चर्चित टीवी एंकर रहे सुहैब इलियासी के मामले में आया ये बड़ा फैसला...

इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड' शो से शोहरत पाने वाले टीवी एंकर और निर्माता सुहैब इलियासी...

Last Modified:
Saturday, 06 October, 2018
soheb

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

'इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड' शो से शोहरत पाने वाले टीवी एंकर और निर्माता सुहैब इलियासी को दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बरी कर दिया है। इलियासी जेल में थे, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने यह कहते हुए साल 2017 के इस मामले में उन्हें को उम्रकैद सुनाई थी कि इलियासी ने पत्नी की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूप दिया था।'इंडियाज मोस्ट वॉन्टेड' शो से शोहरत पाने वाले टीवी एंकर और निर्माता सुहैब इलियासी को दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बरी कर दिया है। इलियासी जेल में थे, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने यह कहते हुए साल 2017 के इस मामले में उन्हें को उम्रकैद सुनाई थी कि इलियासी ने पत्नी की हत्या कर उसे खुदकुशी का रूप दिया था।

लेकिन अब हाइकोर्ट में जस्टिस एस मुरलीथरन और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने इलियासी की याचिका को मंजूर करते हुए उसपर सुनवाई की और उन्हें बरी कर दिया। इलियासी ने ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा कि निचली अदालत ने जिस गवाह की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा किया था, उसे समझने में चूक गई। फॉरेंसिक साक्ष्य को भी ठीक से नहीं समझ सकी। हाई कोर्ट ने इलियासी के पीएसओ की गवाही पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया, जो घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचा था। इसने अपनी गवाही में कहा था कि उसे आरोपी ने खुद वहां बुलाया था और मृतक को उठाने में मदद करने के लिए कहा था।

बेंच ने कहा कि उस पीएसओ के बयान को कोई चुनौती नहीं दी गई, जिसने कहा था कि मृतक ने इससे गाड़ी में बोला कि उससे गलती हो गई है, जिससे अभियोजन की थ्योरी खुद ब खुद गलत साबित हो जाती है कि इलियासी ने पत्नी की हत्या की।

हालांकि कोर्ट के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने हैरानी जताई है। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने तो इस मामले की बहस को सुप्रीम कोर्ट ने में लाइव देखने की मांग तक उठा दी है।



गौरतलब है कि इलियासी की पत्नी अंजू की चाकू लगने से मौत हो गई थी। अंजू के परिवारवालों ने इस मौत को दहेज हत्या का मामला बताते हुए दिल्ली के पांडव नगर थाने में शिकायत दर्ज की थी, जिसके आधार पर इलियासी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज किया गया था।  

बता दें कि 11 जनवरी 2000 को सुहैब के घर पर अंजू की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। मर्डर करने के लिए कैंची का इस्तेमाल किया गया था। बाद में आरोप सुहैब पर ही लगा और उसे 28 मार्च 2000 को गिरफ्तार कर लिया गया था।

सुहैब का तर्क था कि उसने आत्महत्या की है, जबकि अंजू की मां व उसकी दो बहनों ने शपथ पत्र सहित बयान दिया था कि अंजू ने उन्हें कई बार फोन कर बताया था कि सुहैब कभी भी उसकी हत्या कर सकते हैं।

28 मार्च 2000 को पुलिस ने सुहैब को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी। निचली अदालत ने 29 मार्च 2011 को सुहैब के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या की धारा के तहत आरोप तय किए थे।

इसी आदेश को सुहैब की सास रुकमा सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने हत्या, सुबूत मिटाने सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय करने की मांग की थी। सुहैब इलिहासी को 90 के दशक में भारत में टेलिविजन पर क्राइम बेस्ड रियलिटी शो इंडिया’ज मोस्ट वांटेड की शुरुआत करने वाले के तौर पर जाना जाता है।

गौरतलब है कि  90 के दशक में भारत में केबल टीवी चलन में आया था और इसी बीच रिएलिटी टीवी शो का यह सितारा उभरा था। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि भारतीय टेलिविजन पर रिएलिटी शो की शुरुआत सुहैब इलियासी ने ही की थी। सुहैब इलियासी के शो का नाम ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ था और यह उस वक्त का सबसे चर्चित क्राइम शो था। इस शख्स ने अपने शो के माध्यम से खोजी पत्रकारिता की मिसाल पेश की और कई कुख्यात अपराधियों को बेनकाब किया। माना जाता है कि उस वक्त खुद पुलिस ने शोएब इलियासी से संपर्क किया और उसके जरिए कई अपराधियों तक पहुंची।  

इससे पहले नब्बे के दशक की शुरुआत में लंदन से लौटे सुहैब के इस शो की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। सुहैब के इस शो के केंद्र में थे देश के सबसे खूंखार अपराधी। वो दिखाना चाहते थे कि कैसे ये अपराधी अपने गैंग को चलाते हैं और अपराधों को अंजाम देते हैं। अपने इस प्रस्ताव के साथ वो जिस भी चैनल मालिक के पास गए उन्हें निराशा ही मिली। इसके बाद जी टीवी ने उनके शो को दिखाने का साहस किया। शो के टीवी पर आते ही इसने लोकप्रियता की नई कहानी लिख दी।

सुहैब की पैदाइश दिल्ली की है और उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इसके बाद वो लंदन चले गए जहां उन्होंने टीवी एशिया में काम किया। जल्द ही वो इस चैनल के प्रोग्राम प्रोड्यूसर बन गए। 1996 में शोएब भारत आए और एक क्राइम बेस्ड रिएलिटी शो पर काम शुरू किया। बाद में 'इंडियाज मोस्ट वांटेड' देश का सबसे चर्चित कार्यक्रम बन गया।

अंजु से की थी लव मैरिज, शो की अंजू होने वाली थीं एंकर- 

सुहैब जमील इलियासी के बेटे हैं जो ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के हेड के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी मार्ग पर स्थित मस्जिद के इमाम भी रह चुके हैं। सुहैब और अंजू की मुलाकात साल 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई थी जहां पर दोनों मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे थे। अंजू के पिता जामिया में मेटलर्जी विभाग के हेड थे। दोनों के ही परिवारों ने उनके रिश्ते का विरोध किया था लेकिन दोनों ने लंदन में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत 1993 में शादी कर ली थी। दोनों का निकाह भी हुआ और अंजू ने नया नाम अफसान रख लिया। अंजू और सुहैब अक्टूबर 1994 तक लंदन में ही रहे थे। लंदन में रहने के दौरान ही सुहैब को इंडियाज मोस्ट वांटेंड का आइडिया आया जो कि ब्रिटिश शो क्राइमस्टॉपर्स से प्रेरित था। शुरुआत में कुछ पायलट एपिसोड्स में अंजू ने इस शो को एंकर किया, लेकिन मार्च 1998 में जब शो ऑन एयर हुआ तो इलियासी इसके एंकर बने। दरअसल इस बीच, दोनों के संबंधो में दरार आ चुकी थी। अंजू के भाई की मानें तो वह सुहैब से तलाक चाहती थीं लेकिन पति ने उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा। अप्रैल 1994 में सुहैब लंदन गए और एक माह बाद दोनों साथ में भारत लौटें। अगले साल यानी  1995 में अंजू ने बेटी आलिया को जन्म दिया था।

अंजू फिर से इलियासी को छोड़कर अपनी बहन के पास कनाडा चली गईं। इलियासी अक्टूबर 1998 में कनाडा गए और उन्होंने अंजू से गुहार लगाई कि वह वापस आ जाएं। इलियासी ने अपनी सॉफ्टवेयर फर्म को बदलकर आलिया प्रॉडक्शन कर लिया और इस प्राइवेट कंपनी में 25% शेयर अंजू के नाम पर रखे। 

 

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जिंदगी की जंग हार गईं युवा पत्रकार शिवानी वशिष्ठ

गंभीर बीमारी से जूझ रहीं शिवानी का देहरादून के अस्पताल में चल रहा था इलाज

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
shivani

गंभीर बीमारी से जूझ रहीं युवा महिला पत्रकार शिवानी वशिष्ठ जिंदगी की जंग हार गईं और मंगलवार को इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। हरियाणा के पानीपत, नूरवाला शहर की रहने वाली पत्रकार शिवानी वशिष्ठ सिटिजन वायस चैनल में काम करती थीं। शिवानी को डॉक्टरों ने आंतों में इंफेक्शन बताया था। कई जगह इलाज करने के बाद भी शिवानी को कोई फायदा नहीं हुआ था।

हालत ज्यादा गंभीर होने पर उन्हें देहरादून के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इतनी सी कम उम्र में शिवानी के इस तरह चले जाने से परिजनों के साथ ही दोस्तों व सहयोगी पत्रकारों में शोक का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी शिवानी को श्रद्धांजलि दी जा रही है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम दुबे

सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Shyam Dubey

वरिष्ठ पत्रकार श्याम दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार की रात जयपुर में उनका निधन हो गया। कोटा के किशोरपुरा मुक्तिधाम में शनिवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार किया गया। दुबे ने बनारस व कोटा से शिक्षा पूरी कर पत्रकारिता की शुरआत की थी। बाद में उन्होंने जयपुर से ‘तथ्य भारती’ पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया।

करीब 15 साल से वे जयपुर में ही पत्रकारिता कर रहे थे। शुक्रवार की शाम अचानक सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन उन्हें फोर्टिस अस्पताल लेकर ग्ए, जहां देर रात उनका निधन हो गया। श्याम दुबे के निधन के बाद परिजनों व रिश्तेदारों के साथ ही पत्रकारों में भी शोक व्याप्त है। पत्रकार बिरादरी ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की है।

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'पत्रकारों की परीक्षा रोजाना होती है तथा उसका परिणाम भी रोजाना आता है'

विश्व संवाद केंद्र, गुजरात की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों को किया गया सम्मानित

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Narad Jayanti

विश्व संवाद केंद्र (बीएसके), गुजरात की ओर से नारद जयंती के अवसर पर रविवार को पत्रकार सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छह पत्रकारों का सम्मान किया गया। जिन पत्रकारों को सम्मानित किया गया, उनमें जयवंत पंड्या, मनोज मेहता, विवेक कुमार भट्ट, मौलिन मुंशी, सुदर्शन उपाध्याय और हर्षद याज्ञिक शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूर्व सूचना आयुक्त, गुजरात साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष व साहित्यकार भाग्येश झा थे। उनका कहना था कि पत्रकारों की परीक्षा रोजाना होती है तथा उसका परिणाम भी रोजाना आता है।

समाज में पत्रकारों की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि हालांकि पत्रकार कभी भी इतिहास नहीं लिखता है, लेकिन ये भी सच है कि पत्रकारों के बिना इतिहास नहीं लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में क्रिएटिव राइटिंग बहुत बड़ी चुनौती है। रचनात्मकता के द्वारा पाठक संख्या बढ़ाई जा सकती है। एक पत्रकार को नारदजी की तरह बिना किसी भेदभाव के कार्य करना चाहिए और सकारात्मक बातों को बाहर निकालकर लाना चाहिए। इस तरह का काम करने वाले पत्रकार ही नारदजी के सच्चे अनुयायी हो सकते हैं। भाग्येश झा ने कहा कि कालिदास ने अपनी रचना ‘मेघदूत’ में बादलों के माध्यम से संदेश भेजने की बात कही है। आजकल कवि कालिदास का अध्ययन करके वैज्ञानिक क्लाउड कंप्यूटिंग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को तीन बातों ‘मैं ही पहला हूं’ (I am the first), ‘मैं ही यूनिक‘ ( I am unique) और ‘मैं ही भरोसेमंद’ ( I am reliable) से सावधानी रखने की जरूरत है। भाग्येश झा का यह भी कहना था कि समाज को जाग्रत और सतर्क रखने के लिए पत्रकार का जागृत और सतर्क रहना बहुत आवश्यक है। समाज के सतर्क रहने पर ही सरकार भी ढंग से कार्य करेगी और इसमें पत्रकार की बहुत बड़ी भूमिका होती है। भाग्येश झा ने यह भी बताया कि हॉवर्ड में हुए एक शोध में वर्डस्मिथ नामक एप तैयार किया गया। इस एप के द्वारा भूकंप सरीखे समाचार की रिपोर्ट रोबोट को देने पर वह 3000 शब्दों की रिपोर्ट तैयार कर देगा।

कार्यक्रम के अध्यक्ष व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पश्चिम क्षेत्र के संघचालक डॉ. जयन्तीभाई भाड़ेसिया ने कहा कि नैतिकता, देश प्रेम व आचार  पत्रकारिता की नींव होनी चाहिए। इस मौके पर गुजरात प्रान्त के संघचालक डॉ. भरत पटेल, प्रान्त संपर्क प्रमुख व वीएसके गुजरात के ट्रस्टी हरेश ठाकर, प्रान्त के पूर्व संघचालक अमृतभाई कड़ीवाला, प्रान्त प्रचार प्रमुख विजय ठाकर, प्रान्त सह प्रचार प्रमुख हितेन्द्र मोजिद्रा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम में विजय ठाकर को वीएसके गुजरात के ट्रस्टी व मोजिद्रा को प्रबन्ध ट्रस्टी घोषित किया गया।

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कवरेज के दौरान फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुआ कुछ ऐसा, चली गई जान

चित्तूर में चल रहे गंगम्मा जात्रा उत्सव में कवरेज के लिए गए थे अनंत पद्मनाभम

Last Modified:
Thursday, 16 May, 2019
Photo Journalist

करंट लगने से फोटो जर्नलिस्ट की मौत का मामला सामने आया है। मामला आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले का है। बताया जाता है कि अनंत पद्मनाभम उर्फ आनंद नामक फोटो जर्नलिस्ट चित्तूर में चल रहे गंगम्मा जात्रा उत्सव में कवरेज के लिए गए थे। तभी अचानक वे करंट की चपेट में आ गए। झुलसी हालत में अनंत पद्मनाभम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सूचना मिलते ही जिले के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। अनंत पद्मनाभम की मौत पर आंध्र प्रदेश फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने शोक जताते हुए उनके परिजनों के साथ हमेशा खड़े रहने का आश्वासन दिया है।

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इतनी कम उम्र में चले गए दैनिक जागरण के पत्रकार लोकेश प्रताप सिंह

कई पत्रकारों ने लोकेश प्रताप के निधन पर सोशल मीडिया पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है

Last Modified:
Wednesday, 15 May, 2019
Lokesh Pratap

पत्रकार लोकेश प्रताप सिंह का आकस्मिक निधन हो गया है। वह इन दिनों कैंसर से जूझ रहे थे। लंबे समय से दैनिक जागरण से जुड़े लोकेश प्रताप इन दिनों मुख्य उप संपादक के तौर पर बरेली में प्रादेशिक (पीलीभीत, शाहजहांपुर व बदांयू) डेस्क का प्रभार संभाल रहे थे। उन्हें पिछले साल ही यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वह पीलीभीत में ब्यूरो प्रमुख के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इससे पहले कानपुर में भी वह प्रादेशिक प्रभारी की जिम्मेदारी निभा चुके थे। यही नहीं, बदायूं में ब्यूरो चीफ के रूप में भी उन्होंने अपनी कलम की धार से पत्रकारिता जगत में अपनी खास पहचान बना रखी थी।

करीब दो साल पूर्व केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लोकेश प्रताप सिंह को राष्ट्रीय जनसहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) का वाइस चेयरमैन नियुक्त किया था। लोकेश प्रताप इससे पहले भी अटल सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय की राजभाषा समिति में सलाहकार रह चुके थे। पत्रकारिता के साथ ही सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर उनका व्यापक और प्रभावी योगदान रहता था। लोकेश प्रताप सिंह ने अपनी लेखनी के दम पर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी छवि बनाई हुई थी। उनके निधन से पत्रकार जगत में शोक की लहर है। कई पत्रकारों ने लोकेश प्रताप के निधन पर सोशल मीडिया पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

लोकेश प्रताप के निधन पर दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार और मुंबई के ब्यूरो प्रमुख ओम प्रकाश तिवारी ने भी अपने फेसबुक पेज पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है,’ लोकेश अपने आप में एक संस्था थे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अयोध्या में पहली बार मुलाकात हुई थी उनसे। 17-18 वर्ष का दुबला-छरहरा सा एक लड़का। लेकिन तेजतर्रार इतना कि उस दौरान अयोध्या में उस आंदोलन की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बन गया था। विश्व हिंदू परिषद के विश्व संवाद केंद्र में वह महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। याददाश्त इतनी गजब कि पूछिए मत।आज के 'जनपथ' की तरह उन दिनों 'राष्ट्रधर्म' पत्रिका में मेरा एक स्तंभ प्रकाशित होता था - 'मासिक चुटकियाँ'। उस स्तंभ की दर्जनों चुटकियां लोकेश आज 30 साल बाद भी धाराप्रवाह सुना सकते थे।

2014 में जब मुंबई में उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम (UPDF) का पहला कार्यक्रम किया तो सांसद लल्लू सिंह को मुंबई लाने का पूरा श्रेय लोकेश को ही जाता है। लल्लू सिंह को वह आने के लिए राजी नहीं करते तो शायद वह कार्यक्रम ही नहीं होता और यूपीडीएफ के आगे के कार्यक्रम भी नहीं होते। गंगा के प्रति उनका समर्पण भी अद्भुत था।

दैनिक जागरण के पीलीभीत ब्यूरो प्रमुख रहते हुए उन्होंने जागरण के ही बैनर को आगे रखते हुए गंगा स्वच्छता के लिए जिस प्रकार के गंभीर प्रयास किए, यदि उसे मॉडल बनाकर गंगा किनारे के शहरों/कस्बों में कार्यरत पत्रकार सक्रिय हो जाएं तो गंगा मैया को साफ करने के लिए किसी और प्रयास की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। ऐसे कर्मठ युवा के जाने की उम्र तो कतई नहीं थी अभी। लेकिन ईश्वर भी कर्मठों को ही जल्दी याद करता है। वह कैंसर से जीत न सके। उनके परिवार पर तो यह वज्रपात है ही, हम सबके लिए भी उनका असमय अवसान एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनके परिवार को यह दुख सहने की क्षमता प्रदान करें और लोकेश की आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें। ऊँ शांति शांति शांति।’

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इस हादसे ने छीन ली पत्रकार समेत चार लोगों की जिंदगी

इलाज के लिए रिश्तेदार को कार से मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे पत्रकार अरविंद उपाध्याय

Last Modified:
Tuesday, 14 May, 2019
Arvind Updahyay

सड़क हादसे में कार सवार पत्रकार समेत चार लोगों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश में अंबेडकरनगर के सम्मनपुर क्षेत्र में खपुरा के पास मंगलवार को हुए इस हादसे में जान गंवाने वालों में सेना के एक रिटायर्ड कैप्टन, उनकी पत्नी और कार का चालक भी शामिल है। हादसे में पत्रकार समेत चार लोगों की मौत के बाद परिजनों के साथ ही पत्रकार बिरादरी में शोक व्याप्त है।

बताया जाता है कि जलालपुर क्षेत्र के बड़ेपुर निवासी कैप्टन (रिटायर्ड) लक्ष्मीकांत (65) पुत्र केदारनाथ उपाध्याय की तबीयत खराब चल रही थी। लक्ष्मीकांत के रिश्तेदार व पड़ोसी जिला जौनपुर निवासी पत्रकार अरविंद उपाध्याय (45) बड़ेपुर आकर लक्ष्मीकांत को दिखाने के लिए कार से जिले के मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर जा रहे थे। कार में उनके साथ लक्ष्मीकांत की पत्नी कांति उपाध्याय (62) भी थीं और कार बड़ेपुर निवासी चालक रामराज चला रहा था।

आजमगढ़ अकबरपुर मार्ग स्थित खपुरा के ईंट भट्ठे के पास बाइक सवार को बचाने के चक्कर में कार अनियंत्रित होकर डंपर से टकराकर पलट गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से चारों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन चारों की मौत हो चुकी थी। इस हादसे में बाइक सवार अभिषेक (26) पुत्र श्यामलाल निवासी सुलेमपुर सम्मनपुर घायल हो गया। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जाता है कि हाइवे पर सड़क से सटा ईंट भट्ठा होने की वजह से यह हादसा हुआ। सीओ सदर धर्मेंद्र सचान ने बताया कि सड़क पर अतिक्रमण करने वाले ईंट भट्ठा मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश पुलिस को दे दिया है। उन्होंने बताया कि हादसे के अन्य कारणों की भी छानबीन हो रही है। इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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लाखों रुपए ठगने के बाद पत्रकार को दे रहे थे धमकी, अब कसा आरोपियों पर शिकंजा

पत्रकार की ओर से कराई गई प्लाट की बाउंड्री को भी आरोपियों ने तुड़वा दिया

Last Modified:
Tuesday, 14 May, 2019
Sachin Mishra

प्लाट दिलाने के नाम पर पत्रकार से साढ़े दस लाख रुपए की ठगी और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अब जाकर पुलिस की नींद खुली है। दैनिक जागरण, नोएडा  में वरिष्ठ उपसंपादक सचिन मिश्रा से जुड़े इस मामले में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की विजयनगर पुलिस ने मंगलवार को चार आरोपियों गौरव राणा, प्रदीप राणा, साहिद व महेश यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर के मुताबिक, गौरव राणा, प्रदीप राणा और साहिद ने गाजियाबाद में रानी लक्ष्मीबाई नगर, सुदामापुरी, डूंडाहेड़ा में प्लाट के नाम पर सचिन मिश्रा से साढ़े दस लाख रुपये ले लिए। 21 फरवरी, 2019 को गौरव ने सचिन मिश्रा की पत्नी रोहिणी मिश्रा के नाम पचास गज के प्लाट की रजिस्ट्री भी कराई।

इसके बाद 23 फरवरी को जब सचिन प्लाट की नींव भरवा रहे थे, तभी अपने हथियारबंद साथियों के साथ मौके पर पहुंचे महेश यादव ने उस प्लाट को अपना बताते हुए काम रुकवा दिया। इस संबंध में सचिन ने जब विजयनगर थाना प्रभारी को अवगत कराया तो उस समय उन्होंने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद सचिन ने आरोपियों से पैसे मांगे तो उन्होंने तवज्जो नहीं दी। सचिन का आरोप है कि ये लोग प्लाट या पैसे वापस करने का आश्वासन दे रहे हैं, मगर दे नहीं रहे हैं। सभी भूमाफिया व अपराधी हैं।

इस बीच, सचिन ने जिस प्लाट की बाउंड्री करवाई थी, उसे 16 मार्च को आरोपियों ने तुड़वा दिया। आरोप है कि गौरव, प्रदीप, साहिद व महेश ने सचिन के प्लाट सहित करीब तीन सौ गज जमीन किसी और शख्स को बेच दी है। अब सभी लोग मिलकर सचिन और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। प्रताप विहार, गाजियाबाद निवासी सचिन मिश्रा पुत्र श्रवण कुमार मिश्रा ने अब प्लाट के पैसे वापस दिलवाने और अपने परिवार के जान-माल की सुरक्षा की मांग करते हुए विजयनगर थाने में चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।

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पत्रकार गौरव पुष्कर की मेहनत को सलाम, पाई ये बड़ी उपलब्धि

झारखंड में गढ़वा जिले के गौरव पुष्कर ने काफी संघर्षों के बाद हासिल किया है ये मुकाम

Last Modified:
Monday, 13 May, 2019
Gaurav Pushkar

पत्रकार गौरव पुष्कर ने अपने करियर को नई दिशा देते हुए शानदार उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, गौरव ने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास कर ली है और भारतीय सूचना सेवा (IIS)  में उन्हें देशभर में 32वां रैंक मिला है। खास बात यह है कि गौरव पुष्कर को यह सफलता पहले ही प्रयास में मिली है। मूलरूप से झारखंड के गढ़वा जिले में रमना प्रखंड के सिलिदाग ग्राम निवासी स्व. कृष्णकांत सिंह के पुत्र गौरव पुष्कर ने काफी संघर्ष के बाद इस उपलब्धि को हासिल किया है।

2002 में मैट्रिक की शिक्षा उच्च विद्यालय चंदवा से प्राप्त करने के बाद 2004 में गढ़वा स्थित गोविंद इंटर कॉलेज से इंटर तथा श्री सद्गुरू जगजीत सिंह नामधारी महाविद्यालय से 2007 में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने रांची विश्वविद्यालय, रांची से 2008 में बीजेएमसी किया। उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री भी ली है। वह आईनेक्स्ट (i Next) में रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं और एचटी मीडिया लिमिटेड में सीनियर कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रहे हैं। गौरव की इस सफलता पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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इस बीमारी ने छीन ली वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर आचार्य की जिंदगी

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय थे श्याम सुंदर आचार्य

Last Modified:
Monday, 13 May, 2019
Shyam Sunder

वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर आचार्य का जयपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। करीब 80 वर्षीय श्याम सुंदर आचार्य कुछ समय से कैंसर से पीड़ित थे और साकेत अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां पर उन्होंने शनिवार को अंतिम सांस ली। रविवार को दुर्गापुरा महारानी फॉर्म स्थित मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। श्याम सुंदर आचार्य के बेटे शैलेष ने पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। श्याम सुंदर आचार्य के निधन पर पत्रकारों समेत क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने शोक जताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

सात जुलाई 1938 को जन्मे श्याम सुंदर आचार्य 50 साल से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय थे और कई हिंदी अखबारों में संपादक रह चुके थे। कुछ दिन पहले ही उनकी पुस्तक ‘अंतदृष्टि्’ का विमोचन साकेत अस्पताल में ही किया गया था। उन्हें पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। पिंकसिटी प्रेस क्लब ने भी उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था।

श्याम सुंदर आचार्य ने हिंदुस्तान समाचार एजेंसी में जयपुर ब्यूरो चीफ से अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे नवभारत टाइम्स में जयपुर एडिशन के रेजिडेंट एडिटर बने। बाद में उन्होंने दिल्ली का रुख किया और जनसत्ता के समाचार संपादक के तौर पर पद ग्रहण किया। इसके बाद वे जनसत्ता के कोलकाता एडिशन के रेजिडेंट एडिटर बनाए गए। सेवानिवृत्ति के बाद भी श्याम सुंदर आचार्य कई समाचारपत्रों के लिए लिखते रहे थे।

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पत्रकार से जुड़े इस मामले में UC Web की बढ़ सकती है 'मुश्किल'

चीन के अलीबाबा समूह की अग्रणी मोबाइल इंटरनेट कंपनी UC Web का विवादों से पुराना नाता रहा है

Last Modified:
Wednesday, 08 May, 2019
UC Web

चीन के अलीबाबा समूह की अग्रणी मोबाइल इंटरनेट कंपनी UC Web (UC Broswer/UC News) के खिलाफ लगभग डेढ़ साल से चल रही लड़ाई अब रंग लाने लगी है। दरअसल, आपराधिक मानहानि के मामले में गाजियाबाद की अदालत ने कंपनी के इंडिया हेड और जनरल मैनेजर ‘Damon Xi’  व एक अन्य कर्मचारी ‘Steven Shi’ के खिलाफ दूसरा गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इससे पहले अप्रैल में भी उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद कोर्ट में पेश न होने पर अब ये दूसरा वारंट जारी किया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र सिंह परमार द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि के इस मामले में गुरुग्राम पुलिस के साथ ही यूपी की पुलिस भी दोनों को तलाश रही है। खास बात ये है कि चीन के बाहर इस ग्रुप के किसी चाइनीज कर्मचारी के खिलाफ इस तरह गैरजमानती वारंट जारी किया गया है। यही नहीं, अब तक दो वारंट जारी किए जा चुके हैं।  इससे पहले कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 24 दिसंबर 2018 को गाजियाबाद की अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

इस मामले में शिकायतकर्ता वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र सिंह परमार के वकील नवांक शेखर मिश्रा का कहना है कि दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के लिए वे इंटरपोल तक की मदद लेंगे। नवांक शेखर मिश्रा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कंपनी का विवादों से लगातार नाता रहा है। नवंबर 2017 में भारत सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर इसे उन 40 से ज्यादा चाइनीज कंपनियों की लिस्ट में रखा था, जिन्हें सरकार ने खतरनाक माना था। सरकार ने देश के सभी सैनिकों से इस ऐप का इस्तेमाल न करने और मोबाइल को फॉर्मेट कर इसे डिलीट करने का ऑर्डर जारी किया था।

बताया जाता है कि इससे पहले अगस्त 2017 में भी भारत सरकार ने डाटा लीक मामले में इसकी जांच के आदेश दिए थे। एबीपी न्यूज ने भी मई 2018 में यूसी न्यूज के देश में गलत कामों का सबूतों के साथ खुलासा किया था। वर्ष 2015 में UC Web पर कैनेडियन कंपनी ने भी डाटा लीक करने का आरोप लगाया था। गूगल ने भी प्ले स्टोर से UC browser को कुछ दिनों के लिए हटा दिया था।

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