रंग लाई पत्रकार अमित तिवारी की मुहिम, गरीब परिवार को लगे ‘आशा के पंख’

यूपी के कासगंज स्थित बिलराम कस्बे में गरीब मजदूर पूरन ने अपने परिवार को भूख से तड़पता देखकर आत्महत्या कर ली थी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 11 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 September, 2019
AMIT KUMAR

आशुतोष शुक्ल, पत्रकार।।

पत्रकारों की मुहिम ने एक गरीब मजदूर के परिवार को नई दिशा व दशा देने का प्रयास किया है। यूपी के जनपद कासगंज में बिलराम कस्बे में एक गरीब मजदूर पूरन ने बीते सोमवार को आर्थिक तंगी के चलते अपने परिवार को भूख से तड़पता देखकर आत्महत्या कर ली थी।

खबर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दैनिक सवेरा समाचार पत्र के संवाददाता अमित कुमार तिवारी अन्य पत्रकार साथियों के साथ मृतक पूरन के घर पहुंचे थे। परिवार की बदहाली देख अमित कुमार तिवारी ने दफ्तर वापस आकर खबर तो लिखी, लेकिन साथ ही इस परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने का फैसला भी कर लिया। फिर क्या था, उन्होंने टीवी व प्रिंट मीडिया के अपने करीबी पत्रकार साथियों के साथ मिलकर मुहिम छेड़ दी। प्रमुख अखबारों ने जहां खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, वहीं चैनलों में परिवार की बदहाली की खबर दिखाई गई। स्वयं अमित ने अपने ब्लॉग पर खबर लिखकर साथियों, समाजसेवियों और जनपद वासियों से सोशल मीडिया के माध्यम से इस परिवार की मदद करने की अपील की। अमित तिवारी द्वारा ब्लॉग पर शेयर की गई खबर आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

मजरूह सुल्तानपुरी की प्रसिद्ध शायरी ‘मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंजिल मगर लोग साथ आते गए कारवां बनता गया।’ की तर्ज पर अमित तिवारी की मुहिम रंग लाई। अमित तिवारी के साथ ही उनके पत्रकार साथियों ने पहले स्वयं ही आर्थिक मदद दी, वहीं जनपद के गैर पत्रकार साथियों व आम लोगों के आने से परिवार को अब तक लगभग एक लाख रुपए की मदद मिल चुकी है। प्रशासन भी नींद से जागकर परिवार की मदद की कवायद में जुट गया है। मिली जानकारी के मुताबिक दूसरे राज्यों व कुवैत से भी लोगों ने थोड़ी आर्थिक मदद की है। समाचार4मीडिया.कॉम अमित कुमार तिवारी की जनसरोकारी पत्रकारिता व कासगंज के सभी पत्रकार साथियों की इस मुहिम को सलाम करता है। 

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'मैं गोबर का अनुवाद नहीं कर सकता और मैं स्वीकार नहीं कर सकता कि मिट्टी टेराकोटा है'

हिंदी में एक सहज आकर्षण है और इसे अन्य भाषाओं के शब्दों को बिना असुरक्षा के समायोजित करना चाहिए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Prasoon Joshi

दैनिक जागरण द्वारा हिंदी को समृद्ध और मजबूत बनाने की मुहिम 'हिंदी हैं हम' के तहत सानिध्य का आयोजन हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में किया गया। इस मौके पर विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने अपनी बात रखी। ऐसे ही एक सत्र ‘विज्ञापन की हिंदी’ में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने लेखक एवं पत्रकार अनंत विजय से बातचीत में कहा कि हिंदी में एक सहज आकर्षण है और इसे अन्य भाषाओं के शब्दों को बिना असुरक्षा के समायोजित करना चाहिए। शब्द संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जोशी ने कहा, ‘मैं गोबर का अनुवाद नहीं कर सकता और मैं स्वीकार नहीं कर सकता कि मिट्टी टेराकोटा है। हिंदी भाषियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे उन लोगों का उपहास न उड़ाएं जो इसे बोलने के लिए संघर्ष करते हैं। गलतियां होंगी, लेकिन वे अंततः सुधर जाएंगी। हिंदी को बेचारी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि विज्ञापन के लिए लिखना एक चुनौती है। तुरंत मांग पर और भी मुश्किल होता है। विज्ञापन में बहुत ही कम शब्दों में आपको किसी वस्तु का महिमामंडन करना होता है, जो काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

प्रसून जोशी का यह भी कहना था कि फिल्म उद्योग में कंटेंट की प्रामाणिकता का अभाव है। किसानों की दुर्दशा पर बनी फिल्मों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि  हमारे देश में जब तक किसान का बेटा किसानों पर फिल्म नहीं बनायेगा, तब तक किसानों का असली दर्द महसूस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण को अधिक लोगों के लिए खोलकर 'लोकतांत्रिक' होना चाहिए। किसानों पर एक  फैंसी-ड्रेस वाला व्यक्ति फिल्म बनाकर न्याय कभी नहीं कर पाएगा।

इससे पहले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने  दैनिक जागरण के 75 वर्ष की प्रगतिशील यात्रा पर एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। दिनभर चले विभिन्न सत्रों ‘हिंदी का भविष्य’, ‘रेडियो की हिंदी’,‘गांधी और हिंदी’, ‘हिंदी, समाज और धर्म’ में प्रो.सुधीश पचौरी, अब्दुल बिस्मिल्लाह, राम बहादुर राय,प्रो. आनंद कुमार, जैनेद्र सिंह, सच्चिदानंद जोशी, हंसराज कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रमा एवं रेडियो जॉकी दिव्या आदि वक्ता शामिल हुए।

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नए न्यूज पोर्टल ने दी दस्तक, ये है खासियत

लखनऊ विश्वविद्यालय के डीपीए सभागार में लॉन्चिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Web Portal

14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश में पहली बार शिक्षा पर आधारित न्यूज पोर्टल ‘एजुकेशन बीट्स डॉट कॉम’ (www.educationbeats.com) लॉन्च हुआ। ब्लू बर्ड्स कम्युनिकेशन्स एण्ड मीडिया ग्रुप के तत्वावधान में इस पोर्टल की लॉन्चिंग लखनऊ विश्वविद्यालय के डीपीए सभागार में हुई। उत्तर प्रदेश सरकार के विधि एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक एवं बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी ने इसकी लॉन्चिंग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया ने की।

इस मौके पर एजुकेशन बीट्स डॉट कॉम की रेजिडेंट एडिटर दिव्या गौरव त्रिपाठी ने बताया कि यह एक ऐसा मंच है, जहां पर शिक्षक और विद्यार्थी अपनी रचनाएं प्रकाशित कराकर समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बना पाएंगे। उन्होंने कहा,’ हमारा लक्ष्य विश्विद्यालय या कॉलेज प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच एक ब्रिज के रूप में काम करना है। छात्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या को विश्वविद्यालय, कॉलेज प्रशासन और सरकार स्तर तक खबरों के माध्यम से पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।’

कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि सतीश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के क्षेत्र में यह कदम बेहद सराहनीय है। एजुकेशन बीट्स के माध्यम से युवाओं तक सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। मुख्य अतिथि ब्रजेश पाठक ने कहा कि कई बार छात्रों को अपनी शिक्षा के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनकी परेशानियों को इस न्यूज पोर्टल के माध्यम से सरकार तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे सरकार छात्रों के लिए और अधिक बेहतर ढंग से काम कर सकेगी। 

विशिष्ट अतिथि श्याम शंकर उपाध्याय (पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के विधिक सलाहकार) ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह बहुत बड़ी पहल है। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अकील अहमद ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर काम करने की जरूरत है। यह पोर्टल शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री रमेश गढ़िया ने कहा कि इससे शिक्षा प्रणाली में बेहतर काम हो सकेगा। लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि पढा़ई के दौरान बहुत सी समस्याएं आती हैं और हमें ऐसे न्यूज पोर्टल की सराहना करनी चाहिए। वेबसाइट की लॉन्चिंग कार्यक्रम में ब्लू बर्ड्स कम्युनिकेशन्स एण्ड मीडिया ग्रुप की तरफ से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से अपना योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया।

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जब महात्मा गांधी बोले- अगर एक दिन के लिए तानाशाह बना, तो करूंगा ये काम

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में किया गया कार्यक्रम का आयोजन, जुटे पत्रकारिता व साहित्य जगत के कई दिग्गज

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
Dainik Jagran

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर दैनिक जागरण द्वारा हिंदी को समृद्ध और मजबूत बनाने की मुहिम 'हिंदी हैं हम' के तहत सानिध्य का आयोजन दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय थे। उन्होंने दैनिक जागरण के 75 वर्ष की प्रगतिशील यात्रा पर एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके बाद विभिन्न सत्रों में प्रसून जोशी, प्रो.सुधीश पचौरी, अब्दुल बिस्मिल्लाह, राम बहादुर राय, प्रो. आनंद कुमार, जैनेद्र सिंह, सच्चिदानंद जोशी एवं रेडियो जॉकी दिव्या आदि वक्ता शामिल हुए।

‘गांधी और हिंदी’ सत्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा, ‘महात्मा गांधी ने हिंदी के लिये जो किया, वह आज लोगों की नजरों से ओझल हो गया है। हमें आज यह जानने की आवश्यकता है कि गांधी जी ने हिंदी के लिये प्रचंड आन्दोलन किए। गांधी जी कहा था कि अगर मुझे एक दिन के लिये तानाशाह बना दिया जाए तो मैं हिंदी को राष्ट्रभाषा बना दूंगा। महात्मा गांधी ने दक्षिणी एवं पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये कई कार्य किए।’

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा, ‘गांधी जी ने हिंदी के लिये क्या-क्या किया, हिंदी उनकी आत्मा के कितने करीब थी, आज ये बातें बहुत कम होती हैं।’ समाजशात्री प्रो. आनन्द कुमार ने कहा, ’भाषा की अपनी राजनीति और राजनीति की अपनी एक भाषा होती है। गांधी जी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत आए तो उनका एक सपना था कि भारत की एक राष्ट्रभाषा होनी चहिए। उन्होंने कहा था कि भारतीय संस्कृति के हिसाब से हिंदी भाषा भारत की एकता बनाए रखेगी।’ इसके बाद हुए सत्र ‘हिंदी,समाज और धर्म’ में प्रसिद्ध उपन्यासकार अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, ’भाषा किसी जाति,धर्म अथवा देश की नहीं होती है। हिंदी हिंदू की भाषा और उर्दू मुस्लिम की भाषा का खेल अंग्रेजों द्वारा खेला गया था। कैसे अंग्रेजों ने सर सयद और भारतेंदु हरीश चंद्र के बीच इस भाषा का खेल खेला, वह जगजाहिर है।

’हिंदी साहित्यकार, आलोचक एवं विश्लेषक सुधीश पचौरी ने कहा, ’भाषा पहले आयी और धर्म बहुत बाद में और भाषा का किसी धर्म विशेष कोई संबंध नहीं है। हिंदी की आज अपने ही क्षेत्र में बड़ी दयनीय दशा है। हिंदी के पीछे कोई नहीं खड़ा है। हिंदी केवल बाजार के रूप में रह गई है। हिंदी कवि और लेखक भी आज उन्हें हिंदी कवि और लेखक कहने पर शर्म महसूस करते हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? आपको किसी सत्ता और व्यक्ति विशेष से नफरत है तो क्या उसके लिये आप अपनी मातृभाषा से नफरत करने लगोगे? हिंदी जैसी भी है, हमारी मातृभाषा है, हां हिंदी मिलावटी है। भाषा और संस्कृति दोनों ही मिलावट के बिना नहीं चल सकते हैं।’ हंसराज कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रमा ने कहा, ‘आज हिंदी के पीछे खड़े होने की नहीं, हमें हिंदी के साथ चलने की जरूरत है। हर धर्म एक ही बात सिखाता है कि हम सब में एकता होनी चहिए।’

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उप्र क्रिकेट एसोसिएशन में वरिष्ठ पत्रकार की हुई एंट्री

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में रिटर्निंग ऑफिसर नवीन चावला ने एसोसिएशन के चुनाव परिणामों की घोषणा की

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 September, 2019
UP Cricket

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की वार्षिक बैठक 11 सितंबर को कानपुर के कालपी रोड स्थित कमला क्लब में हुई। बैठक में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त व उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के रिटर्निंग ऑफिसर नवीन चावला ने एसोसिएशन के चुनाव परिणामों की घोषणा की।

एसोसिएशन की नवनिर्वाचित वर्किंग कमेटी में अध्यक्ष यदुपति सिंघानिया को बनाया गया है। इसके अलावा उपाध्यक्ष पद पर प्रदीप कुमार गुप्ता, जॉइंट सेक्रेट्री पद पर मोहम्मद भाई और कोषाध्यक्ष पद पर अरविंद श्रीवास्तव को चुना गया है।

कार्यकारिणी में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के पदाधिकारी व वरिष्ठ पत्रकार श्याम बाबू (जालौन), असद अहमद (सुल्तानपुर), अभिषेक शुक्ला (लखीमपुर), कमल चावला (मथुरा), अजीज खान (सोनभद्र), जावेद चौधरी (बाराबंकी), राकेश मिश्रा (गाजियाबाद), पूरन डावर (आगरा), तालिब खान (हमीरपुर) को चुना गया है।

इसके अलावा वुमन सेलेक्शन कमेटी भी चुनी गई। इसमें चेयरमैन रीता डे को चुना गया। इसके अलावा सीनियर टूर्नामेंट कमेटी के चेयरमैन फैजल शेरवानी,क्रिकेट टैलेंट कमेटी के चेयरमैन अनिल माथुर, अंपायर कमेटी के चेयरमैन मनोज पंडित, मेंन्स जूनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन प्रवीण गुप्ता, मेन्स सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन अरविंद कपूर, टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन डीएस चौहान IPS को चुना गया। बताया जाता है कि जिला क्रिकेट एसोसिएशन, जालौन के अध्यक्ष श्याम बाबू की लंबे समय बाद वर्किंग कमेटी में वापसी हुई है।

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पत्रकार सागरिका किस्सू के नाम से छपा गलत लेख, जताया खेद

सात अगस्त को पब्लिश हुआ था लेख, सागरिका किस्सू की आपत्ति के बाद वेबसाइट से हटाया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 September, 2019
Apology

समाचार4मीडिया पोर्टल ने पत्रकार सागरिका किस्सू को एक आर्टिकल की वजह से लगी ठेस के लिए खेद जताया है। दरअसल, समाचार4मीडिया पोर्टल में सात अगस्त 2019 को एक आर्टिकल प्रकाशित हुआ था। इस आर्टिकल में पत्रकार यूसुफ किरमानी की फेसबुक पोस्ट के हवाले से पत्रकार सागरिका किस्सू का एक आर्टिकल पब्लिश किया गया था। इस आर्टिकल के अनुसार, सागरिका द्वारा कश्मीरी पंडितों के बारे में बात की गई थी। लेकिन सागरिका किस्सू का कहना है उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है।

सागरिका किस्सू की आपत्ति के बाद समाचार4मीडिया ने वह आर्टिकल अपनी वेबसाइट से हटा लिया है। समाचार4मीडिया का इरादा किसी भी तरह से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। समाचार4मीडिया ने इस आर्टिकल के द्वारा सागरिका किस्सू को हुई परेशानी के लिए खेद जताया है।

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अमर उजाला लखनऊ के संपादक को मातृशोक

कुछ समय से चल रही थीं बीमार, कानपुर के अस्पताल में ली अंतिम सांस

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 09 September, 2019
Last Modified:
Monday, 09 September, 2019
Tribute

अमर उजाला लखनऊ के संपादक राजीव सिंह की माताजी शकुंतला सिंह का गुरुवार को निधन हो गया है। वह 84 साल की थीं और कुछ समय से बीमार चल रही थीं। कानपुर स्थित एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को कानपुर में किया गया। शकुंतला सिंह के निधन पर तमाम पत्रकारों समेत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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दिल्ली पत्रकार संघ ने गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए सरकार से की ये मांग

अपनी मांग को शीघ्र पूरा करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील करने का लिया गया फैसला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 September, 2019
DJA

दिल्ली पत्रकार संघ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) ने दिल्ली सरकार से दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों में अखबारों एवं न्यूज चैनल्स में फील्ड व डेस्क पर काम करने वाले गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए निःशुल्क यात्रा का प्रावधान किए जाने की मांग की है।

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) से संबद्ध दिल्ली पत्रकार संघ की नव निर्वाचित कार्यकारिणी की पहली बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। संगठन ने निर्णय लिया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस मांग को शीघ्र पूरा करने की अपील की जाएगी। बैठक में डीजेए की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों, न्यूज चैनल्स एवं न्यूज एजेंसियों में कार्यरत श्रमजीवी पत्रकार मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से बड़ी संख्या में अखबार व पत्र-पत्रिकाएं पब्लिश होते हैं। इन संस्थानों में कार्यरत कुछ पत्रकारों को ही दिल्ली सरकार से मान्यता मिल पाती है, जिसके तहत उन्हें डीटीसी की बसों में नि:शुल्क यात्रा करने की सुविधा प्रदान की जाती है, जबकि अखबारों में डेस्क व फील्ड में काम करने वाले ऐसे पत्रकारों की संख्या बहुत अधिक है, जिन्हें राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में वे बसों में नि:शुल्क यात्रा से वंचित रह जाते हैं। 

दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह और महासचिव अमलेश राजू ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अक्टूबर में जब महिलाओं के लिए डीटीसी की बसों में नि:शुल्क यात्रा का प्रावधान हो तो उसके साथ ही गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी यह सुविधा प्रदान करने की घोषणा की जाए।

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मीडिया कॉलेज ने कुछ यूं पढ़ाया फिटनेस का ‘पाठ’

कॉलेज की प्रिंसिपल ने इस आयोजन को छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास से जोड़ते हुये उन्हें शिक्षा के साथ खेल के मैदान से जोड़ने का सफल प्रयास बताया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 31 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 31 August, 2019
Niscort College

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वैशाली स्थित निस्कॉर्ट (NISCORT) मीडिया कॉलेज, में फिट इंडिया मूवमेंट के अंतर्गत 5 दिवसीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 26 अगस्त से शुरू हुई इस प्रतियोगिता के तहत फुटबॉल,बास्केटबॉल, टेबिल टेनिस बैडमिंटन, खोखो के अतिरिक्त कई अन्य खेल भी शामिल रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन डायरेक्टर डॉ. जोस मुरिकन ने किया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. ऋतु दुबे तिवारी ने इस आयोजन को छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास से जोड़ते हुये उन्हें शिक्षा के साथ खेल के मैदान से जोड़ने का एक सफल प्रयास बताया।

डॉ. तिवारी ने बताया कि युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना वर्तमान समय की जरूरत है, क्यूंकि लगातार मोबाइल, टेलिविजन और इंटरनेट के इस्तेमाल की वजह से वे शारीरिक एक्टिविटीज को नजरअंदाज कर रहे हैं। खेलों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में आपसी समन्वय बढ़ता है और टीम वर्क से काम करने की क्षमता भी बढ़ती है।

30 अगस्त को इस 5 दिवसीय खेल प्रतियोगिता का समापन समारोह गणमान्यों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। नोएडा पुलिस की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी एवं एमपीटी क्वालिफाइड रीता यादव ने प्रमुख अतिथि के रूप में अपने अनुभव साझा किये। पुरस्कार वितरण के दौरान उन्होंने कहा कि खेलों का महत्व कभी भी, किसी भी उम्र में कम नहीं आंका जा सकता है। इससे समानता और एकता का गुण विकसित होता है।

कार्यक्रम के अंत में प्रिंसिपल डॉ. ऋतु दुबे ने सभी का आभार व्यक्त किया और इस कैंपेन को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष भर नियमित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने की बात कही।

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इस मंच पर जुटे ब्राह्मण समाज के दिग्गज, उठाए ये मुद्दे

अखिल भारतीय ब्राह्मण परिवार 18 प्रदेशों में ब्राह्मण समाज के मान सम्मान के लिए अग्रसर है

Last Modified:
Friday, 30 August, 2019
National Conference

अखिल भारतीय ब्राह्मण परिवार (रजिस्टर्ड) ने 30 अगस्त 2019 को आगरा में स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अधिवेशन के रूप में स्वाभिमान समारोह का आयोजन रुनकता में किया गया। सम्मेलन में देश भर से 18 प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सीमा उपाध्याय, महेश शर्मा, निर्मला दीक्षित, अमित त्रिवेदी और अन्य गणमान्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। बीना शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद गोपाल गौड़ ने परशुराम स्रोत का स्तुति वादन किया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष और संस्थापक श्याम किशोर दीक्षित ने अतिथियों का अभिवादन किया और कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय ब्राह्मण परिवार बहुत तेजी से 18 प्रदेशों में ब्राह्मण समाज के मान सम्मान के लिए अग्रसर है। समाज का मनोबल बढ़ाने और अपनी संस्कृति की धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कार्य किया जा रहा है। आरक्षण, समान आयोग की स्थापना जैसे मुद्दों को लेकर कार्यक्रम में चर्चा की गई।

कार्यक्रम का संचालन महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में ब्राह्मण महिलाओं का वर्चस्व रहा है, लेकिन अभी भी देश के कुछ भाग ऐसे हैं, जहां महिलाओं को आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है। महिलाओं को संगठित होने और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को बचाकर ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व करने की आवश्यकता है।

सीमा उपाध्याय ने कहा कि ब्राह्मणों को संगठित होने की आवश्यकता है। उन्होंने ‘हम सब एक हैं’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को मिलकर अपनी संस्कृति को बचाना होगा और अपने-अपने प्रतिनिधियों को आगे बढ़ाने में मदद करनी होगी सामाजिक, राजनैतिक क्षेत्र में ब्राह्मणों का आगे आना बहुत आवश्यक है।

निर्मला दीक्षित ने कहा कि हम सबको एक साथ मिलकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना होगा। महिलाओं की भागीदारी के बिना कोई भी समुदाय आगे नहीं बढ़ सकता, इसलिए ब्राह्मणों समुदाय को अपने समाज की महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहिए और उन्हें निर्णयात्मक पद देने चाहिए। महेश शर्मा ने कहा कि प्राचीन समय से ही ब्राह्मणों का स्थान शिक्षक के साथ ही समाज को मार्गदर्शन देने का रहा है लेकिन इस समय ब्राह्मणों की स्थिति कमजोर है। ब्राह्मणों को परिवारों को शिक्षित करना चाहिए और अपने कर्तव्य को करना चाहिए, तभी ब्राह्मणों को उनका पुराना स्थान मिलेगा।

अमित त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय समाज ब्राह्मणों के बिना अधूरा है। अर्थव्यवस्था और धर्म व्यवस्था आदि में ब्राह्मण महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। हर क्षेत्र में ब्राह्मणों का उच्च पदों पर होना बताता है कि वह समाज के मार्गदर्शक हैं और देश को आगे बढ़ाने में उनका योगदान रहा है। कार्यक्रम में मेधावी छात्रों का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष मनीष शर्मा, मथुरा से दीपक गौड़,राजकुमार शर्मा, सुनील पुरोहित, उर्मिला त्रिपाठी, राजेंद्र मिश्रा, अमित त्रिवेदी, सुनीता सारस्वत, मधु पांडे, गुंजन शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, शंभू नाथ चौबे, सचिन शर्मा, राघव लवानिया समेत देश भर के कई शहरों से अतिथि उपस्थित थे।

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वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल के बारे में आई ये बुरी खबर

'महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी' के सचिव और कार्याध्यक्ष के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Last Modified:
Friday, 30 August, 2019
Nandkishore Nautiyal

वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल का देहरादून में निधन हो गया है। वह 89 वर्ष के थे। नंदकिशोर नौटियाल ने मुंबई से प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक हिंदी 'ब्लिट्ज' की लंबे समय तक कमान संभाली और महानगर के हिंदीभाषी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का नेतृत्व किया। मुंबई में नौटियाल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय समाज में जगह-जगह बिखरी असमानता की खाई को भरने का भरपूर काम किया। 

'महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी' के सचिव और कार्याध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ-केदारनाथ की मंदिर समिति के वे अध्यक्ष रहे। बता दें कि मुंबई के श्रीमंत समाज में ‘पंडितजी’ और पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य जगत में ‘बाबूजी’ के नाम से प्रख्यात नंदकिशोर नौटियाल का जन्म 15 जून 1931 को उत्तराखंड राज्य में पौड़ी गढ़वाल जिले के एक छोटे से पहाड़ी गांव में पंडित ठाकुर प्रसाद नौटियाल के घर हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा गांव में और दिल्ली में हुई। देश-दुनिया के प्रति जागरूक नंदकिशोर नौटियाल छात्र जीवन के दिनों में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। दिल्ली की छात्र कांग्रेस की कार्यकारिणी के सदस्य के तौर पर उन्होंने 1946 में बंगलोर (अब बेंगलुरु) में हुए छात्र कांग्रेस के अखिल भारतीय अधिवेशन में भाग लिया। 1946 में ही नौसेना विद्रोह के समर्थन में जेल भरो आंदोलन में भी शिरकत की।

नंदकिशोर नौटियाल ने पत्रकारिता की शुरुआत 1948 में की। उन्होंने नवभारत साप्ताहिक (मुंबई), दैनिक लोकमान्य (मुंबई) और लोकमत (नागपुर) में 1948 से 1951 तक काम किया। 1951 में दिल्ली प्रेस समूह की `सरिता' पत्रिका से जुड़े। दिल्ली में `मजदूर जनता', `हिमालय टाइम्स', `नयी कहानियां' और `हिंदी टाइम्स' के लिए कई साल कार्य किया। इसके बाद नंदकिशोर नौटियाल धीरे-धीरे मजदूर आंदोलन की तरफ अग्रसर होते गये। 1954 से 57 तक दिल्ली में सीपीडब्ल्यूडी वर्कर्स यूनियन के सचिव रहे और अनेक बार आंदोलन किये। उन्होंने कई मजदूर संगठन बनाये और पत्रकार यूनियनों में सक्रिय रहे। गोवा मुक्ति संग्राम में भी भाग लिया।

नंदकिशोर नौटियाल ने पृथक हिमालयी राज्य तथा उत्तराखंड राज्य आंदोलन में 1952-53 में सक्रिय हिस्सा लिया तथा बाद में 1990-99 में भी उत्तराखंड आंदोलन से जुड़े। सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न रहते हुए भी उन्होंने पत्रकारिता और लेखन को अपना व्यवसाय बनाया। अनेक साप्ताहिक पत्रों और पत्रिकाओं के लिए काम करते हुए 1962 में उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब मुंबई से साप्ताहिक हिंदी `ब्लिट्ज़' निकालने के लिए उसके प्रथम संपादक मुनीश सक्सेना और प्रधान संपादक आरके करंजिया ने उन्हें चुना। 10 साल सहायक संपादक रहने के बाद 1973 में नंदकिशोर नौटियाल हिंदी `ब्लिट्ज़' के संपादक बने। 

1992 में हिंदी `ब्लिट्ज़' से अवकाश प्राप्त करने के बाद उन्होंने वर्ष 1993 में `नूतन सवेरा' साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। साहित्यिक और पत्रकारिता प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य के तौर पर वह अमेरिका कनाडा, उत्तर कोरिया, लीबिया, इटली, रूस, फिनलैंड, नेपाल, सूरीनाम आदि देशों की यात्रा कर चुके थे। उन्होंने विश्व हिंदी सम्मेलनों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। नौटियालजी को हिंदी साहित्य सम्मेलन का साहित्य वाचस्पति सम्मान, आचार्य तुलसी सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पत्रकार भूषण सम्मान, लोहिया मधुलिमये सम्मान समेत राष्ट्रीय स्तर के कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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