इस बड़े पद पर THE HINDU GROUP से जुड़ीं अपराजिता बिस्वास

पूर्व में वोडाफोन और टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ भी काम कर चुकी हैं

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Aparajita Biswas

‘द हिन्दू’ (The Hindu) ग्रुप ने अपराजिता बिस्वास को हेड (ब्रैंड मार्केटिंग) नियुक्त किया है। वह मार्केटिंग और उपभोक्ता मामलों से जुड़ीं ग्रुप की सभी पहलों का नेतृत्व करेंगी। बता दें कि अपराजिता को ब्रैंड स्ट्रैटेजी, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, एफएमसीजी और मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह पूर्व में वोडाफोन, मोजरबियर और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे ब्रैंड के साथ भी काम कर चुकी हैं।

द हिन्दू ग्रुप में नई भूमिका से पहले अपराजिता वोडाफोन आयडिया लिमिटेड से जुड़ी हुई थीं और बतौर हेड (ब्रैंड कम्युनिकेशन) तमिलनाडु सर्किल की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अपराजिता की नियुक्ति के बारे में द हिन्दू ग्रुप के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश बालाकृष्ण ने कहा, ‘अपराजिता बिस्वास का हमारी मार्केटिंग टीम का हिस्सा बनने पर हम बहुत खुश हैं। हमें विश्वास है कि अपराजिता के ज्ञान और अनुभव का द हिन्दू ग्रुप को काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, अपनी नई भूमिका के बारे में अपराजिता बिस्वास का कहना है, ‘द हिन्दू जैसे प्रतिष्ठित ग्रुप का हिस्सा बनने पर मैं काफी खुश हूं और खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं कि मुझे इसमें काम करने का अवसर मिला। मैं ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना पूरा योगदान दूंगी।’

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दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को मिलेगा ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

इस पुरस्कार में एक लाख एक हजार रुपए और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Shakeel Hasan

उर्दू अकादमी ने दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन दैनिक इंकलाब के संपादक शकील हसन शम्सी को इस वर्ष उर्दू में उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में हुई उर्दू अकादमी की कार्यकारी समिति की बैठक में इस बारे में निर्णय लिया गया। इस पुरस्कार के तहत एक लाख एक हजार रुपए नकद और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

इसके अलावा अनुवाद के लिए प्रो. अनीसुर्रहमान आल इंडिया बहादुर शाह जफर पुरस्कार जेएनयू के पूर्व शिक्षक प्रो. शारिब रुदौलवी तथा पं बृजमोहन दत्तात्रेय कैफी पुरस्कार दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष अतीक़ुल्लाह को देने का फैसला किया गया। इन दोनों पुरस्कार में दो लाख 51 हजार रुपए एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के पाठ्यक्रम को लेकर हुआ विवाद

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Media Course

दिल्ली विश्वविद्यालय में पत्रकारिता कोर्स के नए पाठ्यक्रम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। डीयू की अकादमिक परिषद के सदस्य रसल सिंह का आरोप है कि विश्वविद्यालय के अंग्रेजी पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रम में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों और मॉब लिंचिंग से संबंधित पाठ भी शामिल किए गए हैं। आरोप है कि ऐसे पाठों का कंटेंट ‘पक्षपातपूर्ण’  न्यूज पोर्टल्स से लिया गया है, जो अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं।

रसल सिंह ने यह भी कहा, ‘इस तरह के पाठ्यक्रम के द्वारा आरएसएस और उससे संबद्ध संगठनों, यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया जा रहा है। मैं अकादमिक परिषद की बैठक में यह मुद्दा उठाऊंगा और सुनिश्चित करूंगा कि इसे अनुमति न मिले।’ इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। परिषद ने इस तरह के पाठों को हटाने की मांग की है।

इस बीच अंग्रेजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राज कुमार ने कहा कि उनका विभाग किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत न करने को लेकर प्रतिबद्ध है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय की स्नातक पाठ्यक्रम संशोधन समिति पहले से ही इस मुद्दे को उठा चुकी है और विवादित हिस्सों में सुधार होगा। वहीं, पत्रकारिता के जिन शिक्षकों ने इस पाठ्यक्रम को तैयार किया है, उनका कहना है कि इन पाठों के द्वारा छात्र-छात्राओं को यह सिखाने की कोशिश की गई है कि संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्ट कैसे की जाए।

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अखबार के खिलाफ मुकदमा करेंगे पूर्व पीएम के भाई, बताई ये वजह

पूर्व पीएम के भाई ने एक ट्वीट कर दी जानकारी, प्रधानमंत्री व उनके सहयोगी को भी लिया लपेटे में

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Tuesday, 16 July, 2019
Last Modified:
Tuesday, 16 July, 2019
Newspaper

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने कहा है कि वह ब्रिटेन के अखबार 'डेली मेल' (Daily Mail) के खिलाफ मुकदमा करेंगे। शहबाज के अनुसार वह यह मुकदमा उस ‘मनगढ़ंत और गुमराह’ करने वाली स्टोरी के लिए करेंगे, जिसमें उन्हें ब्रिटेन की विदेशी सहायता राशि चुराने के लिए दोषी बताया गया है।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज ने इस अखबार पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके करीबी शहजाद अकबर के इशारे पर यह स्टोरी पब्लिश की गई, जिसके लिए वह उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेंगे। शहबाज ने इस बारे में रविवार को एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

पाकिस्तानी समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार, ‘द मेल’ ने रविवार को जांचकर्ताओं और ‘एक गोपनीय जांच रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए एक स्टोरी पब्लिश की थी, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज ने वर्ष 2005 से 2012 के बीच जिस पैसे को चुराया है, वो ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) की वित्तपोषित परियोजनाओं का था। इसी स्टोरी को लेकर शहबाज खफा हैं और उन्होंने कानूनी कार्रवाई करने का मन बनाया है।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार CMR

‘द हिन्दू’ में करीब 40 साल तक काम किया था, उनकी लिखी कई किताबें हो चुकी हैं प्रकाशित

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Saturday, 13 July, 2019
Last Modified:
Saturday, 13 July, 2019
CMR

वरिष्ठ पत्रकार सीएम रामचंद्र का शुक्रवार को निधन हो गया। 94 वर्षीय रामचंद्र इन दिनों उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ (The Hindu) में करीब 40 साल तक काम किया था। 24 अप्रैल 1925 को जन्मे रामचंद्र ने अंग्रेजी अखबार ‘डेक्कन हेराल्ड’ (Deccan Herald) में चार साल काम करने के बाद एक जुलाई 1952 को ‘द हिन्दू’ जॉइन किया था। वह यहां से 1992 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन इसकी मासिक पत्रिका ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) के लिए लगातार लिखते रहते थे।

सीएमआर के नाम से फेमस रामचंद्र को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिसंबर 1985 में राज्योत्सव अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। सीएमआर ने कई किताबें भी लिखी थीं। कर्नाटक की राजनीति को लेकर उनकी आखिरी किताब ‘Cockpit of India’s Political Battles - Karnataka’ इस साल मार्च में लॉन्च हुई थी। सीएमआर के निधन पर मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी समेत कई लोगों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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IIMC की कोर्स को-ऑर्डिनेटर को 'ठगों' ने यूं लगाई चपत

वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप से करने गई थीं खरीददारी, अब कराई एफआईआर

Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Fraud

प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में रेडियो और टीवी पत्रिका की पाठ्यक्रम संयोजक विष्णुप्रिया पांडे ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं। अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इस बारे में एफआईआर भी कराई है। इस एफआईआर में विष्णुप्रिया पांडे का आरोप है कि वह वसंत कुंज के शॉपर्स स्टॉप में कपड़े खरीदने आईं थीं। यहां उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग की राय देकर सेल्समैन ने घर का पता, फोन नंबर आदि जानकारियां हासिल कर ली और पेमेंट भी ले लिया। पांच दिन बाद विष्णुप्रिया पांडे के घर जब कपड़े का पैकेट पहुंचा, तब वह अधूरा था। परेशान विष्णुप्रिया पांडे ने जब लिफाफे पर दिए गए कॉल सेंटर नंबर 1-800-419-6684 पर कॉल किया तो एक बार फिर से उनसे एक लिंक भेज कर सारी जानकारियां ली गयी और उन्हें लगातार आश्वासन दिया गया कि उनका पैसा रिफंड किया जायेगा। इसी बीच कॉल सेंटर की लाइन डिस्कनेक्ट हो गयी और विष्णुप्रिया पांडे को 9330199375 से कॉल आया जिसमें पहले से बात कर रहे कॉल सेंटर एग्जिक्यूटिव ने मैसेज बॉक्स में भेजे गए उस लिंक को भरने का आग्रह किया।

9330238949 नंबर से आये उस लिंक को विष्णुप्रिया पांडे ने जैसे ही भरा, उसके चंद सेकेंड के भीतर उनके बैंक खाते से 49,000 रुपए दो-दो बार करके और एक-एक हजार रुपए दो बार निकाल लिए गए। यानी उन्हें चंद सेकेंड में ही पूरे एक लाख रुपए की चपत पड़ चुकी थी। पीड़िता को जब मालूम चला कि शॉपर्स स्टॉप के इस गिरोह ने उसे लाखों रुपए की साइबर लूट का निशाना बनाया है तो उसके होश उड़ गए। मामले की शिकायत साइबर अपराध थाने में कराई गई है और पुलिस अनुसंधान जारी है, पर जरूरत इस बात कि है कि हम एक ग्राहक के तौर पर सजग रहें और किसी भी परिस्थिति में बैंक सम्बंधी जानकारी किसी से भी साझा नहीं करें।

विष्णुप्रिया पांडे ने अपने साथ हुई ठगी को लेकर जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसे आप यहां देख सकते हैं। 

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श्रम मंत्री से मुलाकात में पत्रकारों ने उठाए कई मुद्दे, मिला ये आश्वासन

आईआईएमसी के पूर्व डीजी केजी सुरेश के नेतृत्व में श्रम मंत्री से मिला था प्रतिनिधिमंडल

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 12 July, 2019
Last Modified:
Friday, 12 July, 2019
Journalist-Delegation

देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश  के नेतृत्व में वरिष्ठ पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की। वर्तमान में मध्य प्रदेश की जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी स्थित जागरण स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की फैकल्टी में बतौर एमरेटस प्रोफेसर (Emeritus Professor) कार्यरत केजी सुरेश ने इस दौरान श्रम मंत्री से मांग की कि मीडिया की स्वतंत्रता और संरक्षण के लिए नए श्रम प्रावधानों में पत्रकारों के लिए नौकरी की सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी मुद्दे शामिल किए जाएं।

बातचीत के दौरान गंगवार ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि न्ए श्रम कानूनों में पत्रकारों के अधिकारों और हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 में दिए गए प्रावधानों की रक्षा करने के अलावा नए श्रम कानूनों में पत्रकारों के लिए अन्य कई बेनिफिट भी शामिल किए जाएंगे। यही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब पोर्ट्ल्स में काम कर रहे पत्रकारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।’

श्रम मंत्री से मिलने वालों में केजी सुरेश के साथ ही हेमंत बिश्नोई और सर्जना शर्मा (NUJ-I), अनूप चौधरी, संजय उपाध्याय और नरेंद्र भंडारी (Working Journalists of India), डॉ. प्रमोद कुमार और उमेश चतुर्वेदी (DJA) और भारतीय मजदूर संघ के नॉर्थ जोन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी पवन कुमार शामिल थे।

श्रम मंत्री के साथ बैठक में पत्रकारों से जुड़े कई मुद्दों के साथ ही यह मामला भी उठाया गया कि सबसे आखिर में गठित हुए प्रेस आयोग के बाद मीडिया के क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। ऐसे में मीडिया के लिए कानूनी फ्रेमवर्क पर फिर से ध्यान देने की आवश्यकता है। दूसरे प्रेस आयोग की रिपोर्ट प्राइवेट टीवी और रेडियो चैनल्स के आने से पहले उस समय आई थी, जब न तो इंटरनेट था, न ऑनलाइन मीडिया था और न ही सोशल मीडिया था। ऐसे में नए जमाने की मीडिया को देखते हुए सरकार से मीडिया आयोग गठित करने की मांग की गई। बताया जाता है कि श्रम मंत्री ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पत्रकारों के हितों से जुड़ी मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का आश्वासन दिया है।

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'दिल को कचोटने वाला है पत्रकार चंदा बारगल का यूं दुनिया से चले जाना'

बेहद आत्मीय, विनम्र और हमेशा मुस्कुराने वाले थे चंदा बारगल

राजेश बादल by राजेश बादल
Published - Thursday, 11 July, 2019
Last Modified:
Thursday, 11 July, 2019
Chanda Bargal

यकीन नहीं आता। चंदा बारगल ने इस जहां से विदाई ले ली। मध्य प्रदेश में साल भर के भीतर यह दूसरी ‘विदाई’ कचोटने वाली है। दिल में दर्द का समंदर लिए पहले बेहद विनम्र पुष्पेंद्र सोलंकी का जाना और अब वैसे ही नरमदिल,पत्रकारिता के प्रपंचों से दूर चंदा बारगल का करियर की तड़प और कसक को पीते हुए, जीते हुए चले जाना ।

मुझे याद है। नई दुनिया इंदौर में उप संपादक के तौर पर जॉइन किया था। अस्सी का साल था। नई दुनिया की परंपरा के मुताबिक़ प्रत्येक पत्रकार की शुरुआत प्रूफ रीडिंग डेस्क से ही होती थी। चंदा उन दिनों प्रूफ रीडिंग विभाग में थे। उमर में लगभग साल भर छोटे थे, इसलिए परिचय दोस्ती में बदल गया। इसी डेस्क पर नवीन जैन, पवन गंगवाल, मीना राणा, मीना त्रिवेदी, जयंत कोपरगांवकर भी होते थे। हम लोगों का समूह दफ्तर में चर्चाओं का केंद्र रहता था।

चंदा बेहद आत्मीय, विनम्र, हमेशा मुस्कुराने वाला, अच्छी पढ़ाई-लिखाई वाला था। इसलिए घंटों बहस भी होतीं। अक्सर रात दो बजे अखबार निकालने के बाद साइकिलों से राजबाड़ा जाते,पोहे खाते,चाय पीते और सुबह होते-होते घर लौटते। चंदा ने हमेशा मुझे भाई साब ही संबोधित किया। कभी-कभी मैं या नवीन जैन भड़क जाते कि हम लोग बराबरी के ही हैं, सीधे नाम लो, मगर चंदा पर कोई असर नहीं पड़ा।

एक तो उन दिनों नई दुनिया की भाषा का प्रशिक्षण जबरदस्त होता था। कॉमा, फुलस्टॉप से लेकर नुक्ता और चंद्र बिंदु लगाने के मामले में शुद्धता की पूरी गारंटी याना चंदा बारगल। अखबार की स्टाइलशीट से कोई भी विचलित हुआ तो चंदा भाई सीधे भिड़ने के लिए भी तैयार रहते थे। चाहे राहुल बारपुते याने बाबा का लिखा हुआ हो या राजेन्द्र माथुर जी का, अपने चंदा भाई को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।

चंदा के गोलाई लिए शब्द और हैंडराइटिंग आज भी चित्र की तरह चल रही है। जब राजेन्द्र माथुर जी ने मुझे परिवेश स्तंभ का प्रभारी बनाया तो चंदा के अनेक आलेख मैंने प्रकाशित किए। उसके लिखे पर कलम चलाने का कम ही अवसर आता था। हां, शीर्षक वो कभी नहीं देता था। हमेशा कहता था, 'शीर्षक तो आप ही दें'। उसके लेखन से प्रूफरीडिंग विभाग के प्रभारी किशोर शर्मा नाराज़ रहते थे। उन्हें लगता था कि आलेख लिखने से चंदा काम पर ध्यान नहीं दे पाता। पर यह सच नहीं था।

चंदा के करीब 30-40 आलेख मैंने छापे। उससे पहले वह संपादक के नाम पत्र भी लिखता था। उन दिनों एक-एक पत्र पर भी पाठकों में बहस होती थी। यह बहस कभी-कभी बड़ा मुद्दा बनकर उभरती थी। आजकल अखबार इस तरह का मानसिक व्यायाम अपने पाठकों का नहीं कराते। ऐसे कई पाठक चंदा के नाम से उसे लड़की समझते थे और सीधे पत्र लिखते थे। हम लोग ऐसे पाठकों का बड़ा मजा लेते। कुछ पाठकों को तो चंदा ने उत्तर भी दिए। बाद में भेद खुला तो पाठक शर्मिंदा हो गए।

शाहिद मिर्ज़ा पहले यह स्तंभ देखते थे, फिर प्रकाश हिंदुस्तानी जी ने जिम्मेदारी संभाली। प्रकाश हिंदुस्तानी धर्मयुग चले गए तो मुझ पर इस स्तंभ का भार आन पड़ा। चंदा खुश रहता था कि मैं उसके लिखे पत्रों में अधिक काट-छांट नहीं करता। पर मैं उसे यह कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दे रहा था। वह लिखता ही ऐसा था। अक्सर हम लोग चोरल चले जाते। चोरल नदी में नहाते और घने जंगलों में ऐश करते। ऐसे न जाने कितने किस्से आज वेदना के साथ याद आ रहे हैं। कल ही तो करियर शुरू किया था और आज इस लोक से विदाई का सिलसिला भी शुरू हो गया।

इधर चंदा भोपालवासी हुए और कुछ समय बाद मैं दिल्ली जा बसा। बीच-बीच में कभी फोन पर तो कभी मिलने पर हम लोग उन दिनों की याद करते। फिर उसका वह लंबा खिंचने वाला ठहाका । उफ्फ....। इस कमबख्त ज़िंदगी ने काल के पहिए में ऐसा फंसाया है कि दोस्तों और अपनों से मिलना भी दुर्लभ होता जा रहा है। जब वे अचानक इस तरह विदा हो जाते हैं तो कलेजे में एक फांस की तरह कुछ अटका रह जाता है।

सच...बहुत याद आओगे चंदा।

(वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की फेसबुक वॉल से)

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ABP की टीम पर हमले के आरोपित ने उठाया गलत कदम, हो गई मौत

दिल्ली पुलिस की टीम ने दो बदमाशों को किया था गिरफ्तार

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 10 July, 2019
Last Modified:
Wednesday, 10 July, 2019
Death

दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर पिछले दिनों ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) चैनल की टीम पर हुई गोलीबारी की घटना के मामले में गिरफ्तार तैय्यब नामक एक बदमाश ने मंगलवार को साकेत कोर्ट परिसर की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के दौरान पुलिसकर्मी उसे अदालत में पेश करने ले जा रहे थे, इसी दौरान शाम करीब पांच बजे उसने फरार होने के लिए पुलिसकर्मियों से हाथ छुड़ाकर छलांग लगा दी। गंभीर हालत में तैय्यब को ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’(एम्स) में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि आठ जून की रात ‘एबीपी न्यूज’ के रिपोर्टर सिद्धार्थ पुरोहित और कैमरामैन अरविंद कुमार पर यह हमला उस समय हुआ था, जब दोनों प्रसाद नगर थाना क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड को कवर करने के लिए ड्राइवर चंदर सेन के साथ ऑफिस की कैब से जा रहे थे। दक्षिण दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर पर रात करीब डेढ़ बजे बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रुकने का इशारा किया। शक होने पर उन्होंने ड्राइवर से कार की स्पीड बढ़ाने को कहा। इसके बाद बदमाशों ने कार पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इनमें से एक गोली कार के दरवाजे पर लगी, दूसरी ने ड्राइवर की तरफ की खिड़की को नुकसान पहुंचाया, जबकि तीसरी किसी तरह निशाने से चूक गई।

बताया जाता है कि बदमाशों ने चैनल की टीम का करीब आधा किलोमीटर तक पीछा भी किया। लेकिन करीब एक किलोमीटर दूर जाकर चैनल की टीम ने पीछे मुड़कर देखा तो आरोपित वहां से गायब हो चुके थे। आरोप है कि पत्रकारों ने आईएनए मेट्रो स्टेशन पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इस घटना के बारे में बताते हुए मदद मांगी, लेकिन आसपास के थानों को सतर्क करने के बजाय पुलिसकर्मी मौके से चले गए। इस मामले में पुलिस की लापरवाही का मामला सामने आने पर दिल्ली पुलिस एएसआई जितेंद्र सिंह की सेवा समाप्त कर चुकी है।

बाद में पुलिस ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पकड़े गए बदमाशों की पहचान शाहदरा निवासी तैय्यब (23) और कबीर नगर निवासी शाहिद (20) के रूप में हुई थी। मंगलवार को हुए हादसे के दौरान तैय्यब को एक दिन की पुलिस रिमांड पर लेने के लिए प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था।

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ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सौरव पाठक ने जीता गोल्ड, जल्द जाएंगे कोरिया

कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं सौरव पाठक

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 08 July, 2019
Last Modified:
Monday, 08 July, 2019
Saurav Pathak

ताइक्वांडो की ‘ओशिनिया पैरा चैंपियनशिप’ (Oceania Para Championship) 2019 में सौरव पाठक ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर अपना कब्जा जमाया है। यह प्रतियोगिता 28 जून 2019 को हुई थी। सौरव पाठक पूर्व में ‘कोरियन कल्चरल सेंटर इंडिया’ (KCCI) की ताइक्वांडो एकेडमी के स्टूडेंट रह चुके हैं। प्रतियोगिता जीतने के बाद वह KCCI भी गए। जल्द ही सौरव पाठक कोरिया में होने वाली इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगे।

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दुनिया को अलविदा कह गए पत्रकार घनश्याम सती

पिछले दिनों लगभग याददाश्त खो चुके थे और लोगों को पहचान पाने में असमर्थ थे

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Friday, 05 July, 2019
Last Modified:
Friday, 05 July, 2019
Ghanshyam Sati

रामनगर के वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम सती का असमय चले जाना पत्रकारिता और अभिनय क्षेत्र की बड़ी क्षति के साथ हमारे लिए व्यक्तिगत भी क्षति भी है। हमारे बाल सखा, उम्र में डेढ़-दो साल छोटे और रिश्ते में चाचा घनश्याम सती दबंग और मानवीय गुणों से भरपूर थे।

मनोहर कहानियां और सत्यकथा से लेखन की शुरुआत करने वाले घनश्याम सती गंभीर विषय पर लिखते रहे थे। रीजनल रिपोर्टर के वे रामनगर प्रतिनिधि रहे और उत्तराखंड की जल समस्या पर रीजनल रिपोर्टर में प्रकाशित उनका आलेख प्रतिनिधि आलेख था। रामनगर में पत्रकार संगठनों के वे आवश्यक अंग थे।

हम दोनों एक ही गांव-घर की उपज, चाहे उस भूमि के लिए कुछ न कर पाए हों, लेकिन हैं अल्मोड़ा जिला के रानीखेत प्रखण्ड फयाटनोला गांव की ही पैदावार। रामनगर और गैरसैंण की दूरी अधिक न होने और पत्रकारिता के कारण भी उनसे निकटता शायद अधिक रही होगी।

25 जून को जब उनसे अंतिम मुलाकात हुई वे लगभग याददाश्त खो चुके थे और पहचान पाने में असमर्थ थे। ठीक 10 दिन बाद आज प्रात: चाचा जी ख्याली दत्त असनोड़ा से घनश्याम सती जी के निधन की सूचना मिली। नश्वर शरीर को एक बार विदा होना है, लेकिन जो अच्छाई आप छोड़ गये, वहीं पुण्य संतत्ति के काम आयेंगे और आपकी याद को अक्षुण्ण रखेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि

(पत्रकार पुरुषोत्तम असनोड़ा की फेसबुक वॉल से)

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