'केसी कुलिश' अवॉर्ड से सम्मानित ये हुए पत्रकार...

'राजस्थान पत्रिका' के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिश की याद में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए...

Last Modified:
Tuesday, 18 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

'राजस्थान पत्रिका' के संस्थापक कर्पूरचंद्र कुलिश की याद में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए दिए जाने वाले 'अंतरराष्ट्रीय कर्पूरचंद्र कुलिश' पुरस्कार का वितरण समारोह सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। विजेताओं को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सम्मानित किया, तो वहीं कार्यक्रम को पत्रिका के समूह संपादक गुलाब कोठारी ने भी संबोधित किया।

2016 का पुरस्कार घाना के पत्रकार अनस अरेमेयाव अनस को उनकी स्टोरी 'अनस फ्लोर्स डेरी' के लिए मिला है। वहीं 2017 का पुरस्कार मलेशिया के इआन यी को उनकी स्टोरी 'स्टूडेंट्स ट्रैफिक्ड' के लिए दिया गया। 

2016 के मेरिट अवॉर्ड विजेता- 

- 'मलयाला मनोरमा' के संतोष जॉन थूवल को उनकी स्टोरी 'अ सर्च फॉर द ड्रॉप टू अवेकन द लैंड ऑफ 44 रिवर्स' के लिए दिया गया।

- मलेशिया के 'द स्टार मीडिया' समूह के इआन यी और उनकी टीम को 'प्रीडेटर इन माय फोन स्टोरी' के लिए दिया गया।

- केन्या के 'द स्टैंडर्ड ऑन संडे' के पैट्रिक मायोयो और जोसेफ ओडिन्हो को उनकी स्टोरी 'रेलवे फर्म अंडर प्रोब ओवर यूज ऑफ वर्ल्ड बैंक मिलियंस' के लिए दिया गया। 

2017 के मेरिट अवॉर्ड विजेता 

- दुबई के 'एक्सप्रेस गल्फ न्यूज' के पत्रकार मजहर फारुकी की स्टोरी 'वी आर अ बोगस फर्म यट वी गॉट अन आईएसओ सर्टिफिकेट' का चयन हुआ है। 

इस दौरान सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा, 'आपने पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़े प्रतिमान गढ़े हैं। पत्रिका ने सेना के साथ तृष्णा कैम्पेन किया था। सैनिक हाथ में बंदूक लेकर सीमा पर तैनात होता है और पत्रकार हाथ में कलम लेकर देश की सुरक्षा करता है। हम सब मीडिया की भूमिका और जिम्मेदारी से परिचित हैं। स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक देश के लिए जरूरी है, लेकिन पत्रकारिता करते समय सिद्धांतों का ध्यान रखना चाहिए।'

कार्यक्रम को राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'पुरस्कार पाने वाले पत्रकारों का मैं स्वागत करता हूं। इनका कार्य स्तुत्य है। इनसे हमें सीखना चाहिए कि खुद को बीज की तरह बनाकर समाज के लिए वृक्ष बनाया। वाल्तेयर के शब्द पर हम आज भी चलते हैं- या एशु सुप्तेषु जागर्ति। विश्वसनीयता ही पत्रिका की शक्ति है। हमारी खबरों को सच माना जाता है। पत्रिका के अभियान के बाद राजस्थान सरकार को वापस लेना पड़ा काला कानून। हमनें अभियान चलाया 'जब तक काला, तब तक ताला।' 'आज मीडिया जनहित की जगह सिर्फ मनोरंजन की बात करने लगा है। पत्रिका के लिए जनहित ही सबसे प्रमुख है। पत्रिका परिवार का हर पत्रकार स्वयं में पत्रिका है। पत्रकारिता के सामने बहुत बड़ी चुनौती है। उस पर खरा उतरना होगा। पत्रिका के पास विश्वसनीयता की शक्ति है, हमारी खबरों को अदालतें रिट मान लेती हैं।'

 

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पहली बार फोटो जर्नलिस्ट की हुई इतने बड़े पद पर नियुक्ति

पूर्व में लैटिन अमेरिका और यूरोप-अफ्रीका में फोटो डायरेक्टर के रूप में कर चुके हैं काम

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Photo Journalist

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी ‘एएफपी’ (Agence France-Presse) ने सिल्वेन इस्तबाल (Sylvain Estibal) को मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) का रीजनल डायरेक्टर नियुक्त किया है। यह पहला मौका है जब एजेंसी ने किसी फोटो पत्रकार को इस बड़े पद पर नियुक्त किया है।

पूर्व में लैटिन अमेरिका और फिर यूरोप-अफ्रीका में फोटो डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके सिल्वेन वर्तमान में मैक्सिको के ब्यूरो चीफ के रूप में काम कर रहे हैं। इस भूमिका में वह वर्ष 2017 में आए भूकंप को कवर कर चुके हैं। ‘MENA’ में रीजनल डायरेक्टर की  नई भूमिका में वह मैनेजमेंट, क्वालिटी मल्टीमीडिया जर्नलिज्म और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपने अनुभव का इस्तेमाल करेंगे। इस बारे में ‘एएफपी’ के चेयरमैन ‘फैब्रिस फ्राइज़’ (Fabrice Fries) का कहना है, ‘एडिटोरियल और मैनेजमेंट के अलावा उनका प्राथमिकता एजेंसी की छवि और सेल्स बढ़ाने पर भी होगी।’

‘एएफपी’ के ग्लोबल न्यूज डायरेक्टर ‘फिल चेटविंड’ (Phil Chetwynd) ने इस नियुक्त को एजेंसी की पत्रकारिता की परिवर्तनशील प्रकृति का उदाहरण बताया है, जिसमें सभी संपादकीय विभागों से प्रतिभाओं का चयन किया जाता है। बताया जाता है कि इसी के तहत यूनाइटेड स्टेट और फ्रांस में एएफपी के विडियो प्रॉडक्शन का काम संभाल चुके विडियो जर्नलिस्ट ‘स्टीफन डेलफोर’ (Stéphane Delfour) एशिया में बैंकॉक के ब्यूरो चीफ बनने वाले हैं।

बता दें कि सिल्वेन ने इकनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद सोशियोलॉजी और इंटरनेशनल रिलेशंस (अरब देशों में विशेषज्ञता) में मास्टर्स की डिग्री ली है। उन्होंने ‘Paris-Sorbonne’ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। सिल्वेन ने अपने करियर की शुरुआत बोस्निया युद्ध के दौरान बतौर फ्रीलॉन्स फोटोग्राफर की थी, इसके बाद उन्होंने वर्ष 1994 में ‘एएफपी’ की फोटो सर्विस को जॉइन कर लिया था। वर्ष 2000 में उन्हें फीचर डेस्क का हेड बनाया गया और इसके बाद 2007 में लैटिन अमेरिका में फोटो हेड की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें अफ्रीका-यूरोप में फोटो हेड बना दिया गया। वह वर्ष 2015 से मैक्सिको के ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

वहीं, स्टीफन डेलफोर की बात करें तो वह वर्ष 2014 से एएफपी टीवी फ्रांस (AFP TV France) के पद पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ‘Sorbonne CELSA’ यूनिवर्सिटी से कम्युनिकेशंस में बैचलर डिग्री लेने के साथ ही ‘IPJ Paris-Dauphine’ से डिजिटल मीडिया मैनेजमेंट में मास्टर्स की डिग्री ली है।

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इन गंभीर आरोपों में घिरा दैनिक जागरण का पत्रकार, विरोध में एकजुट हुए अधिवक्ता

गुस्साए अधिवक्ताओं ने अखबार की प्रतियां भी जलाईं, पत्रकार की संपत्ति की जांच की मांग भी उठाई

Last Modified:
Friday, 24 May, 2019
Press

दैनिक जागरण के संवाददाता द्वारा अधिवक्ता ग्राम प्रधान के साथ ब्लैकमेलिंग व उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले का है। संवाददाता द्वारा ब्लैकमेलिंग व उत्पीड़न के विरोध में अधिवक्ता संघ, तालबेहट ने प्रदर्शन किया और विरोध में दैनिक जागरण अखबार की कॉपियां जलाकर नारेबाजी की।

अधिवक्ता संघ का आरोप है कि अखबार की आड़ में जागरण संवाददाता द्वारा अवैध रूप से वसूली की जा रही है। अधिवक्ता संघ ने आरोपी जागरण संवाददाता द्वारा अखबार की आड़ में अर्जित की गई चल-अचल संपत्ति की जांच कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा अधिवक्ता संघ ने दैनिक जागरण के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पास किया।  

इस बारे में ग्राम प्रधान रामगोपाल झा का कहना है कि दैनिक जागरण के संवाददाता अखिलेश जैन द्वारा उनसे अवैध रूप से धन की मांग की जा रही है। इसके लिए संवाददाता द्वारा तमाम तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि शौचालय के लिए खोदे गए गड्ढों पर रखे गए पत्थरों के ढक्कन को हटाकर संवाददाता द्वारा फुटेज ले ली जाती है और बाद में उस फुटेज के आधार पर उनसे अवैध रूप से धन की मांग की जाती है। इसके अन्य तरह से भी उन पर वसूली के लिए दबाव डाला जाता है।

इस घटना का विडियो आप यहां देख सकते हैं-    

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दरोगा संग मिलकर कथित पत्रकार ने रची थी खतरनाक साजिश, यूं उठा पर्दा

मशहूर चिकित्सक से दोनों आरोपियों ने वसूल लिए थे आठ लाख रुपए

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Journalist-Police

गोरखपुर के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक रामशरण दास को रेप के मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने दरोगा और कथित पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों अब तक चिकित्सक से आठ लाख रुपए वसूल भी चुके थे। खास बात यह है कि इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दखल देना पड़ा था। उनकी फटकार के बाद पुलिस हरकत में आई और जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

बताया जाता है कि रामशरण दास को राजघाट थाने की ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के इंचार्ज दरोगा शिव प्रकाश सिंह ने 16 मई को पूछताछ के लिए चौकी बुलाया था। यहां दरोगा ने किसी ज्योति सिंह नामक महिला द्वारा पुलिस को दिया गया शिकायती पत्र दिखाया, जिसमें उसने डाक्टर पर रेप का आरोप लगाया था। इस शिकायती पत्र में ज्योति सिंह की ओर से कहा गया था वह इलाज कराने गई थी, जहां पर रामशरण दास द्वारा उसके साथ दुष्कर्म किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।

दरोगा ने इस शिकायत के आधार पर कार्रवाई का डर दिखाते हुए रामशरण दास को खूब धमकाया। इसके बाद प्रणव त्रिपाठी नामक कथित पत्रकार के साथ मिलकर दरोगा ने डॉक्टर को रेप के मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देकर केस रफा-दफा करने के नाम पर 8 लाख रुपए भी वसूल लिए।

धमकी व ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर डॉक्टर रामशरण दास ने परेशान होकर योगी आदित्यनाथ से मामले की शिकायत की थी। इस पर उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों को फटकार लगाते हुए ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज के साथ कथित पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे।

आईजी के आदेश पर एएसपी रोहन प्रमोद बोत्रे मामले की जांच कर रहे थे। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर पुलिस ने मंगलवार की देर रात शिव प्रकाश सिंह और प्रणव त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। ज्योति सिंह नामक महिला के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है, हालांकि उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

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आचार्य प्रवीन चौहान ने मोदी के बारे में काफी पहले ही कर दी थी ये भविष्यवाणी

अखबार में भी पब्लिश हुई थी 11 जनवरी 2015 को मेरठ मे आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के मंच से की गई यह भविष्यवाणी

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Modi-Praveen

ज्योतिषाचार्य प्रवीन चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी की फिर वापसी तय है। उनका कहना है कि मोदी की दोबारा सत्ता में वापसी की पटकथा गृह नक्षत्रों द्वारा पहले ही लिख दी गयी थी। मेरठ के बेगम बाग निवासी ज्योतिषाचार्य प्रवीन चौहान ने 11 जनवरी 2015 को मेरठ मे आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के मंच से ये भविष्यवाणी बहुत पहले ही कर दी थी। उनकी यह भविष्यवाणी 12 जनवरी 2015 के अमर उजाला के मेरठ एडिशन मे प्रकाशित हुई थी|

ज्योतिषाचार्य प्रवीन चौहान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में लग्न और लग्नेश दोनों बली स्थिति में हैं, जो मोदी को उच्च प्रतिष्ठा, यश और विश्व विख्यात प्रसिद्धि प्रदान करते हैं। साथ ही मंगल शक्ति, पराक्रम, दृढनिश्चयता और उत्साह के साथ शत्रुओं का दमन करता है। तर्कशक्ति और वाणी का कारक ग्रह बुध कुंडली में उत्तम स्थान पर विराजमान है।

ज्योतिषाचार्य प्रवीन चौहान का यह भी कहना है कि देश के प्रधानमंत्री होने के नाते नरेंद्र मोदी की ओर से आने वाले समय में कुछ और कड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। ये फैसले प्रारंभ में काफी परेशानी वाले रह सकते हैं, लेकिन दूरदर्शिता के हिसाब से यह फैसले प्रधानमंत्री मोदी के आत्मसम्मान को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य प्रवीन चौहान द्वारा मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बारे में की गई भविष्यवाणी अमर उजाला के मेरठ एडिशन में 12 जनवरी 2015 को प्रकाशित हुई थी, जिसकी कटिंग आप यहां देख सकते हैं।

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थानाध्यक्ष को कुछ यूं भारी पड़ सकता है पत्रकार से दुर्व्यवहार

दो युवकों की हत्या के मामले में जानकारी लेने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट पर उतारू हो गए थे थानाध्यक्ष

Last Modified:
Thursday, 23 May, 2019
Police

हिंदी दैनिक के पत्रकार मो. जामी और अजमत नामक युवक से दुर्व्यवहार करना बिहार में फुलवारीशरीफ के थानाध्यक्ष कैसर आलम को महंगा पड़ सकता है। इस मामले में डीआइजी सेंट्रल राजेश कुमार ने एसपी सिटी (वेस्ट) अभिनव कुमार को जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही एसपी सिटी की जांच में कैसर आलम के दोषी मिलने पर उन्हें तुरंत लाइन हाजिर करने के निर्देश भी एसएसपी को दिए गए हैं।

बता दें कि खलीलपुरा और अल्बा कॉलोनी में हुई दो युवकों की हत्या के मामले में जानकारी लेने के लिए दैनिक भास्कर के स्थानीय रिपोर्टर मसूद आलम जामी मंगलवार को थाने गए थे। इस दौरान थानेदार कैसर आलम ने न सिर्फ मो. जामी के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें मारने पर उतारू हो गए। पत्रकारों ने फोन पर इस घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी थी।

इसके अलावा अजमत नामक युवक का कहना है कि उन पर चोरी की कार रखने का आरोप लगाते हुए कैसर आलम द्वारा न सिर्फ हवालात में रखा गया, बल्कि गाड़ी के कागजात लेकर पहुंची उनकी पत्नी के साथ भी थानाध्यक्ष ने बदतमीजी की।

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जिंदगी की जंग हार गईं युवा पत्रकार शिवानी वशिष्ठ

गंभीर बीमारी से जूझ रहीं शिवानी का देहरादून के अस्पताल में चल रहा था इलाज

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
shivani

गंभीर बीमारी से जूझ रहीं युवा महिला पत्रकार शिवानी वशिष्ठ जिंदगी की जंग हार गईं और मंगलवार को इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। हरियाणा के पानीपत, नूरवाला शहर की रहने वाली पत्रकार शिवानी वशिष्ठ सिटिजन वायस चैनल में काम करती थीं। शिवानी को डॉक्टरों ने आंतों में इंफेक्शन बताया था। कई जगह इलाज करने के बाद भी शिवानी को कोई फायदा नहीं हुआ था।

हालत ज्यादा गंभीर होने पर उन्हें देहरादून के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इतनी सी कम उम्र में शिवानी के इस तरह चले जाने से परिजनों के साथ ही दोस्तों व सहयोगी पत्रकारों में शोक का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी शिवानी को श्रद्धांजलि दी जा रही है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम दुबे

सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Shyam Dubey

वरिष्ठ पत्रकार श्याम दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार की रात जयपुर में उनका निधन हो गया। कोटा के किशोरपुरा मुक्तिधाम में शनिवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार किया गया। दुबे ने बनारस व कोटा से शिक्षा पूरी कर पत्रकारिता की शुरआत की थी। बाद में उन्होंने जयपुर से ‘तथ्य भारती’ पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।

करीब 15 साल से वे जयपुर में ही पत्रकारिता कर रहे थे। शुक्रवार की शाम अचानक सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन उन्हें फोर्टिस अस्पताल लेकर ग्ए, जहां देर रात उनका निधन हो गया। श्याम दुबे के निधन के बाद परिजनों व रिश्तेदारों के साथ ही पत्रकारों में भी शोक व्याप्त है। पत्रकार बिरादरी ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की है।

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'पत्रकारों की परीक्षा रोजाना होती है तथा उसका परिणाम भी रोजाना आता है'

विश्व संवाद केंद्र, गुजरात की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों को किया गया सम्मानित

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Narad Jayanti

विश्व संवाद केंद्र (बीएसके), गुजरात की ओर से नारद जयंती के अवसर पर रविवार को पत्रकार सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छह पत्रकारों का सम्मान किया गया। जिन पत्रकारों को सम्मानित किया गया, उनमें जयवंत पंड्या, मनोज मेहता, विवेक कुमार भट्ट, मौलिन मुंशी, सुदर्शन उपाध्याय और हर्षद याज्ञिक शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूर्व सूचना आयुक्त, गुजरात साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष व साहित्यकार भाग्येश झा थे। उनका कहना था कि पत्रकारों की परीक्षा रोजाना होती है तथा उसका परिणाम भी रोजाना आता है।

समाज में पत्रकारों की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि हालांकि पत्रकार कभी भी इतिहास नहीं लिखता है, लेकिन ये भी सच है कि पत्रकारों के बिना इतिहास नहीं लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में क्रिएटिव राइटिंग बहुत बड़ी चुनौती है। रचनात्मकता के द्वारा पाठक संख्या बढ़ाई जा सकती है। एक पत्रकार को नारदजी की तरह बिना किसी भेदभाव के कार्य करना चाहिए और सकारात्मक बातों को बाहर निकालकर लाना चाहिए। इस तरह का काम करने वाले पत्रकार ही नारदजी के सच्चे अनुयायी हो सकते हैं। भाग्येश झा ने कहा कि कालिदास ने अपनी रचना ‘मेघदूत’ में बादलों के माध्यम से संदेश भेजने की बात कही है। आजकल कवि कालिदास का अध्ययन करके वैज्ञानिक क्लाउड कंप्यूटिंग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को तीन बातों ‘मैं ही पहला हूं’ (I am the first), ‘मैं ही यूनिक‘ ( I am unique) और ‘मैं ही भरोसेमंद’ ( I am reliable) से सावधानी रखने की जरूरत है। भाग्येश झा का यह भी कहना था कि समाज को जाग्रत और सतर्क रखने के लिए पत्रकार का जागृत और सतर्क रहना बहुत आवश्यक है। समाज के सतर्क रहने पर ही सरकार भी ढंग से कार्य करेगी और इसमें पत्रकार की बहुत बड़ी भूमिका होती है। भाग्येश झा ने यह भी बताया कि हॉवर्ड में हुए एक शोध में वर्डस्मिथ नामक एप तैयार किया गया। इस एप के द्वारा भूकंप सरीखे समाचार की रिपोर्ट रोबोट को देने पर वह 3000 शब्दों की रिपोर्ट तैयार कर देगा।

कार्यक्रम के अध्यक्ष व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पश्चिम क्षेत्र के संघचालक डॉ. जयन्तीभाई भाड़ेसिया ने कहा कि नैतिकता, देश प्रेम व आचार  पत्रकारिता की नींव होनी चाहिए। इस मौके पर गुजरात प्रान्त के संघचालक डॉ. भरत पटेल, प्रान्त संपर्क प्रमुख व वीएसके गुजरात के ट्रस्टी हरेश ठाकर, प्रान्त के पूर्व संघचालक अमृतभाई कड़ीवाला, प्रान्त प्रचार प्रमुख विजय ठाकर, प्रान्त सह प्रचार प्रमुख हितेन्द्र मोजिद्रा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम में विजय ठाकर को वीएसके गुजरात के ट्रस्टी व मोजिद्रा को प्रबन्ध ट्रस्टी घोषित किया गया।

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कवरेज के दौरान फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुआ कुछ ऐसा, चली गई जान

चित्तूर में चल रहे गंगम्मा जात्रा उत्सव में कवरेज के लिए गए थे अनंत पद्मनाभम

Last Modified:
Thursday, 16 May, 2019
Photo Journalist

करंट लगने से फोटो जर्नलिस्ट की मौत का मामला सामने आया है। मामला आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले का है। बताया जाता है कि अनंत पद्मनाभम उर्फ आनंद नामक फोटो जर्नलिस्ट चित्तूर में चल रहे गंगम्मा जात्रा उत्सव में कवरेज के लिए गए थे। तभी अचानक वे करंट की चपेट में आ गए। झुलसी हालत में अनंत पद्मनाभम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सूचना मिलते ही जिले के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। अनंत पद्मनाभम की मौत पर आंध्र प्रदेश फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने शोक जताते हुए उनके परिजनों के साथ हमेशा खड़े रहने का आश्वासन दिया है।

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इतनी कम उम्र में चले गए दैनिक जागरण के पत्रकार लोकेश प्रताप सिंह

कई पत्रकारों ने लोकेश प्रताप के निधन पर सोशल मीडिया पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है

Last Modified:
Wednesday, 15 May, 2019
Lokesh Pratap

पत्रकार लोकेश प्रताप सिंह का आकस्मिक निधन हो गया है। वह इन दिनों कैंसर से जूझ रहे थे। लंबे समय से दैनिक जागरण से जुड़े लोकेश प्रताप इन दिनों मुख्य उप संपादक के तौर पर बरेली में प्रादेशिक (पीलीभीत, शाहजहांपुर व बदांयू) डेस्क का प्रभार संभाल रहे थे। उन्हें पिछले साल ही यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वह पीलीभीत में ब्यूरो प्रमुख के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इससे पहले कानपुर में भी वह प्रादेशिक प्रभारी की जिम्मेदारी निभा चुके थे। यही नहीं, बदायूं में ब्यूरो चीफ के रूप में भी उन्होंने अपनी कलम की धार से पत्रकारिता जगत में अपनी खास पहचान बना रखी थी।

करीब दो साल पूर्व केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लोकेश प्रताप सिंह को राष्ट्रीय जनसहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) का वाइस चेयरमैन नियुक्त किया था। लोकेश प्रताप इससे पहले भी अटल सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय की राजभाषा समिति में सलाहकार रह चुके थे। पत्रकारिता के साथ ही सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर उनका व्यापक और प्रभावी योगदान रहता था। लोकेश प्रताप सिंह ने अपनी लेखनी के दम पर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी छवि बनाई हुई थी। उनके निधन से पत्रकार जगत में शोक की लहर है। कई पत्रकारों ने लोकेश प्रताप के निधन पर सोशल मीडिया पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

लोकेश प्रताप के निधन पर दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार और मुंबई के ब्यूरो प्रमुख ओम प्रकाश तिवारी ने भी अपने फेसबुक पेज पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है,’ लोकेश अपने आप में एक संस्था थे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अयोध्या में पहली बार मुलाकात हुई थी उनसे। 17-18 वर्ष का दुबला-छरहरा सा एक लड़का। लेकिन तेजतर्रार इतना कि उस दौरान अयोध्या में उस आंदोलन की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बन गया था। विश्व हिंदू परिषद के विश्व संवाद केंद्र में वह महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। याददाश्त इतनी गजब कि पूछिए मत।आज के 'जनपथ' की तरह उन दिनों 'राष्ट्रधर्म' पत्रिका में मेरा एक स्तंभ प्रकाशित होता था - 'मासिक चुटकियाँ'। उस स्तंभ की दर्जनों चुटकियां लोकेश आज 30 साल बाद भी धाराप्रवाह सुना सकते थे।

2014 में जब मुंबई में उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम (UPDF) का पहला कार्यक्रम किया तो सांसद लल्लू सिंह को मुंबई लाने का पूरा श्रेय लोकेश को ही जाता है। लल्लू सिंह को वह आने के लिए राजी नहीं करते तो शायद वह कार्यक्रम ही नहीं होता और यूपीडीएफ के आगे के कार्यक्रम भी नहीं होते। गंगा के प्रति उनका समर्पण भी अद्भुत था।

दैनिक जागरण के पीलीभीत ब्यूरो प्रमुख रहते हुए उन्होंने जागरण के ही बैनर को आगे रखते हुए गंगा स्वच्छता के लिए जिस प्रकार के गंभीर प्रयास किए, यदि उसे मॉडल बनाकर गंगा किनारे के शहरों/कस्बों में कार्यरत पत्रकार सक्रिय हो जाएं तो गंगा मैया को साफ करने के लिए किसी और प्रयास की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। ऐसे कर्मठ युवा के जाने की उम्र तो कतई नहीं थी अभी। लेकिन ईश्वर भी कर्मठों को ही जल्दी याद करता है। वह कैंसर से जीत न सके। उनके परिवार पर तो यह वज्रपात है ही, हम सबके लिए भी उनका असमय अवसान एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनके परिवार को यह दुख सहने की क्षमता प्रदान करें और लोकेश की आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें। ऊँ शांति शांति शांति।’

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