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भारत में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की मांग हुई तेज, सरकार के सामने रखे गए ये प्रस्ताव

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों की रविवार सुबह 8 बजे आगरा में यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा हुई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 27 September, 2020
Last Modified:
Sunday, 27 September, 2020
Rivers Connect

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने आगरा में रविवार सुबह 8 बजे यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा की, जिसमें रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने वर्तमान सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं।  

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सूत्रधार ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि आगरा यमुना रिवर कनेक्ट अभियान वर्ष 2014 से लगातार छह वर्षों से जीवनदायिनी यमुना में अविरल जलधारा व उसको प्रदूषण मुक्त कैसे किया जाए, इसके लिए समर्पित भाव से पूरी तरह प्रयासरत है। दुनिया की बहुत सारी नदियों की तरह आजकल भारतीय नदियों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है, जबकि इन नदियों को हमारी संस्कृति में हमेशा पवित्र जगह दी जाती रही है। पर साथ ही, भारत के लोग इन नदियों से मुंह नहीं फेर सकते। वे देश की जीवन रेखाएं हैं और भारत का भविष्य कई रूपों में हमारी नदियों की सेहत से जुड़ा हुआ है।

भारत में नदी प्रदूषण को प्रदूषण मुक्त करने के प्रस्ताव-

1- वर्तमान नदियों में प्रदूषण की इस समस्या को कम समय में ही सुलझाया जा सकता है और इसके लिए टेक्नोलॉजी पहले से ही मौजूद है। बस जरूरत है सख्त नियमों की और उन्हें लागू कराने के लिए पक्के इरादों की। हमें स्वयं जाकर नदियों को साफ करने की जरूरत नहीं है। अगर हम नदियों को प्रदूषित करना छोड़ दें, तो वे स्वयं को एक बरसात के मौसम में ही साफ कर लेंगी।

2- भारत एक राष्ट्र के रूप में अगर नदी प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पूरी तरह गंभीर है, तो इसके लिए केंद्रीय नदी प्राधिकरण बनाने की जरूरत है, क्योंकि अब तक इन नदियों को गम्भीरतापूर्वक प्राथमिकता नहीं दी गई है।

3- भारत में रासायनिक और औद्योगिक कचरे वाले कई उद्योग अपने गंदे जल का वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस तभी करते हैं, जब सम्बन्धित विभाग का इंस्पेक्टर मौजूद हो। जब उनके ऊपर निगरानी नहीं होती, तो कई उद्योग गंदे जल को साफ किए बिना ही नदियों में बहा देते हैं। अगर हम चाहते हैं कि यह वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस असरदार हो, तो यह महत्वपूर्ण है कि गंदे जल के उपचार को भी एक बढ़िया व्यवसाय बनाया जाए। सरकार को बस नदी में जाने वाले जल की गुणवत्ता के लिए मानक तय करने होंगे।

4- नदियों में मृत जानवरों को नहीं फेंकना चाहिए। नदी किनारे बसे लोगों को नदी में गंदे कपड़े नहीं साफ करने चाहिए, क्योंकि गंदे व दूषित कपड़े के रोगाणु पानी में दूर-दूर तक फैलकर बीमारी फैला सकते हैं। नदी में डिटर्जेंट पाउडर, साबुन का प्रयोग और जलीय जीवों के शिकार से परहेज करना चाहिए, क्योंकि नदी के जीवों जैसे मछली, कछुआ, घड़ियाल, मेढ़क आदि प्रदूषण को दूर करते हैं। प्रदूषण दूर करने को लेकर सरकार को जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।

5- नदियों को प्रदूषण रहित बनाने के लिए शहर के गंदे नालों को रोकने के साथ-साथ नदी किनारे मल-मूत्र त्याग करने और धोबी-घाटों पर भी प्रतिबंध होना चाहिए। वर्तमान में पवित्र नदियों में शहर के गंदे पानी को गिरने से रोकने की प्रबल आवश्यकता है और हमारी पवित्र नदियों को प्रदूषण रहित बनाना वर्तमान में हरेक व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए।

6- दिल्ली-आगरा के मध्य स्टीमर फेरी सेवा पर्यटको के लिए शीघ्र शुरू करें, जैसे कि वायदा किया था, माननीय मुख्यमंत्री योगी जी से मांग की गई कि यमुना पर ताज के डाउनस्ट्रीम बैराज का निर्माण अति शीघ्र किया जाए, मेट्रो का कार्य बाद में। यमुना की सफाई, डिसल्टिंग की पुख्ता व्यवस्था हो। नालो को टेप किया जाए।

7- रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने मोदी सरकार से राष्ट्रीय नदी नीति व केंद्रीय नदी प्राधिकरण के गठन की मांग की एवं बताया कि हिंदू धर्म में लोग जिस तरह आसमान में सप्त ऋषि के रूप में सात तारों को पूज्य मानते हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियों को पवित्र मानते हैं, जिस प्रकार आसमान में ऋषि भारद्वाज, ऋषि वशिष्ठ, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, ऋषि अगत्स्य, ऋषि अत्रि एवं ऋषि जमदग्नि अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विराजमान हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियां गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कावेरी, शिप्रा एवं गोदावरी अपने भक्तों की सुख एवं समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। गंगा नदी को स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ द्वारा भगवान महादेव के तप की पौराणिक कथा पूरे देश में लोकप्रिय है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने बताया कि देश में नदियों के योगदान एवं महत्व का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि वाराणसी आज विश्व के प्राचीनतम नगर एवं प्राचीनतम जीवित सभ्यता के रूप में जाना जाता है और वाराणसी गंगा के तट पर बसा हुआ है। आज वाराणसी विश्व में धार्मिक, शैक्षिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक नगर के रूप में प्रतिष्ठित है। इसके अलावा प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, आगरा, नासिक, उज्जैन, गुवाहाटी, गया, पटना आदि सभी प्रमुख प्राचीन शहर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। इसी तरह दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद, मैसूर, हुबली आदि आधुनिक नगर भी नदियों के तट पर ही बसे हुए हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत में प्राचीन काल से ही नदियों का अत्यधिक महत्व रहा है और आज भी बहुत हद तक हमारा जीवन नदियों पर निर्भर है। इनके प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना इसलिए जरूरी है ताकि हम इनकी स्वच्छता और पवित्रता को चिरकाल तक बनाए रख सकें। इनका जल हमारे लिए उपयोगी हो सकेगा और हम लंबे समय तक इनका लाभ उठा सकेंगे।

सभा में सर्व श्री श्रवण कुमार, पद्मिनी अय्यर, यमुना आरती महंत श्री नंदन श्रोत्रिय, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, जुगल श्रोत्रिय, राहुल राज, दीपक राजपूत, पंडित प्रमोद गौतम, शाहतोष गौतम, दिलीप जैन, अमित कोहली, निधि पाठक,  डॉ. हरेंद्र गुप्ता, विकास, जगन प्रसाद, मोहन, नीलम कश्यप, शिवम्, सोनवीर, सुरजीत, रोहित गुप्ता, रंजन शर्मा आदि ने भाग लिया।

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दैनिक भास्कर समूह ने पूर्व चेयरमैन रमेश अग्रवाल की याद में देश भर में लगाए रक्तदान शिविर

220 स्थानों पर लगाए गए इन रक्तदान शिविरों में 9200 यूनिट रक्त एकत्रित कर ब्लड बैंकों को सौंपा गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 01 December, 2022
Last Modified:
Thursday, 01 December, 2022
Blood Donation Camp

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह ने अपने पूर्व चेयरमैन रमेश अग्रवाल की 78वीं जयंती को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया और इस उपलक्ष्य में 30 नवंबर को देशभर में 220 स्थानों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया।

इस मौके पर रक्तदाताओं ने रक्तदान करके समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के साथ ही मानवता की सेवा के लिए दूसरों को भी रक्तदान करने का संदेश दिया। सुबह से ही शिविरों में रक्तदान करने वालों में उत्साह देखने को मिला। कई जगह पर रक्तदान के इच्छुक लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए दिखे। कई स्थानों पर शिविरों में लोगों ने पहली बार रक्तदान किया।

बता दें कि दैनिक भास्कर समूह के पूर्व चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल (स्वर्गीय) अपने जीवनकाल में सामाजिक सरोकार से जुड़े लोगों के लिए हमेशा तत्पर रहे। उनकी इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए 30 नवंबर को उनकी 78वीं जयंती पर रमेश एण्ड शारदा अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से देश भर में अलग-अलग शहरों में 220 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, ताकि जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध करवाकर उनकी जान बचाई जा सके। इन शिविरों में 9200 यूनिट रक्त एकत्रित कर ब्लड बैंकों को सौंपा गया।

शिविर के अंत में ‘दैनिक भास्कर’ समूह के ओर से रक्तदाताओं का आभार जताया गया। इसके साथ ही समूह की ओर से रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

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NDTV के वरिष्ठ पत्रकार मुन्ने भारती को मिला ये सम्मान

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार व सोशल वर्कर एम अतहरउद्दीन उर्फ मुन्ने भारती को इंडियन काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स संस्था ने ‘नेशनल लॉ डे’ अवॉर्ड से सम्मानित किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 29 November, 2022
MunneBharati454

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार व सोशल वर्कर एम अतहरउद्दीन उर्फ मुन्ने भारती को इंडियन काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स संस्था ने ‘नेशनल लॉ डे’ अवॉर्ड से सम्मानित किया है। पत्रकारिता के अलावा उनके सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्य को देखते हुए उन्हें सुप्रीम कोर्ट के इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट में ये सम्मान दिया गया।

सम्मान देने वालों में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डॉ. जस्टिस के जी बालाकृष्णन, हरियाणा एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, आरएसएस लीडर डॉ. इंद्रेश कुमार, जस्टिस एडिशनल सेक्रेटरी राजेंद्र कुमार कश्यप सहित इंडियन काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स संस्था अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील डॉक्टर आदिश सी अग्रवाल शामिल रहे।

लाइफ टाइम सम्मान इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया सेक्टर में मुन्ने भारती को दिया गया, जिन्हें लगभग 25 वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में कार्यरत हैं। वर्तमान समय में एनडीटीवी में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं।

नेशनल लॉ डे अवॉर्ड से मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी, रिदम भारद्वाज (रिपब्लिक टीवी), सुशील बत्रा (ANI), राहुल गौतम (इंडिया टुडे), संजीव शर्मा (न्यूज नेशन), पवन कुमार (दैनिक भास्कर) को भी सम्मानित किया। इसके अलावा पुलिस में बेहतर कार्य करने पर असम डीजीपी भास्कर ज्योति, उत्तराखण्ड डीजीपी अशोक कुमार, लॉ कमीशन हेड ऋतु राज अवस्थी, सुप्रीम कोर्ट रिटायर्ड जज इंदिरा बनर्जी, आर्म्ड फ़ोर्स ट्रिब्यूनल चेयरमैन राजेंद्र मेनन, झारखंड एडिशनल एडवोकेट जनरल दर्शाना पोद्दार मिश्रा, स्टेट बार काउंसिल चेयरमैन सुबीर सिद्धू, वरिष्ठ एडवोकेट सखा राम सिंह, परमजीत सिंह पटवालिया, नीरज किशन कौल, जेएस अत्री, प्रमोद स्वरूप, राजीव दत्ता सहित अन्य एडवोकेट, जज को भी सम्मान दिया गया।

इस सम्मान से पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा, पूर्व उप राष्ट्रपति एम हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, आई के गुजराल, एचडी देवेगौड़ा, पीवी नरसिम्हा राव, पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी सहित जानी मानी हस्तियों को भी सम्मानित किया जा चुका है।

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सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार तीन पत्रकारों की मौत, CM ने जताया शोक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीनों पत्रकारों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 29 November, 2022
Accident

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के तीन पत्रकारों का पड़ोसी रायसेन जिले के सलामतपुर थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से दी गई जानकारी में बताया गया है कि विदिशा प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश शर्मा अपने पत्रकार साथियों सुनील शर्मा और नरेंद्र दीक्षित के साथ मोटरसाइकिल से सोमवार की देर रात विदिशा लौट रहे थे।

तीनों पत्रकार कई सालों से जिले में साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन कर रहे थे और अक्सर सप्ताह में एक बार अखबार छपवाने के लिए भोपाल प्रिंटिंग प्रेस जाते थे। इसी सिलसिले में सोमवार की सुबह भी तीनों मोटरसाइकिल से भोपाल गए थे।

भोपाल से विदिशा लौटते समय सोमवार की रात करीब साढ़े नौ बजे सलामतपुर लांबाखेड़ा जोड़ पर अज्ञात ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। इस हादसे में तीनों पत्रकारों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही विदिशा से कई साथी पत्रकार और उनके मित्र घटना स्थल पर पहुंच गए थे। पुलिस के अनुसार, टक्कर मारने वाले ट्रक चालक को बेरखेड़ी चौराहे के पास पकड़ लिया गया है। तीनों पत्रकारों के शवों को रायसीन जिले के सांची अस्पताल में रखा गया है, जहां आज उनका पोस्टमार्टम होगा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा समेत कई मंत्रियों और कांग्रेसी नेताओं ने तीनों पत्रकारों के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से तीनों पत्रकारों के परिजनों को चार—चार लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की है।

 

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तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत, ठुकराई यह अर्जी

महिला साथी के कथित यौन शोषण के मामले में ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 29 November, 2022
Tarun Tejpal

महिला साथी के कथित यौन शोषण के मामले में ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें तेजपाल ने बंद कमरे में सुनवाई (in-camera hearing) की अपील की थी।

बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बंद कमरे में सुनवाई के लिए तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देने के लिए तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां भी तरुण तेजपाल की यह याचिका खारिज हो गई है। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने इस मामले में तेजपाल के वकील से कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि अपील पर सुनवाई बंद कमरे में होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ का कहना था, ‘आरोपी को यह मांग करने का कोई अधिकार नहीं है कि सुनवाई को बंद कमरे में होना चाहिए।’ गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल मई में तेजपाल को उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इन आरोपों में गलत तरीके से कैद करना, शील भंग करने के इरादे से हमला, यौन उत्पीड़न और महिला सहकर्मी से दुष्कर्म शामिल था।

गोवा सरकार ने ट्रायल कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। तेजपाल ने बंद कमरे में मामले की सुनवाई के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। वहां से अर्जी खारिज होने के बाद तरुण तेजपाल ने हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली है।

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कला प्रेमियों के लिए 30 नवंबर से शुरू होगी राजीव मिश्रा की पेंटिंग प्रदर्शनी

दिल्ली के रविन्द्र भवन में 30 नवंबर से छह दिसंबर तक होगा प्रदर्शनी का आयोजन, आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी करेंगे शुभारंभ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2022
Last Modified:
Monday, 28 November, 2022
Rajeev Mishra

कला प्रेमियों के लिए दिल्ली में 30 नवंबर से राजीव मिश्रा की समकालीन कलाकृतियों पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी 'पावर ऑफ सेल्फ रिफ्लेक्शन' का आयोजन किया जा रहा है। दिल्ली के मंडी हाउस स्थित ललित कला अकादमी के रविन्द्र भवन में 30 नवंबर से छह दिसंबर 2022 तक इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में होने वाले एक समारोह में 30 नवंबर की दोपहर 3:00 बजे इस प्रदर्शनी का शुभारंभ किया जाएगा। रोजाना प्रात: 11 बजे से सायं 7 बजे तक लगने वाली इस प्रदर्शनी में राजीव मिश्रा की कलाकृतियों को प्रस्तुत किया जाएगा। बता दें कि राजीव मिश्रा ने 'पावर ऑफ सेल्फ रिफ्लेक्शन' के माध्यम से आत्मप्रतिबिंब की शक्ति को अपने कैनवास पर उकेरा है।

इस बारे में राजीव मिश्रा का कहना है, ‘आज बहुत बड़ी संख्या में पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं, लेकिन उनका असर नहीं हो रहा है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से हम चाहते हैं कि व्यक्ति स्वयं को जानने ओर समझने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि आज हमें घरों में बहुत सारी पेंटिंग्स दिखाई देती हैं, जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है, लेकिन जब एक कलाकार पेंटिंग बनाता है, तो वो न जाने कितनी रातें जागता है और कितने दिन भूखे रहता है। उस पेंटिंग का जो असर एक दर्शक पर पड़ता है, उससे देखने वाले के जीवन में असीम ऊर्जा का संचार होता है।’

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चीन में विरोध-प्रदर्शन की कवरेज कर रहे BBC के पत्रकार की पिटाई

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली खबर के अनुसार, बीबीसी का कहना है कि इस बारे में उन्हें अधिकारियों की तरफ से किसी तरह का स्पष्टीकरण अथवा माफी नहीं मिली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2022
Last Modified:
Monday, 28 November, 2022
BBC

चीन में कोरोना संक्रमण के मामले फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां रविवार को करीब 40,000 नए मामले सामने आए। इस बीच कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में आई खबरों के अनुसार, चीन की सरकार ने शंघाई में ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे ‘बीबीसी’ (BBC) के पत्रकार एडवर्ड लॉरेंस को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि इस दौरान पत्रकार की पिटाई भी की गई। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

वहीं, बीबीसी ने अपने पत्रकार के साथ मारपीट और उसे गिरफ्तार किए जाने पर चिंता जताई है। बीबीसी का कहना है, 'हम अपने कैमरामैन एडवर्ड लॉरेंस के इलाज के बारे में बेहद चिंतित हैं, जिसे शंघाई में विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान गिरफ्तार किया गया और हथकड़ी लगाई गई थी। रिहा होने से पहले उन्हें कई घंटों तक हिरासत में रखा गया था। लॉरेंस की गिरफ्तारी के दौरान, पुलिस ने उन्हें पीटा और लात मारी थी। यह तब हुआ, जब लॉरेंस मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में काम कर रहे थे।'

इसके साथ ही ‘बीबीसी’ का यह भी कहना है, ‘इस मामले में हमारे पास चीनी अधिकारियों की तरफ से किसी तरह का आधिकारिक स्पष्टीकरण या माफी नहीं आई है।’

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सपा के ट्विटर हैंडल से विवादित टिप्पणी करने वाला पत्रकार गिरफ्तार

सपा के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल से कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक स्वतंत्र पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2022
Last Modified:
Monday, 28 November, 2022
Arrest

यूपी की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल से कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एक स्वतंत्र पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि 23 नवंबर को एक अन्य पत्रकार मनीष पांडे की शिकायत पर हजरतगंज पुलिस ने यह गिरफ्तारी की है।

हालांकि, सपा ने गिरफ्तार स्वतंत्र पत्रकार का उसके मीडिया सेल से कोई संबंध होने से इनकार किया है। सपा ने कहा कि अनिल यादव का उसके ट्विटर अकाउंट से कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि मनीष पांडे ने 23 नवंबर को सपा के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल को चलाने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हजरतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हजरतगंज के अपर पुलिस आयुक्त अरविंद कुमार वर्मा ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को यह जानकारी दी थी कि प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि यादव सपा के मीडिया सेल के हैंडल से टिप्पणी कर रहा था।

उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। संपर्क करने पर, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने यादव के पार्टी के साथ किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह एक स्वतंत्र पत्रकार है, जो प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को बेनकाब कर रहा है।

हजरतगंज थाने में यूट्यूब चैनल चलाने वाले अनिल यादव के खिलाफ, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य), 504 (जानबूझकर अपमान) 505 (अफवाह फैलाने के इरादे से किसी भी मिथ्या कथन का प्रकाशन या प्रसारण) और 500 (मानहानि) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। फिलहाल अनिल यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

शिकायतकर्ता पांडे ने आरोप लगाया था कि सपा के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल से गोरक्षनाथ मठ के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट किया गया था, जिस पर उन्होंने मठ को लेकर इस तरह के पोस्ट न करने का आग्रह किया था, क्योंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। पांडेय ने दावा किया कि इसके बाद सपा के मीडिया सेल के हैंडल से उनके खिलाफ अपमानजनक पोस्ट किए गए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर हैं।

सपा के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल से शनिवार को ट्वीट किया गया था, ‘पत्रकार अनिल यादव जी अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से भाजपा सरकार में जनता के साथ हो रही ज्यादतियों और अत्याचारों की पोल खोल रहे थे। इससे नाराज होकर भाजपा सरकार ने प्रशासन के माध्यम से अनिल यादव जी को असंवैधानिक रूप से गुंडागर्दी करके गिरफ्तार करवा दिया। शर्मनाक।’

एक अन्य ट्वीट में कहा गया था, ‘अनिल यादव जी की तत्काल रिहाई और ससम्मान घर वापसी हो। भाजपा सरकार लोकतंत्र का गला घोंटने, संविधान का अपमान करने और जनपक्षधारी पत्रकारिता को सत्ता की ताकत से रोकने की कुचेष्टा कर रही है। आजाद आवाज हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। संविधान दिवस पर संविधान का अपमान न करे भाजपा।’

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स्वस्थ समाज के लिए कानून और मीडिया बहुत ही आवश्यक: जस्टिस सूर्यकांत

संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर ‘आईटीवी नेटवर्क’ के फ्लैगशिप प्रोग्राम ‘Legally Speaking’ ने दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में 1st law and constitution dialogue का आयोजन किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 26 November, 2022
iTV Network

देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फ्लैगशिप प्रोग्राम ‘Legally Speaking’ के तहत संविधान दिवस (Constitution Day) की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) में पहले लॉ और संविधान डायलॉग (1st Law and Constitution Dialogue) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और ‘आईटीवी नेटवर्क’ के प्रमोटर व राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा द्वारा ‘Legally Speaking’ की वेबसाइट legallyspeakings.com और ऐप को भी लॉन्च किया गया।

इस मौके पर जस्टिस सूर्यकांत का कहना था, ‘स्वस्थ समाज के लिए कानून और मीडिया बहुत ही आवश्यक हैं।’ संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) के बारे में जस्टिस सूर्यकांत का कहना था कि महत्वपूर्ण व्याख्याओं की श्रृंखला में कई अवसरों पर इसे सुना और लागू किया गया है। समय के साथ उभरा संवैधानिक नैतिकता का सामान्य विचार उन मूल्यों को बनाए रखना चाहता है, जिन्हें हमारे संविधान में बनाए रखने का दावा किया जाता है।

इसके साथ ही जस्टिस सूर्यकांत का यह भी कहना था, ‘इस अवधारणा का पहला उल्लेख हमारे समय से लगभग पचास वर्ष पूर्व का है, जब न्यायमूर्ति ए.एन. रे और जगन मोहन रेड्डी ने पहली बार संवैधानिक नैतिकता की धारणा को केशवानंद भारती के सबसे चर्चित निर्णयों में से एक में पेश किया।’

हमारे पुरखों के दृष्टिकोण के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा,‘   नि:संदेह, बाबा साहेब आंबेडकर ने अपने भाषण में संवैधानिक नैतिकता को भविष्योन्मुखी बताया। यह विचार भारतीय समाज को एक ऐसे राज्य और संस्थाओं में बदलना चाहता है जो लोकतांत्रिक विचारों और लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार, ‘उस दौर को याद करें, जब देश उपनिवेशवाद से उबर रहा था और पूरी तरह लोकतांत्रिक बनने की दिशा में बढ़ रहा था। ऐसे में संविधान का उद्देश्य अपने कई परस्पर विरोधी दायित्वों के बीच उचित संतुलन की खोज में देश को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रेरक के रूप में कार्य करना था। अंग्रेज सिर्फ शासन की बात करते थे। एक राज्य जो अपने लोगों पर शासन करता है, उनकी जरूरतों के प्रति उदासीन होता है, जबकि संविधान की नैतिकता लोगों के प्रति उत्तरदायी होनी चाहिए।’

कानूनी रिपोर्टिंग में मीडिया की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत का कहना था, ‘मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह सच्चाई को सामने लाए और यह सुनिश्चित करे कि उसकी रिपोर्टिंग में भरोसा और ईमानदारी हो। भारतीय कानून रिपोर्ट अधिनियम 1875 से अब तक कानूनी रिपोर्टिंग की स्थिति में कई गुना वृद्धि हुई है। तमाम डेटाबेस और लीगल न्यूज वेबसाइट्स के साथ कानून की बारीकियों को संप्रेषित करने की हमारी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों में क्या हो रहा है, मीडिया उस पर नजर रखने का एक तरीका है।

इस कार्यक्रम में कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि कानून की बारीकियों को लोगों तक पहुंचाने के विजन के साथ छह साल साल पहले ‘Legally speaking’ की शुरुआत की गई थी और इसका तेजी से विकास हुआ है। ‘Legally speaking’ जैसी वेबसाइट्स और रिपोर्टिंग की जरूरत के बारे में बोलते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने आईटीवी नेटवर्क के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘कानून के बारे में जानकारी समय की जरूरत है। इसलिए ‘Legally Speaking’ और इसके जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स अस्तित्व में हैं। वो कानून को लोगों तक ले जा रहे हैं, जो एक अनिवार्य सेवा है।’

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पत्रकारिता के लिए जरूरी है सृजनात्मकता: प्रो. नागेश्वर राव

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ द्वारा आयोजित पांच दिवसीय सत्रारंभ समारोह के समापन पर ‘IGNOU’ के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को दिए सफल होने के टिप्स

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 25 November, 2022
Last Modified:
Friday, 25 November, 2022
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह का शुक्रवार को समापन हो गया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय’ (IGNOU) के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि पत्रकारिता के लिए सृजनात्मकता की आवश्यकता है। ज्ञान के आधार पर हम किसी भी क्षेत्र में शीर्षतम स्तर पर पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके लिए सृजनात्मक, निष्पक्ष और साहसी होना जरूरी है।

'अमृतकाल के संकल्प और मीडिया' विषय पर नवागत विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए प्रो. राव ने कहा कि पत्रकारों के लिए बोलने से ज्यादा सुनना बेहद जरूरी है। मीडिया में अपना करियर शुरू करने जा रहे प्रत्येक विद्यार्थी के लिए यह आवश्यक है कि वो किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर समाज के लिए जमीन पर रहकर काम करे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के लिए व्यावहारिक ज्ञान आवश्यक है, जो पत्रकार को सर्वश्रेष्ठ बनाता है। 

अमृत के साथ विष के लिए तैयार होना भी सीखिए: मेहता

कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार (पद्मश्री) आलोक मेहता ने कहा कि अमृतकाल के इस महत्वपूर्ण समय में युवाओं को अमृत के साथ विष के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में एक सैनिक की तरह काम करना होता है। आपकी सफलता तब है, जब आपकी तारीफ कोई दूसरा व्यक्ति करे। आलोक मेहता के अनुसार, ‘युवाओं के लिए आगे बढ़ने और सफल होने का मूलमंत्र है कि 'परफेक्शन' से काम करें और 'रिजेक्शन' की चिंता न करें। इसके साथ ही पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।‘

ईमानदारी और मेहनत से मिलेगी सफलता: प्रो. द्विवेदी

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि अगर आप अपने काम को मेहनत और ईमानदारी से करते हैं, तो यकीन मानिए आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि श्रमजीवी व्यक्ति के सामने कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, वो उसका समाधान निकालना जानता है। प्रो. द्विवेदी के अनुसार, ‘सकारात्मक सोच और सार्थक विचारों की पत्रकारिता ही समाज और संस्कृति के लिए सबसे बेहतर होती है। युवाओं को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।‘

इस अवसर पर भारतीय जनसंचार संस्थान द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका 'संचार सृजन' और मासिक न्यूजलैटर 'आईआईएमसी न्यूज' के नए अंक का विमोचन भी किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 'संचार सृजन' ने 'राष्ट्र निर्माताओं की पत्रकारिता' विषय पर विशेषांक का प्रकाशन किया है। इस मौके पर आईआईएमसी के अपर महानिदेशक आशीष गोयल, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, कार्यक्रम के संयोजक एवं उर्दू पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। 21 नवंबर से प्रारंभ हुए आईआईएमसी के पांच दिवसीय सत्रारंभ समारोह में लगभग 56 वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित किया और जनसंचार के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए उनका मार्गदर्शन किया।

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26/11 के हमले में जान गंवाने वालों को कुछ यूं याद करेगा ‘पाञ्चजन्य’

मुंबई के ताज पैलेस होटल में ‘पाञ्चजन्य’ ने 25 नवंबर को देश की नामी हस्तियों के साथ एक संवाद कार्यक्रम रखा है, जिसे नाम दिया है, ‘मुंबई संकल्प’।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 November, 2022
Last Modified:
Tuesday, 22 November, 2022
Panchjanya4548

26/11 को मुंबई पर हुए हमले को न तो देश भूलेगा और न ही इसके आरोपियों को माफ करेगा। मुंबई के ताज पैलेस होटल में ‘पाञ्चजन्य’ ने 25 नवंबर को देश की नामी हस्तियों के साथ एक संवाद कार्यक्रम रखा है, जिसे नाम दिया है, ‘मुंबई संकल्प’। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर चर्चा होगी।

‘मुंबई संकल्प’ कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य राम माधव करेंगे। वह सुरक्षा और विदेश मामलों के जानकर माने जाते हैं। पूर्व थलसेना अध्यक्ष व केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह भी चर्चा सत्र में भाग लेंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एक नाथ शिंदे इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी बात रखेंगे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मुंबई हमले के दौरान मुंबई के हालात और फिर इस हादसे के बाद कैसी उबरी मुंबई इस पर चर्चा करेंगे।

मुंबई हमले के दोषी कसाब को कैसे फांसी की सजा मिली, इस पर जानकारी देने के लिए जाने-माने अधिवक्ता पदमश्री उज्ज्वल निकम भी मौजूद रहेंगे। फिल्म निर्देशक और अभिनेता डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी भी मुंबई हमले के बारे में अपनी बात रखेंगे। मुंबई हमले को जिन लोगो प्रत्यक्ष रूप से देखा ऐसे लोगो के साथ संवाद करेंगी प्रख्यात एंकर ऋचा अनिरुद्ध।

कार्यक्रम के समापन सत्र में मुंबई हमले में बलिदान हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और सामाजिक संगठनों के सम्मनित लोगों को आमंत्रित किया गया है।

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