मीडिया और ऐडवर्टा‍इजिंग से जुड़े लोगों के लिए काफी उपयोगी है ‘exchange4media’ की ये नई पहल

मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपनी समस्‍याओं का हल तलाशने...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 08 September, 2017
Last Modified:
Friday, 08 September, 2017
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपनी समस्‍याओं का हल तलाशने के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। कई बार उन्‍हें कोई ऐसा एक्‍सपर्ट नही मिल पाता है जो उनकी समस्‍याओं को समझकर सही सॉल्‍यूशन दे सके। ऐसे में उन्‍हें काफी परेशानी होती है।

इंडस्‍ट्री से जुड़े ऐसे ही लोगों की परेशानी को समझते हुए हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने मोगा ग्रुप’ (Mogae Group) के वाइस चेयरमैन संदीप गोयल के साथ मिलकर आस्‍क द डॉक्‍टर’ (Ask The Doctor) नाम से एक नई पहल शुरू की है।

इस पहल के तहत संदीप गोयल अपने विशाल अनुभव द्वारा मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग प्रोफेशनल्‍स की समस्‍याओं को सुलझाने का काम करेंगे।

गौरतलब है कि मीडिया और कम्‍युनिकेशन इंडस्‍ट्री में संदीप गोयल काफी जाना-माना नाम हैं। वह वर्ष 2003 से 2011 तक डेंट्सू इंडिया (Dentsu India) के ग्रुप चेयरमैन रह चुके हैं। इसके पहले वह जी टेलिफिल्‍म्‍सूके ग्रुप सीईओ के साथ ही ऐड एजेंसी ‘Rediffusion DY&R’ के प्रेजिडेंट भी रह चुके हैं। वर्ष 2002 में हुए एमी अवॉर्ड्स की ग्‍लोबल जूरी टीम में वह पहले भारतीय थे। यही नहीं, वह एक प्रसिद्ध लेखक भी है और ‘The Dum Dum Bullet’ ‘Konjo- The Fighting Spirit’ जैसी किताबें भी लिख चुके हैं। हाल ही में उन्‍होंने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में अपनी पीएचडी की थीसिस जमा की है।

इसलिए यदि आपके मन में भी मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग एजेंसी से जुड़ा कोई भी सवाल है तो बेहिचक हमें interact@exchange4media.com पर लिख भेजें। यहां संदीप गोयल आपके सवालों का जवाब देंगे।

 

समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर माखनलाल यूनिवर्सिटी ने कुछ यूं पढ़ाया फिटनेस का ‘पाठ’

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से ‘घर पर और परिवार के साथ योग’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
Makhanlal University

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से ‘घर पर और परिवार के साथ योग’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कोरोना टीकाकरण महाअभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन भी किया गया।

इस अवसर पर प्रख्यात आध्यात्मिक एवं होलिस्टिक वेलनेस एक्सपर्ट साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि हमें अपने सुख-दुःख का रिमोट किसी दूसरे के हाथ में नहीं देना चाहिए। दूसरे को यह अधिकार नहीं देना चाहिए कि वह चाहे तो हमें हंसाये और वह चाहे तो रुला दे। योग के माध्यम से हम अपने मन पर नियंत्रण करना भी सीखते हैं। वहीं, कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि कोरोना ने बताया कि हमारे लिए स्वास्थ्य का क्या महत्व है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम सिर्फ शारीरिक ही नहीं, अपितु मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहें।

कार्यक्रम में साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि योग एक उत्सव है। योग हमारे अंदर ही स्थित है। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, यह बात भूल जाते हैं और बाहर से योग सीखते हैं। उन्होंने बताया कि योग को घर पर भी किया जा सकता है। योग के लिए मेहनत नहीं करनी होती, बस संकल्प लेना होता है। योग का महत्व बताते हुए साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि गीता में कहा गया है कि योग आपको कार्य में कुशलता प्रदान करता है। यह हमें पूर्णता की ओर ले जाता है। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास कराया और उनकी उपयोगिता बताई।

उन्होंने कहा कि ध्यान केंद्रित करने में ज्ञान मुद्रा का बहुत लाभ होता है। यह हमारी स्मरण शक्ति बढ़ाता है। जबकि वायु मुद्रा वजन कम करने में बहुत उपयोगी है। वहीं, वरुण मुद्रा से हमारी इम्युनिटी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्राओं के इस्तेमाल से हम अनेक बीमारियों से दूर रह सकते हैं। विभिन्न मुद्राओं का 20-22 सेकंड का अभ्यास भी बहुत लाभदायक हो सकता है।

इस अवसर पर ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन जैसे आसान का प्रशिक्षण भी दिया गया। योग शिक्षक डॉ. देवेंद्र शर्मा ने योगासनों का प्रदर्शन किया और अभ्यास कराया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन कुलसचिव प्रो. पवित्र श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. मीता उज्जैन ने किया।

 विश्वविद्यालय में टीकाकरण शिविर का आयोजन:

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और टीकाकरण महाअभियान के अंतर्गत सोमवार को विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में वैक्सीनेशन कैम्प का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने टीका लगवाया।

एनसीसी और एनएसएस के विद्यार्थियों ने आसपास के क्षेत्र में कोरोना टीकाकरण के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाया और लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया। इस टीकाकरण शिविर का आयोजन प्रशासन के सहयोग से विश्वविद्यालय की ‘कोविड-19 रेस्पोंस टीम’ ने किया।

एमसीयू पहला विश्वविद्यालय है, जहां कोरोना संकट में लोगों को सहयोग करने के लिए ‘कोविड-19 रेस्पोंस टीम’ का गठन किया गया। मध्यप्रदेश सरकार के कोरोना टीकाकरण महाभियान में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। लगभग 200 वीडियो संदेश के माध्यम से पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने वैक्सीन के लिए लोगों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है।

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पत्रकार रोहित सक्सेना ने राजनीति की दुनिया में रखा कदम, थामा इस पॉलिटिकल पार्टी का दामन

‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ के ग्रुप सीईओ व मैनेजिंग एडिटर रोहित सक्सेना ने अब सक्रिय राजनीति की दुनिया में अपने कदम रख दिए हैं।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
Rohit Saxena

‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ के ग्रुप सीईओ व मैनेजिंग एडिटर रोहित सक्सेना ने अब सक्रिय राजनीति की दुनिया में अपने कदम रख दिए हैं। दरअसल, उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप), उत्तर प्रदेश की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस बात की जानकारी रोहित सक्सेना ने खुद एक ट्वीट कर दी है।

रोहित सक्सेना ने इस ट्वीट में कहा है, ‘महादेव के आशीर्वाद से आज बड़े भाई @SanjayAzadSln जी के हाथों @AAPUttarPradesh की सदस्यता ग्रहण करी...UP2022 में पार्टी को जीत हासिल करानी है , अब यही लक्ष्य है....।’

रोहित सक्सेना द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

दो दशक से ज्यादा समय तक प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दे चुके रोहित सक्सेना की खेलों में भी रुचि रही है। वे ताइक्वांडो के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं और कई बार अपने वेट के यूपी चैंपियन रहने के साथ कोरिया से 2nd DAN  ब्लैक बेल्ट हैं। देश के कई खेल संगठनों (ताइक्वांडो, बॉक्सिंग और बॉड़ी बिल्डिंग) के चेयरमैन और अध्यक्ष होने के साथ 21 वर्षो में मीडिया के शुरुआती पद से ग्रुप सीईओ तक का मुकाम  हासिल किया है। रोहित भारत सरकार की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल के वारिष्ठ सलाहकार भी हैं।

खेलों और समाज के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए उन्हें पिछले दिनों एशिया पैसिफिक चैंबर ऑफ कॉमर्स व टोंगा की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी की ओर से ‘एशिया पैसिफिक एक्सिलेंस अवॉर्ड’ के लिए चुना जा चुका है। यह सम्मान उन्हें ‘मोस्ट प्रॉमिसिंग पर्सनॉलिटी ऑफ द ईयर’ कैटेगरी के तहत मिला है।

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वरिष्ठ पत्रकार सहित तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, जमीन कब्जा करने का लगाया था आरोप

उत्तर प्रदेश की बिजनौर पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण सहित तीन लोगों के खिलाफ आईपीसी और आईटी एक्ट की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
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उत्तर प्रदेश की बिजनौर पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण सहित तीन लोगों के खिलाफ आईपीसी और आईटी एक्ट की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल तीनों पर अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य के खिलाफ साजिश रचने और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है।

यह मुकदमा राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए श्री राम मंदिर निर्माण तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के भाई संजय बंसल की शिकायत पर दर्ज किया गया है। अन्य लोगों के नाम अल्का लाहोटी और रजनीश हैं।  

चंपत राय बीते कई दिनों से सवालों के घेरे में हैं और राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीद के मामले में एक के बाद एक नए फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है।

शिकायत में संजय बंसल ने कहा है कि उन्होंने विनीत नारायण को फोन किया तो रजनीश नाम के किसी शख्स ने फोन उठाया और उनसे बदतमीजी की और जान से मारने की धमकी भी दी। शिकायत में उन्होंने कहा है कि नारायण व बाकी नामजद लोगों ने धर्म के आधार पर नफरत को बढ़ावा दिया है। संजय बंसल बिजनौर के नगीना के रहने वाले हैं।

पत्रकार विनीत नारायण ने एक फेसबुक पोस्ट शेयर कर चंपत राय पर बिजनौर जिले में जमीन हड़पने में उनके भाइयों की मदद करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि अल्का लाहोटी के नाम एक गोशाला की 20,000 वर्ग मीटर जमीन हड़पने में चंपत राय ने अपने भाइयों की मदद की थी, जिस पर अवैध डिग्री कॉलेज बनवाया और उसे विश्वविद्यालय से मान्यता दिलवाई। ये भी कहा गया था कि अल्का कब्जे से जमीन छुड़ाने के लिए सीएम योगी से भी गुहार लगा चुकी हैं।

बिजनौर पुलिस ने इस मामले में चंपत राय और उनके भाइयों को क्लीन चिट दे दी है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि चंपत राय के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, प्रथम दृष्टया में वे आरोप पूरी तरह झूठे पाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि राय के परिजनों पर लगाए गए आरोप भी निराधार पाए गए हैं हालांकि मामले की जांच जारी है।

विनीत नारायण ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि इंडोनेशिया में रहने वाली अलका लाहोटी के पिताजी ने गौसेवा की भावना से 1953 में श्री कृष्ण गौशाला की स्थापना की थी और गौशाला की जमीन पर कब्जा होने की खबर मिलने पर अलका लाहोटी इंडोनेशिया से यहां आयीं और इसे मुक्त कराने के लिए 2018 से लगातार संघर्ष कर रही हैं।

विनीत नारायण के मुताबिक, अलका लाहोटी ने उन्हें बताया कि प्रशासन चंपत राय के दबाव में उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है। पत्रकार ने लिखा कि  लाहोटी ने उन्हें फोन पर बताया था कि चंपत राय से उन्होंने इस विषय में फरियाद की तो उन्होंने कहा कि ये भी (कब्जा करने वाले) अपने परिवार के लोग हैं और मैं पहले इनकी मदद कर चुका हूं, इसलिए अब मैं तुम्हारी कोई कोई मदद नहीं कर सकता।’

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देश भर के पत्रकारों के लिए तीर्थ से कम नहीं है पथरिया: राजेश बादल

मूर्धन्य संपादक और हिंदी के सेवक माधव राव सप्रे की याद में किया गया कार्यक्रम का आयोजन

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
Programme

आजादी से पहले के हिंदुस्तान में पत्रकारिता के सबसे सशक्त हस्ताक्षर माधवराव सप्रे के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करने और उसे जन-जन तक पहुंचाने का आज संकल्प लिया गया। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल के मुख्य आतिथ्य में सप्रे जी की जन्मस्थली मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया कस्बे में शनिवार को मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार पदमश्री विजय दत्त श्रीधर, वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार राजेश बादल, साहित्यकार श्यामसुंदर दुबे और सीसीईआरटी की चेयरमैन सुश्री हेमलता मोहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

आयोजन में मुख्य अतिथि पटेल ने कहा, ‘स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इनमें आजादी के आंदोलन की घटनाओं और उनमें शामिल रहे महापुरुषों के योगदान को याद किया जाएगा। इस कड़ी में पथरिया का यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। सप्रे जी ने निष्काम योगी के रूप में अपने जीवन को देश को समर्पित कर दिया था। ऐसे श्रद्धा पुरुष को नमन।‘ उन्होंने कहा कि साल भर तक ऐसे गुमनाम क्रांतिकारियों और शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम होंगे, जो वक्त के साथ भुला दिए गए।

पदमश्री विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे जी के जीवन से जुड़ी तमाम घटनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने माखनलाल चतुर्वेदी, द्वारिका प्रसाद मिश्र और सेठ गोविंददास जैसी अनेक विभूतियों को तराशा और स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि भोपाल का माधवराव सप्रे राष्ट्रीय संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ समाचार पत्र-पत्रिकाओं का एक बड़ा केंद्र बन गया है । इसमें लाखों दस्तावेज,माधव राव सप्रे से लेकर धर्मवीर भारती और दुष्यंत कुमार तक की यादें सुरक्षित हैं। अनेक महान पुरुषों की पांडुलिपियां और दुर्लभ सामग्री से हजारों शोधार्थी लाभ उठा चुके हैं। शीघ्र ही सप्रे जी की स्मृति में अगला बड़ा कार्यक्रम संग्रहालय में किया जाएगा ।

वरिष्ठ पत्रकार, फिल्मकार और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने कहा कि पथरिया देश भर के पत्रकारों के लिए तीर्थ से कम नहीं है। इस पर बुंदेलखंड का हर नागरिक गर्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने भारत में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए भी अभियान छेड़ा। ये दोनों आंदोलन बाद में महात्मा गांधी ने उठाए और उन्हें देश भर में विस्तार दिया। गोरी हुकूमत उनके लेखन से परेशान रही, लेकिन माधवराव जी अपना काम करते रहे।

साहित्यकार श्यामसुंदर दुबे ने पथरिया से सप्रे जी के रिश्ते को रेखांकित करते हुए अनेक संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम में सप्रे जी पर केंद्रित पांच विशेष प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया । इसके अलावा माधव राव सप्रे संग्रहालय के सौजन्य से सप्रे जी के जीवन वृत्त को दर्शाते हुए एक चित्र दीर्घा का अवलोकन भी अतिथियों ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और साहित्यकार उपस्थित थे। समारोह का संचालन इंदिरागांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक विजय शंकर शुक्ल ने किया।

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‘वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं पं. माधवराव सप्रे जी के जीवन मूल्य’

पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
Webinar

पं. माधवराव सप्रे की 150वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल का कहना था कि पं. माधवराव सप्रे जी के मूल्य वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। हम सभी को सप्रे जी के जीवन से यह सीख लेनी चाहिए कि स्वावलंबन के बिना आजादी का कोई मोल नहीं है।’ इस अवसर पर महत्वपूर्ण वैचारिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के माधवराव सप्रे जी पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने की। वेबिनार में वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता,  विश्वनाथ सचदेव, जगदीश उपासने, माधवराव सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे,  इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

‘भारत का वैचारिक पुनर्जागरण और माधवराव सप्रे’ विषय पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पं. माधवराव सप्रे की जन्मस्थली पथरिया में उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भाषा की चुनौती हमारे सामने है और ये बढ़ती जा रही है। इसलिए आज हमें सप्रे जी के लेखन से प्रेरणा लेनी चाहिए। हिंदी पत्रकारिता और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण एक तरह से नए ज्ञान के उदय की प्रक्रिया भी है। सप्रे जी ने यह काम अनुवाद के माध्यम से किया और समर्थ गुरु रामदास की प्रसिद्ध पुस्तक 'दासबोध' का अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि सप्रे जी का पूरा जीवन संघर्ष और साधना की मिसाल है। उनके निबंधों को पढ़ने पर मालूम होता है कि उनके ज्ञान का दायरा कितना व्यापक था।   

माधवराव सप्रे जी के पौत्र डॉ. अशोक सप्रे ने कहा, ‘मेरे दादाजी ने मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी भाषा के विकास के लिए कार्य किया। उनका मानना था कि जब देश स्वतंत्र होगा, तो भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो सकती है। इससे ये पता चलता है कि वे कितने दूरदर्शी थे।’

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि समाज सुधारक के रूप में सप्रे जी का महत्वपूर्ण योगदान है। अपने लेखन से उन्होंने सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया। उन्होंने जन जागरुकता के लिए कहानियां लिखीं और समाचार पत्र प्रकाशित किए। दलित समाज और महिलाओं के लिए किए गए उनके कार्य अविस्मरणीय हैं।

विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि सप्रे जी को पढ़कर यह आश्चर्य होता है कि किस तरह उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से एक नई व्यवस्था बनाने की कोशिश की थी। किस तरह उन्होंने एक ऐसे समाज की रचना करने की कोशिश की, जहां उनकी आने वाली पीढ़ी सुख और शांति के साथ रह सके। यही महापुरुषों की विशेषता होती है कि वे अपने समय से दो कदम आगे चलते हैं। जगदीश उपासने ने कहा कि माधवराव सप्रे हिंदी नवजागरण काल के अग्रदूत थे। पत्रकारिता, साहित्य और भाषा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों का समग्र आकलन अभी तक नहीं हो पाया है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए इंदिरा गांधी कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि माधवराव सप्रे देश के पहले ऐसे पत्रकार थे, जिन्हें राजद्रोह के आरोप में वर्ष 1908 में जेल हुई। उन्होंने साहित्य की हर धारा में लिखा। उनके लेख आज भी युवाओं को प्रेरणा देते हैं। अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि सप्रे जी की प्रेरणा और भारतबोध से हमारा देश सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरेगा और फिर से जगत गुरु के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।  धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अचल पंड्या ने किया।

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जेल में बंद पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां का निधन

जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां खदीजा कुट्टी का शुक्रवार को मलप्पुरम में निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 19 June, 2021
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जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां खदीजा कुट्टी का शुक्रवार को मलप्पुरम में निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं। बताया जा रहा है कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रसित थीं और कुछ महीनों से उनका इलाज चल रहा था।

स्वर्गीय मोहम्मद कुट्टी कप्पन उनके पति थे। सिद्दीकी के अलावा, खदीजा के परिवार में उनके बेटे हम्सा और बेटियां फातिमा, आयशा, मरियामू, खादियामू और अस्माबी हैं।

कप्पन और उसके कथित सहयोगी, जिन पर कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े होने का संदेह है, को पिछले साल 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। यूपी के हाथरस में युवती के साथ हुए गैंगरेप-मर्डर के बाद वे घटनास्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस हफ्ते की शुरुआत में, मथुरा की एक अदालत ने कप्पन और तीन अन्य के खिलाफ शांति भंग की आशंका से संबंधित आरोपों पर कार्यवाही रद्द कर दी थी, क्योंकि पुलिस छह महीने की निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी करने में विफल रही। मजिस्ट्रेट के आदेश में कहा गया कि जैसा कि सीआरपीसी की धारा 116 (6) के तहत कार्यवाही पूरी करने की सीमा समाप्त हो गई है, चारों आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर से एक अन्य मामले में आरोपी आईपीसी की धारा 153ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 124ए (देशद्रोह), 120बी (साजिश), यूएपीए के तहत जेल में बंद हैं।

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हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक के नाम पर देश का पहला स्मारक बना IIMC का पुस्तकालय

'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं 'पं. युगल किशोर'

Last Modified:
Thursday, 17 June, 2021
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) का पुस्तकालय अब पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नाम से जाना जाएगा। हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर यह देश का पहला स्मारक है। बुधवार को पं. युगल किशोर शुक्ल ग्रंथालय एवं ज्ञान संसाधन केंद्र के नामकरण के मौके पर 'आईआईएमसी' के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, 'पं. युगल किशोर शुक्ल का पूरा जीवन हिंदी पत्रकारिता,  भारतबोध और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को समर्पित था। उन्होंने पत्रकारिता में मूल्यों को समझा था और लोक कल्याण और जनसरोकार की पत्रकारिता की थी। पं. युगल किशोर शुक्ल व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं।'

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि आईआईएमसी का पुस्तकालय अब शुक्ल जी के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ एक साधन है। ज्ञान किसी भाषा का मोहताज नहीं होता। भारत को जोड़े रखने के लिए हमें सभी भारतीय भाषाओं को समान महत्व देना ही होगा, क्योंकि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं।

इस अवसर पर "हिंदी पत्रकारिता की प्रथम प्रतिज्ञा: हिंदुस्तानियों के हित के हेत" विषय पर एक विशेष विमर्श का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में ‘दैनिक जागरण‘ के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में तथा पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इसके अलावा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबु, कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर एवं आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने भी वेबिनार में अपने विचार व्यक्त किये। समारोह की अध्यक्षता प्रो. संजय द्विवेदी ने की।

इस मौके पर ‘दैनिक जागरण‘ के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि पं. युगल किशोर शुक्ल में समाज और राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं के बारे में असाधारण जागरूकता थी और सच कहने का साहस भी था। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के लिए सिर्फ राजनीतिक चेतना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना की भी आवश्यकता है।

पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि आज से 195 वर्ष पूर्व पं. युगल किशोर शुक्ल ने सूचना की शक्ति को पहचान लिया था। उन्हें पता था कि समाज के लिए सूचना बहुत ​ही हितकारी है। श्रीधर ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ व्यवसाय नहीं है। पत्रकारिता में जब सामाजिक सरोकार प्रबल होंगे, तभी पत्रकारिता की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता न ​तो किसी के पक्ष में होती है और न ही विपक्ष में। पत्रकारिता सिर्फ जनपक्ष होती है।

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने कहा कि आज अतीत के हमारे प्रामाणिक शोधों के डिजिटलाइजेशन की आवश्यकता है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी इसका लाभ उठा सके। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी।

कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर ने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क का माध्यम है। पिछले कुछ समय से हिंदी के साथ अन्य भाषाओं के लोगों की सहजता बढ़ी है और परस्पर आदान-प्रदान से दोनों ही भाषाएं समृद्ध होती हैं। आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद पं. युगल किशोर शुक्ल ने 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को अपने महापुरुषों का भुलाना नहीं चाहिए और उनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

इस अवसर पर प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारतीय जनसंचार संस्थान अपनी स्थापना से ही भारतीय भाषाओं के संवर्धन का कार्य कर रहा है। हम चाहते हैं कि आईआईएमसी भारतीय भाषाओं के बीच अंतर-संवाद का मंच बने। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से ही हम लोगों को जोड़ सकते हैं और इस प्रक्रिया में पत्रकारिता का महत्वपूर्ण स्थान है।

कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपाड भी विशेष तौर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आईआईएमसी, जम्मू केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) राकेश गोस्वामी ने किया।

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नहीं रहीं जानी-मानी मीडिया प्रफेशनल टीना सिंह

टीना सिंह देश के तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी थीं। BCCL के साथ वह 31 साल से ज्यादा समय तक जुड़ी रही थीं।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
Teena Singh

मीडिया और मार्केटिंग क्षेत्र की जानी-मानी हस्ती टीना सिंह का निधन हो गया है। टीना सिंह को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव था। वह देश के तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी थीं। उन्होंने वर्ष 2019 में करीब पांच महीनों के लिए नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के फर्स्टपोस्ट (First Post) प्रिंट एडिशन में बतौर कंसल्टेंट (सेल्स और मार्केटिंग) काम किया था।

उससे पहले 2015 से 2017 के बीच वह ‘टीमवर्क आर्ट्स’ (Teamwork Arts) में बतौर कंसल्टेंट (मार्केटिंग, मीडिया स्ट्रैटेजी और सेल्स) की जिम्मेदारी निभा रही थीं। उन्होंने ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) के साथ अपने करियर की सबसे लंबी पारी खेली।

यहां उन्होंने 31 साल से अधिक समय तक विभिन्न भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाई। टीना सिंह ने वर्ष 1984 में 'बीसीसीएल' में बतौर चीफ मैनेजर जॉइन किया था और वर्ष 2015 में यहां वाइस प्रेजिडेंट के पद से अलग हुई थीं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो टीना सिंह ने ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ (DU) से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसके अलावा उन्होंने ’इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पीजी डिप्लोमा और ‘आईआईएम अहमदाबाद’ (IIM Ahmadabad) से स्ट्रैटेजिक मार्केटिंग में डिग्री ली थी।

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मार्कंड अधिकारी ने टीकाकरण से वंचितों के लिए बड़े पैमाने पर शुरू किया ये अभियान

अब श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी एक बेहतरीन पहल शुरू की है।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
markandadhikari544

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन ही बचाव का एक बेहतर विकल्प है। लिहाजा सरकार की कोशिश है कि वह ज्यादा से ज्यादा भारतीयों के लिए वैक्सीन उपलब्ध करा सके। इस कड़ी में अब श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी एक बेहतरीन पहल शुरू की है। दरअसल, चल रही COVID-19 महामारी के बीच, मीडिया दिग्गज मार्कंड अधिकारी ने उन लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जो अभी तक टीका लगवाने (वैक्सीनेशन) से वंचित रह गए हैं।

श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप (सब ग्रुप) के ब्रॉडकास्टिंग व प्रॉडक्शन की पूरी टीम का टीकाकरण हो चुका है, जिसके बाद अब मार्कंड अधिकारी ने उन वंचितों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जो टीकाकरण का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं या वे लोग, जो तकनीकि चुनौतियों की वजह से स्लॉट को बुक करने में असमर्थ हैं। मुंबई के अंधेरी पश्चिम से भाजपा विधायक अमित साटम की मदद से ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है।

इस पहल को लेकर मार्कंड अधिकारी ने कहा, ‘निजी व्यक्तियों द्वारा टीकाकरण अभियान से लोगों का टीकाकरण कराने में मदद मिलेगी और सरकार का बोझ भी कम होगा। मुझे लगता है कि हर कॉरपोरेट को इस तरह के नेक काम के लिए आगे आना चाहिए और समाज को महामारी से छुटकारा दिलाना चाहिए।’

मार्कंड अधिकारी, सब ग्रुप के मीडिया और मनोरंजन के सभी कार्यक्षेत्रों जैसे- कंटेंट प्रॉडक्शन, ब्रॉडकास्टिंग, फिल्म प्रॉडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन, वीएफएक्स स्टूडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म और करंट अफेयर्स व न्यूज आर्म्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इसके अलावा, वह बॉलीवुड मूवीज के प्रॉडक्शन से भी जुड़े हुए हैं।

इसके अतिरिक्त वह कॉमेडी चैनल ‘सब’ (SAB) के संस्थापक भी हैं। उनके नेतृत्व में ‘मस्ती’,  ‘दबंग’, ‘मैबोली’ जैसे सफल चैनल का संचालन भी किया जा रहा है। इसके अलावा, वह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म `गवर्नेंस नाउ’ को भी चला रहे हैं, जो एक सार्वजनिक मंच पर शासन-प्रशासन से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा रहा है और इस प्रकार से उन्होंने मीडिया सेगमेंट में भी अपनी जगह बनाई है।

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कोर्ट ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को इस आरोप से किया मुक्त, कही ये बात

मांट (मथुरा) एसडीएम रामदत्त राम ने इस मामले में कप्पन समेत उनके साथ गिरफ्तार तीन अन्य लोगों के ऊपर से यह आरोप हटा दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 16 June, 2021
Siddique Kappan

कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती के हाथरस स्थित गांव जाते समय पांच अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और तीन अन्य को शांतिभंग के आरोप से मुक्त कर दिया गया है। मांट (मथुरा) एसडीएम रामदत्त राम ने इस मामले में कप्पन समेत उनके साथ गिरफ्तार तीन अन्य लोगों के ऊपर से यह आरोप हटा दिया है। हालांकि, देशद्रोह और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम ‘यूएपीए’ (UAPA) के तहत लगे आरोप अभी भी उन पर लगे हुए हैं।  

बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील पर उप जिलाधिकारी ने सभी चारों आरोपितों को शांति भंग के आरोप से मुक्त किए जाने के आदेश जारी किए हैं। इस मामले में एसडीएम का कहना है, ' पुलिस इस मामले की जांच तय छह महीने में पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में चारों आरोपितों पर से शांतिभंग का आरोप हटाया जाता है।'

गौरतलब है कप्पन को 5 अक्टूबर 2020 को तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जब वह एक दलित महिला के कथित गैंगरेप और मौत की रिपोर्ट करने यूपी के हाथरस जा रहे थे। पुलिस ने तब कहा था कि उसने चार लोगों को मथुरा में अतिवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ कथित संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया और चारों की पहचान केरल के मलप्पुरम के सिद्दीकी कप्पन, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के अतीक-उर-रहमान, बहराइच के मसूद अहमद और रामपुर के मोहम्मद आलम के तौर पर हुई है।

उनके खिलाफ मांट थाने में आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (दो समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने), 295ए (धार्मिक भावनाएं आहत करने), यूएपीए की धारा 65, 72 और आईटी एक्ट की धारा 76 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 3 अप्रैल को मथुरा की अदालत में उनके और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, जिसमें उन पर राजद्रोह का और राज्य में हिंसा भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया गया। साथ ही उन्हें आतंकवादी संगठन पीएफआई का सदस्य बताया गया।

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