डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष को मिला पं. बृजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान

यह पुरस्कार प्रतिवर्ष हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड का यह 14वां वर्ष है।

Last Modified:
Sunday, 17 April, 2022
Award

प्रख्यात कवि, आलोचक एवं ‘साहित्य परिक्रमा’ के संपादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष को मीडिया विमर्श परिवार द्वारा 14वें पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर डॉ. चंदन कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया।

पत्रकारिता में तथ्यात्मक लेखन की आवश्यकता: डॉ. चंदन कुमार

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर डॉ. चंदन कुमार ने कहा कि आज तथ्यात्मक लेखन लुप्त होता जा रहा है। पत्रकारिता में इसका बड़ा महत्व है। बौद्धिकों और शोधार्थियों की '2 मिनट नूडल्स' वाली सोच के कारण तथ्यात्मक लेखन बंद हो गया है। उन्होंने कहा कि स्मृति आपके मनुष्य होने का सूचक है और ये समारोह बताता है कि प्रो. संजय द्विवेदी की स्मृतियों में उनके पुरखे आज भी जीवित हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि ऐसे पुरस्कार समारोह एक व्यक्ति के मानवीय पक्ष के प्रमाण हैं। प्रो. द्विवेदी इसके लिए धन्यवाद के पात्र हैं।

मीडिया से ज्यादा है साहित्यिक पत्रकारिता का दायित्व: डॉ. इंदुशेखर 'तत्पुरुष'

'साहित्य परिक्रमा' के संपादक डॉ. इंदुशेखर 'तत्पुरुष' ने कहा कि वह समाज सर्वश्रेष्ठ होता है, जहां साहित्य उसे दिशा देता है। इसी कारण समाज में साहित्यिक पत्रकारिता का बड़ा महत्व है। सांस्कृतिक और आर्थिक पत्रकारिता भी साहित्यिक पत्रकारिता के पीछे चलती हैं। डॉ. 'तत्पुरुष' ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद साहित्यिक पत्रकारिता का हमेशा से एक विजन रहा है और उसने देश को नई दिशा देने का कार्य किया है। साहित्यिक पत्रकारिता भी सूचना देती है, पर उसका दायित्व मुख्यधारा की मीडिया से ज्यादा है।

भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं अगले 25 वर्ष: डॉ. रमा

हंसराज कॉलेज, दिल्ली की प्राचार्य डॉ. रमा ने कहा कि पूरा देश 'आजादी का अमृत म​होत्सव' मना रहा है। भारत के युवाओं को अपने लक्ष्य को तय करना होगा। अगले 25 वर्ष हमारे हाथों में हैं। इन 25 वर्षों में हम भारत को बदलेंगे। यही भारत के प्रत्येक व्यक्ति का संकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज साहित्यिक पत्रकारिता में भाषा की गिरावट हुई है, जिसका असर समाज और उसके मूल्यों पर पड़ रहा है। इसलिए पत्रकारों का यह कर्तव्य है कि वे भाषा का ध्यान रखें।

'पत्रकार' अधिक हो गए, 'पत्रकारिता' कम हो गई: गिरीश पंकज

प्रख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि बाजारवाद के दौर में लोग अपने वैभव को भूल चुके हैं। बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में भेज रहे हैं। ऐसे समय में अपने पुरखों के नाम पर सम्मान देने का काम प्रो. संजय द्विवेदी पिछले 14 वर्षों से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब 'पत्रकार' कम थे, 'पत्रकारिता' अधिक थी, लेकिन आज 'पत्रकार' अधिक हो गए हैं और 'पत्रकारिता' कम हो गई है। साहित्यिक पत्रकारिता समाज को जोड़ने का काम करती है। साहित्य का अर्थ ही है 'सभी का हित'।

विकसित हुई नागरिक पत्रकारिता की अवधा​रणा: प्रो. श्रीकांत सिंह

इस अवसर पर ‘मीडिया विमर्श’ के संपादक प्रो. श्रीकांत सिंह ने कहा कि वर्तमान में नागरिक पत्रकारिता की अवधा​रणा विकसित हुई है। आज हर किसी के हाथों में मोबाइल है। खबरों की जल्दबाजी में किताबों को जगह नहीं मिलती। ऐसे दौर में साहित्यिक पत्रकारिता का सम्मान समाज को नई दिशा देने का काम करेगा।

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने का उत्सव: प्रो. संजय द्विवेदी

त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के सलाहकार संपादक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि यह पुरस्कार प्रतिवर्ष हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड का यह 14वां वर्ष है। ‘मीडिया विमर्श’ द्वारा शुरू किए गए इस अवॉर्ड के तहत ग्यारह हजार रुपए, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र दिया जाता है।

पुरस्कार के निर्णायक मंडल में नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी, रायपुर के पूर्व निदेशक रमेश नैयर तथा इंदिरा गांधी कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल रहे।

इस अवसर पर युवाओं को संस्कृत से जोड़ने के उद्देश्य से प्रकाशित श्री शिवेश प्रताप की पुस्तक 'जिंदगी की बात, संस्कृत के साथ' का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विष्णुप्रिया पांडेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया।

बता दें कि इससे पूर्व यह सम्मान ‘वीणा’ (इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, ‘दस्तावेज’ (गोरखपुर) के संपादक डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, ‘कथादेश’ (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, ‘अक्सर’ (जयपुर) के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज, ‘सद्भावना दर्पण’ (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, ‘व्यंग्य यात्रा’ (दिल्ली) के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, ‘कला समय’ (भोपाल) के संपादक विनय उपाध्याय, ‘संवेद’ (दिल्ली) के संपादक किशन कालजयी, ‘अक्षरा’ (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत, ‘अलाव’ (दिल्ली) के संपादक रामकुमार कृषक, ‘प्रेरणा’ (भोपाल) के संपादक अरुण तिवारी, ‘युगतेवर’ (सुल्तानपुर) के संपादक कमल नयन पाण्डेय और ‘अभिनव इमरोज़’ (दिल्ली) के संपादक देवेन्द्र कुमार बहल को दिया जा चुका है।

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‘तुम जैसे मेरे जीवन में आए, वैसे ही चले गए चुपचाप, बहुत याद आओगे राधे’

मैंने आज तक ऐसा कोई रिश्ता नहीं देखा जिसमें कोई व्यक्ति अपने लिए खुद लक्ष्मण रेखा खींचे और कभी उसे पार न करे। यह राधे का बड़प्पन था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 October, 2022
Last Modified:
Saturday, 01 October, 2022
Trubute

वह ईस्वी सन के 1987वें साल का पहला हफ्ता था। आगरा और आसपास का इलाका ‘चिल्ला’ जाड़े से कंपकंपा रहा था। मैं और मेरे आसपास के लोग जवान थे पर ऐसा लगता जैसे शीतलहर हमारे जिस्मों को चीरकर पार निकल जाएगी। गर्म से गर्म कपड़े नाकाफी साबित हो रहे थे। ऐसे ठण्डे दिनों में हमने पहली जनवरी को आगरा से दैनिक ‘आज’ का संस्करण प्रकाशित करना शुरू किया था। जिम्मेदारी बड़ी थी, उम्र कम। सामने दो बेहद सबल प्रतिद्वंद्वी थे। हम रात-दिन काम करते पर ऐसा लगता जैसे कि काम खत्म नहीं होता बल्कि हर रोज कुछ और फैल जाता है।

उन्हीं काल जैसे कठोर दिनों से एक सुबह करीब तीन बजे मेरी नजर उस पर पड़ी। छह फीट के आसपास के कद के उस दढ़ियल नौजवान की छरहरी काया में फुर्ती थी। घनी दाढ़ी के पीछे से छुपी उसकी आंखें जैसे हर वक्त कुछ बोलने की कोशिश करतीं। मेरे और उसके बीच पद के कद का बड़ा अंतर था पर वह ध्यान आकर्षित करता था। उस समय मैंने उससे पूछा, ‘तुम्हारा नाम क्या है?’ संक्षिप्त और सधा हुआ उत्तर मिला- राधेश्याम चतुर्वेदी। कहां के हो, वह नजरें नीची करता हुआ बोला- चन्दीकरा। ‘अरे, तुम तो मेरे गांव के हो, फिर बताया क्यों नहीं?’ वह मुस्कुराया और अपने काम में लग गया। उसे जल्दी-जल्दी बंडल गिनकर टैक्सियां गंतव्य के लिए रवाना करनी होती थीं। मैं प्रभावित हुए बिना न रह सका। उस संस्करण का हर कर्मचारी मेरे नजदीक आने की कोशिश करता था पर वह बिना जताए, बताए कि मेरे गांव का है, अपने काम में जुटा रहता था।

उसी दिन से हम दोनों के मन में भाईचारे के रिश्ते की शुरुआत हुई और राधेश्याम देखते ही देखते मेरे लिए ‘राधे’ बन गया। राधे को मैंने आगे चलकर प्रसार विभाग में आजमाया। उन दिनों कंप्यूटर सिर्फ फोटो कंपोजिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। प्रसार विभाग के साथियों को अपने दस्तावेज हाथ से लिखने होते थे। मैंने पाया कि वह त्रुटिहीन हिन्दी लिखता है। एक दिन उसे संपादकीय विभाग में काम करने का न्योता दिया और वह खुशी-खुशी मान गया। राधे ने बाद में प्रगति की सीढ़ियां बहुत तेजी से चढ़ीं और जब पत्रकारिता छोड़ी, तो वह जयपुर के सबसे बड़े अखबार में समाचार संपादक था।

उसने थक-हारकर पेशेवर तौर पर कलम नहीं रखी। अलमस्ती उसका स्वभाव थी। ‘आज’ अखबार में 13 बरस सिर्फ मेरी वजह से जुड़ा रहा था लेकिन मैं यहां उसकी पेशेवर योग्यता की बात नहीं कर रहा। राधे मेरे लिए सगे भाई से बढ़कर था। शुरुआती दिनों में एक दिन उसने मुझसे हंसकर कहा कि मेरे बाबा आपके बाबा के बॉडी गार्ड थे। मैं आपका बॉडी गार्ड हूं। यह परिहास था, पर इसमें कोई दो राय नहीं कि राधे ने खुद ब खुद मेरी परछाई बनना स्वीकार किया। मेरे बाद सोता, मुझसे पहले जाग जाता, पेशेवर तौर पर कभी निराश नहीं करता और निजी तौर पर तो उसने कमाल ही कर दिया था। मैंने आज तक ऐसा कोई रिश्ता नहीं देखा जिसमें कोई व्यक्ति अपने लिए खुद लक्ष्मण रेखा खींचे और कभी उसे पार न करे। यह राधे का बड़प्पन था।

पिछले 22 साल से हमारा कोई पेशेवर रिश्ता नहीं था। हम बहुत कम मिले, पर जब मिले, तो राधे में कभी कोई बदलाव नहीं दिखाई पड़ा। मैंने चार दशकों से लंबे अपने करियर में लोगों को न जाने कितनी तरह से बदलते देखा है। मुझे कहने में संकोच नहीं कि राधे जैसे लोग इंसानियत में किसी भी व्यक्ति की आस्था को और मजबूत करने का अद्भुत माद्दा रखते हैं।

आज सुबह जब अपने पुराने और प्रिय साथी अनिल दीक्षित की पोस्ट पढ़ी तो आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। बाद में प्रतीक से बात की तो उसने बताया कि वह लगभग दो हफ्ते आईसीयू में रहा और फिर चार दिन पहले चला गया। आंसू बहाना मेरी आदत नहीं, पर फूट पड़ा। घंटों अवसन्न पड़ा रहा। फिर वही किया जो मैं राधे सहित अपने सभी साथियों को समझाता आया हूं-शो मस्ट गो ऑन। तब से देर रात तक अखबार का काम करता रहा पर आंखें जब चाहें तब बरस उठतीं।

मैं किससे कहूं राधे कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं? तुमने मुझे बड़ा माना और बीच में छोड़कर चले गए। कैसे! आज शब्द लाचार और अपाहिज नजर आ रहे हैं। तुम्हें श्रद्धांजलि दूं भी तो कैसे दूं, तुम्हें कुछ कहूं भी तो कैसे कहूं? इन गुजरे 35 बरसों में हमने एक-दूसरे के लिए जो महसूस किया, वह किसी भी रिश्ते से बड़ा था। बड़े भाई, छोटे भाई जैसे शब्द तो बस जैसे संबोधन के लिए थे। तुम जैसे मेरे जीवन में आए, वैसे ही चले गए, चुपचाप। बहुत याद आओगे राधे।

(‘हिन्दुस्तान’ के एडिटर-इन-चीफ शशि शेखर की फेसबुक वॉल से साभार)

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कैंसर से लड़ते हुए जिंदगी की जंग हार गए वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन दुबे

वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन दुबे का लंबी बीमारी के बाद चंडीगढ़ के अस्पताल में मंगलवार सुबह 6 बजे निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 28 September, 2022
Vaibhav454874

वरिष्ठ पत्रकार वैभव वर्धन दुबे का लंबी बीमारी के बाद चंडीगढ़ के अस्पताल में मंगलवार सुबह 6 बजे निधन हो गया। वह मात्र 48 वर्ष के थे और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे। पिछले एक साल से भी अधिक समय से उनकी तबीयत खराब होने के चलते चंडीगढ़ पीजीआई में उन्हें भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान वह मौत से लड़ते हुए जिंदगी की जंग हार गए। मंगलवार को हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

कई प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर चुके वैभव वर्धन मूल रूप से गाजीपुर जिले के सरैया गांव के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी मां, पत्नी, एक पुत्र  और एक पुत्री हैं।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके वैभव वर्धन ने 'आजतक', 'इंडिया टीवी', 'इंडिया न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम कर चुके हैं।

उनके निधन की सूचना मिलने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और सहयोगियों ने गहरा शोक प्रकट किया व उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

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वरिष्ठ पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या, पोल्ट्री फार्म से मिला शव

बिहार में आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। इस बीच सुपौल से एक बड़ी खबर सामने आयी है। यहां एक पत्रकार की हत्या कर दी गयी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Journalist5481

बिहार में आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। इस बीच सुपौल से एक बड़ी खबर सामने आयी है। यहां एक पत्रकार की हत्या कर दी गयी। बताया जा रहा कि पत्रकार महाशंकर पाठक की पीट-पीटकर हत्या की गई। अपराधियों ने खुलेआम इस बड़ी घटना को अंजाम दिया है।   

जानकारी के मुताबिक, सुपौल जिला के हुलास गांव स्थित पोल्ट्री फार्म से बिहार के वरिष्ठ पत्रकार महाशंकर का शव बरामद किया गया है। महाशंकर ‘सौभाग्य मिथिला’, ‘राष्ट्रीय प्रसंग’ समेत कई संस्थानों से जुड़े रहे। वे खुद भी ‘आर्यव्रत प्रसंग’ नाम से पत्रिका निकालते थे। इसी बीच उन्होंने पोल्ट्री फार्म शुरू किया। ये फार्म राघोपुर थाना इलाके के राधानगर गांव के पास स्थित है। 

बता दें कि पत्रकार महाशंकर की हत्या का आरोप फार्म में काम करने वाले एक दंपती पर लगा है। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

घटना के बारे में बताया जा रहा है कि किसी बात पर अपने ही कर्मचारी से उनकी अनबन हो गई। रविवार सुबह जब वे फार्म पर पहुंचे तो कई घंटों तक वापस नहीं लौटे। कुछ देर के बाद लोगों ने पाया कि फार्म में बाहर से ताला मारा हुआ है।  घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है। आरोपी ने बेलचा से सिर पर कई वार कर महाशंकर को गंभीर रूप घायल कर दिया था, जिसके बाद  महाशंकर घायल अवस्था में अंदर अचेत पड़े हुए हैं। बेहतर इलाज के लिए उनको स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।  

महाशंकर पाठक का शव मिलते ही पुलिस टीम जांच में जुट गई है। वहीं बताया ये जा रहा कि महाशंकर पाठक के पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले एक दंपती गुड्डू और उसकी पत्नी सविता ने वारदात को अंजाम दिया है। फार्म में काम करने वाले कर्मियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कुछ दिन पहले ही महाशंकर पाठक ने इस दंपती को अंडों की चोरी के आरोप पर फटकार लगाई थी।

बताया जा राह कि ये दंपती फार्म में ही रहा करता था। आशंका जताई जा रही कि जिस तरह से उन्हें फटकार लगाई गई थी उसी से नाराज होकर दंपती ने पोल्ट्री फार्म मालिक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कुछ भी साफ तौर से नहीं कहा है। मामले की जांच की जा रही है। इन्वेस्टिगेशन के बाद बाद ही अधिकारी इस पर कुछ स्पष्ट तौर पर कहेंगे। आरोपी दंपती की तलाश की जा रही है।

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उपराष्ट्रपति से मिले MCU के वीसी प्रो. केजी सुरेश, विवि की उपलब्धियों से कराया अवगत

‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष जगदीप धनखड़ से नई दिल्ली में भेंट की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Meeting

‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष जगदीप धनखड़ से नई दिल्ली में भेंट की। उप राष्ट्रपति निवास में हुई मुलाकात में प्रो. केजी सुरेश ने उन्हें विश्वविद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया । उल्लेखनीय है कि एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय होने का गौरव रखने वाले माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष देश के उपराष्ट्रपति हैं।

इस मुलाकात के दौरान प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति को विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि भोपाल के निकट बिशनखेड़ी में पचास एकड़ में स्वयं का भवन बनकर तैयार हो चुका है, और शीघ्र ही पूरा विश्वविद्यालय यहां शिफ्ट होने वाला है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अकादमिक भवन, प्रशासनिक भवन, विशाल सभागार के साथ ही गर्ल्स हॉस्टल, बायस हॉस्टल, कैंटिन, कर्मचारियों,अधिकारियों, शिक्षकों के लिए कैंपस के भीतर ही निवास की भी सुविधा भी उपलब्ध है । इस साल पिछले वर्ष से ज्यादा विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विगत वर्ष एक लाख तीन हजार विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था।

कुलपति ने उपराष्ट्रपति को बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत नए पाठ्यक्रमों को भी पिछले साल ही शुरु कर दिया है । उन्होंने बताया कि देश एवं राज्य में पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को शुरु करने वाला भी यह देश का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने बहुत तेजी से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को अपनाया । इसके साथ ही प्रो. केजी सुरेश ने बताया कि ‘इंडिया टुडे’ की टॉप-10 सूची में भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है, उन्होंने कहा कि इस सूची में शामिल होने वाला यह देश का पहला हिंदी पत्रकारिता का संस्थान है ।

गौरतलब है कि ‘द वीक’ ने भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम अपनी सूची में शामिल किया है। प्रो. केजी सुरेश ने उपराष्ट्रपति को बताया कि इसी वर्ष विवि के बिशनखेड़ी स्थित नवीन कैंपस में तीन दिवसीय राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का भी आयोजन हुआ था, जिसमें देश के ख्याति प्राप्त अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, कलाकारों ने भाग लिया था और तत्पश्चात सिनेमा अध्ययन विभाग का गठन भी हुआ था। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर उत्सुकता एवं खुशी व्यक्त की । उन्होंने कुलपति प्रो. केजी सुरेश को उपलब्धियों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय के प्रगति की कामना की और इससे संबंधित और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आग्रह कियाl

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इस बीमारी ने निगल ली 'दैनिक भास्कर' के पत्रकार अमित मिश्रा की जिंदगी

फिलहाल झारखंड में ओरमांझी स्थित अब्दुल रज्जाक कैंसर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Amit Mishra

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार अमित मिश्रा का शनिवार को निधन हो गया है। ‘दैनिक भास्कर’ में कार्यरत अमित मिश्रा कैंसर से पीड़ित थे। बताया जाता है कि अमित मिश्रा कैंसर के अंतिम स्टेज से गुजर रहे थे। कई जगह उन्होंने इलाज भी कराया, लेकिन ठीक नहीं हो पाए। फिलहाल ओरमांझी स्थित अब्दुल रज्जाक कैंसर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उनका निधन हो गया।

अमित मिश्रा ने ‘ईटीवी’ सहित तमाम मीडिया प्रतिष्ठानों में काम किया था। भागलपुर स्मार्ट सिटी के पीआरओ के तौर पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित मिश्रा के पिता ज्ञानवर्धन मिश्रा भी झारखंड- बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह लगातार. इन और हिंदी दौनिक शुभम संदेश के धनबाद संपादक हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत तमाम नेताओं और पत्रकारों ने अमित मिश्रा के निधन पर गहरा शोक जताते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को दु:ख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। अपने शोक संदेश में हेमंत सोरेन ने कहा है, ‘अमित मिश्रा का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अमित मिश्रा एक सुलझे हुए अनुभवी पत्रकार थे। उनके परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।’  

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कोई भी भाषा नहीं ले सकती 'मातृभाषा' की जगह: प्रो. द्विवेदी

गुवाहाटी में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि मातृभाषा में सोचने और बोलने से अभिव्यक्ति में आसानी होती है और हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
Pro. Sanjay Dwivedi

‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी का कहना है कि कोई भी भाषा किसी व्यक्ति की मातृभाषा की जगह नहीं ले सकती। हम अपनी मातृभाषा में सोचते हैं और उस पर हमारा स्वाभाविक अधिकार होता है। गुवाहाटी में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मातृभाषा में सोचने और बोलने से अभिव्यक्ति में आसानी होती है और हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता असम विधानसभा के प्रधान सचिव हेमेन दास ने की।

असम में मीडिया के 175 वर्ष से अधिक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन 'महाबाहू' संस्थान एवं मल्टीकल्चरल एजुकेशनल डेवलेपमेंट ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में एलिजाबेथ डब्ल्यू ब्राउन द्वारा लिखित पुस्तक 'द होल वर्ल्ड किन: ए पायनियर एक्सपीरियंस अमंग रिमोट ट्राइब्स, एंड अदर लेबर्स ऑफ नाथन ब्राउन'  के रिप्रिंटेड वर्जन का विमोचन किया गया। इस अवसर पर असम की पहली मासिक समाचार पत्रिका 'ओरुनोदोई' का डिजिटल संस्करण भी लॉन्च किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. द्विवेदी ने कहा, ‘लोग कई भाषाएं सीख सकते हैं, लेकिन उनकी एक ही मातृभाषा हो सकती है जिसमें वे सोचते हैं, सपने देखते हैं और भावनाओं को महसूस करते हैं। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का मातृभाषा सबसे शक्तिशाली उपकरण है।’

डॉ. द्विवेदी ने सांस्कृतिक विविधता और विरासत के संरक्षण में मातृभाषा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ’गुवाहाटी में घूमते हुए यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कई दुकानों के साइनबोर्ड असमिया के बजाय अंग्रेजी भाषा में लिखे गए थे। अगर हम चाहें तो ये साइनबोर्ड अंग्रेजी और असमिया, दोनों भाषाओं में हो सकते हैं।’

आईआईएमसी के महानिदेशक ने कहा कि असम में मीडिया के 175 वर्ष से अधिक पूर्ण होने का अवसर असमिया साहित्य और पत्रकारिता के उन दिग्गजों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने असम में मीडिया की नींव रखी। ऐसी महान हस्तियों के कारण ही असम, न सिर्फ पूर्वोत्तर भारत के प्रहरी के रूप में स्थापित हुआ, बल्कि साहित्य, संस्कृति और आध्यात्म के क्षेत्र में भी उसने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि असम की पत्रकारिता को अब अगले 25 वर्षों का लक्ष्य तय करना करना चाहिए। उसे नए विचारों पर काम करना चाहिए और समाज की समस्याओं का समाधान कर नई उपलब्धियां हासिल करनी चाहिए।

इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत राजगुरु ने कहा, ’भाषा हमारा प्रतिनिधित्व करती है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’ पूर्व राज्यसभा सदस्य कुमार दीपक दास, वरिष्ठ पत्रकार बेदब्रत मिश्रा और अमल गोस्वामी व एडवोकेट सत्येन सरमा और डॉ. रेजाउल करीम ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।

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दोस्त ने दी पत्रकार को 'सर तन से जुदा' करने की धमकी, जानें वजह

गाजियाबाद में पत्रकार निशांत आजाद को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी देने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे लग गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
Journalist34875

गाजियाबाद में पत्रकार निशांत आजाद को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी देने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे लग गया है। मंगलवार को गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जोकि पुराना परिचित है। आरोपी का नाम प्राणप्रिय वत्स है, जोकि बिहार का रहने वाला है।   

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद प्राणप्रिय ने बताया कि निशांत से उसने पैसे उधार ले रखे थे, जिसकी वापसी के लिए निशांत उस पर दबाव बना रहा था, जिससे बचने के लिए उसने यह धमकी दी थी।

पत्रकार निशांत कुमार आजाद आरएसएस और अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ के लिए मुख्य रूप से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। 13 सितंबर को दी अपनी शिकायत में पत्रकार ने बताया था कि 10 सितंबर को एक वर्चुअल नंबर से उन्हें 'सर तन से जुदा' की धमकी दी गई है।  इसके अलावा इस्लाम के खिलाफ एजेंडे का प्रचार बंद करने की भी धमकी दी गई है। पत्रकार ने जब उससे उसकी पहचान के बारे में पूछा, तो उसने जवाब दिया कि वह पत्रकार के बारे में सब कुछ जानता है और यदि वह इस तरह के मुद्दों पर फिर से लिखना जारी रखता है, तो उसे परिणाम भुगतने होंगे।

शिकायत में पत्रकार ने बताया था कि यह धमकी उसे यूएस-आधारित मोबाइल नंबर से दी गई है। उन्हें वॉट्सऐप काल भी की गई, जिसका रिप्लाई उन्होंने नही दिया। घटना की शिकायत गाजियाबाद पुलिस से की गई।

इंदिरापुरम क्षेत्र के रहने वाले निशांत आजाद पेशे से पत्रकार हैं। 13 सितंबर को उन्होंने थाना इंदिरापुरम में एफआईआर दर्ज कराई थी।  

सीओ अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपी निशांत को ढाई साल से जानता है। दोनों की मुलाकात बिहार चुनाव के दौरान हुई थी। आरोपी पर निशांत के करीब ढाई लाख रुपए उधार चल रहे थे। निशांत ये रुपए लगातार मांग रहा था। इस पर आरोपी ने निशांत का ध्यान बांटने का प्लान बनाया। इंटरनेट से एक वर्चुअल नंबर जेनरेट करके वॉट्सएप पर थ्रेट दे डाली। सीओ ने कहा कि आरोपी पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

गाजियाबाद के डॉक्टर अरविंद अकेला को भी ऐसी ही धमकी मिली थी, लेकिन पुलिस जांच में उनका मामला झूठा निकला।

डॉक्टर को धमकी देने का मामला निकल चुका है झूठा
11 सितंबर को डॉक्टर अरविंद वत्स 'अकेला' ने भी एक ऐसी ही FIR थाना सिहानी गेट में दर्ज कराई थी। डॉक्टर अकेला के मुताबिक, उन्हें यूएस नंबर से सिर कलम करने की धमकी दी गई। हालांकि SP सिटी निपुण अग्रवाल ने दावा किया है कि डॉक्टर ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए धमकी की झूठी खबर फैलाई थी। वॉट्सएप पर जिस नंबर से कॉल आई थी, वो नंबर डॉक्टर के ही मरीज का था।

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उपराष्ट्रपति का मीडिया से आग्रह, इस मामले में सावधानी बरतते हुए करें रिपोर्टिंग

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और प्रभावी होने की सबसे सुरक्षित गारंटी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को मीडिया से न्यायपालिका के बारे में रिपोर्टिंग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हमें न्यायाधीशों की गरिमा और न्यायपालिका के लिए सम्मान को बनाये रखना चाहिए, क्योंकि ये कानून के शासन और संवैधानिकता के मूल सिद्धांत हैं।

रविवार को जबलपुर, मध्य प्रदेश में आयोजित पहले 'न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा स्मृति व्याख्यान' में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और प्रभावी होने की सबसे सुरक्षित गारंटी है। उन्होंने कहा, ‘निर्विवाद रूप से लोकतंत्र का सबसे अच्छा विकास तब होता है, जब सभी संवैधानिक संस्थानों का आपस में पूर्ण समन्वय होता है और वे अपने क्षेत्र विशेष तक ही सीमित होते हैं।’

पहले 'न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा स्मृति व्याख्यान' में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने मुख्य व्याख्यान दिया। राजस्थान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति वर्मा के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अपनी कई बातचीत को याद करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि उनके कार्यकाल को न्यायिक इकोसिस्टम को बेहतर बनाने एवं पारदर्शिता और जवाबदेही को विस्तार देने के रूप में याद किया जा सकता है।

समाज पर दूरगामी प्रभाव वाले कई फैसले देने के लिए न्यायमूर्ति वर्मा की प्रशंसा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि विशाखा मामले में उनके ऐतिहासिक फैसले ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं की विशिष्ट सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था के लिए पूरे तंत्र के संरचना निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा, ‘स्वर्गीय न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा को हमेशा पथ-प्रदर्शक निर्णयों और उन विचारों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने नागरिकों को सशक्त बनाया है और सरकार को भी सक्षम बनाया है, ताकि वह लोगों के कल्याण के लिए संस्थानों में व्यापक बदलाव कर सके।’

न्यायमूर्ति वर्मा द्वारा संघवाद से लेकर धर्मनिरपेक्षता तक और भारत में लैंगिक समानता से जुड़े कानूनों के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित किये जाने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि उनका जीवन एवं उनके विचार हमें और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल; मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान; मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश; सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल; सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी; मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रवि मलीमथ; लोकसभा सदस्य राकेश सिंह; राज्यसभा सदस्य और जे.एस. वर्मा स्मृति समिति के अध्यक्ष विवेक के तन्खा एवं दिवंगत न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा के परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।

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ऑफिस के लिए निकली थी न्यूज24 की महिला पत्रकार, हो गई यह वारदात

यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उससे सटे इलाकों में चेन स्नैचर का गिरोह सक्रिय है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 19 September, 2022
Last Modified:
Monday, 19 September, 2022
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यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व उससे सटे इलाकों में चेन स्नैचर का गिरोह सक्रिय है। शहर की सड़कों पर चेन स्नैचर बेखौफ होकर घूम रहे हैं। यहां चेन छीनने की घटनाएं होना आमबात हो चुकी हैं। बदमाशों ने इस बार ‘न्यूज24’ में कार्यरत एक महिला पत्रकार को अपना निशाना बनाया। घटना रविवार सुबह करीब 06:30 बजे की है, जब महिला पत्रकार सिमरन सिंह दफ्तर जाने के लिए अपने घर से निकली थीं।

इस दौरान कश्मीरी गेट बस अड्डे के करीब ऑफिस कैब का इंतजार करते समय दो बदमाशों ने उनके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। सिमरन का कहना है कि दोनों लुटेरे बाइक पर आए थे और उन्होंने अपना चेहरा ढका हुआ था, इसके अलावा उन्होंने सिर पर टोपी भी पहन रखी थी।

सिमरन का कहना है कि दोनों युवकों में से एक बाइक पर ही बैठा रहा, जबकि दूसरा उतरकर उनके करीब पहुंचा और पीछे से गला दबाते हुए उनकी चेन लूट ली। बाद में दोनों बदमाश बाइक पर रफूचक्कर हो गए। 

वैसे हैरान करने वाली बात यह है कि कश्मीरी गेट पर स्थित एक पुलिस बूथ से कुछ ही मीटर दूर घटी ही सिमरन के साथ यह घटना घटी। सिमरन का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर कैब का इंतजार करने के लिए वही स्थान चुना, क्योंकि पुलिस चौकी के करीब होने की वजह से वह वहां सुरक्षित महसूस कर रही थीं।

लेकिन यह घटना बताती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद है कि उन्हें  पुलिस का भी कोई खौफ नहीं है। बदमाश दिन दहाड़े वारदात को अंजाम देने में लगे हुए हैं, तो वहीं पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। 

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जानिए, क्यों अमेरिकी मीडिया ने पीएम मोदी को दी बड़ी कवरेज, की तारीफ भी

पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई वार्ता को अमेरिकी मीडिया ने व्यापक कवरेज दी और पीएम मोदी की सराहना की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 17 September, 2022
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई वार्ता को मुख्यधारा की अमेरिकी मीडिया ने व्यापक कवरेज दी है और पीएम मोदी की सराहना की है। दरअसल, अमेरिकी मीडिया ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन को यह बताने के लिए पीएम मोदी की सराहना की है कि यह यूक्रेन में युद्ध करने का समय नहीं है।

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपने शीर्षक में लिखा, ‘मोदी ने यूक्रेन में युद्ध के लिए पुतिन को फटकार लगाई’

दैनिक समाचार पत्र ने लिखा, ‘मोदी ने पुतिन को आश्चर्यजनक रूप से सार्वजनिक फटकार लगाते हुए कहा: ‘आधुनिक दौर युद्ध का युग नहीं है और मैंने आपसे इस बारे में फोन पर बात की है’। इसमें कहा गया, ‘इस दुर्लभ निंदा के कारण 69 वर्षीय रूसी नेता सभी पक्षों की ओर से अत्यधिक दबाव में आ गए’।

पुतिन ने मोदी से कहा, ‘मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपका रुख जानता हूं, मैं आपकी चिंताओं से अवगत हूं, जिनके बारे में आप बार-बार बताते रहते हैं। हम इसे जल्द से जल्द रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, विरोधी पक्ष यूक्रेन के नेतृत्व ने वार्ता प्रक्रिया छोड़ने का ऐलान किया और कहा कि वह सैन्य माध्यमों से यानी ‘युद्धक्षेत्र में’ अपना लक्ष्य हासिल करना चाहता है। फिर भी, वहां जो भी हो रहा है, हम आपको उस बारे में सूचित करते रहेंगे।’ यह ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के वेबपेज की मुख्य खबर थी।  

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने शीर्षक दिया, ‘भारत के नेता ने पुतिन को बताया कि यह युद्ध का दौर नहीं है’ उसने लिखा, ‘बैठक का लहजा मित्रवत था और दोनों नेताओं ने अपने पुराने साझा इतिहास का जिक्र किया। मोदी के टिप्पणी करने से पहले पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध को लेकर भारत की चिंताओं को समझते हैं।’ समाचार पत्र ने कहा, ‘मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग की यूक्रेन के हमले के बाद पुतिन के साथ पहली आमने-सामने की बैठक के एक दिन बाद टिप्पणियां कीं। चिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति की तुलना में अधिक शांत लहजा अपनाया और अपने सार्वजनिक बयानों में यूक्रेन के जिक्र से बचने की कोशिश की।’

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