जयंती की जुबानी: 30 लेखकों की रचना 'बेला' की कहानी...

हुआ कुछ यूं कि पहली अप्रैल को जब डॉक्टर के क्लीनिक से दाहिने पैर पर प्लास्टर...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 04 January, 2018
Last Modified:
Thursday, 04 January, 2018
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6 जनवरी से दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले पुस्तक मेले में 7 जनवरी को लोकार्पण होने वाली किताब '30 शेड्स ऑफ बेला' को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है। आम से लेकर खास तक इस किताब पर अपनी बात कह रहे हैं। प्रख्यात गायक कैलाश खेर ने भी इस किताब के बारे में लिखा है।

बेला की रचना का आइडिया कैसे जयंती को आया और फिर कैसे उन्होंने इसे आगे बढ़ाया, आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी...

हुआ कुछ यूं कि पहली अप्रैल को जब डॉक्टर के क्लीनिक से दाहिने पैर पर प्लास्टर लगवा कर निकली, तो ना जाने क्यों जबरदस्त हंसी आ गई। प्लास्टर ताजा-ताजा लगा था, नीले रंग का, घुटनों से कुछ नीचे तक। मैं व्हील चेयर पर बैठी थी और वार्डबॉय मुझे गाड़ी तक छोड़ने आ रहा था। मुझे हंसता देख, वह चौंका, फिर पूछने लगा, मैडम, कोई चुटकुला याद आ गया क्या?

मैंने जवाब दिया: नहीं भाई, आज के दिन तो मैं खुद चुटकला बन गई हूं। याद नहीं, आज अप्रैल की पहली तारीख है, फूल्स डे।

वह शायद समझ नहीं पाया, मैं उसे कैसे बताती कि पिछले साल इसी दिन इसी पांव पर मैं प्लास्टर चढ़ा कर घर जा रही थी!

कहावत है ना, to make a mistake twice… पहली बार असावधानी या दुर्घटना हो सकती है, दूसरी बार? मूर्खता?

अच्छा, पहली बार जब पांव टूटा, एक्सरे के बाद डॉक्टर ने कहा, टोर्न लिंगामेंट है, प्लास्टर लगेगा, तो मैंने एक चुनौती की तरह लिया। जीवन में पहली बार प्लास्टर लग रहा था। बचपन से अब तक भाई-बहनों को देखा था सफेद प्लास्टर लगाए, दोस्तों को भी। अफसोस भी था कि जिंदगी बीत गई, एक बार भी हड्डी ना टूटी। कहीं इस अनुभव से वंचित तो नहीं रह जाऊंगी?

वो चार हफ्ते मजे-मजे में कट गए। बस कार ड्राइव नहीं कर पा रही थी, पर बाकि सब कुछ तो हो ही रहा था।

एक अनुभव काफी है। हंसी भी आ रही थी और कोफ्त भी कि अब यह छह हफ्ते कैसे गुजरेंगे? ऊपर से डॉक्टर ने एक बैसाखी और थमा दी कि एंकल की हड्डी टूटी है, जरा संभल कर।

घर आई। दवाई और नए चढ़े नीले प्लास्टर के नशे में दोपहर को आंख लग गई। शाम तक नींद के झोखों में रही। उठी तो लगा शरीर से ज्यादा भारी तो मन है। पुरानी आदत है, दोपहर को सो जाऊं तो बुखार आ जाता है। और रात के बारह बज जाते हैं, असली सेंस में। पूरी रात फिर नींद नहीं आई। यह डर लगातार घना होता गया कि ऐसा क्या करूं, जिससे यह छह सप्ताह जादू  की तरह झटके में बीत जाएं। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक पुराने वाकिफकार बताते थे कि वहां उन सहित कई महानुभाव इस तरह की एंक्जाइटी का सामना तमाम तरह के ड्रग्स से करते हैं। किसी स्क्रीन टेस्ट का रिजल्ट आने में चार दिन का समय है, ऑडिशन को तीन दिन बाकि है, शूटिंग शुरू होने में एक महीना है, क्या करें, तो अफीम फांक लो। बीच के दिन छूमंतर। आसान। इसके बाद जिंदगी क्या रुख लेगी, किसको पता और क्या फर्क पड़ता है?

नशानशाअगला दिन इतवार का था। मेरी युवा मित्र प्रतिष्ठा सिंह मुझसे मिलने आई। बातों-बातों में उसने जिक्र छेड़ दिया, हम शुरू करें?

महीने-दो महीने पहले कुछ दोस्तों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के बारे में बात करते समय यह चर्चा हुई थी कि हमें फेसबुक पर कुछ क्रिएटिव काम करना चाहिए। सारी दुनिया इतने नए काम कर रही है, कुछ नया सोच रही है, तो हम क्यों नहीं?

उस समय यह तय हुआ था कि हम मिल कर एक bilingual सीरियल लिखेंगे। इसके बाद भी कुछ साथियों और दोस्तों से बात हुई, सब उत्साहित लगे। पर बात वहीं खत्म हो गई।

प्रतिष्ठा ने कहा, तो लगा इस समय को सही क्यों ना बनाया जाए। उसी दिन से इसे अमली जामा पहनाना शुरू किया। सूची बनाई, किन-किनको शामिल किया जाए। हिंदी और English में। कहानी कैसी हो? एक किरदार को लेकर उसके बारे में अलग-अलग कहानी लिखें या सीरियलाइज्ड हो? कई सुझाव आए। पता नहीं क्यों शुरू से मन में बनारस बसा हुआ था। घाट पर घूमी हूं, शाम की वो प्रसिद्ध आरती भी देखी है। पर मन में यह आस रही कि रात को बजरी पर घूमना है, बनारस की गलियों में विचरना है, वहां की चाट खानी है। योजना बन भी गई थी। पिछले साल मैं अपनी दीदी रजनी के साथ बनारस जाने वाली थी तीन दिन के लिए। होटल, टैक्सी, गाइड सब बुक्ड थे। एकदम अंतिम वक्त पर यानी सुबह-सुबह इंडिगो ने अपनी फ्लाइट कैंसिल कर दी। उस दिन दिल्ली में घना कोहरा था। हमसे कहा गया कि आज और कल आपको बनारस की कोई फ्लाइट नहीं मिल सकती, आप चाहें तो दो दिन बाद की फ्लाइट ले सकती हैं। खीझ कर कैंसिल ही कर दी हमने बनारस की फ्लाइट और सीधे चले गए अमृतसर, वाघा बार्डर और स्वर्ण मंदिर देखने।

बनारस कहीं जहन में रह गया था आधा-अधूरा। उसे पूरा करना था। बस मन में कहीं बात थी कि कहानी के केंद्र में एक युवती होगी और कहानी बनारस से शुरू होगी।

इस प्लानिंग में हफ्ता निकल गया। देखते ही देखते तेरह लेखक भी जुट गए।

तीस दिन-तीस लेखक का ऐसे आयडिया आया, क्योंकि मुझे प्लास्टर में तीस दिन और निकालने थे।

दफ्तर के साथी प्रतिमा और पूनम ने इस प्रोजेक्ट को जैसे शुरू से अपना लिया। दुबई में रहने वाले रवि भाई से बात की, तो वह भी गजब का उत्साहित हो गया। प्रतिष्ठा तो साथ में थी ही। मेरी गुरू और गाइड मुंबई की वरिष्ठ पत्रकार सुदर्शना द्विवेदी की हरी झंडी भी मिल गई। पहले ही दिन से सबके तार जुड़ गए।

पहला एपिसोड मुझे लिखना था। फेसबुक पर घोषणा कर दी थी। #30shadesofBela, 30 day: 30 writers. मंगलवार को पहला एपिसोड पोस्ट करना था। एक अजीब नशा सा तारी होने लगा। रात को जब घर में एपिसोड लिख रही थी, अहसास हुआ कि कुछ नया सा काम होने जा रहा है।

दफ्तर आई, लंच टाइम में एडिट किया और प्रतिमा और पूनम को पढ़ने को दिया।

कुछ ऐसा सोचा था कि हर एपिसोड में लेखक खुद होगा और साथ में होगी बेला। इससे पहले कि उनकी प्रतिक्रिया आती, मुझे लगा कि बेला को मैंने बांध दिया है। इस कहानी में लेखक ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में बेला आगे कैसे बढ़ेगी? कैसे वह एक ही किरदार रह पाएगी। क्षण भर लगा, तय करने में कि मुझे बेला को अलग तरह से पेश करना होगा।

अच्छा, बेला नाम भी बस यूंही दिमाग में आया। बाद में जरूर लगा कि थोड़ा पुराना नाम है, कौशल्या, कुंती टाइप। पर इसकी ध्वनि अच्छी लगी। बेला को गढ़ना भी आसान था। जैसे हम सबको पसंद आती है, कुछ वैसी लड़की। बहुत खूबसूरत नहीं, पर अपने आप में पूरी।

बेला को इस रूप में लाने के लिए मुझे शायद ज्यादा सोचना ना पड़ा। प्लॉट सामने था ही। बनारस पहुंची एक अकेली युवती, साथ में हैं दादी की यादें। दादी का मायका था बनारस। दादी के बचपन को जीना चाहती थी बेला।

बेला को जैसे एक परिवार और आधार मिल गया। पहला एपिसोड डालने के बाद ऐसी शांति मिली, जैसे किसी आइवी लीग के कॉलेज में प्रवेश मिल गया हो।

अगले दिन प्रतिष्ठा दोपहर से पहले अपनी कहानी ले कर तैयार थी। कहानी में गजब का ट्विस्ट था। बेला की हमशक्ल। प्रतिष्ठा की कहानी English में थी।

इस मोड़ के बाद लगा कि बेला को अब अपना मकाम मिल जाएगा। एक रफ्तार सा आ गया। देखते ही देखते बेला का कुनबा बढ़ता चला गया। प्रतिमा, रविशंकर, पूनम। चौथे एपिसोड में रवि शंकर कहानी में गजब का ड्रामा ले आए। बेला का अपहरण। ओह, अब लगा कि वाकई बेला अब किसी एक लेखक की नहीं रहने वाली। 

फेसबुक पर कई मित्र जुड़ते चले गए। इकबाल मलिक को आमंत्रित किया, वो फौरन जुड़ने को तैयार हो गए। सुदर्शना जी ने पहले दिन ही कह दिया था कि बेला को तुमने शुरू किया है, अंजाम तक मैं पहुंचाऊंगी। यानी तीसवां एपिसोड उनके नाम।

मुंबई की मित्र शिल्पा, विधुरिता, रूपा भी शुरू में ही जुड़ गए। शिल्पा ने ही अमरेंद्र और इरा टाक का नाम सुझाया। दिल्ली में अमृता और अभिषेक भी प्रोजेक्ट को लेकर बहुत पॉजिटिव दिखे। पांचवें दिन तक आते-आते जब कानपुर से मेरे धर्मयुग के कलीग हरीश पाठक का फोन आ गया, तो अहसास हुआ कि बेला ने अपना कद बढ़ा लिया है। तय हुआ कि हरीश पाठक सोलहवां एपिसोड लिखेंगे जहां से कहानी आगे दिशा लेगी।  

इस बीच ना टूटे पैर की चिंता रही, ना रातों को नींद ना आने की परेशानी। ओह बेला मय होती जा रही थी मैं और हमारी पूरी टोली।

वॉट्सऐप पर एक ग्रुप बना लिया। रोज सुबह से संवाद शुरू हो जाता। वनिता के दिनों की साथी शुचिता जुड़ीं और गायत्री को भी जोड़ लिया। तीस दिन तीस नए लेखकों का वादा, फेसबुक पर जिस लेखक ने कहानी को सराहा, या लिखने की इच्छा प्रकट की, उन्हें भी जोड़ते चले गए। ध्यानेंद्र, रिंकी, सोनाली, शिल्पी, कमलेश, राजलक्ष्मी, सुमन, सुमिता, प्रिया, सना, तुषार, नलिनी, पीयूषहमारे बेला के तीस लेखक बन गए।

अजीब से दिन थेबेला का नशा बढ़ता जा रहा था। अगले दिन का, अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार रहता। यह चिंता भी कि अगर एपिसोड समय पर न आया, स्तरीय ना हुआ तो क्या होगा? इसका भी तोड़ निकाला कुछ मित्रों ने यह कहकर कि अगर ऐसी कोई इमरजेंसी आती है, तो हम हैं ना। 

शाम होने से पहले फेसबुक और वॉट्सऐप पर मैसेज आ जाते, कब होगा नया एपिसोड लोड?

हमारी टीम में कई माहिर लेखक थे, तो कई नए लेखक भी। ऐसे भी, जो पहली बार कहानी लिख रहे थे। नए लेखक पूरे मन से जुड़े थे और उत्सुक भी थे कि उन्हें क्या लिखना है। हमारे सबसे युवा लेखक तुषार की उम्र बीस साल की थी। हर लेखक का लिखने का अपना अंदाज, अपनी शैली। यह आपको हर एपिसोड में नजर आएगा। शायद इसी सीरीज की यह खासियत भी है।

बेला के एपिसोड के साथ-साथ फेसबुक और व्हाट्सएप पर और भी कई रोचक जानकारियां शेअर कर रहे थे सब। रवि ने यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या इससे पहले फेसबुक पर इस तरह का काम हुआ है? हरीश पाठक ने पता करके बताया कि प्रिंट में जरूर दो या अधिक लेखकों ने मिल कर उपन्यास या कहानियां रची हैं, पर तीस लोगों ने मिल कर वहां भी कोई काम नहीं किया। यानी बेला की टीम एक तरह से इतिहास रच रही थी।

हां, यह भी सच है कि तीस लेखकों को एक साथ एक मंच पर लाना भी आसान नहीं था। कई बार यह भी सुनने को मिला कि इतने लेखकों को कैसे संभालोगी? पर एक बार कमिट करने के बाद पीछे हटने का सवाल ही कहां पैदा होता था।

बेला के एपिसोड्स जैसे-जैसे बढ़ते गए, चुनौतियां भी बढ़ती गईं। सबसे बड़ी चुनौती, कहानी को समेटने की। यह भी एक बड़ा सवाल था कि बेला की कहानी के पाठक और लेखक हर वर्ग के हैं और यह उनको पसंद आनी चाहिए।

जैसे बीच के एक एपिसोड में जब तुषार की बारी आई बेला की मां और पिता की शादी वाला एपिसोड लिखने की, तो उसने तुरंत हाथ खड़े कर दिए, मैं यह एपिसोड कंसीव नहीं कर पाऊंगा। मैं ऐसा सोच ही नहीं सकता। फिर उसने कहानी को एक नया ही युवा नजरिया दिया।

तीस पॉइंट ऑफ व्यू, तीस नजरियाऔर फेसबुक पर पढ़ने वाले लोगों के कमेंट्स। बीसवें एपिसोड के बाद जब कहानी समेटने का समय आया, तब बेचैनी बढ़ गई।

फेसबुक में जुड़ने वाले कई साथी बेला पढ़ रहे थे। उनमें से कुछ ऐसे भी थे जो लिखना चाहते थे। शुरू में तो सबको जोड़ लिया। बाद में जब तीस लेखक लगभग पूरे हो गए, तो कुछ को मना करना पड़ा। कुछ लेखकों ने तो अपने आप से एपिसोड लिख कर भेज भी दिए। उनसे माफी मांगनी पड़ी।

जिन दिनों मैं बेलामय हो रही थी, मेरी पड़ोसिन और बेला के एक एपिसोड की लेखिका सुमिता मेरे साथ बेला के रंग में पूरी तरह रंग चुकी थी। रोज रात हम कहानी पर चर्चा करते और आगे की संभावनाओं पर जिक्र करते।

मेरे पति प्रसाद कुछ दिनों के लिए बाहर गए थे। लौटे तो मैंने उन्हें खबर दी, बेला को ले कर कई प्रकाशक उत्सुक हैं, नए लेखक जुड़ रहे हैं आदि। उन्होंने मुस्कराते हुए सवाल कियाउसका फोन आया कि नहीं जीतेंद्र की बेटी का, जो सीरियल बनाती है?

एकता कपूर? मुस्कराते-मुस्कराते रुक गई। क्या बेला इतनी वाकई एक डेली सोप की तरह हो गई है? कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि अंतिम एपिसोड तक आते-आते कहानी में इतना रायता ना फैल जाए कि समेटना मुश्किल हो जाए। यह एक तरह से रियालिटी चैक का भी समय था। तेरह एपिसोड के बाद से लगा कि अब कहानी में फैले और उलझ गए तंतुओं को समेटना पड़ेगा।

इसके बाद लेखकों से बातचीत शुरू की। किरदारों में सामंजस्यता बिठाई गई। बेला को एक विश्वसनीयता देना भी जरूरी था। धीरे-धीरे पुराने किरदार भी जुड़ने लगे। परिस्थितियों में तर्क शामिल हो गया। बनारस की मिठास, मिजाज का जादू जुड़ता चला गया। बनारस, मुंबई, दिल्ली, आस्ट्रेलिया, हरिद्वार ना जाने कितने मकाम आए। शहनाई भी बजी, नए रिश्ते भी बने, सब कुछ ठीक होता सा लगा।

अब बेसब्री से इंतजार था तीसवें एपिसोड का। 11 मई 2017। सुदर्शना जी ने दो दिन पहले ही अंतिम एपिसोड लिख कर भेज दिया था। कहानी पहले ही वे मुझे बता चुकी थीं। बेला को एक परिणिति तक पहुंचाना आसान भी नहीं था। एकदम चौंकाने वाला अंत।

उनतीसवें एपिसोड में घोषणा कर दी थी कि बेला को तीन पत्र मिले हैं और वह अपनी बेटी के साथ कहीं गायब हो गई है।

अंतिम एपिसोड थोड़ा बड़ा था। पर मंजिल तक पहुंचने की यात्रा थोड़ी लंबी तो होती ही है। उस दिन फेसबुक पर तीसवां एपिसोड लोड करने के बाद अद्भुत शांति मिली। बेला को मकाम मिल गया था। बेला क्या बस एक किरदार थी? बेला क्या एक जरिया भर थी हम तीस लेखकों को एक सूत्र में बांधने का?

पीछे मुड़ कर देखती हूं, तो लगता है, बेला मेरे साथ ही थी हर समय। हम मजाक में कहते थे, हम सब बेला हो गए। पर यह सच था। इस बात की तसल्ली भी थी कि बेला का किरदार एकदम हवा-हवाई नहीं हुआ। बेला के अलावा बाकि पात्र भी पूरी शिद्दत से अपनी जगह खड़े रहे। बेला के साथ बीते ये तीस दिन अद्भुत रहे, हर समय रचनात्मकता से छलछलाते, बेला के कुनबे के साथ एक नया रिश्ता बनाते और एक काल्पनिक चरित्र को पूरी शिद्दत से जीते हुए यह महसूस किया कि हम सबकी मेहनत और कुछ नया रचने का माद्दा आखिरकार कामयाब हुआ। तीसवें दिन बेला को अपनी मंजिल मिल और मेरे पांव का प्लास्टर भी उतर गया।

कैसे गुजरे ये छह हफ्ते, पता ही नहीं चला। अगर सारी मुश्किलें इतनी रचनात्मक हों, तो जिंदगी कितनी आसान हो जाएगी, है ना?

बेला पूरी हो गई। पर हम जो तीस साथी बेला के माध्यम से साथ जुड़े, तो कई दिनों तक व्हाट्सएप और फेसबुक पर उसको याद करते रहे, आज भी करते हैं। हम सब एक-दूसरे की खुशियां बांटते हैं। सबको इंतजार है, बेला को एक मूर्त रूप में देखने का। बेला की यह किताब एक तरह से हमारे प्रयासों को एक नया कद दे रहा है। हमारा अपना, बेला परिवार। अकसर सब कहते रहते हैं कि हमें जल्द ही कुछ नया करना चाहिए। मैं भी मानती हूं, मुझे भी इंतजार है, कुछ होने का

 30 शेड्स ऑफ बेला को पूर्ण आकार देने वाले 30 लेखकों को जानिए यहां...

लेखक परिचय

एपिसोड 1: जयंती रंगनाथन:

तीन उपन्यास- आसपास से गुजरते हुए, औरतें रोती नहीं, खानाबदोश ख्वाहिशें, दो कहानी संग्रह- एक लड़की-दस मुखौटे और गीली छतरी, एक संस्मराणत्मक उपन्यास बॉम्बे मेरी जान, बच्चों के उपन्यास कंप्यूटर बना कैलकुलेटर और सोने की ऐनक, तीन दशक से मीडिया में, मुंबई में धर्मयुग, सोनी टेलिविजन से होते हुए दिल्ली में वनिता पत्रिका का संपादन। इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार में वरिष्ठ संपादक, फीचर और बच्चों की पत्रिका नंदन की संपादक।

एपिसोड 2: प्रतिष्ठा सिंह :

हिंदी, अंग्रेज़ी, इटालियन और भोजपुरी भाषाओं में कहानी-कविता लिखती हैं। पिछले साल प्रकाशित 'वोटर माता की जय' खूब चर्चित। दिल्ली यूनिवर्सिटी में इटालियन की लेक्चरर हैं और श्रीलाल शुक्ल से बहुत हद तक प्रेरित भी!

एपिसोड 3: प्रतिमा पांडेय:

पंद्रह सालों से मीडिया में। अमर उजाला से होते हुए अब हिन्दुस्तान में डिप्युटी फीचर संपादक। युवा, महिला और बच्चों पर कई आलेख प्रकाशित। बच्चों की कई कहानियां प्रकाशित।


एपिसोड 4: रवि शंकर:

क्वालिफिकेशन से इंजीनियर, पर शौक से बने रिक्रूटमेंट कंसलटेंट। पर मन अभी भी लेखन में रमता है। दुबई में फिश पीपुल कंसलटेंसी के सीईओ। इंग्लिश और हिंदी साहित्य पढ़ने के अजीबोगरीब शौकीन।

एपिसोड 5: पूनम जैन:

जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों ही दिल्ली। कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से ही पत्रकारिता की पढ़ाई। प्रभात खबर और अमर उजाला से होते हुए फिलहाल हिन्दुस्तान अखबार के साथ। उन रास्तों की तलाश में रहती हूं, जो अच्छा पढ़ने, घूमने, खाने और सुकून से सोने की ओर ले जाएं।


एपिसोड 6: इकबाल रिजवी:

बरेली कॉलेज से इतिहास और पेंटिंग में एम ए के बाद 1989 में दैनिक जागरण से जुड़ कर पत्रकार बन गए। अमर उजाला से होते हुए दिल्ली में इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े। 27 वर्षों के अपने पत्रकारिता के जीवन में करीब 100 डाक्यूमेंट्री बनाने के साथ साथ धर्म, कला, साहित्य और संस्कृति पर लगभग 300 लेख प्रकाशित हो चुके हैं साथ ही कुछ कहानियां भी।

एपिसोड 7: अमृता ठाकुर:

पत्रकार, सृजनात्मक लेखन में दिलचस्पी। अनुवादक और फ्रीलांस लेखक। हंस, पाखी आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में कविता एवं कहानी प्रकाशित। जेंडर विषय पर विभिन्न संस्थानों के लिए रिसोर्स पर्सन के तौर पर वर्कशॉप का संचालन।


एपिसोड 8: विधुरिता पटनायक:

छत्तीसगढ़ में जन्मी, पली-बढ़ी, स्कूली शिक्षा के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में बीए। शादी के बाद मुंबई से हिंदी साहित्य में एमए। हिंदी में लिखने और पढ़ने का जुनून। 1993 से 2012 तक टाइम्स ऑफ इंडिया, मुंबई के मार्केटिंग डिविजन में कार्यरत। इन दिनों लेखन के प्रयास में संलग्न।

एपिसोड 9: अभिषेक मेहरोत्रा:

खबरों को खोजने का पैशन रखने वाले अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज़म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के बाद पिछले तीन सालों से वे मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी।  

एपिसोड 10: रिंकी वैश्य:

लेखक, पत्रकार, अनुवादक। अभी एक प्राइवेट कंपनी में लिंग्विस्ट के पद पर कार्यरत। करियर की शुरुआत 'अमर उजाला' अखबार से। फिर टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड के साथ डिजिटल मीडिया का अनुभव, लंबे विराम के बाद पिछले साल सबटाइटलिंग की दुनिया से एक नयी शुरुआत।

एपिसोड 11: कमलेश पाठक:

प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव, ऑल इंडिया रेडियो। अंतरराष्ट्रीय साहित्य पढ़ना और स्वांत: सुखाय के लिए लिखना। राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं और आकाशवाणी के लिए विभिन्न विधाओं में लेखन।


एपिसोड 12: शिल्पा शर्मा:

पोस्टग्रेजुएशन इलेक्ट्रॉनिक्स में और मन रमता है लेखन में। पिछले 16 वर्षों से मीडिया के विभिन्न संस्थानों में कार्य का अनुभव। कई कहानियां व कविताएं देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। फ़ेमिना हिंदी का 9 वर्षों तक सम्पादन। फ़िलहाल स्वतंत्र लेखन।

एपिसोड 13: रूपा दास:

पिछले बीस वर्षों से मीडिया प्रोफेशनल। कई चैनलों में उच्च पदों पर काम करने के बाद, सोनी, जी, जूम आदि के लिए टॉप रेटेड शोज हिना, सीआईडी, दुल्हन, बेटियां आदि का निर्माण। हाल ही में मणिपुर के चाइल्ड सोल्जर्स डाक्यूमेंट्री का प्रोडक्शन और कांसेप्ट लेखन।


एपिसोड 14: राजलक्ष्मी:

स्वतंत्र पत्रकार और अनुवादक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित तौर पर लेखन। पढ़ने का शौक। वर्तमान में उपन्यास 'एक थी शारदा' के लेखन में व्यस्त।

एपिसोड 15: ध्यानेंद्र त्रिपाठी:

उत्तरप्रदेश के छोटे से शहर बरपुर में जन्म, बीएचयू से स्नातक, आईआईटी(आईएसएम) धनबाद से प्रौद्योगिकी स्नातक और सिटी एंड गिल्ड्स लंदन से परास्नातक। संप्रति आस्ट्रेलियाई एमएनसी में भारतीय इकाई के प्रबंधक। बच्चों की रचना पराग, नंदन आदि में प्रकाशित। हंस, कथादेश, नया ज्ञानोदय और तमाम समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित। पहले भोजपुरी अवधी लोक संगीत अल्बम का 2017 में लोकार्पण। लेखन, अभिनय  संगीत, अंतरिक्ष विज्ञान, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में गहरी रुचि। 

एपिसोड 16: हरीश पाठक:

मूलत: कथाकार। दैनिक स्वदेश से पत्रकारिता की शुरुआत। मुक्ता, धर्मयुग, कुबेर टाइम्स, हिन्दुस्तान, एकता चक्र, पूर्ण विराम, राष्ट्रीय सहारा सहित 40 साल की पत्रकारिता में 21 साल तक संपादक। चार कहानी संग्रह, दो पत्रकारिता की पुस्तकें। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत।

एपिसोड 17: इरा टाक:

फिक्शन राइटर, फिल्म मेकर और पेंटर जयपुर की इरा इन दिनों मुंबई में रहती हैं। शॉर्ट फिल्म इवन द चाइल्ड नोज, फर्ल्टिंग मैनिया और डब्ल्यू टर्न चर्चित। चार किताबें अनछुआ ख्वाब, मेरे प्रिए (कविता संग्रह), रात पहेली (कहानी संग्रह), रिस्क @ इश्क प्रकाशित। इस साल एक और कहानी संग्रह प्रकाश्य। विभिन्न गैलिरयों में 8 सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन। इंडिया एब्रॉड के पर्सनल कलेक्शन में पेटिंग शामिल।

एपिसोड 18: सुमन बाजपेई:

लेखक, पत्रकार, अनुवादक। इस समय चिल्ड्रंस बुक ट्रस्ट में हिंदी संपादक। पूर्व में जागरण सखी, मेरी संगिनी व फोर्थ डी वुमेन में विभिन्न संपादकीय पदों पर कार्य। 10 पुस्तकें, 4 कहानी संग्रह प्रकाशित। 70 से अधिक पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद।

एपिसोड 19: सुमिता चक्रवर्ती:

तीस सालों से मार्केटिंग प्रोफेशनल। पटना में टाइम्स ऑफ इंडिया से होते हुए कुछ साल अमेरिका में बिताने के बाद अमर उजाला के मार्केटिंग विभाग से संबद्ध। पिछले दस सालों से विभिन्न न्यूज चैनलों में एनालिस्ट और रिसर्चर।


एपिसोड 20: सोनाली मिश्रा:

लेखक, अनुवादक। इस समय हिंदी पत्रिका 'डायलॉग इंडिया' में डेप्युटी एडिटर। इग्नू से अनुवाद में शोधरत। अब तक कुल पांच पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद। बाल कहानी का संग्रह शीघ्र प्रकाश्य।

एपिसोड 21: प्रिया सिंह:

मेरठ में गृहिणी और गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका। हिंदी का अच्छा साहित्य मन को भाता है। पढ़ने-पढ़ाने की शौकीन। गर्ल्स हॉस्टल को लेकर एक उपन्यास लिखने की योजना।


एपिसोड 22: सना समीर:

क्रिएटिव मीडिया स्ट्रैटजिस्ट। मास कम्युनिकेशन में पीएचडी और गोल्ड मैडलिस्ट। 10 साल से रेडियो और मीडिया में कार्यरत। कहानी और कविताओं का संग्रह परदेस के मौसम प्रकाशित। क्रिएटिव राइटिंग के लिए आईसीसीआर और अन्य संस्थानों द्वारा पुरस्कृत।

एपिसोड 23: अमरेंद्र यादव:

जौनपुर, उत्तर प्रदेश में शुरुआती पढ़ाई के बाद मुंबई विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन। भटककर पत्रकारिता की राह पकड़ी। नौ वर्षों से टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रिका 'फ़ेमिना' (हिंदी) में कार्यरत। कविताएं फ़ेसबुक के लिए और कहानियां फ़ेमिना के लिए लिखते हैं। पसंदीदा शौक-किताबों की जमाखोरी।

एपिसोड 24: शिल्पी रस्तोगी:

वर्तमान में सीनियर कंटेट क्रियेटिव राइटर। लेखन का शौक। कई कहानियां व लेख विभिन्न समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित अचर्चित लेखिकाओं की चर्चित कहानियांनाम से एक कहानी संकलन प्रकाशित। डीडी न्यूज में वॉयस ओवर आर्टिस्ट।

एपिसोड 25: तुषार:

यूएई में पला बढ़ा और अब बुड़ापेस्ट से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन का कोर्स कर रहे हैं। बीस साल की उम्र में लगता है दुनिया देख ली। बेला का एक एपिसोड लिखने को मिला तो लगता है आगे लेखन में भी हाथ आजमाएंगे।


एपिसोड 26: गायत्री राय:

बनारस से एमबीए के बाद आईटी सेक्टर में कार्यरत। मन पढ़ने-लिखने में खूब रमता है। और सबसे पसंदीदा काम है किताबों की दुनिया के लहरों से उलझना  

एपिसोड 27: शुचिता मित्तल:

पत्रकारिता से करियर की शुरुआत। पिछले पंद्रह सालों से फ्रीलांस अनुवादक और लेखक। अनुवाद की कई पुस्तकें पुरस्कृत।


एपिसोड 28: पीयूष जैन:

हरियाणा में जन्म, दिल्ली में स्कूली पढ़ाई और फिर बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग। अब बेंगलुरु में जुनिपर नेटवर्क में नौकरी।अब तक विचार कुलबुलाते थे, कागज पर पहली बार ही शब्दों ने आकार लिया। शांत जगहों पर घूमना और टेनिस खेलना पसंद।

एपिसोड 29: नलिनी:

पढ़ने की गजब की शौकीन। खासकर डिटेक्टिव उपन्यास। अपने करीबियों की बेहतरीन आलोचक। शौकिया लेखक।


एपिसोड 30: सुदर्शना द्विवेदी:

आठ वर्ष अंग्रेज़ी में व्याख्याता रहने के बाद,पिछले चालीस से अधिक वर्षों से पत्रकारिता में। इंडियन एक्सप्रेस ,पीटीआई के बाद धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में सहायक संपादक। अन्यान्य  पत्र- पत्रिकाओं और वेबसाइट में  हिंदी और अंग्रेज़ी में लेखसाक्षात्कार और कहानियां प्रकाशित। नवभारत टाइम्स में वर्षों तक दो कॉलम 'आधी दुनिया की ख़बरें' और 'नज़र' का लेखन। दो फ़िल्म और अनेक धारावाहिकों का लेखन। संप्रति स्वतंत्र पत्रकार।

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एक जैसी दिखने वाली न्यूज एंकर्स की बातचीत सुनकर लोग रह गए हैरान, जानें पूरा मामला

तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
NewsAnchor54

तकनीकी के मामले में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग हर क्षेत्र में तकनीकी का बोलबाला है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं है। रोबोट पत्रकार के आविष्कार के बाद अब इस दिशा में तमाम नए प्रयोग हो रहे हैं। इसी कड़ी में अब दक्षिण कोरिया (South Korea) का नाम भी जुड़ गया है। अब इस एशियाई देश के एक टीवी चैनल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के माध्यम से चलने वाली देश की पहली न्यूज एंकर (News Anchor) को अपने दर्शकों के सामने पेश किया है। ये AI एंकर दक्षिण कोरिया की ही न्यूज एंकर किम जू-हा (Kim Ju-ha) का प्रतिबिंब है।

इस AI न्यूज एंकर को कोरियाई न्यूज चैनल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रॉडक्शन कंपनी ‘मनी ब्रेन’ के साथ मिलकर बनाया है। ये दक्षिण कोरिया की पहली AI के माध्यम से चलने वाली न्यूज एंकर है। इस AI न्यूज एंकर का न केवल चेहरा ही किम की तरह है, बल्कि इसकी आवाज भी किम की तरह ही है। ये किम के छोटे से छोटे हावभाव की भी नकल करती है।

6 नवंबर को न्यूज टेलिकास्ट के दौरान AI किम ने असली किम के साथ बातचीत भी की। इस बातचीत को सुनकर लोग हैरान हो गए क्योंकि दोनों का चेहरा और आवाज एक जैसे ही थे।

टेलिकास्ट के दौरान AI किम ने बताया कि उसे गहन अध्ययन के साथ बनाया गया और असली किम के वीडियो दिखाए गए, जिससे वो उसके बोलने का तरीका और उसके हाव-भाव को सीख सके। AI किम ने बताया कि वो असली किम की तरह ही न्यूज पढ़ सकती है।

न्यूज कंपनी ने अपने बयान में कहा कि AI न्यूज एंकर प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति के लिए कारगर साबित होगी। इस नई तकनीक के माध्यम से कंपनी श्रम और उत्पादन लागत में भी आसानी से कटौती कर सकती है।

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI न्यूज एंकर इंसान की जगह पूरी तरह से नहीं ले पाएंगे। सियोल के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने इस बारे में कहा कि टीवी पर AI एंकर को देखना कई लोगों को अजीब सा अनुभव दे सकता है जिसके कारण असली न्यूज एंकर्स की नौकरी को ज्यादा खतरा नहीं है।

प्रोफेसर ने कहा कि AI एंकर भले ही हमसे बहुत अलग नहीं हैं मगर वो हमारी तरह भी नहीं हैं। अगर इंसान को ये पता चल जाए कि जिसे वो टीवी पर देख रहा है वो असली नहीं है तो वो उसे तुरंत नकार देगा।

आपको बता दें कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से चलने वाली कोरिया की ये न्यूज एंकर दुनिया की पहली एंकर नहीं है। दो साल पहले चीन (China) ने भी एक AI न्यूज एंकर का निर्माण किया था।

यहां देखें वीडियो:

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IIMC: इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों से रूबरू होंगे छात्र, जानेंगे कई अहम तथ्य

कोरोनावायरस के कारण इस साल वर्चुअल रूप से आयोजित किया जाएगा यह कार्यक्रम, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे शुभारंभ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 21 November, 2020
Last Modified:
Saturday, 21 November, 2020
IIMC

देश के प्रमुख मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) का सत्रारंभ समारोह 23 नवंबर से 27 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार 23 नवंबर को सुबह 10.30 बजे केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे। कोरोना के कारण इस वर्ष पांच दिवसीय सत्रारंभ समारोह ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस पांच दिवसीय आयोजन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सुभाष घई, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मीडिया निदेशक एवं प्रेजिडेंट उमेश उपाध्याय, पटकथा लेखक और स्तंभकार सुश्री अद्धैता काला, दूरदर्शन के महानिदेशक मयंक अग्रवाल, हांगकांग बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर दया थुस्सु, अमेरिका की हार्टफर्ड यूनिसर्विटी के प्रोफेसर संदीप मुप्पिदी जैसी जानी-मानी हस्तियां नए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी।

इसके अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक सुकुमार रंगनाथन, ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज, चेन्नई के निदेशक डॉ. जेके बजाज, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रो. सिद्धार्थ शेखर सिंह, उद्यमी आदित्य झा, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के डायरेक्टर (लोकेलाइजेशन) बालेंदु शर्मा दाधीच, गुडऐज के प्रमोटर माधवेंद्र पुरी दास, रिलायंस के कम्युनिकेशन चीफ रोहित बंसल, ईयरशॉट डॉट इन के फाउंडर अभिजीत मजूमदार, न्यूजजेप्ल्स के फाउंडर शलभ उपाध्याय, एसोसिएटेड प्रेस टीवी की साउथ एशिया हेड सुश्री विनीता दीपक एवं नेटवर्क 18 के मैनेजिंग एडिटर ब्रजेश सिंह भी समारोह में हिस्सा लेंगे।      

कार्यक्रम के समापन सत्र में आईआईएमसी के पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। इन पूर्व छात्रों में ‘आजतक’ के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद, ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया एवं ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के इस सीज़न की पहली करोड़पति नाज़िया नसीम शामिल हैं। कार्यक्रम का प्रसारण आईआईएमसी के फेसबुक पेज पर किया जाएगा।

गौरतलब है कि आईआईएमस अपने नए विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें मीडिया, जनसंचार, विज्ञापन एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में करियर बनाने के तहत मार्गदर्शन दिलाने के लिए प्रतिवर्ष सत्रारंभ कार्यक्रम का आयोजन करता है।

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जिंदगी की जंग हार गए न्यूज नेशन के पत्रकार अमित विराट

न्यूज नेशन से एक बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, यहां रीजनल न्यूज चैनल में काम करने वाले टीवी पत्रकार अमित विराट का निधन हो गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
Amit Virat

न्यूज नेशन से एक बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, यहां रीजनल न्यूज चैनल में काम करने वाले टीवी पत्रकार अमित विराट का निधन हो गया है।

जानकारी के मुताबिक अमित पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। बताया जा रहा है कि उनके हार्ट और फेफड़ों में दिक्कत थी और पिछले चार महीने से वे इस समस्या से जूझ रहे थे। दिल्ली के जीवी पंत हॉस्पिटल में उन्होंने इसी महीने हार्ट सर्जरी करवाई थी, लेकिन इस बीच वे कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिसके बाद उन्हें नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

वर्ष 2012 मे भी अमित की हार्ट सर्जरी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल मे सकुशल की जा चुकी थी, पुनः 8 साल बाद फिर से वह अपने इस हार्ट की इस पीड़ा से ग्रसित थे।

वहीं इस बीच वे कोरोना से भी संक्रमित हो गए थे। दिल्ली के बदरपुर के रहने वाले विराट शादीशुदा थे और उनका एक बेटा है। विराट को मीडिया इंडस्ट्री में करीब 15 वर्षों का अनुभव था। वे ईटीवी-यूपी में काम कर चुके थे।

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इन आरोपों में मीडिया फर्म का मैनेजर और डायरेक्टर गिरफ्तार

इस मामले में आयकर अधिकारी की ओर से सूरत के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
Arrest

गुजरात की सूरत पुलिस ने मीडिया फर्म ‘संकेत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Sanket Media Pvt Ltd) के डायरेक्टर सीताराम अदुकिया और मैनेजर मुख्तार बेग को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने सरकारी विज्ञापन एजेंसी ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी) और निजी विज्ञापनदाताओं के सामने कंपनी के स्वामित्व वाले अखबार ‘सत्यम टाइम्स’ (Satyam Times) का अधिक सर्कुलेशन दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी के बहीखाते में गलत आंकड़े दर्ज किए। यह अखबार गुजराती व अंग्रेजी भाषा में पब्लिश होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में आयकर अधिकारी की ओर से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर में कहा गया था कि फर्जी आंकड़ों की मदद से वर्ष 2008-09 से 21 अक्टूबर 2020 के बीच मीडिया फर्म ने सरकार एजेंसियों से 70 लाख रुपये और विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों से दो करोड़ रुपये के विज्ञापन हासिल किए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में आयकर अधिकारियों को पता चला था कि सत्यम टाइम्स के गुजराती एडिशन का डेली सर्कुलेशन 23500 कॉपियां और अंग्रेजी एडिशन का डेली सर्कुलेशन छह हजार कॉपियां दिखाया गया था, जबकि गुजराती एडिशन का सर्कुलेशन छह सौ कॉपियां और अंग्रेजी का शून्य से 290 कॉपियां था।

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दो पत्रकारों के खिलाफ FIR, झूठी खबर फैलाने का लगा आरोप

दो निजी चैनलों के पत्रकारों पर यूपी की फतेहपुर पुलिस ने खबर को तोड़ मरोड़कर गलत तरीके से पेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
Last Modified:
Friday, 20 November, 2020
FIR

दो निजी चैनलों के पत्रकारों पर यूपी की फतेहपुर पुलिस ने खबर को तोड़ मरोड़कर गलत तरीके से पेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। ये एफआईआर धारा सिंह यादव नामक शख्स और भारत समाचार चैनल के पत्रकार के खिलाफ दर्ज की गई है। इसकी शिकायत असोथर थाना के प्रभारी रणजीत बहादुर सिंह ने की थी।

दरअसल बीते सोमवार फतेहपुर के असोथर थाने के एक गांव में दो सगी बहनों का शव तालाब में मिला था, जिसके बाद परिजनों ने रेप के बाद मर्डर का शक जताया था। इसके बाद स्थानीय मीडिया ने भी मर्डर व रेप की शंका जताई थी जिसे पुलिस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया और दो चैनलों के पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज कर ली।

असोथर थाना के प्रभारी रणजीत बहादुर सिंह ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि जब वह चिचनी गांव में गश्त पर थे, तब उन्हें पता चला कि एक निजी चैनल के पत्रकार और धारा सिंह यादव ट्विटर पर दो नाबालिग लड़कियों की हत्या की झूठी खबर फैला रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'दोनों लड़कियों की मौत सिंघाड़ा तोड़ते वक्त तालाब में गिरकर डूबने से हो गई थी। लेकिन पत्रकार दलित और अन्य समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे थे। पत्रकार ट्विटर पर आधारहीन खबरें फैला रहे थे कि लड़कियों के हाथ और पैर बंधे हुए मिले थे और उनके साथ बलात्कार किया गया और उनकी आंखें निकाल ली गईं। इससे दलित और अन्य समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ रही थी।

उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि नाबालिग लड़कियों की डूबने से मौत हो गई और उनकी आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि चिचनी में एक तालाब में दो नाबालिग बहनें मृत पाई गईं थी और परिवार ने बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने कहा था कि लड़कियों की मौत डूबने से हुई है।  

वहीं फतेहपुर जिले के एसपी प्रशांत वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चियों की मौत पानी में डूबने से हुई है। रेप और हत्या की पुष्टि नहीं हुई है। आंखें फोड़ने और हाथ-पैर बंधे होने की बात केवल अफवाह थी।

जानिए, क्या है मामला

दरअसल बीते सोमवार फतेहपुर के छिछनी गांव में रहने वाली दो बहनें खेत गई थीं लेकिन काफी समय तक घर नहीं लौटीं तो परिजनों ने दोनों की तलाश शुरू की। काफी देर तक सूचना न मिलने पर वे परेशान हो गए। शाम को कुछ ग्रामीणों ने तालाब में दो शव देखे तो घर वालों को सूचना दी जिसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई।

दोनों में एक लड़की के चोट के निशान भी दिखे जिसके बाद परिजनों को रेप व मर्डर की आशंका हुई। मंगलवार को पुलिस ने दोनों का पोस्टमॉर्टम कराया तो मौत का कारण डूबना बताया गया, वहीं रेप की पुष्टि भी नहीं हुई।  

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पत्रकार और उसकी पत्नी की पीट-पीटकर हत्या, सामने आ रही ये वजह

पुलिस ने पांच आरोपितों को किया गिरफ्तार, मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी पहुंचा था यह मामला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 19 November, 2020
Beaten

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक बड़ा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल, जिले के बरवाडीह गांव में 16 नवंबर को कुछ लोगों ने लखनऊ से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक के संवाददाता उदय पासवान और उनकी पत्नी शीतला की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में उदय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि गंभीर रूप से घायल शीतला की मौत वाराणसी के एक अस्पताल में हुई। बताया जाता है कि पूर्व ग्राम प्रधान केवल पासवान के साथ दुश्मनी के चलते हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। जमीन के विवाद को लेकर केवल और उसके परिवार के साथ उदय के परिवार के बीच दुश्मनी चली आ रही थी। वर्ष 2016 और 2018 में भी दोनों के खिलाफ मामले दर्ज हुए थे। यह मामला मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी पहुंचा था। मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश जारी होने के बावजूद सोनभद्र पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स का यह भी कहना है कि आरोपितों की ओर से धमकी मिलने के बाद उदय ने अपनी और परिवार की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए पुलिस से संपर्क भी किया था, लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। घटना वाले दिन दोनों पुलिस से शिकायत कर मोटरसाइकिल से लौट रहे थे, तभी आरोपितों ने रास्ते में उन्हें घेर लिया और लाठी-डंडों से जमकर पिटाई कर दी। उदय की मौत मौके पर ही हो गई। गंभीर हालत में शीतला को वाराणसी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

इस वारदात के बाद तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, वहीं छह आरोपितों में से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपित केवल पासवान अभी फरार है, पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

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TV पर लाइव रिपोर्टिंग कर रही थी महिला रिपोर्टर, तभी हुआ ये हादसा

प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) के दौरान रिपोर्टिंग करना बेहद रिस्की और मुश्किल भरा होता है। कई बार अच्छी रिपोर्ट के लिए रिपोर्टर्स अपनी जान की बाजी भी लगा देते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 17 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 17 November, 2020
reporter

प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) के दौरान रिपोर्टिंग करना बेहद रिस्की और मुश्किल भरा होता है। कई बार अच्छी रिपोर्ट के लिए रिपोर्टर्स अपनी जान की बाजी भी लगा देते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसे देखने के बाद आप हैरान रह जाएंगे। सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

बता दें कि ‘फॉक्स46’ (Fox46) की रिपोर्टर एम्बर रॉबर्ट्स ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस घटना की एक क्लीप को शेयर की, जिसे देखकर आपकी सांसे थम जाएंगी। इसमें उन्हें उत्तरी कैरोलिना के अलेक्जेंडर काउंटी में बाढ़ के हालात की रिपोर्टिंग करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में रॉबर्ट्स एक टूटे हुए पुल को दिखाती हैं। कुछ सेकंड में ही पुल का एक हिस्सा अचानक ढह जाता है। रॉबर्ट्स को इस हादसे के दौरान बैकग्राउंड में चिल्लाते हुए सुना जा सकता है क्योंकि वह उस वक्त पुल पर ही खड़ी थीं। किस्मत से रॉबर्ट्स और कैमरापर्सन दोनों को ही कोई नुकसान नहीं हुआ।

 इस वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। 13 नवंबर को पोस्ट किए गए इस वीडियो क्लिप को 1300 से ज्यादा लाइक्स मिले हैं। अबतक 46,700  से ज्यादा लोगों ने इसे देखा है। 

लाइव टेलीविजन पर ब्रिज को गिरते देखकर लोग भी हैरान थे। सभी ने चैन की सांस ली जब उन्होंने देखा कि रॉबर्ट्स बिल्कुल सही सलामत हैं। लोगों ने इस पर अपने कमेंट और रिएक्शन दिए।

 

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नहीं रहे जाने-माने पब्लिशर एस. रामाकृष्णन

तमिलनाडु के ओमनदुरार स्थित मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मंगलवार को अंतिम सांस ली।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 17 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 17 November, 2020
S Ramakrishnan

जाने-माने पब्लिशर एस. रामाकृष्णन का तमिलनाडु के ओमनदुरार स्थित मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मंगलवार को निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। एस. रामाकृष्णन की पत्नी का निधन कई वर्ष पूर्व हो चुका था।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में एस. रामाकृष्णन का कोविड-19 का इलाज चल रहा था। शुक्रवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी और मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। एस. रामाकृष्णन का जन्म चेन्नई में हुआ था।

सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएट रामाकृष्णन ने कुछ समय तक एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में भी काम किया था। इसके बाद वह पब्लिशिंग के क्षेत्र में आ गए थे। उन्होंने तमिल में गंभीर साहित्य को लोगों के सामने लाने के लिए ‘Cre-A’ नाम से पब्लिशिंग फर्म स्थापित की थी। वर्ष 1978 से उनकी फर्म प्रमुख तमिल लेखकों के कामों को पब्लिश करने के साथ-साथ हिंदी समेत अन्य भाषाओं में तमिल साहित्य का अनुवाद कर रही थी।

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पत्रकार की मौत पर उठे सवाल, चैनल के एडिटर-इन-चीफ ने लगाया हत्या का आरोप

असम में बुधवार को एक वाहन के टक्कर मारने से बुरी तरह घायल हुए स्थानीय न्यूज चैनल के पत्रकार पराग भुइयां की गुरुवार की सुबह मौत हो गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 13 November, 2020
Last Modified:
Friday, 13 November, 2020
Prayag

असम में बुधवार को एक वाहन के टक्कर मारने से बुरी तरह घायल हुए स्थानीय न्यूज चैनल के पत्रकार पराग भुइयां की गुरुवार की सुबह मौत हो गई। यह घटना राज्य के तिनसुकिया जिले में घटी है। पुलिस ने इसे सड़क हादसा बताया है, लेकिन पत्रकार के नियोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि पत्रकार की सोची समझी साजिश के तहत हत्या की गई है, क्योंकि वह अपने क्षेत्र में बीजेपी नेताओं के भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को उजागर कर रहे थे।

‘प्रतिदिन टाइम’ चैनल के काकोपोथर के वरिष्ठ संवाददाता पराग भुइयां को बुधवार रात एक वाहन ने उनके घर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर टक्कर मार दी थी, जिसके बाद पराग भुइयां को गंभीर हालत में डिब्रूगढ़ के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था, जहां गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने दावा किया है कि वाहन की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर ली गई है और उसके चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है जो फरार हो गया था। वहीं इस मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया, ये गिरफ्तारी असम पुलिस द्वारा अरुणाचल पुलिस को इस संबंध में अलर्ट किए जाने के बाद हुई।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में दोनों व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और घटना की जांच चल रही है। पुलिस ने बताया कि वाहन अरुणाचल प्रदेश की एक महिला का है और इसका इस्तेमाल उसके पुत्र द्वारा चाय पत्ती के परिवहन के लिए किया जाता है।

‘प्रतिदिन टाइम’ चैनल के एडिटर-इन-चीफ नितुमोनी सैकिया ने एक बयान जारी करके आरोप लगाया कि ‘पुलिस का प्रारंभिक दृष्टिकोण संदेह का कारण था।’ उन्होंने कहा, ‘हमें संदेह है कि पत्रकार की हत्या की गई, क्योंकि वह काकोपथार के आसपास अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली रिपोर्टिंग की एक सीरीज चला रहे थे।’

सैकिया के मुताबिक इस तरह की रिपोर्ट्स के लिए उन्हें धमकी मिली थी। सैकिया ने कहा, ‘हम ‘प्रतिदिन टाइम’ में इसे एक संदिग्ध सुनियोजित हत्या के तौर पर देखते हैं और पूरी घटना की विस्तृत जांच और भुइयां के परिवार और ‘प्रतिदिन टाइम’ को न्याय की मांग करते हैं।’

53 वर्षीय पत्रकार असम गण परिषद के नेता जगदीश भुइयां के छोटे भाई और तिनसुकिया प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष थे।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भुइयां के निधन पर शोक व्यक्त किया और पुलिस को इसमें शामिल व्यक्तियों को जल्द से जल्द सभी को न्याय के कटघरे में लाने का निर्देश दिया।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने भी भुइयां की मौत की जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हमें इस मामले में षड्यंत्र का संदेह है क्योंकि पत्रकार को उसके घर के पास टक्कर मारी गई और वाहन का चालक मौके से फरार हो गया।’

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खुद को Discovery चैनल का अधिकारी बता लोगों को चपत लगा रहा ठग चढ़ा पुलिस के हत्थे

खुद को ‘डिस्कवरी’ (Discovery) चैनल का अधिकारी बताकर लोगों को ठगने वाले शातिर को हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 12 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 12 November, 2020
Arrest

खुद को ‘डिस्कवरी’ (Discovery) चैनल का अधिकारी बताकर लोगों को ठगने वाले शातिर को हिमाचल प्रदेश की कुल्लू पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शातिर ने कई राज्यों के लोगों से ठगी की है।

पकड़े गए शातिर ने चंडीगढ़ से अरविंद नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया है, जबकि उसका असली नाम सौरव मित्रा निवासी वेस्ट बंगाल है। आरोपित के खिलाफ पहले भी ठगी के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बताया जाता है कि आरोपित के कब्जे से एक बोलेरो, छह सिम कार्ड, दो मोबाइल फोन, एक पेन ड्राइव, छह पासबुक, दो चेकबुक, तीन एटीएम कार्ड और तीन आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद बोलेरो अरविंद के नाम पर ही है। मनाली में किराए के मकान में रह रहा आरोपित सबको अपना नाम अरविंद बताता था।

पूछताछ में पता चला है कि सौरव मित्रा साइबर क्राइम में माहिर है। उसने बिहार में एक लड़के के साथ आठ लाख रुपये की ठगी की है। वह खुद को डिस्कवरी चैनल का एंप्लॉयी बताता है और उसके नाम पर ठगी करता है।

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