महिला दिवस पर वरिष्ठ पत्रकार निधि कुलपति ने कुछ यूं साझा की ‘मन की बात’

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘एनडीटीवीइंडिया’ (NDTV India) की एग्जिक्यूटिव एडिटर निधि कुलपति ने मीडिया इंडस्ट्री में अब तक के सफर के दौरान आए तमाम उतार-चढ़ावों को लेकर बात की।

Last Modified:
Sunday, 08 March, 2020
Nidhi Kulpati

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी न्यूज चैनल ‘एनडीटीवीइंडिया’ (NDTV India) की एग्जिक्यूटिव एडिटर निधि कुलपति ने मीडिया इंडस्ट्री में अब तक के सफर के दौरान आए तमाम उतार-चढ़ावों को लेकर अपने अनुभव और मीडिया इंडस्ट्री में आने वाले नवोदित छात्र-छात्राओं  को लेकर अपने विचार साझा किए।

समाचार4मीडिया के साथ एक बातचीत के दौरान निधि कुलपति ने बताया, ‘हर तरह की चुनौतियां आती हैं जिंदगी में उनको पार करना पड़ता है। मैंने भी पार किया, जिसकी वजह से आज यहां तक पहुंची हूं। मैंने उस दौर में काम शुरू किया, जब मीडिया उभार पर था या यूं कहूं कि इसकी शुरुआत ही हुई थी। तब मैं ‘जीटीवी’ में थी। इसके बाद मुझे ‘स्काई टीवी’ में काम करने का मौका मिला, जिसने पहली बार न्यूज शुरू की थी। मैं इस चैनल में रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा थीं। इसके बाद कई चैनल्स ने न्यूज की शुरुआत की।‘

निधि कुलपति ने बताया,‘ मैंने अपने करियर की शुरुआत 1991 में की थी। पहली बार मुझे अयोद्या में विवादित ढांचा विध्वंस कवर करने का मौका मिला और वह भी इंटरनेशल प्राइम टाइम के साथ। तब ये उभरती हुई इंडस्ट्री थी और बड़ा गर्व महसूस होता था कि हम इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं, क्योंकि पहले इस इंडस्ट्री को ऐसी नजरों से देखा जाता था कि क्या है इसमें। पहले लोग एमबीए करते थे, डॉक्टर बनते थे, इंजीनियरिंग करते थे। इस इंडस्ट्री की स्थापना हमारे सामने हुई। हम सभी लोगों ने एक-एक करके इसमें ईंट जुटाई, तब ये इतनी बड़ी इंडस्ट्री बनी। इतने चैनल्स आए, इतने लोगों को रोजगार मिला। इसका इतना भव्य रूप हुआ।’

उन्होंने बताया, ‘अब वह दौर आ गया है, जब यह इंडस्ट्री 360 डिग्री के एंगल पर घूम गई है। अब सवाल है कि क्या इस इंडस्ट्री में जो बच्चे आएंगे, उन्हें वैसी खोजी पत्रकारिता करने का मौका मिलेगा? क्या उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिलेगी कि वे खोजी पत्रकारिता करें? क्योंकि मुझे याद है, जब कांग्रेस के समय 2जी, कोलगेट आदि जो भी स्कैम हुए थे, उस पर हम लोगों ने खुलकर बहस की। लेकिन आज के दौर में जो स्थिति है वो हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि यदि आप पत्रकारिता के क्षेत्र में आएंगे तो क्या करेंगे?

निधि कुलपति के अनुसार, ‘आज गंगा और यमुना की सफाई का जो कार्यक्रम है, जिस लचर अवस्था में वो पड़ा हुआ है, क्या आप उस पर सवाल उठा पाएंगे?  आज समाज में जो दरार डालने की कोशिश की जा रही है, उस पर क्या और कितना कर पाएंगे? आप बोलेंगे भी तो उसे किस रूप में लिया जाएगा? यानी कि अगर आप सवाल उठाएंगे तो आपको देशद्रोही या फिर गोदी मीडिया की तरह लिया जाएगा। इसलिए  नवयुवकों को सोचना चाहिए कि आज के दौर में ये इंडस्ट्री शिथिल पड़ी हुई है। अभी फिलहाल यही कहना चाहूंगी कि ये इंडस्ट्री अभी बीमार है।

ये आज की नई पीढ़ी को ही सोचना चाहिए कि वे मासकॉम में क्या करने जाएंगे और क्या करना चाहते हैं। आज अमूमन जो विद्यार्थी आते हैं, उन्हें सबसे पहले एंकर बनना होता है। वे रिपोर्टिंग से परहेज करते हैं। उनको ये नहीं पता होता कि रिपोर्टिंग के कितने मायने होते हैं और यही आपको पत्रकारिता सिखाती है। वाकई मैं आज के दौर के लिए थोड़ी चिंतित हूं कि हमें इससे उबरना होगा। हां, थोड़ा समय जरूर लगेगा। मैं कहना चाहूंगी कि पत्रकारिता में आप क्या हासिल करना चाहते हैं यही सोच कर इसमें आइए।

ऐसा दौर मैंने नहीं देखा कभी। मैं 1991 में मीडिया इंडस्ट्री में आई। मैं नई-नई रिपोर्टर बनीं थी, तो अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस की घटना कवर करने गई थी। उस समय संघ के आचार्य गिरिराज किशोर जी हुआ करते थे, जो अब नहीं हैं। उस समय मंदिर की बहुत चर्चा थी। झंडेवालान में कई बार मिलने का मौका मिलता था। रिपोर्ट बनाने के लिए उनकी बाइट अकसर लिया करती थी। एक दिन जब मैंने उनके सामने अयोध्या जाने का जिक्र किया, तो उन्होंने मुझसे कहा कि बिटिया वहां क्या करोगी जाकर? उन्होंने कई बार मुझे मना किया वहां जाने से, लेकिन मैं नहीं मानी। जाने की इच्छा इसलिए भी ज्यादा थी क्योंकि हर जगह चर्चा थी कि कुछ बड़ा होगा। वे बहुत अलग ही तरह के नेता थे और उनमें स्नेह भी था।

उस दौर के नेता अलग तरह के होते थे, वो इसलिए क्योंकि आप उनके मन की बात करें या न करें, लेकिन वे कभी कुछ नहीं कहते थे और तब डर वाली बात भी नहीं होती थी। पहले के नेताओं में हर किसी के लिए बहुत ही ज्यादा स्नेहभाव होता था, लेकिन अब तो अलग ही हो गया है।

अब के नेता नजरें देखकर बात करते हैं। यानी जो अब इस इंडस्ट्री में नवयुवक आ रहे हैं, उनमें तो पहले ये देखा जाता है कि आप किस कंपनी में काम कर रहे हैं। आपका एजेंडा क्या है, इसलिए आज के छात्रों को अपना थॉट प्रोसेस क्लियर करना होगा। क्योंकि इस इंडस्ट्री में हर तरह के लोग हैं। कुछ ये कहते हैं कि आजकल जो भी हो रहा है सही हो रहा है और कुछ इसे गलत बताते हैं। यह एक तरह से सही भी है, क्योंकि हमारे समाज में हर तरह की सोच वाले लोग हैं। हर तरह का विचार हमारे समाज में बहुत जरूरी है, इसलिए मैं इसे कभी गलत नहीं कहती। लेकिन आपको अपने विचार रखने की तो आजादी होनी चाहिए। आप पर तो दोषारोपण नहीं होना चाहिए यानी आप के विचार मेल नहीं खाते तो आप राइटिस्ट या लेफ्टिस्ट हो गए या फिर बिल्कुल नहीं खाए तो नक्सलीय हो गए। ये नहीं होना चाहिए। इसलिए कभी-कभी लगता है कि हमारा दौर ही अच्छा था, तब हम सब कुछ कर सकते थे।

इस बातचीत के दौरान निधि कुलपति ने यह भी बताया, ‘पहले तो मैंने पॉलुलेशऩ पर बहुत बड़ी स्टोरी की थी, गंगा पर तो डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, तब तो किसी ने ये सवाल नहीं उठाए थे, कि आप हिंदू हितैषी हैं या मुस्लिम हितैषी हैं। क्योंकि तब जो स्टोरी की गई थी वो सिर्फ पॉपुलेशन की समस्या पर की गई थी, किसी पर तंज कसने के लिए नहीं की गई थी। ये डॉक्यूमेंट्री मैंने की थी आज से 12 साल पहले। तब बतौर पत्रकार मेरे मन में ये जोश रहता था कि ये स्टोरी करनी है, लेकिन तब भी मैंने हिंदू परिप्रेक्ष्य रखकर की थी स्टोरी ताकि कोई ये न सोचे कि आप किसी पर तंज कस रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि एक समस्या है, गंगा-यमुना सफाई भी एक मुद्दा है। अब तो ये प्लास्टि भी एक मुद्दा है। दिल्ली की हिंसा से अभी निपटे भी नहीं थे कि अब ये कोरोना वायरस आ गया है। आज के दौर में वो संघर्ष नजर नहीं आ रहा है। काम के प्रति लगाव ऐसा है कि आज इस उम्र में भी कोई बोलता है, कि ये भी कर दो तो मैं हां कर देती हूं, क्योंकि एक स्नेह है काम के प्रति। इसलिए मैं इसे काम की तरह तो बिल्कुल भी नहीं लेती हूं। हमेशा आपको अपने काम के प्रति लगाव होना चाहिए। यदि आप अपने काम से फायदा सोचने लगेंगे कि इसमें कितना फायदा है, आपकी उम्र में लोग कहां से कहां पहुंच जाते हैं, कितना कमा लेते हैं। इन्हीं सब चीजों में लगे रहोगे तो लंबा चल पाना मुश्किल होगा। मेरे प्रोफेशन, मेरे काम ने मेरे जीवन में जो स्थायित्व दिया है, वो किसी भी चीज ने नहीं दिया है। इसलिए शुक्रगुजार हूं मैं अपने प्रोफेशन का।‘

उनका कहना था, ‘आज के युवाओं में तो पेशेंस भी नहीं है। इसलिए उन्हें बहुत सोच समझकर इस इंडस्ट्री में आना चाहिए। टेक्नोलॉजी की वजह से तो आज हर कोई पत्रकार बन गया है। वैसे इसमें कुछ गलत भी नहीं है, क्योंकि समय के साथ हम सबको बदलना है। मैं देख रही हूं आजकल लगभग हर किसी ने यू-ट्यूब चैनल शुरू कर दिया है। इसलिए आज सिर्फ ये पत्रकारिता ही नही रह गई है। समाज के प्रति जो सरोकार है, सोशल मीडिया ने उसे ओवर टेक कर दिया है, उसमें पत्रकारिता भी आ जाती है। इसमें आपके विचार और व्यवहार भी आ जाता है। सोशल मीडिया ने तो सबकुछ बदल दिया है। रिपोर्टिंग का तरीका भी बदल गया है, सरकार भी बदल गई है। हर चीज बदल गई है।‘

इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि मीडिया इंडस्ट्री में जो भी बच्चे आएं, वो सोच समझकर आएं कि आगे वो क्या करना चाहेंगे। आने वाले समय में खोजी पत्रकारिता के कितने अवसर रह जाएंगे, इसके लिए तैयार रहना पड़ेगा कि या तो आपको खेमे में बांट दिया जाएगा या आप देशद्रोही हो जाएंगे, या फिर गोदी मीडिया बन जाएंगे। इसलिए यदि कोई और प्रफेशन चुन लें तो ज्यादा ही अच्छा है। बता दें कि न्यूज ट्रैक से 1991 में करियर की शुरुआत करने वालीं निधि कुलपति ने अयोध्या में विवादित ढांच विध्वंस पर काफी रिपोर्टिंग की है. लंदन से जर्नलिज्म करने के बाद उन्होंने डीडी, टीवीआई, जी न्यूज, बीबीसी और फिर एनडीटीवी में काम किया है। वह फिलहाल भारतीय राजनीति के अलावा कई अहम सामाजिक मुद्दों पर प्राइम टाइम से लेकर कई शो करती हैं।

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दैनिक जागरण के युवा फोटो पत्रकार अमित भारद्वाज का निधन

दैनिक जागरण, आगरा के युवा फोटो पत्रकार अमित भारद्वाज का मंगलवार की सुबह निधन हो गया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 April, 2021
Amit Bharadwaj

दैनिक जागरण, आगरा के युवा फोटो पत्रकार अमित भारद्वाज का निधन हो गया है। तबीयत खराब होने पर करीब दो दिन पहले ही अमित को आगरा में सिकंदरा स्थित रेनबो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 32 वर्षीय अमित लगभग पांच वर्षों से दैनिक जागरण में फोटो पत्रकार थे। बताया जाता है कि करीब एक हफ्ते पूर्व उन्हें बुखार और उल्टी की समस्या हुई थी। इस पर उन्होंने अपने फैमिली डॉक्टर से दवा ले ली। हालांकि, दवा लेने पर बुखार उतर गया था, लेकिन उल्टी आनी बंद नहीं हुई। इस बीच कराई गई कोविड की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। करीब दो दिन पूर्व हालत बिगड़ने पर अमित को रेनबो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके लिवर में सूजन बताई। मंगलवार की सुबह रेनबो अस्पताल में ही अमित का निधन हो गया।

मूल रूप से आगरा के रहने वाले अमित की करीब डेढ़ साल पहले ही शादी हुई थी। उनके छह माह का बेटा है। अमित के निधन पर तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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पत्रकार पर जानलेवा हमला, पुलिस चौकी में घुसकर बचाई जान

पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने चार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

Last Modified:
Tuesday, 20 April, 2021
Sanjay Kumar

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक पत्रकार पर जानलेवा हमला करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेवाड़ी जिला के डहीना बस स्टैंड पर सोमवार की सुबह पत्रकार संजय कुमार पर मोटरसाइकिल सवाल चार बदमाशों ने कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। संजय कुमार ने बस स्टैंड स्थित पुलिस चौकी में जाकर अपनी जान बचाई।

घटना सोमवार की सुबह करीब सवा चार बजे उस समय हुई, जब संजय कुमार बस स्टैंड स्थित एजेंसी जा रहे थे। पुलिस चौकी के जवानों ने लहूलुहान हालत में संजय कुमार को को प्राथमिक उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

गंभीर हालत को देखते हुए संजय कुमार को रेवाड़ी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। संजय कुमार की शिकायत पर पुलिस ने चार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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कोविड से जिंदगी की जंग हार गईं ‘द पॉयनियर’ की पॉलिटिकल एडिटर तविशी श्रीवास्तव

‘द पॉयनियर’ की पॉलिटिकल एडिटर तविशी श्रीवास्तव का रविवार को कोविड-19 की वजह से निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Tavishi5

‘द पॉयनियर’ की पॉलिटिकल एडिटर तविशी श्रीवास्तव का रविवार को कोविड-19 की वजह से निधन हो गया। वे 73 साल की थीं। तविशी को सांस लेने में तकलीफ और बुखार होने के बाद रविवार सुबह लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ने के बाद शाम को उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। रात-रात होते-होते उनकी हालत इतनी बिगड़ गई, उनके सांसो की डोर टूट गई।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पॉयनियर के साथ फ्रीलांसर के रूप में की थी और बाद में कठिन परिश्रम के जरिए सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए यहां तक पहुंची थीं। रविवार एडिशन में उनका कॉलम ‘उल्टा प्रदेश’ काफी लोकप्रिय था। उनके निधन पर तमाम नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने पर शोक व्यक्त किया।

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1971 में पाक सेना के सरेंडर करने की खबर ब्रेक वाले वरिष्ठ पत्रकार का निधन

न्यूज एजेंसी पीटीआई के पूर्व खेल संपादक के जगन्नाथ राव का रविवार को निधन हो गया

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Journalist565

न्यूज एजेंसी पीटीआई के पूर्व खेल संपादक के जगन्नाथ राव का रविवार को निधन हो गया। वे 78 साल के थे और पिछले छह साल से कैंसर से जूझ रहे थे।

उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी है। खेल संवाददाता होने के बावजूद राव ने 1971 में पाकिस्तानी सेना के भारतीय सेना के सामने सरेंडर करने की खबर ब्रेक की थी। इसके बाद बांग्लादेश का गठन हुआ था। राव 1964 से 2002 में सेवानिवृत्त होने तक पीटीआई के साथ रहे।

राव ने छह ओलंपिक और दो एशियाई खेलों के अलावा भारतीय क्रिकेट टीम का 1982-83 का पाकिस्तान का एतिहासिक दौरा कवर किया।

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नहीं रहे लेखक-संपादक जी वेंकटसुबैया, 107 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

कन्नड़ के लेखक, संपादक और लेक्सियोग्राफर जी वेंकटसुब्बैया का बेंगलुरु में सोमवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
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कन्नड़ के लेखक, संपादक और लेक्सियोग्राफर जी वेंकटसुब्बैया का बेंगलुरु में सोमवार की सुबह निधन हो गया। वे 107 साल के थे। कन्नड़ भाषा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री व साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया है।

कन्नड़ साहित्यिक क्षेत्र में लोकप्रिय जी वेंकटसुबैया एक लेक्सियोग्राफर, व्याकरणिक और साहित्यिक आलोचक थे। उन्होंने 12 शब्दकोश संकलित किए हैं। उनकी रचनाओं में व्याकरण, कविता, अनुवाद और निबंध सहित कन्नड़ साहित्य के विभिन्न रूप शामिल हैं।

जी वेंकटसुब्बैया का जन्म 23 अगस्त 1913 में मांड्या जिले के गंजम गांव के श्रीरंगपटना में हुआ था। वे आठ भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर थे। उनके पिता गंजम थिमनियाह एक प्रसिद्ध कन्नड़ और संस्कृत विद्वान थे। जी वेंकटसुब्बैया को अपने पिता से ही कन्नड़ के प्रति प्रेम की प्रेरणा मिली थी। जी वेंकटसुब्बैया की प्राथमिक स्कूली शिक्षा दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक के बन्नूर और मधुगिरि के शहरों में हुई है। कन्नड़ में पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने मांड्या में एक नगरपालिका स्कूल में बतौर शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद वे दावणगेरे के एक हाई स्कूल और मैसूरु में महाराजा कॉलेज में पढ़ाने चले गए। फिर वे  बेंगलुरु के विजया कॉलेज में शिफ्ट हो गए। 1973 में जी वेंकटसुब्बैया ने विजया कॉलेज से सेवानिवृत्त होने के बाद इसके मुख्य संपादक के रूप में कन्नड़-टू-कन्नड़ शब्दकोश पर काम करने की जिम्मेदारी ली। उन्होंने 2011 में बेंगलुरु में आयोजित 77वें अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी।

जी वेंकटसुब्बैया को उनके स्मारकीय साहित्यिक कृतियों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिनमें पद्मश्री, पम्पा पुरस्कार, साहित्य अकादमी द्वारा भाषा सम्मान, कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार और कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार शामिल हैं।  

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वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन

पिछले कुछ वर्षों से हिंदुस्तान अखबार के आगरा एडिशन में कार्यरत थे बृजेन्द्र पटेल

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Brajendra Patel

कोरोनावायरस (कोविड-19) का कहर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। तमाम लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कोरोना के संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों में कई पत्रकार भी शामिल हैं। ऐसी ही एक दुखद खबर आगरा से आई है। खबर है कि हिन्दुस्तान के आगरा एडिशन में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल का कोरोना से निधन हो गया है।

कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर बृजेन्द्र पटेल ने कोविड-19 की जांच कराई थी, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसके बाद उन्हें आगरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में थोड़ा सुधार होने पर एक-दो दिन पूर्व उन्हें एसएन अस्पताल, आगरा में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

करीब 50 वर्षीय बृजेन्द्र पटेल कानपुर के मूल निवासी थे। लगभग 25 वर्षों से मीडिया में सक्रिय बृजेन्द्र अब तक दैनिक आज, अमर उजाला और सहारा समेत तमाम मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके थे। करीब दो साल से वह हिंदुस्तान, आगरा में अपनी भूमिका निभा रहे थे।  

बृजेन्द्र पटेल के निधन पर डॉ. अनिल दीक्षित, विनोद भारद्वाज, पीपी सिंह, अवधेश माहेश्वरी, ताज प्रेस क्लब के महासचिव उपेंद्र शर्मा और राज कुमार दंडौतिया सहित तमाम पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। 

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PTI के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Death

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के पूर्व पत्रकार जमालुद्दीन अहमद का निधन हो गया। उनके पारिवारिक सदस्यों ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि जमालुद्दीन अहमद का निधन हाल में एक बीमारी की वजह से नई दिल्ली में हुआ।

जमालुद्दीन अहमद 2007-2008 के दौरान मध्यप्रदेश के भोपाल में पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख रहे। उन्होंने साथ ही यहां कई समाचार पत्रों के लिए भी काम किया।

वहीं  आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहमद के निधन पर दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना ईश्वर से की।

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कोरोना ने निगल ली दैनिक जागरण के युवा पत्रकार अंकित शुक्ल की जिंदगी

हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
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हिंदी अखबार दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में कार्यरत युवा पत्रकार अंकित शुक्ल का कोरोना से शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। वे करीब 35 साल के थे और विधि संवाददाता के तौर पर दैनिक जागरण में कानूनी मामलों को कवर करते थे। 

बताया जाता है कि कुछ दिनों पूर्व तबीयत खराब होने पर अंकित को लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए बने स्पेशल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। 

जानकारी के मुताबिक, अंकित लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर रहते थे। परिवार में पत्नी व एक बेटी है। पत्नी भी कोविड पॉजिटिव हैं और फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं।

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Covid-19 के खिलाफ ‘जंग’ में राजनांदगांव प्रेस क्लब कुछ यूं निभा रहा भागीदारी

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 April, 2021
Last Modified:
Wednesday, 14 April, 2021
Covid Care Centre

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। दिन प्रतिदिन आ रहे आंकड़े बेहद खौफनाक और डराने वाले हैं। हालत यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आकर तमाम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, वहीं विभिन्न अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए बेड की कमी भी बनी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी भागीदारी निभाते हुए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव प्रेस क्लब ने अपने परिसर को अस्पताल में तब्दील कर दिया है। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में बेड की कमी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

30 बेड वाले कोरोना देखभाल केंद्र में तब्दील प्रेस क्लब के इस परिसर में कोविड-19 पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा उनके नाश्ते व खाने का भी मुफ्त इंतजाम किया गया है।

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अज्ञात लोगों ने गोली मारकर की पत्रकार की हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

Last Modified:
Tuesday, 13 April, 2021
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में शनिवार शाम एक पत्रकार की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना करक पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के भीतर बथानी खेल क्षेत्र में हुई।

डॉन न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक की पहचान स्थानीय अखबार Sada-e-lawaghir के संयुक्त संपादक वसीम आलम के रूप में हुई है।

पीड़िता की मां की ओर से दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आलम पर यह हमला तब हुआ, जब वह अपनी बाइक से घर लौट रहा था। उसे बथानी खेल स्थित एक सरकारी स्कूल के पास निशाना बनाया गया। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

करक पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। इस हमले में संदिग्ध के तौर पर मृतक के पिता का नाम भी सामने आया है।

डॉन के मुताबिक, वसीम आलम के पिता न तो अस्पताल में मौजूद थे और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। अधिकारी ने आगे कहा कि वसीम आलम अपने परिवार से अलग रह रहे थे। हालांकि पत्रकार की मां ने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमें अब तक कोई भी ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे पता चलता है कि पत्रकार की हत्या पत्रकारिता के काम के लिए की गई है।’

बता दें कि दुनिया में पत्रकारों के लिए पाकिस्तान सबसे खतरनाक जगहों में से एक माना जाता है। काउंसिल ऑफ पाकिस्तान न्यूजपेपर एडिटर्स (CPNE) की मीडिया फ्रीडम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, पिछले साल पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कम से कम 10 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और कई अन्य को धमकी दी गई, कुछ का अपहरण किया गया, प्रताड़ित किया गया और गिरफ्तार किया गया था।

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