अगर मन ही मन मुस्कुराना चाहते हैं, तो एक बार पढ़ें राजीव सचान का ये होली हास्य

चौतरफा दबाव से घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीते दिनों एक खास बैठक...

Last Modified:
Tuesday, 19 March, 2019
Rajeev Sachan

राजीव सचान 

एसोसिएट एडिटर

दैनिक जागरण

चौतरफा दबाव से घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीते दिनों एक खास बैठक बुलाई। इस बैठक में केवल दो और खास लोग थे-एक पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और दूसरा जेहादी तंजीम का सरगना। यह बैठक इतनी खुफिया थी कि किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी, लेकिन इस बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी एक ऑडियो क्लिप एक्सक्लूसिव होकर हमारे हाथ लग गई। यह बातचीत ऐसी थी कि इसे हमने अपने पाठकों के लिए होली की एक्सक्लूसिव सामग्री बनाना बेहतर समझा। वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान पेश कर रहे हैं इस बातचीत का पूरा ब्योरा-

बाजवा-जनाब आपने यह क्यों कह दिया कि मैं नोबेल के काबिल नहीं? इसकी मांग तो इंडिया के भी कुछ लोग कर रहे थे...और ये हिंदी में ट्वीट कराने की क्या जरूरत थी?

इमरान-दरअसल मैं अपने मुल्क के लोगों को यह जाहिर करना चाहता था कि मैं हिंदुस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना जानता हूं।

बाजवा- यह तो ठीक है, पर नोबेल से इन्कार क्यों?

इमरान-पहले ये बताओ, आप मेरे मददगार हैं या मुखालिफ?

बाजवा- अरे! जनाब ऐसा क्यों कह रहे हैं?

इमरान- इसलिए कह रहा हूं कि अभी तक मुल्क के दो लोगों को नोबेल से नवाजा गया है। एक थे डॉ. अब्दुस सलाम साहब, जिनकी लोगों ने उनके जीते जी तो बेइज्जती की ही, मरने के बाद भी की और यहां तक कि उनकी कब्र को भी सलामत नहीं रहने दिया। दूसरी वह मलाला है, जिसकी हमारे अपने लोग ही इतनी मज्जमत करते हैं कि वह मुल्क आने से भी तौबा करती है। क्या आप चाहते हैं कि मेरी भी ऐसी ही दुर्गति हो? अभी तो मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ भी नहीं पाया हूं।

आतंकी सरगना- अरे हुजूर तो आप निशाने पाकिस्तान ले सकते हैं।

बाजवा- अरे नहीं! अभी ऐसा नहीं कर सकते।

आतंकी सरगना- भला क्यों नहीं कर सकते। इसके लिए तो टूटर पर भी किसी से गुजारिश करने की जरूरत नहीं।

बाजवा-अबे गधे, टूटर नहीं ट्वीटर.. और तुझे दिख नहीं रहा कि जो आदमी हिंदुस्तान के निशाने पर है, वह निशाने पाकिस्तान कैसे ले सकता है?

आतंकी सरगना-हां यह बात तो है, लेकिन बाजवा साहब हिंदुस्तान के निशाने पर तो आप भी हो।

इमरान-अबे सबसे ज्यादा तो तू है। तूझे पता है बालाकोट में तेरे कितने लड़कों की चटनी बना गए इंडिया वाले?

आतंकी सरगना-देखो साहब! कितने भी मरे हों, पर चटनी का नाम न लो। जबसे इंडिया से टमाटर की आमद रुकी है, तबसे खाने में मजा नहीं आ रहा। बीवियां ताने अलग से मार रही हैं।

इमरान-बाजवा साहब, ये बात तो सही कह रहा है। टमाटर की तंगी दूर करने का कोई जतन किया है आपने? कुछ सोच रहे हैं?

बाजवा-सोचा क्या है! कश्मीर गए अपने लड़कों से कहा है कि बम-बंदूकें छोड़कर जितना भी टमाटर हाथ लगे, लेकर जल्दी लौट आएं।

आतंकी सरगना-लेकिन हुजूर हमारे जेहादी तो इसके लिए ट्रेंड ही नहीं हैं और अगर वे थोड़ा-बहुत टमाटर ले भी आए तो आपको क्यों देंगे?

बाजवा-देंगे नहीं तो लूट लेंगे सालों से!

इमरान-क्या बाजवा साहब आप भी! अब आप टमाटर लूटने का काम करेंगे। क्या इज्जत रह जाएगी हमारी फौज की।

आतंकी सरगना-इज्जत तो तब रहेगी जब होगी।

बाजवा-क्या बोला बे!

इमरान-अरे यार, लड़ो नहीं। यह सोचो इस मुसीबत से कैसे बचें? मोदी ने बोला है कि घर में घुसकर मारेंगे।

बाजवा-बच जाएंगे। आप बस ऐलान कर दो कि अब हम आतंकी संगठनों पर सचमुच की असली वाली पाबंदी लगाने जा रहे हैं।

आतंकी सरगना-हुजूर आप पाबंदी का पर्चा निकालो। हम भी जूलूस निकालकर और जलसा करके ऐलान करेंगे-दुनिया वालों, कान खोलकर सुन लो, हमारी हुकूमत ने हम पर असल पाबंदी लगा दी है। हम बहुत परेशान हैं। गिनती करना मुश्किल हो रहा है कि हम पर कितनी बार पाबंदी लग चुकी है।

इमरान-और मसूद अजहर का क्या करेंगे?

बाजवा-करना क्या है! उसका एक विडियो जारी करा देंगे, जिसमें वह खुद ही कह रहा होगा कि मैं अमुक दिन इतने बजे इंतकाल फरमा गया हूं।

इमरान-क्या दुनिया और खासकर इंडिया यकीन कर लेगा?

आतंकी सरगना-यकीन क्यों नहीं करेगा! हम भी तो ऐलान करेंगे-इंडिया वालों अपनी खैरियत चाहते हो तो हम पर यकीन करो।

बाजवा-लेकिन ट्रेनिंग ले रहे जिहादियों का क्या करेंगे? वे तो कहीं भी महफूज नहीं रहे। बालाकोट में इंडिया की एयर स्ट्राइक के बाद उनकी हिफाजत करनी मुश्किल हो रही है।

इमरान-वैसे कितने मारे गए वहां पर?

आतंकी सरगना-हम क्यों बताएं? बता देंगे तो फिर इंडिया में अपोजीशन वाले मोदी से सवाल करना बंद कर देंगे।

बाजवा-हां, यह तो बिल्कुल नहीं बताना, नहीं तो कल को जिहादियों के नाम-पते,मोबाइल नबंर और उनके कच्छे-बनियान के साथ कुर्ते-पाजामे का साइज भी बताना पड़ सकता है।

इमरान-हां, यह सही है। इस बारे में हम बोलेंगे तो इंडिया में अपोजीशन वालों के पास बोलने को क्या रह जाएगा?

आतंकी सरगना-यह सब तो दुरुस्त है साहब, लेकिन अब हम करें क्या? हमारे लड़के क्या करें?

बाजवा-यही तो मुसीबत है।

इमरान-अब तो ये जिहादी किसी काम के नहीं रहे। इनसे भले तो हमारे मुल्क के गधे हैं।

आतंकी सरगना-क्या!अब हम गधों से भी बदतर हो गए!

इमरान-हां, कम से कम गधों को चीन को बेचकर कुछ पैसा तो कमा लेते हैं हम।

बाजवा-क्यों न हम चीन से कहें कि अब हमारे यहां दो पैर वाले गधों की भी खेप तैयार है। शायद वह लेने को तैयार हो जाए।

आतंकी सरगना-क्या कह रहे हो आप लोग? चीन को इतना गधा समझ रखा है क्या?

इमरान-और नहीं तो क्या। यह गधापन ही तो है जो वह बार-बार इतने बड़े आतंकी-मसूद अजहर की तरफदारी करते नहीं थकता।

बाजवा-लेकिन अगर चीन हमारे इन गधों..मतलब जिहादियों को लेने को तैयार नहीं होता तो?

इमरान-तो?… तो भी इस मसले का हल है।

आतंकी सरगना-क्या हल है?

बाजवा-हां बताओ भाई, क्या हल है?

इमरान-हल ही तो हल है। हम जिहादियों को एक-एक हल देकर कहेंगे, जाओ टमाटर की खेती करो।

बाजवा-सही है जनाब। अब आप यह एलान कर दो कि नया पाकिस्तान पहले टमाटरिस्तान बनेगा।

(साभार: दैनिक जागरण)

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इस वजह से हमलावरों ने दो पत्रकारों को बनाया निशाना, दी ये धमकी भी

देश में 17वीं लोकसभा चुनाव के गठन के लिए 18 अप्रैल 2019 को दूसरे चरण के तहत 13 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान हुआ

Last Modified:
Thursday, 18 April, 2019
Attack

देश में 17वीं लोकसभा चुनाव के गठन के लिए 18 अप्रैल 2019 को दूसरे चरण के तहत 13 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान हुआ। दूसरे चरण में जिन राज्यों में वोटिंग हुई, उनमें तमिलनाडु की 39, कर्नाटक की 14, पश्चिम बंगाल की तीन, असम की पांच, मणिपुर की एक, ओडिशा की पांच, त्रिपुरा की एक और पुडुचेरी की एक सीट शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा हुई है। रायगंज में दो पत्रकारों पर हमले का मामला सामने आया है, वहीं सीपीएम उम्मीदवार मोहम्मद सलीम के वाहन को भी निशाना बनाया गया है। बताया जाता है कि जिन दो पत्रकारों पर हमला हुआ है, उनमें ‘एबीपी आनंदा’ (ABP Ananda) के पार्थ प्रतिम घोष (Parthapratim Ghosh) और स्वप्न मजूमदार (Swapan Majumdar)  शामिल हैं। आरोप है कि दोनों पत्रकारों के कैमरे भी इस हमले में क्षतिग्रस्त हो गए। दोनों रिपोर्टरों को शिकायत मिली थी कि एक बूथ पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा है। इसके बाद दोनों रिपोर्टर इलाके में रिपोर्टिंग के लिए जा रहे थे, जहां पर रास्ते में कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि दोनों को मतदान बूथ के आसपास न फटकने की धमकी भी दी गई।

इसके बाद इलाके में पुलिस ने मौका संभालते हुए उपद्रव करने वालों को खदेड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ लोगों को पकड़ा गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। गौरतलब है कि इस बार सात  चरणों में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले गए थे। आखिरी चरण की वोटिंग 19 मई को होगी और सभी सीटों के नतीजे 23 मई को आएंगे।

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बाइक पर लिखवाया ‘प्रेस’ पर क्यों काम न आया ये तरीका

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है

Last Modified:
Thursday, 18 April, 2019
ARREST

पत्रकारिता के नाम पर लोगों पर धौंस जमाना कुछ लोगों को काफी पसंद आता है। शायद यही कारण है कि वो अपने वाहनों पर ‘प्रेस’ लिखवा लेते हैं, फिर चाहे मीडिया से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध न हो। ऐसे लोगों को लगता है कि वाहन पर ‘प्रेस’ लिखा होने के कारण पुलिस भी उन्हें नहीं रोकेगी, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में एक युवक की ये चालाकी काम न आई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, बिलासपुर में बेलगहना क्षेत्र के ग्राम मझगांव में यह युवक चोरी की बाइक पर ‘प्रेस’ लिखवाकर घूम रहा था, लेकिन ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने उसे धर दबोचा। 20 वर्षीय इस युवक के कब्जे से चोरी की दो बाइक बरामद हुई हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों बाइक जब्त कर आरोपित युवक को जेल भेज दिया है।

बताया जाता है कि बेलगहना चौकी प्रभारी व एएसआइ हेमंत सिंह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। इस दौरान उन्हें पता चला कि मझगांव निवासी जितेंद्र रोहिदास पिता त्रिभुवन रोहिदास चोरी का पुराना आरोपित है। इन दिनों वह एक बाइक पर घूम रहा है, जिसके सामने ‘प्रेस’ लिखा है। खबर मिलते ही हेमंत सिंह ने दबिश देकर जितेंद्र को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान उससे बाइक के दस्तावेज की मांग की गई, लेकिन वह गोलमोल जवाब देने लगा। फिर उसे चौकी ले जाकर सख्ती से पूछताछ की गई, तब उसने बताया कि उसके पास एक और बाइक हैं और दोनों को उसने कोरबा जिले के पाली व कोरबा शहर से चोरी किया था।

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TIKTOK को नहीं मिली राहत, नियुक्त हुए Amicus Curiae

चीनी विडियो शेयरिंग ऐप ‘टिकटॉक’ को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है

Last Modified:
Thursday, 18 April, 2019
TIKTOK

चीनी विडियो शेयरिंग ऐप ‘टिकटॉक’ को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा ‘टिकटॉक’ पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इस बीच ‘गूगल’ और ‘एप्पल’ ने अपने प्ले स्टोर पर इस ऐप को ब्लॉक कर दिया है। इसके बाद भारत में चीन की कंपनी ‘बीजिंग बाइटडांस टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड‘(Beijing ByteDance Technology Co Ltd.) के इस ऐप को डाउनलोड नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट के आदेश के बारे में 'Aditya Singh Rathore, Associate, at Trust Legal, Advocates & Consultants' की पार्टनर पेटल चंडोक (Petal Chandhok) का कहना है, ‘मद्रास हाई कोर्ट ने 3 अप्रैल को केंद्र से ‘टिकटॉक’ ऐप पर बैन लगाने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि टिकटॉक ऐप पॉर्नोग्राफी को बढ़ावा देता है और बच्चों को यौन हिंसक बना रहा है। साथ ही कोर्ट ने मीडिया को निर्देश दिया था कि वो इस ऐप पर बने विडियो का प्रसारण न करे।’

चंडोक ने बताया,‘ हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद ‘टिकटॉक’ ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। ‘टिकटॉक’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके अलावा 16 अप्रैल 2019 को मद्रास हाई कोर्ट ने इस मोबाइल ऐप के उद्देश्यों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को अमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया है।‘

मद्रास हाई कोर्ट के इस ऑर्डर के बाद भारत में ‘टिकटॉक’ का भविष्य अनिश्चित है। सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए ‘गूगल’ और ‘एप्पल’ को अपने प्लेटफॉर्म से इस ऐप का डाउनलोड बंद करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद इन प्लेटफॉर्म पर इस ऐप को ब्लॉक कर दिया है।

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जानें, 15 वाइस चांसलर समेत 300 से अधिक शिक्षाविद् क्यों पहुंचे उपराष्ट्रपति के 'दरबार' में

माखनलाल यूनिवर्सिटी में विवादों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
MAKHANLAL

माखनलाल यूनिवर्सिटी में विवादों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बृजकिशोर कुठियाला सहित 20 प्रोफेसर व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अकडेमिशियन्स फ़ॉर फ्रीडम, दिल्ली, के तत्वावधान में 300 से अधिक प्राध्यापकों सहित 15 से अधिक कुलपति, पूर्व कुलपति और प्रति कुलपतियों ने विश्वविद्यालय पर राजनैतिक दमन का आरोप लगाते हुए उपराष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और इसमें हस्तक्षेप की मांग की है। ग़ौरतलब है कि उपराष्ट्रपति इस विश्वविद्यालय के विज़िटर (कुलाध्यक्ष) हैं और विश्वविद्यालय के अधिनियम के अंतर्गत उन्हें यह अधिकार प्राप्त है।

शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और अन्य 20 प्राध्यापकों पर बिना विधिसम्मत जाँच पड़ताल के गंभीर आरोपों पर एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोपी प्राध्यापकों को अपना पक्ष रखने का या कोई स्पष्टीकरण देने का भी अवसर नहीं दिया गया। ज्ञापन में देने वाले लोगों में राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीपचन्द अग्निहोत्री, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ के अध्यक्ष प्रो. कपिल कपूर, बी पी एस महिला विश्वविद्यालय, सोनीपत की कुलपति प्रो. सुषमा यादव, सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो. के एन सिंह, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन के तनेजा, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के कुलपति प्रो. बिद्युत चक्रबर्ती, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी के प्रति कुलपति प्रो. अनिल राय, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति प्रो. मानसिंह परमार, भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. प्रेमचंद पतंजलि इत्यादि के नाम शामिल हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘हम सभी शिक्षकगण, हतप्रभ और आहत हैं कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्विद्यालय, भोपाल की महापरिषद के अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को, पूर्व कुलपति एवं अन्य 20 वर्तमान शिक्षकों पर बिना जाँच के और कई अप्रमाणित आरोपों पर FIR करने का आदेश दिया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों पर एफआईआर करने जैसा गंभीर कदम, एक सम्पूर्ण विधिसम्मत प्रक्रिया और स्पष्टीकरण के नोटिस भेजे जाने के पश्चात ही युक्तिसंगत माना जा सकता है। तब भी, उचित यही है, कि एक पूर्ण और पक्षपातरहित जाँच की जाए क्योंकि संबंधित व्यक्ति विश्वविद्यालय के शिक्षक हैं और अत्यन्त जिम्मेदार नागरिक हैं।‘

ज्ञापन में कहा गया है, ‘हम आशंकित हैं कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष के इस कदम से राजनैतिक प्रतिशोध की गंध आती है। क्योंकि आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, अतः यह कदम स्पष्टतः असमर्थनीय है और निश्चित रूप से एक लंबी कानूनी लड़ाई की ओर ले जा सकता है। सरकार को भले ही इससे कोई अंतर ना पड़ता हो परन्तु यह शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत प्रताड़ित करने वाला होगा। इस संदर्भ को देखते हुए हमें संदेह है कि कोई भी जांच कमेटी जो विश्वविद्यालय द्वारा अपने कदम को तर्कसंगत सिद्ध करने के लिए स्थापित की जाती है या की जाएगी, वह पर्याप्त रूप से पक्षपातरहित और वस्तुनिष्ठ होगी। इससे विश्वविद्यालय और सरकार की विश्वसनीयता और छवि और भी अधिक धूमिल हो जाएगी।‘

शिक्षकों का यह भी कहना है, ‘हमारी मांग है कि शिक्षकों के विरुद्ध FIR तुरंत वापस ली जाए। यद्यपि किसी संस्था की जाँच करना सरकार का विशेषाधिकार है, उसी प्रकार यह भी सरकार का ही दायित्व है कि वह पक्षपातरहित रहे जिससे शिक्षकों के प्रति न्याय होना सुनिश्चित हो। अतः, विश्वविद्यालय केविजिटर, भारत के उपराष्ट्रपति से प्रार्थना है कि वे यथाशीघ्र इस विषय में हस्तक्षेप करें और इस विश्वविद्यालय की महापरिषद के अध्यक्ष को परामर्श दें कि एफआईआर वापस लें और शिक्षकों को प्रताड़ित करना बंद करें।‘

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अब ब्यूटी सेगमेंट में हाथ आजमाएगा टाइम्स ग्रुप, बनाई ये स्ट्रैटेजी

‘टाइम्स समूह’ ने अपने ब्रैंड ‘फेमिना’(Femina) के साथ ब्यूटी सेगमेंट के क्षेत्र में उतरने की घोषणा की है

Last Modified:
Wednesday, 17 April, 2019
TIMES

‘टाइम्स समूह’ ने अपने ब्रैंड ‘फेमिना’(Femina) के साथ ब्यूटी सेगमेंट के क्षेत्र में उतरने की घोषणा की है। इसके लिए समूह की ओर से एक वेंचर ‘टाइम्स लाइफस्टाइल एंटरप्राइज’ (Times Lifestyle Enterprise) भी बनाया गया है, जो ‘फेमिना फ्लॉन्ट’ (Femina Flaunt) को ब्यूटी सैलून सेगमेंट में लॉन्च करेगा। ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ के डायरेक्टर (ब्रैंड एक्सटेंशंस) संदीप दहिया को इस नए वेंचर का सीईओ बनाया गया है। वह अपनी वर्तमान जिम्मेदारी के साथ इस नए वेंचर का काम भी संभालेंगे।

इसके अलावा पूर्व में ‘यूनिलीवर इंडिया’ से जुड़े रहे दिनेश भट्ट को नए वेंचर का सीओओ नियुक्त किया गया है। वह दहिया को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही कंपनी मुंबई में जल्द ही अपना पहला यूनिसेक्स कोको (company-owned, company-operated) स्टूडियो सैलून खोलने की प्लानिंग कर रही है।

इस बारे में ‘टाइम्स ग्रुप’ के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन का कहना है, ‘भविष्य में आगे बढ़ने के अवसरों के लिए समूह नई चीजों में निवेश करने में विश्वास रखता है। इसलिए समूह की ओर से ब्यूटी सेगमेंट में एंट्री की गई है।’ वहीं, ‘दहिया’ का कहना है कि नया वेंचर इस सेगमेंट में ग्रोथ का हाइब्रिड मॉडल फॉलो करेगा। इसके लिए कोको सैलून खोले जाएंगे। पांच साल में ऐसे 100 से ज्यादा सैलून तैयार करने की योजना है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ‘शॉपर्स स्टॉप’ (Shoppers Stop) ने टाइम्स समूह के स्वामित्व में फैशन कैटेगरी के तहत ‘फेमिना फ्लॉन्ट’ ब्रैंड की शुरुआत की थी। इसके बाद समूह की योजना अब सैलून सेगमेंट में उतरने की है।

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यहां जानें, किस-किस को मिला प्रतिष्ठित 'पुलित्जर अवॉर्ड'

श्रेष्ठ पत्रकारिता और कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले पुलित्जर पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है

Last Modified:
Tuesday, 16 April, 2019
pulitzer

श्रेष्ठ पत्रकारिता और कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले पुलित्जर पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इसके तहत ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके परिवार से जुड़ी जानकारियों को खोजकर सामने लाने के लिए ‘पुलित्जर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।  

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को ट्रम्प परिवार के वित्त संबंधी मामलों में खुलासे के लिए पुरस्कार मिला है, जिसमें उसने ट्रम्प परिवार के खुद साम्राज्य खड़ा करने के दावों को खारिज किया था और एक ऐसे व्यापार साम्राज्य का खुलासा किया जो टैक्स संबंधी गड़बड़ी कर रहा है।

‘पुलित्जर पुरस्कार बोर्ड’ ने न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में यह जानकारी दी। वहीं ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को ट्रम्प के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान दो महिलाओं को गुप्त रूप से पैसे का भुगतान करने के मामले का खुलासा करने के लिए पुरस्कार मिला है। इनके अलावा ‘साउथ फ्लोरिडा सन-सेंटिनल’, ‘पिट्सबर्ग पोस्ट-गजट’, ‘एसोसिएटेड प्रेस’, ‘रॉयटर्स’ को भी अलग-अलग खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

 2019 के पुलित्जर अवॉर्ड की पूरी सूची आप निम्न लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं  

https://www.pulitzer.org/prize-winners-by-year  

गौरतलब है कि ‘पुलित्जर पुरस्कार’ अमेरिका का एक प्रमुख पुरस्कार है जो समाचार पत्रों, पत्रकारिता, साहित्य आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जाता है।

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पत्रकार के परिवार पर टूटा बदमाशों का कहर, किया ये हाल

देश भर में मीडिया कर्मियों पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं

Last Modified:
Tuesday, 16 April, 2019
ATTACK

देश भर में मीडिया कर्मियों पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। नया मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का है, जहां पर कुछ बदमाशों ने मीडियाकर्मी के घर में घुसकर तलवार से हमला कर दिया। इस हमले में रिपोर्टर समेत उसके पिता और भाई को गंभीर चोटें आई है।

ये घटना रायपुर के गोकुल नगर की है। जहां एक लोकल रिपोर्टर श्रीकांत के घर देर रात को 4-5 बदमाश घुस आए और तलवार से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। रिपोर्टर के अलावा हमलावरों ने उनके पिता और भाई को भी बुरी तरह से घायल कर दिया। फिलहाल सभी का इलाज जारी है। इस घटना को लेकर समाज के लोगों में काफी आक्रोश है। यादव(ठेठवार) समाज के लोगों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग को लेकर आगे की रणनीति बनाने के लिए बैठक भी की। लोगों का कहना था कि गोकुल नगर के प्रेम गौली और उसके साथियों द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया। इसके बावजूद मुख्य आरोपी प्रेम गौली पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।

मीडियाकर्मियों पर हमला कोई नयी बात नहीं है। इससे पहले भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं द्वारा एक रिपोर्टर के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ में पत्रकारों ने आंदोलन भी किया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सली हमले में ‘दूरदर्शन’ के कैमरामैन की मौत भी हो गई थी।

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पुनीत कुमार कनोजिया ने बनाया रिकॉर्ड, इस प्रतिष्ठित किताब में दर्ज हुआ नाम

दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में रहने वाले यंग एंड डायनेमिक प्रोफेशनल पुनीत कुमार कनोजिया ने एक खास उपलब्धि हासिल की है

Last Modified:
Monday, 15 April, 2019
PUNEET

दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में रहने वाले यंग एंड डायनेमिक प्रोफेशनल पुनीत कुमार कनोजिया ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ ने पुनीत कुमार कनोजिया का नाम यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट के रूप में दर्ज किया है। गौरतलब है कि साहसिक, सांस्कृतिक और कौशल सहित विभिन्न स्तरों पर कई कीर्तिमानों को दर्ज करने वाली यह पहली किताब है, जो हिंदी में लिखी गयी है।

यह किताब भारत सरकार द्वारा पंजीकृत है तथा एशिया बुक आफ रिकार्ड्स से संबद्ध है, जिसमें रिकार्ड्स संकलन के लिए इंटरनेशनल प्रोटोकाल्स आफ रिकार्ड्स (आईपीआरएस) का पालन किया जाता है। यही वजह है कि एक युवा एवं होनहार पेशेवर होने के नाते पुनीत कुमार कनोजिया की इस उपलब्धि का महत्व और भी बढ़ जाता है। बताया जाता है कि पुनीत कुमार कनोजिया के लिए इस मुकाम तक पहुंचना कोई आसान कार्य नहीं था। इस दौरान उनके जीवन में कई मौके आये, जब उन्हें कई तरह की कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इसके बावजूद पुनीत ने हर बार अपनी सूझबूझ और धैर्य से हर चुनौती का मुकाबला किया।

दिल्ली में एक बेहद साधारण परिवार में 3 फरवरी 1991 को जन्मे पुनीत का बचपन तमाम संघर्षों के दौर से गुजरा। बावजूद इसके उन्होंने कभी मुसीबतों के आगे घुटने नहीं टेके। फिर बात चाहे सम्मानजनक रूप से शिक्षा ग्रहण करने की हो या फिर अपने पक्के इरादों के साथ पीआर और मीडिया जैसे पेशेवर क्षेत्रों में कदम रखने की हो। शुरुआत में बेहद चकाचौंध और ग्लैमर से भरपूर यह क्षेत्र उनके सामने कई तरह की चुनौतियां पेश करता रहा। कभी रचनात्मकता के स्तर पर तो कभी तमाम चीजों के प्रबंधन के स्तर पर, लेकिन उन्होंने कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया और न ही कभी किसी काम को छोटा समझा, बल्कि अपने क्षेत्र की हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज को पूरा मन लगाकर सीखा। यही वजह है कि कि वह धीरे-धीरे अपनी खुद की कंपनी स्थापित करने में कामयाब रहे।

आज पुनीत कुमार कनोजिया साक्षर मीडिया साल्यूशंस एंड कंसल्टेंट प्रा. लि. और डेल्टा न्यूज (समाचार पत्र) के संस्थापक एवं निदेशक हैं। बकौल पुनीत, ‘पीआर और मीडिया बेहद अलग किस्म के पेशेवर क्षेत्र हैं, जिसमें आप अपने क्लाइंट के प्रति पूरे समर्पण भाव के साथ कार्य करते हैं। यह एक चौबीसों घंटों व्यस्त रहने वाला क्षेत्र है, क्योंकि खबरें किसी के लिए रुकती नहीं हैं और आज के दौर में मीडिया का काम है सबसे पहले लोगों को सच्ची और सटीक खबर देना है। इसलिए इस जिम्मेदारी ने मुझे कभी एक पल के लिए भी चैन से बैठने ही नहीं दिया। और शायद यही वजह है कि आज मुझे यह सम्मान बड़े गर्व की अनुभूति दे रहा है।‘

‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स द्वारा वर्ष 2020 के संस्करण के लिए यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट के रूप में पंजीकृत किए जाने और प्रोत्साहन एवं प्रशंसा के रूप में प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाने पर पुनीत कहते हैं, ‘यंग एंड प्रोमिसिंग पीआर डायरेक्टर एंड मीडिया कंसल्टेंट, टाइटल के तहत इस किताब में स्थान पाना वाकई रोमाचंकारी है, जिसके लिए मैं इस पुस्तक के संपादकीय एवं प्रबंधन विभाग का शुक्रिया अदा करता हूं।’ वह कहते हैं, ‘इस तरह के सम्मान से किसी भी युवा का उत्साहवर्धन होता है। आपको लगता है कि सोसाइटी आपके कार्यों को देख रही है, सराहना कर रही है। ऐसे में आपके अपने देश के प्रति और समाज के प्रति दायित्व बढ़ जाते हैं, जिन्हें बेहद जिम्मेदारी के साथ पूरा करना आपका कर्तव्य हो जाता है। इसलिए जाहिर तौर पर ऐसी प्रतिष्ठित किताब में स्थान पाना मुझे गौरवांन्वित कर रहा है।’

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Republic TV के लिए कैसे खास रहे हैं पिछले 100 हफ्ते, जानें यहां

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी के चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के लिए पिछले 100 हफ्ते काफी खास रहे हैं

Last Modified:
Friday, 12 April, 2019
REPUBLIC

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) देश में लगातार 100 हफ्ते तक नंबर वन रहने वाला अंग्रेजी न्यूज चैनल बन गया है। चैनल के लिए खास बात यह भी है कि छह मई 2017 को शुरुआत के बाद से ही इसकी व्युअरशिप लगातार नंबर वन रही है। ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग से पूर्व और लॉन्चिंग के बाद के चार हफ्तों की तुलना करें तो अंग्रेजी न्यूज जॉनर में इसने व्युअरशिप में 79 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। सप्ताह दर सप्ताह आगे बढ़ते हुए चैनल ने यह मुकाम हासिल किया है।     

‘रिपब्लिक टीवी’ ने 49 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ अपनी शुरुआत की थी, यह टीवी की दुनिया में अभूतपूर्व था। इसके बाद दिन में 35 प्रतिशत और सुपर प्राइम टाइम में 44 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ यह नंबर वन की पोजीशन पर बना हुआ है। इसके अलावा इस जॉनर में दूसरे चैनलों के मुकाबले व्युअर्स ने इस चैनल पर 44 प्रतिशत ज्यादा समय बिताया है। यही नहीं, ‘रिपब्लिक टीवी’ चैनल की व्युअरशिप अंग्रेजी बिजनेस न्यूज जॉनर की कुल व्युअरशिप से भी ज्यादा है।    

‘रिपब्लिक टीवी’ ने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले अपने सिद्धांतों से कभी भी किनारा नहीं किया है। फिर चाहे मंदसौर में हुई हिंसा के लिए जवाब मांगने की बात हो अथवा उन्नाव बलात्कार के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ने की बात हो। चाहे सबरीमाला में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई की बात हो या ट्रिपल तलाक मामले में अधिकारों के लिए लड़ाई का मामला हो, यह चैनल हमेश लोगों के लिए आगे खड़ा रहा है।  

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वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ मिश्र की याद में जुटेंगे दिग्गज, ये है कार्यक्रम

वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल हेराल्ड के संपादक रहे नीलाभ मिश्र की याद में दिल्ली में 12 अप्रैल को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 11 April, 2019
Neelabh

वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल हेराल्ड के संपादक रहे नीलाभ मिश्र की याद में दिल्ली के डॉ.राजेंद्र प्रसाद मार्ग स्थित जवाहर भवन में 12 अप्रैल की शाम साढ़े पांच बजे से दूसरे नीलाभ मिश्र जनसंवाद (Public Dialogue) का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध विचारक और लेखक डॉ. प्रताप भानु मेहता और लेखक एवं कॉलमिस्ट अपूर्वानंद ‘On how to Make Choices in the Age of Populism, New Ideas of Citizenship and Neo-Nationalism’ विषय पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि पिछले साल नीलाभ मिश्र का 57 साल की उम्र में निधन हो गया था। लंबे वक्त से नॉन एल्कोहॉलिक लीवर सिरॉसिस से जूझ रहे नीलाभ मिश्र ने 24 फरवरी 2018 को चेन्नै के अस्पताल में आखिरी सांस ली थी।

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