मेल में यह भी कहा गया है कि कंपनी लागत में कटौती के अलग-अलग उपायों के बारे में विचार कर रही है।

सीईओ अंकुश सचदेवा ने मेल में कहा, हमें अब अपने मुख्य प्रॉडक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। हम बिजनेस पर फिर से विचार करने पर मजबूर हैं। पिछले साल कंपनी ने अच्छी पूंजी जुटाई थी, लेकिन इस साल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अप्रत्याशित रहेगा। इसलिए हमें कंपनी को बनाए रखने के लिए मूल सिद्धांतों को फिर से अपनाना होगा।

सचदेवा ने कहा, हम अब रेवेन्यू टीम को नई उम्मीद के साथ व्यवस्थित कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे लोग शेयर चैट को खड़ा रखने के लिए दिन-रात ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं। यह समय हमारे लिए बहुत कठिन है, मुझे उम्मीद है कि आप हमारी मजबूरी को समझ गए होंगे, हमें संगठन को बनाए रखने और कोरोना संकट के दूसरे पक्ष को देखने के लिए ऐसा करना पड़ रहा है। शेयरचैट के प्रवक्ता ने कर्मचारियों को निकालने की पुष्टि करते हुए कहा, वैश्विक महामारी ने कठिन फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया है।

कंपनी निकाले गए एम्प्लॉयीज के सामने 2 महीने का 'गार्डन लीव’ या चार महीने के लिए आधा वेतन लेने का विकल्प रखा है। गार्डन लीव एक एक्सरसाइज है जब एक टर्मिनेटेड कर्मचारी नोटिस अवधि के दौरान काम से दूर रहता है, जबकि पेरोल जारी रहता है। इसके अलावा, एम्प्लॉयीज को हर साल कंपनी के लिए काम करने के लिए 1 महीने की एक्स ग्रैटिया मिलेगी।

सचदेवा ने कहा कि, प्रभावित कर्मचारी साल के अंत तक शेयरचैट की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के दायरे में रहेंगे, और कंपनी स्टॉक कर्मचारियों के लिए समयसीमा का विस्तार वर्ष के अंत तक करेगी. इसका मतलब यह होगा कि साल के अंत तक कर्मचारियों को अधिकृत करने का विकल्प बना रहेगा.

उन्होंने कहा कि कंपनी सभी प्रभावित कर्मचारियों को बाजार में उपलब्ध नौकरी ढूढने में मदद करेगी और उन्हें दूसरे संगठनों, और एजेंसियों से जोड़ेगी. इसके लिए कर्मचारियों को अपने रिज्यूम और लिंक्डइन प्रोफाइल को बनाने में मदद करने के लिए एक पेशेवर रिज्यूमे बनाने वाले के साथ एग्रीमेंट किया है.

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कारोबारियों के लिए फेसबुक की बड़ी पहल, लॉन्च किया ये नया फीचर

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोरोवायरस (कोविड-19) महामारी के दौरान व्यापारियों को सपोर्ट करने की कोशिश है।

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2020
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सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोरोवायरस (कोविड-19) महामारी के दौरान छोटे व्यापारियों को सपोर्ट करने की कोशिश के तहत कदम आगे बढ़ाया है। दरअसल फेसबुक ने एक नया फीचर ‘शॉप्स’ (Shops) लॉन्च किया है। इस फीचर को लॉन्च करने का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि उस पर वे अपने प्रॉडक्ट प्रदर्शित कर सकें। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने मंगलवार को इस बारे में घोषणा की है।

इस सर्विस के तहत दुकानदर अपने कस्टमर्स के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक ऑनलाइन स्टोर तैयार कर सकते हैं। बिजनेसमैन जिन प्रॉडक्ट्स को इन प्लेटफॉर्म पर रखना चाहते हैं, वे उनका चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा वे अपने प्रॉडक्ट्स और ब्रैंड्स को प्रदर्शित करने के लिए इस ‘शॉप’ के लुक को अपने हिसाब से सेट कर सकते हैं। उसका कवर पेज बदल सकते हैं अथवा उसे एक नया रंग दे सकते हैं और अपने मनचाहे प्रॉडक्ट को उसमें सजा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक शॉप्स को फिलहाल अमेरिका  में जारी कर दिया गया है। इंस्टाग्राम में इस फीचर को आने वाले महीनों में लाया जाएगा। साथ ही इस नए फीचर को जल्द ही भारत समेत अन्य बाजारों में भी उतारा जाएगा। यह फीचर फ्री होगा। कंपनी ने अपने ब्लॉग में कहा है, ‘हम लोगों की खरीदारी की खुशी को एक नया अनुभव देना चाहते हैं और हम छोटे बिजनेस को ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहते हैं, जहां पर लोग अपने पसंद की चीजें तलाश सकें और उन्हें खरीद सकें।’

 

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Facebook की नई डील, अब इस कंपनी को खरीदा

आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस (Reliance Jio) में भी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

Last Modified:
Saturday, 16 May, 2020
Facebook

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook) ने एनिमेटेड इमेज लाइब्रेरी 'जिफी' (GIPHY) को खरीद लिया है। फेसबुक ने यह जानकारी अपने ब्लॉग के जरिए दी है। बता दें कि ये सौदा 40 करोड़ डॉलर (करीब 3040 करोड़ रुपए) में हुआ है।

आपको बता दें कि Giphy विडियो क्लिप्स की लाइब्रेरी और एनिमेटेड इमेज जिन्हें GIF के नाम से जाना जाता है उसकी बहुत बड़ी लाइब्रेरी है। Giphy अलग-अलग प्लेटफॉर्म जैसे ट्विटर, टिकटॉक, फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम में यूजर्स को इंटरेक्टिव GIF और छोटी-छोटी विडियो प्रोवाइड करती है।

Giphy को फेसबुक के स्वामित्व वाले फोटो और विडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के साथ जोड़ा जाएगा। फेसबुक ने 100 से ज्यादा Giphy के कर्मचारियों को अपने साथ शामिल कर लिया है। फेसबुक पहले से ही Giphy की लाइब्रेरी को अपने मैसेजिंग प्रॉडक्ट पर यूज करता है।

फेसबुक ने बताया कि अब यूजर्स मैसेज और स्टोरीज के लिए आसानी से GIF और stickers खोज पाएंगे। Giphy का 50 प्रतिशत से ज्यादा ट्रैफिक फेसबुक से जुड़े ऐप्स से आता है, जिनमें से आधा ट्रैफिक केवल इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म से आता है। फेसबुक ऐप, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप में लंबे समय से Giphy के एप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस का इस्तेमाल हो रहा है।

वैसे फेसबुक ने साल 2015 में भी Giphy का अधिग्रहण करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय Giphy ने कई अलग-अलग सोशल मीडिया कंपनियों के साथ डील की हुई थी। इसीलिए फेसबुक के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

आपको बता दें कि हाल में फेसबुक ने भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस (Reliance Jio) में भी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

 

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भारी पड़ सकती है अखबारों को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही ये 'कारगुजारी'

न्यूज पब्लिशर्स इन दिनों ऐसे ऑनलाइन ग्रुप्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लगाम लगाने की तैयारी में हैं

Last Modified:
Wednesday, 06 May, 2020
PDF

न्यूज पब्लिशर्स इन दिनों ऐसे ऑनलाइन ग्रुप्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ लगाम लगाने की तैयारी में हैं, जो पाठकों को रोजाना लोकप्रिय अखबारों के पीडीएफ संस्करण शेयर कर रहे हैं।   

तमाम अखबारों के प्रबंधन के लिए सोशल मीडिया पर इस तरह अखबारों के पीडीएफ का सर्कुलेशन कुछ और नहीं, बल्कि पायरेसी का एक रूप है। बताया जाता है कि जल्द ही सिर्फ सबस्क्राइब्ड मेंबर्स यानी जिन्होंने सबस्क्रिप्शन लिया है, वे ही ऑनलाइन न्यूजपेपर का उपयोग कर पाएंगे।  

इस बारे में ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (Indian Newspaper Society) सचिवालय की महासचिव मैरी पाल का कहना है, ‘हमारी जानकारी में आया है कि कुछ पब्लिशर्स को अखबारों के डिस्ट्रीब्यूशन में कुछ परेशानी आ रही है और पायरेसी के मामले, खासकर डिजिटल फॉर्मेट में ज्यादा बढ़ रहे हैं।’

दरअसल, आजकल तमाम अखबार ई-प्रारूप (epaper format) में उपलब्ध हैं, जिन्हें ऑनलाइन पढ़ा जा सकता है, जिनमें से कुछ तो बिल्कुल मुफ्त हैं। वैश्विक महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण अखबारों का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ है। खासकर, अप्रैल की शुरुआत में देश के कई स्थानों पर अखबारों का सर्कुलेशन बंद कर दिया गया था, तब से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर ईपेपर्स की उपलबध्ता में काफी बढ़ोतरी हुई।  

‘आईएनएस’ के अनुसार, तमाम यूजर्स अखबार के पेजों की पीडीएफ (PDF) बना रहे हैं और उसे वॉट्सऐप और टेलिग्राम ग्रुप्स पर पाठकों को भेज रहे हैं। इससे अखबारों और ई-पेपर्स को सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू के रूप में काफी नुकसान हो रहा है। ‘आईएनएस’ ने भी सोशल मीडिया पर अखबारों के इस तरह सर्कुलेशन को गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि तमाम पब्लिकेशंस अपने तरीके से इससे लड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए ‘आईएनएस’ ने कुछ सुझाव भी दिए हैं।  

1: ऐप्स, वेबसाइट और अखबारों में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाए कि इस तरह किसी भी अखबार अथवा उसके कुछ हिस्से को सर्कुलेट करना गैरकानूनी है और भारी जुर्माना लगाने के साथ ही कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

2: कानूनी कार्यवाही के बारे में कुछ खबरें प्रसारित करें, जिसमें भारी जुर्माने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के बारे में बताया जाए, ताकि अन्य लोगों को ऐसा करने से रोका जा सके।  

3: इस तरह की गतिविधियों में लिप्त लोगों खासकर वॉट्सऐप और टेलिग्राम एडमिन के खिलाफ कानूनी कदम उठाएं और उन्हें कानूनी नोटिस भेजें। किसी भी वॉट्स ग्रुप में कुछ भी गैरकानूनी होता है, तो उसके लिए ग्रुप का एडमिन ही उत्तरदायी होता है।

4: कुछ ऐसे फीचर्स तैयार करें, जिससे पायरेसी को रोका अथवा कम किया जा सके। जैसे-पीडीएफ और इमेज डाउनलोड को सीमित कर दिया जाए। पेजों को कॉपी न किया जा सके, इसके लिए उसमें कुछ कोडिंग की जाए। इसमें यूजर आइडेंटिफायर कोड डाला जाए, जो दिखाई न दे। ताकि सोशल मीडिया पर पीडीएफ सर्कुलेट करने वालों की पहचान हो सके। प्रति सप्ताह एक निश्चित संख्या से अधिक पीडीएफ डाउनलोड करने वाले यूजर्स की सूची तैयार हो और उन्हें ब्लॉक किया जाए।

बताया जाता है कि कुख अखबारों ने इन सुझावों पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ ने वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम ग्रुप पर ऑनलाइन सर्कुलेशन के रूप में अखबारों की चोरी के बारे में एक खबर भी प्रकाशित की थी। इस खबर में कहा गया था कि वॉट्सऐप पर ई-पेपर के पीडीएफ शेयर करना गैरकानूनी है और इसका पालन न करने की स्थिति में ग्रुप एडमिन के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ‘फ्री प्रेस जर्नल’ (Free Press Journal) में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया कि वॉटसऐप, टेलिग्राम या अन्य किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फ्री प्रेस जर्नल के ई-पेपर के पीडीएफ को साझा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इन दोनों परस्पर विरोधी खबरों से लोगों में भ्रम पैदा हो गया कि वास्तव में ई-पेपर की पीडीएफ शेयर करना सही है या नहीं।

इसके बाद ‘इंडिया टुडे’ के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि अगर कोई अखबार ई-पेपर की पीडीएफ मुफ्त में उपलब्ध कराता है तो उसे प्रसारित करना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन अगर कोई अखबार ई-पेपर के पैसे लेता है तो उसकी पीडीएफ बनाकर शेयर करना गैरकानूनी है। इसके अलावा, किसी भी ई-पेपर को डाउनलोड करके या कॉपी करके पीडीएफ बनाना और उसे टेलिग्राम और वॉट्सऐप आदि पर सर्कुलेट करना गैरकानूनी है।

इस बारे में उत्तर भारत के एक प्रमुख अखबार के मार्केटिंग हेड का कहना है, ‘अखबार उस समाचारपत्र मैनेजमेंट की प्रॉपर्टी है। इसे या तो खरीदकर अथवा ऑनलाइन सबस्क्राइब कर पढ़ा जा सकता है। इंडस्ट्री पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। हम नहीं चाहते कि पाठक प्रिंट मीडिया को छोड़ दें। सभी अखबार इस मामले में एक साथ हैं और इस स्थिति से निपटने के लिए जल्द ही एक प्लान लेकर आएंगे। हमें विश्वास है कि हमारे संरक्षक इसमें हमारे साथ खड़े होंगे।’

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ट्विटर पर भड़के बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े, PMO को लिखे लेटर में दिया ये सुझाव

अपना ट्विटर अकाउंट बंद किए जाने को लेकर भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जमकर भड़ास निकाली है

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2020
Anant Kumar Twitter

भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है। इस बात को लेकर उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। हेगड़े का कहना है कि ट्विटर भारत विरोधी रुख अपनाने को तवज्जो देने के साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा रहा है। इसके साथ ही हेगड़े ने कंपनी के डिजिटल उपनिवेशवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि ट्विटर की जांच के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को छह पॉइंट्स को भी ध्यान में ऱखना चाहिए।

इन पॉइंट्स में कहा गया है कि राष्ट्रवादी ट्विटर अकाउंट्स को निशाना बनाया जा रहा है। चुने गए जनप्रतिनिधियों से संबंधित ट्विटर हैंडल्स को बिना किसी नोटिस के सस्पेंड किया जा रहा है। भुगतान किए गए विज्ञापनों (paid ads) के माध्यम से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आदि के बारे में ‘जहर’ उगला जा रहा है।  किसी भी धर्म या देश के खिलाफ असंतोष, फेक न्यूज और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वाले हैंडल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि ट्विटर खालिस्तान समर्थक ट्वीट्स को इतना कठोर नहीं मानता है, जितना राष्ट्रवादियों को। इसके साथ ही उन्होंने इस पत्र में अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (Wall Street Journal) का वह ट्वीट भी शामिल किया है, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में नागरिक स्वतंत्रताएं दाव पर थीं, जिसे तमाम शिकायतों के बाद भी नहीं हटाया गया है।

भाजपा सांसद ने देश के ‘डिजिटल उपनिवेशीकरण’ (Digital colonisation) को रोकने के लिए ‘NIC’, ‘CDAC’ अथवा ‘CDOT’ की मदद से माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट का एक भारतीय संस्करण विकसित करने का भी सुझाव दिया। हेगड़े ने यह भी कहा है कि उनका पर्सनल ट्विटर अकाउंट और पॉलिसी थिंक टैंक @CksIndia, जिसने इस साइट द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों का मुद्दा उठाया था, उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। अपने पत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है कि वह ऐसे कृत्यों के पीछे के उद्देश्यों की जांच करे और यह पता लगाए कि क्या माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट भारतीय विरोधी, मोदी विरोधी और भाजपा विरोधी ट्वीट को बढ़ावा देने के लिए पैसे लेती है।

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Facebook ने मुकेश अंबानी की इस कंपनी में किया निवेश, जानिए क्या होगा फायदा

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली  रिलायस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक बड़ी डील  हुई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2020
mukesh

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली  रिलायस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक बड़ी डील  हुई है। फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 43,574 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया है। इस बड़ी डील के बाद फेसबुक अब जियो की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई है। फेसबुक के इस निवेश के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स की एंटरप्राइज वैल्यू 4.62 लाख करोड़ हो गई है।

माइनॉरिटी इंवेस्टमेंट के लिहाज से यह सबसे सबसे बड़ा विदेशी प्रत्क्ष निवेश (FDI) है। दोनों कंपनियों की साझेदारी से रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे और साथ ही बिजनेस बढ़ेगा। इसके अलावा इस सौदे से रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप को अपने कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी तथा फेसबुक की भारत में स्थिति और मजबूत होगी।

इस बड़ी डील को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि जब रिलायंस ने 2016 में जियो को लॉन्च किया था तब हम हर भारतीय के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल सोसाइटी के रूप में प्रचारित करने के सपने से प्रेरित थे। इसलिए रिलायंस के हम सभी लोग भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने और बदलाव लाने के लिए हमारे साझेदार के रूप में फेसबुक का स्वागत करते हैं।

फेसबुक ने कहा, 'यह निवेश भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जियो भारत में जो बड़े बदलाव लाया है, उससे हम भी उत्साहित हैं। 4 साल से भी कम समय में रिलायंस जियो 38 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लेकर आया है। इसलिए हम जियो के जरिए भारत में पहले से ज्यादा लोगों के साथ जुड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

इस डील के बाद जुकरबर्ग ने कहा, मैं मुकेश अंबानी और पूरी जियो टीम को उनकी साझेदारी के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं नई डील को लेकर बहुत उत्साहित हूं। वहीं रिलायंस ने एक अलग बयान में कहा कि फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स पर 4.62 लाख करोड़ रुपए के प्री-मनी एंटरप्राइज वैल्यू (यूएसडी 65.95 बिलियन अमरीकी डॉलर को 70 रुपए प्रति डॉलर पर चेंज करने के बाद) मानकर निवेश किया।

गौरतलब है कि जियो की शुरुआत 2016 में हुई थी। धीरे-धीरे इसने टेलिकॉम इंडस्ट्री में अपनी धाक जमा ली। टेलिकॉम और ब्रॉडबैंड से लेकर ई-कॉमर्स में इसने अपना विस्तार किया और 38 करोड़ ग्राहकों तक पहुंच गई। फेसबुक की बात करें तो भारत में इसके 40 करोड़ यूजर्स हैं और इंटरनेट यूजर्स की संख्या इस साल 85 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।


 

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गूगल की इस पहल से दुनियाभर के न्यूज पब्लिशर्स को होगा फायदा

कोविड-19 के प्रकोप का असर अन्य सेक्टर्स की तरह मीडिया इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है।

Last Modified:
Saturday, 18 April, 2020
Google

कोविड-19 के प्रकोप का असर अन्य सेक्टर्स की तरह मीडिया इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इस महामारी के बाद से मीडिया कंपनियों को मिलने वाले विज्ञापन में काफी कमी आई है। वहीं इस बीच मीडिया की आर्थिक हालत को देखते हुए गूगल ने एक बड़ा फैसला किया है। आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए गूगल न्यूज पब्लिशर्स की मदद करेगा।

गूगल ने शुक्रवार को कहा कि वह अपने न्यूज पार्टनर्स से 5 महीनों तक ऐड सर्विंग फीस नहीं लेगा। गूगल के इस फैसले का फायदा दुनियाभर के न्यूज पब्लिशर्स को होगा। आपको बता दें कि दुनियाभर के कई न्यूज पब्लिशर्स अपने डिजिटल बिजनेस पर विज्ञापन के लिए गूगल ऐड मैनेजर की सहायता लेते हैं।

गूगल की ओर से जारी बयान में निदेशक ग्लोबल पार्टनरशिप न्यूज जेशन वॉशिंग ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में गूगल न्यूज ने वित्तीय मदद देने की पहल शुरू की है। इस पहल के तहत पूरी दुनिया में वास्तविक पत्रकारिता करने वाले न्यूज संस्थानों को आर्थिक मदद दी जाएगी। वॉशिंग ने कहा कि हमारे सभी न्यूज पार्टनर्स को आने वाले दिनों में इस वित्तीय पहल की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

आपको बता दें कि न्यूज के साथ दिखने वाली ऐड, ब्रेकिंग न्यूज स्टोरी लिखने वाले जर्नलिस्ट्स को फंड उपलब्ध कराती है ताकि वे अपनी वेबसाइट या ऐप्स को लगातार अपडेट करते रहें। गूगल पूरी दुनिया में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर न्यूज सर्विस उपलब्ध कराता है। इसके लिए वह स्थानीय न्यूज पब्लिशर्स की मदद लेता है।

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