दैनिक जागरण को बाय बोल पत्रकार आशुतोष यादव ने तलाशी नई मंजिल

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के रहने वाले आशुतोष यादव दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय से निभा रहे थे जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Ashutosh Yadav

पत्रकार आशुतोष यादव ने ‘दैनिक जागरण’ में अपनी करीब नौ साल लंबी पारी को विराम दे दिया है। वह पिछले काफी समय से गाजियाबाद में बतौर रिपोर्टर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने हेल्थ, एडमिनिस्ट्रेशन और क्राइम समेत तमाम बीट पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इन दिनों वह गाजियाबाद में सीबीआई कोर्ट भी देख रहे थे। अब उन्होंने यहां से बाय बोलकर बतौर रिपोर्टर अपनी नई पारी ’अमर उजाला’, गाजियाबाद के साथ शुरू की है।

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के मूल निवासी आशुतोष यादव ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की थी। उन्होंने फैजाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। इसी यूनिवर्सिटी से उन्होंने बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन और योग की पढ़ाई भी की है। इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद की राजर्षि टंडन यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी ली है। 

दैनिक जागरण द्वारा वर्ष 2013 में उनका ट्रांसफर हरियाणा के नारनौल में हुआ था। इस दौरान उन्होंने भिवानी के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से प्राकृतिक चिकित्सक एवं योग प्रशिक्षक की तीन वर्षीय डिग्री भी हासिल की है।

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‘उम्मीदों के उजियारे’ पर कैसी रही अखबारों की कवरेज, देखें यहां

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक दीप जलाने के आव्हान पर पूरा देश एकजुट दिखाई दिया।

नीरज नैयर by
Published - Monday, 06 April, 2020
Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Newspapers

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक दीप जलाने के आव्हान पर पूरा देश एकजुट दिखाई दिया। रविवार रात नौ बजते ही लोग अपने घरों की बालकनी या छतों पर पहुंचे और दीये जलाये। हालांकि, इस दौरान कई जगहों पर आतिशबाजी की गई और लोग सड़कों पर जमा भी हुए, जबकि पीएम ने इन दोनों ही बातों से दूर रहने की सलाह दी थी। आज प्रकाशित अखबारों ने इस ‘नौ मिनट की जगमगाहट को’ अपने-अपने अंदाज में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। कुछ ने मास्टहेड से जगमगाते दीयों की फोटो लगाई है, जबकि कुछ ने शीर्षक के बीच फोटो को जगह दी है। आइये नजर डालते हैं दिल्ली के प्रमुख अखबारों की इस कवरेज पर।

दीयों की रोशनी को पाठकों तक पहुंचाने में अमर उजाला सबसे आगे रहा है। अखबार ने मास्टहेड में फोटो लगाई है और खबर को कैप्शन में ही समाप्त कर दिया है। इसके बावजूद उसकी प्रस्तुति बाकियों की तुलना में दमदार दिखाई दे रहे है। बेंगलुरु की इस फोटो में एक-एक डिटेल निखरकर सामने आ रही है।

दूसरे नंबर पर दैनिक भास्कर है। अखबार ने मास्टहेड से जगमगाहट की फोटो को उतारा है। हालांकि, फोटो अमर उजाला की फोटो जितनी आकर्षक और स्पष्ट नहीं है। इसमें पीएम मोदी की फोटो को भी वैल्यू एडिशन के रूप में रखा गया है।

तीसरा स्थान नवभारत टाइम्स के नाम रहा है। अखबार ने पारंपरिक अंदाज में इस खबर को प्रस्तुत किया है। यानी लीड हेडिंग के नीचे दीयों के उजाले की तस्वीर है।

चौथे नंबर पर है हिन्दुस्तान। हालांकि, अखबार ने नवभारत टाइम्स की तरह ही लीड खबर के बीच में फोटो लगाई है, लेकिन उसने पीएम मोदी की दीप के साथ वाली फोटो के बजाय फाइल फोटो इस्तेमाल की है। इसलिए वह एक स्थान नीचे खिसक आया है।

पांचवें नंबर पर दैनिक जागरण को रखा जा सकता है. अखबार ने इस आयोजन को बेहद सामान्य रूप से प्रस्तुत किया है. खबर के बीच में दीयों की जगमगाहट की छोटी फोटो है। इसके साथ ही पीएम की दीप जलाते हुए फोटो को भी लगाया गया है।

देश की एकजुटता का प्रदर्शन करने वाले इस पल की अहमियत को सबसे कम यदि किसी अखबार ने आंका है, तो वह है राजस्थान पत्रिका। फ्रंट पेज पर दीयों की जगमगाहट कहां है, यह आपको शायद मैग्नीफाइंग ग्लास से भी नजर नहीं आएगा।

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Worldwide Media ने रोकी अपनी मैगजींस की प्रिंटिंग, रीडर्स को दी ये ‘सौगात’

कोरोना संकट के मद्देनजर वर्ल्डवाइड मीडिया ने अपनी मैगजींस की प्रिंटिंग फिलहाल के लिए बंद कर दी है

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Worldwide Media

दुनियाभर में फैली कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी और इसका संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए जा रहे एहतियाती कदमों के बीच ‘फिल्मफेयर’ और ‘फेमिना’ (Femina) जैसी मैगजींस की पब्लिशिंग कंपनी ‘वर्ल्डवाइड मीडिया’ (Worldwide Media) ने अपना प्रिंट प्रॉडक्शन फिलहाल बंद कर दिया है। ‘फेमिना’ और ‘फिल्मफेयर’ के अलावा इस कंपनी द्वारा Grazia India, Lonely Planet Magazine India, GoodHomes और Hello! जैसी प्रतिष्ठित मैगजींस की पब्लिशिंस भी की जाती है।

बताया जाता है कि देश में चल रहे लॉकडाउन, अपनी टीम व वेंडर्स की सुरक्षा और मैगजींस की सप्लाई चेन में हो रही गड़बड़ी को देखते हुए कंपनी ने यह निर्णय लिया है। फिलहाल ये मैगजींस डिजिटल रूप में पाठकों को पढ़ने के लिए उपलब्ध होंगी।  

इस बारे में कंपनी की ओर से कहा गया है, ‘हम हमेशा अपने पाठकों को विशिष्ट और एक्सक्लूसिव कंटेंट देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम ऐसे कठिन समय में भी ऐसा करना जारी रखेंगे। इसके तहत Filmfare, Grazia India, Femina, Lonely Planet Magazine India और GoodHomes का अप्रैल का डिजिटल इश्यू पाठकों को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा।

कंपनी के अनुसार, ‘इन सभी मैगजींस का डिजिटल एडिशन हमारे सबस्क्राइबर्स और नॉन सबस्क्राइबर्स यानी सभी के लिए मुफ्त में संबंधित वेबसाइट्स के साथ हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही हमार सबस्क्राइबर्स इन पांचों मैगजींस का एक महीने का अतिरिक्त सबस्क्रिप्शन भी मुफ्त में पा सकेंगे’   

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कोरोना के खौफ के बीच The Week मैगजीन ने उठाया 'साहसिक' कदम

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण एक तरफ जहां कई मैगजींस ने अपनी प्रिंटिंग को फिलहाल के लिए रोकने का फैसला लिया है, वहीं ‘द वीक’ (THE WEEK) मैगजीन ने एक और सेंटर से इसकी छपाई शुरू कर दी है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
The Week

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण एक तरफ जहां कई अखबारों और मैगजींस के सर्कुलेशन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है, वहीं 'मलयाला मनोरमा' (Malayala Manorama) की अंग्रेजी न्यूज मैगजीन ‘द वीक’ (The Week) ने एक और महानगर (चेन्नई) से अपनी प्रिंटिंग शुरू की है। इस मैगजीन के नए इश्यू की प्रिंटिंग दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोट्टयम के साथ ही चेन्नई के प्रिंटिंग सेंटर से भी की गई है।

अभी तक, चेन्नई के इलाकों में मैगजीन की कॉपियों के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए बेंगलुरु के प्रिंटिंग सेंटर से सप्लाई की जा रही थी। मैगजीन ने यह त्वरित कदम ऐसे मौके पर उठाया है, जब कई मैगजींस ने अपनी प्रिंटिंग फिलहाल रोक दी है और खुद को ऑनलाइन एडिशंस तक सीमित कर लिया है।

मैगजीन के प्रभारी संपादक (एडिटर इन चार्ज) वी.एस जयश्चंद्रन (V S Jayaschandran) का कहना है, ‘मैगजीन की प्रिंटिंग को बंद करने का कोई सवाल नहीं है। 1982 में शुरू हुई इस मैगजीन ने अपने 38 साल के इतिहास में अपने किसी भी इश्यू की प्रिंटिंग नहीं रोकी है। हम इस परंपरा को तोड़न नहीं चाहते हैं।’

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फ्रंट पेज पर अखबारों ने किन खबरों को दी तवज्जो, जानिए यहां

कोरोना के बढ़ते खौफ के बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 04 April, 2020
Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
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कोरोना के बढ़ते खौफ के बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की प्रमुख खबर है। सबसे पहले बात करते हैं दैनिक भास्कर की, जहां फ्रंट पेज की शुरुआत लॉकडाउन से पहले और बाद के आंकड़ों को दर्शाती खबर से हुई है। इसी में एयर इंडिया के 30 अप्रैल तक उड़ानें बंद रखने के फैसले का भी जिक्र है।

लीड मोदी की अपील है, प्रधानमंत्री ने लोगों से 5 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट तक मोमबत्ती, टॉर्च या दीया जलाने को कहा है। कोरोना को मात देने वाले केरल के सबसे उम्रदराज दंपती को भी पेज पर बड़ी जगह मिली है। इसके अलावा, अमेरिका का हाल और कोरोना से मुकाबले के लिए रेलवे की तैयारी से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। एंकर में अनिरुद्ध शर्मा की बाईलाइन को जगह मिली है। शर्मा ने लॉकडाउन के पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला है।

हिन्दुस्तान की बात करें तो यहां भी फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है। इस बॉक्स में पीएम मोदी की अपील को रखा गया है। लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम हैं। खबर के मुताबिक, देश के कुल मरीजों में मरकज के एक चौथाई हैं।

वहीं, दिल्ली में मेडिकल स्टाफ के संक्रमित होने की बढ़ते मामले, संक्रमित महिला की सफल डिलीवरी और कन्नौज एवं हुबली में पुलिस पर हुआ हमला प्रमुखता के साथ पेज पर है। इसी के साथ मजदूरों को वेतन देने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को भेजे गए नोटिस का जिक्र भी पेज पर है। एंकर में स्कन्द विवेक धर की बाईलाइन है, जिन्होंने कोरोना को लेकर हुए एक अध्ययन के बारे में बताया है।

अब रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का। लीड पीएम मोदी की अपील है और इसी में कोरोना की बढ़ती चाल को भी रखा गया है। वहीं, कोरोना पीड़ित गर्भवती की सफल डिलीवरी, गाजियाबाद में नर्सों से बदसलूकी करने वालों पर कार्रवाई और मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात 11 जवानों के संक्रमित होने का समाचार भी पेज पर है। CISF के 11 जवान कोरोना की चपेट में आ गए हैं। एंकर में एक ‘अनोखी’ खबर को जगह मिली है। अनोखी इस लिहाज से कि एक बेटे ने पिता के खिलाफ लॉकडाउन के उल्लंघन पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

वहीं, अमर उजाला की बात करें तो टॉप बॉक्स में यूपी के मुख्यमंत्री के सख्त रुख को जगह मिली है। योगी ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्यकर्मियों से अभद्रता करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। लीड हिन्दुस्तान की तरह निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणामों को रखा गया है।

साथ ही इसमें कोरोना की बढ़ती चाल का भी उल्लेख है। वहीं, कन्नौज में सामूहिक नमाज रोकने गई पुलिस टीम पर हमला और कोरोना पीड़ित गर्भवती डॉक्टर की सफल डिलीवरी से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। इसके अलावा, मजदूरों के वेतन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर सरकार की प्रतिक्रिया को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। पीएम मोदी की अपील को एंकर में लगाया गया है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं दैनिक जागरण का। पीएम मोदी की अपील को यहां फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स में जगह दी गई है। लीड सबसे अलग बड़े पैमाने पर कोरोना जांच को मंजूरी है। संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए सरकार ने व्यापक जांच की अनुमति दे दी है। दिल्ली में कोरोना की बढ़ती चाल और यूपी के मुख्यमंत्री के सख्त रुख को भी पेज पर पर्याप्त स्थान मिला है।

इसके अलावा, निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम के साथ ही सियासी दवाब में कश्मीर डोमिसाइल कानून में हुए बदलावों के बारे में भी पाठकों को बताया गया है। एंकर में अखबारों के वितरण से जुड़ा समाचार है। जो बताता है कि वितरण में बाधा डालना सूचना के अधिकार का हनन है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में नवभारत टाइम्स का फ्रंट पेज आज सबसे संतुलित एवं खुला-खुला दिखाई दे रहा है। दूसरे नंबर पर हिन्दुस्तान को रखा जा सकता है। 

2: खबरों की प्रस्तुति के लिहाज से आज दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया जा सकता है, जबकि तीसरे नंबर पर अमर उजाला है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने के प्रयास में दैनिक भास्कर अव्वल है। लीड का शीर्षक ‘आओ! फिर से दीया जलाएं’ सबसे आकर्षक है।

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आज किस हिंदी अखबार का फ्रंट पेज है सबसे 'दमदार', पढ़ें यहां

दिल्ली के निजामुद्दीन में बीते दिनों जो कुछ हुआ, उसके नकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं।

नीरज नैयर by
Published - Friday, 03 April, 2020
Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
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दिल्ली के निजामुद्दीन में बीते दिनों जो कुछ हुआ, उसके नकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। इस बीच सरकार तब्लीगी मरकज में शामिल होने वालों की तलाश में जुट गई है। इस खबर के साथ ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों से पीएम मोदी की चर्चा आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की, जिसने आज काफी आकर्षक फ्रंट पेज तैयार किया है।

लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक नतीजे हैं। जमातियों और उनके संपर्क में आये करीब 9000 लोगों की पहचान कर ली गई है, इनमें से 1306 विदेशी बताये जा रहे हैं। लीड में केंद्र से राज्यों को मिले सख्ती के निर्देश का भी जिक्र है, जिसमें लॉकडाउन के उल्लंघन पर दो साल की सजा की बात कही गई है। निश्चित तौर पर इस खबर पर लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान जाएगा। कोरोना की बढ़ती चाल को भी प्रमुखता से लगाया गया है। दिल्ली में एक डॉक्टर दंपती भी इसकी चपेट में आ गया है। इसके अलावा, विदेशों में फंसे भारतीयों को सरकार का संदेश और दारुल उलूम का घर पर नमाज अदा करने का फतवा भी पेज पर है। एंकर में पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों से चर्चा है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। फ्रंट पेज की शुरुआत पीएम मोदी के टॉप बॉक्स से हुई है। मोदी का कहना है कि देश लॉकडाउन के दौर से धीरे-धीरे बाहर आएगा। लीड जमातियों पर कसता शिकंजा है। सरकार ने 960 विदेशी तब्लीगी को काली सूची में डाल दिया है। यानी अब वे कभी भारत का रुख नहीं कर पाएंगे।

वहीं, कोरोना की बढ़ती चाल के साथ ही इंदौर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए हमले को भी प्रमुखता के साथ जगह मिली है। एंकर में नीलू रंजन की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कोरोना के तीसरे फेज में पहुंचने की आशंका गहरा गई है।

आज नवभारत टाइम्स के फ्रंट पेज को देखें तो लीड पीएम मोदी की धर्मगुरुओं से अपील को लगाया गया है और जमातियों की ‘कारगुजारियां’ एवं देवबंद का फतवा भी इसी का हिस्सा है। मोदी ने धर्मगुरुओं से अपील करते हुए कहा है कि कोरोना ने हमारी आस्था पर हमला बोला है, सभी पंथ के लोग एकजुट होकर इसे हराएं। दिल्ली में संक्रमण की चपेट में आये डॉक्टर दंपती सहित कोरोना से जुड़ी कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं।

इसके अलावा, अखबार ने लॉकडाउन का नकारात्मक पक्ष उजागर करने का भी प्रयास किया है। पूनम पाण्डेय की बाईलाइन बताती है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है। एंकर की बात करें तो यहां कत्यानी की बाईलाइन को जगह मिली है। उन्होंने लॉकडाउन के बीच सोशल बायकाट के डर से बढ़ रहे खुदकुशी के मामलों के बारे में बताया है।

अब चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। फ्रंट पेज की लीड कोरोना से मुकाबले के लिए सरकार की तैयारी को लगाया गया है। इस ‘जंग’ को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए सेना के डॉक्टर और एनसीसी कैडेट तैनाती को तैयार हैं।

लीड में कोरोना की बढ़ती चाल का भी जिक्र है। वहीं, जमातियों पर कसता शिकंजा और सरकारी कदमों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया को भी बड़ी जगह मिली है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कहना है कि कोरोना की जांच का दायरा बढ़ाए बिना लॉकडाउन का कोई मतलब नहीं। इसके अतिरिक्त, प्रिंस चार्ल्स का इलाज करने वाले भारतीय डॉक्टर से भी अखबार ने पाठकों को रूबरू कराया है। एंकर में लॉकडाउन के चलते महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी मजदूरों की स्थिति बयां करती खबर है।

सबसे आखिरी में आज रुख करते हैं हिन्दुस्तान का। फ्रंट पेज की लीड निजामुद्दीन के नकारात्मक परिणाम हैं। मुख्यमंत्रियों के साथ मोदी की चर्चा को दो कॉलम जगह मिली है। दिल्ली में संक्रमण की चपेट में आने वाले डॉक्टर दंपती, कोरोना से निपटने की सरकार की तैयारी और उस पर विपक्ष के सवाल को भी प्रमुखता के साथ पाठकों के समक्ष पेश किया गया है।

एंकर में कोरोना से लड़ने के लिए कोरोना वायरस बना रहे भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में बताया गया है। इसके अलावा देवबंद के फतवे सहित कुछ अन्य समाचार भी पेज पर हैं।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज नवभारत टाइम्स और हिन्दुस्तान सबसे आगे हैं। दोनों अखबारों का फ्रंट पेज खुला-खुला एवं संतुलित नजर आ रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो अमर उजाला ने सबको पीछे छोड़ दिया है। खासतौर पर लीड को अखबार ने काफी अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज भी सभी अखबारों के हाथ खाली हैं।

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मीडिया पर कोरोना की मार, यह कंपनी बंद करेगी अपने 60 अखबार!

दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) की मार अब न्यूजपेपर इंडस्ट्री पर भी पड़नी शुरू हो गई है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Newspaper

दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) की मार अब न्यूजपेपर इंडस्ट्री पर भी पड़नी शुरू हो गई है। इस बीच मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक के ऑस्ट्रेलियाई मीडिया समूह ‘न्यूज कॉर्प’ (News Corp) ने घोषणा की है कि कोविड-19 के कारण विज्ञापनों में काफी गिरावट आई है। ऐसे में वह करीब 60 प्रादेशिक अखबारों की प्रिंटिंग बंद कर देगी।

‘द ग्लोबल टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘न्यूज कॉर्प ने कहा है कि न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया, क्वींसलैंड और दक्षिण आस्ट्रेलिया में कंपनी के अखबारों की प्रिंटिंग बंद कर दी जाएगी, ये अखबार ऑनलाइन पढ़ने को मिलेंगे।’

इस बारे में न्यूज कॉर्प आस्ट्रेलिया के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन माइकल मिलर (Michael Miller) का कहना है,‘हमने इस फैसले को काफी सोच-समझकर लिया है। कोरोनावायरस संकट के कारण अप्रत्याशित रूप से काफी आर्थिक दबाव आ गया है और ज्यादा से ज्यादा नौकरियों को बनाए रखने के लिए हम हर संभव उपाय कर रहे हैं। ’  

‘द ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस महामारी की शुरुआत के पहले से ही तमाम आस्ट्रेलियाई मीडिया समूह ऑनलाइन कंटेंट की तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर रहे थे। ‘द गार्डियन’ (The Guardian) की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोनावायरस की वजह से यूके में सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन के कारण अखबारों की बिक्री में 30 प्रतिशत तक की कमी हुई है। तमाम पाठक भी सेल्फ आइसोलेटिंग कर रहे हैं, ऐसे में ब्रिटिश न्यूज इंडस्ट्री के रेवेन्यू का एक प्रमुख स्रोत काफी प्रभावित हुआ है।

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‘Outlook’ मैगजीन को लेकर लिया गया ये बड़ा फैसला

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में अब तक कई लोग आ चुके हैं। तमाम संस्थानों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Outlook Group

‘कोरोनावायरस’ (COVID-19) के कारण देश में चल रहे लॉकडाउन के बीच अंग्रेजी की साप्ताहिक मैगजीन ‘आउटलुक’ (Outlook ) ने अपने प्रिंट एडिशन को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।  ‘आउटलुक’  के एडिटर-इन-चीफ रूबेन बनर्जी (Ruben Banerjee) ने इस बारे में एक पत्र लिखकर जानकारी दी है। इस पत्र में बनर्जी ने लिखा है, ‘मुझे यह बताते हुए बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है कि आपकी पसंदीदा मैगजीन 'आउटलुक' की प्रिंटिंग फिलहाल बंद कर दी गई है।’

इस पत्र में उन्होंने यह भी कहा है, ‘कोरोनावायरस के कारण देशभर में आजकल जो स्थिति है, उस वजह से ही मैगजीन की प्रिंटिंग को बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के जरिये फैल रहा है। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा की गई है। ऐसे में हम इस मैगजीन को डिस्ट्रीब्यूट नहीं कर सकते हैं। ऐसे समय में इस मैगजीन को वितरित न करने का निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि आप लोग किसी ऐसी चीज के संपर्क में न आएं, जो कई हाथों से होकर गुजरी हो और आपको खतरे में डाल सकती हो।’

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मीडिया पर कोरोना का असर, 300 से अधिक अखबारों का प्रकाशन अस्थायी रूप से बंद!

कोरोना के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत में भी इसका असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
newspaper

कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस महामारी के चलते विश्व की महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। भारत में भी कोरोना का असर इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। एक्सप्रेस ग्रुप से जहां एक दिन पहले खबर आयी कि वह अपने यहां काम कर रहे मीडियाकर्मियों की सैलरी में कटौती करेगा, तो वहीं अब एक और बुरी खबर सामने आयी है।

मध्य प्रदेश के 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार के मालिकों ने अपने-अपने अखबार अस्थायी रूप से छापने बंद कर दिये हैं।   

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया, देशव्यापी लॉकडाउन के कारण यातायात की सुविधा के अभाव के साथ-साथ विज्ञापनों में आई भारी कमी ही इसकी मुख्य वजह है। लॉकडाउन से पहले इनमें से अधिकांश अखबार मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों से प्रकाशित हुआ करते थे।'

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, लोगों में यह डर है कि यदि वे समाचार पत्रों को इस महामारी के समय खरीदेंगे तो इसके जरिये वे भी इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। यह भी लोगों द्वारा समाचार पत्र न लेने के मुख्य कारणों में से एक है।

अधिकारी इस बात की भी जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में करीब 670 समाचार पत्र पंजीकृत हैं, जिन्हें सरकारी विज्ञापन मिलते हैं। इनमें से करीब 287 अकेले भोपाल से ही प्रकाशित होते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन स्थिति अब ऐसी खराब हो गई है कि मध्य प्रदेश के 52 जिलों में से 95 फीसदी जिलों में इस तरह के अखबार नहीं छप रहे हैं।  

वहीं दूसरी तरफ, मझोले स्तर के समाचार पत्रों के कुछ मालिकों ने अपने अखबार को ई-पेपर्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है, ताकि समाचारों की दुनिया में अपना अस्तित्व बचाया जा सके।   

 

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कोरोना के आंकड़ों पर हिंदी अखबारों में यूं दिखा विरोधाभास

दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है।

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 02 April, 2020
Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
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दिल्ली के निजामुद्दीन में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। यही चिंता आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों की सबसे बड़ी खबर है। सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की, जहां कोरोना की चिंता और लगातार बढ़ते मामलों को पूरे आठ कॉलम लीड लगाया गया है। वहीं, गोरखपुर में 25 वर्षीय एक युवक की मौत से खलबली मच गई है। मृतक में कोरोना की पुष्टि हुई है, इसी के साथ यह कोरोना से देश में सबसे कम उम्र के व्यक्ति की मौत का मामला बन गया है।

इस खबर के साथ ही कोरोना की चपेट में आ रहे डॉक्टर और अमेरिका में बिगड़ते हालात भी पेज पर हैं। एंकर में लोगों को अखबार पढ़ने के लिए जागरूक करता समाचार है। कोरोना के खौफ के चलते बड़े पैमाने पर लोगों ने अखबार मंगाना बंद कर दिया है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए केंद्र द्वारा जारी नियम और दो सिंगल समाचार भी पेज पर हैं। अब जो लोग घाटी में 15 साल रह चुके हैं, उन्हें भी मूल निवासी माना जाएगा।

दूसरे नंबर पर रुख करते हैं हिन्दुस्तान का। फ्रंट पेज की शुरुआत रामनवमी के मौके पर जाने-माने लेखक अमीश त्रिपाठी द्वारा बताई गईं नौ अच्छी आदतों से हुई है, जिन्हें अपनाकर कोरोना के ‘असुर’ का अंत किया जा सकता है। यह निश्चित रूप से एक अच्छा प्रयोग है। लीड की बात करें तो ‘तबलीगी जमात के 189 लोग संक्रमित मिले’ शीर्षक के साथ देश में बढ़ी चिंता को लगाया गया है। वहीं, एक दिन में सामने आये 437 नए मामले और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए केजरीवाल सरकार का ऐलान को भी पर्याप्त जगह मिली है। केजरीवाल के कहा है कि यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी की संक्रमण से मौत होती है तो उसके परिवार को एक करोड़ दिए जाएंगे।

भारतीय मूल की प्रख्यात वैज्ञानिक गीता रामजी की दक्षिण अफ्रीका में कोरोना से मौत हो गई है। इस खबर को भी अखबार ने प्रमुखता से लगाया है। एंकर में तबलीगी जमात के मामले में एजेंसियों की लापरवाही को रेखांकित करता समाचार है। अखबार ने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी खबर को सिंगल कॉलम में रखा है। खबर मूल निवासी वाले नियम से उठाने के बजाय नौकरी की व्यवस्था से उठाई गई है।

अब बात करते हैं अमर उजाला की, जहां टॉप बॉक्स में कोरोना से जूझते उत्तर प्रदेश का हाल है। कोरोना पीड़ित 25 वर्षीय युवक के साथ ही राज्य में दो लोगों की मौत हो चुकी है। लीड निजामुद्दीन से उपजी चिंता है। हालांकि, अमर उजाला ने तबलीगी मरकज से जुड़े 304 लोगों को संक्रमित बताया है, जबकि हिन्दुस्तान में यह संख्या 189 है। पेज पर तीसरी बड़ी खबर सीबीएसई का फैसला है, जिसके मुताबिक 9वीं और 12वीं के छात्र मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में जाएंगे।

हिन्दुस्तान ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठाया है। वहीं, वायरस की चपेट में आते डॉक्टरों सहित कोरोना के खौफ से जुड़ी तीन खबरों को रंगीन बॉक्स में रखा गया है। एंकर में जम्मू-कश्मीर में केंद्र द्वारा लागू किया गया डोमिसाइल कानून है। इसके अलावा, पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो यहां निजामुद्दीन कांड के बाद हरकत में आई सरकार को लीड लगाया गया है। देश में तबलीगी जमात के लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है। सेकंड लीड राकेश कुमार की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कैसे निजामुद्दीन के मरकज में पनप रहा था देश की तबाही का वायरस।

जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून, केजरीवाल सरकार और सीबीएसई के फैसलों सहित कोरोना की बढ़ती चाल भी पेज पर है। एंकर की बात करें तो यहां मनु त्यागी की बाईलाइन को सजाया गया है। मनु ने लॉकडाउन के सुनहरे पक्ष से पाठकों को रूबरू कराया है।

सबसे आखिरी में चलते हैं राजस्थान पत्रिका पर। लीड निजामुद्दीन कांड से बढ़ी चिंता और सरकार की कार्रवाई को लगाया गया है। हालांकि, संक्रमितों की संख्या को लेकर यहां भी गफलत का माहौल है। अखबार संक्रमित जमातियों की संख्या 261 बता रहा है, जबकि हिन्दुस्तान और अमर उजाला में आंकड़ा कुछ और है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल कानून और सीबीएसई के फैसले को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई गई है। साथ ही कोरोना से मुकाबले के लिए रेलवे की तैयारी से भी पाठकों को अवगत कराया गया है। एंकर में महेंद्र प्रताप सिंह की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कोरोना के खौफ के बीच रामनवमी कैसे मन रही है।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट की बात करें तो आज हिन्दुस्तान अव्वल है और दूसरा नंबर अमर उजाला का आता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में मामला थोड़ा उल्टा है, यानी अमर उजाला प्रथम है और हिन्दुस्तान दूसरे नंबर पर।

3: कलात्मक शीर्षक आज किसी भी अखबार में नजर नहीं आ रहा है।

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एक्सप्रेस समूह पर दिखा कोरोना का 'असर', एंप्लाईज को लेकर उठाया ये स्टेप

समूह की ओर से इस बारे में अपने एंप्लाईज को एक पत्र लिखकर जानकारी दी गई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
एक्सप्रेस ग्रुप

दुनियाभर में खौफ का पर्याय बने 'कोरोनावायरस' (कोविड-19) का 'प्रकोप' अब संस्थानों पर भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल, कोरोना के कारण बिजनेस पर पड़े असर के कारण ‘एक्सप्रेस समूह’ (Express Group) ने अपने एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कटौती किए जाने की घोषणा की है। इस बारे में समूह की ओर से अपने एंप्लाईज को एक पत्र भी लिखा गया है।

इस पत्र में कहा गया है, कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण वेंडर्स, आरडब्ल्यूए सभी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रेल, सड़क और हवाई यातायात बंद होने के कारण इसका असर अखबर के डिस्ट्रीब्यूशन पर पड़ रहा है। बिजनेस बंद पड़े हुए हैं। ऐसे में हम अपने सभी केंद्रों पर प्रिंट ऑर्डर कम करने के लिए मजबूर हो गए हैं। यह पूरी तरह से अभूतपूर्व स्थिति है।’

एंप्लाईज को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘कोरोना के कारण हमारे एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर काफी विपरीत असर पड़ा है और इन स्थितियों को देखकर लगता है कि स्थिति और खराब होने वाली है। ऐसे में एंप्लाईज की सैलरी में अस्थायी रूप से कुछ कटौती किए जाने का निर्णय लिया गया है।’

 

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