जब आशुतोष और रोहित सरदाना में हुई 'शालीन' बहस, कई पर साधा निशाना

इस कड़ी में सबसे नया नाम जुड़ा है ‘आजतक’ के दमदार एंकर रोहित सरदाना और पत्रकार से नेता बनकर वापस पत्रकारिता में लौटने वाले आशुतोष का...

Last Modified:
Tuesday, 08 January, 2019
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 के पहले इंटरव्यू से केवल सियासी हलकों में ही हलचल नहीं हुई बल्कि मीडिया में भी एक तरह से भूचाल आ गया है। पत्रकारों की एकजुटता पर सवाल तो उठ ही रहे हैं, साथ ही आपसी द्वन्द भी शुरू हो गया है। हालांकि, द्वन्द वैचारिक है और केवल शाब्दिक बाणों से ही एक-दूसरे को घायल किया जा रहा है। इस कड़ी में सबसे नया नाम जुड़ा है ‘आजतक’ के दमदार एंकर रोहित सरदाना और पत्रकार से नेता बनकर वापस पत्रकारिता में लौटने वाले आशुतोष का। दोनों ट्विटर पर बहस कर रहे हैं, अच्छी बात ये है कि इस बहस में मर्यादाओं को ख्याल रखा जा रहा है। वैसे भी, वरिष्ठ पत्रकारों से शाब्दिक मर्यादाओं का सम्मान रखने की अपेक्षा की जाती है।

दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत एक जनवरी से हुई। जब न्यूज़ एजेंसी ‘एएनआई’ की संपादक स्मिता प्रकाश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू के प्रसारण के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ पत्रकारों की उपस्थिति में स्मिता प्रकाश को निशाना बनाया। उनके द्वारा स्मिता के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द pliable (लचीला) इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा गया। राहुल के इस वार का मुकाबला करने के लिए कई पत्रकार मैदान में उतरे, जिसमें रोहित सरदाना के साथ ही ‘ज़ी न्यूज़’ के संपादक सुधीर चौधरी भी शामिल थे। एडिटर गिल्ड ने भी इस पर नाराज़गी जताई। स्मिता को मिले इस समर्थन से सवाल खड़ा हुआ कि क्या मीडियाकर्मियों की ये प्रतिक्रिया समानता के सिद्धांत पर आधारित है?

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने ट्विटर पर अपना दुःख साझा करते हुए कहा कि जब उनके जैसे पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा था, तब पूरा मीडिया खामोश क्यों रहा? इस बीच, पूर्व आप नेता और www.satyahindi.com के तौर पर अपना नया पत्रकारिता वेंचर लॉन्च करने वाले आशुतोष ने एडिटर गिल्ड और कुछ पत्रकारों की अतिसक्रियता पर अपने लेख के माध्यम से हमला बोला। उनके लेख का शीर्षक ‘क्या झुकने के लिये कहा गया तो रेंगने लगा है मीडिया?’

कुछ पत्रकारों को ये लेख नागवार गुज़रा, जिसमें रोहित सरदाना सबसे पहले स्थान पर आते हैं। रोहित ने इस लेख को ट्वीट करते हुए अपने विचार भी सामने रख दिए। उन्होंने लिखा कि ‘मीडिया रेंगने नहीं लगा है @ashutosh83b जी। पत्रकारों में भी बरसो से चले आ रहे ‘एकतरफ़ा नैरेटिव और ‘मठाधीशी’ को चुनौती देने वाली पीढ़ी खड़ी हो गई है। इसलिए कुछ लोगों को बुरा लगने लगा है।’     

रोहित सरदाना के विचारों का जवाब देने के लिए आशुतोष ने भी ट्वीट किया और इसके बाद तो दोनों में बहस शुरू हो गई। शब्द रूपी बाणों को ट्विटर रूपी कमान पर चढ़ाकर दोनों एक-दूसरे पर दागने लगे। रोहित को जवाब देते हुए आशुतोष ने लिखा ‘@sardanarohit भाई रोहित की राय से पूरी तरह से सहमत हूँ। नई पीढ़ी नया नैरेटिव लेकर आती है। पुरानी पीढ़ी को तकलीफ़ होती है। मेरी छोटी जिज्ञासा ये है कि नई पीढ़ी के नैरेटिव में मोदी/शाह से सवाल पूछना है या नहीं जैसे रोज राहुल गांधी को कठघरे में खड़ा किया जाता है’? इस पर रोहित ने कहा ‘निश्चित खड़ा किया जाता है! मोदी/शाह से ज़्यादा मीडिया ट्रायल राहुल गांधी का हुआ हो तो बताइए? बाक़ी रही बात स्मिता प्रकाश जी के इंटरव्यू की, तो बग़ल में हंटर रख के तो सवाल किए नहीं जा सकते! सवाल पूछने वाले ने सवाल पूछे, जवाब देने वाले की मर्ज़ी वो जैसे जवाब दे’!

दोनों इतने से ही शांत नहीं हुए। आशुतोष ने एक और ट्वीट दागते हुए लिखा ‘रोहित भाई ये पूरा सच नहीं है। सुबह से शाम तक सिर्फ़ राहुल से ही सवाल होते हैं। जब कि मीडिया का काम सरकार की चौकादारी करना भी है। मोदी से तीखे सवाल करने वाले ABP की गति को पाते हैं। ये तो सर्वविदित सच है’। इस ट्वीट का जवाब रोहित ने शब्दों की बाजीगरी के साथ दिया। उनके शब्दों में सम्मान भी था और तंज भी। उन्होंने लिखा ‘ग़लतफ़हमी है सर। पता नहीं हो जाती है या पैदा की जाती है! मीडिया अपना काम बख़ूबी कर रहा है। बाक़ी किसी चैनल पर टिप्पणी फ़िलहाल नहीं करूँगा। आपके वाली कटेगरी में आने के बाद लिखा जाएगा इस दौर की ‘कथित शहादतों’ पे भी कभी’!

इसके बाद आशुतोष ने भी एक कदम और बढ़ाते हुए ट्वीट किया ‘कोई नहीं! बहस होनी चाहिये। वैसे मैं मानता हूँ कि देश में काफी हद तक 2014 के पहले इकतरफ़ा नैरेटिव था। ये नैरेटिव बदला है पर ख़तरनाक तरीक़े से’। पूर्व नेता के इस ट्वीट का जवाब भी रोहित ने धमाकेदार अंदाज़ में दिया। उन्होंने कहा ‘बहस जारी रहेगी! छुट्टी पर हूँ, लौट कर अगला भाग। वैसे सर्दी किसी को अच्छी लगती है, किसी की जान पे बन आती है। नैरेटिव की कहानी भी ऐसी ही है। किसी को लगता है अब बैलेन्स हुआ, किसी की दुकानदारी ठप्प हो रही उसी बैलेन्स के चक्कर में’!

इस ट्वीट के साथ दोनों तो खामोश हो गए, लेकिन सुधीर चौधरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए साफ़ कर दिया कि ‘पिक्चर अभी बाकी है।’ उन्होंने रोहित के ‘निश्चित खड़ा किया जाता है...’ ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा ‘आप पास्ता बना लेती हैं? आपको भारतीय खाने में क्या पसंद है? आपके अपनी सास से कैसे सम्बंध थे? रसोई में क्या पकता था? आपका पालतू कुत्ता पिद्दी कैसा है? कभी मिलवाइए। समोसा कैसा लगा’? अपने इस ट्वीट में भले ही सुधीर ने किसी को प्रत्यक्ष रूप से निशाना न बनाया हो, लेकिन सब जानते हैं कि बात किसकी हो रही है और किसे जवाब दिया जा रहा है। कुल मिलकर कहा जाए तो पीएम के इंटरव्यू से शुरू हुआ विवाद अभी मीडिया और कुछ वक़्त तक छाया रहेगा

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पत्रकार ने तीन साल बाद वीरेंद्र सहवाग से कुछ यूं चुकता किया ‘हिसाब’

तीन साल पहले वीरेंद्र सहवाग ने करारा जवाब देकर बोलती बंद कर दी थी

Last Modified:
Thursday, 18 July, 2019
Virender Sehwag

क्रिकेट वर्ल्ड कप में इंग्लैंड की जीत के बाद ब्रिटेन के पत्रकार पीयर्स मॉर्गन ने भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के साथ अपना तीन साल पुराना ‘बदला’ लिया है। इस मामले की शुरुआत वर्ष 2016 में रियो ओलिंपिक के दौरान उस समय हुई थी, जब 24 अगस्त 2016 को तारिक वैद्य नाम के शख्स ने अखबार में छपी एथलीट्स के स्वागत वाली खबर का फोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। उसने लिखा था, 'भारत में एक सिल्वर और 1 ब्रोंज जीतने पर हमारे एथलीट इस तरह का स्वागत पाते हैं।'

अपने इस ट्वीट को उसने ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट @WalesOnline को टैग भी किया था। वैद्य के इसी ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए पीयर्स मॉर्गन ने भारत का मजाक उड़ाया था। मोर्गन ने लिखा था, '1.2 अरब जनसंख्या वाला देश 2 मेडल्स जीतने पर खुशी से फूला नहीं समा रहा है। ये कितना शर्मनाक है।' बता दें कि ब्राजील में हुए ओलंपिक में भारत ने एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसमें पीवी सिंधू ने सिल्वर और साक्षी मलिक ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। भारत लौटने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ था।

इस ट्वीट के बाद वीरेंद्र सहवाग ने पीयर्स मॉर्गन की अपने एक ट्वीट के जरिये बोलती बंद कर दी थी। पीयर्स मॉर्गन को टैग करते हुए वीरेंद्र सहवाग ने लिखा था, 'हम छोटी से छोटी खुशियां मनाते हैं, लेकिन इंग्लैंड जिसने क्रिकेट का आविष्कार किया, वो अभी तक वर्ल्ड कप नहीं जीत पाया है। ये कितनी शर्मनाक बात है।' इसके बाद पीयर्स मॉर्गन ने कोई जवाब नहीं दिया और दोनों ओर से इस मामले में चुप्पी साध ली गई।

अब जबकि इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को हराकर वर्ल्ड कप जीत लिया है तो एक बार फिर तीन साल पुराना यह मामला उठ गया है। मॉर्गन ने वीरेंद्र सहवाग को टैग करते हुए कहा, 'हाय, वीरेंद्र सहवाग।' मॉर्गन का ये ट्वीट इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। हालांकि, अभी वीरेंद्र सहवाग की ओर से मॉर्गन को कोई जवाब नहीं दिया गया है।

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जामुन ने बिगाड़ा मधु किश्वर का ‘स्वाद', ट्रोर्ल्स ने यूं उड़ाया 'मजाक'

लोगों को जागरूक करने के लिए ट्वीट करना पड़ गया भारी

Last Modified:
Thursday, 18 July, 2019
Madhu Kishwar

सोशल मीडिया पर कब और किस बात का बतंगड़ बन जाए, कोई नहीं जानता। संभव है कि आप अच्छे के लिए कोई ट्वीट करें और उसके लिए भी आपको ट्रोल किया जाने लगे। जानी-मानी लेखिका और सोशल एक्टिविस्ट मधु किश्‍वर के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके एक ट्वीट को लेकर लोग उन्हें लगातार निशाना बना रहे हैं।

दरअसल, किश्वर ने मदर डेयरी से जामुन खरीदे थे, लेकिन उन्हें खाने पर अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा। इसी को लेकर मधु किश्वर ने ट्वीट किया था, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके, लेकिन इसी को आधार बनाकर उन पर हमले होने लगे।

मधु ने अपने ट्वीट में लिखा ‘@MotherDairyind @Safalproducts से जामुन का यह बॉक्स खरीदा। 10 जामुन खाने के बाद मैंने पाया कि मेरी जीभ इंक जैसी नीली हो गई है, जबकि उसे जामुनी होना चाहिए था, जैसे कि अक्सर होता है। यह खतरनाक मिलावट का मामला है।’ इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘यदि हम सुरक्षित फल और सब्जियां बेचने के लिए @Safalproducts जैसे आउटलेट पर भरोसा नहीं कर सकते तो किस पर करें? मेरा थूक भी इंक जैसा नीला हो गया था, लोग केवल कुछ पैसों के लिए दूसरों को जहर खिलाने से भी बाज नहीं आते।’

मधु किश्वर के इस ट्वीट के बाद उन्हें निशाना बनाने वाले कई ट्वीट आये। जैसे शान हैदर ने लिखा, ‘वह रंग नहीं बल्कि विष है, जो आपके थूक में बाहर आ रहा है’। शरीब तंवर ने लिखा, ‘यह चिंता का विषय है, लेकिन थोड़ा सा जहर आपका क्या बिगाड़ लेगा? आपके विचारों में वैसे ही बहुत जहर है।’ वहीं, के.विजय अय्यर ने ट्वीट किया है, ‘आमतौर पर आपके ट्वीट ज्यादा जहरीले होते हैं।’ सत्यसारथी नामक यूजर ने कहा है, ‘@MotherDairyind के बारे में कुछ कहने से पहले लैब टेस्ट करवा लिया होता तो अच्छा होता। मदर डेयरी आपको नोटिस भेज सकती है।’

हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि ऐसा होता है, जब हम जामुन खाते हैं, जीभ नीली होती है। ये तो महज चंद ट्वीट है यदि सभी का उल्लेख करने बैठें तो काफी वक्त निकल जाएगा। इसलिए यदि आप बाकी ट्वीट भी पढ़ना चाहते हैं, तो किश्वर के इस ट्वीट पर जा सकते हैं।

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नमक को लेकर किया गया 'मजाक' जावेद जाफरी को पड़ा भारी

ट्रोलर्स को करारा जवाब देने में भी पीछे नहीं रहे बॉलिवुड एक्टर जावेद जाफरी

Last Modified:
Wednesday, 17 July, 2019
Twitter Javed

योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को लेकर अपने ट्विटर हैंडल पर एक चुटकुला ट्वीट करने के बाद बॉलिवुड एक्टर जावेद जाफरी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं और उन्हें काफी ट्रोल किया जा रहा है। हालांकि, अपने कॉमिक एक्ट्स और मजेदार ट्वीट्स के लिए प्रसिद्ध जावेद जाफरी ट्रोलर्स को करारा जवाब देने में भी पीछे नहीं रहे।

दरअसल, जावेद जाफरी ने अपने दोस्त द्वारा भेजे गए चुटकुले को ट्विटर पर पोस्ट करते हुए बाबा रामदेव की कंपनी द्वारा बनाए जा रहे नमक पर कटाक्ष किया था। लेकिन ये चुटकुला सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ यूजर्स को पसंद नहीं आया और उन्होंने जावेद जाफरी को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

एक यूजर ने जावेद जाफरी की साइंस नॉलेज के बारे पर सवाल उठाते हुए कहा,'नमक के दाने नमी सोखते हैं, लेकिन चट्टानों में ये चीज कम होती है। कभी साइंस पढ़ी है आपने?'ऐसे ही एक यूजर ने जावेद जाफरी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्होंने खाद्य पैकेजिंग की तकनीक के बारे में जाने बिना ही इस तरह का ट्वीट किया है। इसके लिए उन्हें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की वेबसाइट पढ़ने की सलाह भी दी गई है। हालांकि, इस ट्वीट का जवाब देते हुए जावेद जाफरी ने इस यूजर को चुटकुले समझने के साथ ही कॉमेडी और व्यंग्य के ज्ञान के लिए कॉमे़डी वेबसाइट पढ़ने की सलाह दी है।

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ट्वीट पर ‘फजीहत’ के बाद zomato ने आलोचकों को कुछ यूं दिया करारा जवाब

कंपनी के एक ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर उड़ाया जा रहा था मजाक

Last Modified:
Tuesday, 09 July, 2019
Twitter zomato

आधा-अधूरा ज्ञान कभी-कभी फजीहत की वजह भी बन जाता है और ऐसा ही कुछ ‘जोमैटो इंडिया’ के साथ हो रहा है। कंपनी के एक ट्वीट पर उसका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। कुछ दूसरी नामी कंपनियों ने भी जोमैटो के ट्वीट को आधार बनाकर उस पर कटाक्ष किया है। हालांकि, ट्वीट की इस जंग में भले ही आखिरी बाजी जोमैटो के नाम रही, लेकिन उसे हंसी का पात्र भी बनना पड़ा।

दरअसल, जोमैटो ने ग्राहकों को सलाह दी कि कभी-कभी उन्हें खाना घर मंगाकर भी खा लेना चाहिए, लेकिन इसका अनुवाद करने वाले ने अर्थ का अनर्थ कर डाला। इसका अनुवादित ट्वीट कुछ यूं था ‘गाइज कभी-कभी घर का खाना भी खा लेना चाहिए।’ एक फूड डिलीवर कंपनी का ऐसा ट्वीट जब लोगों की नजर में आया तो पलक झपकते ही उसकी चर्चा शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने अंदाज में इस ट्वीट को लेकर कंपनी का मजाक उड़ाया।

जोमैटो यदि लोगों से घर का खाना खाने की अपील करेगी जो उसका बिजनेस ठप होना तय है, क्योंकि उसका काम ही होटलों का खाना लोगों के घर पर पहुंचाना है। ऐसे में कंपनी का यह ट्वीट वायरल होते देर नहीं लगी। सोशल मीडिया पर जब लगातार जोमैटो को निशाना बनाये जाने लगा तो कंपनी के संस्थापक दीपेन्द्र गोयल को बीच में कूदना पड़ा। हालांकि, उन्होंने इसे मजाक भरे अंदाज में पेश किया।  उन्होंने लिखा, ‘यह किसने किया, अच्छा ट्वीट है’? अब बाद में अनुवाद करने वाले के साथ क्या हुआ होगा, ये तो वही बता सकता है। जोमैटो के इस मजेदार ट्वीट को अब तक 19 हजार से ज्यादा लाइक मिल चुके हैं। इतना ही नहीं, ट्वीट पर दूसरी कंपनियों की भी कटाक्ष भरी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

यूट्यूब इंडिया ने जोमैटो के ट्वीट पर कमेंट करते हुए लिखा है, ‘ कभी-कभी रात के तीन बजे, फोन साइड पर रखकर जाना चाहिए।’ इसी तरह, अमेजन प्राइम ने ट्वीट किया है, ‘गाइज कभी-कभी टीवी पर केबल देख लेना चाहिए।’ ट्रैवल एवं होटल बुकिंग वेबसाइट Ixigo ने लोगों से घर पर रहने के लिए कहा है। जबकि, MobiKwik ने लोगों से कहा कि कभी-कभी लाइन में लगकर भी बिजली का बिल भर देना चाहिए। ऐसे ही हाजमोला इंडिया ने जोमैटो की गलती पर चुटकी लेते हुए लिखा है, ‘कभी-कभी कुछ बातें भी हजम कर लेनी चाहिए।’

इस ट्वीट जंग के आखिरी में जोमैटो ने जो जवाब दिया है, उसकी जबरदस्त प्रशंसा की जा रही है। कंपनी ने अन्य सभी कंपनियों के ट्वीट के स्नैपशॉट के साथ लिखा है, ‘गाइज कभी-कभी खुद के अच्छे ट्वीट भी सोच लेने चाहिए।’ सोशल मीडिया पर जोमैटो के इस ट्वीट को मुंहतोड़ जवाब के रूप में देखा जा रहा है। बहरहाल, जो भी हो कंपनी और उसके कर्मचारियों को भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचना चाहिए, क्योंकि हर बार अंतिम बॉल पर छक्का नहीं लगता।

जोमैटो की ओर से आलोचकों को दिए गए कड़े जवाब को आप यहां देख सकते हैं-

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गूगल लाई नया फीचर, ये है खासियत

आईओएस और एंड्रॉयड दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगा गूगल का नया फीचर

Last Modified:
Friday, 28 June, 2019
Google

दिग्गज टेक कंपनी ‘गूगल’ ने एक नया फीचर शुरू किया है, जिससे ऑटोमैटिकली यूजर्स की लोकेशन हिस्ट्री को डिलीट किया जा सकता है। यह फीचर आईओएस (iOS) और एंड्रॉयड (Android) दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करेगा। कंपनी ने इस फीचर के बारे में इसी साल मई में घोषणा की थी।

बताया जाता है कि अब लोकेशन हिस्ट्री को डिलीट करने के लिए यूजर्स तीन महीने से 18 महीने तक की लिमिट चुन सकते हैं, तय अवधि के बाद डाटा अपने आप डिलीट हो जाएगा, जबकि अभी तक जरूरत पड़ने पर यूजर्स को डाटा को मैनुअली डिलीट करना पड़ता है।

गूगल ने अपनी कॉन्फ्रेंस में कहा था कि लोकेशन हिस्ट्री से कंपनी को अपने यूजर्स को उपयोगी सिफारिशें उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। बता दें कि इससे पहले अप्रैल 2018 में एसोसिएटेड प्रेस की जांच में खुलासा हुआ था कि गूगल सर्विसेज यूजर्स के लोकेशन डाटा को स्टोर रखती हैं, भले ही उन्होंने सेटिंग में जाकर गूगल को ऐसा करने से रोक दिया हो।

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मंत्रीजी के झूठ में ट्विटर ने नहीं दिया साथ, अब हो रही आलोचना

सोशल मीडिया के युग में नेताओं के लिए लोगों को बरगलाना अब इतना आसान नहीं रह गया है

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Twitter

सियासत में वादाखिलाफी बहुत बड़ा जुर्म नहीं समझी जाती। नेता अक्सर वादे करते हैं और भूल जाते हैं, लेकिन सोशल मीडिया के युग में नेताओं के लिए भूलना अब इतना आसान नहीं रह गया है। राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को भी यह समझ आ गया होगा।

दअअसल, मंत्रीजी ने हेल्थ ऑफिसर्स की भर्ती को लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर पहले कुछ कहा और फिर सार्वजनिक रूप से उससे मुकर गए, मगर मंत्रीजी यह भूल गए कि उनके इस ‘झूठ’ में ट्विटर उनका साथ नहीं देगा। जब ट्विटर खंगाला गया तो सामने आया कि जिसकी जानकारी होने से रघु शर्मा इनकार कर रहे हैं, उसी का जिक्र वह ट्विटर पर कर चुके हैं। अब ऐसे में मंत्रीजी की आलोचना तो स्वभाविक है। इस सच्चाई को सामने लाने का काम किया है राजस्थान पत्रिका ने। ‘पत्रिका’ के जयपुर संस्करण के फ्रंट पेज पर ‘हेल्थ मिशन: चिकित्सा मंत्री बोल रहे हैं झूठ, ट्विटर से सच उजागर’ शीर्षक तले प्रमुखता से इस खबर को पब्लिश किया गया है।

अखबार ने अपनी खबर में इस बात का जिक्र किया है कि चिकित्सा मंत्री ने 17 जून को ट्विटर पर बताया था कि हेल्थ ऑफिसर्स के 2500 पदों पर भर्ती की जानी है, लेकिन जब 21 जून को उनसे इस बारे में बात की गई तो उन्होंने जानकारी न होने का बहाना बनाया। यह बहाना बनाते वक़्त मंत्रीजी को शायद अहसास भी नहीं होगा कि सोशल मीडिया पर उनके सच-झूठ की कुंडली को खंगाला जा सकता है। राजस्थान पत्रिका के पत्रकार ने जैसे ही रघु शर्मा का ताजा बयान सुना, उन्होंने मंत्रीजी के पुराने ट्वीट तलाशने शुरू किये और यह सामने आ गया कि इसी विषय पर 17 जून को उन्होंने भर्ती की बात कही थी। इसके बाद एक पैकेज तैयार किया गया और फ्रंट पेज पर टॉप बॉक्स के रूप में चस्पा कर दिया गया।

अखबार से जुड़े चक्रेश महोबिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस न्यूज की क्लिपिंग पोस्ट की है। साथ ही उन्होंने मंत्री महोदय पर कटाक्ष भी किया है। चक्रेश ने लिखा है, ‘मंत्री साहेब! ऐसे ही नहीं कहा गया है-सत्यमेव जयते। ऐसे ही तो आपने ट्विटर-ट्विटर नहीं खेला होगा। किस सेहत की चिंता है आजकल सरकार को’! गौरतलब है कि चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा उन नेताओं में शुमार हैं, जो सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं। रघु शर्मा हर छोटी-बड़ी बात को ट्वीट के रूप में अपने फॉलोअर्स के साथ साझा करना नहीं भूलते। अब उनका एक ट्वीट ही उनकी फजीहत का कारण बन गया है।

मंत्रीजी के झूठ के बारे में 'राजस्थान पत्रिका' में पब्लिश न्यूज को आप यहां देख सकते हैं-

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अंजना ओम कश्यप को लिखा डॉक्टर्स का ये खत हो रहा है वायरल

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है

Last Modified:
Thursday, 20 June, 2019
anjana

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बात हो रही है। कुछ उन्हें सही बता रहे है, तो कई ने उनकी रिपोर्टिंग स्टाइल को कठघरे में खड़ा किया है। 
ऐसे में अब मेडिकल फेटरनिटी द्वारा लिखित एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फेसबुक पर बेहद सक्रिय डॉक्टर सुभाष शल्या ने ये पत्र शेयर किया है, जिसके बाद से लगातार लोग इस पर कमेंट कर रहे हैं। हम इस पत्र की सत्यता को प्रमाणित नहीं कर रहे हैं, बस इसमे उठे मुद्दों से आपको अवगत करा रहे हैं। 
आप ये पत्र नीचे पढ़ सकते हैं...
To
Anjana Om Kashyap
Aaj tak

Dt. 18.06.2019
Mrs. Kashyap 
You entered ICU with your shoes, camera, camera person, Mike, and all equipments did you care enough to change your clothes in protocol to ICU. 

Above it you shouted on doctor on duty for whom every life is precious. You must have came to Patna in flight , traveling to muzzafarpur via ac van but that doctor works day and night there with minimum standards. Did you care to ask questions to minister, MLA, MPs of that area.

No you won't ever bcz you all are filling your banks with their money. But that doctor reached at that point via merit and for him a life is life. We doc never ever kill patient intentionally. 
Do you know how much effort we put in to reach here? Cracking PMT among 15 lakhs candidate we qualify, reaching college we study day and night writing this letter i am sitting in library with my medicine book.

Then qualify pg entrance in which for 1.5 lakh 5000 gets qualified and you dare to ask our morality? Where are your morals when you journalist lick the foots of politicians?

We stand doing duty for continuously 24-36 hours on regular basis with a bare minimum salary of 50-60 k and you raisw questions about our character? 

You must thank your luck that on that day a doc like me wasn't on duty otherwise i would have made sure to throw you out of my ICU.

We are the backbone of medicine without facilities we treat we diagnose we bring people out of death so next time while questioning my morality look inside yours first. And if have problem ask govt to spend 10% of GDP on health, but no you can't do that bcz your media houses run bcz of government. 

If you want to debate come in open field we will have and make sure that day you leave aside the shield of journalism 

We were we are we will remain to be brightest brain bcz we know how to defeat death.
Singing off
On behalf of medical fraternity.
 

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आलोचनाओं से घिरीं अंजना ओम कश्यप ने यूं दिया जवाब

बिहार फ़िलहाल पत्रकारों के लिए एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम पर गुस्सा निकालने की वजह बना हुआ है

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
Anjana

बिहार फ़िलहाल पत्रकारों के लिए एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम पर गुस्सा निकालने की वजह बना हुआ है। तमाम टीवी चैनलों के पत्रकार मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल का चक्कर लगाकर आ रहे हैं, जहाँ बच्चों का इलाज चल रहा है। 

आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप भी मंगलवार को अस्पताल पहुंची थीं। यहां उन्होंने न केवल पीड़ित परिवारों का दर्द दिखाया, बल्कि राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किये। अपनी स्टोरी को मार्मिक रूप देने के लिए अंजना बोलते-बोलते इमोशनल भी हुईं, कई दफा उनका गला भी भर आया। यहां तक सबकुछ ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर निशाना बनाया जा रहा है। 

गौर करने वाली बात यह है कि निशाना बनाने वालों में कोई और नहीं बल्कि अंजना की बिरादरी के लोग यानी पत्रकार ही हैं। दरअसल, अंजना ने अपने सवाल-जवाब के लिए काफी देर तक ऑन ड्यूटी डॉक्टर को रोके रखा, उनसे बेहद तल्ख़ सवाल किये। वो शायद यह भूल गईं कि डॉक्टर के पास हर सवाल के जवाब नहीं हो सकते। फिर भी अंजना को अपने सवालों के जवाब मिले, मगर उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। जैसे ही डॉक्टर स्ट्रेचर पर ले जाए जा रहे एक मरीज की ओर मुड़े उन्होंने अफसरी अंदाज़ में कहा ‘अब जाकर क्या करियेगा, अभी-अभी मुख्यमंत्री यहां से गए हैं, तब ये हाल है। अगर मैं माइक ऑन नहीं करती साहब, तो आप एक घंटे तक मरीज को मुड़कर नहीं देखते’। अंजना के इस अंदाज़ पर डॉक्टर भी खफा हो गए, उन्होंने भी गुस्से में कहा ‘क्या बात कर रहीं हैं आप, मैं राउंड पर था। क्या मैं यहां बैठा हूं’? इसके बाद भी अंजना अपने सवाल दागती रहीं। यही बात लोगों खासकर अन्य पत्रकारों को पसंद नहीं आ रही है।

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने अंजना ओम कश्यप के बारे में ट्वीट किया है ‘यह महिला लगातार पत्रकारिता को एक गलत नाम देती आ रही है। इन्हें आम नागरिकों को धमकाने और नेताओं की खुशामद करने के लिए पहचाना जाता है। बेहद निंदनीय’। 

इसी तरह, एनडीटीवी की पत्रकार कादम्बनी शर्मा ने लिखा है ‘ICU में जाकर नौटंकी एंकरिंग करने से,डॉक्टरों पर चिल्लाने से अगर बच्चे ठीक हो जाते तो यही दवाई लिखी जाती। ऐसी रिपोर्टिंग ग़लत और घटिया है’। वहीं, रोहणी सिंह ने डॉक्टर के साथ अंजना के दुर्व्यवहार के लिए आजतक से माफ़ी मांगने को कहा है। उन्होंने ट्वीट किया ‘मुझे लगता है कि @IndiaToday को अपनी स्टार रिपोर्टर द्वारा अस्पताल के डॉक्टरों के साथ किये गए बर्ताब के लिए माफी मांगनी चाहिए। पत्रकारों को इस तरह की आक्रामकता उन क्रिकेट प्रेमी नेताओं के लिए बचाकर रखनी चाहिए, जो अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं के लिए जिम्मेदार हैं। क्या डॉक्टर और नर्स अपनी पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं’।

 अंजना पर निशाना साधने वालों में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता भी शामिल रहे। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर अंजना का नाम नहीं लिया, लेकिन निशाने पर वही थीं। उन्होंने ट्वीट किया ‘उन डॉक्टरों को परेशान करना जो कई रातों से सोये भी नहीं हैं, न तो मीडिया की स्वतंत्रता के तहत आता है और न ही ये मीडिया का अधिकार है। इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार को आईसीयू में घुसकर डॉक्टर के मुंह पर माइक लगाकर उन बातों के बारे में स्पष्टीकरण मांगते देखना जिसके उसका कोई नाता नहीं, बेहद दुखदाई है।’ 

इसी तरह लेखक और पूर्व पत्रकार Shubhrastha ने भी अंजना को खरी-खोटी सुनाई हैं। उन्होंने लिखा है ‘तुम्हें शर्म आनी चाहिए अंजना। जिस तरह तुमने अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों के साथ व्यवहार किया वह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया। यह पत्रकारिता के मुंह पर तमाचे की तरह है।’ 

डॉक्टर कफील खान ने भी अंजना के अंदाज़ पर ऊँगली उठाई है। उन्होंने लिखा है ‘यह @aajtak @anjanaomkashyap रिपोर्टिंग है। इस तरह का मीडिया डॉक्टर के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है। क्या बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना भी अब डॉक्टर की जिम्मेदारी है? डॉक्टर मरीज का अनुपात देखें? 100 मरीजों के भर्ती होने पर 1 डॉक्टर क्या कर सकता है’?

अपने ऊपर हो रहे लगातार हमलों का अंजना ने भी अब जवाब दिया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आलोचनाओं की कोई परवाह नहीं और जो उन्होंने किया वह बार-बार करती रहेंगी। अंजना ने ट्वीट करके कहा है कि ‘अस्पताल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना ज़रूरी था,है,रहेगा। ICU में आए बच्चों को अटेंडे करना ज़रूरी था,है,रहेगा। प्रोपोगेंडा वाले आज 108बच्चों की मौत भूल गए। डॉक्टर के लिए मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालों, हेकलिंग का प्रपोगैंडा बंद करिए,फिर याद दिला दूँ-अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है।’ अब यहाँ कौन सही है और कौन नहीं यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इतना ज़रूर है कि अंजना को अफसरों की तरह पेश नहीं आना चाहिए था। पत्रकार सवाल कर सकता है, यह उसका अधिकार है, लेकिन सवाल पूछने की भी मर्यादा होती है। 

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टीवी पत्रकारों के ICU भ्रमण पर बरखा दत्त ने किया ये ट्वीट, मिला लोगों का समर्थन

क्या पत्रकारों की फौज अस्पताल का काम बढ़ा नहीं रही है? 

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
barkha

बिहार इस वक़्त चर्चा के केंद्र में है। राज्य के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार से अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है। लिहाजा मुजफ्फरपुर का वह श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल मीडिया सेंटर बन गया है, जहां बीमार बच्चों का इलाज चल रहा है। हर पत्रकार कुछ एक्सक्लूसिव दिखाने की चाह में मरीजों से लेकर डॉक्टरों तक से सवाल-जवाब कर रहा है, यह सोचे बगैर कि इससे अस्पताल का कामकाज ही प्रभावित होगा। टीवी चैनलों के पत्रकार, कैमरामैन के साथ अस्पताल के हर कोने को स्कैन कर रहे हैं। मीडिया के इस अति उतावलेपन से अस्पताल प्रशासन नाराज़ है, लेकिन मीडिया को रोकने की हिम्मत कौन कर सकता है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है और शायद यही वजह है कि बीमार बच्चे ठीक होने के बजाये दम तोड़ रहे हैं, लेकिन क्या पहले से हैरान-परेशान परिवार और डॉक्टरों के मुंह पर माइक लगाकर उन्हें सवाल-जवाब में उलझाना जायज है? क्या पत्रकारों की फौज अस्पताल का काम बढ़ा नहीं रही है? 

 इस मसले पर बाकी पत्रकारों की राय भले ही कुछ भी हो, लेकिन बरखा दत्त का मानना है कि अस्पताल में इस तरह मीडिया के जमावड़े से हालात सुधरने के बजाये बिगड़ेंगे। पत्रकारों के इस रुख पर बरखा ने ट्वीट के माध्यम से नाराज़गी जताई है। उन्होंने लिखा है ‘अस्पताल, उपचार क्षेत्र और यहां तक की आईसीयू में आई पत्रकारों की बाढ़ वास्तव में असहज करने वाली है। बच्चे मर रहे हैं और पत्रकार आक्रामकता के साथ खुद को दूसरे से बेहतर साबित करने में लगे हैं। ये पत्रकार पहले से ही काम के बोझ तले दबे डॉक्टरों की परेशानियाँ ही बढ़ा रहे हैं। स्टोरी बताने का एक बेहतर तरीका भी होता है’। 

बरखा के इस ट्वीट को सोशल मीडिया यूजर्स का अच्छा समर्थन मिल रहा है। अधिकांश का मानना है कि ऐसे वक़्त में डॉक्टरों को उनका काम करने देना चाहिए। तनुप्रिया नामक एक यूजर ने लिखा है ‘मैं बरखा से सहमत हूं, इस समय चूहा दौड़ यानी प्रतिस्पर्धा की ज़रूरत नहीं है। एक्सक्लूसिव न्यूज़ के नाम पर अस्पताल में सर्कस करने से अच्छा है कि केवल ज़िम्मेदार लोगों से सवाल पूछे जाएं।’

 गौरतलब है कि पिछले हफ्ते से टीवी9 भारतवर्ष के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम वहां डेरा डाले हुए है और लगातार स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। मंगलवार को आजतक की स्टार रिपोर्टर अंजना ओम कश्यप भी मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंची थीं और उन्होंने जनरल वार्ड के बीचों-बीच खड़े होकर राज्य सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्होंने दाखिल बच्चों और उनके परिजनों को बार-बार कैमरे पर दिखाया, इतना ही नहीं उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर से भी तीखे सवाल किये। यह सिलसिला कई मिनटों तक चला, फिर चैनल पर ब्रेक हो गया और ब्रेक पर जाने से पहले अंजना डॉक्टर से यह कहना नहीं भूलीं कि आप कहीं जाइएगा नहीं, अभी आपसे और कई सवाल पूछने हैं। यानी जब तक ब्रेक ख़त्म नहीं हो गया, डॉक्टर बाकी सभी काम छोड़कर अंजना के सवालों के जवाब देने के लिए वहीं खड़े रहे। मीडिया के इसी रुख पर बरखा दत्ता और सोशल मीडिया यूजर्स नाराज़गी जता रहे हैं।
 

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न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने सवाल क्या पूछा, पूरी पार्टी ही पीछे पड़ गई

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Chitra Tripathi

बिहार में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला रखा है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा है और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं। हालांकि, इतने संवेदनशील मामले में भी राजनीति जोरो पर है जिसका खामियाजा उन पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है, जो सिर्फ बदहाल व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनमें चित्रा त्रिपाठी भी शामिल हैं। 

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। निशाना बनाने वाले इस बात से खफा हैं कि चित्रा केवल राज्य सरकार पर सवाल उठा रहीं हैं केंद्र सरकार पर नहीं। इस ट्रोलिंग की शुरुआत तब हुई जब चित्रा ने बच्चों की मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए कुछ ट्वीट किये। उन्होंने लिखा कि ‘बिहार में ना सत्ता पक्ष-ना विपक्ष है। चुनाव में 39 सीटें पाकर #सत्ता नशे में है @RJDforIndia को एक भी नहीं मिली तो पार्टी गर्मी की छुट्टी मना रही है @ichiragpaswan की पार्टी का कहना है बीमारी लाइलाज है सच-गरीबों को वोट मानने वाले नेता संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं।’ 

चित्रा के इस ट्वीट पर राजद नेता अलोक कुमार मेहता ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा ‘@chitraaum जी, विपक्ष गर्मी छुट्टी नहीं मना रहा है बल्कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर कार्रवाई कर रहा है, जरूरत है तो आप पत्रकार बिरादरी से कि आप ऐसे मामलों पर हमारा साथ दे!! मुजफ्फरपुर बालिका गृह की घटना पर मीडिया के रुख को देख लें’? 

इसके बाद राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, जिसमें कहा गया कि तीन दिन पहले @RJDforIndia ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मुज़फ़्फ़रपुर भेजा था। शिष्टमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगा। आगे के कार्यक्रम भी तय है। राजद आरोप-प्रत्यारोप से बच पीड़ित परिजनों की संवेदना का ख़्याल रख सकारात्मक राजनीति कर रहा है’। इन जवाबी ट्वीट के बाद चित्रा ने एक ऐसा सवाल पूछा जो राजद समर्थकों को भीतर तक चुभ गया। उन्होंने पूछा कि पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कहां हैं?
    
तेजस्वी यादव का नाम उछलते ही रमेश यादव नामक राजद समर्थक ने चित्रा त्रिपाठी पर हमले शुरू कर दिए। उसने अपने पहले ट्वीट में लिखा ‘बेशर्म दलाल मीडिया 2 सौ ज्यादा बच्चे मरे है सवाल @narendramodi से पूछना चाहिये, पांच साल आपका आयुष्मान योजना गया कहां, सवाल सरकार से पूछना चाहिये तो दलाली मीडिया विपक्ष से पूछ रहा है? @chitraaum @ModiLeDubega।’ 

जिसका चित्रा ने माकूल जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘यादव जी,एक तो मुझे टैग करते समय भाषा की मर्यादा रखें। दूसरा किससे सवाल करना है और किससे नहीं ये मुझे तय करने दें। मेरे ट्वीट पढ़े, ऐसा नहीं है कि सवाल सिर्फ RJD से था। बेशर्म और दलाल आपके घर में बोली जाने वाली भाषा होगी। अपनी मां बहन से कहियेगा ऐसे,मुझसे नहीं।’ 

चित्रा इतने पर ही शांत नहीं हुईं, उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘और हां,@yadavtejashwi के साथ फोटो लगायें हैं तो थोड़ा उनसे सीख लीजिये कि बोलते समय क्या ध्यान रखते हैं। नेता के साथ फोटो खींचा कर चापलूसी नहीं करते, थोड़ा उसकी अच्छाइयों को सीखते भी हैं।’


हालांकि, बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। इस बार गुरप्रीत वालिया नामक यूजर ने रमेश यादव के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए लिखा ‘वाह @yadavtejashwi कहा है ये तो पूछ लिया मोदी जी कहां है? अब तक आए क्यू नही? कब आएंगे? एक भी ट्वीट किया क्या अब तक? ये ना पूछा गया तुमसे, मीडिया के हाल देखो, बुरे दिनों में भी विपक्ष से अधिक सवाल करते है सत्ता की बजाए।’ 

जिसके जवाब में चित्रा ने गुरप्रीत की फोटो को आधार बनाते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा ‘शीशे के सामने खड़े होकर सेल्फी खिंचने से फुर्सत मिल जाये तो मेरे ट्वीट पढ़ लेना।’ गुरप्रीत के बाद राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर नवल किशोर ने चित्रा त्रिपाठी पर हमला बोला। उनके अल्फाज थे ‘चाटुकारिता की हर सीमा इसी जन्म में लाँघने की कसम खा ली है क्या??? कुछ हिम्मत उधार ले लीजिए सता से सवाल पूछने के लिए। पत्रकारी जीवन ऐसे ही बर्बाद न कीजिए’। जिस पर चित्रा का जवाब रहा ‘डॉ नवल किशोर, अच्छा लगा ट्वीट पढ़कर। मुझे नहीं पता आप किस चीज के लिये डॉक्टर लगाते हैं,लेकिन मरीजों का इलाज करने वाले हैं तो जाकर मासूमों को बचाइये मुजफ्फरपुर में। ट्विटर पर आपकी गाली मैं खा लूंगी, इससे भी घटिया बोलेंगे सुन लूंगी,लेकिन पहले बच्चों को बचाइये मुजफ्फरपुर जाइये।’


चित्रा त्रिपाठी ने भी शायद यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें एक के बाद एक इस तरह नेताओं और समर्थकों के हमले झेलने होंगे। राजद नेता शैलेश कुमार ने भी चित्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया ‘आप भूल गयी कि बिहार में सबसे ज़्यादा विधायक एनडीए गठबंधन के है। 99% लोकसभा सांसद NDA गठबंधन के है। क्या आपने @SushilModi PM @narendramodi से सवाल पूछा? हिम्मत नहीं है क्योंकि नौकरी चली जाएगी? पक्षकार पत्रकार विपक्ष को लोकतंत्र ना सिखाए’। 

इसके बाद उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘PM @narendramodi, स्वास्थ्य मंत्री @drharshvardhan, @AmitShahOffice को टैग करने में डर लग रहा है ना? मोदी जी ने अभी तक संवेदना भी प्रकट नहीं की है। अपना पुश्तैनी ज्ञान ज़रा उधर भी बाँट दिजीए। डरिए ना, लोकतंत्र है। सत्ता से सवाल करिए।’ जिसके जवाब में चित्रा ने कहा ‘आज तो पूरी @RJDforIndia आ गई है मुझे कोसने के लिये। ये एक जुटता बच्चों की जान बचाने के लिये दिखाईये साहब। काहे के नेता हैं आप? 2014 में MP थे? और इतनी निर्लज्जता? जनता जितायेगी तभी! 80 विधायक तो आपके भी हैं ना? उनको किसने चुना था? इसी जनता ने। अगले साल फिर चुनाव है ध्यान रखियेगा। बहुत ज्यादा डरी हुई हूं। घर से निकल भी नहीं पा रही। बोलना तो छोड़ दीजिये, कैसे MP रहे हैं आप भई, हैरान हूं।’

हालांकि, हमले और जवाबी हमले का सिलसिला यहीं ख़त्म नहीं हुआ। राजद समर्थक और नेता चित्रा को निशाना बनाते रहे और वह बखूबी उसका सामना करती रहीं।

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