'ZEE बिजनेस' पर शुरू हुआ ये नया प्रोग्राम, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रणीण तिवारी बने होस्ट

फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) ने डीएसटी (Department of Science & Technology) के सहयोग से एक प्रोग्राम शुरू किया है...

Last Modified:
Wednesday, 31 May, 2017
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

फिक्की (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) ने डीएसटी (Department of Science & Technology) के सहयोग से एक प्रोग्राम शुरू किया है, जिसका नाम है इनोवेट इंडिया। यह प्रोग्राम जी बिजनेस पर हर रविवार रात 9.30 बजे प्रसारित किया जा रहा है।

ग्रीन मावे प्रॉडक्शन द्वारा निर्मित इस प्रोग्राम को वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रवीण तिवारी होस्ट कर रहे हैं। इस कार्यक्रम को उद्देश्य देश की कुछ ऐसी प्रतिभाओं को सामने लाना है, जिन्होंने अपने इनोवेशन के जरिए न केवल खुद की गाथा लिखी, बल्कि आने वाले कई युवाओं के लिए भी वे आदर्श के तौर पर सामने आए।

फिक्की ऐसे इनोवेटर्स को अपनी क्षमता दर्शाने और उनके इनोवेशन को इनवेंस्ट के जरिए आर्थिक पंख मिल सके, ऐसा एक मंच प्रदान कर रहा है।

वैसे तो इस प्रोग्राम के लिए कई प्रतिभाशाली युवा अपने इनोवेशंस के साथ सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उनके विचारों (आइडिया) को वास्तविकता में बदलने की है।

डॉ. प्रवीण तिवारी एक राइटर, जर्नलिस्ट और मॉटिवेटर हैं। वे जी बिनजेसपर इस प्रोग्राम को होस्ट करने के साथ ही भारतीय इतिहास पर किताबों की एक सीरीज पर भी काम कर रहे हैं। वे अपने ब्लॉग्स और किताबों के लिए जाने जाते हैं।

बतौर जर्नलिस्ट वे नेशनल वॉयसन्यूज चैनल में सीनियर एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  इससे पहले प्रवीण तिवारी न्यूज18इंडियाके साथ सीनियर एंकर के तौर पर कार्यरत थे। वे सितंबर, 2015 में न्यूज18इंडियाके साथ जुड़े थे और सितंबर, 2016 के अंत में वे इस चैनल से अलग हो गए थे।

प्रवीण तिवारी लंबे समय तक लाइव इंडियाचैनल में भी रहे हैं। वे यहां भी सीनियर एंकर थे। इसके साथ ही वे लाइव इंडिया पत्रिका और अखबार के संपादक भी थे।


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इस गंभीर बीमारी ने छीन ली पत्रकार अनिल कुमार शर्मा की जिंदगी

आगरा के बालूगंज निवासी अनिल कुमार शर्मा का कई दिनों से जयपुर के अस्पताल में चल रहा था इलाज

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
Anil Kumar Sharma

ब्लड कैंसर से जूझ रहे पत्रकार अनिल कुमार शर्मा का शनिवार को निधन हो गया है। वह जयपुर के अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे। आगरा के करियप्पा रोड बालूगंज निवासी अनिल कुमार शर्मा शासन से मान्यताप्राप्त संवाददाता थे। वह इन दिनों अलीगढ़ से पब्लिश होने वाले अखबार ‘राजपथ’ में आगरा के संवाददाता थे। ताजगंज स्थित मोझधाम में रविवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

ताज प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अजय शर्मा, महामंत्री उपेन्द्र शर्मा, सचिव पवन तिवारी व कोषाध्यक्ष महेश शर्मा ने अनिल कुमार शर्मा के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।  

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फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या, सदमे ने ली बुजुर्ग पिता की भी जान

दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
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दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक फोटो जर्नलिस्ट की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान 42 वर्षीय गजेंद्र सिंह  के रूप में हुई है। गजेंद्र परिवार के साथ मंडावली इलाके में रहते थे।

गजेंद्र कई दैनिक अखबारों के लिए फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते थे। शनिवार रात परिजनों से किसी काम से बाहर जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वह पूरी रात वापस नहीं लौटे।

अगले दिन जब तलाश शुरू की गई तो वे संजय झील में घायल हालत में मिले। उनके चेहरे पर चोट के गंभीर निशान थे। गजेंद्र की दोनों आंखें बुरी तरह सूजी हुई थीं। इलाज के लिए गजेंद्र को एलबीएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, लेकिन देर रात को उन्होंने घर पर दम तोड़ दिया। अगले दिन जब पोस्टमार्टम के बाद परिवार शव का अंतिम संस्कार करके घर लौटा, तो सदमे से गजेंद्र के 84 वर्षीय पिता भवान सिंह की भी मौत हो गई। भवान सिंह भी कई बड़े समाचार पत्रों में फोटो पत्रकार रहे थे और उन्होंने कई अवॉर्ड भी जीते थे। पिता-पुत्र की एकस्मात मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और गजेंद्र सिंह पर हमला करने वाले आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को पता चला है कि गजेंद्र के पास से उसका मोबाइल फोन नहीं मिला है। पुलिस फोन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

 

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न्यूज चैनल्स के हितों की रक्षा के लिए आगे आया NBF, सरकार के सामने रखीं ये मांग

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का किया समर्थन

Last Modified:
Tuesday, 24 March, 2020
NBF

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए किए गए लॉकडाउन व अन्य पहल के तहत देश भर के न्यूज टेलिविजन चैनल्स के हितों की दिशा में सरकार से तत्काल दखल देने की मांग की है।  

इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनट सचिवालय, वित्त मंत्रालय, सूचना प्रसारण मंत्रालय आदि को दिए ज्ञापन में ‘एनबीएफ’ ने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर पर पड़ रहे वित्तीय और व्यावसायिक असर का मुकाबला करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।

इस ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि इस वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार को टैक्स में छूट दी जाए। इसके साथ ही जीएसटी की दरों को कम करने, टैक्स जमा करने के लिए कम से कम तीन महीने की छूट देने आदि की मांग भी की गई है। फेडरेशन ने सरकार से मार्च और अप्रैल 2020 के लिए डीडी फ्रीडिश प्लेटफॉर्म पर न्यूज चैनल्स की फीस माफ करने की भी मांग की है।

इस बारे में ‘एनबीएफ’ के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का एनबीएफ सपोर्ट करता है और पूरी तरह से सरकार के साथ है। वहीं, इस स्थिति में सरकार को न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर को बचाने की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए, जो हर परिस्थिति में लोगों को सूचनाएं उपलब्ध करा रहा है।’

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'लॉकडाउन' में दिल्ली पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए 'आजतक' के ये पत्रकार

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए दिल्ली को लॉकडाउन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च से 31 मार्च तक ‘लॉकडाउन’ की घोषणा की है

Last Modified:
Monday, 23 March, 2020
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए दिल्ली को लॉकडाउन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च से 31 मार्च तक ‘लॉकडाउन’ की घोषणा की है, लेकिन इस दौरान जरूरी सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को आवागमन की अनुमति दी गई है, जिनमें मीडियाकर्मी व पत्रकार भी शामिल हैं। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी लॉकडाउन में फील्ड में काम करने की छूट है।

बावजूद इसके, ऑफिस जाते समय ‘आजतक’ के एक टीवी पत्रकार दिल्ली पुलिस की बर्बरता का शिकार हो गए। ‘आजतक’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं नवीन कुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जब वे सफदरजंग से नोएडा फिल्म सिटी स्थित अपने कार्यालय जा रहे थे कि तभी दिल्ली पुलिस के लोगों ने उनके कार की चाभी निकाल ली, उनका वॉलेट और फोन छीन लिया। इतना ही नहीं उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं और वैन में डालकर उन्हें पीटा भी गया। एक अपने इस हादसे की पूरी कहानी बताई है, जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं-

 

 

 

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‘जनता कर्फ्यू में इस मीडिया संस्थान ने भी निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

कोरोना के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता कर्फ्यू की अपील पर अमल करने वालों में आम जनता के साथ-साथ कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल रहे।

Last Modified:
Monday, 23 March, 2020
Newspaper

कोरोना के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की थी। इस अपील पर अमल करने वालों में आम जनता के साथ-साथ कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल रहे। इन संस्थानों में रविवार को काम नहीं हुआ। ऐसा अमूमन कम ही देखने को मिलता है कि मीडिया हाउस पूरी तरह बंद रहें, लेकिन चूंकि यह तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस को कमजोर करने की अपील थी, इसलिए संस्थानों ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए काम बंद रखा।

मध्यप्रदेश से प्रकाशित होने वाला हिंदी दैनिक ‘प्रजातंत्र’ भी इस कड़ी में शामिल रहा। सोमवार को अखबार का अंक पाठकों के हाथों में नहीं पहुंचा। हालांकि, इसकी सूचना पहले ही पाठकों तक पहुंचा दी गई थी। खास बात यह है कि अखबार प्रबंधन ने आगे के लिए भी तैयारी की है, ताकि कोरोना के चक्र को तोड़ने की सरकारी कोशिशों परवान चढ़ाया जा सके। प्रबंधन की तरफ से सभी कर्मियों को एक संदेश भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि ‘23 मार्च से सरकुलेशन/ एचआर और मार्केटिंग विभाग घर से ही काम करेंगे।

अकाउंट विभाग से कोई एक व्यक्ति 11-2 बजे तक ही आए। रिपोर्टर सुबह की मीटिंग संपादक/ सिटी चीफ के साथ वॉट्सऐप ग्रुप पर ही करें। रिपोर्टर अपनी खबरें घर से ही दिन में भेज दें। उन्हें दफ्तर आना है या नहीं, इस पर 2 बजे संपादक से बात कर लें। रिपोर्टर फील्ड पर ना जाएं। फोन पर ही सूचना ले लें, खुद को एक्सपोज बिलकुल ना करें’। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि डेस्क स्टाफ जल्द काम निपटाकर घर जा सकता है। साथ ही यह हिदायत भी दी गई है कि जल्दी जाने का यह मतलब बाहर घूमना नहीं होना चाहिए। ऐसा करके आप अपने और अपने परिवार एवं साथियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

कोरोना का खतरा जितना अन्य लोगों को है, उतना ही पत्रकारों को भी, लिहाजा ‘प्रजातंत्र’ प्रबंधन का यह फैसला दर्शाता है कि उसे अपने कर्मियों की चिंता है। इस संबंध में अखबार के भोपाल ब्यूरो चीफ धमेंद्र पैगवार ने कहा, ‘अखबार के एडिटर-इन-चीफ हेमंत शर्मा खुद भी रिपोर्टर रहे हैं, इसलिए वह समझते हैं कि एक रिपोर्टर को खबरों की तलाश में क्या कुछ करना पड़ता है। उन्होंने हमें कई तरह की सहूलियतें प्रदान की हैं, ताकि हम कोरोना के प्रकोप से बचें रहें और वायरस में फैलाव की वजह न बनें।’

‘प्रजातंत्र’ की तरह ‘प्रदेश टुडे’ ने भी जनता कर्फ्यू को ध्यान में रखते हुए रविवार को कामकाज बंद रखा। अखबार ने अपने 21 मार्च के अंक में इसकी सूचना दी थी, जिसमें कहा गया था कि ‘प्रदेश टुडे के 14 संस्करणों का कामकाज रविवार को बंद रहेगा। कोरोना से निपटने के लिए प्रधानमंत्री की अपील का हम समर्थन करते हैं।’

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कोरोना के संक्रमण ने छीन ली दो पत्रकारों की जिंदगी

दुनियाभर के कई देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे है। ये संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इसकी वजह से स्पेन में दो खेल पत्रकारों की मौत हो गई है।

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
Accident Death

दुनियाभर के कई देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे है। ये संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इसकी वजह से स्पेन में दो खेल पत्रकारों की मौत हो गई है। इसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकार संघ (एआईपीएस) ने दी है।

संघ के मुताबिक, 59 साल के जोस मारिया कैनडेला और 78 साल के थॉमस डिएज वाल्डेस की गुरुवार को इस भयंकर बीमारी की वजह से मौत हो गई। जोस रेडियो नेशनल डे स्पेन (आरएनई) के लिए काम करते थे, तो वहीं थॉमस मोटरप्वाइंट नेटवर्क एडिटर्स के महानिदेशक थे। वह साथ ही 30 साल तक स्पेन के अखबार एएस के रिपोर्टर भी थे।

आरएनई ने बताया कि जोस का निधन कोरोना वायरस के कारण हुआ है। वह अपने घर में अकेले मृत पाए गए। जोस के दोस्त और एआईपीएस के सदस्य प्रिटो ने कहा कि उनका आज यानि शुक्रवार को जांच होनी थी लेकिन इससे पहले ही वो खत्म हो गए। उन्होंने कहा कि वह कमजोरी महसूस कर रहे थे, लेकिन उनकी जांच शुक्रवार को होनी थी। वे यहां स्पेन में जांच नहीं कर रहे हैं। उनके भाई ने आखिरी बार उनसे बात की थी।

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कोरोना के कहर से नहीं बचा यह मीडियाकर्मी, गई जान

दुनियाभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर इस बीमारी के कहर का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
nbs

दुनियाभर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 2,77000 के करीब हो गई है, वहीं 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अभी तक करीब 86000 लोग पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। सबसे ज्यादा जानें इटली में गई हैं। वहीं इस बीच कोरोना वायरस ने अमेरिकी मीडियाकर्मी लैरी एडवर्थ की भी जान ले ली है।

लैरी एडवर्थ एनबीसी न्‍यूज में कार्यरत थे और वे इन दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित थे। इस बात की एनबीसी न्‍यूज के चेयरमैन एंड्रू लैक ने दी। उन्‍होंने बताया कि लैरी पहले से बीमार चल रहे थे और इसी बीच कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए।

लैरी ने मिडटाउन मैनहट्टन स्थित नेटवर्क के 30 रॉकफेलर प्लाजा कार्यालय के उपकरण कक्ष में काम करते थे। लैरी ने इससे पहले करीब 25 साल तक एनबीसी न्‍यूज के ऑडियो टेक्‍नीशियन के रूप में भी काम किया था।

गौरतलब है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर इस बीमारी के कहर का सामना कर रहे हैं। अब तक अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण से 252 लोगों की मौत हो गई है। यही नहीं इस बीमारी से अब तक अमेरिका में करीब 20 हजार लोग संक्रमित हुए हैं।  

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जीवन के कई 'रंगों' का सार है युवा पत्रकार हिमानी का ये कथा संग्रह

बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 March, 2020
HIMANI

अमृत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार।।

बीते दस सालों से मीडिया की दुनिया में कार्यरत पत्रकार और लेखिका हिमानी का लघु कथा संग्रह 'नमक' इन दिनों चर्चा में है। इस कथा संग्रह की टैगलाइन है जिंदगी को चाहिए 'नमक'। इस टैगलाइन का पूरा सार कथा संग्रह की छोटी-छोटी कहानियों में मिलता है।

इन कहानियों को इस तरह शब्दों में पिरोया गया है कि हर एक कहानी अपनी ही जिंदगी में घटता हुए एक पल मालूम होती है। किसी भी कहानी में किसी भी किरदार को कोई नाम नहीं दिया गया है। हर कहानी में एक लड़का है या एक लड़की या फिर दो लड़कियों की बातचीत।

संवाद की शैली में लिखी गई ये कहानियां कहीं-कहीं आम बातचीत जैसी लगती हैं और कहीं-कहीं कम शब्दों में ताउम्र के लिए एक गहरा असर छोड़ जाती हैं। कथा संग्रह 'नमक' में 80 कहानियां हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए अक्सर चंद्रधर शर्मा गुलेरी की मशहूर कहानी ‘उसने कहा था’ की याद आती है, जिसके संवाद सीधे दिल पर असर करते हैं और फिर पूरी कहानी चाहे भूल भी जाएं, वो संवाद कभी भी यादाश्त से गायब नहीं होते। इस कथा संग्रह में भी ऐसे कई संवाद हैं।

'मैं आज तक कभी इतना रॉन्गसाइड नहीं चली, जितना तुमने मुझे चलवा दिया

न सड़क पर, न जिंदगी में।' 

कहानी 'रॉन्गसाइड' से

पता है ऑर्गेज्म क्या होता है? लड़की ने पूछा

'मेरे लिए तो तुम्हारा खुश होना ऑर्गेज्म होता है... 'लड़के ने जवाब दिया।

कहानी 'ऑर्गेज्म' से

'यहां बहुत ज्यादा गर्मी है। चटक धूप रहती है। घर से बाहर निकलने को जी ही नहीं चाहता। मुझे गर्मी बिलकुल पसंद नहीं है।' लड़के ने खत में लिखा

'इस पर परेशान क्यों होना, मौसम तो बदलते रहते हैं।' लड़की ने जवाब भेजा

कहानी 'मौसम' में

'तुम्हारा जाना मेरे लिए कयामत जैसा था।

और तुम्हारा न जा पाना, तुम्हारे लिए कयामत जैसा होता।

मैंने अपनी कयामत बुला ली।' लड़की ने कहा।

 कहानी 'कयामत' से

80 कहानियों की इस किताब को सात भागों में बांटा गया है। हर भाग के साथ चित्रकार प्रीतिमा वत्स ने चित्रांकन के जरिये दो लोगों के बीच के संबंधों को दिखाने की कोशिश की है। शुरुआती भाग में बेहद मासूम से पलों की कहानियां हैं, तो आखिरी भागों में दर्द और पीड़ा के लम्हों में छिपे प्यार की तड़प को दिखाने वाली कहानियां। कुछ लोग इन कहानियों को लप्रेक शैली से जोड़ सकते हैं, लेकिन इन कहानियों को पढ़ने के बाद ये लप्रेक से ज्यादा छायाचित्र की तरह लगते हैं, जिन्हें पढ़ने का अनुभव पाठक को नई सी ताजगी देता है।

वक्त की कमी के चलते अक्सर किताबें पढ़ने का शौक पूरा न कर पाने वाले लोगों के लिए ये किताब बिलकुल सही है। अगर हिसाब-किताब के अंदाज में बताया जाए तो इस कथा संग्रह की 80 कहानियों को पढ़ने के लिए सिर्फ 80 मिनट चाहिए, लेकिन बदले में ये कहानियां जीवन भर के लिए एक खास अहसास दे जाती हैं।

कथा संग्रह का नाम ‘नमक’ रखे जाने के पीछे की एक वजह इसकी शीर्षक कहानी नमक से भी समझ आती है और दूसरी वजह को लेखिका ने किताब की भूमिका में बहुत खूबसूरती से बयां किया है, जिसे पढ़ते ही किताब को पढ़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में काफी मदद मिलती है।

इस किताब को Authors pride publication ने पब्लिश किया है। 100 पृष्ठों वाली इस किताब की कीमत 125 रुपए रखी गई है। 

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तीन अमेरिकी पत्रकारों को किया देश से बाहर, लिया बदला

एक तरफ जहां पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ने का उपचार खोज रही है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका और चीन अभी भी आपसी मतभेद में उलझे हुए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 March, 2020
Journalist

एक तरफ जहां पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ने का उपचार खोज रही है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका और चीन अभी भी आपसी मतभेद में उलझे हुए हैं। दरअसल, चीन ने तीन अमेरिकी अखबारों के पत्रकारों को देश से बाहर कर दिया है।  

फिलहाल, चीन ने जिन तीन अमेरिकी अखबार के पत्रकारों को बाहर रास्ता दिखाया है, उनमें ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ शामिल है।

अमेरिकी मीडिया की मानें तो, चीन के विदेश मंत्रालय ने आधी रात को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है, जिसमें कहा गया है कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार, जिनके 2020 में क्रिडेंशियल समाप्त होने वाले हैं, वे सभी 10 दिन के अंदर अपने प्रेस कार्ड जमा करा दें, उन्हें अब चीन, हांगकांग (Hong Kong) या मकाऊ ( Macao) में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मंत्रालय ने चीन में उनके संचालन के बारे में जानकारी की भी मांग की है। अमेरिका में ‘चीनी मीडिया एजेंसियों पर अनुचित प्रतिबंध’ के जवाब में चीन ने ये कदम उठाया है। बयान के मुताबिक, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’‘वॉशिंगटन पोस्ट’, वॉयस ऑफ अमेरिका और टाइम मैगजीन को चीन में अपने स्टाफ, फाइनेंस, ऑपरेशन और रियल स्टेट के बारे में जानकारी भी घोषित करनी होगी।

बता दें कि फरवरी में ट्रंप प्रशासन ने चीन की पांच बड़ी मीडिया एजंसियों को चीन सरकार की कठपुतली बताया था। इतना ही नहीं सरकार ने इन संस्थानों में काम करने के लिए अमेरिका आने वाले चीन के कर्मचारियों की संख्या को भी सीमित कर दिया था, जिसके जवाब में चीन ने यह कदम उठाया है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका ने जो किया है वह विशेष रूप से चीनी मीडिया संगठनों को टारगेट करने के लिए था। वैचारिक पूर्वाग्रह और कोल्ड वार मानसिकता के कारण ये सब किया गया है।

मालूम हो कि इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो (Mike Pompeo) ने चीन को चेतावानी दी थी कि वो कोरोना (COVID-19) पर अफवाह और गलत खबरें फैलाना बंद करे। पिछले हफ्ते चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक ट्वीट कर कहा था कि हो सकता है इस वायरस को अमेरिकी सेना (US Army) ने वुहान (Wuhan) में छोड़ा हो। उनके इस बयान पर ही पोंपियो ने चीन को चेताया था।

इतना ही नहीं पोंपियो ने विशेषज्ञों और डॉक्टरों को सलाह दी है कि वे इस महामारी को COVID-19 की जगह वुहान वायरस (Wuhan Virus) कह कर संबोधित करें।

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अखबारों को विज्ञापन देने के मामले में इस तरह का प्लान तैयार करेगी सरकार

अखबारों से जुड़ी समस्याओं को लेकर हरियाणा संपादक संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने गुरुग्राम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 18 March, 2020
Delegation

हरियाणा संपादक संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने गुरुग्राम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर उन्हें समाचार पत्रों की समस्याओं से अवगत कराया। गुरुग्राम के लोक निर्माण विश्रामगृह में मंगलवार को हुई इस मुलाकात के दौरान इस प्रतिनिधिमंडल ने पत्रकारों के लिए पेंशन सुविधा शुरू करने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

प्रतिनिधि मंडल की मुख्यमंत्री के साथ हुई मुलाकात में अन्य विषयों के साथ हरियाणा से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापन देने के बारे में भी चर्चा की गई। इस पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही चंडीगढ़ में मीडिया सलाहकार अमित आर्य की उपस्थिति में सूचना, जनसंपर्क तथा भाषा विभाग के निदेशक पीसी मीणा और विभाग में विज्ञापन शाखा के प्रभारी के साथ बैठक बुलाने के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री का कहना था कि समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापन देने का साप्ताहिक प्लान तैयार किया जाएगा और इस मामले में पारदर्शी नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रकाशित किए जा रहे स्थानीय समाचार पत्रों का अपना महत्व है और उनके बारे में भी सरकार अवश्य विचार करेगी। चर्चा के दौरान सोशल मीडिया के प्रसार तथा प्रभाव के बारे में भी विचार विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री से मिलने वालों में गुरुग्राम के विधायक सुधीर सिंगला, जगत क्रान्ति ग्रुप के मुख्य संपादक अरुण भाटिया, पल पल के मुख्य संपादक सुरेन्द्र भाटिया, गुड़गांव टुडे के मुख्य संपादक अनिल आर्य, पाठक पक्ष के संपादक देवेंद्र उप्पल आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर अमित आर्य और सूचना सह निदेशक आरएस  सांगवान भी उपस्थित थे।

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