डरा गई युवा पत्रकार महेश चौधरी की असमय मौत

खबरों की दुनिया में चमकते पत्रकारों की जिंदगी कितनी स्याह होती है, उन्हें खुद इसकी कड़वी सच्चाई का अहसास नहीं होता है

Last Modified:
Monday, 08 April, 2019
Mahesh

खबरों की दुनिया में चमकते पत्रकारों की जिंदगी कितनी स्याह होती है, इस कड़वी सच्चाई का अहसास खुद पत्रकार को नहीं होता है, जो इसे झेल रहा होता है। दरअसल, वह खुद इस कदर दबाव में होता है कि  तलवार की धार पर लटकी नौकरी और तनाव की टीस में छटपटाता तो है, पर भवंरजाल से बाहर नहीं आ पाता है। महेश चौधरी भी इसी वेदना से भयभीत रहते थे।

महेश से मेरा संपर्क साल 2012 में हुआ था। उन दिनों वह आगरा से प्रकाशित ‘द सी एक्सप्रेस’ में बतौर रिपोर्टर काम करते थे। चुनाव का वक्त था। संपादक डॉ. हर्षदेव जी के की देखरेख में निकलने वाले इस अखबार में चुनाव के दौरान मैं भी करीब तीन माह बतौर राजनीतिक बीट पर विशेष संवाददाता के तौर पर जुड़ गया था। महेश मेरी टीम का हिस्सा नहीं था। उससे दफ्तर में दो-चार बार बात हुई तो लगा कि यह लड़का तो बहुत अच्छी राजनीतिक समझ और जानकारी रखता है। महेश की दो-चार बाईलाइन पढ़ीं तो मैं उसकी योग्यता का कायल हो गया। इसकी वजह यह है कि आजकल जो रिपोर्टर बनते हैं, उन्हे यह तक नहीं मालूम होता कि भारत का नेशनल गेम क्या है।

हम दोनों का ताल्लुक किसान परिवारों से होने के कारण हमारे बीच समझ और नजदीकियां बढ़ने लगीं। चूंकि उन दिनों ‘साधना न्यूज’ में बतौर ब्यूरो चीफ आगरा में मेरी नियुक्ति थी, लिहाजा मुझे चुनाव बाद ‘द सी एक्सप्रेस’ से खुद को अलग करना पड़ा। चूंकि इस अखबार का प्रबंधन गैरपेशेवर अंदाज में काम कर रहा था तो वहां काम कर रहे पत्रकारों को लगने लगा था कि यह संस्थान लंबी रेस का घोड़ा नहीं है। मेरे साथ मेरी पूरी टीम ‘द सी एक्सप्रेस’ में महेश को काम करते छोड़कर आई थी। मैं महेश के भविष्य को लेकर चिंतित था। कुछ दिन बाद महेश का ही अचानक फोन आया और ‘दैनिक जागरण’ में अपनी नौकरी लगने की सूचना दी। बेशक महेश, अपने समकालीन पत्रकारों की फेहरिस्त में श्रेष्ठतम श्रेणी का है, यह बात मैंने दो-तीन बार अवधेश से भी कही। अवधेश भी समझ रहा था कि मैं उसकी बेहतरी के लिए एप्रोच कर रहा हूं।

महेश से जब भी फोन पर बात होती तो उसके भाईसाहब के संबोधन से बात शुरू करने के अंदाज में अपनेपन का अहसास होता। मेरे ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में आने के बाद महेश से तकरीबन रोजाना बात होने लगी। हम तकरीबन रोज मिलने लगे। दरअसल हम दोनों के पास केंद्रीय हिंदी संस्थान और सोसाइटी कार्यालय की बीट थी। महेश के प्यार में कई बार उसके पूछने पर मैं एक्सक्लूसिव भी छिपा नहीं पाया। जब वह भाईसाहब बोलता था तो लगता था गोया मेरा ही अनुज बात कर रहा है। यह रिश्ता मेरी जिंदगी का खालीपन और कमजोरी है। पर महेश इससे बेखबर था। उसका भाईसाहब कहते ही मेरा मन उसके प्रति सहज स्नेह छलकाने लगता था। हम दोनों के निजी रिश्ते इतने करीबी हैं, किसी को नहीं मालूम था।

केंद्रीय हिंदी संस्थान की बीट पर हम दोनों तकरीबन एक साल तक रहे। हमने इस दौरान हर दिन घंटों बातें कीं। खेती पर। घर परिवार पर। पत्रकारिता पर। दबाव में जीते रिपोर्टर्स की तबाह जिंदगी के मंजर पर भी। महेश सच में बहुत दबाव और तनाव में रहता था। उसे रिपोर्टर का न तो चार्म था और न ही पत्रकार के जीवन को और जीना चाहता था। वह बेहद ईमानदार, मेहनती, मृदुभाषी, साफगोई से बात करने वाला कर्मठ इंसान था और इस सबसे इतर उसकी पत्रकारिता की समझ लाजवाब थी। हां, वह पत्रकारिता के पेशे में था जरूर, उसने मुझसे भी कई बार कहा था, ‘भाईसाहब, हम लोग गलत आ गए इस पेशे में। इससे बेहतर होता कि गांव में खेती ही करते। यह पेशा झूठ बोलने, झूठ लिखने और जमीर बेचकर चांदी का जूता खाने वालों का है। इस पेश में खाक छानने से बेहतर होता कि घर में सुकून से तो रहते।‘ महेश की वेदना का एक कारण उसका परिवार मथुरा में होना था और वह आगरा में अकेले रहने को मजबूर था। इस कारण उसे तमाम दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा था।

बीते साल पांच जुलाई की रात मैं पुत्र हार्दिक के साथ बस से दिल्ली जा रहा था। हमें सुबह पांच बजे की मंगलोर के लिए फ्लाइट पकड़नी थी। सिकंदरा से आगे बस रुकी। उसमें एक सवारी चढ़ी, वह महेश था। बस में मुझे देखकर महेश मेरे पास आकर बैठ गया। उसने बताया कि वह रिपोर्टिंग से हट गया है। अब डेस्क पर है। आगरा में कमरा खाली कर दिया है। मथुरा से बस में बैठकर सुबह आगरा आ जाता है और रात में बस से मथुरा लौट जाता है। महेश से मथुरा तक बातें करता गया। मथुरा में बाईपास पर बस रुकी, महेश उतर गया। तब यह सोचा भी नहीं था कि महेश से ये आखिरी मुलाकात है। आज सुबह प्रतीक गुप्ता से महेश के निधन की जानकारी मिली तो मेरे होश उड़ गए।

मन में नाहक विचार कौंधा, अरे ये क्या, महेश की अभी उम्र की क्या थी ? अच्छा भला इंसान, महज 39 साल का। हार्ट अटैक? कल्पना मात्र ही दहशत पैदा कर देती है। दिन भर सोचता रहा, जिंदगी का कोई भरोसा नहीं। कब आखरी क्षण हो…। दिनभर घर से बाहर निकलने का मन नहीं किया। एक किसान परिवार के होनहार पत्रकार की असमय मौत पर सरकार से क्या मदद मिलेगी? मुझे तो यकीन नहीं। इस सरकार से तो कतई उम्मीद नहीं है। सच मानो, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री होते तो 20 लाख जरूर मिलते। कई मामलों में मैं गवाह हूं। योगी सरकार ने दो साल में किसी भी पत्रकार के निधन पर आज तक एक कौड़ी की मदद नहीं दी। सपा सरकार थी. तब विनोद अग्रवाल जी बीमार पड़े थे तो मैंने महज फेसबुक पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आर्थिक मदद मांग ली। अखिलेश यादव का बड़प्पन देखिए कि उन्होंने मेरे फेसबुक पर लिखने भर पर मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी जी से विनोद अग्रवाल जी के बारे में पूछ लिया। हेमंत तिवारी जी ने मेरी पोस्ट की पुष्टि कर दी। अखिलेश यादव ने इलाज के लिए तुरंत पांच लाख रुपये की मदद कर दी थी। हमने मान लिया कि मौजूदा सरकार मदद नहीं करेगी, पर हमारे हाथ बंधे नहीं हैं। महेश, तुम्हारे परिवार के लिए हर संभव मदद करूंगा। मेरा वादा है। सच में।

(वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र पटेल की फेसबुक वॉल से)

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देश में आज समाधान परक पत्रकारिता की जरूरत: प्रो. संजय द्विवेदी

समाधानपरक पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ। यह अभियान साल भर चलाया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 22 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 22 January, 2022
Pro Sanjay Dwivedi

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने समाधान परक पत्रकारिता (Solution Based Journalism) की जरूरत पर बल दिया है। उनका कहना है कि मीडिया समाचारों में समस्या के साथ-साथ समाधान पर भी बात करे। इससे बेहतर समाज का निर्माण संभव हो सकेगा। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज द्वारा समाधान परक पत्रकारिता के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रो. द्विवेदी ने यह विचार व्यक्त किए। यह अभियान साल भर चलाया जाएगा।

प्रो. द्विवेदी के अनुसार पश्चिमी देशों में नकारात्मक खबरों को प्रमुखता से स्थान दिया जाता रहा है, जिसका अनुसरण भारतीय मीडिया ने भी किया है। हमारे देश में शास्त्रार्थ करके किसी समस्या का समाधान निकालने की परंपरा रही है। हमारी संस्कृति में समस्या से ज्यादा समाधान पर ध्यान दिया जाता है। समाज में बदलाव और समृद्ध भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए मीडिया को प्रमुखता से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

‘आईआईएमसी‘ के महानिदेशक ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज और परिवार संकट में हैं, तब मीडिया की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। आज मीडिया को परिवार में संस्कार निर्माण एवं समाज को शिक्षित करने का काम करना चाहिए। मीडिया के माध्यम से समाज को और बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ समाज के निर्माण से श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण होगा। इसके लिए मीडिया और पूरे समाज को लोकमंगल की भावना से समाधान परक पत्रकारिता करनी होगी।

इस दौरान ब्रह्माकुमारीज की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन की मीडिया विंग के अध्यक्ष बीके करुणा भाई ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान अपनी स्थापना के समय से ही एक विश्व, एक ईश्वर, एक परिवार की थीम के साथ कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय अभियान के तहत पत्रकारों को समाधान परक पत्रकारिता की ओर अग्रसर करने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश, राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय भाई, मीडिया विंग के उपाध्यक्ष बीके आत्म प्रकाश भाई, नेशनल को-ऑर्डिनेटर बीके सुशांत भाई और फाउंडेशन के जनसंपर्क अधिकारी बीके कोमल ने भी अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर ओम शांति पत्रिका के संपादक बीके गंगाधर भाई को डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिलने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मीडिया विंग में वर्षों से सेवाएं दे रहे वरिष्ठ पदाधिकारियों का भी शॉल और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया।

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नेताजी ने आजाद हिंद रेडियो पर गांधीजी को कहा था पहली बार 'राष्ट्रपिता' : प्रो. कृपाशंकर

आईआईएमसी की ओर से आयोजित 'शुक्रवार संवाद' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे ‘महात्माप गांधी अंतरराष्ट्री य हिंदी विश्वबविद्यालय’, वर्धा में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे

Last Modified:
Friday, 21 January, 2022
IIMC Friday Dialogue

‘महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय’, वर्धा में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने भारतबोध को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्रकारिता का बुनियादी तत्व बताते हुए कहा है कि नेताजी के क्रांतिकारी विचार और उनकी राष्ट्रीय विचारधारा आज भी प्रासंगिक है। ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) द्वारा शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम 'शुक्रवार संवाद' में प्रो. चौबे ने कहा कि 1942 में नेताजी ने 'आजाद हिंद रेडियो' की स्थापना की। छह जुलाई 1944 को इसी रेडियो से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार महात्मा गांधी के लिए 'राष्ट्रपिता' संबोधन का प्रयोग किया।

'नेताजी की पत्रकारिता में भारतबोध' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. चौबे ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस ने अपनी पत्रकारिता का उद्देश्य पूर्ण स्वाधीनता के लक्ष्य से जोड़ रखा था। स्वाधीनता की लक्ष्यपूर्ति के लिए उन्होंने अखबार के साथ-साथ रेडियो का भी उपयोग किया। 1941 में 'रेडियो जर्मनी' से नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीयों के नाम संदेश में कहा था, ''तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।'

प्रो. चौबे के अनुसार, देश को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में से थे, जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग भी प्रेरणा लेता है। उनके द्वारा दिया गया 'जय हिंद' का नारा पूरे देश का राष्ट्रीय नारा बन गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने विचारों से लाखों लोगों को प्रेरित किया। नेताजी कहा करते थे कि अगर हमें भारत को सशक्त बनाना है, तो हमें सही दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है और इस कार्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. चौबे ने कहा कि आजाद हिंद सरकार की स्थापना के समय नेताजी ने शपथ लेते हुए एक ऐसा भारत बनाने का वादा किया था, जहां सभी के पास समान अधिकार हों और समान अवसर हों। समाज के प्रत्‍येक स्‍तर पर देश का संतुलित विकास, प्रत्‍येक व्‍यक्ति को राष्‍ट्र निर्माण का अवसर और राष्ट्र की प्रगति में उसकी भूमिका, नेताजी के विजन का एक अहम हिस्‍सा था। नेताजी का मानना था कि सच्चा पुरुष वही होता है, जो हर परिस्थिति में नारी का सम्मान करता है। यही कारण था कि महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने आजाद हिंद फौज में रानी झांसी रेजीमेंट की स्थापना की थी।

इस अवसर पर 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कविता शर्मा ने किया एवं स्वागत भाषण हिंदी पत्रकारिता विभाग के पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. (डॉ.) आनंद प्रधान ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह ने किया।

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पत्रकार के इस सवाल पर हंसते हुए बोले अखिलेश यादव, आपके चैनल में किसका लगा है पैसा?

चुनाव प्रचार में व्यस्त सपा प्रमुख अखिलेश यादव अक्सर मीडिया को घेरते और कटाक्ष करते भी देखे जा रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 18 January, 2022
Last Modified:
Tuesday, 18 January, 2022
akhileshyadav546

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होने के बाद से राजनैतिक माहौल गर्म है। इस बीच सभी की नजरें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर हैं, क्योंकि राजनीतिक लिहाज से यूपी बेहद अहम राज्य है। ऐसे में यहां राजनीतिक दलों में जुबानी जंग और तेज हो गई है। लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए किसी तरह की कसर नहीं छोड़ रहीं। इस बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तमाम टीवी चैनल्स के पत्रकारों ने डेरा जमा रखा है और अपने-अपने मंचों पर राजनीतिक दलों के नेताओं से तमाम मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। दरअसल, चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू करने के साथ ही रैलियों आदि पर रोक लगा दी है, सिर्फ वर्चुअल रैली की इजाजत है। ऐसे में तमाम नेता मीडिया के माध्यम से ही आज जनमानस से रूबरू हो रहे हैं।

इस बीच चुनाव प्रचार में व्यस्त सपा प्रमुख अखिलेश यादव अक्सर मीडिया को घेरते और कटाक्ष करते भी देखे जा रहे हैं। चाहे वह किसी बड़े मंच पर हों या फिर अपने चुनावी रथ पर। हाल ही में ‘आजतक’ न्यूज चैनल के मंच पर इंटरव्यू के दौरान ‘ईमानदार पत्रकार’ कहकर जब अखिलेश ने एंकर अंजना ओम कश्यप पर कटाक्ष करने की कोशिश की थी, तो दोनों में तीखी नोंक-झोंक देखने को मिली थी। लेकिन इस बार अखिलेश यादव ने एक न्यूज और उसके पत्रकार पर तंज कसा है।  

ताजा मामला अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस से जुड़ा है, जहां वे बीजेपी का नाम लेकर एक न्यूज चैनल और उससे जुड़े पत्रकार का मजाक उड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

पत्रकार प्रभाकर मिश्र ने अपने ट्विटर हैंडल से अखिलेश यादव का ये वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में अखिलेश पार्टी के कई नेताओं के साथ एक पत्रकार वार्ता में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक टीवी पत्रकार अखिलेश यादव से कुछ सवाल पूछने की कोशिश करते हैं, तो अखिलेश उल्टा उन्हीं से सवाल करने लगते हैं।

अखिलेश यादव पत्रकार से सवाल पूछते हैं, ‘किस चैनल से हो?’ चैनल का नाम लेते हुए उन्होंने कहा,  'ये चैनल तो बीजेपी का है, इसमें किसका इन्वेस्टमेंट है? बता भी दिया करो, इसमें क्या है… सभी कह रहे हैं कि बीजेपी का है...’ इसके बाद वे पत्रकार से कहते हैं, ‘बीजेपी के खिलाफ सवाल पूछ रहे हो? तुम्हारी नौकरी चली जाएगी।’ वहीं इस बीच वहां मौजूद तमाम लोग ठहाके लगाते हैं।

अखिलेश यादव के इस बर्ताव पर तमाम लोग सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।  कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं तो कुछ अखिलेश यादव पर तंज कस रहे हैं।

 

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार सैम राजप्पा

राजा राम मोहन राय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार सैम राजप्पा का रविवार को कनाडा में निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 17 January, 2022
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राजा राम मोहन राय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार सैम राजप्पा का रविवार को कनाडा में निधन हो गया। वह 82 साल के थे और उनके परिवार में दो बेटे हैं।

मद्रास रिपोर्टर्स गिल्ड ने सैम के निधन पर दुख जताया, जिनके करियर का महत्वपूर्ण समय चेन्नई में व्यतीत हुआ था।

गिल्ड ने कहा राजप्पा का निधन कनाडा स्थित उनके बेटे के आवास पर हुआ।

गिल्ड ने कहा कि 1975-77 के बीच आपातकाल के दौरान केरल में इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र पी राजन के मौत की खबर की कवरेज के बाद राजप्पा को प्रसिद्धि मिली थी।

राजप्पा ने फ्री प्रेस जर्नल के साथ 1960 में अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 1962 के बाद से ‘द स्टेट्समैन’ के साथ जुड़े रहे।

नवंबर 2017 में उन्हें प्रतिष्ठित राजा राम मोहन राय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई बड़ी गलती, ट्वीट कर मांगी माफी

पत्रकार राजीव शर्मा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्यवाही की है। इसी बीच अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से एक बड़ी गलती हो गई।

Last Modified:
Sunday, 16 January, 2022
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पत्रकार राजीव शर्मा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्यवाही की है। दरअसल चीन के एजेंट को इंडियन आर्मी से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज देने वाले पत्रकार राजीव शर्मा की 48 लाख रुपए से अधिक की प्रॉपर्टी अटैच कर ली है। आपको बता दे कि ED ने राजीव शर्मा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत पहले ही केस दर्ज किया था।

फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा को दिल्ली पुलिस ने 19 सितंबर,2020 को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। आरोपी पत्रकार राजीव के साथ पुलिस ने उसके दो विदेशी साथियों को भी गिरफ्तार किया था, जिनमें एक नेपाल का नागरिक है और दूसरी चीनी महिला है।

इसी बीच अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से एक बड़ी गलती हो गई। दरअसल अखबार ने भी इस खबर का प्रकाशन किया, लेकिन अखबार ने खबर प्रकाशित करते समय पत्रकार राजीव शर्मा की जगह गलती से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर की फोटो का इस्तेमाल कर दिया।

जैसे ही संस्थान को इसके बारे में पता चला, उन्होंने तुरंत ट्वीट करके इस बाबत माफी भी मांगी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, आज अखबार के कुछ संस्करणों में अनजाने में संस्थान द्वारा केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है, जिसके लिए उन्हें खेद है। ट्वीट में केंद्रीय मंत्री को टैग करके माफी मांगी गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के इस ट्वीट को केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने रीट्वीट भी किया है।

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चीनी जासूसी मामले में पत्रकार के खिलाफ ED का कड़ा एक्शन, कुर्क की संपत्ति

चीनी खुफिया अधिकारियों को कथित रूप से गोपनीय और संवेदनशील जानकारी प्रदान करने के आरोपी फ्रीलॉन्स पत्रकार राजीव शर्मा के खिलाफ ‘प्रवर्तन निदेशालय‘ (ED) ने कड़ा एक्शन लिया है।

Last Modified:
Sunday, 16 January, 2022
Rajeev Sharma

चीनी खुफिया अधिकारियों को कथित रूप से गोपनीय और संवेदनशील जानकारी प्रदान करने के आरोपी फ्रीलॉन्स पत्रकार राजीव शर्मा के खिलाफ ‘प्रवर्तन निदेशालय‘ (ED) ने कड़ा एक्शन लिया है। ED ने पत्रकार राजीव शर्मा की 48 लाख रुपए से अधिक की प्रॉपर्टी अटैच कर ली है। ED ने राजीव शर्मा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग( Prevention of Money Laundering Act PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।

ईडी ने एक बयान में कहा कि राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की संपत्ति कुर्क करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत एक अस्थायी आदेश जारी किया गया है।

पिछले साल जुलाई में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए शर्मा को पिछले सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में जमानत दे दी थी। वहीं, इससे पहले 17 जुलाई 2021 को पटियाला हाउस कोर्ट ने राजीव शर्मा की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

एजेंसी ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि शर्मा ने धन के बदले चीनी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय और संवेदनशील जानकारी की उपलब्ध कराई थी, जिससे देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया था।

राजीव शर्मा को यह रकम महिपालपुर स्थित एक शेल कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही थी, जिसे एक नेपाली नागरिक शेर सिंह उर्फ ​​राज बोहरा और झांग चेंग उर्फ ​​सूरज, झांग लिक्सिया उर्फ ​​उषा और किंग शी जैसे चीनी नागरिक चला रहे थे।

ईडी ने बयान में कहा कि यह चीनी कंपनी राजीव शर्मा जैसे व्यक्तियों को रकम प्रदान करने के लिए चीनी खुफिया एजेंसियों के लिए एक कड़ी के रूप में काम कर रही थी। उसने दावा किया कि रकम का भुगतान नकद जमा के साथ ही नकद भुगतान के माध्यम से किया जा रहा था।   

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MCU और MESC ने मिलकर इस दिशा में बढ़ाए कदम

‘एमसीयू‘ के कुलपति प्रो. केजी सुरेश और ‘एमईएससी‘ के सीईओ मोहित सोनी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
MOU

पत्रकारिता एवं संचार के क्षेत्र में पाठ्यक्रम अद्यतन, कौशल विकास और विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ (MCU) और ‘मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल, नई दिल्ली (MESC) के मध्य करार (एमओयू) हुआ है।

‘एमसीयू‘ के कुलपति प्रो. केजी सुरेश और ‘एमईएससी‘ के सीईओ मोहित सोनी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि इस एमओयू का लाभ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध अध्ययन संस्थाओं के विद्यार्थियों को मिलेगा।

प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर एमईएससी के साथ हुए एमओयू के माध्यम से हम पत्रकारिता एवं संचार के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास करेंगे। इस एमओयू का उद्देश्य मीडिया शिक्षा को और अधिक उन्नत करना है। ‘एमईएससी‘ के विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर मीडिया के विद्यार्थियों के अनुकूल नए पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे, ताकि मीडिया क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित किया जाए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 1600 संस्थाओं के विद्यार्थियों के कौशल उन्नयन के लिए भी पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी इन संस्थाओं के विद्यार्थी हैं।

प्रो. सुरेश ने कहा कि इसके साथ ही ‘एमईएससी‘ के माध्यम से विद्यार्थियों को मीडिया से जुड़े विविध क्षेत्रों में रोजगार दिलाने के भी प्रयास होंगे। साथ ही विद्यार्थियों को उद्यमी बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस अवसर पर ‘एमईएससी‘ के सीईओ मोहित सोनी ने कहा कि यह एमओयू एक मील का पत्थर साबित होगा।

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IIMC ने अपने लोगो में किया संशोधन

भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के संशोधित लोगो का लोकार्पण संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
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भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के संशोधित लोगो का लोकार्पण संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर अपर महानिदेशक श्री आशीष गोयल, प्रकाशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार भारती, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार एवं पुस्तकालय प्रभारी डॉ. प्रतिभा शर्मा सहित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। संशोधित लोगो का अनावरण करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आईआईएमसी का लोगो वर्ष 1966 में डिजाइन किया गया था, लेकिन अभी तक उसमें टैगलाइन और संस्थान का नाम शामिल नहीं था। इस कारण आईआईएसमी के संशोधित लोगो को डिजाइन किया गया। संशोधित लोगो में आईआईएमसी के नाम के साथ 'आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:' टैगलाइन को जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है 'हमें सब ओर से कल्याणकारी विचार प्राप्त हों'। 

प्रो. द्विवेदी के अनुसार अच्छे विचारों को ग्रहण करण और समाज में उनका प्रसार करना किसी भी जनसंचार शिक्षण संस्थान का मूल काम है। उन्होंने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव एवं संस्थान के अध्यक्ष श्री अपूर्व चंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित आईआईएमसी कार्यकारी परिषद की 145वीं बैठक में इस संशोधित लोगो को मंजूरी प्रदान की गई।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जनसंचार के शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसांधान में आईआईएमसी की वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान है। इस संशोधित लोगो के माध्यम से हम संस्थान की पहचान को और अधिक व्यापक बनाना चाहते हैं। हमें विश्वास है कि यह पहल आईआईएमसी के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। इस अवसर पर लोगो के सही उपयोग के लिए एक दिशानिर्देश पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

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उदीयमान भारत के लिए आगे आएं युवा: निवेदिता भिड़े

विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष ने आईआईएमसी में आयोजित 'शुक्रवार संवाद' में रखे अपने विचार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
Nivedita Bhide

‘विवेकानंद केंद्र’, कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष सुश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने उदीयमान भारत के लिए युवा पीढ़ी के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यदि हमें भारत को विश्व गुरु बनाना है, तो इसके लिए बौद्धिक योद्धाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियों को भारतीय चला रहे हैं। हमारी प्रतिभाओं का लाभ दुनिया के दूसरे देश उठा रहे हैं। यह प्रतिभाएं जब अपने देश में रहकर कार्य करेंगी, तभी उदीयमान भारत का निर्माण होगा। सुश्री भिड़े शुक्रवार को ‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'शुक्रवार संवाद' को संबोधित कर रही थी।

'उदीयमान भारत और युवा' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सुश्री निवेदिता भिड़े ने कहा कि शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि दिमाग में कई ऐसी सूचनाएं एकत्रित कर ली जाएं, जिसका जीवन में कोई इस्तेमाल ही न हो। हमारी शिक्षा जीवन निर्माण, व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा और ऊर्जा है। इसका समुचित विकास और उपयोग किए जाने की जरूरत है।

सुश्री भिड़े के अनुसार भारत में जब भी युवा शक्ति की बात होती है, तो स्वामी विवेकानंद का नाम हम सभी के ध्यान में आता है। स्वामी विवेकानंद भारत के युवा को अपने गौरवशाली अतीत और वैभवशा‍ली भविष्य की एक मजबूत कड़ी के रूप में देखते थे। स्वामी जी का विचार था कि सामाजिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के बीच समन्वय बिठाकर ही सामाजिक उत्थान के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि युवा शक्ति को सही मायने में राष्ट्र शक्ति बनाने का एक व्यापक प्रयास आज देश में देखने को मिल रहा है। संकट के काल में भारत ने संपूर्ण विश्व को नई राह दिखाई है। वैक्सीन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता का आज पूरी दुनिया को लाभ मिल रहा है। भारत की महानता हमारे ज्ञान और विज्ञान में है, लेकिन इस महानता का असली मकसद विज्ञान, तकनीक और नवाचार को समाज से जोड़ने का भी है और इसमें युवाओं की अहम भूमिका है।

कार्यक्रम का संचालन आउटरीच विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया एवं स्वागत भाषण प्रो. (डॉ.) संगीता प्रणवेन्द्र ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन ‘आईआईएमसी’, कोट्टायम कैंपस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिलकुमार वाडावतूर ने किया।  

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IIMC ने अपने लोगो में किया संशोधन, जोड़ी ये टैगलाइन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव एवं संस्थान के अध्यक्ष अपूर्व चंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित आईआईएमसी कार्यकारी परिषद की 145वीं बैठक में इस संशोधित लोगो को मंजूरी प्रदान की गई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
IIMC New Logo

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के संशोधित लोगो का लोकार्पण संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। संशोधित लोगो का अनावरण करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि ‘आईआईएमसी‘ का लोगो वर्ष 1966 में डिजाइन किया गया था, लेकिन अभी तक उसमें टैगलाइन और संस्थान का नाम शामिल नहीं था। इस कारण आईआईएसमी के संशोधित लोगो को डिजाइन किया गया। संशोधित लोगो में आईआईएमसी के नाम के साथ ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:’ टैगलाइन को जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है ‘हमें सब ओर से कल्याणकारी विचार प्राप्त हों’।

प्रो. द्विवेदी के अनुसार अच्छे विचारों को ग्रहण करण और समाज में उनका प्रसार करना किसी भी जनसंचार शिक्षण संस्थान का मूल काम है। उन्होंने कहा कि ‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय‘ के सचिव एवं संस्थान के अध्यक्ष अपूर्व चंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित आईआईएमसी कार्यकारी परिषद की 145वीं बैठक में इस संशोधित लोगो को मंजूरी प्रदान की गई।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जनसंचार के शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसांधान में ‘आईआईएमसी‘ की वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान है। इस संशोधित लोगो के माध्यम से हम संस्थान की पहचान को और अधिक व्यापक बनाना चाहते हैं। हमें विश्वास है कि यह पहल ‘आईआईएमसी‘ के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।

वहीं, लोगो के सही उपयोग के लिए एक दिशानिर्देश पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर अपर महानिदेशक आशीष गोयल, प्रकाशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार भारती, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार एवं पुस्तकालय प्रभारी डॉ. प्रतिभा शर्मा सहित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

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