पुरोधा संपादकों की कहानीः हरिवंश की जुबानी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’...

Last Modified:
Friday, 05 April, 2019
Wardha

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे दिन 28 मार्च 2019 को हरिवंश ने नारायण दत्त और धर्मवीर भारती पर और तीसरे दिन 29 मार्च 2019 की सुबह प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

पहले दिन का कार्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार तथा दूसरे व तीसरे दिन का कार्यक्रम जनसंचार विभाग के माधव राव सप्रे सभा कक्ष में आयोजित हुआ। पुरोधा संपादकों का पुण्य स्मरण करते हुए हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में विचार, मूल्य और चरित्र की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता पूंजी प्रधान है, इसलिए वह उन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रही है, जो मानवता के भविष्य के लिए जरूरी हैं।

हरिवंश ने कहा कि आज के पत्रकार तथ्यों की जांच किए बिना खबरें करते हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं। वे यह भी नहीं बताते कि हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है और जिस आर्थिक नीति पर चल रहे हैं, उसका भविष्य खतरनाक है। ऐसे मौके पर उन संपादकों का स्मरण जरूरी है, जो विचार और साहस की पत्रकारिता के आखिरी युग की कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि विकास का मौजूदा रास्ता खतरनाक है। इसलिए सभ्यता को कोई और मार्ग चुनना होगा। ऐसे समय में महात्मा गांधी सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के महत्त्वपूर्ण कथन पागल दौड़ का जिक्र करते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं को जमा करने के लालच में हमारी सभ्यता की नैतिक ऊंचाई एक इंच भी नहीं बढ़ी है। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री, नारायण दत्त, धर्मवीर भारती और प्रभाष जोशी पर गांधी युग का प्रभाव था और वे देश, समाज, भाषा और संस्कृति निर्माण के लिए पत्रकारिता कर रहे थे। उनका उद्देश्य व्यावसायिक नहीं था। इसीलिए वे अपने समय में बहुत सारी बातों को स्पष्ट तौर पर कह सके। गणेश मंत्री के जीवन और कृतित्व का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अंधभक्त थे। इसके बावजूद वे मार्क्स, गांधी और डॉ. आंबेडकर के गहन अध्येता थे और उन्होंने उनके विचारों को ‘धर्मयुग’ जैसे व्यापक प्रसार वाली पत्रिका में जगह दी। उन्होंने कहा कि गणेश मंत्री का पत्रकारीय जीवन उनके विद्यार्थी जीवन का ही विस्तार है,क्योंकि अध्ययनशीलता उनमें अंत तक बनी रही।

हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज संपादक के होते हुए भी गणेश मंत्री छह लाख प्रसार वाली ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका में न सिर्फ रचनात्मक साहित्य के लिए स्थान निकालते थे, बल्कि राजनीतिक विचारों के लिए भी जगह बना लेते थे। हरिवंश ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के दिनों में ‘टाइम्स आफ इंडिया’ समूह में पत्रकारिता शुरू की और उस समय गणेश मंत्री ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पत्रकारिता ही करेंगे तो अपने छोटे भाई के रूप में स्नेह और सहयोग दिया और उनके लेखन व विचारों को गढ़ा। गणेश मंत्री के प्रभाव का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जेल से छूटने के बाद जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता ने सबसे पहले गणेश मंत्री को ही इंटरव्यू दिया। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री के पिता राजस्थान सरकार में मंत्री थे पर उनकी सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से मना करके गणेश मंत्री ने दर्शा दिया था कि पत्रकार के लिए नैतिकता और चरित्र का कितना महत्त्व होता है। गणेश मंत्री ने एक बार देश के सबसे बड़े उद्योगपति के बेटे की शादी का कार्ड और उसके साथ आया उपहार भी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि वे उद्योगपति उनके किसी कार्यक्रम में क्या आएंगे और क्या वे उन्हें इतना महंगा उपहार दे पाएंगे। 

कार्यक्रम के दूसरे दिन पूर्वाह्न में नारायण दत्त के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त मूलतः तेलुगूभाषी थे। उनका परिवार कर्नाटक में बसा, जहां उन्होंने कन्नड़ सीखी। फिर नारायण दत्त बंबई (अब मुंबई) आए, जहां उन्होंने मराठी, तमिल सीखी। वे हिंदी के गंभीर अध्येता थे ही और भाषा के मामले में बहुत संवेदनशील थे। नारायण दत्त किसी भी प्रकार की भाषा त्रुटि को बर्दाश्त नहीं करते थे। यह उनके ‘नवनीत’ और ‘पीटीआई’ की हिंदी फीचर सेवा के संपादन के दौरान कई बार साबित हुआ। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त शोध कर्ता भी थे और कांग्रेस के सौ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने पीटीआई फीचर से कांग्रेस के इतिहास और उसके अध्यक्षों पर जो शृंखला चलाई, वह सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। रिटायर होने के बाद नारायण दत्त बेहद लोकप्रिय कैलेंडर ‘काल निर्णय’ का संपादन करते थे और वह त्रुटिहीन होता था। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त के बड़े भाई एचवाई शारदा प्रसाद इंदिराजी के प्रेस सलाहकार थे। वे भी सादगी की प्रतिमूर्ति थे। एक बार वे ‘धर्मयुग’ के दफ्तर आए और टाइम्स के अधिकारियों से पूछा-हरिवंश से मिलना है। वे मेरी कुर्सी के सामने आकर बैठ गए और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बीमारी के दौरान मैंने नारायण दत्त की सेवा-सुश्रुषा की।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अपराह्न धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती ने कठोर श्रम से ‘धर्मयुग’ को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने ‘धर्मयुग’ को सात लाख की प्रसार संख्या तक पहुंचाया और उसे पाठकों की संख्या में परिवर्तित किया जाय तो वह संख्या एक करोड़ तक जाती है। इतना बड़ा पाठक वर्ग धर्मवीर भारती के कठोर श्रम से निर्मित हुआ। वे ठीक सुबह साढ़े नौ बजे दफ्तर आ जाते थे। उनके मन-मस्तिष्क और कार्यालय की आलमारियों में ‘धर्मयुग’ की योजना चलती रहती थी। वे निरंतर अपने उप संपादकों को बुलाकर हर पेज की तात्कालिक और अग्रिम सामग्री और तस्वीर के बारे में तय करते थे। उन्होंने स्वयं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग की। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता उनसे मिलने के लिए ‘धर्मयुग’ आते थे, किंतु वे काम में इतने मग्न रहते थे कि उनसे नहीं मिल पाते थे। इस वजह से कुछ लोगों द्वारा उन्हें तानाशाह और घमंडी कहकर लांछित किया गया, जबकि उन्होंने मुनादी शीर्षक से कविता लिखकर इंदिराजी की तानाशाही को चुनौती दी थी। वे इतने भावुक और संवेदनशील थे कि जयप्रकाश नारायण पर 4 नवंबर 1974 को पटना में पुलिस लाठी चार्ज की तस्वीर देखकर विचलित हो गए। वह तस्वीर रघुराय ने खींची थी, जिसमें पुलिस जेपी पर लाठी ताने हुई थी। उस तस्वीर को देखकर धर्मवीर भारती चार-पांच दिनों तक भयंकर बेचैन रहे और नौ नवंबर की रात दस बजे मुनादी कविता के रूप में उनका आक्रोश उबल पड़ा। धर्मवीर भारती ने ‘धर्मयुग’ को बनाने के लिए अपने साहित्यकार की बलि चढ़ा दी। यही वजह है कि गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और कनुप्रिया जैसी श्रेष्ठ रचनाएं धर्मयुग का संपादक बनने से पहले लिखी गईं। हरिवंश ने बताया कि किस तरह उनसे भारतीजी ने ‘धर्मयुग’ की कई आमुख कथाएं लिखवाईं।

कार्यक्रम के चौथे सत्र में 29 मार्च 2019 को पूर्वाह्न हरिवंश ने प्रभाष जोशी के रचनात्मक अवदान पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी प्रामाणिक पत्रकारिता के जीवंत उदाहरण थे। समझ, दृष्टि, भाषा संस्कार, संचार कौशल जैसे विशिष्ट गुणों में प्रभाष जोशी एक आदर्श थे, उनके जैसा अब तक कोई दूसरा नहीं हुआ है। आज बहुत कम लोग हैं जो सही को सही कहने का साहस रखते हैं, प्रभाष जोशी वैसी ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे जहां भी होते थे सिर्फ उनकी मौजूदगी ही प्रभावपूर्ण होती थी। हरिवंश जी ने कहा कि मुल्क के बुनियादी सवालों पर देशज ज्ञान से किसी समस्या का हल निकालने वाले प्रभाष जी जैसा दूसरा कोई पत्रकार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी जमीनी हकीकत की लोक समझ रखते थे। वे हिंदी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के तीन संस्करणों का संपादन करने के बाद हिंदी पत्रकारिता की और ‘जनसत्ता’ के संस्थापक संपादक बने थे। रामनाथ गोयनका के साथ लगभग 20 वर्षों तक काम करने वाले प्रभाष जोशी अकेले संपादक थे। इतने वर्षों तक कोई संपादक गोयनका के साथ काम नहीं कर पाता था।

हरिवंश ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य किया है वैसा ही कार्य प्रभाष जोशी ने हिंदी पत्रकारिता में किया है। प्रभाष जी ने उच्च स्तर का ‘जनसत्ता’ अखबार निकाला, जिसकी पंच लाइन ‘सबकी खबर ले, सबको खबर दे’ वर्तमान में भी प्रासंगिक बनी हुई है। इस अखबार में उनके द्वारा लिखा जाने वाला कॉलम ‘कागद कारे’ बहुत लोकप्रिय हुआ। एक बार धर्मवीर भारती ने जनसत्ता अखबार को देखकर कहा था, ‘यह अद्वितीय अखबार है।‘ हर व्याख्यान के बाद हरिवंश ने श्रोताओं के प्रश्नों के जवाब भी दिए। हरिवंश के विभिन्न व्याख्यान कार्यक्रमों की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र और सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजय दत्त श्रीधर ने की। सप्रे संग्रहालय, भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा और आवासीय लेखिका डा. पुष्पिता अवस्थी ने भी पुरोधा संपादकों पर अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों का संचालन राजेश लेहकपुरे, धरवेश कठेरिया, अशोक मिश्र और रेणु सिंह ने किया। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृष्णकुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी, संदीप कुमार वर्मा और वैभव उपाध्याय ने किया। विषय प्रवर्तन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुरोधा संपादकों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत और स्वागत लोकगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन अपना प्रायोगिक अखबार ‘मीडिया समय’ निकाला। विद्यार्थियों के प्रायोगिक रेडियो बुलेटिन ‘वर्धा वाणी’ एवं प्रायोगिक टेलिविजन बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रतिदिन प्रसारण किया गया।

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वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा नहीं रहे

मायानगरी में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा के बारे में बुरी खबर मिली है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019

मायानगरी में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा के बारे में बुरी खबर मिली है। बताया गया है कि संडे सुबह उन्हें हार्ट अटैक हुआ। इस अटैक के बाद चिकित्सक उन्हें बचा नहीं पाए। वे मुंबई के मशहूर अखबार ‘दोपहर का सामना’ में सहायक संपादक के तौर पर कार्यरत थे।

54 वर्षीय शर्मा अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। पत्नी के साथ दो बेटों के साथ पोतों उनके परिवार में है।  उनकी अस्थियां नासिक में विसर्जित कर दी गईं।
 

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कनौजिया की तरह इस पत्रकार की गिरफ्तारी पर हल्ला क्यों नहीं?

पत्रकार की गिरफ्तारी पर अब उठने लगे हैं सवाल, पत्नी ने लगाए पुलिस पर कई आरोप

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Rupesh Kumar

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किये गए पत्रकार प्रशांत कनौजिया भले ही मीडिया संस्थानों के दबाव और सुप्रीम कोर्ट के दखल के चलते सलाखों से बाहर निकल आये हों, लेकिन झारखंड का एक पत्रकार अभी भी अपनी रिहाई की बाट जोह रहा है। फ्रीलांस जर्नलिस्ट रूपेश कुमार सिंह समेत तीन लोगों को कुछ दिन पहले नक्सली बताकर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इनके पास से विस्फोटक बरामद किया गया है, जबकि रूपेश कुमार की पत्नी इप्सा सताक्षी का दावा है कि उनके पति को गिरफ्तार कहीं से किया गया, दिखाया कहीं और गया। इतना ही नहीं, विस्फोटक को बाकायदा प्रायोजित तरीके से उनकी गाड़ी में प्लांट कर दिया गया।

स्थानीय अखबार ‘प्रभात खबर’ में इस संबंध में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि रूपेश कुमार, मिथलेश कुमार सिंह और उनके ड्राइवर मोहम्मद कलाम को गया से 30 किमी दूर हाईवे से विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर मीडिया में आई, बिहार पुलिस ने रूपेश के रामनगर और बोकारो स्थित घर पर छापा मारा और उनका लैपटॉप, फोन सहित कुछ कथित नक्सल साहित्य बरामद करके ले गई। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जिसे पुलिस नक्सल साहित्य बता रही है, वो कुछ और नहीं, बल्कि मैगजीन ‘लाल माटी’ में रूपेश के प्रकाशित लेख हैं, रूपेश ‘लाल माटी’ के संपादक भी हैं।

इप्सा सताक्षी का भी यही कहना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने घर की तलाशी लेने से पहले कोई वारंट नहीं दिखाया। उनके बार-बार मांगने पर भी अधिकारी खामोश रहे। यह पूरा मामला 4 जून से शुरू हुआ, जब मिथलेश के पैतृक गाँव औरंगाबाद जाते वक़्त सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। काफी देर तक जब सभी का कोई पता नहीं चला तो मिथलेश के परिवार ने रामगढ़ पुलिस स्टेशन में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। इसके बाद मामले में मोड़ उस वक़्त आया जब मिथलेश ने रूपेश के भाई को अपने सकुशल होने और वापस लौटने की बात कही, हालांकि ऐसा हुआ नहीं।

दो दिन बाद यानी 6 जून को आला पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि पुलिस को विस्फोटक से लदे वाहन के नेशनल हाईवे से गुजरने की खबर मिली थी, जिसके आधार पर पत्रकार रूपेश सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का यहां तक कहना है कि रूपेश पहले भी नक्सलियों को विस्फोटक सप्लाई करता रहा था। पुलिस की इस थ्योरी पर शक इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि स्थानीय पत्रकारों को रूपेश से मिलने नहीं दिया जा रहा है।

वहीं, रूपेश से जेल में मुलाकात के बाद उनकी पत्नी का कहना है कि तीनों की गिरफ्तारी आईबी द्वारा 4 जून को सुबह 9.30 बजे की गई, जबकि पुलिस 6 जून की गिरफ्तारी दिखा रही है। जब सभी सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करके टॉयलेट जा रहे थे, तभी उन पर अचानक पीछे से हमला बोला गया और बाल खींचकर, आंखों पर पट्टी बांधकर बाराचट्टी के कोबरा बटालियन कैम्प ले जाया गया। जहां रूपेश को बिल्कुल भी सोने नहीं दिया गया और रात भर बुरी तरीके से दिमागी टार्चर किया गया। उन्हें धमकाया गया कि व्यवस्था या सरकार के खिलाफ लिखना छोड़ दो। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि ‘पढ़े-लिखे हो, अच्छे से आराम से कमाओ, खाओ। ये आदिवासियों के लिए इतना क्यों परेशान रहते हो। कभी कविता, कभी लेख। इससे आदिवासियों व माओवादियों का मनोबल बढ़ता है भाई। क्या मिलेगा इससे। जंगल, जमीन के बारे में बड़े चिंतित रहते हो, इससे कुछ हासिल नहीं होना है। शादीशुदा हो, परिवार है, उनके बारे में सोचो। सरकार कितनी अच्छी-अच्छी योजनाएं लायी है। इनके बारे लिखो। आपसे कोई दुश्मनी नहीं है,छोड़ देंगे’।

इप्सा सताक्षी के अनुसार, तीनों को कहा गया कि आप लोगों को छोड़ देंगे और 5 जून को मिथिलेश कुमार से दोपहर 1 बजे कॉल भी करवाया गया, लेकिन किसी को छोड़ा नहीं गया। 5 जून को रूपेश को 4 घंटे सोने दिया गया फिर 5 जून की शाम को कोबरा बटालियन के कैम्प में ही इनके सामने विस्फोटक गाड़ी में रखा गया। विरोध करने पर शेरघाटी एएसपी रवीश कुमार ने कहा, ‘अरे पकड़े हैं तो ऐसे ही छोड़ देंगे? अपनी तरफ से केस पूरी मजबूती से रखेंगे रूपेश जी।’ फिर इसी विस्फोटक को दिखाकर डोभी थाने में प्रेस कांफ्रेंस की गई और तीनों को शेरघाटी जेल भेज दिया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर हल्ला मचा था, वैसा रूपेश कुमार के मामले में क्यों नहीं है? एडिटर गिल्ड सहित सभी संस्थाओं की ख़ामोशी इस सवाल को पुख्ता करती है कि क्या मीडिया को केवल दिल्ली में होने वाली हलचल ही दिखाई देती है?

 

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क्रिकेट वर्ल्ड कप में स्टार नेटवर्क ने कायम किया ये रिकॉर्ड

इस टूर्नामेंट के तहत फाइनल मैच 14 जुलाई को खेला जाएगा।

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Star

30 मई को शुरुआत के बाद से ही क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 का खुमार लोगों पर छाया हुआ है। दुनियाभर में इसके दर्शकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। क्रिकेट के इस महाकुंभ में पिछली बार की तरह ही दर्शकों के मामले में कई रिकॉर्ड बने हैं। भारत में मैच टेलिकास्ट करने वाले स्टार नेटवर्क के अनुसार,इस आयोजन की शुरुआत के बाद से पहले हफ्ते (30 मई से पांच जून तक) में रिकॉर्ड 26.9 करोड़ दर्शकों ने इसे देखा है। इस टूर्नामेंट के तहत फाइनल मैच 14 जुलाई को खेला जाएगा।

इस अवधि के दौरान नौ मैच खेले गए थे, जिनमें भारत का भी एक मैच शामिल था। वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे अधिक लोगों ने इस बार मैच देखा है। यदि औसत निकाला जाए तो अब तक क्रिकेट वर्ल्ड कप को रिकॉर्ड 10.72 करोड़ लोगों ने स्टार नेटवर्क पर देखा है। यह किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में अब तक सबसे ज्यादा औसत है। क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में भारत ने अपना पहला मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ पांच जून को खेला था। इस मैच को स्टार नेटवर्क पर 18 करोड़ लोगों ने देखा।

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अमर उजाला फाउंडेशन की इस पहल में आप भी हो सकते हैं शामिल

14 जून से शुरू होकर विभिन्न राज्यों में कई दिनों तक चलाया जाएगा अभियान

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Amar Ujala

अमर उजाला, फाउंडेशन की ओर से 14 जून 2019 को विश्व रक्तदाता दिवस पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में विभिन्न स्थानों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

यह आयोजन 14 जून से शुरू होकर कई दिनों तक जारी रहेगा। इस बारे में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से गुजारिश की गई है कि आप इन दिनों इन राज्यों में कहीं भी हों, स्वैच्छिक रक्तदान करके किसी की जान बचा सकते हैं और पुण्य के भागी बन सकते हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ के बारे में आई बुरी खबर

काफी दिनों से चल रहे थे बीमार, लखनऊ स्थित अपने आवास पर ली अंतिम सांस

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Rajnath Singh Surya

वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सांसद राजनाथ सिंह 'सूर्य' का गुरुवार की सुबह निधन हो गया है। रामनगरी अयोध्या जनपद के जनौरा मोहल्ला निवासी राजनाथ सिंह कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्होंने लखनऊ स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

राजनाथ सिंह 'सूर्य' अपनी लेखनी तथा प्रखर विचारों के कारण काफी विख्यात थे। वह भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा के सदस्य रहे थे। राजनाथ सिंह 'सूर्य' का पार्थिव शरीर किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में रखा जाएगा। उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था। दोपहर बाद उनकी देह को दान करने के लिए शवयात्रा पत्रकारपुरम, गोमती नगर से केजीएमयू के लिए प्रस्थान करेगी।

सरल स्वभाव के राजनाथ सिंह 'सूर्य' पत्रकारिता जगत में काफी प्रसिद्ध थे। उन्होंने हमेशा मीडिया के हित की बात की थी। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही मीडिया के पक्ष में भी उन्होंने जोरदार अभियान भी चलाया था। राजनाथ सिंह 'सूर्य' के निधन पर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक जताते हुए दिवंगत के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।

वहीं, केंद्रीय रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, रीता बहुगुणा जोशी, कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, बृजेश पाठक ने भी राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि सच्ची राह दिखाने वाले शुभचिंतक और अभिभावक का इस तरह अचानक चले जाना दुखद है।

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हिंदी सुधार के लिए दैनिक जागरण की बड़ी पहल, हर महीने दिए जाएंगे 75 हजार रुपये

‘हिंदी हैं हम’ ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत शोधार्थियों को मिलेंगे हर महीने 75 हजार रुपए

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
Dainik Jagran

हिंदी भाषा में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए दैनिक जागरण द्वारा ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के अंतर्गत ‘ज्ञानवृत्ति’ के दूसरे संस्करण के लिए आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के तहत सामाजिक, आर्थिक, कूटनीति, इतिहास और राजनीतिक आदि विषयों पर स्तरीय शोध को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। ‘हिंदी हैं हम’  ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत शोधार्थियों को हर महीने 75 हजार रुपए मिलेंगे।

दरअसल लंबे समय से हिंदी में यह बहस जारी है कि अपनी भाषा में शोध को कैसे बढ़ावा दिया जाए। इस बहस को अंजाम तक पहुंचाने के लिए और हिंदी में विभिन्न विषयों पर मौलिक लेखन के लिए ज्ञानवृत्ति द्वारा देशभर के शोधार्थियों को आमंत्रित किया जाता है। शोधार्थियों से अपेक्षा है कि वे संबंधित विषय पर हजार शब्दों में एक सिनॉप्सिस भेजें। इस पर निर्णायक मंडल की ओर से मंथन कर विषय और शोधार्थी का चयन किया जाएगा।

चयनित विषय पर शोधार्थी को कम से कम छह महीने और अधिकतम नौ महीने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति दी जाती है। पिछले साल तीन शोधार्थियों को ज्ञानवृत्ति के तहत चुना गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 1 जुलाई 2019 है और आवेदक की उम्र 01 जनवरी 2019 को 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के निर्णायक मंडल सदस्यों में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के प्रो. एसएन चौधरी और  दूसरे सदस्य डॉ. दरवेश गोपाल, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा चयन समिति में दैनिक जागरण का संपादक मंडल भी मौजूद रहेगा। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति में आवेदन करने के लिए और अपने शोध की रूपरेखा प्रस्तुत करने के लिए कृपया www.jagranhindi.in पर लॉगिन कर सकते हैं। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के नियम और शर्तें भी इस वेबसाइट पर हैं।

प्रथम दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के तीन विजेता रहे थे। इनमें इलाहाबाद की दीप्ति सामंत रे को उनके प्रस्तावित शोध 'प्रधानमंत्री जनधन योजना के भारत में वित्तीय समावेशन पर प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण' पर शोध के लिए चुना गया था। दूसरी शोधार्थी लखनऊ की नाइश हसन थीं, जिनके शोध का विषय था ‘भारत के मुस्लिम समुदाय में मुता विवाह, एक सामाजिक अध्ययन’। तीसरे शोधार्थी  बलिया के निर्मल कुमार पाण्डेय थे, जिनके शोध का विषय था 'हिंदुत्व का राष्ट्रीयकरण बजरिए हिंदी हिंदू हिन्दुस्तान, औपनिवेशिक भारत में समुदायवादी पुनरुत्थान की राजनीति और भाषाई-धार्मिक-सांस्कृतिक वैचारिकी का सुदृढ़ीकरण।'

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दूरदर्शन केंद्र में बड़ा हादसा, लाखों का हुआ नुकसान

गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई

Last Modified:
Tuesday, 11 June, 2019
Doordarshan

उत्तर प्रदेश में मथुरा-वृंदावन मार्ग स्थित आकाशवाणी केंद्र के अंदर बने दूरदर्शन कक्ष के इलेक्ट्रानिक्स रूम में मंगलवार की तड़के आग लग गई। आग से लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया, अन्यथा हादसा और बड़ा हो सकता था। बताया जाता है कि आग पर यदि जल्द काबू न पाया जाता तो यहां करोड़ों रुपए से बना स्टूडियो, एडिटिंग रूम, रिले उपकरण आदि जलकर राख हो जाते। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। गनीमत रही कि आग से कोई जनहानि नहीं हुई।

वृंदावन मार्ग पर मसानी क्षेत्र में आकाशवाणी केंद्र बना हुआ है। इसी बिल्डिंग में दूरदर्शन केंद्र है, जहां प्रोडक्शन और रिकार्डिंग आदि का काम किया जाता है और फिर उसे लखनऊ-दिल्ली के दूरदर्शन केंद्रों को भेजा जाता है। मंगलवार की सुबह करीब साढ़े पांच बजे सिक्योरिटी गार्ड कटेरूमल ने दूरदर्शन रिले केंद्र के एक कक्ष तेज धुआं निकलता हुआ देखा। इसके बाद उसने कार्यालय प्रभारी पीसी शर्मा को मामले की सूचना दी, जिसके बाद फायर बिग्रेड को सूचित किया गया। इसके बाद फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो चुका था।

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चैनल हेड व संपादक की गिरफ्तारी पर पढ़िए पुलिसिया वर्जन

नोएडा से संचालित होने वाले न्यूज चैनल के दो अधिकारियों पर हुई है कार्रवाई

Last Modified:
Monday, 10 June, 2019
ARREST

नोएडा से संचालित होने वाले न्यूज चैनल 'नेशन लाइव' (Nation Live) की चैनल हेड इशिका सिंह और संपादक अनुज शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद नोएडा पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस प्रेस विज्ञप्ति में नोएडा पुलिस ने बताया है कि आखिर किन परिस्थितियों में इन दोनों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस का कहना है कि छह जून को चैनल पर हुई परिचर्चा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों का प्रसारण बिना तथ्यों की पड़ताल के किया गया। इसके अलावा चैनल के पास संचालन संबंधी लाइसेंस भी नहीं है और यह दूसरे के नाम पर बिना अनुमति प्राप्त किए संचालित हो रहा है।

नोएडा पुलिस की ओर से किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

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बेडरूम में लटकी मिली पत्रकार की लाश, इस एंगल से भी जांच कर रही पुलिस

पुलिस कमिश्नर ने पीड़ित परिवार को जांच का भरोसा दिया

Last Modified:
Monday, 10 June, 2019
Nayaz Khan

बेंगलुरु से एक बुरी खबर सामने आई है। यहां केआर पुरम में रहने वाले पत्रकार नियाज खान का शव उनके घर से बरामद किया गया है। प्रारंभिक तौर पर पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौत के कारणों का अब तक पता नहीं चला है, फ़िलहाल अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है, लेकिन जांच जारी है। पुलिस कमिश्नर टी सुनील कुमार ने पीड़ित परिवार को जांच का भरोसा दिया है।

बताया जाता है कि नियाज स्थानीय चैनल ‘प्रजा टीवी’ से बतौर स्ट्रिंगर जुड़े हुए थे। बुधवार सुबह जब नियाज की पत्नी उनके कमरे में पहुंची तो नियाज को पंखे से लटका पाया। नियाज के अचानक इस तरह चले जाने से उनकी पत्नी और बेटी सदमे में हैं। किसी को समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर नियाज खान ने मौत को गले क्यों लगाया। पुलिस इस एंगल को ध्यान में रखकर भी जांच कर रही है कि कहीं किसी खबर को लेकर नियाज किसी दबाव में तो नहीं थे।

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बढ़ते प्रदूषण के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए शुरू हुई ये सार्थक पहल

छह से आठ जून तक लाइव पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा

Last Modified:
Wednesday, 05 June, 2019
Environment

लोगों को प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या के बारे में जागरूक करने के लिए ‘इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर ऑफ आर्ट्स’ (IGNCA)  के साथ मिलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति संस्थान की ओर से विश्व पर्यावरण सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके तहत फोटोग्राफी और पेंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का आयोजन चार से दस जून तक ट्विन वन गैलरी, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर ऑफ आर्ट्स, 11 मान सिंह रोड, केंद्रीय सचिवालय में किया जा रहा है।

इस प्रदर्शनी में करीब 70 पेंटर्स, फोटोग्राफर्स और कार्टूनिस्ट अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रदूषण के बढ़ते खतरे और उससे बचाव के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा यहां छह से आठ जून के बीच लाइव पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पेंटर्स को पर्यावरण के बारे में अपनी भावनाएं और विचार उकेरने का मौका मिलेगा। इस प्रदर्शनी में फोटो जर्नलिस्ट और आर्टिस्ट अंजलि सिन्हा की फोटोग्राफ्स और पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई हैं।

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य प्रदूषण से निपटने और वातावरण को बचाने के साथ ही उन लोगों को जागरूक करना भी है, जो पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने के प्रति गंभीर नहीं हैं। इस प्रदर्शनी में सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और बीजेपी के वाइस प्रेजिडेंट श्याम जाजू समेत कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।

बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति संस्थान दुनिया को बढ़ते प्रदूषण से बचाने की दिशा में लंबे समय से लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। इसके लिए तमाम प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक, रैली और सेमिनार के माध्यम से आम आदमी को प्रदूषण के खतरे के बारे में बताया जाता है और उनसे प्रदूषण न करने की अपील की जाती है।

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