‘प्रसार भारती’ को इस तरह ऊंचाइयों तक ले जाएंगे नए सीईओ, गिनाई प्राथमिकताएं

देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ के नए सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने...

Last Modified:
Wednesday, 14 June, 2017
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी प्रसार भारतीके नए सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने पदभार ग्रहण करते ही अपनी प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। तकनीकी विशेषज्ञ वेम्पती इससे पहले प्रसार भारती बोर्ड के सदस्य रहे हैं और इस पद पर बैठने वाले पहले गैर आईएस हैं।


द इकनॉमिक टाइम्‍समें छपे एक इंटरव्‍यू के अनुसार, यह पूछे जाने पर कि प्रसार भारती को पिछले कुछ समय में काफी उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है। वे प्राइवेट सेक्‍टर से आए हैं तो क्‍या ब्‍यूरोक्रेसी और रेड टैपिज्‍म डीडीकी ग्रोथ में आडे नहीं आएंगे, वेम्‍पती का कहना है कि वह इसे चुनौती नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखते हैं।


उन्‍होंने बताया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद डीडी ने डीटीएच प्‍लेटफार्म तैयार करने में काफी बेहतर काम किया है, जिसने फ्री टू एयर (एफटीए) के द्वारा देश में टेलिविजन देखने का अंदाज बदल दिया है। बार्क की रेटिंग में भी टॉप टेन में कुछ एफटीए चैनल भी शामिल हैं और उनकी व्‍युअरशिप का बहुत बडा हिस्‍सा डीडी फ्री डिश की देन है।


न्‍यूज के प्रसारण में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) का एकाधिकार होने और प्राइवेट रेडियो चैनलों को न्‍यूज के प्रसारण संबंधी मामले में शशि शेखर का कहना है कि यह नीतिगत मसला है और इसमें सरकार का विशेषाधिकार है। उन्‍होंने इस विषय पर कुछ भी टिप्‍पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि यह भी कहा कि हमें अनुदान के लिए एकाधिकार का लाभ नहीं लेना चाहिए।


वेम्‍पती का कहना है कि उनके लिए टैलेंट मैनेजमेंट का मुद्दा प्राथमिकता में है। इसके लिए सभी शेयरहोल्‍डरों को शामिल कर विभिन्‍न विभागों के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। वेम्‍पती का कहना है कि इसके लिए भरोसेमंद वातावरण तैयार करने की जरूरत है और नजरिये में भी बदलाव लाना होगा। डीडी और एआईआर से जुड़े विवादों के बारे में वेम्‍पती का मानना है कि पूर्व में कुछ घटनाओं को छोडकर दोनों का इतिहास काफी बेहतर रहा है। आज भी लोग इन्‍हें ज्‍यादा भरोसेमंद चैनल मानते हैं। 


डीडी स्‍पोर्ट्स के बारे में  वेम्‍पती का कहना है कि इसमें बहुत पोटेंशियल है और इस दिशा में बहुत कुछ काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि टेक्‍नोलॉजी फील्‍ड के आने से उन्‍हें काफी फायदा मिलेगा क्‍योंकि हमें जीवन में हर क्षेत्र में टेक्‍नोलॉजी की जरूरत होती है। इसके अलावा हम पब्लिक इं‍टरेस्‍ट कंटेंट के लिए एक अलग तरह का मार्केट तैयार कर रहे हैं जो ऐंटरटेनिंग होने के साथ ही लोगों को इससे जोड़े रखेगा। हमें डीडी और एआईआर ब्रांडों की पहचान करने और उनके साथ गहराई से जुड़ने के लिए हमारे युवा दर्शकों की जरूरत है ताकि वे क्रिकेट और अन्य विशेष कार्यक्रमों के लिए हमारे पास वापस आ सकें।


डीडी में प्रोग्रामिंग की कमीशनिंग और फीचर फिल्‍म्‍स के स्‍लॉट से जुडे विवादों के बारे में वेम्‍पती का कहना है कि इसके लिए पहले से ही कवायद चल रही है कि कंटेंट को कैसे हासिल किया जाए। हमें अपने पार्टनर के साथ दोबारा से विश्‍वास बढाना होगा और बिजनेस को सुधारने पर फोकस करना होगा। एक बार यह हो जाने पर इस बारे में गलत धारणा भी खत्‍म हो जाएगी।


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अमिश देवगन के सवालों पर अमित शाह ने यूं खोले मन के ‘राज’

सवाल-जवाब का सिलसिला अमित शाह की चुनौतियों से शुरू हुआ और फिर घूमते हुए महाराष्ट्र पर आकर रुक गया

Last Modified:
Monday, 02 December, 2019
Amish Devgan Amit shah

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम के बाद हर कोई यह जानना चाह रहा है कि भाजपा के दिल में 30 साल पुराना रिश्ता तोड़ने वाली शिवसेना के लिए आखिर क्या है? क्या पार्टी भविष्य में शिवसेना के साथ चुनाव लड़ेगी या फिर दोस्ती अब पूरी तरह से दुश्मनी में तब्दील हो चुकी है? लोगों की इस जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास किया है ‘न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने।

झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर चैनल के शो ‘एजेंडा झारखंड’ में बतौर अतिथि उपस्थित गृहमंत्री अमित शाह से अमिश देवगन ने कई सवाल पूछे, जिनमें महाराष्ट्र की बात भी शामिल है। सवाल-जवाब का सिलसिला अमित शाह की चुनौतियों से शुरू हुआ और फिर घूमते हुए महाराष्ट्र पर आकर रुक गया। मौजूदा वक्त में इस विषय से जुड़े सवालों के बिना कोई इंटरव्यू पूरा नहीं हो सकता। हालांकि, ये बात अलग है कि भाजपा नेता इस पर ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहते।

जब अमिश देवगन ने शाह से पूछा, ‘क्या आपको लगता है कि शिवसेना ने यह तय कर लिया था कि वो चुनाव के बाद भाजपा के साथ सरकार नहीं बनाएगी?’ तो शाह ने शिवसेना पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए बस इतना कहा, ‘जो तय नहीं था उसकी मांग की गई। इसलिए हमें कदम वापस खींचने पड़े।‘

महाराष्ट्र के संदर्भ में अजित पवार एपिसोड भी भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है। क्योंकि कल तक भाजपा अजित पर निशाना लगाती रहती थी और सत्ता की आस में उन्हीं से हाथ मिला लिया। जायज है कि इससे जुड़े सवाल पार्टी नेताओं को विचलित कर सकते हैं, लेकिन इसकी परवाह किये बिना अमिश ने अमित शाह पर सवाल दागे। उन्होंने पूछा, ‘अजित पवार पर आपने और देवेन्द्र फडणवीस ने चुनावी रैलियों के दौरान जमकर आरोप लगाये थे, मगर आपने ही उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया? ’ इसका शाह ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने बीच का रास्ता निकालते हुए इतना जरूर कहा कि यदि सरकार कायम रहती तो आरोपों की जांच में कोई समझौता नहीं किया जाता।

इस इंटरव्यू के दौरान कई ऐसे मौके भी आये, जब अमित शाह के चेहरे पर सवालों की चुभन का दर्द साफ नजर आया। मसलन, अमिश ने राज्यों का हवाला देते हुए पूछना चाहा कि मई 2017 से नवंबर 2019 तक काफी बदलाव आया है। पहले 70 प्रतिशत देश की आबादी पर भाजपा का शासन था, अब 40 प्रतिशत राज्यों पर शासन है...लेकिन शाह ने पूरा सवाल सुने बिना ही अपनी बात शुरू कर दी। उन्होंने उल्टा अमिश को गलत ठहराते हुए कहा, ‘ठहर जाओ, मध्यप्रदेश और राजस्थान हारने के साथ ही यह चित्र बदल चुका है। इसके बाद 2019 का जनादेश आया, आप थोड़ा डाटा सही रखो, किसी के वॉट्सऐप पर मत चले जाओ। कोई वॉट्सऐप करता है उसे तुरंत उठा देते हो।’ अमिश सवाल समझाते रहे, लेकिन शाह को जो कुछ समझ आया उसी पर कायम रहे।     

इसी तरह जब देवगन ने महाराष्ट्र के संदर्भ में एक और सवाल दागा तो भी अमित शाह सीधा जवाब देने से बचते रहे। अमिश देवगन का सवाल था, ‘30 साल पुराना गठबंधन टूटने का आपको दुःख है? ’ तो भाजपा नेता से जवाब मिला, ‘आप गलत सवाल पूछ रहे हो। मैंने गठबंधन नहीं तोड़ा है, उन्होंने तोड़ा है।’ इसके अलावा राम मंदिर सहित कई विषयों पर सवाल-जवाब हुए। 

बता दें कि अमिश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ और ‘जी मीडिया’ जैसे जाने-माने मीडिया समूहों में काम कर चुके हैं। मई 2014 से नवंबर 2015 तक वे ‘जी बिजनेस’ चैनल के चीफ एडिटर रहे। इससे पहले ‘जी बिजनेस’ में बतौर डिप्टी एडिटर, एडिटर (आउटपुट0 और एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) के तौर पर काम किया। ‘जी बिजनेस’ में रहते हुए बिजनेस चैनल के नंबर-1 डिबेट शो ‘बिग स्टोरी बिग डिबेट’ को नए मुकाम तक पहुंचाया। इसके अलावा ‘बिग एनकाउंटर’ नाम के इंटरव्यू शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई शीर्ष हस्तियों का इंटरव्यू किया। अमिश अपने अब तक के करियर में कोयला घोटाला, ओडिशा का खनन घोटाला और हवाला कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े कई बड़े खुलासे कर चुके हैं।

आप पूरा इंटरव्यू यहां देख सकते हैः

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मीडिया घरानों की फंडिंग पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बोली ये बड़ी बात

‘टाइम्स नाउ’ की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार के साथ एक इंटरव्यू के दौरान तमाम मुद्दों पर रखे अपने विचार

Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Ravi Shankar

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को गुस्सा क्यों आता है? यदि आप इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो आपको ‘टाइम्स नाउ’ देखना होगा। दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार और चैनल की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार ने हाल ही में रविशंकर प्रसाद का इंटरव्यू लिया था, जिसमें कई मौकों पर वह नाराज हो गए और आखिरकार नविका को खुद ही यह पूछना पड़ा कि रविशंकर प्रसाद को गुस्सा क्यों आता है? वैसे, मंत्री महोदय के गुस्से की वजह कुछ और नहीं, बल्कि तीखे सवाल थे। नविका ने उनसे मीडिया रेगुलेशन, दम तोड़ते टेलिकॉम सेक्टर से लेकर राम मंदिर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सवाल पूछे। रविशंकर आमतौर पर शांत मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन नविका के सवालों की तपिश इतनी ज्यादा था कि ‘शांत’ रविशंकर भी क्रोधित हो उठे। इतने क्रोधित कि उन्होंने मीडिया घरानों की फंडिंग को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दे डाली। 

मीडिया को रेगुलेट करने को लेकर सरकार अक्सर सवालों में उलझती रहती है। ऐसे में जब कानून मंत्री से सवाल दागने का मौका मिला तो नविका कुमार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से जानना चाहा कि मीडिया पर उंगली उठानी वालीं सियासी पार्टियां अपने चंदे की जानकारी सावर्जनिक करने में कतराती क्यों हैं? इस विषय पर नविका और रविशंकर के बीच कुछ देर तक नोकझोंक भी हुई। नविका का सवाल प्रसाद को पसंद नहीं आया और उनके जवाब से नविका संतुष्ट नहीं हुईं। मंत्री महोदय ने तो एक तरह से मीडिया को ही आरटीआई के दायरे में लाने की चेतावनी दे डाली।

दरअसल, नविका ने पूछा, ‘आरटीआई का मुद्दा बेहद सीधा है, लोग यह जानना चाहते हैं कि सियासी पार्टियों को चंदा कहां से आता है और कौन देता है’? इस पर प्रसाद ने कहा, ‘जब आप चुनाव लड़ते हैं तो आपको अपने बारे में पूरी जानकारी देनी होती है।’ जायज है यह सवाल का जवाब नहीं था, लिहाजा नविका ने कहा, ‘मैं किसी व्यक्ति की नहीं पार्टी की बात कर रही हूं, मोटी बात तो यही है कि पैसा का मामला आप शेयर नहीं करना चाहते।’ इस पर रविशंकर का मिजाज एकदम बदल गया। उन्होंने बेहद शांत, लेकिन तीखे स्वभाव में जवाब देते हुए कहा, ‘मैं सहमति की बात कर रहा हूं। शायद ये भी समय आएगा कि बड़े मीडिया हाउस की फंडिंग कैसे होती है, इसे भी आरटीआई के दायरे में लाया जाए, आप भी पब्लिक अथॉरिटी हैं।’

गौरतलब है कि कुछ मीडिया संस्थान सरकार के रडार पर हैं, इनकी फंडिंग को लेकर पहले भी कई बार सवाल खड़े किये जा चुके हैं। लिहाजा, कानून मंत्री की इस अप्रत्यक्ष चेतावनी को संकेत के रूप में देखा जा सकता है कि सरकार आने वाले वक्त में मीडिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है। 

इस इंटरव्यू में वॉट्सऐप जासूसी कांड पर भी बात हुई। मामला उजागर होने के बाद संभवत: यह पहला मौका है, जब किसी ने सरकार से इस विषय पर सवाल जवाब किये हैं। हालांकि, ये अलग बात है कि इस विषय पर बात करना रविशंकर को पसंद नहीं आया। जैसे ही नविका ने अपना सवाल रखा, मंत्री महोदय उखड़ गए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि हमारी सरकार आजादी में विश्वास रखती है, इस तरह के सवाल न पूछे जाएं, यह सही नहीं है। नविका, प्रसाद के जवाबों में सवाल खोजकर पूछती रहीं और प्रसाद कुछ भी कहने से इनकार करते रहे और आखिरकार नविका को अपना सिर पकड़ते हुए कहना पड़ा, ‘रविशंकर प्रसाद को आखिर गुस्सा क्यों आता है’?

प्रसाद अयोध्या मसले पर भी नविका कुमार के सवालों से नाराज दिखे। नविका ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया की बात करते हुए कहा, ‘उन्हें उस 67 एकड़ में ही पांच एकड़ चाहिए।’ जिसका जवाब था, ‘ऐसा है ये चर्चा सरकार से होगी, टाइम्स नाउ के चैनल पर नविका कुमार से नहीं होगी’। जब नविका ने मीडिया की जिम्मेदारी का जिक्र किया तो प्रसाद ने अपने शब्दों को कुछ नरम करते हुए अलग अंदाज में अपनी बात कही।

इसके अलावा, नविका कुमार ने एक ऐसा सवाल भी केंद्रीय मंत्री से पूछा, जिसका जवाब शायद सभी कांग्रेसी या कांग्रेस समर्थक सुनना चाहेंगे। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी पर प्रहार करना भाजपा का सबसे अच्छा टाइम पास लगता है? हालांकि, ये सवाल भी रविशंकर प्रसाद को पसंद नहीं आया और उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे इंटरव्यू के दौरान रविशंकर प्रसाद असहज दिखाई दिए। नविका कुमार के तीखे सवालों ने सहज होने नहीं दिया।

इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं:     

              

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अरनब गोस्वामी का पंजा नहीं झुका पाए बाबा रामदेव

अरनब गोस्वामी के हिंदी चैनल 'रिपब्लिक भारत' पर बाबा रामदेव पहली बार नजर आए। आधा-एक घंटा नहीं, बल्कि पूरे डेढ़ घंटे तक बाबा रामदेव का इंटरव्यू करते रहे अरनब गोस्वामी

Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Arnab goswami Baba Ramdev

हिंदी के न्यूज चैनल्स ने सालों तक टीआरपी के लिए बाबा रामदेव के प्रोग्राम्स, उनके इंटरव्यूज और बाद में उनके विज्ञापनों से खूब लाभ कमाया है, लेकिन अरनब गोस्वामी के हिंदी चैनल 'रिपब्लिक भारत' पर बाबा रामदेव पहली बार नजर आए और वह भी तब, जब राम मंदिर पर फैसले के बाद एक डिबेट में बाबा रामदेव के बयान की क्लिप का जादू यूट्यूब पर अरनब गोस्वामी ने देखा। बाबा रामदेव ने भी अरनब गोस्वामी की ताकत का उस वक्त लोहा मान लिया, जब स्टूडियो में उनका पंजा नहीं गिरा पाए।

दरअसल, ओवैसी के बयान के बाद ‘रिपब्लिक भारत’ पर अरनब गोस्वामी ने एक डिबेट आयोजित की। उसमें थोड़ी देर के लिए बाबा रामदेव को भी लाइव लिया गया। फिर बाबा रामदेव के बयान की वह क्लिप अलग से ‘रिपब्लिक भारत’ के यूट्यूब चैनल पर डाली गई। 24 घंटों के अंदर उस पर 3.5 मिलियन व्यूज‌ आ गए। उसको देख कर पहली बार अरनब गोस्वामी को बाबा रामदेव की ताकत का अहसास हुआ। गोस्वामी ने अगले दिन ही बाबा रामदेव को फोन किया और इंटरव्यू के लिए अपने स्टूडियो में इनवाइट किया। फिर आधा-एक घंटा नहीं, बल्कि पूरे डेढ़ घंटे तक बाबा रामदेव का इंटरव्यू करते रहे अर्नब गोस्वामी।

बाबा रामदेव को स्टूडियो में बुलाने की वजह यानी 3.5 मिलियन व्यूज वाला वाकया खुद अरनब गोस्वामी ने शो के शुरू में बताया। बाबा रामदेव ने भी स्टूडियो में आकर, स्टूडियो को देखकर अरनब गोस्वामी की जमकर तारीफ की। बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के तमाम स्टूडियोज देखे हैं, बीबीसी के कई देशों के स्टूडियो में वह गए हैं, ‘रिपब्लिक भारत’ का यह स्टूडियो भी इंटरनेशनल लेवल का है। बाबा रामदेव का यह भी कहना था, ‘जिस तरह से मैं किसान का बेटा होकर इतनी ऊंचाइयों तक पहुंच गया हूं, उसी तरह कभी आम पत्रकार की तरह करियर शुरू करने वाले अरनब गोस्वामी इतने बड़े मीडिया ग्रुप के मालिक बन गए।’अरनब गोस्वामी ने बताया कि कैसे वह (बाबा रामदेव) रिपब्लिक की समिट में मुंबई आए थे और जब हमने यह बताया था कि हिंदी चैनल भी ला रहे हैं तो बाबा रामदेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था और उसी आशीर्वाद की बदौलत यह चैनल खुल पाया है। इसके बाद इंटरव्यू शुरू हुआ। बाबा रामदेव ने राम मंदिर से जुड़ीं अपनी यादों को शेयर किया। इस दौरान तमाम राजनीतिक मुद्दों के साथ बाबा रामदेव के कामों पर चर्चा हुई, योगा पर चर्चा हुई।

आखिर में बाबा रामदेव की तारीफ करते हुए अरनब गोस्वामी ने कहा, ‘सुना है कि आपकी बॉडी काफी फ्लैक्सिबल है, जो आप कर सकते हैं, वह कोई नहीं कर सकता तो आप कुछ करके हमें दिखाइए, कुछ योगा के पोज। तब बाबा रामदेव ने पहले हाथों पर चलकर दिखाया, फिर शीर्षासन करके दिखाया। बाबा रामदेव का फोकस था कि अरनब गोस्वामी भी उनके साथ योगा के कुछ आसन करें, लेकिन गोस्वामी भी लगातार बचने की कोशिश में लगे रहे। उनका फोकस था कि ऑडियो पूरा आना चाहिए, इसलिए खुद माइक हाथ उठाकर बाबा रामदेव के पास लगा दिया। इधर बाबा की कोशिश रही कि अरनब गोस्वामी एक-दो आसन कर लें। फाइनली बाबा रामदेव ने अरनब को पहले सूर्य नमस्कार करवाया।

उसके बाद बाबा रामदेव ने अरनब को अपने साथ दंड कसरत करवाने की कोशिश की, एक दंड लगाने के बाद अरनब गोस्वामी उठ गए। उसके बाद बाबा ने अपनी ताकत दिखाई और अरनब गोस्वामी को लाइव कैमरों के सामने अपनी गोद में उठा लिया। सबसे आखिर में बाबा ने अरनब गोस्वामी से पंजा लड़ाया।

अब ये पंजा लड़ाने का ‘मैच’ फिक्स था या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन बाबा रामदेव ने जैसे ही अरनब गोस्वामी से पंजा लड़ाया, फौरन बोले कि अरनब के हाथों में बहुत ताकत है। दोबारा बोले कि बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। यह भी बोले की अरनब गोस्वामी से कोई पंगा लेने की कोशिश मत करना। इधर, गोस्वामी ने भी कहा कि बाबा चीटिंग मत करिए, लेकिन बाबा रामदेव उनका पंजा नहीं गिरा पाए। लेकिन जितने भी दर्शक अब तक अरनब गोस्वामी को चीखते चिल्लाते, गुस्सा करते टीवी पर देखते आए हैं, उनके लिए ये शो इसलिए अलग होगा, क्यों वह पहली बार आपको इतना हंसते हुए दिखेंगे, वह भी ठहाके मारकर। आप यह पूरा शो यहां देख सकते हैं।

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PTI एम्पलॉइज से की सूचना प्रसारण मंत्री ने मुलाकात, कहीं ये बातें

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ के मुख्यालय में पत्रकारों के साथ चर्चा के दौरान मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े तमाम मुद्दों पर रखी अपनी बात

Last Modified:
Friday, 04 October, 2019
Prakash Javadekar

सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि पेड न्यूज (Paid News) के मुकाबले फेक न्यूज (Fake News) ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार और मीडिया को मिलकर इससे लड़ने की जरूरत है। देश की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) के मुख्यालय में गुरुवार को एजेंसी के पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी, जिससे मीडिया की आजादी कम हो।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और फिल्मों के बारे में कुछ रेगुलेशंस हैं, उसी तरह ‘ओवर द टॉप’ (over-the-top) प्लेटफॉर्म्स के लिए भी कुछ रेगुलेशंस होने चाहिए। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स में न्यूज पोर्टल्स के साथ ही ‘वेबस्ट्रीमिंग साइट’ जैसे हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम विडियो आते हैं।

जावड़ेकर का कहना था,‘मैंने इस बारे में सुझाव मांगे है कि कैसे इस तरह की स्थिति से निपटा जा सकता है, क्योंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नियमित रूप से फिल्में आ रही हैं, इनमें अच्छी-बुरी सभी तरह की फिल्में शामिल हैं। इसलिए हमें देखना होगा कि इससे कैसे निपटा जाए, कौन मॉनिटरिंग करेंगा और कौन इसे रेगुलेट करेगा।’ सूचना-प्रसारण मंत्री का कहना था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए कोई प्रामाणिक संस्था नहीं है और न्यूज पोर्टल्स के साथ भी यही स्थिति है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। प्रिंट मीडिया पर नजर रखने के लिए ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ है। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) न्यूज चैनल्स की मॉनिटरिंग करती है। इसी तरह ‘एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया’ ( Advertising Standards Council of India) के पास विज्ञापनों की और ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ (CBFC) के पास फिल्मों की जवाबदेही है। लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। देश में न्यूज पोर्ट्ल्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और इनमें से कई के ऑनलाइन सबस्क्राइबर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इस दौरान फेक न्यूज का मुद्दा उठने पर उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यह पेड न्यूज से ज्यादा खतरनाक है। जावड़ेकर ने कहा, ‘फेक न्यूज को हमें मिलकर रोकना होगा। यह सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि सभी को मिलकर फेक न्यूज को रोकना होगा। जो लोग न्यूज के बिजनेस में हैं, उन्हें फेक न्यूज से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।’ 

उन्होंने कहा, ‘कई मीडिया चैनल वायरल सच जैसे कार्यक्रमों के जरिये इस खतरे से निपट रहे हैं और सच को दिखा रहे हैं। प्रिंट मीडिया को भी कुछ इसी तरह के कॉलम्स शुरू करने चाहिए अथवा कुछ इसी तरह के कदम उठाने चाहिए, जिससे फेक न्यूज के बारे में सच को सामने लाया जा सके।’ सरकार ने भी कश्मीर के बारे में फेक न्यूज से निपटने के लिए दूरदर्शन न्यूज पर कश्मीर का सच नाम से कार्यक्रम चलाया है।’

जावड़ेकर का यह भी कहना था, पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि बच्चे उठाने को लेकर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज अथवा अफवाहों के चलते मॉब लिंचिंग में 20-30 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा, कि हम राज्य सरकारों से भी फेक न्यूज से निपटने के लिए कह रहे हैं। वहीं, पेड न्यूज को लेकर उन्होंने कहा कि यह अनैतिक है और मीडिया को इस पर लगाम लगानी होगी।   

‘न्यूज प्रिंट’ यानी अखबारी कागज के आयात पर लगी 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को वापस लेने की प्रिंट मीडिया की मांग के बारे में जावड़ेकर ने कहा कि सभी पक्षों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और इसे जल्दी सुलझा लिया जाएगा।

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इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी से खास बातचीत

डिवाइस और प्लेटफॉर्म कोई भी हो, जब भी न्यूज की बात आती है, लोग ‘आजतक’ पर भरोसा करते हैं

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2019
Kalli Purie

आज के दौर में जहां एक तरफ अधिकांश कंटेंट प्लेयर्स नंबरों की दौड़ में आगे निकलने के प्रयास में लगे हैं, आजतक ने डिजिटल की पहुंच के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही यह यूट्यूब पर 20 मिलियन सबस्क्राइबर्स वाला पहला न्यूज चैनल बन गया है। ‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी (Kalli Purie) ने आजतक की इस उपलब्धि और डिजिटल मीडियम पर ग्रुप के फोकस के बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:   

‘आजतक’ ने यूट्यूब पर 20 मिलियन सबस्क्राबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। डिजिटल मीडियम में यह संख्या बहुत बड़ी है। आखिर आपने कैसे ये सब किया?

यूट्यूब पर 20 मिलियन सबस्क्राबर्स के आंकड़े को पार करना लगातार इस दिशा में प्रयास करने का नतीजा है। इसके साथ ही ‘आजतक’ के लिए हमने जो फ्यूचर स्ट्रैटजी बनाई है, यह उसका परिणाम है। यूट्यूब पर दमदार प्रदर्शन के अलावा ‘आजतक’ सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे-फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर भी आगे बना हुआ है। यही नहीं, डेस्कटॉप के साथ ही इंटरनेट और ऐप्स पर भी यह देश का सबसे बड़ा न्यूज ब्रैंड बना हुआ है। इससे साफ पता चलता है कि डिवाइस और प्लेटफॉर्म कोई भी हो, जब भी न्यूज की बात आती है, लोग ‘आजतक’ पर भरोसा करते हैं। पिछले 11 महीनों में ही आजतक ने 10 मिलियन से बढ़कर 20 मिलियन सबस्क्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।

आप अपने डिजिटल फोकस के बारे में बताएं। डिजिटल पर आप किस तरह की न्यूज ले रहे हैं? इंटरनेट पर आपके विडियो क्या आपकी टीवी क्लिप से लिए जाते हैं या आप अपने विडियो सबस्क्राबर्स के लिए इनका निर्माण अलग से करते हैं? 

इंटरनेट पर हमारे सभी प्रमुख ब्रैंड्स और हमारे 20 मोबाइल फर्स्ट विडियो चैनल्स पर विश्वसनीय न्यूज के चलते हम लोगों की पसंद बने हुए हैं। यही कारण है कि नेशनल न्यूज, इंटरनेशनल न्यूज, रीजनल न्यूज, स्पोर्ट्स न्यूज, एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, क्राइम न्यूज समेत विभिन्न जॉनर में हमें प्राथमिकता दी जाती है। जब तक आपका कंटेंट ऑरिजनल नहीं होगा, तब तक यह संभव नहीं है। हमने ऐसे एक्सक्लूसिव डिजिटल स्टूडियो बनाए हैं, जहां पर हमारे एंकर, ऑडियंस के साथ लाइव चैट करते हैं। हमारे पास कई माइक्रो स्टूडियो भी हैं। इनकी बदौलत हम डिजिटल कंटेंट को मजबूती प्रदान करते हैं।

आजकल युवा वर्ग (खासकर 22 से 37 साल की उम्र के लोग ) अपने स्मार्टफोन पर ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए आप क्या कर रहे हैं ?

‘आजतक’ ऐसा ब्रैंड है, जो सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। हम ऐसे लोगों को सभी जगह अपने साथ जोड़े रखना चाहते हैं, फिर चाहे वो स्मार्टफोन हो अथवा स्मार्ट टीवी, हम इसके लिए तैयार हैं। ऐसे आयु वर्ग के लोगों के लिए ब्रैंड ने सोशल मीडिया पर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है, क्योंकि इन दिनों यह उनका पसंदीदा माध्यम बना हुआ है। लेकिन एक चुनौती ये है कि इस आयु वर्ग के लोग हमेशा विभिन्न डिवाइस और प्लेटफॉर्म्स के बीच घूमते रहते हैं। ऐसे लोगों को अपने साथ बनाए रखने के लिए हमें उनके अनुसार चलना होगा। मेरा मानना है कि नंबर वन होना ही काफी नहीं है। लगातार नए प्राडक्ट्स और नए फॉर्मेट्स के बारे में सोचना पड़ता है। एक साल पहले युवा और कामकाजी वर्ग को न्यूज उपलब्ध कराने के लिए हम (तक वाले यू-ट्यूब चैनल्स) ‘Tak ecosystem’ लेकर आए थे। आज हम इस दिशा में काफी आगे हैं।

इंटरनेट के फ्यूचर की बात करें तो आने वाला समय निःसंदेह विडियो ऑन डिमांड का है। इस बारे में आप क्या कर रहे हैं?

हम देश के नंबर वन विडियो पब्लिशर हैं। हमारे मोबाइल फर्स्ट विडियो प्रॉडक्स्ट्स भी काफी ग्रोथ कर रहे हैं। टॉप 20 न्यू ऐज यूट्यूब चैनल्स में हमारे छह चैनल पहले ही अपना कब्जा जमाए हुए हैं।  

आज के समय में इंटरनेट पर काफी उथलपुथल है और छोटे से लेकर बड़े प्लेयर्स तक न्यूज उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में आप दूसरों से किस तरह अलग हैं?

न्यूज इंडस्ट्री में आज सबसे बड़ी चुनौती इंटरनेट की रफ्तार के बीच विश्वसनीयता को बनाए रखना है। हम अपने ऑडियंस को दोनों का समावेश देते हैं। हमारे पास इंटरनेशनल एक्सपर्ट से प्रशिक्षित फैक्ट चेकिंग डिपार्टमेंट है और यह गलत सूचना अथवा फेक न्यूज को प्रसारित होने से रोकने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है। इसके अलावा हम ‘ready for air’ जैसी कठोर प्रक्रिया का पालन भी करते हैं, जहां पर विभिन्न सोर्सेज से किसी भी न्यूज की सत्यता की पुष्टि की जाती है। इसमें हमें देशभर मैं फैले अपने रिपोर्टर्स से भी काफी फायदा मिलता है, जिनसे हमें घटना के बारे में सटीक जानकारी मिलती है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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कंटेंट क्रिएटर्स के सामने हमेशा रहता है ये बड़ा मुद्दा, बोले अभिजीत सरकार

पॉलिटिकल कंटेंट में दोहराव और नीरसता ज्यादा होती है। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने फ्रेश कंटेंट तलाशना शुरू कर दिया

Last Modified:
Friday, 09 August, 2019
Abhijit Sarkar

तेजी से बदलते दौर में सूचनाओं का प्रवाह इतना ज्यादा हो गया है कि इसमें से अच्छा और अपने मतलब का कंटेंट तलाशना काफी कठिन काम होता जा रहा है। फेक न्यूज के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिसने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। इन सबके बीच मीडिया दिग्गज अभिजीत सरकार ने अपना कंटेंट प्लेटफॉर्म ‘सरकारनामा’ (Sarkarnama) लॉन्च किया है। यह एक ऐसा विडियो फॉर्मेट है, जिसका उद्देश्य कला से लेकर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डालना है।  

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchnage4media) के साथ अभिजीत सरकार ने आज के समय में इस तरह के प्लेटफॉर्म्स की जरूरत और ‘सरकारनामा’ को लेकर अपने विजन के बारे में विस्तार से चर्चा की, पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:  

सरकारनामा की लॉन्चिंग के पीछे क्या वजह है और इसकी प्रेरणा कहां से मिली?

मैं अपने कॉलेज के दिनों से ही थियेटर, रेडियो और टेलिविजन से जुड़ा रहा हूं। मैं एक रेडियो जॉकी, टीवी एंकर भी रहा हूं। लेकिन कॉरपोरेट और स्पोर्ट्स सेक्टर्स में अपनी पेशेगत प्रतिबद्धता के कारण मुझे वह काम करने का समय नहीं मिल पा रहा था, जो मेरे दिल के काफी करीब है। ये चीजें हमेशा मेरे दिल और दिमाग में चलती रहती थीं। इसलिए वर्ष 2017 में मैंने इस बारे में आखिरी फैसला कर लिया और इस क्षेत्र में उतर गया। हमने अपनी शुरुआत कुछ एनिमेशंस के साथ की, इसके बाद हमने इसे स्टोरीटेलिंग के बड़े फॉर्मेट में बदल दिया, जिसे लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया।

आपने इसके लिए डिजिटल-ऑनली मीडियम को ही क्यों चुना, जबकि इसमें काफी भीड़ और शोरशराबा है?

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शोरशराबे व अव्यवस्था के कारण ही हमनें कुछ ऐसा करने का निश्चय किया, जो बिल्कुल अलग और पॉजीटिव था। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगेटिविटी, नग्नता और फेक कंटेंट से मुझे सख्त नफरत है, इसलिए मैंने सोचा कि इस क्षेत्र में यदि लोगों को अच्छा और पॉजीटिव कंटेंट मिलेगा तो वे इसे काफी पसंद करेंगे। इसके लिए हमने एक गाना और स्टोरीटैलिंग एपिसोड तैयार किया, जिसमें हमने लोगों को काफी अच्छे और मजेदार तरीके से अपने मकसद के बारे में बता सकें। इसके अलावा, हमने रिसर्च पर भी काफी फोकस किया, जिससे हम अपने व्युअर्स को कुछ नया पेश करने में सफल रहे।

अब तक लोगों की कैसी प्रतिक्रिया रही है?

हमें लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई है। हालांकि शुरुआत में इसकी रफ्तार थोड़ी सुस्त थी। धीरे-धीरे लोगों ने हमारी खासियत को नोटिस करना शुरू कर दिया। अब तो हमें अपने व्युअर्स से यह सुझाव मिलने भी शुरू हो गए हैं कि वे ‘सरकारनामा’ के अगले एपिसोड में क्या देखना चाहते हैं। हालांकि, व्युअर्स हमारी आलोचना भी करते हैं, लेकिन यह सकारात्मक तरीके से होती है। अब लोगों की हमसे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और हमें हर बार अपनी अच्छी परफॉर्मेंस देनी होगी। यानी हम कह सकते हैं कि सही मायने में सफर की शुरुआत अब हुई है।

आज के समय में कंटेंट क्रिएटर्स के सामने तीन बड़ी चुनौतियां कौन सी हैं?

आज के समय में कंटेंट क्रिएटर्स के सामने सबसे बड़ा मुद्दा फंड का है। फंड की उचित व्यवस्था के बिना आप क्वालिटी प्रॉडक्ट देने की स्थिति में नहीं होते हैं। मैं हमेशा भाग्यशाली रहा हूं कि मुझे ऐसे दोस्त मिले हैं, जिन्होंने किसी तरह की परेशानी मुझ पर नहीं आने दी। वे हमेशा मुझे सुझाव देते रहते हैं कि अगले एपिसोड को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। इससे मुझे स्क्रिप्ट को तैयार करने के साथ ही प्रॉडक्शन में भी काफी मदद मिलती है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती कंटेंट की है। आपको अपने कंटेंट को लेकर सोच बिल्कुल स्पष्ट रखनी होगी। तुच्छ (Frivolous) कंटेंट आपको अच्छी शुरुआत तो दे सकता है, लेकिन इसे लेकर आप लंबे समय तक नहीं चल सकते हैं। लंबी दौड़ में बने रहने के लिए आपको ऐसा कंटेंट देना होगा, जिसमें गहराई और रिसर्च शामिल हो। यहां मेरे कॉलेज के दिनों का अनुभव मुझे काम आता है। 

क्या सरकारनामा सिर्फ डिजिटल फॉर्मेट में ही रहेगा या आप इसे ट्रेडिशनल मीडिया फॉर्मेट्स में लाने की योजना भी बना रहे हैं?

कुछ न्यूज चैनल्स ने मेरे कई एपिसोड्स अपने यहां दिखाए हैं। ये वो चैनल्स थे, जिन्होंने ये एपिसोड्स चलाने को मंजूरी के लिए मुझसे संपर्क किया था। हमारा मानना है कि हमारी प्रॉडक्शन वैल्यू काफी बेहतर होती है, इसलिए हमारे एपिसोड्स ब्रॉडकास्ट क्वालिटी के होते हैं। हम इस आयडिया को ‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर लाने की भी सोच रहे हैं। यदि कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स इसके लिए हमसे संपर्क करेगा तो हमें अपना प्रॉडक्ट उसके साथ शेयर करने को लेकर काफी खुशी होगी।      

आपके विडियोज में करीब 26 विभिन्न सब्जेक्ट दिखाई दिए हैं। ऐसे में क्या ‘सरकारनामा को जानकारी देने और जागरूकता फैलाने वाला प्लेटफॉर्म कहना उचित होगा’?

हम कोई भी सब्जेक्ट चुनें, लेकिन मेरा सबसे पहला उद्देश्य अपने व्युअर्स को अच्छा और ऑरिजिनल कंटेंट देना रहता है। हमारे द्वारा चुने गए सब्जेक्ट में बहुत सारे विचारों को शामिल किया जाता है। शुरुआत में हमने उन इश्यू को लिया जो पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध थे। इसके बाद हमने काफी गहराई से रिसर्च की। उसमें कई अन्य चीजें शामिल कीं और विभिन्न मौके के लिए उसमें ऑरिजिनल गाने (जैसे-दुर्गा पूजा, स्वतंत्रता दिवस, फ्रेडशिप डे, वैलेंटाइन डे, होली आदि) शामिल किए। इसके बाद हमने रिलेशनशिप पर नए एपिसोड बनाए। ये सब्जेक्ट समाज से जुड़े हुए थे। (जैसे-पति-पत्नी का रिश्ता, आर्ट ऑफ लव, हंसी-मजाक)। हमने म्यूजिक जॉनर में भी कई नए प्रयोग करने का पयास किया। स्टोरटैलिंग के अपने स्टाइल को और बढ़ाने के लिए हमने मूल गीतों और कंपोजीशन का इस्तेमाल किया।  

आने वाले दो साल में कंटेंट उपभोग करने का ट्रेंड कैसा होगा, इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

मौटे तौर पर हम कंटेंट के उपभोग को दो भागों (पॉलिटिकल और नॉन पॉलिटिकल) में बांट सकते हैं। पिछले पांच सालों में पॉलिटिकल कंटेंट का उपभोग ज्यादा रहा है, लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं। इसका कारण यह है कि पॉलिटिकल कंटेंट में दोहराव और नीरसता ज्यादा होती है। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने फ्रेश कंटेंट तलाशना शुरू कर दिया। इसलिए अगले पांच सालों में हमें बेहतर और नया कंटेंट देखने को मिलेगा। हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं में क्लासिकल कंटेंट में भी बदलाव दिखाई देगा।

‘सरकारनामा’ को लेकर आपका अगले पांच साल के लिए क्या विजन है?

हमने पहले ही लंबे और छोटे एपिसोड को मिलाना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में हम मानवीय संबंधों और समाज से जुड़े अन्य विषयों पर काम करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन इनका अंदाज बिल्कुल ही अलग होगा। हम लोक संगीत और लोक रंगमंच का इस्तेमाल करेंगे, क्योंकि हम उन आर्ट फॉर्म्स को भी पुर्जीवित करने की योजना बना रहे हैं, जो या तो खत्म हो चुके हैं अथवा खत्म होने की कगार पर हैं। हम अपने एपिसोड में नाटकों के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। देखते हैं कि यह कैसा रूप लेता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हम इसमें बदलाव भी कर रहे हैं।

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BIG FM के अधिग्रहण से 'जागरण प्रकाशन' को क्या होगा फायदा, जानें यहां

‘बिग एफएम’ का संचालन करने वाले ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ को ‘जागरण प्रकाशन’ के रूप में खरीदार मिल गया है

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Apurva-Purohit

देश के बड़े एफएम रेडियो चैनलों में शुमार ‘बिग एफएम’ (Big FM) का संचालन करने वाले ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ (RBNL) को ‘जागरण प्रकाशन’ के रूप में खरीदार मिल गया है। इस डील के तहत ‘रिलायंस समूह’, ‘बिग एफएम’ रेडियो में अपनी पूरी हिस्सेदारी 1,200 करोड़ रुपये में ‘जागरण प्रकाशन’ की कंपनी ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ (MBL) को बेचेगा। ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ के तहत ‘रेडियो सिटी’ का संचालन किया जाता है। इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ (JPL) की प्रेजिडेंट अपूर्वा पुरोहित ने इन दोनों नेटवर्क के मिलने के बाद रेडियो स्टेशनों के टार्गेट ग्रुप, मार्केटिंग प्लान और एडवर्टाइजिंग समेत तमाम मुद्दों पर हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

इस अधिग्रहण के बाद मार्केट शेयर कितना हो जाएगा?, क्या यह लीडरशिप पोजीशन पर आ जाएगा?

‘रेडियो सिटी’ ब्रैंड के तहत ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ (Music Broadcast Ltd) वर्तमान में 39 स्टेशनों का संचालन करती है। ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ (RBNL) के एफएम रेडियो चैनल ‘बिग एफएम’ (Big FM) के खरीदने के बाद 69 शहरों में 79 स्टेशनों के साथ हमारी पहुंच काफी बढ़ जाएगी। इसके बाद यह देश का सबसे बड़ा प्राइवेट एफएम प्लेयर बन जाएगा और इसकी पहुंच भी बहुत ज्यादा हो जाएगी। इसके अलावा इस संयुक्त नेटवर्क के प्रति विज्ञापनदाता भी और ज्यादा आकर्षित होंगे। मुझे लगता है कि इससे हमें लीडरशिप पोजीशन के साथ सबसे ज्यादा मार्केट शेयर बनाने में मदद मिलेगी।‘बिग एफएम’ का टार्गेट ग्रुप 45 साल से ऊपर के लोगों का है और ‘रेडियो सिटी’ का फोकस 25 से 44 साल के लोगों पर है। ये दोनों ग्रुप एडवर्टाइजर्स को अपना कंज्यूमर बेस बढ़ाने में मदद करेंगे।

आपकी नजर में इस अधिग्रहण के क्या मायने हैं?

इस सौदे के तहत अब तक ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ (MBL) की ओर से ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क’ में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली गई है। इस बारे में सभी जगह से अप्रूवल मिलने के बाद ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ की ओर से सभी शेयर खरीद लिए जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2021 (FY2021) की पहली तिमाही में लॉक-इन पीरियड समाप्त होने के बाद इसकी उम्मीद है। इसके बाद 79 स्टेशनों के साथ यह देश का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क बन जाएगा और ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड’ फिर ‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ की सहायक कंपनी बन जाएगी।

इस अधिग्रहण के साथ हमारी पहुंच और ज्यादा होने से एडवर्टाइजर्स को लोकल मार्केट में अपना विस्तार करने में मदद मिलेगी। ‘बिग एफएम’ के जिन 40 स्टेशनों का हम अधिग्रहण करने जा रहे हैं, उनमें से 30 ऐसे शहरों में हैं, जहां पर रेडियो सिटी की मौजूदगी नहीं है।

इसके लिए आप किस तरह का मार्केटिंग प्लान बना रहे हैं?

‘म्यूजिक ब्रॉडकास्ट लिमिटेड’ ने एफएम रेडियो की प्रोग्रामिंग को विस्तार देने की दिशा में काफी काम किया है और इसका कंटेंट भी काफी अलग है। बब्बर शेर और लव गुरु जैसे रेडियो प्रोग्राम भी इसने शुरू किए हैं। इसने रेडियो सिटी फ्रीडम अवॉर्ड्स भी शुरू किए हैं और रेडियो सिटी सुपर सिंगर के द्वारा नवोदित गायकों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म उपलव्ध कराया है। यह देश में अपनी तरह का पहला रेडियो टैलेंट शो है। ‘रग-रग में दौड़े सिटी’ के तहत नेटवर्क ने स्थानीय श्रोताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की कवायद की है।

वहीं, बिग एफएम देश के सबसे ज्यादा सम्मानित रेडियो नेटवर्क्स में से एक है और यह नीलेश मिश्रा के साथ ‘यादों का इडियट बॉक्स’ और अनु कपूर के साथ ‘सुहाना सफर’ जैसे कई नए फॉर्मेट शुरू कर अपनी खास पहचान बना चुका है। अब दोनों नेटवर्क के मिलने से इसमें 79 स्टेशन हो जाएंगे, जिससे हमारे ऑडियंस की रेंज में काफी विविधता हो जाएगी और इससे श्रोताओं की संख्या में भी काफी इजाफा हो जाएगा।

इस सौदेबाजी के बाद आपकी पहुंच वाले शहरों की लिस्ट में और कौन से शहर शामिल हो जाएंगे?

इस अधिग्रहण के बाद 30 नए शहरों में हमारी मौजूदगी हो जाएगी। जिन नए शहरों में हमारी पहुंच होगी, उनमें इलाहाबाद, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, गुवाहाटी, इंदौर, जम्मू, कोलकाता, पणजी, शिमला, अलीगढ़, आइजोल, औरंगाबाद, अगरतला, अमृतसर, आसनसोल, ग्वालियर, ईटानगर, झांसी, जोधपुर, मंगलौर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, पुडुचेरी, राजकोट, राउरकेला, शिलॉंग, श्रीनगर, तिरुपति और त्रिवेंद्रम शामिल हैं। इनके द्वारा हमारी पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो जाएगी और हम देश का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क हो जाएंगे।

इस सौदेबाजी के बाद आपको श्रोताओं के रूप में किस तरह की ग्रोथ की उम्मीद है?

बिग एफएम ने 45 साल से ऊपर के श्रोताओं को अपना टार्गेट ऑडियंस बना रखा है, जबकि रेडियो सिटी का टार्गेट ऑडियंस 25 से 44 साल की उम्र वाले लोग हैं। दोनों ही टार्गेट ग्रुप अलग हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।

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इस वजह से अपने शो पर दे पाती हूं पॉलिटिकल ‘ज्ञान’, बोलीं वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार

टाइम्स नाउ चैनल की शुरुआत से ही इसके साथ जुड़ीं नविका कुमार वर्तमान में मैनेजिंग एडिटर की निभा रही हैं जिम्मेदारी

Last Modified:
Wednesday, 05 June, 2019
Navika Kumar

वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्‍यूज चैनल ‘टाइम्‍स नाउ’ (Times Now) की शुरुआत के समय से ही इसके साथ जुड़ी हुई हैं। इन दिनों चैनल में मैनेजिंग एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहीं नविका कुमार उन पत्रकारों की फेहरिस्त में शामिल हैं, जिन्होंने पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाने के साथ-साथ बिजनेस रिपोर्टिंग में भी अलग धाक बनाई हुई है।

उन्हें कई बड़ी स्टोरी ब्रेक करने और इंवेस्टिगेट करने का श्रेय दिया जाता है, जिनमें सोनिया गांधी का इस्तीफा, कॉमनवेल्थ घोटाले में फंसे सुरेश कलमाड़ी का इस्तीफा, अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाला, एयरसेल-मैक्सिस डील जैसी कई खबरें शामिल हैं।

चैनल और उनकी भूमिका से जुड़े सवालों को लेकर हमारी सहयोगी मैगजीन ‘इम्पैक्ट’ (IMPACT) की संवाददाता नीता नायर ने नविका कुमार से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

वर्ष 2005 में ‘टाइम्स नाउ’ की शुरुआत के साथ ही आप इस चैनल से जुड़ी हुई हैं। आपकी नजर में इस दौरान चैनल के लिए टर्निंग पॉइंट कौन सा रहा?

मुझे अभी भी वह समय याद है, जब हमें पहली बार खुद को इंट्रोड्यूज करना था और लोगों को बताना था कि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप टेलिविजन की दुनिया में प्रवेश करने जा रहा है। समय के साथ ‘टाइम्स नाउ’ एक इंस्टीट्यूशन बन चुका है। सबसे पहली बड़ी स्टोरी हमने ‘Matter of Propriety’ की थी। इसको लेकर संसद का कामकाज ठप हो गया था और आधे संसद सदस्यों के हस्ताक्षर से युक्त यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था। लोगों का कहना था कि अरे, जनवरी में तो यह चैनल लॉन्च हुआ था और फरवरी में इसने इतनी बड़ी स्टोरी कर दी।

इसके बाद हमने ‘Office of Profit’ यानी लाभ के पद पर स्टोरी की थी, जिसकी वजह से सोनिया गांधी और जया बच्चन को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। कहने का मतलब है कि लॉन्चिंग की पहली तिमाही के भीतर ही चैनल को एक नई पहचान मिल गई थी। उसके बाद से चैनल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। 26 नवंबर 2008 की कवरेज भी हमारे लिए एक टर्निंग पॉइंट थी। हमने हमेशा से काफी एक्सक्लूसिव और इंवेस्टिगेटिव स्टोरी की हैं।

आपने अरनब गोस्वामी के साथ काम करने के अलावा उनके बाद में रात नौ बजे वाले स्लॉट की कमान संभाली। ऐसे में एक सहकर्मी से लेकर एक प्रतियोगी के बारे में जिनका शो टीआरपी रेटिंग्स में टॉप पर रहा है, आप क्या कहेंगी और इसे किस तरह देखती हैं?

सच बताऊं तो मैंने कभी प्रोफाइल पर ध्यान नहीं दिया है। मेरी कुछ स्टोरीज ने टाइम्स नाउ की ब्रैंड वैल्यू तैयार करने में मदद की है। हां, अरनब गोस्वामी जब यहां थे तो उन्होंने वाकई में अपने काम को भरपूर एंज्वॉय किया, लेकिन पत्रकारिता में चेहरे बदलते रहते हैं। मैं कंटेंट पर फोकस करती हूं।

मुझे आज भी खबरों की एक तरह से भूख रहती है। इसलिए रात को नौ बजे अपने प्राइम टाइम शो में मैं पॉलिटिकल ‘ज्ञान’ इसलिए दे पाती हूं, क्योंकि मैं फील्ड रिपोर्टिंग करती हूं और मैंने जो अनुभव हासिल किया है, वह एयरकंडीशंड स्टूडियो में बैठकर नहीं आया है।

तमाम लोग ‘टाइम्स नाउ’, ‘रिपब्लिक’ और ‘Zee’ को मोदी का चीयरलीडिंग स्कवॉयड कहते हैं। आप इस तरह की धारणा से किस तरह निजात पा रही हैं?

इस तरह की सोच उन लोगों ने बना रखी है जो न्यूज नहीं देखते हैं। इसलिए वे न्यूज चैनल्स के बारे में इस तरह की खबरें बना रहे हैं। हम सिर्फ वही दिखाते हैं जो धरातल पर हो रहा है। देश में मोदी को लेकर एक अलग तरह का माहौल है। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें लेकर तमाम चर्चाएं होती हैं और यही चर्चाएं हमारे चैनल पर भी दिखाई देती हैं। ऐसे में कैसे हम चीयर लीडर हुए। हम तो सिर्फ जनता का मूड दिखाते हैं। जब जनता का मूड बदलता है तो हम उसे दिखाते हैं, क्योंकि हमारा चैनल रिपोर्टर केंद्रित है।

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इसलिए नहीं संभाली NEWSHOUR की कमान, बोले Times Now के संपादक राहुल शिवशंकर

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी के Times Now से अलग होने के बाद राहुल शिवशंकर को दी गई थी एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी

Last Modified:
Tuesday, 04 June, 2019
Rahul Shivshankar

करीब दो दशक पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में बतौर बीट रिपोर्टर अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर अब टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्‍यूज चैनल ‘टाइम्‍स नाउ’ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ के तौर पर चैनल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटे हुए हैं।

वरिष्‍ठ पत्रकार अरनब गोस्‍वामी ने करीब ढाई साल पहले जब ‘टाइम्‍स नाउ’ को अलविदा कहा था, तब चैनल ने राहुल शिवशंकर को इसका एडिटर-इन-चीफ बनाया था। शिवशंकर की इस नेटवर्क में यह दूसरी पारी है। इससे पहले वह ‘टाइम्‍स नाउ’ में सीनियर एंकर के तौर पर काम कर चुके हैं।

राहुल शिवशंकर की नई भूमिका और पिछले कार्यकाल के अनुभव के अलावा तमाम मुद्दों पर हमारी सहयोगी मैगजीन ‘इम्पैक्ट’ (IMPACT) की संवाददाता नीता नायर ने उनसे विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

‘टाइम्स नाउ’ के साथ आपकी यह दूसरी पारी है। पहले आप इसमें सीनियर एंकर थे और अब एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस दौरान आप चैनल में क्या बदलाव लाए हैं?

सबसे पहले तो मैं एक बात बता दूं कि ‘टाइम्स नाउ’ की पहचान अब सिर्फ एक शो की वजह से नहीं है। अब यह विविध प्राइम टाइम वाला चैनल है, जिसमें एंकर्स की अपनी अलग स्टाइल है। हमने सेलेब्रिटी एंकर के नुकसान की भरपाई अच्छे कंटेंट से कर दी है। इससे पहले, खासकर मेरे आने से पहले रिपोर्टर्स को लेकर इस तरह की तमाम चर्चाएं थीं कि उन्हें अपनी रिपोर्ट्स उस हिसाब से फिट करनी होती थी कि एडिटर शाम को किस तरह की बातें करने वाले हैं। लेकिन हमने इस स्थिति को बदल दिया है। ‘टाइम्स नाउ’ अब रिपोर्टर और स्टोरी वाला चैनल हो गया है। सबसे बड़ा बदलाव जो मैं लाया हूं, वो यह है कि यहां सभी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है।

क्या आपके कहने का मतलब है कि आपके आने से पहले ‘टाइम्स नाउ’ में एक तरह की तानाशाही चलती थी, जो आपके आने के बाद लोकतंत्र में बदल गई है?

मैं इस तरह के कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करता हूं। लेकिन आप देखेंगे कि टाइम्स नाउ में पहले सिर्फ एक ही व्यक्ति को पूरी तरह पता होता था कि क्या ऑनएयर होने वाला है। उस समय सिर्फ एक ही व्यक्ति का बोलबाला हुआ करता था, जो सभी चीजें तय करता था, लेकिन हमने इन चीजों को बदला है और अब सभी लोगों को यहां अपनी बात रखने का अधिकार है।

जब आपने एडिटर-इन-चीफ की कुर्सी संभाली तो आपने नौ बजे वाला प्रमुख स्लॉट क्यों नहीं लिया?

मैं एक एडिटर हूं न कि एंटरटेनर। मैं एक विचारशील व्यक्ति हूं। न्यूजऑवर (Newshour) की एंकरिंग में भले ही लोगों को बेवजह यह कहने के लिए मजबूर किया होगा कि फलां इस तरह था और फलां इस तरह का है, लेकिन मेरी अपनी पहचान है। मैं अपनी तुलना किसी और से नहीं करना चाहता हूं। इसलिए मैं रात आठ बजे बिल्कुल अलग अप्रोच के साथ आया। इसके अलावा, मैं इस तरह के शो को करने में काफी असहज महसूस करता था, जिसमें वाक चातुर्य ज्यादा था। इसलिए रात आठ बजे का जो शो मैंने चुना, वह पूरी तरह तथ्यों पर आधारित था और उसमें बेवजह का शोरशराबा और ‘शब्दों का जाल’ नहीं था। इसलिए मैंने न्यूजऑवर की जगह रात आठ बजे वाला स्लॉट चुना।

‘टाइम्स नाउ’ में मैंने जिन पत्रकारों से बात की, उनमें से कुछ का कहना था कि आपके और नविका कुमार के बीच बहुत ज्यादा तालमेल नहीं है। ऐसे में दो अलग-अलग सोच के लोगों को रिपोर्ट करने में मुश्किल होती है?

आपने जो सुना है, वह कोरी गपबाजी है। लोग तो कहीं भी बात का बतंगड़ बनाना चाहते हैं। लेकिन हमारे बीच इस तरह की कोई बात नहीं है। नविका और मैं अपना-अपना काम अच्छी तरह से करते हैं। हम दोनों मिलकर काम करते हैं, इसलिए इस तरह की बातें सिर्फ कुछ लोगों की शरारत है।

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पढ़ें: दैनिक भास्कर के प्रमोटर-डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

एडवर्टाइजिंग के नजरिये से बहुत बेहतर नहीं रहे हैं पिछले तीन साल

Last Modified:
Tuesday, 21 May, 2019
Girish Agarwal

पिछले दिनों जारी हुए ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही’ (IRS Q1 2019) के डाटा आजकल काफी चर्चा में बने हुए हैं। हों भी क्यों न, आखिर ये दो साल के लंबे इंतजार के बाद जो जारी हुए हैं। यदि हम ‘आईआरएस 2019’ की पहली तिमाही के इन डाटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ (AIR)  के आधार पर ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की ग्रोथ लगातार बढ़ रही है। ‘आईआरएस 2017’ में जहां इस अखबार की रीडरशिप 1,38,72,000  थी, वह ‘आईआरएस 2019’ की पहली तिमाही में बढ़कर 1,53,95,000  है। लेकिन ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (DB Corp Ltd) ने पिछले दिनों मार्च 2018 में समाप्त वित्तीय वर्ष के जो डाटा पेश किए हैं, उनमें ‘प्रॉफिट आफ्टर टैक्स’ (PAT) में 15.4 प्रतिशत की कमी के साथ यह 273.8  करोड़ रुपए हो गया है, जबकि इसके एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है।

इस बारे में हमारी सहयोगी कंपनी ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल से बात कर जानना चाहा कि कंपनी इस बैलेंस शीट और आईआरएस के डाटा के बारे में क्या सोचती है, तो उन्होंने बताया कि आईआरएस के डाटा से स्पष्ट है कि प्रिंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, यह काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘मुझे लगता है कि देश में प्रिंट के बुनियादी ढांचे में सुधार हो रहा है। यदि हम पिछले दिनों जारी हुई आईआरएस रिपोर्ट की बात करें तो प्रिंट के पाठकों की संख्या में 1.8 करोड़ की वृद्धि हुई है, यानी विभिन्न भाषाओं में इतने नए पाठक प्रिंट के साथ जुड़े हैं। इनमें हिंदी में जुड़ने वाले पाठकों की संख्या 95 लाख है। इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि इनमें युवा वर्ग के पाठक भी काफी संख्या में शामिल हैं। यदि मैं सर्कुलेशन की बात करूं तो उसमें भी काफी ग्रोथ देखने को मिली है। ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’ (ABC) के अनुसार पिछले दस वर्षों में सर्टिफाइड पब्लिकेशंस की संख्या में करीब पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान पत्रकारिता की क्वालिटी और कंटेंट भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। यदि ऐसा नहीं होगा तो लोग क्यों प्रिंट खरीदेंगे और पढ़ेंगे। इंडियर रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार 16 से 19 साल के आयुवर्ग वाले पाठकों की संख्या में पांच प्रतिशत और 20 से 29 साल के आयुवर्ग वाले पाठकों की संख्या में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’

गिरीश अग्रवाल ने बताया कि इन डाटा को लेकर सभी पब्लिशर्स काफी उत्साहित हैं और वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी निवेश कर रहे हैं। गिरीश अग्रवाल के अनुसार, ‘जैसा कि पश्चिमी देशों में हुआ है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पेड मीडियम होते जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय पब्लिशर्स भी उम्मीद जता रहे हैं कि जैसे वे प्रिंट के लिए पैसे लेते हैं तो आगे जाकर वे अपने डिजिटल पब्लिकेशन के लिए भी पैसे ले पाएंगे। लेकिन इस मीडियम में पैसा मिलने में अभी भी कुछ बाधाएं हैं। क्योंकि आप कंटेंट के लिए तभी भुगतान करते हैं, जब आपको उसमें कुछ खास दिखता है। मान लीजिए कि यदि आप किसी अखबार की वेबसाइट पढ़ रहे हैं और आपको उस वेबसाइट में किसी खास टॉपिक पर बहुत ही अच्छी जानकारी मिलती है, तभी तो आप उसके लिए पैसा देने को तैयार होंगे। पब्लिशर्स इसके लिए तैयार हैं और उनके पास कंटेंट भी है। आपका कंटेंट ऐसा होना चाहिए जो काफी बेहतरीन और एक्सक्लूसिव हो, ताकि कंज्यूमर को उसके लिए भुगतान करने में किसी तरह की दिक्कत न हो।’

गिरीश अग्रवाल ने यह भी बताया कि विज्ञापन के नजरिये से चीजें इतनी धीमी क्यों हैं और वह रफ्तार क्यों नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा, ‘यदि हम एडवर्टाइजिंग के नजरिये से देखें तो मुझे लगता है कि पिछले तीन साल काफी अच्छे नहीं रहे हैं। कई कैटेगरी में विज्ञापनों में कमी रही है, जैसे- सरकारी विज्ञापनों को ही ले, सरकार प्रिंट में बहुत ज्यादा विज्ञापन देती हैं, उनमें कमी आई है। हालांकि, पिछले साल डीएवीपी (DVP) रेट में इजाफा हुआ है और अधिकांश पब्लिशर्स ने इस कैटेगरी में काफी अच्छी ग्रोथ दिखाई है। अन्य कैटेगरी की बात करें तो चूंकि जीडीपी (GDP) नहीं बढ़ रही है, इसलिए ‘एफएमसीजी सेक्टर’(FMCG sector) के सिवाय विज्ञापन में भी कमी हो रही है।’

यह पूछे जाने पर कि प्रिंट के मुकाबले टीवी पर विज्ञापन ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, अग्रवाल ने कहा, ‘ऐसा इसलिए हो रहा है कि टीवी पर 50-60 प्रतिशत विज्ञापन एफएमसीजी ब्रैंड्स से आता है, इसलिए इस कैटेगरी के द्वारा ही टीवी पर विज्ञापन में ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन 6-7 प्रतिशत की ग्रोथ के बावजूद प्रिंट मजबूती से टिका हुआ है। इसके बावजूद इसमें सरकारी, ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंस और रियल एस्टेट कैटेगरी बाजी मार रही हैं। आने वाले समय में इस स्थिति को बदलने की जरूरत है।’ गिरीश अग्रवाल ने यह भी उल्लेख किया कि अखबार की कीमत में 20 से 50 पैसा बढ़ाने की गुंजाइश है।

ग्रुप जिन मार्केट्स में छाया है, उनके अलावा नए मार्केट में अपनी मौजूदगी नहीं बढ़ा रहा है। यह इन्हीं मार्केट्स में अपनी मौजूदगी को और बढ़ाने की योजना बनाता है और जरूरत पड़ने पर इसमें वह बड़ा निवेश करने में भी नहीं हिचकता है। इस बारे में पूछे जाने पर गिरीश अग्रवाल ने कहा, ‘हमारे पास पहले से ही बहुत बड़ा आधार है। हम इन क्षेत्रों में और गहराई में जाना और विस्तार करना चाहते हैं। इसमें ज्यादा से ज्यादा प्रिंटिंग सेंटर खोलना भी शामिल है। राजस्थान में हमारे पास 16 प्रिंटिंग सेंटर हैं। हम चाहते हैं कि हमारा अखबार सुबह चार बजे डिलीवर हो जाए, क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर को अखबार उठाने और लोगों के घरों तक पहुंचाने में करीब दो घंटे लगते हैं। हमारा टार्गेट है कि लोगों के घरों पर सुबह छह बजे से पहले अखबार पहुंच जाना चाहिए। इसके लिए हमें रास्ते में लगने वाले समय को और कम करना होगा।’

यह पूछे जाने पर कि इसके लिए किस तरह के इंवेस्टमेंट की जरूरत होगी, अग्रवाल ने कहा, ‘यदि किसी निश्चित समय अवधि के दौरान 100 करोड़ रुपए इंवेस्ट करने की जरूरत होती है, जैसे बिहार मार्केट में हमने 200 करोड़ रुपए का इंवेस्ट किया था, तो हमें आगे बढ़ने के लिए दोबारा से ऐसा करने में खुशी होगी।’ पिछले साल जरूरत न होने पर भी उन्होंने 30-34 करोड़ रुपए का इंवेस्टमेंट किया था। इस बारे में गिरीश अग्रवाल ने कहा, ‘न्यूज प्रिंट की बढ़ी कीमतों के बावजूद इस साल हमने कंपनी की बैलेंस शीट को ‘Earnings before interest, tax, depreciation and amortization’ (EBITDA) और बढ़ी कीमत के साथ 521 करोड़ रुपए पर क्लोज किया है। यदि ऐसा नहीं होता तो हम इसे करीब 700 करोड़ रुपए पर क्लोज करते।’

उनका कहना था, ‘प्रॉफिट में 15.4 प्रतिशत की जो कमी हुई है, वह वास्तव में न्यूजप्रिंट की बढ़ी कीमतों के कारण हुई है। इस साल सभी पब्लिकेशंस के प्रॉफिट में कमी आई है, क्योंकि न्यूजप्रिंट की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं। हालांकि अब न्यूजप्रिंट की कीमतें घट रही हैं और इससे हमें काफी राहत मिलेगी। इसके अलावा पब्लिशर्स को एडवर्टाइजर्स के साथ ज्यादा से ज्यादा संवाद बढ़ाने की जरूरत है। आजकल आ रहे नए-नए मीडियम के बीच हमें लोगों को प्रिंट के बदलते बुनियादी ढांचे के बारे में भी बताने की जरूरत है।‘

दैनिक भास्कर ग्रुप की रेडियो डिविजन ‘MY FM की ग्रोथ के बारे में अग्रवाल ने कहा, ‘हम 30 स्टेशनों को फिलहाल ऑपरेट कर रहे हैं और इनके प्रदर्शन से काफी खुश हैं। हमारा ‘Earnings before interest, tax, depreciation and amortization’ (EBITDA) और प्रॉफिट इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा की लिस्ट में शामिल है। यूपी के मार्केट पर हमारी ज्यादा नजर है। पिछले तीन सालों में ‘Earnings before interest, tax, depreciation and amortization’ (EBITDA) 30-40 प्रतिशत से ज्यादा रहा है और यह इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा है। हालांकि मेट्रो शहरों में एंट्री करने का हमारा फिलहाल कोई प्लान नहीं है, लेकिन अगले फेज की नीलामी में बोली लगाना चाहते हैं।’

अगले साल के लिए डीबी ग्रुप को एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में दोहरे अंकों (डबल डिजिट) की ग्रोथ की उम्मीद है। इस बारे में गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘पिछले दो सालों के दौरान हमारा सर्कुलेशन और रीडरशिप दोनों में 10 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। हम साल दर साल (Y-O-Y) सर्कुलेशन ग्रोथ में पांच प्रतिशत की वृद्धि जारी रखना चाहते हैं। इस पांच प्रतिशत सर्कुलेशन ग्रोथ से हमें 7.2 प्रतिशत एडवर्टाइजिंग ग्रोथ मिली है। इसलिए मार्केट की स्थिति सुधरने पर हमें डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिलेगी। अब न्यूजप्रिंट की कीमतों में कमी आ रही है और ऐसे में प्रॉफिट को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ना चाहिए।’

‘दैनिक भास्कर’ और ‘दैनिक जागरण’ के बीच के अंतर को दूर करने के बारे में पूछे जाने पर गिरीश अग्रवाल ने कहा, ‘सच कहूं तो मैं दैनिक जागरण को प्रतियोगिता में नहीं मानता हूं। उनका कोर मार्केट यूपी है, जहां पर हम नहीं हैं। यदि आप ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन की रिपोर्ट देखें तो हमारी 43 लाख कॉपियां हैं, जबकि दैनिक जागरण की 34 लाख कॉपियां हैं। इसका मतलब कि हमारी कॉपियां दैनिक जागरण से नौ लाख ज्यादा हैं। यूपी और बिहार में आबादी का घनत्व बहुत ज्यादा होने से अखबारों की रीडरशिप वहां बहुत ज्यादा है, जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश में यह कम है। इसलिए रीडरशिप का यह आंकड़ा दैनिक जागरण के पक्ष में जाता है।’

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