पुरोधा संपादकों की कहानीः हरिवंश की जुबानी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’...

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Friday, 05 April, 2019
Wardha

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में ‘पुरोधा संपादकों की कहानी: हरिवंश की जुबानी’ कार्यक्रम 27 से 29 मार्च 2019 तक आयोजित किया गया। हरिवंश ने हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन 27 मार्च 2019 की शाम गणेश मंत्री के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। दूसरे दिन 28 मार्च 2019 को हरिवंश ने नारायण दत्त और धर्मवीर भारती पर और तीसरे दिन 29 मार्च 2019 की सुबह प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर व्याख्यान दिया।

पहले दिन का कार्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार तथा दूसरे व तीसरे दिन का कार्यक्रम जनसंचार विभाग के माधव राव सप्रे सभा कक्ष में आयोजित हुआ। पुरोधा संपादकों का पुण्य स्मरण करते हुए हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में विचार, मूल्य और चरित्र की कमी है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता पूंजी प्रधान है, इसलिए वह उन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे पा रही है, जो मानवता के भविष्य के लिए जरूरी हैं।

हरिवंश ने कहा कि आज के पत्रकार तथ्यों की जांच किए बिना खबरें करते हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सही बात लिखने से बचते हैं। वे यह भी नहीं बताते कि हमारा देश गंभीर आर्थिक परेशानियों में है और जिस आर्थिक नीति पर चल रहे हैं, उसका भविष्य खतरनाक है। ऐसे मौके पर उन संपादकों का स्मरण जरूरी है, जो विचार और साहस की पत्रकारिता के आखिरी युग की कड़ी थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि विकास का मौजूदा रास्ता खतरनाक है। इसलिए सभ्यता को कोई और मार्ग चुनना होगा। ऐसे समय में महात्मा गांधी सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के महत्त्वपूर्ण कथन पागल दौड़ का जिक्र करते हुए कहा कि भौतिक सुविधाओं को जमा करने के लालच में हमारी सभ्यता की नैतिक ऊंचाई एक इंच भी नहीं बढ़ी है। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री, नारायण दत्त, धर्मवीर भारती और प्रभाष जोशी पर गांधी युग का प्रभाव था और वे देश, समाज, भाषा और संस्कृति निर्माण के लिए पत्रकारिता कर रहे थे। उनका उद्देश्य व्यावसायिक नहीं था। इसीलिए वे अपने समय में बहुत सारी बातों को स्पष्ट तौर पर कह सके। गणेश मंत्री के जीवन और कृतित्व का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कहा कि वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के अंधभक्त थे। इसके बावजूद वे मार्क्स, गांधी और डॉ. आंबेडकर के गहन अध्येता थे और उन्होंने उनके विचारों को ‘धर्मयुग’ जैसे व्यापक प्रसार वाली पत्रिका में जगह दी। उन्होंने कहा कि गणेश मंत्री का पत्रकारीय जीवन उनके विद्यार्थी जीवन का ही विस्तार है,क्योंकि अध्ययनशीलता उनमें अंत तक बनी रही।

हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती जैसे दिग्गज संपादक के होते हुए भी गणेश मंत्री छह लाख प्रसार वाली ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका में न सिर्फ रचनात्मक साहित्य के लिए स्थान निकालते थे, बल्कि राजनीतिक विचारों के लिए भी जगह बना लेते थे। हरिवंश ने बताया कि उन्होंने आपातकाल के दिनों में ‘टाइम्स आफ इंडिया’ समूह में पत्रकारिता शुरू की और उस समय गणेश मंत्री ने उन्हें हतोत्साहित किया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पत्रकारिता ही करेंगे तो अपने छोटे भाई के रूप में स्नेह और सहयोग दिया और उनके लेखन व विचारों को गढ़ा। गणेश मंत्री के प्रभाव का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जेल से छूटने के बाद जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता ने सबसे पहले गणेश मंत्री को ही इंटरव्यू दिया। हरिवंश ने कहा कि गणेश मंत्री के पिता राजस्थान सरकार में मंत्री थे पर उनकी सरकारी गाड़ी का उपयोग करने से मना करके गणेश मंत्री ने दर्शा दिया था कि पत्रकार के लिए नैतिकता और चरित्र का कितना महत्त्व होता है। गणेश मंत्री ने एक बार देश के सबसे बड़े उद्योगपति के बेटे की शादी का कार्ड और उसके साथ आया उपहार भी लेने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि वे उद्योगपति उनके किसी कार्यक्रम में क्या आएंगे और क्या वे उन्हें इतना महंगा उपहार दे पाएंगे। 

कार्यक्रम के दूसरे दिन पूर्वाह्न में नारायण दत्त के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त मूलतः तेलुगूभाषी थे। उनका परिवार कर्नाटक में बसा, जहां उन्होंने कन्नड़ सीखी। फिर नारायण दत्त बंबई (अब मुंबई) आए, जहां उन्होंने मराठी, तमिल सीखी। वे हिंदी के गंभीर अध्येता थे ही और भाषा के मामले में बहुत संवेदनशील थे। नारायण दत्त किसी भी प्रकार की भाषा त्रुटि को बर्दाश्त नहीं करते थे। यह उनके ‘नवनीत’ और ‘पीटीआई’ की हिंदी फीचर सेवा के संपादन के दौरान कई बार साबित हुआ। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त शोध कर्ता भी थे और कांग्रेस के सौ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने पीटीआई फीचर से कांग्रेस के इतिहास और उसके अध्यक्षों पर जो शृंखला चलाई, वह सबसे प्रामाणिक दस्तावेज है। रिटायर होने के बाद नारायण दत्त बेहद लोकप्रिय कैलेंडर ‘काल निर्णय’ का संपादन करते थे और वह त्रुटिहीन होता था। हरिवंश ने कहा कि नारायण दत्त के बड़े भाई एचवाई शारदा प्रसाद इंदिराजी के प्रेस सलाहकार थे। वे भी सादगी की प्रतिमूर्ति थे। एक बार वे ‘धर्मयुग’ के दफ्तर आए और टाइम्स के अधिकारियों से पूछा-हरिवंश से मिलना है। वे मेरी कुर्सी के सामने आकर बैठ गए और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि बीमारी के दौरान मैंने नारायण दत्त की सेवा-सुश्रुषा की।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अपराह्न धर्मवीर भारती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए हरिवंश ने कहा कि धर्मवीर भारती ने कठोर श्रम से ‘धर्मयुग’ को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने ‘धर्मयुग’ को सात लाख की प्रसार संख्या तक पहुंचाया और उसे पाठकों की संख्या में परिवर्तित किया जाय तो वह संख्या एक करोड़ तक जाती है। इतना बड़ा पाठक वर्ग धर्मवीर भारती के कठोर श्रम से निर्मित हुआ। वे ठीक सुबह साढ़े नौ बजे दफ्तर आ जाते थे। उनके मन-मस्तिष्क और कार्यालय की आलमारियों में ‘धर्मयुग’ की योजना चलती रहती थी। वे निरंतर अपने उप संपादकों को बुलाकर हर पेज की तात्कालिक और अग्रिम सामग्री और तस्वीर के बारे में तय करते थे। उन्होंने स्वयं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की रिपोर्टिंग की। बड़े-बड़े नेता और अभिनेता उनसे मिलने के लिए ‘धर्मयुग’ आते थे, किंतु वे काम में इतने मग्न रहते थे कि उनसे नहीं मिल पाते थे। इस वजह से कुछ लोगों द्वारा उन्हें तानाशाह और घमंडी कहकर लांछित किया गया, जबकि उन्होंने मुनादी शीर्षक से कविता लिखकर इंदिराजी की तानाशाही को चुनौती दी थी। वे इतने भावुक और संवेदनशील थे कि जयप्रकाश नारायण पर 4 नवंबर 1974 को पटना में पुलिस लाठी चार्ज की तस्वीर देखकर विचलित हो गए। वह तस्वीर रघुराय ने खींची थी, जिसमें पुलिस जेपी पर लाठी ताने हुई थी। उस तस्वीर को देखकर धर्मवीर भारती चार-पांच दिनों तक भयंकर बेचैन रहे और नौ नवंबर की रात दस बजे मुनादी कविता के रूप में उनका आक्रोश उबल पड़ा। धर्मवीर भारती ने ‘धर्मयुग’ को बनाने के लिए अपने साहित्यकार की बलि चढ़ा दी। यही वजह है कि गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, अंधा युग और कनुप्रिया जैसी श्रेष्ठ रचनाएं धर्मयुग का संपादक बनने से पहले लिखी गईं। हरिवंश ने बताया कि किस तरह उनसे भारतीजी ने ‘धर्मयुग’ की कई आमुख कथाएं लिखवाईं।

कार्यक्रम के चौथे सत्र में 29 मार्च 2019 को पूर्वाह्न हरिवंश ने प्रभाष जोशी के रचनात्मक अवदान पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी प्रामाणिक पत्रकारिता के जीवंत उदाहरण थे। समझ, दृष्टि, भाषा संस्कार, संचार कौशल जैसे विशिष्ट गुणों में प्रभाष जोशी एक आदर्श थे, उनके जैसा अब तक कोई दूसरा नहीं हुआ है। आज बहुत कम लोग हैं जो सही को सही कहने का साहस रखते हैं, प्रभाष जोशी वैसी ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वे जहां भी होते थे सिर्फ उनकी मौजूदगी ही प्रभावपूर्ण होती थी। हरिवंश जी ने कहा कि मुल्क के बुनियादी सवालों पर देशज ज्ञान से किसी समस्या का हल निकालने वाले प्रभाष जी जैसा दूसरा कोई पत्रकार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभाष जी जमीनी हकीकत की लोक समझ रखते थे। वे हिंदी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के तीन संस्करणों का संपादन करने के बाद हिंदी पत्रकारिता की और ‘जनसत्ता’ के संस्थापक संपादक बने थे। रामनाथ गोयनका के साथ लगभग 20 वर्षों तक काम करने वाले प्रभाष जोशी अकेले संपादक थे। इतने वर्षों तक कोई संपादक गोयनका के साथ काम नहीं कर पाता था।

हरिवंश ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य किया है वैसा ही कार्य प्रभाष जोशी ने हिंदी पत्रकारिता में किया है। प्रभाष जी ने उच्च स्तर का ‘जनसत्ता’ अखबार निकाला, जिसकी पंच लाइन ‘सबकी खबर ले, सबको खबर दे’ वर्तमान में भी प्रासंगिक बनी हुई है। इस अखबार में उनके द्वारा लिखा जाने वाला कॉलम ‘कागद कारे’ बहुत लोकप्रिय हुआ। एक बार धर्मवीर भारती ने जनसत्ता अखबार को देखकर कहा था, ‘यह अद्वितीय अखबार है।‘ हर व्याख्यान के बाद हरिवंश ने श्रोताओं के प्रश्नों के जवाब भी दिए। हरिवंश के विभिन्न व्याख्यान कार्यक्रमों की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र और सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक विजय दत्त श्रीधर ने की। सप्रे संग्रहालय, भोपाल की निदेशक डा. मंगला अनुजा और आवासीय लेखिका डा. पुष्पिता अवस्थी ने भी पुरोधा संपादकों पर अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों का संचालन राजेश लेहकपुरे, धरवेश कठेरिया, अशोक मिश्र और रेणु सिंह ने किया। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कृष्णकुमार सिंह, प्रो. मनोज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी, संदीप कुमार वर्मा और वैभव उपाध्याय ने किया। विषय प्रवर्तन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पुरोधा संपादकों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुई। जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने कुलगीत और स्वागत लोकगीत भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिदिन अपना प्रायोगिक अखबार ‘मीडिया समय’ निकाला। विद्यार्थियों के प्रायोगिक रेडियो बुलेटिन ‘वर्धा वाणी’ एवं प्रायोगिक टेलिविजन बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रतिदिन प्रसारण किया गया।

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इस वजह से हमलावरों ने दो पत्रकारों को बनाया निशाना, दी ये धमकी भी

देश में 17वीं लोकसभा चुनाव के गठन के लिए 18 अप्रैल 2019 को दूसरे चरण के तहत 13 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान हुआ

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Thursday, 18 April, 2019
Attack

देश में 17वीं लोकसभा चुनाव के गठन के लिए 18 अप्रैल 2019 को दूसरे चरण के तहत 13 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान हुआ। दूसरे चरण में जिन राज्यों में वोटिंग हुई, उनमें तमिलनाडु की 39, कर्नाटक की 14, पश्चिम बंगाल की तीन, असम की पांच, मणिपुर की एक, ओडिशा की पांच, त्रिपुरा की एक और पुडुचेरी की एक सीट शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा हुई है। रायगंज में दो पत्रकारों पर हमले का मामला सामने आया है, वहीं सीपीएम उम्मीदवार मोहम्मद सलीम के वाहन को भी निशाना बनाया गया है। बताया जाता है कि जिन दो पत्रकारों पर हमला हुआ है, उनमें ‘एबीपी आनंदा’ (ABP Ananda) के पार्थ प्रतिम घोष (Parthapratim Ghosh) और स्वप्न मजूमदार (Swapan Majumdar)  शामिल हैं। आरोप है कि दोनों पत्रकारों के कैमरे भी इस हमले में क्षतिग्रस्त हो गए। दोनों रिपोर्टरों को शिकायत मिली थी कि एक बूथ पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा है। इसके बाद दोनों रिपोर्टर इलाके में रिपोर्टिंग के लिए जा रहे थे, जहां पर रास्ते में कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि दोनों को मतदान बूथ के आसपास न फटकने की धमकी भी दी गई।

इसके बाद इलाके में पुलिस ने मौका संभालते हुए उपद्रव करने वालों को खदेड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ लोगों को पकड़ा गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। गौरतलब है कि इस बार सात  चरणों में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले गए थे। आखिरी चरण की वोटिंग 19 मई को होगी और सभी सीटों के नतीजे 23 मई को आएंगे।

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बाइक पर लिखवाया ‘प्रेस’ पर क्यों काम न आया ये तरीका

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है

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Thursday, 18 April, 2019
ARREST

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है। शायद यही कारण है कि वो अपने वाहनों पर ‘प्रेस’ लिखवा लेते हैं, फिर चाहे मीडिया से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध न हो। ऐसे लोगों को लगता है कि वाहन पर ‘प्रेस’ लिखा होने के कारण पुलिस भी उन्हें नहीं रोकेगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में एक युवक की ये चालाकी काम न आई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, बिलासपुर में बेलगहना क्षेत्र के ग्राम मझगांव में यह युवक चोरी की बाइक पर ‘प्रेस’ लिखवाकर घूम रहा था, लेकिन ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने उसे धर दबोचा। 20 वर्षीय इस युवक के कब्जे से चोरी की दो बाइक बरामद हुई हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों बाइक जब्त कर आरोपित युवक को जेल भेज दिया है।

बताया जाता है कि बेलगहना चौकी प्रभारी व एएसआइ हेमंत सिंह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। इस दौरान उन्हें पता चला कि मझगांव निवासी जितेंद्र रोहिदास पिता त्रिभुवन रोहिदास चोरी का पुराना आरोपित है। इन दिनों वह एक बाइक पर घूम रहा है, जिसके सामने ‘प्रेस’ लिखा है। खबर मिलते ही हेमंत सिंह ने दबिश देकर जितेंद्र को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान उससे बाइक के दस्तावेज की मांग की गई, लेकिन वह गोलमोल जवाब देने लगा। फिर उसे चौकी ले जाकर सख्ती से पूछताछ की गई, तब उसने बताया कि उसके पास एक और बाइक हैं और दोनों को उसने कोरबा जिले के पाली व कोरबा शहर से चोरी किया था।

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TIKTOK को नहीं मिली राहत, नियुक्त हुए Amicus Curiae

चीनी विडियो शेयरिंग ऐप ‘टिकटॉक’ को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है

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Thursday, 18 April, 2019
TIKTOK

चीनी विडियो शेयरिंग ऐप ‘टिकटॉक’ को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा ‘टिकटॉक’ पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इस बीच ‘गूगल’ और ‘एप्पल’ ने अपने प्ले स्टोर पर इस ऐप को ब्लॉक कर दिया है। इसके बाद भारत में चीन की कंपनी ‘बीजिंग बाइटडांस टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड‘(Beijing ByteDance Technology Co Ltd.) के इस ऐप को डाउनलोड नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट के आदेश के बारे में 'Aditya Singh Rathore, Associate, at Trust Legal, Advocates & Consultants' की पार्टनर पेटल चंडोक (Petal Chandhok) का कहना है, ‘मद्रास हाई कोर्ट ने 3 अप्रैल को केंद्र से ‘टिकटॉक’ ऐप पर बैन लगाने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि टिकटॉक ऐप पॉर्नोग्राफी को बढ़ावा देता है और बच्चों को यौन हिंसक बना रहा है। साथ ही कोर्ट ने मीडिया को निर्देश दिया था कि वो इस ऐप पर बने विडियो का प्रसारण न करे।’

चंडोक ने बताया,‘ हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद ‘टिकटॉक’ ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। ‘टिकटॉक’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके अलावा 16 अप्रैल 2019 को मद्रास हाई कोर्ट ने इस मोबाइल ऐप के उद्देश्यों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को अमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया है।‘

मद्रास हाई कोर्ट के इस ऑर्डर के बाद भारत में ‘टिकटॉक’ का भविष्य अनिश्चित है। सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए ‘गूगल’ और ‘एप्पल’ को अपने प्लेटफॉर्म से इस ऐप का डाउनलोड बंद करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद इन प्लेटफॉर्म पर इस ऐप को ब्लॉक कर दिया है।

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जानें, 15 वाइस चांसलर समेत 300 से अधिक शिक्षाविद् क्यों पहुंचे उपराष्ट्रपति के 'दरबार' में

माखनलाल यूनिवर्सिटी में विवादों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
MAKHANLAL

माखनलाल यूनिवर्सिटी में विवादों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बृजकिशोर कुठियाला सहित 20 प्रोफेसर व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अकडेमिशियन्स फ़ॉर फ्रीडम, दिल्ली, के तत्वावधान में 300 से अधिक प्राध्यापकों सहित 15 से अधिक कुलपति, पूर्व कुलपति और प्रति कुलपतियों ने विश्वविद्यालय पर राजनैतिक दमन का आरोप लगाते हुए उपराष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और इसमें हस्तक्षेप की मांग की है। ग़ौरतलब है कि उपराष्ट्रपति इस विश्वविद्यालय के विज़िटर (कुलाध्यक्ष) हैं और विश्वविद्यालय के अधिनियम के अंतर्गत उन्हें यह अधिकार प्राप्त है।

शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और अन्य 20 प्राध्यापकों पर बिना विधिसम्मत जाँच पड़ताल के गंभीर आरोपों पर एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोपी प्राध्यापकों को अपना पक्ष रखने का या कोई स्पष्टीकरण देने का भी अवसर नहीं दिया गया। ज्ञापन में देने वाले लोगों में राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीपचन्द अग्निहोत्री, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ के अध्यक्ष प्रो. कपिल कपूर, बी पी एस महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत की कुलपति प्रो. सुषमा यादव, सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो. के एन सिंह, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन के तनेजा, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के कुलपति प्रो. बिद्युत चक्रबर्ती, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी के प्रति कुलपति प्रो. अनिल राय, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति प्रो. मानसिंह परमार, भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. प्रेमचंद पतंजलि इत्यादि के नाम शामिल हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘हम सभी शिक्षकगण, हतप्रभ और आहत हैं कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्विद्यालय, भोपाल की महापरिषद के अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को, पूर्व कुलपति एवं अन्य 20 वर्तमान शिक्षकों पर बिना जाँच के और कई अप्रमाणित आरोपों पर FIR करने का आदेश दिया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों पर एफआईआर करने जैसा गंभीर कदम, एक सम्पूर्ण विधिसम्मत प्रक्रिया और स्पष्टीकरण के नोटिस भेजे जाने के पश्चात ही युक्तिसंगत माना जा सकता है। तब भी, उचित यही है, कि एक पूर्ण और पक्षपातरहित जाँच की जाए क्योंकि संबंधित व्यक्ति विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं और अत्यन्त जिम्मेदार नागरिक हैं।‘

ज्ञापन में कहा गया है, ‘हम आशंकित हैं कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष के इस कदम से राजनैतिक प्रतिशोध की गंध आती है। क्योंकि आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, अतः यह कदम स्पष्टतः असमर्थनीय है और निश्चित रूप से एक लंबी कानूनी लड़ाई की ओर ले जा सकता है। सरकार को भले ही इससे कोई अंतर ना पड़ता हो परन्तु यह शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत प्रताड़ित करने वाला होगा। इस संदर्भ को देखते हुए हमें संदेह है कि कोई भी जांच कमेटी जो विश्वविद्यालय द्वारा अपने कदम को तर्कसंगत सिद्ध करने के लिए स्थापित की जाती है या की जाएगी, वह पर्याप्त रूप से पक्षपातरहित और वस्तुनिष्ठ होगी। इससे विश्वविद्यालय और सरकार की विश्वसनीयता और छवि और भी अधिक धूमिल हो जाएगी।‘

शिक्षकों का यह भी कहना है, ‘हमारी मांग है कि शिक्षकों के विरुद्ध FIR तुरंत वापस ली जाए। यद्यपि किसी संस्था की जाँच करना सरकार का विशेषाधिकार है, उसी प्रकार यह भी सरकार का ही दायित्व है कि वह पक्षपातरहित रहे जिससे शिक्षकों के प्रति न्याय होना सुनिश्चित हो। अतः, विश्वविद्यालय केविजिटर, भारत के उपराष्ट्रपति से प्रार्थना है कि वे यथाशीघ्र इस विषय में हस्तक्षेप करें और इस विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष को परामर्श दें कि एफआईआर वापस लें और शिक्षकों को प्रताड़ित करना बंद करें।‘

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अब ब्यूटी सेगमेंट में हाथ आजमाएगा टाइम्स ग्रुप, बनाई ये स्ट्रैटेजी

‘टाइम्स समूह’ ने अपने ब्रैंड ‘फेमिना’(Femina) के साथ ब्यूटी सेगमेंट के क्षेत्र में उतरने की घोषणा की है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
TIMES

‘टाइम्स समूह’ ने अपने ब्रैंड ‘फेमिना’(Femina) के साथ ब्यूटी सेगमेंट के क्षेत्र में उतरने की घोषणा की है। इसके लिए समूह की ओर से एक वेंचर ‘टाइम्स लाइफस्टाइल एंटरप्राइज’ (Times Lifestyle Enterprise) भी बनाया गया है, जो ‘फेमिना फ्लॉन्ट’ (Femina Flaunt) को ब्यूटी सैलून सेगमेंट में लॉन्च करेगा। ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ के डायरेक्टर (ब्रैंड एक्सटेंशंस) संदीप दहिया को इस नए वेंचर का सीईओ बनाया गया है। वह अपनी वर्तमान जिम्मेदारी के साथ इस नए वेंचर का काम भी संभालेंगे।

इसके अलावा पूर्व में ‘यूनिलीवर इंडिया’ से जुड़े रहे दिनेश भट्ट को नए वेंचर का सीओओ नियुक्त किया गया है। वह दहिया को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही कंपनी मुंबई में जल्द ही अपना पहला यूनिसेक्स कोको (company-owned, company-operated) स्टूडियो सैलून खोलने की प्लानिंग कर रही है।

इस बारे में ‘टाइम्स ग्रुप’ के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन का कहना है, ‘भविष्य में आगे बढ़ने के अवसरों के लिए समूह नई चीजों में निवेश करने में विश्वास रखता है। इसलिए समूह की ओर से ब्यूटी सेगमेंट में एंट्री की गई है।’ वहीं, ‘दहिया’ का कहना है कि नया वेंचर इस सेगमेंट में ग्रोथ का हाइब्रिड मॉडल फॉलो करेगा। इसके लिए कोको सैलून खोले जाएंगे। पांच साल में ऐसे 100 से ज्यादा सैलून तैयार करने की योजना है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ‘शॉपर्स स्टॉप’ (Shoppers Stop) ने टाइम्स समूह के स्वामित्व में फैशन कैटेगरी के तहत ‘फेमिना फ्लॉन्ट’ ब्रैंड की शुरुआत की थी। इसके बाद समूह की योजना अब सैलून सेगमेंट में उतरने की है।

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यहां जानें, किस-किस को मिला प्रतिष्ठित 'पुलित्जर अवॉर्ड'

श्रेष्ठ पत्रकारिता और कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले पुलित्जर पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है

Last Modified:
Tuesday, 16 April, 2019
pulitzer

श्रेष्ठ पत्रकारिता और कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले पुलित्जर पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इसके तहत ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके परिवार से जुड़ी जानकारियों को खोजकर सामने लाने के लिए ‘पुलित्जर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।  

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को ट्रम्प परिवार के वित्त संबंधी मामलों में खुलासे के लिए पुरस्कार मिला है, जिसमें उसने ट्रम्प परिवार के खुद साम्राज्य खड़ा करने के दावों को खारिज किया था और एक ऐसे व्यापार साम्राज्य का खुलासा किया जो टैक्स संबंधी गड़बड़ी कर रहा है।

‘पुलित्जर पुरस्कार बोर्ड’ ने न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में यह जानकारी दी। वहीं ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को ट्रम्प के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान दो महिलाओं को गुप्त रूप से पैसे का भुगतान करने के मामले का खुलासा करने के लिए पुरस्कार मिला है। इनके अलावा ‘साउथ फ्लोरिडा सन-सेंटिनल’, ‘पिट्सबर्ग पोस्ट-गजट’, ‘एसोसिएटेड प्रेस’, ‘रॉयटर्स’ को भी अलग-अलग खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

 2019 के पुलित्जर अवॉर्ड की पूरी सूची आप निम्न लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं  

https://www.pulitzer.org/prize-winners-by-year  

गौरतलब है कि ‘पुलित्जर पुरस्कार’ अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है जो समाचार पत्रों, पत्रकारिता, साहित्य आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाता है।

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पत्रकार के परिवार पर टूटा बदमाशों का कहर, किया ये हाल

देश भर में मीडिया कर्मियों पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं

Last Modified:
Tuesday, 16 April, 2019
ATTACK

देश भर में मीडिया कर्मियों पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। नया मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का है, जहां पर कुछ बदमाशों ने मीडियाकर्मी के घर में घुसकर तलवार से हमला कर दिया। इस हमले में रिपोर्टर समेत उसके पिता और भाई को गंभीर चोटें आई है।

ये घटना रायपुर के गोकुल नगर की है। जहां एक लोकल रिपोर्टर श्रीकांत के घर देर रात को 4-5 बदमाश घुस आए और तलवार से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। रिपोर्टर के अलावा हमलावरों ने उनके पिता और भाई को भी बुरी तरह से घायल कर दिया। फिलहाल सभी का इलाज जारी है। इस घटना को लेकर समाज के लोगों में काफी आक्रोश है। यादव(ठेठवार) समाज के लोगों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग को लेकर आगे की रणनीति बनाने के लिए बैठक भी की। लोगों का कहना था कि गोकुल नगर के प्रेम गौली और उसके साथियों द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया। इसके बावजूद मुख्य आरोपी प्रेम गौली पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।

मीडियाकर्मियों पर हमला कोई नयी बात नहीं है। इससे पहले भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं द्वारा एक रिपोर्टर के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ में पत्रकारों ने आंदोलन भी किया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सली हमले में ‘दूरदर्शन’ के कैमरामैन की मौत भी हो गई थी।

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पुनीत कुमार कनोजिया ने बनाया रिकॉर्ड, इस प्रतिष्ठित किताब में दर्ज हुआ नाम

दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में रहने वाले यंग एंड डायनेमिक प्रोफेशनल पुनीत कुमार कनोजिया ने एक खास उपलब्धि हासिल की है

Last Modified:
Monday, 15 April, 2019
PUNEET

दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में रहने वाले यंग एंड डायनेमिक प्रोफेशनल पुनीत कुमार कनोजिया ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ ने पुनीत कुमार कनोजिया का नाम यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट के रूप में दर्ज किया है। गौरतलब है कि साहसिक, सांस्कृतिक और कौशल सहित विभिन्न स्तरों पर कई कीर्तिमानों को दर्ज करने वाली यह पहली किताब है, जो हिंदी में लिखी गयी है।

यह किताब भारत सरकार द्वारा पंजीकृत है तथा एशिया बुक आफ रिकार्ड्स से संबद्ध है, जिसमें रिकार्ड्स संकलन के लिए इंटरनेशनल प्रोटोकाल्स आफ रिकार्ड्स (आईपीआरएस) का पालन किया जाता है। यही वजह है कि एक युवा एवं होनहार पेशेवर होने के नाते पुनीत कुमार कनोजिया की इस उपलब्धि का महत्व और भी बढ़ जाता है। बताया जाता है कि पुनीत कुमार कनोजिया के लिए इस मुकाम तक पहुंचना कोई आसान कार्य नहीं था। इस दौरान उनके जीवन में कई मौके आये, जब उन्हें कई तरह की कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इसके बावजूद पुनीत ने हर बार अपनी सूझबूझ और धैर्य से हर चुनौती का मुकाबला किया।

दिल्ली में एक बेहद साधारण परिवार में 3 फरवरी 1991 को जन्मे पुनीत का बचपन तमाम संघर्षों के दौर से गुजरा। बावजूद इसके उन्होंने कभी मुसीबतों के आगे घुटने नहीं टेके। फिर बात चाहे सम्मानजनक रूप से शिक्षा ग्रहण करने की हो या फिर अपने पक्के इरादों के साथ पीआर और मीडिया जैसे पेशेवर क्षेत्रों में कदम रखने की हो। शुरुआत में बेहद चकाचौंध और ग्लैमर से भरपूर यह क्षेत्र उनके सामने कई तरह की चुनौतियां पेश करता रहा। कभी रचनात्मकता के स्तर पर तो कभी तमाम चीजों के प्रबंधन के स्तर पर, लेकिन उन्होंने कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया और न ही कभी किसी काम को छोटा समझा, बल्कि अपने क्षेत्र की हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज को पूरा मन लगाकर सीखा। यही वजह है कि कि वह धीरे-धीरे अपनी खुद की कंपनी स्थापित करने में कामयाब रहे।

आज पुनीत कुमार कनोजिया साक्षर मीडिया साल्यूशंस एंड कंसल्टेंट प्रा. लि. और डेल्टा न्यूज (समाचार पत्र) के संस्थापक एवं निदेशक हैं। बकौल पुनीत, ‘पीआर और मीडिया बेहद अलग किस्म के पेशेवर क्षेत्र हैं, जिसमें आप अपने क्लाइंट के प्रति पूरे समर्पण भाव के साथ कार्य करते हैं। यह एक चौबीसों घंटों व्यस्त रहने वाला क्षेत्र है, क्योंकि खबरें किसी के लिए रुकती नहीं हैं और आज के दौर में मीडिया का काम है सबसे पहले लोगों को सच्ची और सटीक खबर देना है। इसलिए इस जिम्मेदारी ने मुझे कभी एक पल के लिए भी चैन से बैठने ही नहीं दिया। और शायद यही वजह है कि आज मुझे यह सम्मान बड़े गर्व की अनुभूति दे रहा है।‘

‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स द्वारा वर्ष 2020 के संस्करण के लिए यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट के रूप में पंजीकृत किए जाने और प्रोत्साहन एवं प्रशंसा के रूप में प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाने पर पुनीत कहते हैं, ‘यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट, टाइटल के तहत इस किताब में स्थान पाना वाकई रोमाचंकारी है, जिसके लिए मैं इस पुस्तक के संपादकीय एवं प्रबंधन विभाग का शुक्रिया अदा करता हूं।’ वह कहते हैं, ‘इस तरह के सम्मान से किसी भी युवा का उत्साहवर्धन होता है। आपको लगता है कि सोसाइटी आपके कार्यों को देख रही है, सराहना कर रही है। ऐसे में आपके अपने देश के प्रति और समाज के प्रति दायित्व बढ़ जाते हैं, जिन्हें बेहद जिम्मेदारी के साथ पूरा करना आपका कर्तव्य हो जाता है। इसलिए जाहिर तौर पर ऐसी प्रतिष्ठित किताब में स्थान पाना मुझे गौरवांन्वित कर रहा है।’

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Republic TV के लिए कैसे खास रहे हैं पिछले 100 हफ्ते, जानें यहां

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी के चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के लिए पिछले 100 हफ्ते काफी खास रहे हैं

Last Modified:
Friday, 12 April, 2019
REPUBLIC

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) देश में लगातार 100 हफ्ते तक नंबर वन रहने वाला अंग्रेजी न्यूज चैनल बन गया है। चैनल के लिए खास बात यह भी है कि छह मई 2017 को शुरुआत के बाद से ही इसकी व्युअरशिप लगातार नंबर वन रही है। ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग से पूर्व और लॉन्चिंग के बाद के चार हफ्तों की तुलना करें तो अंग्रेजी न्यूज जॉनर में इसने व्युअरशिप में 79 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। सप्ताह दर सप्ताह आगे बढ़ते हुए चैनल ने यह मुकाम हासिल किया है।     

‘रिपब्लिक टीवी’ ने 49 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ अपनी शुरुआत की थी, यह टीवी की दुनिया में अभूतपूर्व था। इसके बाद दिन में 35 प्रतिशत और सुपर प्राइम टाइम में 44 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ यह नंबर वन की पोजीशन पर बना हुआ है। इसके अलावा इस जॉनर में दूसरे चैनलों के मुकाबले व्युअर्स ने इस चैनल पर 44 प्रतिशत ज्यादा समय बिताया है। यही नहीं, ‘रिपब्लिक टीवी’ चैनल की व्युअरशिप अंग्रेजी बिजनेस न्यूज जॉनर की कुल व्युअरशिप से भी ज्यादा है।    

‘रिपब्लिक टीवी’ ने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले अपने सिद्धांतों से कभी भी किनारा नहीं किया है। फिर चाहे मंदसौर में हुई हिंसा के लिए जवाब मांगने की बात हो अथवा उन्नाव बलात्कार के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ने की बात हो। चाहे सबरीमाला में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई की बात हो या ट्रिपल तलाक मामले में अधिकारों के लिए लड़ाई का मामला हो, यह चैनल हमेश लोगों के लिए आगे खड़ा रहा है।  

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वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ मिश्र की याद में जुटेंगे दिग्गज, ये है कार्यक्रम

वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल हेराल्ड के संपादक रहे नीलाभ मिश्र की याद में दिल्ली में 12 अप्रैल को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 11 April, 2019
Neelabh

वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल हेराल्ड के संपादक रहे नीलाभ मिश्र की याद में दिल्ली के डॉ.राजेंद्र प्रसाद मार्ग स्थित जवाहर भवन में 12 अप्रैल की शाम साढ़े पांच बजे से दूसरे नीलाभ मिश्र जनसंवाद (Public Dialogue) का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध विचारक और लेखक डॉ. प्रताप भानु मेहता और लेखक एवं कॉलमिस्ट अपूर्वानंद ‘On how to Make Choices in the Age of Populism, New Ideas of Citizenship and Neo-Nationalism’ विषय पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि पिछले साल नीलाभ मिश्र का 57 साल की उम्र में निधन हो गया था। लंबे वक्त से नॉन एल्कोहॉलिक लीवर सिरॉसिस से जूझ रहे नीलाभ मिश्र ने 24 फरवरी 2018 को चेन्नै के अस्पताल में आखिरी सांस ली थी।

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