बाइक पर लिखवाया ‘प्रेस’ पर क्यों काम न आया ये तरीका

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है

Last Modified:
Thursday, 18 April, 2019
ARREST

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है। शायद यही कारण है कि वो अपने वाहनों पर ‘प्रेस’ लिखवा लेते हैं, फिर चाहे मीडिया से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध न हो। ऐसे लोगों को लगता है कि वाहन पर ‘प्रेस’ लिखा होने के कारण पुलिस भी उन्हें नहीं रोकेगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में एक युवक की ये चालाकी काम न आई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, बिलासपुर में बेलगहना क्षेत्र के ग्राम मझगांव में यह युवक चोरी की बाइक पर ‘प्रेस’ लिखवाकर घूम रहा था, लेकिन ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने उसे धर दबोचा। 20 वर्षीय इस युवक के कब्जे से चोरी की दो बाइक बरामद हुई हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों बाइक जब्त कर आरोपित युवक को जेल भेज दिया है।

बताया जाता है कि बेलगहना चौकी प्रभारी व एएसआइ हेमंत सिंह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। इस दौरान उन्हें पता चला कि मझगांव निवासी जितेंद्र रोहिदास पिता त्रिभुवन रोहिदास चोरी का पुराना आरोपित है। इन दिनों वह एक बाइक पर घूम रहा है, जिसके सामने ‘प्रेस’ लिखा है। खबर मिलते ही हेमंत सिंह ने दबिश देकर जितेंद्र को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान उससे बाइक के दस्तावेज की मांग की गई, लेकिन वह गोलमोल जवाब देने लगा। फिर उसे चौकी ले जाकर सख्ती से पूछताछ की गई, तब उसने बताया कि उसके पास एक और बाइक हैं और दोनों को उसने कोरबा जिले के पाली व कोरबा शहर से चोरी किया था।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

भूमाफिया के खिलाफ खबरें छापना पत्रकार को पड़ गया भारी, हुआ ये हाल

पत्रकार ने भूमाफिया के खिलाफ पिछले दिनों कई खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रहीं थीं। पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2019
Sudhir Dixit

पत्रकारों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। इन मामलों में अब उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का नाम भी शामिल हो गया है, जहां पर पत्रकार सुधीर दीक्षित पर ट्रैक्टर चढ़ाकर उनकी हत्या का प्रयास किया गया। पुलिस ने इस मामले में ट्रैक्टर चालक के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है।

उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष व बरेली से प्रकाशित दैनिक युवा हस्ताक्षर के ब्यूरो चीफ सुधीर दीक्षित ने अपनी शिकायत में कहा है कि भूमाफिया के खिलाफ पिछले दिनों उन्होंने कई खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रहीं थीं।

रिपोर्ट में सुधीर ने बताया कि नौ अगस्त को वह मोटरसाइकिल से कलेक्ट्रेट जा रहे थे। दोपहर लगभग 12 बजे संजय रॉयल पार्क के सामने किसी ने उन्हें बातचीत करने के लिए रुकने का इशारा किया तो वह रुक गए। इसी बीच वहां खड़े एक ट्रैक्टर चालक ने उन्हें जान से मारने की नीयत से उन पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। ट्रैक्टर की टक्कर से सुधीर गिर पड़े। मौके पर भीड़ के जुटने के बाद ट्रैक्टर चालक व उनसे बात कर रहा व्यक्ति वहां से भाग गए।

इसके बाद लोगों ने सुधीर को पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। 12 अगस्त को हालत थोड़ी सही होने पर उन्हें फिर जिला अस्पताल पीलीभीत में भर्ती कराया गया है। सुधीर के कूल्हे की हड्डी टूटी हुई है और वह चलने फिरने से असमर्थ हैं।

वहीं, जानकारी मिलने पर शहर विधायक संजय सिंह गंगवार गुरुवार को सुधीर दीक्षित को देखने उनके आवास पर पहुंचे। विधायक ने उन्हीं के आवास पर कोतवाली प्रभारी एसके द्विवेदी को बुलवाया और अपने सामने तहरीर दिलवाकर तत्काल मुकदमा दर्ज करने को कहा। उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के मंडल अध्यक्ष निर्मल कान्त शुक्ल, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष प्रभात जायसवाल, बसपा के पूर्व प्रत्याशी व शहर के प्रमुख सर्जन डॉ. शैलेंद्र गंगवार, बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी रहे ठाकुर निरंजन सिंह, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा, सहायक रजिस्ट्रार विजय सिंह, डॉ. योगेंद्र नाथ मिश्र, दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रभारी देवेंद्र देवा आदि ने भी सुधीर का हाल जाना।

उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष सियाराम पांडेय ‘शांत’ व प्रांतीय महामंत्री रमेश शंकर पांडे ने टेलीफोन पर पत्रकार सुधीर दीक्षित का हालचाल जाना और उनकी लड़ाई हर स्तर पर लड़ने का आश्वासन दिया। लोगों ने इस मामले में कई सवाल उठाते हुए इसे हमले की साजिश बताया है। इस घटना का पत्रकार तुषार सक्सेना व प्रशांत शर्मा ने तो खुलकर विरोध करते हुए कहा कि यदि किसी ने यह साजिश की है तो वह यह जान ले कि जिस दिन इस बात का खुलासा हुआ, उस दिन साजिश में शामिल लोगों की खैर नहीं है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

स्वास्थ्य की दिशा में आईटीवी फाउंडेशन की सराहनीय पहल, CM ने बढ़ाया हौसला

आईटीवी फाउंडेशन और रेकिट बेंकिजर इंडिया ने इस हेल्थ मिशन में 15 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा भी की

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2019
Health Camp

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को महाराजगंज में जापानी इन्सेफेलाइटिस बीमारी के खिलाफ आईटीवी फाउंडेशन की ओर से आयोजित दो दिवसीय हेल्थ चेकअप शिविर (18-19 अगस्त) का उद्घाटन किया। रेकिट बेंकिजर इंडिया के समर्थन से इस कैंप को आयोजित कराया गया।

कैंप के उद्घाटन कार्यक्रम के बीच आईटीवी फाउंडेशन और रेकिट बेंकिजर इंडिया ने इस हेल्थ मिशन में 15 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा भी की। वहीं, मुख्यमंत्री ने शिविर में उपस्थित सभी इन्सेफेलाइटिस मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। साथ ही कैंप में सीएम योगी आदित्यनाथ और आईटीवी फाउंडेशन के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने जरूरतमंद लोगों को हेल्थ किट्स बांटीं।

महाराजगंज के छेहरी स्थित आईटीएम कॉलेज में आयोजित हेल्थ कैंप के उद्घाटन समारोह में सीएम के साथ जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय, iTV नेटवर्क के संस्थापक और प्रमोटर कार्तिकेय शर्मा,  KMC डिजिटल अस्पताल के प्रेजिडेंट विनय श्रीवास्तव,  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के  उपाध्यक्ष डॉ.आरपी त्रिपाठी और रेकिट बेंकिजर इंडिया के विदेश और भागीदारी निदेशक रवि भटनागर उपस्थित रहे।

हेल्थ कैंप के दौरान रेकिट बेंकिजर इंडिया ने डेटोल बनाएगा स्वस्थ इंडिया की फ्लैगशिप के तहत आशा वर्कर्स की सहयता से एक प्रोग्राम की शुरुआत की,जो उत्तर प्रदेश और बिहार के शहरों में डायरिया जैसी बीमारी से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाकर लोगों की आदतों में बदलाव लाने की कोशिश करेगा। इस प्रोग्राम में सबसे जरूरी काम है बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात करना। करीब ढाई लाख आशा वर्कर्स अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों को स्वच्छता और खुद के रखरखाव को लेकर जागरूक करेंगे।

हेल्थ कैंप के उद्घाटन के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने iTV फाउंडेशन की मुहिम की सराहना की। उन्होंने  कहा कि पिछले चालीस सालों में हजारों बच्चों की जापानी इन्सेफेलाइटिस की वजह से मौत हो चुकी है। पिछली सरकारें इसे रोकने में पूरी तरह विफल रहीं, लेकिन बीजेपी सरकार ने इस बीमारी को रोकने के लिए कई उपाय और एहतियाती कदम उठाने के लिए एक आंतरिक समिति बनाई है। इसके तहत इन्सेफेलाइटिस रोगियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी नर्सिंग स्टाफ, सहयोगी और आशा कार्यकर्ताओं को विशेष ट्रेनिंग दी है।

हेल्थ कैंप के उद्घाटन कार्यक्रम में आईटीवी नेटवर्क के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने कहा, “हमारा मिशन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों के बीच स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करना है।‘ उन्होंने कहा, ‘ जापानी इन्सेफेलाइटिस एक घातक रोग है और यह कैंप बीमारी को खत्म करने और एहतियाती उपाय करने के लिए महत्वपूर्ण है। देश के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए भविष्य में कई ऐसे फ्री मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे।’

कार्यक्रम में रेकिट बेंकिजर इंडिया  के विदेश और भागीदारी निदेशक रवि भटनागर ने कहा,‘ सामाजिक बदलाव में स्वास्थ्य का काफी ज्यादा महत्व होता है और खासकर किशोरों के विकास और सशक्तिकरण में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।’

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार के साथ हुआ भीषण हादसा, गई जान

दुर्घटना के दौरान अमरोहा से अपने घर अलीपुर लौट रहे थे टीवी पत्रकार जसमीत सिंह

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Jasmeet Singh

सड़क दुर्घटना में न्यूज1इंडिया के पत्रकार जसमीत सिंह की मौत की खबर सामने आई है। जसमीत सिंह 13 अगस्त की रात को उत्तर प्रदेश में अमरोहा से अपने घर अलीपुर लौट रहे थे। उसी दौरान किसान पेट्रोल पंप के पास वे एक वाहन की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।

बताया जाता है कि जसमीत अपने घर में सबसे बड़े थे और उनके ऊपर ही पूरे घर की जिम्मेदारी थी। जसमीत के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। जसमीत की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जसमीत के मौत के बाद उनके साथियों व परिचितों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

शोधकर्ताओं-छात्रों के साथ आम पाठकों के लिए भी लाभप्रद होगा वाणी प्रकाशन का ये कोश

हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि विषयों को समाहित किये हुए सात खण्डों के कोश की प्रति राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेंट की गई

Last Modified:
Saturday, 17 August, 2019
Ram Nath

भारतीय भाषा परिषद और वाणी प्रकाशन के तत्वाधान में निर्मित 'हिंदी साहित्य ज्ञान कोश' 16 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति निवास में भेंट किया गया। इस अवसर पर वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी, निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल और  प्रधान संपादक शंभूनाथ के साथ कुसुम खेमानी ( अध्यक्ष भारतीय भाषा परिषद), विमला पोद्दार (मंत्री, भा.भा.प.) विवेक गुप्त (सन्मार्ग अखबार के मुख्य संपादक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद) उपस्थित थे।

इसके उपरांत इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें इस परियोजना के मुख्य संपादक  शंभूनाथ एवं वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने पत्रकारों से कोश में लगे विशद शोध एवं इसकी निर्माण प्रक्रिया पर बातचीत की।

उन्होंने बताया कि वाणी प्रकाशन और भारतीय भाषा परिषद् के तत्वावधान में निर्मित सात खण्डों का ‘हिंदी साहित्य ज्ञान कोश’ अब हिंदी के पाठकों के लिए उपलब्ध है। हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि सभी विषयों को समाहित किये हुए यह सात खण्डों का महती ज्ञान कोश हिंदी साहित्य में पहला ऐसा प्रयास है जो शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों के अतिरिक्त आम पाठकों के लिए भी उतना ही लाभप्रद है।

शंभूनाथ ने बताया, ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पूरे हिंदी संसार का एक सपना था। 1958 से 1965 के बीच धीरेन्द्र वर्मा द्वारा बना ‘हिंदी साहित्य कोश’ करीब पचास साल पुराना हो चुका था। इसके अलावा, आज साहित्य का अर्थ विस्तार हुआ है। साहित्य का ज्ञान अब एक व्यापक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य और दुनिया के बहुत से विचारों, सिद्धान्तों और अवधारणाओं को जाने बिना संभव नहीं है। साहित्य आज भी ज्ञान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानवीय रूप है। यह आम नागरिकों के लिए पानी और मोबाइल की तरह जरूरी है।’

वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने बताया कि हिंदी साहित्य ज्ञानकोश में 2660 प्रविष्टियां हैं। यह 7 खण्डों में 4560 पृष्ठों का है। इसमें हिंदी साहित्य से सम्बन्धित इतिहास, साहित्य सिद्धान्त आदि के अलावा समाज विज्ञान, धर्म, भारतीय संस्कृति, मानवाधिकार, पौराणिक चरित्र, पर्यावरण, पश्चिमी सिद्धान्तकार, अनुवाद सिद्धान्त, नवजागरण, वैश्वीकरण, उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श आदि कुल 32 विषय हैं। हिंदी की प्रकृति और भूमिका अन्य भारतीय भाषाओं से विशिष्ट है। इसलिए ज्ञानकोश में हिंदी राज्यों के अलावा दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और अन्य भारतीय क्षेत्रों की भाषाओं-संस्कृतियों से भी परिचय कराने की कोशिश है। इसमें हिंदी क्षेत्र की 48 लोक भाषाओं और कला-संस्कृति पर सामग्री है। देश भर के लगभग 275 लेखकों ने मेहनत से प्रविष्टियाँ लिखीं और उनके ऐतिहासिक सहयोग से ज्ञानकोश बना।

संपादक शंभुनाथ ने बताया, इस ज्ञानकोश के निर्माण में राधावल्लभ त्रिपाठी, जवरीमल्ल पारख, अवधेश प्रसाद सिंह और राजकिशोर जैसे ख्याति प्राप्त विद्वानों ने बहुत श्रम किया है। हमने कोलकाता में कार्यशालाएं कीं। इंटरनेट की सुविधाएं लीं और नयी पद्धतियों को अपनाया। हमारा लक्ष्य था कि एक बृहद, तथ्यपूर्ण, समावेशी और सारवान ज्ञानकोश बने। यह ज्ञान का एक विकासशील कोश है और एक राष्ट्रीय शुरुआत है। हमारा विश्वास है कि हिंदी की आने वाली पीढ़ियों द्वारा इसकी नींव पर ज्ञान की बहुमंजिला इमारत बनती रहेगी।’

हिंदी का पहला ‘हिंदी विश्वकोश’ नगेन्द्रनाथ बसु के सम्पादन में 1916 से 1931 के बीच तैयार किया था। यह उनके बांग्ला विश्वकोश की ही हिंदी छाया था। इसके पश्चात ‘हिंदी साहित्य कोश’ 1956 में आया था। नागरी प्रचारिणी सभा ने 1960 से 70 के बीच हिंदी विश्वकोश प्रकाशित किया था। अब इसके बाद भारतीय भाषा परिषद के ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ को हम एक बड़े हस्तक्षेप के रूप में देख सकते हैं। इसको ग्रन्थ रूप देने और वितरण व्यवस्था में वाणी प्रकाशन की ऐतिहासिक भूमिका है। कोलकाता के सन्मार्ग ने इसे मुद्रित किया है।

अरुण माहेश्वरी ने बताया कि यहां जुड़ा साहित्य शब्द अपने विशद अर्थ में है। इसके अंतर्गत दर्शन, राजनीति, इतिहास आदि सब समाहित है। यह विश्व कोश से कहीं आगे की बात है और साहित्य शब्द के जुड़ने से व्यापक विस्तार ले लेता है। प्रेस वार्ता में पत्रकारों की तरफ़ से आए इन सुझावों का उन्होंने स्वागत किया कि हर साल इसमें नए संशोधन जोड़ें जाएं और उनसे पाठकों को परिचित कराया जाये। साथ ही इसके डिजिटल संस्करण को भी शीघ्र लाने की बात कही गई।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानें, सूर्या समाचार ने क्यों ब्यूरो हेड को किया टर्मिनेट

सच्चाई का पता चलने के बाद सूर्या समाचार के मालिकों ने लिया निर्णय, प्रबंधन शुरू करने जा रहा है कानूनी कार्यवाही

Last Modified:
Tuesday, 13 August, 2019
Surya Samachar

हिंदी न्यूज चैनल ‘सूर्या समाचार’ (Surya Samachar) से बड़ी खबर है। खबर ये है कि चैनल ने जयपुर में अपने ब्यूरो हेड संजय वर्मा को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया है। संजय पर कैमरा जमा नहीं करने के कारण जयपुर के ज्योति नगर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

गौरतलब है कि धौलपुर के संजय वर्मा को पूर्व में इनपुट हेड सुधीर सुधाकर ने जयपुर में ब्यूरो हेड के पद पर नियुक्त कराया था। बताया जाता है कि जयपुर में संजय पर उसकी मकान मालकिन ने भी एक केस कर रखा है। धौलपुर में भी संजय पर कई मुकदमे दर्ज हैं। सूर्या समाचार के मालिकों को इस सच्चाई का पता लगने पर उन्होंने उसे चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

आरोप है कि संजय ने जयपुर ऑफिस के कमरे की चाबी और दो कैमरे अपने कब्जे में ले रखे थे। दिल्ली से गयी टीम ने इस बारे में जयपुर के ज्योति नगर थाने में एफआईआर करवाई, इसके बाद एक कैमरा और चाबी वापस की गई। आरोप है कि एक यूनिट अभी भी संजय के कब्जे में है, इसको लेकर सूर्या समाचार प्रबंधन जल्द कानूनी कार्यवाही करने जा रहा है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस मंच पर दिखे प्रतिभाओं के विविध रूप, हुआ सम्मान

काव्य पाठ से कलाकारों ने मन मोहा, डॉ. आरपी चतुर्वेदी की किताब ‘तेरे लिए’ का भी विमोचन किया गया

Last Modified:
Monday, 12 August, 2019
Programme

देश की स्वतंत्रता के 73 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में ताज लिटरेचर क्लब और जलवा ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आगरा की विजयनगर कॉलोनी स्थित आगरा पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम में 11 अगस्त की अपराह्न 4 बजे से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके तहत विचार गोष्ठी  और अचीवर अवार्ड समारोह’ का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विनोद भारद्वाज, विशिष्ट अतिथि  ताज लिटरेचर क्लब के चेयरमैन राजकुमार शर्मा, विशिष्ट अतिथि पवन आगरी, डॉ. ह्रदेश चौधरी, प्रदीप खंडेलवाल, दिवाकर तिवारी, अमित त्रिवेदी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके और राष्ट्रगान के द्वारा किया। सरस्वती वंदना अंशु प्रधान ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन ताज लिटरेचर क्लब की संस्थापिका भावना वरदान शर्मा ने किया। विचार गोष्ठी का विषय था, ‘सोशल मीडिया का आज के राजनीतिक परिदृश्य में योगदान।‘ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करने वालों को अचीवर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इसके तहत साहित्य के क्षेत्र में पम्मी सदाना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में  रेणुका डंग और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता के लिए महेश शर्मा को सम्मानित किया गया।  

कार्यक्रम की दूसरी श्रंखला में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा काव्य संध्या का आयोजन किया गया। डॉ. आरपी चतुर्वेदी. नरेश चंद्रा, तृषा अग्रवाल, श्रेय वर्मा, अनुराधा शर्मा आदि ने देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में डॉ. आरपी चतुर्वेदी की किताब ‘तेरे लिए’ का भी विमोचन किया गया। उनकी किताब कृष्ण भक्ति पर आधारित ब्रजभाषा के छंदों का काव्य संकलन है। कार्यक्रम में पम्मी सदाना ने कहा, ‘आज का मीडिया बहुत प्रबल है। ये केवल टेलिविजन या प्रिंट मीडिया तक सीमित नहीं है, वरन मोबाइल के रूप में प्रत्येक के हाथ में उपलब्ध है। बात क्षण भर में देश-विदेश तक पहुंच जाती है। 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैं यही संदेश देना चाहती हूं कि तुम रक्त बहा लो, या फिर धमका लो, ये पग अब नहीं थमेंगे, ये पग अब नहीं रुकेंगे!’

विनोद भारद्वाज ने कहा, ‘सोशल मीडिया ने सबको अपनी बात कहने का मौका दिया है और परंपरागत मीडिया का एकाधिकार खत्म कर दिया है। परंपरागत और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए समय है कि वह सचेत हो जाएं और सही दिशा में चलें, अब उनकी मनमानी नहीं चलेगी। कोई भी खबर छिपाई नहीं जा सकेगी और न ही एक तरफा बात कही जा सकती है। मीडिया का कर्तव्य है कि वह किसी पार्टी की आवाज न बने और पत्रकारिता के सिद्धांतों को प्रतिपादित करे। लोग टि्वटर, फेसबुक, वॉट्सऐप का सावधानी से प्रयोग करें और विश्वसनीय सूत्र से जानकारी मिलने के बाद ही शेयर करें, क्योंकि इससे लोगों की राजनीतिक विचारधारा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। गलत खबरों से खबरों की विश्वसनीयता कम होगी और खबरों के माध्यमों की संदिग्धता बनी रहेगी।’

 कार्यक्रम की संचालिका भावना वरदान शर्मा ने कहा, ‘सोशल मीडिया के जमाने में लेखकों और साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपना रोल अच्छी तरह से निभाएं और साहित्यकार समाज में चेतना पैदा करने वाले लेख लिखें। वहीं, रेणुका डंग ने कहा, ‘हर चीज का अच्छा और बुरा पहलू होता है। दोनों को स्वीकारें और अपने विवेक का इस्तेमाल करें। सोशल मीडिया द्वारा नकारात्मकता फैलाने वाली खबरों को फैलने से रोकने की दिशा में काम करने की जरूरत है। इसके अलावा महेश शर्मा का कहना था,‘ सोशल मीडिया का प्रयोग विवेक के साथ करें। गलत खबरों को फैलाने से रोकें और वॉट्सऐप जैसे माध्यमों को विचारों के आदान-प्रदान के लिए रखें, न कि फेक न्यूज के लिए।’ प्रदीप खंडेलवाल ने कहा कि समाज में जागरूकता लाने के लिए सोशल मीडिया एक अच्छा माध्यम है।

कार्यक्रम में दिवाकर तिवारी का कहना था, ‘सोशल मीडिया ने लोगों को अपनी बात कहने का माध्यम दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से न केवल विरोध दर्ज कराया जा सकता है, बल्कि सच को भी सामने लाया जा सकता है।’ अमित त्रिवेदी ने कहा, ‘सोशल मीडिया पर अच्छे और बुरे हर तरह के अनुभव होते हैं। आज के समय में इसकी एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।’ धन्यवाद जलवा ग्रुप के डायरेक्टर सचिन शुभ शर्मा ने दिया। कार्यक्रम में श्याम दीक्षित, सुरेश, अजय कौशल, गोपालशरण गोस्वामी, वीना शर्मा, सुनीता सारस्वत, आदर्श नंदन गुप्त आदि की उपस्थिति रही।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार योगेश गोयल की प्रतिभा का हुआ सम्मान, मिला ये अवॉर्ड

सकारात्मक पत्रकारिता के लिए दिल्ली में किया गया सम्मानित, कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से तमाम पत्रकार तथा समाजसेवी शामिल हुए

Last Modified:
Monday, 12 August, 2019
Yogesh Goyal

‘राम जानकी संस्थान’ (आरजेएस) द्वारा दिल्ली स्थित ‘मौलाना आजाद दंत विज्ञान संस्थान’ के सभागार में स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘जय हिन्द जय भारत’ नाम से हुए कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से तमाम पत्रकार तथा समाजसेवी शामिल हुए।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल को ‘स्टार फैमिली अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान सकारात्मक पत्रकारिता के लिए उनकी पत्नी श्वेता गोयल के साथ शहीद चंद्रशेखर आजाद के पौत्र अमित आजाद, आकाशवाणी दिल्ली के ब्रॉडकास्टर व संस्था के राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना, संस्था के ऑब्जर्वर तथा दिल्ली सरकार के ओएसडी दीप माथुर तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। संस्था द्वारा यह सम्मान प्रतिवर्ष सकारात्मक पत्रकारिता के जरिये नए भारत के निर्माण के लिए प्रयासरत पत्रकार को प्रदान किया जाता है।

बता दें कि योगेश कुमार गोयल करीब तीस वर्षों से पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उनके बारह हजार से भी अधिक लेख देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों, वाइल्ड लाइफ तथा समसामयिक विषयों पर उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा उन्हें अब तक अनेक सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं। वह डेढ़ दशक से भी अधिक समय तक तीन फीचर एजेंसियों में संपादन भी कर चुके हैं और इन दिनों बतौर पत्रकार एवं स्तंभकार देश भर के कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित लेखन कर रहे हैं।

आरजेएस द्वारा स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मंच संचालन आकाशवाणी व दूरदर्शन की एंकर तपस्या और आकाशवाणी दिल्ली के ब्रॉडकास्टर अशोक शर्मा ने किया। विख्यात गायक रीतेश मिश्रा, मोहित खन्ना तथा सोनिया शर्मा के देशभक्ति गीतों के अलावा स्कूली छात्रों की शानदार प्रस्तुति और आकाशवाणी के ब्रॉडकास्टर पार्थ सारथी थपलियाल द्वारा बच्चों के लिए आयोजित की गई क्विज प्रतियोगिता ने कार्यक्रम की भव्यता में चार चांद लगा दिए। इस अवसर पर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा. विक्रांत मोहंती ने तम्बाकू के दुष्प्रभावों के बारे में बताया और लोगों को तम्बाकू का सेवन न करने के लिए प्रेरित किया।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकारों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है ये 'सरकारी कदम'

धर्मशाला से न्यूजपेपर इम्लानइज यूनियन ऑफ इंडिया के अद्यक्ष रविंद्र अग्रवाल ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और श्रम मंत्री को लिखा पत्र

Last Modified:
Friday, 09 August, 2019
Press

पत्रकारों का आरोप है कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर वर्किंग जर्नलिस्‍ट एक्‍ट को समाप्‍त करने जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यदि ये एक्‍ट ही खत्‍म हो जाएगा तो अखबार मालिक और अधिक निरंकुश हो जाएंगे। इसका नतीजा व्‍यापक पैमाने पर शोषण और जब चाहे नौकरी से निकालने के रूप में देखने को मिलेगा। धर्मशाला से न्‍यूजपेपर इम्‍प्‍लाइज यूनियन ऑफ इंडिया के अद्यक्ष रविंद्र अग्रवाल ने इस संबंध में राष्‍ट्रपति, पीएम और श्रम मंत्री को एक विरोध पत्र लिखा है।

इस पत्र को आप यहां पढ़ सकते हैं-

प्रतिष्‍ठा में,

महामहिम राष्‍ट्रपति महोदय, भारत गणराज्‍य,  नई दिल्‍ली।

विषय: श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचारपत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1955 तथा श्रमजीवी पत्रकार (मजदूरी की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 को निरस्‍त करने का विरोध और चिंताएं। 

मान्‍यवर,

केंद्र सरकार ने 23 जुलाई को लोकसभा में व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति को विनियमित करने वाले कानूनों में संशोधन करने के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता विधेयक, 2019 प्रस्‍तुत किया है। इसमें श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचारपत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1955 तथा श्रमजीवी पत्रकार (मजदूरी की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 को निरस्‍त किए जाने वाले 13 श्रम कानूनों में शामिल किया गया है, जो लोकतंत्र के चौथे स्‍तंभ के साथ कुठाराघात है।

देश के श्रमजीवी पत्रकारों और समाचारपत्र स्‍थापनाओं में कार्य करने वाले अन्‍य कर्मचारियों के वेतन और सेवाशर्तौं से जुड़े उपरोक्‍त दोनों अधिनियमों के विशेष प्रावधानों के कारण श्रमजीवी पत्रकारों और अन्‍य समाचारपत्र कर्मचारियों को वेजबोर्ड का संरक्षण प्राप्‍त है।

महोदय, उपरोक्‍त दोनों अधिनियम तत्‍कालीन केंद्र सरकार ने प्रेस कमीशन की सिफारिशों और विभिन्‍न जांच समीतियों की रिपोर्टों को ध्‍यान में रखते हुए बनाए थे। वर्ष 1955 में श्रमजीवी पत्रकारों के लिए बनाए गए श्रमजीवी पत्रकार अधिनयम को और मजबूत करते हुए वर्ष 1974 को किए गए संशोधन के तहत इसमें समाचार पत्रों में कार्यरत अन्‍य कर्मचारियों को भी शामिल किया गया था।

ये दोनों अधिनियम श्रमजीवी पत्रकारों और अन्‍य अखबार कर्मचारियों को बाकी श्रमिकों से अलग विशेष संरक्षण देते हैं और सही मायने में लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ होने में भूमिका निभा पाने का माहौल मुहैया करवाने में मदद करते हैं। इन अधिनियमों की खास बात यह है कि इनके तहत वेतनमान निर्धारण के लिए वेजबोर्ड का प्रावधान होने के चलते श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य अखबार कर्मचारी लोकतंत्र के बाकी तीन स्‍तंभों के समान ही एक सम्‍मानजनक वेतनमान पाने के हकदार बनते हैं।

हालांकि सच्चाई यह भी है कि वर्ष 1956 में गठित प्रथम वेजबोर्ड (दिवतिया वेजबोर्ड) से लेकर पिछली बार वर्ष 2007 को गठित वेजबोर्ड (मजीठिया वेजबोर्ड) को अखबार मालिकों ने कभी भी अपनी मर्जी से लागू नहीं किया और हर बार इन वेजबोर्डों सहित उपरोक्‍त अधिनियमों के प्रावधानों की वैधानिकता को माननीय सुप्रीम कोर्ट में चनौती दी गई। अखबार मालिकों के कुटिल प्रयासों के बावजूद श्रमजीवी पत्रकार और अखबार कर्मचारी अपनी यूनियनों और विभिन्‍न संगठनों के दम पर कानूनी लड़ाई जीतते रहे।

यहां खास बात यह है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठों ने वेजबोर्ड और उपरोक्‍त अधिनियमों को संविधान संवत मानते हुए वेजबोर्ड को उचित ठहराया है। अब तक किए गए दर्जनों मुकद्दमों में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्ववर्ती निर्णयों को विशेष टिप्‍पणियों के साथ कायम रखा है। ऐसे में इन विशेष अधिनियमों को निरस्‍त करने का निर्णय समझ से परे है। इस संबंध में कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य इस प्रकार से हैं:-

देश के स्‍वतंत्र होते ही शुरू हुआ था चिंतन

महोदय, देश के आजाद होते ही लोकतंत्र के इस चौथे स्‍तंभ की निष्‍पक्षता और स्‍वतंत्रता को लेकर चिंतन शुरू हो गया था। पहले जहां अखबारों का प्रकाशन और संचालन व्‍यक्‍तिगत तौर पर समाज चिंतक, देश की स्‍वतंत्रता के आंदोलन में शामिल सेनानी और प्रबुध पत्रकार करते थे। आजादी के बाद जैसे ही पूंजीपतियों या औद्योगपतियों ने अखबारों को व्‍यवसाय के तौर पर संचालित करना शुरू किया तभी से पत्रकारों के वेतनमान, काम के घंटों और बाकी श्रमिकों से अलग विशेषाधिकार देने की मांग उठना शुरू हो गई।

इसे देखते हुए पहली बार वर्ष 1947 में गठित एक जांच समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, फिर 27 मार्च 1948 को ब्रिटिश इंडिया के केंद्रीय प्रांत और बेरार ( Central Provinces and Berar) ने समाचारपत्र उद्योग के कामकाज की जांच के लिए गठित जांच समिति ने सुझाव दिए और 14 जुलाई 1954 को भारत सरकार द्वारा गठित प्रेस कमीशन ने अपनी विस्‍तृत रिपोर्ट दी थी। इसके अलावा एक अप्रैल 1948 को जिनेवा प्रेस एसोसिएशन और जिनेवा यूनियन आफ न्‍यूजपेपर पब्‍लिशर्ज ने 01 अप्रैल 1948 को एक संयुक्‍त समझौता किया था।

इस तरह एक व्‍यापक जांच और रिपोर्टों के आधार पर तत्‍कालीन भारत सरकार ने श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचारपत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1955 तथा श्रमजीवी पत्रकार (मजदूरी की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 को लागू किया था। इतना ही नहीं भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 43 ( राज्‍य की नीति के निदेशक तत्‍व) के तहत भी उपरोक्‍त दोनों अधिनयम संवैधानिक वैधता रखते हैं।

अधिनियमों को और अधिक मजबूत करने की जरूरत

महोदय, मौजूदा परिस्‍थितियों में जबकि प्रिंट मीडिया को चुनौती देने के लिए इलेक्‍ट्रानिक मीडिया और वेब मीडिया दस्‍तक दे चुका है तो ऐसे में उपरोक्‍त अधिनयमों को और सशक्‍त बनाने की जरूरत है। श्रमजीवी पत्रकार और गैर-पत्रकार अखबार कर्मचारियों के संगठन लंबे अर्से से इन अधिनियमों में इलेक्‍ट्रानिक मीडिया और वेब मीडिया में काम करने वाले श्रमजीवी पत्रकारों और गैरपत्रकार कर्मचारियों को भी शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं। वहीं इन अधिनियमों के उल्‍लंघन पर सख्‍त प्रावधान करने की भी जरूरत है।

महज सौ या दो सौ रुपए जुर्माना करने के प्रावधन के बजाय भारी जुर्माना राशि, करावास की सजा और पीड़ित कामगार को हर्जाने की व्‍यवस्‍था करना जरूरी माना जा रहा था। वहीं श्रमजीवी पत्रकारों की ठेके पर नियुक्‍तियों पर रोकना भी जरूरी समझा जा रहा था। ऐसे में अधिनियमों को सशक्‍त बनाने के बजाय समाप्‍त करने का निर्णय केंद्र सरकार के खिलाफ रोष और चिंता उत्‍पन्‍न कर रहा है।

आम मजदूर से अलग है अखबार कर्मचारी

महोदय, अखबारों में कार्यरत श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य कमर्चारी आम मजदूरों से अलग परिस्‍थितियों में कम करते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 07 फरवरी, 2014 को अखबार मालिकों की याचिकाओं पर सुनाए गए अपने फैसले में भी इस बात का स्‍पष्‍ट उल्‍लेख किया है कि अखबार कर्मचारियों को आम श्रमिकों से अलग परिस्‍थितियों, खास विशेषज्ञता और उच्‍च दर्जें के प्रशिक्षण के साथ काम करना पड़ता है। ऐसे में उन्‍हें वेजबोर्ड की सुरक्षा के साथ ही इस बात का भी ख्‍याल रखना जरूरी है कि समाज की दिशा और दशा तय करने वाले पत्रकारिता के व्‍यवसाय से जुड़े श्रमजीवी पत्रकारों और अन्‍य अखबार कर्मचारियों की जीवन शैली कम वेतनमान के कारण प्रभावित ना होने पाए।

मजीठिया वेजबोर्ड के हजारों मामले श्रम न्‍यायालयों में विचाराधीन

महोदय, केंद्र सरकार द्वारा 11 नंवबर, 2011 को अधिसूचित मजीठिया वेजबोर्ड को लागू करवाने के लिए देशभर के हजारों श्रमजीवी पत्रकार और गैरपत्रकार अखबार कर्मचारी संघर्षरत हैं। इस वेजबोर्ड और उपरोक्‍त अधिनियमों को भी अखबार मालिकों ने (एबीपी प्राइवेट लिमिटेड व अन्‍य बनाम भारत सरकार व अन्‍य मामले में) संगठित तरीके से चुनौती दी थी, मगर वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 07 फरवरी, 2014 को सुनाए गए अपने फैसले में मजीठिया वेजबोर्ड को लागू करने और 01 अप्रैल, 2014 से एक साल के भीतर चार किश्‍तों में देय एरियर का भुगतान करने के आदेश दिए थे। अखबार मालिकों ने ऐसा करने के बजाय सभी कर्मचारियों से वेतनमान ना लेने के बारे में जबरन हस्‍ताक्षर करवाना शुरू कर दिए और जिन कर्मचारियों ने हस्‍ताक्षर करने से इनकार किया उन्‍हें नौकरी से हटा दिया गया। हजारों की नौकरी चली गई और उन्‍होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट में (अभिषेक गुप्‍ता व अन्‍य बनाम संजय गुप्‍ता मामले में) अवमानना याचिकाएं दाखिल कीं।

इस मामले में कोर्ट ने 19 जून 2017 को फैसला सुनाते हुए अखबार मालिकों को अवमानना से तो बरी कर दिया, मगर कुछ दिशानिर्देश जारी करते हुए श्रम न्‍यायालयों को बकाया वेतन की रिकवरी के मामलों पर छह माह में निर्णय लेने को कहा है। हजारों मामले अभी भी श्रम न्‍यायालयों में लंबित चल रहे हैं। वहीं राज्‍य सरकारें अभी तक मजीठिया वेजबोर्ड को लागू करवाने के मामले में नकारा साबित हुई हैं। केंद्रीय श्रम विभाग महज बैठकें करने और दिशानिर्देंश देने तक सीमित है।

फिलहाल बेरोजगार हो चुके हजारों अखबार कर्मचारी निरस्‍त किए जा रहे उपरोक्‍त अधिनियमों के सहारे ही अपनी अपनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं। वर्ष 1955 में बने इस अधिनियम का इतने व्‍यापक स्‍तर पर पहली बार न्‍याय निर्णय के लिए उपयोग हो रहा है तो ऐसे में इसे निरस्‍त करने का प्रयास श्रमजीवी पत्रकारों और अन्‍य अखबार कर्मचारियों के अधिकारों पर जबरदस्‍त कुठाराघात होगा।

ऐसे तो ध्‍वस्‍त हो जाएगा चौथ स्‍तंभ

महोदय, उपरोक्‍त दोनों अधिनियमों को निरस्‍त करके श्रमिकों के लिए बनाए गए नए अधिनियम के ड्राफ्ट में सिर्फ तीन धाराएं शामिल करने से श्रमजीवी पत्रकारों और अन्‍य अखबार कर्मचारियों की हालत और दयनीय हो जाएगी। न्‍यूजपेपर इंडस्‍ट्री अब मिशन पत्रकारिता को रौंद कर टारगेट आधारित इंडस्‍ट्री में तब्‍दील हो चुकी है। समाचारपत्रों में मालिकों और पत्रकारों के बीच की मजबूत दीवार कही जाने वाले संपादकों की संस्‍था पहले ही ध्‍वस्‍त हो चुकी है। अखबार कर्मचारियों विशेषकर श्रमजीवी पत्रकारों की पैरवी करने वाला कोई नहीं रहा है। संपादक अब कांटेंट से हटकर कांट्रेक्‍ट के काम में व्‍यस्‍त हैं और मालिकों के मैनेजर का काम करने लगे हैं।

अखबार कार्यालयों में लाभ-हानि के आंकड़े जुटाने वाले मैनेजरों का कब्‍जा होता जा रहा है। अधिकतर अखबार मालिक अब सीधे खबरों को विज्ञापन के साथ तौल कर प्‍लानिंग करने लगे हैं। हाल ही के चुनावों में बड़े-बड़े अखबारों के मालिकों को राजनीतिक दलों से पेड न्‍यूज प्‍लान करते कैमरे पर पकड़े जाने की खबरें अगर केंद्र सरकार के नीति निर्धारकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं तो भारत की पत्रकारिता गंभीर संकट में है। वहीं प्रेस की स्‍वतंत्रता को और भी ज्‍यादा खतरा है, क्‍योंकि प्रेस की आजादी अखबार मालिकों के मुनाफा कमाने की आजादी से कहीं उस पत्रकार की आजादी से है, जो उचित वेतनमान और कानूनी तौर पर संरक्षित माहौल मिलने पर ही स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष होकर सही जानकारी आम जनता तक परोस सकता है। ऐसे में लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ ध्‍वस्‍त होने से तभी बचेगा, जब उपरोक्‍त कानूनों को निरस्‍त करने के बजाय इन्‍हें और मजबूती प्रदान की जाएगी।

अखबार मालिकों की चाल में ना आए सरकार

महोदय, उपरोक्‍त निर्णय से अखबार कर्मचारियों में आशंका है कि अखबार मालिक संगठित होकर सरकार को गुमराह कर रहे हैं और कहीं ना कहीं उपरोक्‍त अधिनियमों को निरस्‍त करवाने में इनकी चाल हो सकती है। निवेदन है कि इस मामले में अपने स्‍तर पर जांच करवा कर इस तरह की कोशिश पर विराम लगाया जाए और पत्रकार और गैरपत्रकार अखबार कर्मचारियों के संगठनों की मांगों के अनुरूप इन अधिनियमों में उपयुक्‍त संशोधन करके इन्‍हें और सशक्‍त बनाया जाए।

आदर सहित

भवदीय

रविंद्र अग्रवाल अध्‍यक्ष, (न्‍यूजपेपर इम्‍प्‍लाइज यूनियन ऑफ इंडिया)

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने ‘आराधना’ की इस पहल को जमकर सराहा

संस्था के अध्यक्ष पवन आगरी और महासचिव डॉ. ह्रदेश चौधरी ने विमला बाथम से अपनी संस्था के नवीन पत्रक का विमोचन भी कराया

Last Modified:
Thursday, 08 August, 2019
Aaradhana Sanstha

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम का कहना है कि आयोग बेटियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सजग है। ‘आराधना’ संस्था के पदाधिकारियों से एक मुलाकात के दौरान विमला बाथम ने कहा, ‘जो भी संस्थाएं बिना किसी भेदभाव के बेटियों को न्याय दिलाने और उनकी शिक्षा के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं, उनके अभियान को मेरा नैतिक समर्थन है।’

इस दौरान आराधना संस्था के अध्यक्ष पवन आगरी और महासचिव डॉ. ह्रदेश चौधरी ने विमला बाथम का स्वागत किया और अपनी संस्था के नवीन पत्रक का विमोचन भी कराया। डॉ. ह्रदेश चौधरी ने उन्हें बताया कि किस तरह से संस्था बिना किसी सरकारी अनुदान के घुमन्तु पाठशाला का संचालन कर रही है। समाज के सर्वाधिक उपेक्षित वर्ग के लिए इस शैक्षिक अभियान की प्रशंसा करते हुए विमला बाथम ने संस्था को अपनी शुभकामनाएं भी दीं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

चालान कटने का डर दिखा मीडियाकर्मी के साथ कर दी बड़ी वारदात

पहले भी अन्य लोगों को चपत लगा चुके हैं आरोपित, मामले की जांच में जुटी पुलिस

Last Modified:
Wednesday, 07 August, 2019
Arrest

चालान कटने का डर दिखाकर कुछ शातिरों ने मीडियाकर्मी की जेब में रखे 50 हजार रुपए उड़ा लिए। मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर है। राहत की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल ऑटो व 45 हजार रुपए भी बरामद हुए हैं।

बताया जाता है कि नरसिंहपुर निवासी मीडियाकर्मी राजेन्द्र नायक किसी कार्य से संजय जैन के साथ एक अगस्त को जबलपुर आए थे। मदनमहल स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर वे ऑटो में बैठे। ऑटो में उनके साथ दो अन्य युवक भी बैठे थे। प्रेम मंदिर तिराहे पर ऑटो पहुंचने के बाद चालक ने कहा कि आगे पुलिस की डायल 100 गाड़ी खड़ी है और उसके ऑटो का चालान हो जाएगा। इसके बाद वह सभी को उतारकर तेज गति से वहां से ऑटो लेकर निकल गया। इस बीच संजय जैन ने जब अपनी जेब देखी तो उसमें से 50 हजार रुपए गायब थे।

इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मदनमहल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन के बाहर ऑटो को पकड़ लिया। पूछताछ में चालक मोहम्मद तोहीद ने बताया कि उसने अपने साथी इरफान और इमरान के साथ मिलकर 50 हजार रुपए चुराए थे। तोहीद ने यह भी स्वीकार किया कि मदनमहल में ही उन्होंने एक यात्री से 1500 रुपए तथा माढ़ोताल में 40 हजार रुपए चुराए थे। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 45 हजार रुपए बरामद कर लिए हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए