पत्रकारिता में आजकल गूगल हिंदी टाइपिंग वाले छात्र ज्यादा आ रहे हैं: ब्रजेश सिंह, जी हिन्दुस्तान

पत्रकारिता के छात्रों को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए...

Last Modified:
Thursday, 15 March, 2018
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पत्रकारिता के छात्रों को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए बहुआयामी होना चाहिएजबकि आजकल गूगल हिंदी टाइपिंग वाले छात्र ज्यादा आ रहे हैं।’ एक कार्यक्रम के दौरान ये बात जी हिन्दुस्तान’ के संपादक ब्रजेश सिंह ने कही।

नोएडा के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित ‘प्रतिभा उत्सव 2018’ के उद्घाटन सत्र में पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश-विदेश में हो रही हर घटना से पत्रकारिता में आने वाले छात्रों को रूबरू होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को सफल बनने के टिप्स देते हुए कहा कि जो ज्ञान किताबों से मिलेगा वो गूगल पर नहीं मिल सकता इसलिए अध्ययन का अभ्यास अभी से करें। साथ ही अखबार पूरा और एक से अधिक पढ़े। इसके अलावा अपनी अभिरुचि में दक्ष बनें, फिर सफलता दूर नहीं।

वहीं इसी कार्यक्रम के दौरान हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ के जाने-माने न्यूज एंकर सईद अंसारी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बिना मिशन की पत्रकारिता करना समाज के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्रकार को किसी दुर्भावना के साथ पत्रकारिता नहीं बल्कि देशहित में करनी चाहिए। एक पत्रकार को समाज से जुड़ी हर छोटी बड़ी खबर की जानकारी रखनी चाहिए। अंसारी ने छात्रों को बताया कि सफल पत्रकार बनने के लिए हर क्षेत्र में पारंगत होना आवश्यक हैइसीलिए हमें खुद को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिभा में हो रहे खेल-कूद एवं सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। 

उद्घाटन सत्र में रंगोलीकार्टून और फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गयाजिसमें छात्रों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। वहीं आने वाले पांच दिनों में इस प्रतिभा उत्सव में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें छात्र अपनी कला का हुनर दिखाएंगे।

इस अवसर पर प्रोफेसर बी.एस. निगमरजनी नागपालसूर्यप्रकाशमीता उज्जैनलालबहादुर ओझाडॉ. सौरभ मालवीयराकेश योगी उपस्थित रहे।



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विधानसभा के बाहर प्रदर्शन को क्यों मजबूर हुई महिला पत्रकार, पढ़ें यहां

महिला पत्रकार के इस कदम के बाद विधानसभा की सुरक्षा को लेकर उठने लगे हैं सवाल

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Journalist

बिजनेसमैन पर नौकरी देने के बहाने दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए एक महिला पत्रकार ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। यह मामला ओडिशा का है। हालांकि, बाद में पुलिस उस महिला पत्रकार को अपने साथ ले गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा और धारा 144 लगी होने के बावजूद आखिर महिला पत्रकार कैसे वहां तक पहुंचने में कामयाब हो गई।  

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अपने साथ हुई इस तरह की घटना के विरोध में महिला पत्रकार पिछले करीब चार महीने से विरोध जता रही थी। उसने इस मामले में इंफोसिटी (Infocity) पुलिस स्टेशन में एक केस भी दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने पर महिला पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर और डीजीपी से मुलाकात कर उन्हें मेसेज भी भेजे थे।  

इस बारे में इंफोसिटी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज बिश्वजीत मोहंती का कहना है, ‘महिला की शिकायत के बाद की गई शुरुआती जांच में पता लगा है कि आरोपित के साथ महिला के संबंध आपसी सहमति के आधार पर थे, जिससे वह गोवा में मिली थी। दोनों एक साथ कई देशों में भी जा चुके हैं। बिजनेमैन ने महिला के खिलाफ मारपीट का केस भी दर्ज कराया है।’ मोहंती का कहना है, ‘जांच में पता चला है कि बिजनेसमैन की शादी कहीं और होने और उसके फ्लैट पर कब्जा पाने में विफल रहने पर महिला ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है।’

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इस तरह की बातों के लिए प्रसार भारती के चेयरमैन ने की संपादक की खिंचाई

ए. सूर्यप्रकाश ने भारत के लोकतंत्र की जमकर की तारीफ

Last Modified:
Friday, 19 July, 2019
Prasar Bharati

लंदन में ग्लोबल कॉन्फ्रेंस फॉर मीडिया फ्रीडम में 'धर्म और मीडिया' सत्र के दौरान भारत विरोधी व्याख्यान देने पर प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने 'कारवां' मैगजीन के कार्यकारी संपादक विनोद के. जोस की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि जोस के कई बयान ‘गलत और अधूरे' थे। दरअसल, जोस ने सत्र के दौरान दावा किया था कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।

अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हमले के मीडिया कवरेज के क्लिप दिखाए थे। व्याख्यान के दौरान जोस ने दावा किया कि भारत में सैकड़ों ईसाइयों की हत्या कर दी गई। इसके अलावा 1984 में सिखों के नरसंहार को अंजाम दिया गया। उनके व्याख्यान के बाद संवाद सत्र के दौरान ए. सूर्यप्रकाश ने जोस के भाषण की आलोचना की।

सूर्यप्रकाश ने भारत के लोकतंत्र की तारीफ करते हुए कहा कि यह न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि यह जीवंत भी है। इसमें विविध समाज के लोग रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर श्रोताओं ने जोस की बातों पर भरोसा किया तो दुनिया भर में लोकतंत्र संदेह के घेरे में होगा।

प्रसार भारती के अध्यक्ष ने इसके साथ ही यह आरोप लगाया कि दुनिया के कुछ कार्यकर्ताओं को हाल में हुए चुनाव में भारत के मतदाताओं का निर्णय रास नहीं आया और उन्होंने अपनी बातों के लिए इस तरह के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा, 'आयोजकों द्वारा भारत विरोधी व्याख्यान के लिए इस तरह प्लेटफॉर्म मुहैया कराए जाने से मैं दुखी हूं।‘ बता दें कि सम्मेलन का आयोजन ब्रिटेन और कनाडा की सरकारों ने संयुक्त रूप से किया था। सत्र की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रमंडल और संयुक्त राष्ट्र के सचिव विम्बलडन के लॉर्ड अहमद ने सूर्यप्रकाश की टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए कहा कि वह भारत के लोकतंत्र का काफी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि जातीय एवं अन्य संघर्षों पर चर्चा तो की जा सकती है, लेकिन लोकतांत्रिक देश में भारत की मजबूती पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते हैं।

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PCI चेयरमैन जस्टिस सी.के.प्रसाद ने 'संपादकों' पर की कड़ी टिप्पणी

सोशल मीडिया विचार व्यक्त करने का एक सार्वजनिक मंच है, यह पत्रकारिता नहीं है

Last Modified:
Wednesday, 17 July, 2019
CK Prasad

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)  के अध्यक्ष जस्टिस सी.के.प्रसाद का कहना है कि आज के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता खतरे में है। अब पत्रकारिता प्रोफेशनल संपादकों के बजाय मैनेजर्स द्वारा संचालित की जा रही है और पत्रकार चीयर लीडर की भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक पत्रकारों को नौकरी की सुरक्षा नहीं मिलेगी और पत्रकारिता जगत की कमान प्रोफेशनल संपादकों के हाथ में नहीं होगी, तब तक पत्रकारिता का संकट दूर नहीं होगा।

शिकायतों की सुनवाई के लिए दो दिवसीय दौरे पर पटना आए जस्टिस सीके प्रसाद ने कहा कि मैनेजर्स सिर्फ लाभ-हानि की भाषा ही समझते हैं और मालिकों को भी वे यही बात समझाते हैं। इन मैनेजर्स को कंटेंट से कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने कहा है कि देश में या तो हाहाकारी पत्रकारिता हो रही है या जयजयकारी पत्रकारिता। यह न तो पत्रकारिता के लिए ठीक है और न ही पत्रकारों के लिए। इससे विश्वसनीयत प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया विचार व्यक्त करने का एक सार्वजनिक मंच है, जिस पर सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह हमारे हिसाब से पत्रकारिता नहीं है। न्यूज अलग होती है और लोगों के विचार अलग होते हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपने विचार रख सकते हैं, वे अन्य मंचों पर भी अपने विचार रख सकते हैं, लेकिन यह न्यूज नहीं होती है।

जस्टिस सी.के.प्रसाद का कहना था कि मीडिया के बारे में आप लोगों ने सुना होगा कि यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, समाज का आईना है, लेकिन इसके बारे में यह भी कहा गया है कि मीडिया और पत्रकारिता जैविक आवश्यकता (बायोलॉजिकल नेसेसिटी) है।

जस्टिस सीके प्रसाद द्वारा मीडिया को लेकर कही गई बातों को आप नीचे दिए गए विडियो में देख सकते हैं-

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पत्रकार की पिटाई कर बुरे फंसे पुलिसकर्मी, यूं पड़ गए लेने के देने

बीच सड़क से गाड़ी हटाने के लिए कहने पर पुलिसकर्मियों ने कर दी थी पत्रकार की पिटाई

Last Modified:
Wednesday, 17 July, 2019
Police

पुलिस की गाड़ी को सड़क के बीच से हटाने के लिए कहने पर गुस्साए पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ बीच सड़क पर पत्रकार के साथ मारपीट कर दी, बल्कि बिना वजह उसे थाने में ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया। ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट समेत पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रात में ही एसएसपी शलभ माथुर को मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।

पत्रकारों की मांग पर एसएसपी ने अड़ीग चौकी इंचार्ज व उप निरीक्षकों सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। उन्होंने इन पुलिसकर्मियों के गैर जोन में ट्रांसफर के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र भी लिखा। एसएसपी द्वारा आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कदम उठाए जाने के बाद पत्रकारों का गुस्सा शांत हुआ।

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दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को मिलेगा ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

इस पुरस्कार में एक लाख एक हजार रुपए और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Shakeel Hasan

उर्दू अकादमी ने दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को इस वर्ष उर्दू में उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में हुई उर्दू अकादमी की कार्यकारी समिति की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया। इस पुरस्कार के तहत एक लाख एक हजार रुपए नकद और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

इसके अलावा अनुवाद के लिए प्रो. अनीसुर्रहमान आल इंडिया बहादुर शाह जफर पुरस्कार जेएनयू के पूर्व शिक्षक प्रो. शारिब रुदौलवी तथा पं बृजमोहन दत्तात्रेय कैफी पुरस्कार दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष अतीक़ुल्लाह को देने का फैसला किया गया। इन दोनों पुरस्कार में दो लाख 51 हजार रुपए एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को लेकर हुआ विवाद

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Media Course

दिल्ली विश्वविद्यालय में पत्रकारिता कोर्स के नए पाठ्यक्रम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। डीयू की अकादमिक परिषद के सदस्य रसल सिंह का आरोप है कि विश्वविद्यालय के अंग्रेजी पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रम में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों और मॉब लिंचिंग से संबंधित पाठ भी शामिल किए गए हैं। आरोप है कि ऐसे पाठों का कंटेंट ‘पक्षपातपूर्ण’  न्यूज पोर्टल्स से लिया गया है, जो अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं।

रसल सिंह ने यह भी कहा, ‘इस तरह के पाठ्यक्रम के द्वारा आरएसएस और उससे संबद्ध संगठनों, यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया जा रहा है। मैं अकादमिक परिषद की बैठक में यह मुद्दा उठाऊंगा और सुनिश्चित करूंगा कि इसे अनुमति न मिले।’ इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। परिषद ने इस तरह के पाठों को हटाने की मांग की है।

इस बीच अंग्रेजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राज कुमार ने कहा कि उनका विभाग किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत न करने को लेकर प्रतिबद्ध है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय की स्नातक पाठ्यक्रम संशोधन समिति पहले से ही इस मुद्दे को उठा चुकी है और विवादित हिस्सों में सुधार होगा। वहीं, पत्रकारिता के जिन शिक्षकों ने इस पाठ्यक्रम को तैयार किया है, उनका कहना है कि इन पाठों के द्वारा छात्र-छात्राओं को यह सिखाने की कोशिश की गई है कि संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्ट कैसे की जाए।

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अखबार के खिलाफ मुकदमा करेंगे पूर्व पीएम के भाई, बताई ये वजह

पूर्व पीएम के भाई ने एक ट्वीट कर दी जानकारी, प्रधानमंत्री व उनके सहयोगी को भी लिया लपेटे में

Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Newspaper

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने कहा है कि वह ब्रिटेन के अखबार 'डेली मेल' (Daily Mail) के खिलाफ मुकदमा करेंगे। शहबाज के अनुसार वह यह मुकदमा उस ‘मनगढ़ंत और गुमराह’ करने वाली स्टोरी के लिए करेंगे, जिसमें उन्हें ब्रिटेन की विदेशी सहायता राशि चुराने के लिए दोषी बताया गया है।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज ने इस अखबार पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके करीबी शहजाद अकबर के इशारे पर यह स्टोरी पब्लिश की गई, जिसके लिए वह उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेंगे। शहबाज ने इस बारे में रविवार को एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार, ‘द मेल’ ने रविवार को जांचकर्ताओं और ‘एक गोपनीय जांच रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए एक स्टोरी पब्लिश की थी, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज ने वर्ष 2005 से 2012 के बीच जिस पैसे को चुराया है, वो ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) की वित्तपोषित परियोजनाओं का था। इसी स्टोरी को लेकर शहबाज खफा हैं और उन्होंने कानूनी कार्रवाई करने का मन बनाया है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार CMR

‘द हिन्दू’ में करीब 40 साल तक काम किया था, उनकी लिखी कई किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
CMR

वरिष्ठ पत्रकार सीएम रामचंद्र का शुक्रवार को निधन हो गया। 94 वर्षीय रामचंद्र इन दिनों उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ (The Hindu) में करीब 40 साल तक काम किया था। 24 अप्रैल 1925 को जन्मे रामचंद्र ने अंग्रेजी अखबार ‘डेक्कन हेराल्ड’ (Deccan Herald) में चार साल काम करने के बाद एक जुलाई 1952 को ‘द हिन्दू’ जॉइन किया था। वह यहां से 1992 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन इसकी मासिक पत्रिका ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) के लिए लगातार लिखते रहते थे।

सीएमआर के नाम से फेमस रामचंद्र को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिसंबर 1985 में राज्योत्सव अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। सीएमआर ने कई किताबें भी लिखी थीं। कर्नाटक की राजनीति को लेकर उनकी आखिरी किताब ‘Cockpit of India’s Political Battles - Karnataka’ इस साल मार्च में लॉन्च हुई थी। सीएमआर के निधन पर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत कई लोगों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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IIMC की कोर्स को-ऑर्डिनेटर को 'ठगों' ने यूं लगाई चपत

वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप से करने गई थीं खरीददारी, अब कराई एफआईआर

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Fraud

प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में रेडियो और टीवी पत्रिका की पाठ्यक्रम संयोजक विष्णुप्रिया पांडे ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं। अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इस बारे में एफआईआर भी कराई है। इस एफआईआर में विष्णुप्रिया पांडे का आरोप है कि वह वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप में कपड़े खरीदने आईं थीं। यहां उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग की राय देकर सेल्समैन ने घर का पता, फोन नंबर आदि जानकारियां हासिल कर ली और पेमेंट भी ले लिया। पांच दिन बाद विष्णुप्रिया पांडे के घर जब कपड़े का पैकेट पहुंचा, तब वह अधूरा था। परेशान विष्णुप्रिया पांडे ने जब लिफाफे पर दिए गए कॉल सेंटर नंबर 1-800-419-6684 पर कॉल किया तो एक बार फिर से उनसे एक लिंक भेज कर सारी जानकारियां ली गयी और उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया कि उनका पैसा रिफंड किया जायेगा। इसी बीच कॉल सेंटर की लाइन डिस्कनेक्ट हो गयी और विष्णुप्रिया पांडे को 9330199375 से कॉल आया जिसमें पहले से बात कर रहे कॉल सेंटर एग्जिक्यूटिव ने मैसेज बॉक्स में भेजे गए उस लिंक को भरने का आग्रह किया।

9330238949 नंबर से आये उस लिंक को विष्णुप्रिया पांडे ने जैसे ही भरा, उसके चंद सेकेंड के भीतर उनके बैंक खाते से 49,000 रुपए दो-दो बार करके और एक-एक हजार रुपए दो बार निकाल लिए गए। यानी उन्हें चंद सेकेंड में ही पूरे एक लाख रुपए की चपत पड़ चुकी थी। पीड़िता को जब मालूम चला कि शॉपर्स स्टॉप के इस गिरोह ने उसे लाखों रुपए की साइबर लूट का निशाना बनाया है तो उसके होश उड़ गए। मामले की शिकायत साइबर अपराध थाने में कराई गई है और पुलिस अनुसंधान जारी है, पर जरूरत इस बात कि है कि हम एक ग्राहक के तौर पर सजग रहें और किसी भी परिस्थिति में बैंक सम्बंधी जानकारी किसी से भी साझा नहीं करें।

विष्णुप्रिया पांडे ने अपने साथ हुई ठगी को लेकर जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसे आप यहां देख सकते हैं। 

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श्रम मंत्री से मुलाकात में पत्रकारों ने उठाए कई मुद्दे, मिला ये आश्वासन

आईआईएमसी के पूर्व डीजी केजी सुरेश के नेतृत्व में श्रम मंत्री से मिला था प्रतिनिधिमंडल

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Journalist-Delegation

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश  के नेतृत्व में वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की। वर्तमान में मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने इस दौरान श्रम मंत्री से मांग की कि मीडिया की स्वतंत्रता और संरक्षण के लिए नए श्रम प्रावधानों में पत्रकारों के लिए नौकरी की सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी मुद्दे शामिल किए जाएं।

बातचीत के दौरान गंगवार ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि न्ए श्रम कानूनों में पत्रकारों के अधिकारों और हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 में दिए गए प्रावधानों की रक्षा करने के अलावा नए श्रम कानूनों में पत्रकारों के लिए अन्य कई बेनिफिट भी शामिल किए जाएंगे। यही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब पोर्ट्ल्स में काम कर रहे पत्रकारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।’

श्रम मंत्री से मिलने वालों में केजी सुरेश के साथ ही हेमंत बिश्नोई और सर्जना शर्मा (NUJ-I), अनूप चौधरी, संजय उपाध्याय और नरेंद्र भंडारी (Working Journalists of India), डॉ. प्रमोद कुमार और उमेश चतुर्वेदी (DJA) और भारतीय मजदूर संघ के नॉर्थ जोन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी पवन कुमार शामिल थे।

श्रम मंत्री के साथ बैठक में पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के साथ ही यह मामला भी उठाया गया कि सबसे आखिर में गठित हुए प्रेस आयोग के बाद मीडिया के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। ऐसे में मीडिया के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर फिर से ध्यान देने की आवश्यकता है। दूसरे प्रेस आयोग की रिपोर्ट प्राइवेट टीवी और रेडियो चैनल्स के आने से पहले उस समय आई थी, जब न तो इंटरनेट था, न ऑनलाइन मीडिया था और न ही सोशल मीडिया था। ऐसे में नए जमाने की मीडिया को देखते हुए सरकार से मीडिया आयोग गठित करने की मांग की गई। बताया जाता है कि श्रम मंत्री ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पत्रकारों के हितों से जुड़ी मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का आश्वासन दिया है।

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