अमर उजाला के ई-पेपर की PDF प्रसारित करने पर हुई शिकायत

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
PDF

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ (PDF) अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है और कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

बता दें कि हरियाणा के कई जिलों के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप में अमर उजाला अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से नियमित तौर पर प्रसारित की जा रही थीं, जिसे देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई की तो कई ग्रुप एडमिन ने न सिर्फ ई-पेपर की पीडीएफ हटा ली, बल्कि भविष्य में ऐसा न करने का वादा भी किया। एडमिन ने अपने-अपने वॉट्सऐप ग्रुप में अखबारों की पीडीएफ शेयर न करने का निवेदन अपने सदस्यों से किया है।

आपको बता दें कि समाचार पत्र के ई-पेपर की पीडीएफ कॉपी डाउनलोड कर उसे वॉट्सऐप ग्रुप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रसारित करना किसी को भी भारी पड़ सकता है। ऐसा करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि कॉपीराइट कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन भी है। 

अदालती निर्देशों और अन्य एडवाइजरी में भी ये कहा जा चुका है कि किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ या अन्य माध्यम से कॉपी प्रसारित करना गैरकानूनी और अनैतिक है। इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि जिस भी सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा किया जा रहा है उसका एडमिन इस गैरकानूनी कृत्य के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।    

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बंद होने की कगार पर पहुंचा ये अखबार, नहीं दे पा रहा वेतन

लोकतंत्र समर्थक अखबार ‘एप्पल डेली’ पर खतरे के काले बादल मंडराने लगे हैं। यह अखबार अब कभी भी बंद हो सकता है।

Last Modified:
Tuesday, 22 June, 2021
Newspaper

हॉन्गकॉन्ग का लोकतंत्र समर्थक अखबार ‘एप्पल डेली’ पर खतरे के काले बादल मंडराने लगे हैं। यह अखबार अब कभी भी बंद हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब तो अखबार के मैनेजमेंट ने भी कह दिया है कि संस्थान के पास अखबार प्रकाशित करने के लिए कुछ ही दिनों की धनराशि है, जिसके खत्म होने के बाद अखबार का प्रकाशन नहीं हो पाएगा। अखबार के सामने अपने कर्मचारियों के वेतन भुगतान की भी समस्या है।

‘एप्पल डेली’ के संपादक व अधिकारियों के खिलाफ बीते दिनों जिस तरह से कार्रवाई की गई है, उससे पूरी मीडिया इंडस्ट्री में खलबली मची हुई है। ‘एप्पल डेली’ के चीफ एडिटर और सीईओ समेत पांच संपादकों को नए सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

बता दें कि हॉन्गकॉन्ग के करीब 500 पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को अचानक अखबार के कार्यालय पर छापेमारी की थी, जिसके बाद अखबार के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में पत्रकारों के फोन और लैपटॉप सहित पत्रकारिता कंटेंट को भी जब्त कर लिया गया।

गिरफ्तार किए गए लोगों में एप्पल डेली के चीफ एडिटर रयान लॉ वाई-क्वोंग, चीफ ऑपरेटिंग ऑपरेशनशंस (COO) और पब्लिशर चेउंग किम-हुंग शामिल हैं, जो अखबार की मूल कंपनी नेक्स्ट डिजिटल के CEO भी हैं।

समाचार कंपनी ने गुरुवार को कहा कि उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए विदेशी ताकतों की मिलीभगत का आरोप लगा है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि लॉ और चेउंग ने तीन कंपनियों के साथ मिलकर अखबार के संस्थापक जिमी लाई के साथ मिलकर हांगकांग व मुख्य भूमि चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाने  और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल होने की साजिश रची।

वैसे हॉन्गकॉन्ग में ये पहला मामला था, जिसमें अधिकारियों ने मीडिया आर्टिकल्स और स्टोरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने का हवाला दिया था।

वहीं, अखबार ‘एप्पल डेली' के चीफ एडिटर और उसकी मूल कंपनी के प्रमुख को शनिवार को हॉन्गकॉन्ग की एक अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। शहर के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दो दिन पहले गिरफ्तारी के बाद यह इनकी पहली सुनवाई थी। मुख्य संपादक रयान लॉ और नेक्स्ट डिजिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चेउंग किम-हुंग एक सफेद वैन में पहुंचे। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए विदेश के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया गया। इस मामले को अर्ध स्वायत्त चीनी क्षेत्र में प्रेस की आजादी पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्य मजिस्ट्रेट विक्टर सो ने कहा कि ऐसा यकीन करने का पर्याप्त आधार नहीं है कि वे दोबारा सुरक्षा कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे। उन्होंने उन्हें लाई चि कोक हिरासत केंद्र में रखने का आदेश दिया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की है।

इस मामले में गुरुवार को गिरफ्तार किए गए तीन अन्य लोगों- एप्पल डेली के दो वरिष्ठ संपादकों और एक अन्य कार्यकारी अधिकारी पर अभी कोई आरोप नहीं लगाया गया है और उन्हें शुक्रवार देर रात जमानत पर रिहा कर दिया गया। एप्पल डेली को लोकतंत्र समर्थक रुख के लिए जाना जाता है और वह शहर पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए चीन तथा हॉन्गकॉन्ग सरकारों की अक्सर आलोचना करता रहता है। उसने और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करते हुए 2019 में हुए प्रदर्शनों का भी समर्थन किया था और इसके बाद पिछले साल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने समेत कई कदमों की आलोचना की थी।

 

 

 

 

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‘आउटलुक’ समूह में एडिटर-इन-चीफ रूबेन बनर्जी की जिम्मेदारियों में हुआ इजाफा

‘आउटलुक’ (Outlook) ग्रुप से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 15 June, 2021
RubenBanerjee44554

‘आउटलुक’ (Outlook) ग्रुप से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि रूबेन बनर्जी की जिम्मेदारियों में और इजाफा करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से आउटलुक ग्रुप के सभी पब्लिकेशंस और डिजिटल प्रॉपर्टीज का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। 

बनर्जी अभी तक ग्रुप की तीन मैगजींस ‘आउटलुक वीकली’ (अंग्रेजी), पाक्षिक ‘आउटलुक’ (हिंदी) और मासिक ‘आउटलुक मनी’ में एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अपनी नई भूमिका में रूबेन बनर्जी अब ग्रुप के दो अन्य प्रमुख पब्लिकेशंस ‘आउटलुक बिजनेस‘ और ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ की कमान भी संभालेंगे।

इस कदम की घोषणा करते हुए ‘आउटलुक ग्रुप‘ के सीईओ इंद्रनील रॉय (Indranil Roy) का कहना है, ‘बनर्जी काफी अनुभवी पत्रकार हैं और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की पत्रकारिता का काफी अनुभव है। अपनी नई भूमिका में वह इंटीग्रेट न्यूजरूम्स को आगे बढ़ाएंगे और डिजिटल को बढ़ावा देने के साथ ग्रुप के प्रिंट पब्लिकेशंस को और आगे ले जाएंगे।‘ 

बताया जाता है कि देश का जाना-माना यह मीडिया ग्रुप डिजिटल के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा ऑडियंस तक अपनी पहुंच बनाने के लिए अपनी स्ट्रैटेजी पर फिर से फोकस कर रहा है। इसके लिए उसने तमाम योजनाएं तैयार की हैं और ग्रुप एडिटर-इन-चीफ के रूप में बनर्जी की नियुक्ति इसी योजना का हिस्सा है। इसके साथ ही इंद्रनीय रॉय का कहना है कि हमें एक प्रेरणाप्रद विरासत मिली है और इसके बेहतर भविष्य को लेकर मैं निश्चिंत हूं।

बता दें कि रूबेन बनर्जी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में नेशनल अफेयर्स एडिटर रह चुके हैं। इसके अलावा वह ‘अल जजीरा‘, ‘इंडिया टुडे‘ और ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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पत्रकार पर लगा गंभीर आरोप, अखबार ने दिखाया बाहर का रास्ता

केरल से प्रकाशित होने वाले प्रमुख मलयालम समाचार पत्र ‘केरल कौमुदी’ ने एक महिला सहकर्मी को परेशान करने पर अपने एक एम्प्लॉयी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 09 June, 2021
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केरल से प्रकाशित होने वाले प्रमुख मलयालम समाचार पत्र ‘केरल कौमुदी’ ने एक महिला सहकर्मी को परेशान करने पर अपने एक एम्प्लॉयी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि जिस पत्रकार की सेंवाएं समाप्त की गईं हैं, उनका नाम एम. राधाकृष्णन हैं, जोकि अखबार की तिरुवनंतपुरम इकाई में प्रूफरीडर के तौर पर कार्यरत थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम. राधाकृष्णन तिरुवनंतपुरम प्रेस क्लब के सचिव भी हैं। अखबार ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के कृत्यों को सही नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी को फिलहाल इस मामले पर नरम रुख अपनाने का कोई कारण नहीं मिला।

मामले की आंतरिक जांच करने के बाद, एक अधिकारी ने कहा, ‘उनके (राधाकृष्णन) द्वारा किए गए कृत्य बहुत संगीन और गंभीर हैं। रात में एक महिला के घर में घुसने का कोई औचित्य नहीं है, वह भी कंपनी के किसी अन्य कर्मचारी के घर में… मुद्दा कंपनी के परिसर के बाहर हुआ है, लेकिन इस मुद्दे का कंपनी के नैतिक और अनुशासन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

बता दें कि मामला 30 नवंबर, 2019 का है, राधाकृष्णन और कुछ अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने रात में महिला सहकर्मी के घर में घुसकर जबरन संबंध बनाने के इरादे से उसके साथ मारपीट की और घर में तोड़फोड़ की।

अपनी शिकायत में राधाकृष्णन पर महिला ने कंपनी के एक अन्य कर्मचारी के साथ संबंध रखने के साथ-साथ उन पर नैतिक पुलिसिंग का भी आरोप लगाया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि राधाकृष्णन कुछ लोगों के साथ उसके घर में घुसे और एक व्यक्ति के बारे में पूछताछ की, जो उनके घर में तभी आया हुआ था। हालांकि महिला पत्रकार ने बताया कि वह व्यक्ति एक पारिवारिक मित्र था, जिस पर राधाकृष्णन ने कथित तौर पर ‘अनैतिक गतिविधि’ में शामिल होने का आरोप लगाया। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने घर में मौजूद महिला के पुरुष मित्र को भी घसीटा और उसके साथ मारपीट की। घटना के वक्त उसके बच्चे मौजूद थे। इसके बाद हुई हाथापाई में आरोपी ने पीड़िता को कथित तौर पर धक्का भी दिया।  

नवंबर में हाथापाई के बाद, राधाकृष्णन को कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया गया और भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 147, 451, 323, 342,354 और 149 के तहत आरोप लगाया गया। उन्हें पत्रकारों के निकाय केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) द्वारा भी निलंबित कर दिया गया था। फिहलाह वे जमानत पर बाहर हैं।

इस घटना के बाद में, पीड़ित महिला ने कंपनी और प्रेस क्लब को एक ईमेल भेजा था, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती बताई थी।

मेल के मुताबिक, ‘उसके परिवार के राधाकृष्णन के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध थे और वह उसी कॉलोनी में रहता था। अक्टूबर 2019 में केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) के चुनावों के दौरान उनका व्यवहार बदल गया। राधाकृष्णन ने उनकी एक सहयोगी को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए उनसे संपर्क किया, ताकि उनकी सहयोगी राधाकृष्णन और उनके द्वारा समर्थित पैनल के खिलाफ खड़ी न हो सके। हालांकि, उन्होंने इसके लिए इनकार कर दिया और आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप में चुनावों के संबंध में एक कमेंट किया। राधाकृष्णन ने उस कमेंट नजरअंदाज कर दिया और उन्हें यह कहते हुए बुलाया कि यदि उनका पैनल यदि चुनाव में विफल रहा, तो इसके लिए उन्हें (पीड़ित महिला को) दोषी ठहराया जाएगा।’ शिकायत के मुताबिक, ‘इस घटना के बाद, आरोपी ने उन्हें कई बार परेशान किया, जो एक साल से भी अधिक समय तक चला। पत्रकार को उस समय प्रेस क्लब के अध्यक्ष का समर्थन मिला हुआ था।’

 

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इस अखबार ने पूरे किए 10 साल, मनाया जश्न

बता दें कि तेलंगाना प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस समाचार पत्र को 6 जून 2011 को लॉन्च किया गया था।

Last Modified:
Tuesday, 08 June, 2021
namastetelangana5454

तेलुगु भाषा का दैनिक समाचार पत्र ‘नमस्ते तेलंगाना’ (Namasthe Telangana) ने 6 जून, 2021 को अपनी स्थापना के दस साल पूरे कर लिए हैं। इस उपलक्ष्य में पूरी टीम ने धूमधाम से 10वां स्थापना दिवस मनाया।

बता दें कि तेलंगाना प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस समाचार पत्र को 6 जून 2011 को लॉन्च किया गया था। यह समाचार पत्र तेलंगाना राज्य के सभी जिलों की कवरेज करता है और इसे 7 स्थानों से प्रकाशित किया जाता है, जिनमें राजधानी शहर हैदराबाद, निजामाबाद, करीमनगर, वारंगल, खम्मम, नलगोंडा और महबूबनगर शामिल है।

‘नमस्ते तेलंगाना’ तेलंगाना क्षेत्र के लोगों के लिए अलग राज्य का समर्थन करता था और ऐसा करने में उसकी सहायक भूमिका रही। हैदराबाद को राजधानी बनाते हुए तेलंगाना राज्य का गठन वर्ष 2014 में किया गया था।

‘नमस्ते तेलंगाना’ के संपादक टी. कृष्ण मूर्ति के मुताबिक, ‘नमस्ते तेलंगाना’ हमेशा से ही तेलंगाना के लोगों की आवाज और ताकत रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम तेलंगानावासियों की आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अखबार यह हर संभव प्रयास करता है कि तेलंगाना के लोगों की आवाज और उनकी राय लगातार सरकार और नीति निर्माताओं तक पहुंचती रहे। हमारा एकमात्र मकसद तेलंगाना के लोगों को समसामयिक मामलों, अर्थव्यवस्था और राजनीति, संस्कृति व परंपराओं, शिक्षा व मनोरंजन, व्यापार व कृषि से संबंधित सर्वोत्तम और सत्यापित सामग्री पहुंचाते रहना है। हम चाहते हैं कि हमारे प्रत्येक पाठक को सही सूचना मिले और उन्हें लगातार अपडेट किया जाता रहे। इसे संक्षेप में कहें तो ‘हम जो कुछ भी करते हैं, हम तेलंगाना के लोगों के कल्याण और भलाई के लिए करते हैं’।

समाचार पत्र के 10 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पर टिप्पणी करते हुए ‘नमस्ते तेलंगाना’ के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डी. दामोदर राव कहते हैं, ‘हम तेलंगाना के लोगों की आवाज रहे हैं और हमेशा रहेंगे। हमारा मकसद लोगों और नीति निर्माताओं के बीच सेतु बनना है। हमारी सफलता का स्तर तेलंगाना और उसके लोगों की प्रगति और समृद्धि को दर्शाता है। हम तेलंगाना के लोगों, अपने सभी सब्सक्राइबर्स, एडिटोरियल टीम, बिजनेस एसोसिएट्स, ऐडवर्टाइजर्स और अपने सभी एम्प्लॉयीज के निरंतर समर्थन और उनकी सहायता के लिए तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। इन सभी ने 10 साल की छोटी सी अवधि में हमें जबरदस्त न्यूजपेपर पब्लिशर बना दिया है। हम आने वाले वर्षों में तेलंगाना के लोगों के लिए काम करते रहने के लिए खुद को प्रतिबद्ध कर रहे हैं। हम तेलंगाना की आवाज और दर्पण बने रहेंगे।’

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Times Of India ने गठित किया एडिटोरियल बोर्ड, शामिल हुए ये नाम

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (Time of India) के एडिटोरियल डायरेक्टर जयदीप बोस ने अपने पद से हटने का फैसला लिया है। अपनी नई भूमिका में वह इस एडिटोरियल बोर्ड के अध्यक्ष होंगे।

Last Modified:
Tuesday, 01 June, 2021
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‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (Time of India) के एडिटोरियल डायरेक्टर जयदीप बोस ने अपने पद से हटने का फैसला लिया है। इसके बाद ‘टाइम्स ग्रुप’ की प्रकाशक कंपनी ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) ने अखबार के नए एडिटोरियल बोर्ड के गठन की घोषणा की है। इस बारे में कंपनी की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटोरियल डायरेक्टर जयदीप ‘जोजो‘ बोस पिछले साल की शुरुआत से अपनी कार्यकारी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को छोड़ने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। जोजो चाहते हैं कि अगली एडिटोरियल लीडरशिप को आगे आकर राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी निभाने का मौका मिलना चाहिए। जोजो का कहना है कि उनके इस कदम से अन्य उत्कृष्ट संपादकों के लिए जगह बनाने में मदद मिलेगी, जो उनके बाद इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाएंगे।'

सर्कुलर के अनुसार, जोजो की इच्छा और कंपनी के दीर्घकालिक विजन को देखते हुए एक नया संपादकीय ढांचा (Editorial structure) तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्तमान प्रणालियों और प्रक्रियाओं को मजबूत करना है, भले ही यह भविष्य के लिए तैयार हो। इसके तहत जोजो दैनिक परिचालन जिम्मेदारियों से पीछे हट जाएंगे और इसके बजाय एक व्यापक रणनीतिक भूमिका निभाएंगे। वह ऑडियंस के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रिंट और डिजिटल के बीच एकीकरण का काम करेंगे। इसके साथ ही सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि जोजो टाइम्स ऑफ इंडिया और ग्रुप के अन्य भाषायी पब्लिकेशंस को अपना सर्वश्रेष्ठ हासिल करने में यहां के सहयोगियों का मार्गदर्शन करेंगे।  

अब कंपनी ने एडिटोरियल की लीडरशिप टीम के निम्न सदस्यों के साथ मिलकर टाइम्स ऑफ इंडिया के नए एडिटोरियल बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है।

1. विकास सिंह (Vikas Singh) जोकि एसोसिएट एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं, वे अब एग्जिक्यूटिव एडिटर (न्यूज) होंगे। इनके ऊपर अखबार में जाने वाले समस्त न्यूज कंटेंट का जिम्मा होगा। बिजनेस स्टैंडर्ड और बिजनेस टुडे के लिए काम करने के पांच साल के ब्रेक को छोड़कर विकास 1994 से कंपनी के साथ हैं। वह पहले ईटी और फिर टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ थे। उन्होंने न्यूज के अलावा  एडिट पेज के साथ-साथ डिजिटल में भी काम किया है।

2. डेरिक (Derick D’Sa), एसोसिएट एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और वे अब से एग्जिक्यूटिव एडिटर (नेशनल को-ऑर्डिनेशन) का काम देखेंगे। अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह सिटी की कवरेज को लेकर रेजिडेंट एडिटर्स और मेट्रो एडिटर्स के बीच समन्वय का काम करेंगे। डेरिक ने अपने करियर की शुरुआत कोलकाता में ‘द स्टेट्समैन‘ के साथ की थी। इसके बाद वह टाइम्स ऑफ इंडिया, अहमदाबाद में आ गए। टाइम्स में कोलकाता और मुंबई में आरई के रूप में वापस लौटने से पहले वह अहमदाबाद में एक्सप्रेस में आरई के रूप में कार्यरत थे। लोगों से जुड़े मुद्दों पर विकास और डेरिक मिलकर काम करेंगे।

3. दिवाकर (Diwakar) ने वर्ष 2004 में टाइम्स ऑफ इंडिया में आने से पहले वर्ष 1992 में ईटी जॉइन किया था। वह एग्जिक्यूटिव एडिटर (Politics and Government) के रूप में अपना काम करते रहेंगे। वह सभी संस्करणों और ब्यूरो में एडिटर्स और रिपोर्टर्स का मार्गदर्शन करेंगे। ईटी के एसोसिएट एडिटर शौभिक चक्रवर्ती जिन्होंने स्वागतो गांगुली के रिटायरमेंट के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिट पेज की जिम्मेदारी बतौर एडिटर संभाली है, वह विभिन्न मुद्दों और विचारों पर दिवाकर के संपर्क में रहेंगे।  

4.  रोहित शरण (Rohit Saran)- ये पिछले साल अखबार को छोड़कर बतौर एडिटर-इन-चीफ ऑनलाइन एडिशन में आ गए थे, वह इस एडिटोरियल बोर्ड के प्रमुख सदस्य होंगे। फिलहाल वे डिजिटल को अगले स्तर तक ले जाने और TOI+ की न्यूज प्रॉडक्ट के तौर पर एक मजबूत सदस्यता स्थापित करने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं।  

जोजो टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे, जिसमें उपरोक्त चार प्रमुख संपादकीय पद उनसे संबंधित होंगे। इसके अलावा वह नेशनल वर्टिकल हेड्स, रेजिडेंट एडिटर्स और अन्य सहयोगियों के साथ आइडियाज और प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम करेंगे।

इस बारे में 'बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड' (बीसीसीएल) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम की ओर से कहा गया है कि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए टाइम्स के एडिटोरियल बोर्ड की हर सफलता की कामना करने में कृपया मेरे साथ शामिल हों। मुझे पूरा विश्वास है कि इस एडिटोरियल टीम को आपका पूरा सपोर्ट और समर्थन मिलता रहेगा। 

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तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट को दिए ये निर्देश

कथित यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

Last Modified:
Thursday, 27 May, 2021
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महिला साथी के साथ कथित यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई न्यायमूर्ति एस.सी. गुप्ते की अवकाशकालीन पीठ के सामने हुई। हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट को तरुण तेजपाल मामले में सुनाए गए निर्णय में संपादन के आदेश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने बलात्कार मामले में सेशन कोर्ट की तरफ से जारी 527 पन्नों के फैसले में पीड़िता की पहचान और उससे जुड़ी जानकारियों को हटाने का निर्देश दिया है।

गोवा की सेशन कोर्ट ने करीब 8 साल बाद बीते शुक्रवार को बरी कर दिया गया था। सेशन कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने पीड़ित महिला को इंसाफ दिलाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हाई कोर्ट में गोवा सरकार की ओर से पेश हुए।

ये भी पढ़ें: तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ HC पहुंची गोवा सरकार

बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एस.सी. गुप्ते की अवकाशकालीन पीठ ने 2013 के बलात्कार मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को बरी करने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बॉम्बे हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ को बताया कि निर्णय और उसकी कुछ टिप्पणियां ‘आश्चर्यजनक’ हैं और उन्होंने उसमें न केवल पीड़िता की पहचान का खुलासा किया, बल्कि उसकी मां और पति का नाम भी दिया है। उन्होंने बेंच को बताया कि वास्तव में फैसले में पीड़िता के ई-मेल का भी जिक्र किया गया है।

मेहता ने उस कड़ी में कई टिप्पणियों पर भी रोशनी डाली, जहां पीड़िता के व्यवहार की भी स्पष्ट जानकारी दी गई थी। राज्य को अपनी अपील के आधार में संशोधन करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि अदालत की वेबसाइट पर फैसला अपलोड करने से पहले इन संदर्भों को हटा दिया जाए। मामले की सुनवाई अब 2 जून को होगी।

इस बीच, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि फैसले से पीड़िता की पहचान का भी खुलासा होता है। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न केस में पीड़ितों की पहचान का खुलासा करना एक आपराधिक अपराध है। तुषार मेहता ने कहा कि यह दुखद है कि निचली अदालत इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील नहीं थी।

राज्य के वकील ने यह भी बताया कि एक पैराग्राफ में पीड़िता की मां के नाम का भी जिक्र है, जिसे संशोधित भी किया जाना चाहिए। मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने फैसले की प्रति मिलने से पहले ही अपील दाखिल कर दी। मेहता ने कहा, 'हमें फैसले की प्रति 25 मई को मिली। हम इस फैसले को रिकॉर्ड में लाना चाहते हैं और याचिका में चुनौती के आधार में भी संशोधन करना चाहते हैं।'

इसके बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी को पीड़ित की पहचान का खुलासा करने वाले सभी संदर्भों को फैसले से दूर करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले को दो जून के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।

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तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ HC पहुंची गोवा सरकार

यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है। 

Last Modified:
Wednesday, 26 May, 2021
Tejpal5454

महिला साथी के साथ कथित यौन शोषण के मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को गोवा की निचली अदालत ने 8 साल बाद शुक्रवार को बरी कर दिया गया था। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ अब गोवा सरकार ने पीड़ित महिला को इंसाफ दिलाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है। 

गोवा के एडवोकेट जनरल देवीदास पंगम ने बताया कि राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में गोवा फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने अभी अपील पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।

वहीं, दूसरी तरफ, अदालत की ओर से 21 मई को सुनाए गए फैसले की कॉपी मंगलवार को मिली। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला की ओर से लगाए गए आरोपों के तहत तेजपाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल सके।

गोवा (Goa) के ट्रायल कोर्ट की एडिशनल सेशन जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के आदेश देते हुए कहा कि उन्हें संदेह का लाभ दिया जाता है। इसकी वजह यह है कि शिकायतकर्ता की कंप्लेंट को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त सबूतों की कमी है। इसके अतिरिक्त अदालत ने 527 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच करने वाली अधिकारी सुनीता सावंत ने केस के महत्वपूर्ण पहलुओं की सही से जांच नहीं की। जज ने इसके साथ ही लिखा, 'ट्रायल के लिए महिला का ‘व्यवहार’ एक महत्वपूर्ण कारक था, जिसने मामले को कमजोर कर दिया।' जज ने कहा, 'यह देखने वाली बात रही कि अभियोक्ता (पीड़ित) का व्यवहार मानक नहीं था। लगातार दो रातों में यौन उत्पीड़न की शिकार हुई कोई महिला न तो प्रशंसनीय रूप में दिख सकती है और न ही उसने ऐसा कोई बर्ताव दिखाया जिससे लगे कि उसका यौन उत्पीड़न हुआ है।'  

निचली अदालत ने पाया कि महिला की ओर से तरुण तेजपाल को होटल में उसकी लोकेशन के बारे में मैसेज देना 'अप्राकृतिक' था, जहां वह एक प्रमुख अमेरिकी एक्ट्रेस का पीछा कर रही थी।

महिला ने शिकायत की थी कि तेजपाल ने 7 नवंबर, 2013 और 8 नवंबर, 2013 को होटल की लिफ्ट में उसका यौन उत्पीड़न किया। अदालत ने कहा, 'अगर महिला का पहले उत्पीड़न हो चुका था और वो डरी हुई थी, तो भी उसकी मन:स्थिति को देखते हुए सवाल उठता है कि वह आरोपी को रिपोर्ट क्यों करेगी और उसे अपनी लोकेशन क्यों बताएगी? जबकि वो तीन महिलाओं को रिपोर्ट कर सकती थी…'

अदालत ने कहा, 'अभियोक्ता का अप्राकृतिक आचरण फिर से साक्ष्य अधिनियम की धारा 8 के तहत प्रासंगिक है। अभियोक्ता ने स्वीकार किया था कि उसके फोन से आरोपी को 8/11/2013 को दो एसएमएस भेजे गए थे… और ये मैसेज उसके द्वारा किसी मैसेज के जवाब में नहीं भेजे गए थे।'

जज ने फैसले की कॉपी में लिखा, 'आरोपी ने मैसेज भेजकर उससे यह पूछने की कोशिश की थी कि वो कहां थी और उसने मिनटों के अंदर दो बार एक ही मैसेज भेजा। यह स्पष्ट रूप से स्थापित करता है कि अभियोक्ता पीड़ित नहीं थी और न ही भयभीत थी। ये आरोपी पर लगाए गए अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह से खारिज कर देता है कि उक्त मैसेज के ठीक पहले आरोपी ने अभियोजक का फिर से यौन उत्पीड़न किया था।

जानकारी के मुताबिक, मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते समय पुलिस की जांच को भी कठघरे में खड़ा किया। कोर्ट ने तरुण तेजपाल को संदेह के लाभ के आधार पर बरी करते हुए कहा था कि जांच के दौरान गोवा पुलिस ने सबूतों को नष्ट किया और सही साक्ष्यों को पेश नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में गोवा पुलिस की ऐसी तमाम गलतियों का जिक्र किया है। अदालत ने कहा है कि जांच अधिकारी ने ग्राउंड फ्लोर, पहली और दूसरी मंजिल के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए लेकिन पहली मंजिल का फुटेज अदालत के समक्ष नहीं पेश किया गया। यह जांच में एक महत्वपूर्ण चूक है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने 26 नवंबर, 2013 के सीसीटीवी फुटेज से पीड़िता के बयान की तुलना नहीं की, जो इस मामले में सबसे तटस्थ सबूत था। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच करे ताकि सच्चाई सामने आ सके। 

तेजपाल पर यह आरोप था कि उन्होंने 7 नवंबर, 2013 को गोवा की एक पांच सितारा होटल के ब्लॉक 7 के बाएं लिफ्ट में कथित तौर पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता पक्ष का कहना है कि 8 नवंबर, 2013 को पीड़िता के साथ फिर से छेड़छाड़ की गई। इस मामले में तेजपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), धारा 376 की उपधारा दो (फ) (पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थ महिला से बलात्कार) और 376 (2) (क) (नियंत्रण कर सकने की स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमा चला।   

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BCCL की इस याचिका को कोर्ट ने माना सही, लगाई ये रोक

कंपनी ने आरोप लगाया था कि ये नेटवर्क और व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से इन अखबारों के इंटरनेट संस्करण का प्रसार कर रहे हैं।

Last Modified:
Saturday, 22 May, 2021
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दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कॉपी राइट्स के उलंघन के मामले में सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप और टेलीग्राम व कुछ व्यक्तियों पर बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लि. के ई-अखबारों, जैसे- ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (टीओआई) और ‘नवभारत टाइम्स’ का प्रसार करने की अंतरिम रोक लगा दी है।

कंपनी ने आरोप लगाया था कि ये नेटवर्क और व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से इन अखबारों के इंटरनेट संस्करण का प्रसार कर रहे हैं।

न्यायाधीश जयंत नाथ ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या प्रतिवादी के प्लेटफॉर्म्स पर वादी के ई-पेपर (इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में) को अवैध रूप से प्रसारित करने का कार्य इसके कॉपीराइट का उल्लंघन लगता है। उन्होंने बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड के पक्ष में आदेश देते हुए इस तरह के कार्य के खिलाफ अंतरिम तौर पर रोक लगा दी।

अदालत ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम को नोटिस भी जारी किया। इन दोनों ऐप के जरिए फोटो, संदेश, दस्तावेज और वीडियो तत्काल भेजे जाते हैं और कुछ लोग इन प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग ग्रुप्स के ‘एडमिनिस्ट्रेटर’ के रूप में काम करते हैं।

अदालत ने इन प्लेटफॉर्म्स से मामले में अपना पक्ष रखने और आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी मामले में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी।

सुनवाई के दौरान बेनेट कोलमैन एंड कंपनी के वकील ने कहा कि बिना अधिकृत मंजूरी के ई-न्यूजपेपर के रूप में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘नवभारत टाइम्स’ को विभन्न वॉट्सऐप ग्रुप और टेलीग्राम पर प्रसारित किया जा रहा है। यह कॉपीराइट का उल्लंघन का मामला है।

उन्होंने कहा कि यह मामला 2020 में कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए ‘लॉकडाउन’ से शुरू हुआ। लोगों ने ई-न्यूजपेपर डाउनलोड कर उसे दूसरे ग्रुप में प्रसारित करना शुरू किया।

वकील के मुताबिक, जून 2020 में कंपनी को वॉट्सऐप पर कॉपीराइट के उल्लंघन की जानकारी मिली। इस संदर्भ में मंच को नोटिस दिया गया लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ।

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तरुण तेजपाल ने वकीलों का यूं जताया आभार, कहा- अब टूटी जिंदगी को ठीक करूंगा

गोवा की जिला अदालत ने शुक्रवार 21 मई को 8 साल पुराने रेप मामले में तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया है।

Last Modified:
Friday, 21 May, 2021
Tejpal5454

गोवा की जिला अदालत ने शुक्रवार 21 मई को 8 साल पुराने रेप मामले में तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया है। तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ पर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी महिला सहयोगी का शारीरिक शोषण करने का आरोप था। तरुण तेजपाल की बेटी ने पिता के बरी होने के बाद उनका बयान जारी किया।

बरी होने के बाद तरुण तेजपाल ने अपने एक बयान में पहले अपने एक वकील राजीव गोम्स की कोरोना से हुई मौत पर दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गोम्स एक शानदार वकील थे, जिनका राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त करियर रहा। तेजपाल ने गोम्स की तारीफ करते हुए कहा, ‘मेरी जिंदगी और सम्मान को वापस दिलाने में किसी ने इतनी मुश्किल लड़ाई नहीं लड़ी, जितनी राजीव ने अपने बेहतरीन अनुभव से लड़ी।’

तेजपाल ने बताया, ‘राजीव मुझसे कहते थे कि वे सिर्फ पैसे का मजा लेते हैं, वे इसके लिए काम नहीं करते। वे हमेशा कहते थे कि उन्हें भगवान ने बेकसूरों की लड़ाई लड़ने के लिए भेजा है।’ उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि एक परिवार के तौर पर हम हमेशा राजीव के कर्जदार रहेंगे। हम उनकी पत्नी शेरिल और बेटे शॉन के प्रति भी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। कोई भी क्लाइंट अपने लिए राजीव से बेहतर वकील की उम्मीद नहीं कर सकता।

तेजपाल ने अपने बयान में कहा, ‘नवंबर 2013 में मेरी एक सहयोगी ने शारीरिक शोषण करने का मुझपर गलत आरोप लगाए थे। आज गोवा के ट्रायल कोर्ट के एडिशनल सेशल जज क्षमा जोशी ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया है। ऐसे मुश्किल समय में जब लोगों में साहस नहीं है उन्होंने सच का साथ दिया, इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं।’

तेजपाल ने बताया कि उन पर लगे झूठे आरोपों की वजह से पिछले साढ़े सात साल उनके परिवार के लिए दर्दनाक रहे। इन झूठें आरोपों की वजह से उनके निजी, पेशेवर और सार्वजनिक जीवन के हर पहलू पर असर पड़ा। इसके बावजूद हमने गोवा पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग किया और सैकड़ों सुनवाई के बाद हमने कानून के हर सिद्धांत का पालन किया।

तेजपाल ने पिछले 8 साल में अपनी सहायता के लिए आगे आने वाले वकीलों का भी शुक्रिया जताया। उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, प्रमोद दुबे समेत कई वकीलों ने उनकी मदद की। तरुण तेजपाल ने आगे अपील करते हुए कहा कि उनके परिवार की निजता का सम्मान किया जाना चाहिए। इस दौरान वे अपनी टूटी जिंदगियों को ठीक करने की कोशिश करेंगे।

आप उनके बयान को अंग्रेजी भाषा में नीचे पढ़ सकते हैं- 

Seldom does a long-fought for vindication arrive hand-in-hand with profound heartbreak. Last week my trial lawyer, Rajeev Gomes, died of Covid. Dynamic and brilliant,  at 47 he was on the brink of a scintillating career as a criminal lawyer at the national level.

No person fought harder, and with greater skill, to reclaim my life and reputation.  Rajeev used to say to me, 'I enjoy money but I don't work for it. I believe god put me on earth to fight for the innocent.' As a family we owe Rajeev Gomes a profound and permanent debt. And we grieve alongside his wife Cheryl and his young son Sean. No client can ever hope for a better lawyer than Rajeev. The ever-struggling wheel of justice has lost a solid spoke. 

In November 2013 I was falsely accused of sexual assault by a colleague. Today the Hon’ble Trial Court of  Additional Sessions Judge Kshama Joshi, in Goa, has honourably acquitted me. In an awfully vitiated age, where ordinary courage has become rare, I thank her for standing by the truth. 

The past seven-and-a-half  years have been traumatic for my family as we have dealt with the catastrophic fallout of these false allegations on every aspect of our personal, professional and public lives. We have felt the boot of the state, but through it all we have co-operated fully with the Goa police and the legal system,  through hundreds of court proceedings. We have unwaveringly followed every mandate of due procedure and abided by every principle of law as laid down in the Constitution. We have also endeavoured to uphold every norm of decency expected in a case like this. 

It is with profound respect that I thank this court for its rigorous, impartial and fair trial and for its thorough examination of the CCTV footage and other empirical material on record.

In these 8 years a host of outstanding lawyers came to our aid, and we owe them all a deep debt, prime among them Pramod Dubey, Aamir Khan, Ankur Chawla, Amit Desai, Kapil Sibal, Salman Khurshid, Aman Lekhi, Sandeep Kapoor, Raian Karanjewala, and Shrikant Shivade. 

I also thank scores of family members and friends who kept the faith and stood by us through these dark years. 

I wish to make no further statement at this time and request my family's privacy be respected, as we try and reclaim our broken lives. I will make a comprehensive statement at an appropriate time in the future.

Tarun J Tejpal 

   

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तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को मिली कोर्ट से बड़ी राहत

तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल के खिलाफ अपनी सहकर्मी से कथित दुष्कर्म के मामले में गोवा की एक अदालत से शुक्रवार को बड़ी राहत मिली है।

Last Modified:
Friday, 21 May, 2021
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तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल के खिलाफ अपनी सहकर्मी से कथित दुष्कर्म के मामले में गोवा की एक अदालत से शुक्रवार को बड़ी राहत मिली है। 8 साल बाद गोवा की एडिशनल सेशन कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

तरुण तेजपाल मामले में बुधवार को फैसला सुनाया जाना था,लेकिन कोर्ट में बिजली नहीं होने के कारण फैसले को 21 मई तक टाल दिया गया था। ताउते साइक्लोन की वजह से गोवा में बिजली आपूर्ति बाधित थी।

कोर्ट से बरी होने के आदेश के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि 'नवंबर 2013 में उन्हें एक महिला सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न के झूठे मामले में फंसाया था और आज गोवा में एडिशनल सेशन जज की ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया।'

बता दें कि तरुण तेजपाल पर 2013 में गोवा के एक लक्जरी होटल की लिफ्ट के भीतर महिला साथी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था। इसके बाद गोवा पुलिस ने 30 नवंबर 2013 में तेजपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। तरुण तेजपाल मई 2014 से जमानत पर बाहर हैं। गोवा अपराध शाखा ने तेजपाल के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया।

तेजपाल ने इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर अपने ऊपर आरोप तय किए जाने पर रोक लगाने का अनुरोध किया था लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

तरुण तेजपाल पर भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत मंशा से कैद करना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), 376 (2) (महिला पर अधिकार की स्थिति रखने वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) और 376 (2) (के) (नियंत्रण कर सकने की स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमा चला।

जानिए, क्या था मामला

तरुण तेजपाल पर साथी महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा में तहलका का एक इवेंट था, उस रात जब वह एक गेस्ट को उसके कमरे तक छोड़कर वापस लौट रही थी, तो इसी होटल के ब्लॉक 7 के एक लिफ्ट के सामने उसे उसके बॉस तरुण तेजपाल मिल गए। तेजपाल ने गेस्ट को दोबारा जगाने की बात कह अचानक उसे वापस उसी लिफ्ट के अंदर खींच लिया।

गोवा पुलिस को दिए गए बयान में लड़की ने कहा था, अभी मैं कुछ समझ पाती इसी बीच तेजपाल ने लिफ्ट के बटन कुछ ऐसे दबाने शुरू किए, जिससे ना तो लिफ्ट कहीं रुके और ना ही दरवाजा खुले। इसके बाद तेजपाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

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