हिंदी सुधार के लिए दैनिक जागरण की बड़ी पहल, हर महीने दिए जाएंगे 75 हजार रुपये

‘हिंदी हैं हम’ ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत शोधार्थियों को मिलेंगे हर महीने 75 हजार रुपए

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
Dainik Jagran

हिंदी भाषा में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए दैनिक जागरण द्वारा ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के अंतर्गत ‘ज्ञानवृत्ति’ के दूसरे संस्करण के लिए आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के तहत सामाजिक, आर्थिक, कूटनीति, इतिहास और राजनीतिक आदि विषयों पर स्तरीय शोध को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। ‘हिंदी हैं हम’  ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत शोधार्थियों को हर महीने 75 हजार रुपए मिलेंगे।

दरअसल लंबे समय से हिंदी में यह बहस जारी है कि अपनी भाषा में शोध को कैसे बढ़ावा दिया जाए। इस बहस को अंजाम तक पहुंचाने के लिए और हिंदी में विभिन्न विषयों पर मौलिक लेखन के लिए ज्ञानवृत्ति द्वारा देशभर के शोधार्थियों को आमंत्रित किया जाता है। शोधार्थियों से अपेक्षा है कि वे संबंधित विषय पर हजार शब्दों में एक सिनॉप्सिस भेजें। इस पर निर्णायक मंडल की ओर से मंथन कर विषय और शोधार्थी का चयन किया जाएगा।

चयनित विषय पर शोधार्थी को कम से कम छह महीने और अधिकतम नौ महीने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति दी जाती है। पिछले साल तीन शोधार्थियों को ज्ञानवृत्ति के तहत चुना गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 1 जुलाई 2019 है और आवेदक की उम्र 01 जनवरी 2019 को 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के निर्णायक मंडल सदस्यों में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के प्रो. एसएन चौधरी और  दूसरे सदस्य डॉ. दरवेश गोपाल, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय हैं। इसके अलावा चयन समिति में दैनिक जागरण का संपादक मंडल भी मौजूद रहेगा। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति में आवेदन करने के लिए और अपने शोध की रूपरेखा प्रस्तुत करने के लिए कृपया www.jagranhindi.in पर लॉगिन कर सकते हैं। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के नियम और शर्तें भी इस वेबसाइट पर हैं।

प्रथम दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के तीन विजेता रहे थे। इनमें इलाहाबाद की दीप्ति सामंत रे को उनके प्रस्तावित शोध 'प्रधानमंत्री जनधन योजना के भारत में वित्तीय समावेशन पर प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण' पर शोध के लिए चुना गया था। दूसरी शोधार्थी लखनऊ की नाइश हसन थीं, जिनके शोध का विषय था ‘भारत के मुस्लिम समुदाय में मुता विवाह, एक सामाजिक अध्ययन’। तीसरे शोधार्थी  बलिया के निर्मल कुमार पाण्डेय थे, जिनके शोध का विषय था 'हिंदुत्व का राष्ट्रीयकरण बजरिए हिंदी हिंदू हिन्दुस्तान, औपनिवेशिक भारत में समुदायवादी पुनरुत्थान की राजनीति और भाषाई-धार्मिक-सांस्कृतिक वैचारिकी का सुदृढ़ीकरण।'

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इस बड़े पद पर THE HINDU GROUP से जुड़ीं अपराजिता बिस्वास

पूर्व में वोडाफोन और टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ भी काम कर चुकी हैं

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Aparajita Biswas

‘द हिन्दू’ (The Hindu) ग्रुप ने अपराजिता बिस्वास को हेड (ब्रैंड मार्केटिंग) नियुक्त किया है। वह मार्केटिंग और उपभोक्ता मामलों से जुड़ीं ग्रुप की सभी पहलों का नेतृत्व करेंगी। बता दें कि अपराजिता को ब्रैंड स्ट्रैटेजी, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, एफएमसीजी और मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह पूर्व में वोडाफोन, मोजरबियर और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे ब्रैंड के साथ भी काम कर चुकी हैं।

द हिन्दू ग्रुप में नई भूमिका से पहले अपराजिता वोडाफोन आयडिया लिमिटेड से जुड़ी हुई थीं और बतौर हेड (ब्रैंड कम्युनिकेशन) तमिलनाडु सर्किल की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अपराजिता की नियुक्ति के बारे में द हिन्दू ग्रुप के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश बालाकृष्ण ने कहा, ‘अपराजिता बिस्वास का हमारी मार्केटिंग टीम का हिस्सा बनने पर हम बहुत खुश हैं। हमें विश्वास है कि अपराजिता के ज्ञान और अनुभव का द हिन्दू ग्रुप को काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, अपनी नई भूमिका के बारे में अपराजिता बिस्वास का कहना है, ‘द हिन्दू जैसे प्रतिष्ठित ग्रुप का हिस्सा बनने पर मैं काफी खुश हूं और खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं कि मुझे इसमें काम करने का अवसर मिला। मैं ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना पूरा योगदान दूंगी।’

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आखिर मौत से जंग हार गए पत्रकार शशांक रस्तोगी

इलाज के लिए शशांक रस्तोगी को दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में कराया गया था भर्ती

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Shashank-Rastogi

उत्तर प्रदेश में देवबंद नगर के युवा पत्रकार शशांक रस्तोगी का शुक्रवार की रात निधन हो गया। बताया जाता है कि 43 वर्षीय शशांक रस्तोगी को बीमारी के कारण दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों का कहना था कि उनका लिवर काफी खराब है और उसमें संक्रमण फैल गया है। डॉक्टरों ने लिवर के संक्रमण को दूर करने का काफी प्रयास किया, लेकिन शशांक रस्तोगी को बचाया नहीं जा सका।

शनिवार को देवबंद में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। शशांक रस्तोगी के अंतिम संस्कार के वक्त बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और पत्रकार मौजूद रहे। शशांक अपने पीछे पत्नी और एक पुत्री को बिलखता हुआ छोड़ गए हैं। शशांक ने अभी दो महीने पहले ही न्यूज नेशन-न्यूज स्टेट चैनल में बतौर स्ट्रिंगर जॉइन किया था।

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पहली बार इस तरह की फिल्म में नजर आएंगे धर्मेंद्र

मुंबई में शुरू हो चुकी है लेखक और डायरेक्टर मनोज शर्मा की इस फिल्म की शूटिंग

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Dharmendra

लेखक और डायरेक्टर मनोज शर्मा इन दिनों सातवे आसमान पर हैं। उन्होंने अपनी हॉरर कॉमेडी फिल्म 'खली बली' में एक्टर धर्मेंद्र को कास्ट कर लिया है। यह धर्मेंद्र की पहली हॉरर कॉमेडी फिल्म है। फिल्म का निर्माण कर रहे हैं वन एंटरटेनमेंट फिल्म प्रोडक्शंस के कमल किशोर मिश्रा और प्राची मूवीज।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिल्म की शूटिंग मुंबई में शुरू हो चुकी है और फिल्म की शूटिंग को धर्मेंद्र काफी एन्जॉय भी कर रहे हैं। खली बली फिल्म में वह मनोचिकित्सक का किरदार निभा रहे हैं। यह पहली बार है कि धर्मेंद्र अलग जोनर की हॉरर कॉमेडी फिल्म में काम कर रहे हैं। फिल्म में धर्मेंद्र के अलावा एक्ट्रेस मधू, कायनात अरोड़ा, रनजीश दुग्गल, राजपाल यादव, विजय राज, एकता जैन, यासमीन खान, ब्रिजेंद्र काला, योगेश लखानी और असरानी हैं।

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बीबीसी न्यूज के लिए इस मायने में बहुत खास है भारतीय मार्केट

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की तरफ दुनिया भर के लोगों का रुझान पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ रहा है

by पंकज शर्मा
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
BBC NEWS

'ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन' यानी ‘बीबीसी’ (BBC)  की तरफ दुनिया भर के लोगों का पूर्व की तुलना में रुझान ज्यादा बढ़ रहा है। ‘ग्लोबल ऑडियंस मीजर’ (GAM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल भर में 13 प्रतिशत के इजाफे के साथ एक हफ्ते में ऑडियंस की यह संख्या 426 मिलियन की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच चुकी है।

वर्ष 2018 के बाद से भारत, केन्या और यूएसए में बीबीसी न्यूज के ऑडियंस की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है। भारत में बीबीसी न्यूज नौ भाषाओं में अपनी सेवाएं देती है और यहां इसके ऑडियंस की संख्या 50 मिलियन हो गई है। इसके साथ ही यह बीबीसी न्यूज के लिए सबसे प्रमुख विदेशी बाजार बन गया है। भारत के बाद इस लिस्ट में 41 मिलियन के साथ नाइजीरिया, 38 मिलियन के साथ यूएसए और 15 मिलियन के साथ केन्या का नंबर है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल लेवल पर बीबीसी न्यूज के ऑडियंस में 47 मिलियन की बढ़ोतरी के साथ यह 394 मिलियन हो गई है। इसमें बीबीसी वर्ल्ड सर्विस (अंग्रेजी और अन्य भाषाएं) में 41 मिलियन की बढ़ोतरी के साथ 319 मिलियन का आंकड़ा शामिल है। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस (अंग्रेजी) और बीबीसी वर्ल्ड न्यूज टीवी चैनल के ऑडियंस में कमश: 97 मिलियन और 101 मिलियन के साथ अब तक की सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।

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पत्रकार पर जानलेवा हमले के मामले में अब जागी पुलिस, उठाया ये कदम

अस्पताल में भर्ती पत्रकार की हालत में पहले से है सुधार

Last Modified:
Friday, 21 June, 2019
Abhishek Jha

छत्तीसगढ़ में पत्रकार अभिषेक झा पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने घटना के दो दिन बाद कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को जिन सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें मधुबन बार के मैनेजर के साथ तीन कर्मचारी और तीन अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ मारपीट व बलवे का केस दर्ज किया है। वहीं, निजी अस्पताल में भर्ती अभिषेक झा की हालत पहले से बेहतर है।

इस मामले में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष दामू अम्बेडारे के नेतृत्व में कई पत्रकार बुधवार को रायपुर एसएसपी आरिफ शेख हुसैन और जिला कलेक्टर एस भारतीदासन से मिले थे और ज्ञापन देकर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किए जाने की मांग उठाई थी। गौरतलब है कि कई चैनलों और अखबारों में काम कर चुके वेब जर्नलिस्ट अभिषेक झा पर मंगलवार की रात रायपुर में शराब के नशे में चूर कुछ लोगों ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया था और गंभीर हालत में बीच सड़क पर छोड़कर फरार हो गए थे।

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मेहमानों को कुछ इस अंदाज में आकर्षित करेगा Public-The Garden Restaurant

यह रेस्टोरेंट ताजमहल के पूर्वी गेट से महज एक किलोमीटर दूर है

by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
Public-Restaurant

ताज नगरी आगरा में अपनी तरह के पहले गार्डन रेस्टोरेंट की शुरुआत की गई है। Public-The Garden Restaurant नाम से 7000 स्क्वायर फुट से अधिक जगह में फैले इस रेस्टोरेंट की शुरुआत 14 जून 2019 को हुई है। इसमें छह गैजेबो (छतरी नुमा बैठने का स्थान) के साथ ही खुले में और कवर्ड में एसी डाइनिंग की सुविधा है, जिसमें बैठकर आप मनचाहे स्वादिष्ट भोजन का लुत्फ उठा सकते हैं। यहां के खाने की बात करें तो आपको यहां पर इंडियन, चाइनीज, कॉन्टिनेंटल और मैक्सिकन फूड का लाजवाब स्वाद मिलेगा।

यह रेस्टोरेंट ताजमहल के पूर्वी गेट से महज एक किलोमीटर दूर है और यहां पर लोगों को प्रदूषण से मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल वातावरण मिलता है। यही नहीं, आने वाले समय में यहां पर रिसॉर्ट शुरू करने के साथ ही जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बताया जाता है कि इस तरह के रेस्टोरेंट की शुरुआत का उद्देश्य मेहमानों को प्राकृतिक माहौल उपलब्ध कराना है, जहां पर वे शांत और स्वस्थ वातावरण में सुकून भरा समय बिता सकें।

पब्लिक रेस्टोरेंट का मूल उद्देश्य स्थानीय मेहमानों के साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करना है। मेहमानों को उनकी पसंद के लजीज व्यंजन मिलें, इसके लिए इस रेस्टोरेंट में छह शेफ और एक एग्जिक्यूटिव शेफ की टीम नियुक्त की गई है।

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वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा नहीं रहे

मायानगरी में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा के बारे में बुरी खबर मिली है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019

मायानगरी में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार प्रेमचंद शर्मा के बारे में बुरी खबर मिली है। बताया गया है कि संडे सुबह उन्हें हार्ट अटैक हुआ। इस अटैक के बाद चिकित्सक उन्हें बचा नहीं पाए। वे मुंबई के मशहूर अखबार ‘दोपहर का सामना’ में सहायक संपादक के तौर पर कार्यरत थे।

54 वर्षीय शर्मा अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। पत्नी के साथ दो बेटों के साथ पोतों उनके परिवार में है।  उनकी अस्थियां नासिक में विसर्जित कर दी गईं।
 

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कनौजिया की तरह इस पत्रकार की गिरफ्तारी पर हल्ला क्यों नहीं?

पत्रकार की गिरफ्तारी पर अब उठने लगे हैं सवाल, पत्नी ने लगाए पुलिस पर कई आरोप

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Rupesh Kumar

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किये गए पत्रकार प्रशांत कनौजिया भले ही मीडिया संस्थानों के दबाव और सुप्रीम कोर्ट के दखल के चलते सलाखों से बाहर निकल आये हों, लेकिन झारखंड का एक पत्रकार अभी भी अपनी रिहाई की बाट जोह रहा है। फ्रीलांस जर्नलिस्ट रूपेश कुमार सिंह समेत तीन लोगों को कुछ दिन पहले नक्सली बताकर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इनके पास से विस्फोटक बरामद किया गया है, जबकि रूपेश कुमार की पत्नी इप्सा सताक्षी का दावा है कि उनके पति को गिरफ्तार कहीं से किया गया, दिखाया कहीं और गया। इतना ही नहीं, विस्फोटक को बाकायदा प्रायोजित तरीके से उनकी गाड़ी में प्लांट कर दिया गया।

स्थानीय अखबार ‘प्रभात खबर’ में इस संबंध में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि रूपेश कुमार, मिथलेश कुमार सिंह और उनके ड्राइवर मोहम्मद कलाम को गया से 30 किमी दूर हाईवे से विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर मीडिया में आई, बिहार पुलिस ने रूपेश के रामनगर और बोकारो स्थित घर पर छापा मारा और उनका लैपटॉप, फोन सहित कुछ कथित नक्सल साहित्य बरामद करके ले गई। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जिसे पुलिस नक्सल साहित्य बता रही है, वो कुछ और नहीं, बल्कि मैगजीन ‘लाल माटी’ में रूपेश के प्रकाशित लेख हैं, रूपेश ‘लाल माटी’ के संपादक भी हैं।

इप्सा सताक्षी का भी यही कहना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने घर की तलाशी लेने से पहले कोई वारंट नहीं दिखाया। उनके बार-बार मांगने पर भी अधिकारी खामोश रहे। यह पूरा मामला 4 जून से शुरू हुआ, जब मिथलेश के पैतृक गाँव औरंगाबाद जाते वक़्त सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। काफी देर तक जब सभी का कोई पता नहीं चला तो मिथलेश के परिवार ने रामगढ़ पुलिस स्टेशन में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। इसके बाद मामले में मोड़ उस वक़्त आया जब मिथलेश ने रूपेश के भाई को अपने सकुशल होने और वापस लौटने की बात कही, हालांकि ऐसा हुआ नहीं।

दो दिन बाद यानी 6 जून को आला पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि पुलिस को विस्फोटक से लदे वाहन के नेशनल हाईवे से गुजरने की खबर मिली थी, जिसके आधार पर पत्रकार रूपेश सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का यहां तक कहना है कि रूपेश पहले भी नक्सलियों को विस्फोटक सप्लाई करता रहा था। पुलिस की इस थ्योरी पर शक इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि स्थानीय पत्रकारों को रूपेश से मिलने नहीं दिया जा रहा है।

वहीं, रूपेश से जेल में मुलाकात के बाद उनकी पत्नी का कहना है कि तीनों की गिरफ्तारी आईबी द्वारा 4 जून को सुबह 9.30 बजे की गई, जबकि पुलिस 6 जून की गिरफ्तारी दिखा रही है। जब सभी सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करके टॉयलेट जा रहे थे, तभी उन पर अचानक पीछे से हमला बोला गया और बाल खींचकर, आंखों पर पट्टी बांधकर बाराचट्टी के कोबरा बटालियन कैम्प ले जाया गया। जहां रूपेश को बिल्कुल भी सोने नहीं दिया गया और रात भर बुरी तरीके से दिमागी टार्चर किया गया। उन्हें धमकाया गया कि व्यवस्था या सरकार के खिलाफ लिखना छोड़ दो। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि ‘पढ़े-लिखे हो, अच्छे से आराम से कमाओ, खाओ। ये आदिवासियों के लिए इतना क्यों परेशान रहते हो। कभी कविता, कभी लेख। इससे आदिवासियों व माओवादियों का मनोबल बढ़ता है भाई। क्या मिलेगा इससे। जंगल, जमीन के बारे में बड़े चिंतित रहते हो, इससे कुछ हासिल नहीं होना है। शादीशुदा हो, परिवार है, उनके बारे में सोचो। सरकार कितनी अच्छी-अच्छी योजनाएं लायी है। इनके बारे लिखो। आपसे कोई दुश्मनी नहीं है,छोड़ देंगे’।

इप्सा सताक्षी के अनुसार, तीनों को कहा गया कि आप लोगों को छोड़ देंगे और 5 जून को मिथिलेश कुमार से दोपहर 1 बजे कॉल भी करवाया गया, लेकिन किसी को छोड़ा नहीं गया। 5 जून को रूपेश को 4 घंटे सोने दिया गया फिर 5 जून की शाम को कोबरा बटालियन के कैम्प में ही इनके सामने विस्फोटक गाड़ी में रखा गया। विरोध करने पर शेरघाटी एएसपी रवीश कुमार ने कहा, ‘अरे पकड़े हैं तो ऐसे ही छोड़ देंगे? अपनी तरफ से केस पूरी मजबूती से रखेंगे रूपेश जी।’ फिर इसी विस्फोटक को दिखाकर डोभी थाने में प्रेस कांफ्रेंस की गई और तीनों को शेरघाटी जेल भेज दिया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर हल्ला मचा था, वैसा रूपेश कुमार के मामले में क्यों नहीं है? एडिटर गिल्ड सहित सभी संस्थाओं की ख़ामोशी इस सवाल को पुख्ता करती है कि क्या मीडिया को केवल दिल्ली में होने वाली हलचल ही दिखाई देती है?

 

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क्रिकेट वर्ल्ड कप में स्टार नेटवर्क ने कायम किया ये रिकॉर्ड

इस टूर्नामेंट के तहत फाइनल मैच 14 जुलाई को खेला जाएगा।

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Star

30 मई को शुरुआत के बाद से ही क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 का खुमार लोगों पर छाया हुआ है। दुनियाभर में इसके दर्शकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। क्रिकेट के इस महाकुंभ में पिछली बार की तरह ही दर्शकों के मामले में कई रिकॉर्ड बने हैं। भारत में मैच टेलिकास्ट करने वाले स्टार नेटवर्क के अनुसार,इस आयोजन की शुरुआत के बाद से पहले हफ्ते (30 मई से पांच जून तक) में रिकॉर्ड 26.9 करोड़ दर्शकों ने इसे देखा है। इस टूर्नामेंट के तहत फाइनल मैच 14 जुलाई को खेला जाएगा।

इस अवधि के दौरान नौ मैच खेले गए थे, जिनमें भारत का भी एक मैच शामिल था। वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे अधिक लोगों ने इस बार मैच देखा है। यदि औसत निकाला जाए तो अब तक क्रिकेट वर्ल्ड कप को रिकॉर्ड 10.72 करोड़ लोगों ने स्टार नेटवर्क पर देखा है। यह किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में अब तक सबसे ज्यादा औसत है। क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में भारत ने अपना पहला मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ पांच जून को खेला था। इस मैच को स्टार नेटवर्क पर 18 करोड़ लोगों ने देखा।

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अमर उजाला फाउंडेशन की इस पहल में आप भी हो सकते हैं शामिल

14 जून से शुरू होकर विभिन्न राज्यों में कई दिनों तक चलाया जाएगा अभियान

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Amar Ujala

अमर उजाला, फाउंडेशन की ओर से 14 जून 2019 को विश्व रक्तदाता दिवस पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में विभिन्न स्थानों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

यह आयोजन 14 जून से शुरू होकर कई दिनों तक जारी रहेगा। इस बारे में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से गुजारिश की गई है कि आप इन दिनों इन राज्यों में कहीं भी हों, स्वैच्छिक रक्तदान करके किसी की जान बचा सकते हैं और पुण्य के भागी बन सकते हैं।

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