दून प्रेस क्लब में ट्रैक सूट घोटाला! कौन करेगा जांच?

उत्तरांचल प्रेस क्लब देहरादून के पूर्व पदाधिकारियों पर ट्रैक सूट घोटाले के...

Last Modified:
Thursday, 03 January, 2019
Press Club

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

उत्तरांचल प्रेस क्लब देहरादून के पूर्व पदाधिकारियों पर ट्रैक सूट घोटाले के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि क्लब के पदाधिकारियों ने चुनाव से ठीक पहले क्लब के सदस्यों से 1200-1200 रुपये की वसूली की और आधे दाम में घटिया ट्रैक सूट खरीदकर अपने ही उन साथियों में बांट दिए, जो चुनाव में उन्हें वोट दे सकते थे।

इसका नतीजा रहा कि चुनाव नूराकुश्ती साबित हुए और विकास धूलिया पैनल जीत गया। विकास धूलिया यूं तो दैनिक जागरण के अच्छे पत्रकारों में शुमार माने जाते हैं और भ्रष्ट व्यवस्था पर प्रहार करते हैं, लेकिन अब उनके इस तरह से अध्यक्ष बनने से उनकी छवि धूमिल हो सकती है, क्योंकि इस प्रेस क्लब में अधिकांश अध्यक्ष विवादित ही रहे हैं।

पूर्व अध्यक्ष नवीन थलेड़ी ने अपनी शिक्षिका पत्नी को दून में अटैच करवा कर सरकार के चरणों में सिर टिका दिया था तो क्लब में खोले गए बार में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी और ट्रैक सूट घोटाले के आरोप में भूपेंद्र कंडारी भी फंस गए हैं। यदि ट्रैक सूट घोटाला हुआ तो पत्रकारों के घोटाले की जांच कौन करेगा? यह अलग सवाल है। वैसे भी क्लब के पदाधिकारियों पर पहले भी आय-व्यय का ब्योरा न देने, नजूल भूमि का दुरुपयोग कर किराया वसूलने और अधिकृत रूप से बार चलाने और जीएसटी न देने से मोदी के सपनों पर कुठाराघात करने का आरोप है।

यही नहीं, यहां शराब पीने वाले गेस्ट में पत्रकार कम और आटो रिक्शा-टेंपो चालक अधिक शामिल होने का भी आरोप हैं। यह भी आरोप है कि दारू पीने के लिए कुछ शिक्षक भी यहीं दिन भर पड़े रहते हैं और इनका बिल भी बिना जीएसटी के गैरकानूनी ढंग से वसूला जाता है। आरोप यह भी है कि प्रेस क्लब पदाघिकारियों ने क्लब को अलॉट की गई जमीन से कहीं अधिक जमीन पर गेट बनाकर कब्जा किया है और न ही यहां से धरना देने वाले स्थल से लोगों को आने-जाने दिया जाता है। कुल मिलाकर प्रेस क्लब अतिक्रमण का शिकार है।

जानकारी के अनुसार हाल में एमडीडीए की टीम ने भी यहां का दौरा किया था, लेकिन पत्रकारों के दबाव के चलते अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। विडम्बना है कि इस प्रेस क्लब में रचनात्मक व सकारात्मक गतिविधियां कम और गैरकानूनी और नशाखोरी की गतिविधियां चलाने का आरोप हैं। ऐसे में जब नई कार्यकारिणी भी नियोजित तरीके से चुनी गई है तो यह तय है यह कार्यकारिणी क्या करेगी? अब देखना यह है कि दैनिक जागरण के तेज-तर्रार पत्रकारों में शुमार विकास धूलिया क्या सच में कुछ कर पाएंगे या वो भी निजी स्वार्थ में लिप्त होंगे? क्या वो पिछली कार्यकारिणी के आय-व्यय का ब्योरा लेंगे? बार में असामाजिक तत्वों की एट्री को बैन करेंगे? क्लब का जीएसटी नंबर लेंगे और अवैध कमाई को वैध कर सरकार को टैक्स देंगे?

(वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से)

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'दैनिक जागरण' के युवा पत्रकार ने उठाया घातक कदम, साथी हैरान

मंगलवार की दोपहर से लापता चल रहा था पत्रकार, तभी से तलाश में जुटे हुए थे परिजन और मित्र

Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Mritunjay Shukla

दैनिक जागरण के आगरा संस्करण में कार्यरत पत्रकार मृत्युंजय शुक्ल ने आत्महत्या कर ली है। शुक्रवार को उनका शव रेलवे लाइन के पास मिला है। परिजनों ने कपड़ों से शव की शिनाख्त कर ली है। बताया जाता है कि डिप्रेशन के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है। मृत्युंजय मंगलवार से लापता चल रहे थे। उनका मोबाइल घर पर ही पड़ा मिला था। परिजन और मित्र तभी से उनकी तलाश में जुटे थे, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा था।  

बहेड़ी (बरेली) के मूल निवासी मृत्युंजय लंबे समय से आगरा में मीडिया संस्थानों के साथ जुड़े हुए थे। अक्टूबर में ही मृत्युंजय के पिता का देहांत हुआ था। फिलहाल परिजन मृत्युंजय के शव को पोस्टमार्टम के बाद पैतृक निवास बरेली ले जा रहे हैं।। DNA के भी प्रयास हो रहे हैं।

मृत्युंजय के आत्महत्या करने की खबर सुनकर उनके पत्रकार साथी काफी हैरान और सदमे में हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि मृत्युंजय इस तरह का कदम उठा सकते हैं। इन पत्रकारों का कहना है कि मृत्युंजय पत्रकारिता में आकर बेहद उत्साहित था। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। मृत्युंजय के आत्महत्या करने की बात सुनकर पत्रकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

  

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दैनिक जागरण संवादी में इस बार क्या होगा खास, जानें यहां

13 से 15 दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित किया जाएगा यह कार्यक्रम

Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Dainik Jagran

दैनिक जागरण ‘संवादी’ का छठा संस्करण 13 दिसंबर से 15 दिसंबर तक होने जा रहा है। यह आयोजन लखनऊ के गोमती नगर स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी में किया जाएगा। तीन दिवसीय इस उत्सव में साहित्य, राजनीति, संगीत, खान-पान, सिनेमा, धर्म और देशभक्ति समेत कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी।

इस कार्यक्रम में भारतीय साहित्य के स्तंभ एवं मूर्धन्य साहित्यकार नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, कृष्णा सोबती एवं नवनीता देव सेन को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क रखा गया है।

हिंदी में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘दैनिक जागरण’ के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत इस कार्यक्रम में ‘ज्ञानवृत्ति’ के विजेताओं की घोषणा भी की जायेगी। इस अभियान के विजताओं को कम से कम छह महीने और अधिकतम नौ महीने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति दी जाती है।

‘संवादी’ में दैनिक जागरण की नई पहल ‘सृजन’ का कॉपीराइट बाजार भी लगेगा। इस कॉपीराइट बाजार में शामिल होने के लिए हिंदी के तमाम प्रकाशकों को आमंत्रित किया गया है। इसमें युवा लेखकों को प्रकाशकों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर भी मिलेगा।

बता दें कि दैनिक जागरण सृजन देश के युवा लेखकों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का एक मंच है। यह मंच हिंदी में सृजनात्मक लेखन का जज्बा रखने वाले युवाओं को अपने सपने को हकीकत में बदलने का अवसर देता है। इस साल लखनऊ विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में विशेष रूप से तैयार किये सत्र का भी आयोजन भी यहां किया जाएगा

कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी http://jagranhindi.in/ अथवा www.jagranhindi.in पर क्लिक कर ली जा सकती है।

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अमर उजाला समूह का नया इनिशिएटिव, अब IT फील्ड की ओर भी अग्रसर

जल्द ही आगरा, बनारस, मेरठ, देहरादून और हल्द्वानी में भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 03 December, 2019
Amar Ujala Group

‘अमर उजाला वेब सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ (एयूडब्ल्यू) आईटी के प्रोजेक्ट्स भी शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत ‘सीआईआई’ लखनऊ व ‘एयूडब्ल्यू’ द्वारा सीआईआई के विभूति खंड स्थित कार्यालय सभागार में आयोजित आईटी कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने इससे जुड़ी जानकारी व अनुभव साझा किए।

कॉन्फ्रेंस में अमर उजाला के आईटी हेड आयुष्मान सिन्हा ने इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'हमारे अधिकांश उपभोक्ता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) से हैं और उनकी आईटी से संबंधित समस्याओं को समझते हुए इस तरह की पहल शुरू की गई है।‘ उन्होंने बताया कि अब से एमएसएमई ‘अमर उजाला’ के सभी स्थानीय कार्यालयों में आईटी सर्विस के लिए संपर्क कर सकेंगे।

बताया जाता है कि आईटी पर होने वाले खर्च को कैसे कम किया जाए, इसके लिए यह कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। जल्द ही आगरा, बनारस, मेरठ, देहरादून और हल्द्वानी में भी इस तरह की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी।

(साभार: अमर उजाला)

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अंतर्राष्ट्रीय प्रेस फोटो प्रतियोगिता में इन चार भारतीयों ने गाड़े झंडे

दिल्ली में चल रही प्रदर्शनी में इन चारों भारतीयों की तस्वीरों को भी शामिल किया गया है

Last Modified:
Tuesday, 03 December, 2019
Photographers

फोटो जर्नलिज्म के क्षेत्र में दुनिया भर की सम्मानित आंद्रेई स्टेनिन प्रेस फोटो प्रतियोगिता 2019 में चार भारतीय युवाओं ने अपने झंडे गाड़े हैं। इस प्रतियोगिता में 80 देशों के 18 से 32 साल की उम्र के 6000 से ज्यादा युवाओं ने भाग लिया था।

कोलकाता के पत्रकार और फ्रीलांस डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर देवरचन चटर्जी ने विरोध आंदोलन पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी तस्वीर के लिए शीर्ष समाचार श्रेणी में प्रतियोगिता जूरी का पुरस्कार जीता है। अमित मौलिक और अयानवा सिल ने खेल श्रेणी में बेहतरीन और गतिशील चित्रों का योगदान दिया है। शांतनु डे ने कोलकाता में बहुरूपी अभिनेताओं से स्ट्रीट ग्लास कटर तक विलुप्त होने की श्रृंखला के कगार पर शामिल व्यवसायों को दिखाया है।

प्रतियोगिता के विजेताओं की तस्वीरों की प्रदर्शनी इन दिनों दिल्ली के रफी मार्ग स्थित एआईएफएसीएस गैलरी में लगी है। यह प्रदर्शनी पांच दिसंबर तक चलेगी। इस प्रदर्शनी में रूस, भारत, दक्षिण अफ्रीका, इटली, अमेरिका, फ्रांस सहित कई देशों के सर्वश्रेष्ठ युवा फोटोग्राफरों द्वारा तैयार तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। यह आयोजन दूसरी बार रोसिया सेगोडन्या समाचार एजेंसी द्वारा यूनेस्को के सहयोग से किया जा रहा है। प्रदर्शनी में भारत के इन चारों विजेताओं द्वारा ली गई तस्वीरें भी शामिल हैं।

आंद्रेई स्टेनिन इंटरनेशनल प्रेस फोटो प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा फोटोग्राफर्स को सपोर्ट करना और आधुनिक फोटो जर्नलिज्म के कार्यों पर जनता का ध्यान आकर्षित करना है। यह उन युवा फोटोग्राफर्स के लिए एक प्लेटफॉर्म है, जो प्रतिभाशाली, संवेदनशील और कुछ नया करने के लिए प्रयासरत रहते हैं।

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पत्रकार की हालत गंभीर, इलाज के लिए आर्थिक मदद की जरूरत

ब्रेन हैमरेज के बाद लखनऊ के ट्रामा सेंटर में कराया गया है भर्ती, फिलहाल वेंटीलेटर पर रखा गया है

Last Modified:
Monday, 02 December, 2019
alim Qadri

ब्रेन हैमरेज के बाद शनिवार को लखनऊ स्थित केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराए गए ‘साहसी भारत’ पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार अलीम कादरी की हालत गंभीर है। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम (वेंटीलेटर) पर रखा गया है। अलीम कादरी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई पत्रकार उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। इसके साथ ही अलीम कादरी के पत्रकार साथियों ने अन्य पत्रकारों से भी अलीम कादरी के परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की है, ताकि उनके इलाज में किसी तरह की आर्थिक दिक्कत न आए।

मदद करने के इच्छुक पत्रकार अलीम कादरी के मोबाइल नंबर (9696244177) पर संपर्क कर सकते हैं। अलीम कादरी का मोबाइल फिलहाल उनकी पत्नी के पास है।

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चुने जाएंगे दिल्ली पत्रकार संघ के नए पदाधिकारी, ये है पूरा कार्यक्रम

चुनाव के लिए वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है

Last Modified:
Friday, 29 November, 2019
DJA

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) की नई कार्यकारिणी के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। 23 अक्टूबर को हुई एसोसिएशन की वर्तमान एग्जिक्यूटिव कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। चुनाव के लिए वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इस कमेटी में एक प्रेजिडेंट, चार वाइस प्रेजिडेंट, एक जनरल सेक्रेटरी, तीन सेक्रेटरी, एक कोषाध्यक्ष और 15 एग्जिक्यूटिव मेंबर्स के पदों पर चुनाव के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है।

इस चुनाव कार्यक्रम के तहत 20 दिसंबर 2019 को डीजेए के मेंबर्स की सूची प्रकाशित की जाएगी। चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 2 जनवरी 2020 से शुरू की जाएगी। दो जनवरी से 10 जनवरी तक सुबह 10 से शाम चार बजे तक नामांकन किए जा सकेंगे। 11 जनवरी को सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 16 जनवरी की शाम चार बजे तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। 23 जनवरी को चुनाव होगा और इसके बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

बताया जाता है कि चुनाव लड़ने के लिए कम से कम एक साल पुराना सदस्य होना जरूरी है। चित्तौड़गढ़ यूनियन काउंसिल में लिए गए फैसले के मुताबिक किसी प्रतिस्पर्धी यूनियन का सदस्य पाए जाने पर नामांकन पत्र रद्द कर दिया जाएगा। चुनाव में शामिल होने के लिए सदस्य का दिसंबर 2019 तक का सदस्यता शुल्क जमा होना आवश्यक है।

चुनाव वाले दिन वोट डालने से पहले भी सदस्यता शुल्क जमा कराया जा सकता है। इसके साथ ही उम्मीदवार के प्रस्तावक और अनुमोदक का दिसंबर 2019 तक का सदस्यता शुल्क जमा होना जरूरी है। 500 रुपए शुल्क जमा करके कोई भी सदस्य कार्यालय से एसोसिएशन के सदस्यों की सूची प्राप्त कर सकता है।

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पत्रकारों की मुहिम को मिली नई पहचान, इस मंच पर हुआ सम्मान

पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार गंभीर कार्य करने वाले पत्रकारों को यह अवॉर्ड देने की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी

Last Modified:
Thursday, 28 November, 2019
AWARD DELHI

दिल्ली में चल रहे ग्रीन फिल्म फेस्टिवल 'वातावरण'  (VATAVARAN) में पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में चल रहे इस फेस्टिवल के तहत 27 नवंबर को आयोजित एक समारोह में ‘गांव कनेक्शन’ की पर्यावरण संपादक निधि जम्वाल,‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के जयश्री नंदी, ‘दैनिक जागरण’ के राहुल मानव, ‘आजतक’ के मिलन शर्मा और ‘इंडिया स्पेंड’ के भास्कर त्रिपाठी को IHCAP CMS युवा पर्यावरण पत्रकार अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

‘इंडियन हिमालयाज क्लाइमेट एडॉपटेशन प्रोग्राम’ (IHCAP) की फेलो रह चुकीं जम्वाल को हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए 'विशेष श्रेणी' में यह पुरस्कार मिला है। पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार गंभीर कार्य करने वाले पत्रकारों को यह अवॉर्ड ‘इंडियन हिमालयाज क्लाइमेट एडॉपटेशन प्रोग्राम’ (IHCAP) और ‘सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज’ (CMS) की तरफ से दिया जाता है। इस अवॉर्ड की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी।

अवॉर्ड वितरण समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रवि अग्रवाल, भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत तमारा मोना, सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के भास्कर राव सहित तमाम लोग शामिल रहे। बता दें कि 30 नवंबर तक चलने वाले इस फेस्टिवल में पर्यावरण और वाइल्डलाइफ से जुड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों का मंचन भी किया जाएगा।

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पत्रकारों के लिए अवॉर्ड्स जीतने का मौका, करना होगा ये काम

‘चरखा विकास संचार नेटवर्क’ की ओर से इन अवॉर्ड्स के तहत कुल पांच महीनों के लिए पांच प्रतिभागियों को पचास-पचास हजार रुपए दिए जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 26 November, 2019
Award

दिल्ली स्थित एनजीओ ‘चरखा विकास संचार नेटवर्क’ ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इन अवॉर्ड्स के तहत उन पत्रकारों/लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छिपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रही है। इसके तहत कुल पांच महीनों के लिए पांच प्रतिभागियों को पचास-पचास हजार रुपए दिए जाएंगे।

प्रतिभागियों को देश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को प्रगति की मुख्यधारा में लाने के लिए गहरे शोध, ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे और समस्याओं पर बेहतर लेखन करते हुए उनकी आत्मनिर्भरता को प्रमुखता से उजागर करना होगा।

यह अवार्ड चरखा के संस्थापक संजॉय घोष के जज्बे से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने मीडिया के रचनात्मक उपयोग के माध्यम से ग्रामीण हाशिए के समुदायों के सामाजिक और आर्थिक समावेश की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेखकों को ग्रामीण विशेषकर वंचित समुदायों की महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने और विकास की स्थिति को प्रतिबिंबित करने का अवसर प्रदान किया जायेगा। शिक्षा में लैंगिक असमानता और  महिला के विरुद्ध क्रूरता विषय के तहत दो-दो जबकि ग्रामीण भारत में मातृ स्वास्थ्य देखभाल विषय पर एक अवॉर्ड दिया जाएगा।

इस अवॉर्ड का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषा के प्रकाशनों, छोटे शहरों के पत्रकारों और लेखन में रुचि रखने वाले आवेदकों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना है। महिला पत्रकार भी इसके लिए आवेदन कर सकती हैं। आवेदकों को सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के विकास की चिंताओं के लिए प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए आलेख अथवा कार्य प्रस्तुत करने होंगे। चरखा के सभी पूर्व एवं वर्तमान प्रशिक्षित लेखक भी आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सामाजिक मुद्दों पर आधारित अपने प्रकाशित आलेख प्रस्तुत करने होंगे। वहीं, चरखा के पूर्व फेलो तथा ऐसे लेखक जो किसी अन्य फेलोशिप का लाभ उठा रहे हैं अथवा वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे हैं, इसके पात्र नहीं हैं।

इन अवॉर्ड्स के लिए आवेदन अंग्रेजी या हिंदी भाषा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। आवेदकों को आवेदन के साथ पिछले तीन वर्षों के कार्य अनुभव, शैक्षणिक योग्यता और पूर्व में प्राप्त पुरस्कार तथा फेलोशिप के विवरण के साथ अपना संक्षिप्त विवरण देना होगा। विषयगत क्षेत्र को रेखांकित करते हुए लगभग 800 शब्दों का एक प्रस्ताव देना होगा, जिसमें आवेदक काम करना चाहेगा। इसमें अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ देश में विकास की बड़ी बहस के लिए योगदान के बारे में विवरण शामिल होना चाहिए।

लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में भेजे जा सकते हैं। आवेदन के साथ 2 प्रकाशित लेखों (पिछले दो महीने के दौरान प्रकाशित) की क्लिपिंग भेजान जरूरी है। एक प्रकाशित आलेख आवेदक की पसंद का भी सम्मिलित किया जा सकता है। संपर्क विवरण के साथ दो संदर्भ सहित आवेदन के अनुमोदन के लिए संपादक/संगठन प्रमुख का अनुशंसा पत्र भी भेजना होगा। स्वतंत्र पत्रकारों को अपने काम से परिचित किसी मीडिया संस्थान के संपादक या विशिष्ट मीडिया हस्तियों से सिफारिश के दो पत्र शामिल करने होंगे।

आवेदन टाइप किए होने चाहिए। हस्तलिखित अथवा अधूरे आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इस बारे में अधिक जानकारी www.charkha.org पर उपलब्ध है। आवेदन पत्र mario@charkha.org पर ईमेल द्वारा भेजे जा सकते हैं। विषय में ‘संजॉय घोष मीडिया अवार्ड-2019 के लिए आवेदन’ लिखना अनिवार्य है। विस्तृत जानकारी के लिए संस्था के मुख्य कार्यकारी मारियो नोरोन्हा के मोबाइल 07042293792 पर संपर्क किया जा सकता है। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि 5 दिसंबर 2019 होगी। परिणाम 15 दिसंबर 2019 तक घोषित किए जाएंगे।

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प्रख्यात कार्टूनिस्ट सुधीर धर के बारे में आई ये बुरी खबर

विभिन्न अखबारों में अपने कार्टून के जरिये सममायिक मुद्दों पर व्यंग्य करने वाले सुधीर धर ने करियर की शुरुआत द स्टेट्समैन अखबार से की थी

Last Modified:
Tuesday, 26 November, 2019
Cartoonist Sudhir Dhar

जाने-माने कार्टूनिस्ट सुधीर धर का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। बताया जाता है कि कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हुआ। 58 साल के करियर में विभिन्न अखबारों में अपने कार्टून के जरिये सममायिक मुद्दों पर व्यंग्य करने वाले सुधीर धर ने करियर की शुरुआत वर्ष 1961 में ‘द स्टेट्समैन’ (The Statesman) अखबार से की थी।

इसके बाद यहां से अलविदा बोलकर उन्होंने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) का रुख कर लिया था। उनके कार्टून ‘द इंडिपेंडेंट’ (The Independent),‘द पॉयनियर’ (The Pioneer),‘दिल्ली टाइम्स’ (Delhi Times),‘न्यूयार्क टाइम्स’ (New York Times) और ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (Washington Post) समेत तमाम अखबारों में प्रकाशित हो चुके हैं।

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बदलती शिफ्ट्स में काम कर रहे पत्रकारों के लिए है ये खबर

लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक

Last Modified:
Saturday, 23 November, 2019
Research

लगातार बदलती शिफ्ट में नौकरी करने वालों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है। दरअसल, आजकल कई निजी कंपनियों में चौबीसों घंटे काम होता है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं हैं। तमाम मीडिया संस्थान चौबीसों घंटे खुले रहते हैं और उनमें लगातार काम होता रहता है। जाहिर है, ऐसे में यहां काम करने वालों की शिफ्ट भी बदलती रहती है। कभी उन्हें सुबह की शिफ्ट में तो कुछ दिनों बाद रात की शिफ्ट में ड्यूटी करनी पड़ती है। इस तरह की शिफ्ट में काम करने वालों को मोटापे और डायबिटीज का रिस्क ज्यादा बना रहता है। यही नहीं, उन्हें कई तरह की दिमागी बीमारियां भी घेर सकती हैं।    

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने इस बारे में रिसर्च की तो कई चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए। इस रिसर्च में पता चला कि जो लोग लगातार बदलती शिफ्ट में काम करते हैं, उनमें रात की शिफ्ट में काम न करने वालों अथवा सुबह नौ से पांच बजे वाली शिफ्ट में काम करने वालों की तुलना में अवसाद और चिंता की आशंका 33 प्रतिशत ज्यादा थी।

28 हजार 438 प्रतिभागियों की जांच के बाद रिसर्च में यह भी पता चला कि शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित होने की आशंका भी 28 प्रतिशत ज्यादा होती है।

इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि जब काम के दौरान बार-बार शिफ्ट बदलती है तो सोने-जागने की आदत पर इसका काफी असर पड़ता है और शरीर इस बदलाव को झेल नहीं पाता। इससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है। इसके अलावा उसके मूड में भी बदलाव आने लगता है और सामाजिक रूप से भी वह खुद को अलग-थलग पाने लगता है। 

इस रिसर्च में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार शिफ्ट में बदलाव होने से हमारे सोने और जागने की आदत पर असर पड़ता है। हमारा शरीर सोने-जागने की आदत में बार-बार हो रहे इस बदलाव को नहीं झेल पाता, जिससे व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है। इसके अलावा यह मूड में बदलाव और सामाजिक अलगाव का कारण भी बनता है।

वहीं, जापान में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि बदलती शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को दिन में काम करने वालों की तुलना में डायबिटीज होने का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा था। इसके अलावा अन्य तरह की समस्याएं जैसे- हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्राल बढ़ने की समस्याएं भी उनमें ज्यादा पाई गईं।

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