सागरिका घोष के खिलाफ 'PCI' पहुंचीं महिला पत्रकार मधु किश्वर

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली वरिष्ठ महिला पत्रकार और मानुषि जर्नल की फाउंडर...

Last Modified:
Wednesday, 31 May, 2017
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली वरिष्ठ महिला पत्रकार और मानुषि जर्नल की फाउंडर मधु किश्‍वर ने ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ (Times of India) की कंसल्टिंग एडिटर सागरिका घोष पर ट्विटर पर झूठे और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया है। इस बारे में उन्‍होंने ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Press Council of India) से भी शिकायत की है।


प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की सेक्रेटरी विभा भार्गव को भेजे पत्र में मधु किश्‍वर का कहना है कि 19 मई 2017 को सागरिका घोष ने ट्विटर पर कहा है, ‘Mobs are hunting and killing Muslims across India and THERE IS NO JUSTICE FOR THE KILLERS! WAKE UP, GOI!”

किश्‍वर के अनुसार, विवाद बढ़ने पर हालांकि सागरिका ने यह डिलीट कर दिया लेकिन वास्‍तव में यह अभी भी बरकरार है। ऐसे में सागरिका का यह ट्वीट भड़काऊ है और अमन पसंद लोगों के लिए खतरे की घंटी है जो विभिन्‍न समुदायों के साथ मिलकर शांति से रह रहे हैं।’

मधु किश्‍वर द्वारा की गई शिकायत को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

https://madhukishwar.blogspot.in/2017/05/when-journalists-serve-isi-agenda.html

 

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BW Dialogue: 10 जुलाई को नजर आएंगे फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन, होगी दिलचस्प चर्चा

​​​​​​​‘बिजनेस वर्ल्ड’ ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
anuragsir8745

‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक चलने वाले इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से चर्चा करेंगे।

बता दें कि ‘बीडब्‍ल्‍यू डायलॉग’ ऐसा मंच है, जिसके जरिये ऐसे प्रख्यात व्यक्तियों, सेलेब्रिटीज और अचीवर्स से बात कर उनसे उनकी जिंदगी, उनके बिजनेस और उनके नेतृत्व क्षमता के बारे में जानने की कोशिश की जाती है, ताकि उनकी सफलता की कहानी को दुनिया के सामने लाया जा सके। ये सेलिब्रिटीज विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े होते हैं फिर चाहे वे किसी स्पोर्ट्स से हों, आर्टिस्ट हों, एक्टर हों या फिर कोई लेखक। ये वे लोग हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, प्रदर्शन और कार्यक्षमता से अपने क्षेत्र में लोहा मनवाया है।

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प्रिंट और डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने कही ये बात

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित फिल्म्स और टीवी के लिए सरकार जल्द करेगी प्रोत्साहन की घोषणा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
Amit Khare

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सेक्रेट्री अमित खरे ने कहा कि सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक स्वतंत्रता लाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के मामले में सरकार प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एक समान व्यवस्था (level playing field) के बारे में भी सोच रही है। खरे का कहना है, ’प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी 26 प्रतिशत एफडीआई लागू होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया पर लागू एफडीआई के नियम न्यूज एग्रीगेटर्स (news aggregators) पर भी लागू होने चाहिए। बता दें कि एग्रीगेटर्स इनशॉर्ट्स और डेलीहंट जैसे ऐप्स या वेबसाइट्स हैं जो अन्य पब्लिशर्स से उनके कंटेंट को क्यूरेट करती हैं और पाठकों के लिए कंटेंट को पर्सनलाइज करने के लिए एल्गोरिदम (algorithms) का इस्तेमाल करती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कहीं और से कंटेंट लेकर उसे अपने यहां इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इसकी घोषणा नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह मेरी भूमिका नहीं है, लेकिन इस बात को लेकर काफी गंभीरता से विचार चल रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रिंट मीडिया के बीच एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। इस बारे में सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही किसी तरह की घोषणा की जाएगी।’

बता दें कि पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी प्रदान की थी। इससे पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए ही यह मंजूरी थी। न्यूज चैनल्स के लिए 49 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी मिली हुई है। फिक्की फ्रेम्स 2020 के 21वें एडिशन (ऑनलाइन) में ‘Shaping the Future of M&E in Today’s Digitalised and Information Driven Economy’ सेशन के दौरान खरे ने कहा कि लेवल प्लेयिंग फील्ड का मतलब मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारी रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के अधीन लाना नहीं है। खरे ने कहा, ‘सरकार द्वारा पिछले छह सालों के दौरान बिजनेस को आसान करने और कम लेकिन प्रभावी रेगुलेशन पर फोकस किया गया है। अब कुछ और नए रेगुलेशंस लाने का विचार है, इन्हें लागू करना आसान होगा और इससे अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।’   

बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय इन दिनों अपने तमाम नियमों और अधिनियमों में संशोधन कर रहा है। जैसे- सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) अधिनियम आदि। खरे का कहना था कि विभिन्न मीडिया के लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं हैं, जैसे-प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और फिल्मों के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड हैं। उन्होंने कहा कि  नेटफ्लिक्स और डिज्नी+हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान व्यवस्था (लेवल प्लेयिंग फील्ड) तैयार किया जाना है, जो अभी तक किसी भी नियामक दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि कम रेगुलेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी स्ट्रक्चर को सिंक (sync) किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दायरे में आते हैं, अब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस तरह के कंटेंट को भी अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

खरे के पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का प्रभार भी है। इस मंत्रालय ने महामारी के मद्देनजर छात्रों की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल को बढ़ावा दिया है। खरे ने कहा कि महामारी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बढ़ गई है। मानव संसाधन विकास को मीडिया और मनोरंजन के साथ जोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग पर कई वीडियो आ गए हैं। उनका कहना था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ज्यादा स्वंतत्रता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है और यह एक नियामक (रेगुलेटर) से अधिक एक सूत्रधार और एजुकेटर के रूप में काम करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो मैसेज के जरिये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित फिल्म और टीवी प्रॉडक्शन के लिए सरकार जल्द ही प्रोत्साहन का ऐलान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिल्म और टीवी शूट्स के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) लेकर आएगी।

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CM, अखबार के संपादक समेत 4 लोगों को 50 करोड़ की मानहानि का मिला नोटिस

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
court5497

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। रघुवर दास ने रांची से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के संपादक को भी नोटिस दिया है। झूठी व भ्रामक खबर फैलाकर उन्हें बदनाम करने को लेकर यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता विनोद कुमार साहू के माध्यम से भेजा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि पूर्व सीएम रघुवर दास पर लगाए गए आरोप में अखबार के संपादक व वर्तमान सरकार की मिलीभगत है। इससे उनकी छवि धूमिल कर बदनाम करने के मकसद से किया गया है। इस कारण लीगल नोटिस सीएम हेमंत सोरेन, अखबार के संपादक समेत चार लोगों पर 50 करोड़ की मानहानि का दावा किया है।

दरअसल मामला यह है कि 27 जून 2020 को एक अखबार ने यह खबर छापी की रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी को 'वंडर कार' बनाने का ऑर्डर दिया था। मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास ने बेंटले कार का ऑर्डर 2018 में इंग्लैंड की एक कंपनी को दिया था, जिसके एवज में उन्हें 40 लाख रुपए एडवांस भुगतान किया था। लेकिन जब इंग्लैंड की कंपनी ने कार बनाने से इनकार किया, तो यह ऑर्डर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की किसी कंपनी को दे दिया।  साथ ही यह खबर प्रकाशित हुई कि नई सरकार के गठन के पश्चात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गाड़ी का मूल्य देखते हुए ऑर्डर को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसे फिजूलखर्ची मानते हैं। वहीं यह बात भी लिखी गई थी कि बेंटले कंपनी ने ऑर्डर के बारे में झारखंड सरकार को ईमेल भेजा है। इसके बाद जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हुई।

 वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को गलत बताया है, जिसके चलते उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हेमंत सोरेन और अखबार के संपादक को लीगल नोटिस भेजा है।

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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के थिंक-टैंक में न्यूज एंकर तरुण नांगिया कुछ यूं देंगे योगदान

IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
TarunNangia

जाने-माने सीनियर न्यूज एंकर तरुण नांगिया को भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले थिंक-टैंक ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स’ (IICA) के लिए गठित मॉनिटरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है। IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे।  

नंगिया के कंधों पर IEPFA को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता व सुरक्षा, विवादों से बचने के लिए सलाह, मीडिया प्रसार से संबंधित सलाह और निवेशक जागरूकता और सुरक्षा के लिए अन्य गतिविधि की पेशकश करना शामिल है। इस कार्य में भारतीय निवेशकों के बीच वित्तीय साक्षरता में सुधार करना भी शामिल है, जिससे आर्थिक रूप से लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई जा सके।

‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत टीवी सीरीज के प्रॉडक्शन और टेलिकास्ट से संबंधित प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित IICA मॉनिटरिंग कमेटी में नांगिया को एक सदस्य (मीडिया एक्सपर्ट) के रूप में नामित किया गया है।

वर्तमान में तरुण नांगिया बतौर एसोसिएट एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) आईटीवी ग्रुप (ITV Group) से जुड़े हुए हैं और लोकप्रिय साप्ताहिक टेलिविजन शो ‘लीगली स्पीकिंग’ (Legally Speaking), 'पॉलिसी एंड पॉलिटिक्‍स' (Policy & Politics) और ‘ब्रैंड स्टोरी’ (Brand Story) को प्रड्यूस और होस्ट करते हैं। नंगिया ‘द डेली गार्जियन’ अखबार में Legally Speaking, Policy & Politics आर्टिकल भी क्यूरेट और एडिट करते हैं।

बता दें कि IEPFA एक फंड है, जो सेबी और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के गाइडेंस के तहत स्थापित किया जाता है।  

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'मीडिया इंडस्ट्री को आगे ले जाना है, तो यह बदलाव करना होगा जरूरी'

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
uday Shankar

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है। ये कहना है ‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney Company) कंपनी के एशिया प्रशांत के प्रेजिडेंट व फिक्की के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट उदय शंकर का। उन्होंने कहा कि विज्ञापन पर निर्भरता उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने महामारी के दौरान इसका सामना किया है।

हालांकि, उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस प्रकट किया कि भारतीय मीडिया उद्योग, विशेषकर प्रिंट, टीवी और डिजिटल क्षेत्र व्यापक स्तर पर विज्ञान राजस्व पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से साबित हुआ है कि यह व्यवस्था उद्योग के लिए काफी नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, ‘यदि उद्योग को आगे बढ़ना है तो उसे विज्ञापन पर निर्भरता कम करनी होगी।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महामारी के कारण हम सभी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि यह अस्थायी हैं, पर हम इसे आसानी से दूर कर सकते हैं। फिलहाल हम एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ चीजों में बदलाव करने की जरूरत है और मुझे लगता है कि अगले कुछ वर्षों में हमें इस पर ध्यान जरूर देना चाहिए कि इन सभी को कैसे बदलना है।’

उन्होंने कहा कि विशेषरूप से प्रिंट, टीवी और अब डिजिटल के लिए सबसे बड़ा अभिशाप यह है कि ये विज्ञापन पर कुछ जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं और वह भी इतना कि यह मीडिया को कस्टमर्स के साथ सीधा संबंध बनाने से रोकता है। उदय शंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मीडिया उद्योग उपभोक्ताओं के साथ अपने संबंधों के बल पर आगे बढ़ा है।

फिक्की फ्रेम्स के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह उद्योग बढ़कर 20 अरब डॉलर का हो गया है। इसमें से 10 अरब डॉलर के राजस्व का योगदान अकेले विज्ञापन का है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘हम सभी इसके लिए दोषी हैं। हमने दूरदर्शिता नहीं दिखाई, हमने अपने उत्पाद पर सब्सिडी लेने का प्रयास किया और छोटी चुनौतियों के लिए अड़चनें खड़ी कीं।’ शंकर ने कहा कि मीडिया उद्योग में दूरदर्शिता की कमी की वजह यह है कि बरसों से यह काफी हद तक विज्ञापनों पर कुछ अधिक निर्भर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘यदि हमें उद्योग को अगले स्तर पर ले जाना है, तो एक चीज निश्चित रूप से करने की जरूरत है। वह है, उपभोक्ता जो इस्तेमाल करें, उसके लिए भुगतान करें। इसके लिए हमें अपनी क्षमता का इस्तेमाल करना होगा और इच्छाशक्ति दिखानी होगी, क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे उद्योग बढ़ सकता है।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश में प्रिंट और फिल्में बहुत अच्छा कर रही हों, लेकिन अभी और भी बहुत कुछ किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वह उद्योग की लॉबी से जुड़े हुए हैं और देखा है कि पिछले कुछ साल में चीजें काफी बदल गई हैं।

उदय शंकर ने कहा, ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र रचनात्मक अर्थव्यवस्था का एक अहम भाग है। यह रोजगार और कारोबार पैदा कर सकता है, साथ ही भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।’  

उदय शंकर ने कहा कि इस साल कोविड-19 की वजह से उद्योग को बड़ा झटका लगेगा। विज्ञापन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से इसका प्रभाव और अधिक ‘कष्ट’ देने वाला होगा।

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मीडिया-मनोरंजन सेक्टर में नौकरियों को लेकर वित्त राज्य मंत्री ने कही ये बात

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Anuragthakur

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे। ये कहना है केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का। उन्होंने कहा कि घर से काम करने की व्यवस्था (वर्क फ्रॉम होम) आगे भी जारी रहेगी।

ठाकुर ने उद्योग मंडल फिक्की के एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन की स्थिति ने हमें दिखा दिया है कि घर से काम करने की व्यवस्था जारी रहेगी। हमें इस संकट में अवसरों को खोजना चाहिए। यह भारत के लिए आगे बढ़ने का सही समय है। ऐसे में मीडिया और मनोरंजन नौकरी देने वाले बड़े सेक्टर के रूप में उभर सकता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फिक्की फ्रेम में अपने विचार साझा करते हुए आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से हमें तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में ठाकुर ने कहा कि रचनात्मक कार्यों का क्षेत्र एक उच्च वृद्धि वाला क्षेत्र है। यदि इसको ठीक से पोषित किया जाए तो यह प्रतिस्पर्धा, उत्पादकता, सतत वृद्धि और रोजगार को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है और देश की निर्यात क्षमता को बढ़ा सकता है। भारत के सामने बड़ी चुनौती बौद्धिक संपदा अधिकारों और कॉपीराइट के डिजिटलीकरण, कुशल कार्यबल और वितरण नेटवर्क तक पहुंच की है। मीडिया और मनोरंजन उद्योग पूरी तरह से विज्ञापन पर निर्भर है जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी आय का मुख्य जरिया वितरण नेटवर्क और उपयोक्ताओं से आने वाला पैसा है। इन सभी पहलुओं को साथ लाने की जरूरत है ताकि आय और वृद्धि के नए रास्ते बनाए जा सकें।

ठाकुर ने कहा कि उनका मंत्रालय 20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू कर रहा है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के बेहतर प्रभाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोविड-19 संकट से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में उद्योग और नागरिकों के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य उसे इस तरह के अभूतपूर्व संकट से बाहर निकालेगा। 

 

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Vinod Dua

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि मंगलवार को 15 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 16 जुलाई को होगी।

दुआ के खिलाफ उनके यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। साथ ही विनोद दुआ को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

स्थानीय नेता का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडार और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की और हिमाचल प्रदेश पुलिस को इस मामले में अभी तक की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह बताए कि जांच के रिकॉर्ड का क्या है। अभी तक इसमें क्या हुआ है? रजिस्ट्री में सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट जमा कराएं।  

वहीं न्यायमूर्ति उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ विनोद दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश की पुलिस को रोक दिया है।

सुनवाई के दौरान दुआ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पत्रकार से वही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं और यह एक तरह से उन्हें परेशान करने जैसा ही है। इस पर पीठ ने कहा कि दुआ को इस मामले में पूरक सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। दुआ इस मामले की डिजिटल माध्यम से जांच में शामिल हुए थे।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 14 जून को रविवार के दिन इस मामले की सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। हालांकि, तब पीठ ने दुआ के खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि दुआ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जांच में शामिल होंगे।

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ‘मुझे बोलने और अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त है और मुझे सरकार की आलोचना का भी अधिकार है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायत के बारे में विवरण देने से इनकार कर दिया है जबकि शीर्ष अदालत ने इस बारे में स्थिति रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि दुआ पहले ही पुलिस द्वारा भेजे गये सवालों के जवाब दे चुके हैं और अब सवालों का नया सेट भेजा गया है। दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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'2030 तक 100 बिलियन डॉलर की हो सकती है मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री'

‘फिक्की फ्रेम्स 2020’ में ‘गूगल इंडिया’ के कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेजिडेंट संजय गुप्ता का कहना है कि सरकार की ओर से थोड़ा सा सपोर्ट इंडस्ट्री को तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Sanjay Gupta

कोरोनावायरस (कोविड-19) ने पिछले चार महीनों के दौरान पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया है। तमाम अन्य सेक्टर्स की तरह मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E Industry) पर भी इसका काफी असर पड़ा है। ‘फिक्की फ्रेम्स 2020’ (FICCI FRAMES 2020) में ‘गूगल इंडिया’ (Google India) के कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेजिडेंट संजय गुप्ता का कहना है कि यह समय आगे बढ़ने और इंडस्ट्री को पुराने रूप में वापस लाने का है।

‘फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी’ (FICCI Media and Entertainment Committee,) के चेयरमैन संजय गुप्ता का यह भी कहना है कि सरकार की ओर से थोड़ा सा सपोर्ट इंडस्ट्री को तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि समिति जल्द ही ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) को इस बारे में अपनी सिफारिशें भेजेगी। गुप्ता के अनुसार, ‘देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए हम सरकार के साथ मिलकर पूरी क्षमता से काम करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा मानना है कि वर्ष 2030 तक हम 100 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री बन सकते हैं।’  

गुप्ता ने बताया कि करों के ढांचे को सरल बनाने, इंडस्ट्री के इंफ्रॉस्ट्रक्चर पर ध्यान देने और फिल्म्स और गेम्स के एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने जैसी पहल के द्वारा कंपनियां दीर्घकालिक विकास के अवसर को ध्यान में रखते हुए इसमें निवेश कर सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘अल्पावधि में, हमें कुछ नीतिगत निर्णयों में तेजी लाने की आवश्यकता है जो इस सेक्टर को रिकवरी में मदद कर सकते हैं। हमें डीटीएच और रेडियो पर टैक्स के बोझ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने की जरूरत है। इसके अलावा हम थियेटर्स को स्पोर्ट्स एक्टिवटीज अथवा एजुकेशनल एक्टिविटीज दिखाने के लिए इस्तेमाल करने के बारे में भी विचार कर सकते हैं।

हम एडवर्टाइजिंग प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज के लिए सीएसआर धन का उपयोग करने के बारे में भी सोच सकते हैं, जो इस समय सोसायटी के लिए फायदेमंद है। मेरा मानना है कि इससे नकद लाभ नहीं होगा, लेकिन इससे इंडस्ट्री को अपने पुराने रूप में आने में काफी मदद मिलेगी।’

गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2019 में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का रेवेन्यू 20 बिलियन डॉलर हो गया था और इंडस्ट्री के रेवेन्यू में डिजिटल मीडिया का शेयर करीब 20 प्रतिशत था। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार रूप से मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर ने वर्ष 2019 में करीब पांच मिलियन लोगों को रोजगार दिया है। हालांकि पिछले चार महीनों के दौरान दुनिया काफी बदल चुकी है और इंडस्ट्री काफी मुश्किल दौर का सामना कर रही है।  

इसके साथ ही इन कठिनाइयों के बारे में गुप्ता का कहना है, ‘इस दौरान मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। स्टूडियो अब दोबारा से खुलना शुरू हो रहे हैं. जबकि सिनेमा हॉल्स अभी भी बंद पड़े हैं और कुछ समय तक ऐसा ही रहेगा। तमाम लोगों के घरों तक अखबार नहीं पहुंच पा रहा है और इस इंडस्ट्री की लाइफलाइन एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पिछले कुछ महीनों में काफी घट गया है। यदि पूरे 2020 की बात करें तो यह सेक्टर सिकुड़कर 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे भी बड़ी चुनौती नौकरियों पर प्रभाव और इससे प्रभावित लोगों की आजीविका है।’

अनुमान लगाया जा रहा है कि इंडस्ट्री में करीब 20 प्रतिशत लोगों की नौकरी पर तलवार चल सकती है और तमाम लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। इस महामारी ने पूरी दुनिया को व्यापार, एक-दूसरे पर निर्भरता और आर्थिक सुधार के बारे में बातचीत करने के लिए बाध्य किया है। इस समय इंडस्ट्री और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत है।

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TV चैनल के नाम पर कुछ इस तरह से पांच करोड़ रुपये गंवा बैठा आयुर्वेदिक चिकित्सक

एक वैद्याचार्य (आयुर्वेद चिकित्सक) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के एक पूर्व अधिकारी को गिरफ्तार किया है

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Fraud

टीवी चैनल खुलवाने के नाम पर एक वैद्याचार्य (आयुर्वेद चिकित्सक) से पांच करोड़ रुपये ठगने के आरोप में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (Indian Engineering Service) के एक पूर्व अधिकारी को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पूर्व अधिकारी का नाम सुनील कुमार झा है और वह जोधपुर में दूरदर्शन के डिप्टी डायरेक्टर के पद पर भी काम कर चुका है। सुनील को दूरदर्शन के स्टोरों से सामानों की धोखाधड़ी और हेराफेरी के संबंध में दूरदर्शन द्वारा दायर आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।     

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता पंडित लक्ष्मण दास भारद्वाज पेशे से आयुर्वेद चिकित्सक हैं। अपनी शिकायत में लक्ष्मण दास भारद्वाज का कहना है कि वह आयुर्वेद के सामानों के प्रमोशन के दौरान सुनील कुमार के संपर्क में आए थे। उस दौरान सुनील ने उन्हें खुद को एक धार्मिक चैनल का हेड बताया था। शिकायतकर्ता ने उक्त चैनल के माध्यम से अपने कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू कर दिया।

सुनील कुमार झा ने पंडित लक्ष्मण दास भारद्वाज से अपनी पत्नी बिंदु झा का भी परिचय कराया था। इस दौरान सुनील ने बिंदु झा को टीवी चैनल और कार्यक्रमों को चलाने की एक्सपर्ट के रूप में पेश किया था। पंडित लक्ष्मण दास के मुताबिक सुनील ने यह भी बताया था कि वह दूरदर्शन में भी काम कर चुका है और M/s वाइसराय इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (M/s Viceroy Engineers Pvt Ltd) का डायरेक्टर है।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि विश्वास जीतने के बाद सुनील कुमार झा ने उसे अपना टीवी चैनल खोलने और M/s एक्सप्रेस ब्रॉडकास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के बड़े शेयर खरीदने का झांसा दिया। इसके साथ ही टीवी चैनल के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की बात कही और झांसा देकर पांच करोड़ रुपये ले लिए।’

पंडित लक्ष्मण दास का कहना है, ‘बाद में मुझे पता चला कि सुनील कुमार झा ने मेरे साथ धोखाधड़ी की और अपनी पत्नी बिंदू झा व विनीत वशिष्ठ के नाम पर एक दूसरा टीवी चैनल खरीद लिया है।' इसके बाद पंडित लक्ष्मण दास ने सुनील कुमार झा के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सुनील कुमार झा को गिरफ्तार कर लिया है।

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The New Indian Express में अमिताभ बिश्नोई को मिली बड़ी जिम्मेदारी

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (The New Indian Express) में डिजिटल का वाइस प्रेजिडेंट बनाया गया है

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2020
Amitabh Bishnoi

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (The New Indian Express) में अमिताभ बिश्नोई को एक नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अब डिजिटल का वाइस प्रेजिडेंट बनाया गया है। बता दें कि इसके पहले वे दिसंबर 2019 से इस ऑर्गनाइजेशन में मार्केटिंग व डिजिटल ऑपरेशंस के वाइस प्रेजिडेंट थे।

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान IIMC के पूर्व छात्र रह चुके बिश्नोई ने साल 2008 से 2009 तक सहारा इंडिया मास कम्युनिकेशन (Sahara India Mass Communication) के लिए वेस्टर्न रीजन में मार्केटिंग हेड थे। वहां पर वह अखबार की मार्केटिंग का काम देखते थे। इससे पहले वह वर्ष 2000 से 2008 तक जागरण पब्लिकेशंस में (भोपाल एरिया) सीईओ के पद पर कार्यरत थे और मध्य प्रदेश में ब्रैंड डेवलपमेंट और परफॉर्मेंस का काम संभालते थे।

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