मुबंई में भी रेड एफएम ने शुरू किया अपराध के प्रति जागरूकता अभियान

दिल्ली में रेड एफएम की क्राइम की कह के लेंगे कैंपेन की सफलता के बाद इस अभियान की शुरुआत मुंबई में की गई है। बहादुरी की भावना को जिंदा रखते हुए, मुंबई में क्राइम ची घीयुन तक नाम से कैंपेन की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मकसद, स्थानीय महत्व के मुद्दे को जोर-शोर से उठाना और उन्हें एक जिम्मेदारी के तहत मनोरंजनात्मक तौर पर पेश करना है। रेड एफएम इस अभिय

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 29 September, 2012
Last Modified:
Saturday, 29 September, 2012
s4m
दिल्ली में रेड एफएम की क्राइम की कह के लेंगे कैंपेन की सफलता के बाद इस अभियान की शुरुआत मुंबई में की गई है। बहादुरी की भावना को जिंदा रखते हुए, मुंबई में क्राइम ची घीयुन तक नाम से कैंपेन की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मकसद, स्थानीय महत्व के मुद्दे को जोर-शोर से उठाना और उन्हें एक जिम्मेदारी के तहत मनोरंजनात्मक तौर पर पेश करना है। रेड एफएम इस अभियान के लिए आउट ऑफ होम एडवरटाइजिंग का मुख्य तौर पर सहारा ले रहा है। इस कैंपेन के लिए संत और योद्धाओं का सहारा लिया गया है। शहर में, आउटडोर मीडिया को वेंडर्स से सीधे तौर पर खरीदा गया है। इस अभियान पर टिप्पणी करते हुए, रेड एफएम की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, प्रोजेक्ट एंड प्रोग्रामिंग, निशा नारायण ने कहा, इस अभियान को लॉन्च करने के पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य हाल के दिनों में मुंबई में अपराध में बढ़ोतरी होना है। जब कोई अपराध होता है, तो अपराध के शिकार या गवाह या तो घटना की रिपोर्ट करते हैं या उसे छिपा देते हैं। रेड एफएम बहादुरी की प्रेरणास्पद कहानियों को मुंबई के निवासियों के साथ साझा करने की जिम्मेदारी लेता है। उन्होंने आगे कहा, हम साधारण व्यक्तियों के द्वारा उनकी उम्र, जाति या पेशे को छोड़कर अपराध के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई को लोगों के सामने रखेंगे। रेड एफएम मुंबई नंबर वन मॉर्निंग नंबर वन शो में प्रत्येक दिन अलग-अलग लोगों की प्रेरणास्पद कहानियों को ऑन-एयर किया जाएगा। आउटडोर कैंपेन को मुंबई शहर और उपनगरों में भी फैलाया जाएगा। उपनगरों में रहने वाले लोगों को ऑटो रिक्शा के पीछे, सिनेमा में विज्ञापन देने के साथ ही, बस शेल्टर्स पर भी कैंपेन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर ऑडियंस स्टोरी की डिटेल्स वीडियो रिकॉर्डिंग्स के साथ देख सकेंगे। चार-सप्ताह तक चलने वाले इस कैंपेन को दो फेज में बांटा जाएगा। प्री-लॉन्च के दौरान, रेडियो स्टेशन ने ऑन-एयर प्रोमो के द्वारा, सोशल मीडिया पर भी पूरे सप्ताह भर प्रविष्टियों को आमंत्रित किया है। इसके बाद, तीन सप्ताह तक श्रोताओं को बहादुर आदमी और औरतों की कहानियों को सुनने का मौका मिलेगा, जिन्होंने मुंबई में अपराध के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। इस अभियान के अंत में सभी 15 बहादुर व्यक्तियों को एक छत के नीचे लाया जाएगा और रेड एफएम उन्हें सम्मानित करेगा। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
TAGS media
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अपने सबस्क्राइबर्स के लिए BARC India ने किया ये बदलाव

नियामक संस्था ने इस बारे में अपने सबस्क्राइबर्स को एक ई-मेल भेजकर जानकारी दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
BARC India

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया ने ‘इंप्रेशंस 000’ (Impressions'000) का नाम बदलकर अब ‘एवरेज मिनट ऑडियंस’ (AMA'000) कर दिया है।  

अपने सबस्क्राइबर्स को भेजे एक ई-मेल में इस नियामक संस्था ने कहा है, ‘एक औद्य़ोगिक इकाई होने के नाते इंडस्ट्री को वैश्विक मानकों से मेल खाने वाले डाटा उपलब्ध कराने के लिए इसे विकसित करना और लगातार काम करना अनिवार्य है।’

इंप्रेशंस को ऐसे व्यक्तियों की संख्या से परिभाषित किया जा सकता है जो औसत रूप से प्रति मिनट किसी कार्यक्रम को देखते हैं। इसे टीवीटी (TVT) या ‘एवरेज मिनट ऑडियंस’ के रूप में भी जाना जाता है। बार्क का कहना है, ‘सबस्क्राइबर्स एक दिसंबर को जारी इन परिवर्तनों को सभी लॉगइन और मॉड्यूल पोस्ट पर अपने वर्जन (versions) को अपग्रेड कर देख सकेंगे।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकारों के प्रमुख संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से किया ये अनुरोध

बता दें कि हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले को सकरने जाते समय पुलिस ने पांच अक्टूबर को मथुरा से केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
sc558451

देश में पत्रकारों के प्रमुख संगठन केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की गैरकानूनी गिरफ्तारी और हिरासत के तथ्यों का पता लगाने के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच करायी जाए।

बता दें कि हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले को कवर करने जाते समय पुलिस ने पांच अक्टूबर को मथुरा से केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इस महिला की बाद में मृत्यु हो गयी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल यूनियन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में यूपी पुलिस के इस दावे को ‘पूरी तरह गलत और झूठा’ बताया है कि सिद्दीकी कप्पन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का कार्यालय सचिव हैं। संगठन ने दावा किया है कि कप्पन सिर्फ पत्रकार के रूप में ही काम करते हैं।

इस संगठन ने अपले हलफनामे में कहा है, ‘आरोपी सिद्दीकी कप्पन ने अपने अधिवक्ता से विशेषरूप से शीर्ष अदालत से यह अनुरोध करने के लिये कहा है कि उसे खुद को निर्दोष बताने के लिये उसका नार्को टेस्ट या ब्रेन मैंपिंग टेस्ट या किसी भी तरह के दूसरे वैज्ञनिक परीक्षण कराने की अनुमति दी जाये।’

यह हलफनामा यूपी पुलिस के जवाब के प्रत्युत्तर में दाखिल किया गया है। यूपी पुलिस ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि कप्पन पत्रकारिता की आड़ में जातीय कटुता और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की योजना से हाथरस जा रहे थे। शीर्ष अदालत इस पत्रकार की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए उसकी जमानत पर रिहाई के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केयूडब्लूजे ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने गैरकानूनी और अवैध हिरासत को न्यायोचित ठहराने और दुर्भावनापूर्ण कानूनी कार्यवाही को सही ठहराने के प्रयास में गुमराह करने और गलत तथ्यों के साथ हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा गया है कि कप्पन को गिरफ्तार करने के दावे के समर्थन में कोई सामग्री नही है।

कप्पन की कथित गैरकानूनी और अवैध हिरासत से रिहाई का अनुरोध करते हुये इस संगठन ने कहा है कि शीर्ष अदालत को अपने ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। हलफनामे में कहा गया है कि प्राथमिकी को पढ़ने मात्र से ही पता चलता है कि कथित अपराध के लिये जरूरी तथ्य इसमें नहीं हैं और आरोपी निर्दोष है।

हलफनामे में कहा गया है कि गिरफ्तारी की तारीख से 29 दिन तक आरोपी को उसके परिवार से दूर रखने की प्रतिवादी की कार्रवाई को किसी भी तरह से न्यायोचित नही ठहराया जा सकता।

सिद्दीकी कप्पन को पांच अक्टूर को हाथरस जाते समय रास्ते में गिरफ्तार किया गया था। वह हाथरस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुयी दलित युवती के घर जा रहे थे। इस युवती की बाद में सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने इस पत्रकार की गिरफ्तारी को शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी है। मथुरा पुलिस ने इस संबंध में दावा किया था कि उसने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबंध रखने वाले चार व्यक्तियों को मथुरा में गिरफ्तार किया है, जिनके नाम मल्लापुरम निवासी सिद्दीकी, मुजफ्फरनगर निवासी अतीकुर रहमान, बहराइच निवासी मसूद अहमद और रामपुर निवासी आलम हैं। इस मामले में पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया या पीएफआई से कथित रूप से संबंध रखने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के साथ ही गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

पीएफआई पर पहले भी इस साल के शुरू में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध के लिये धन मुहैया कराने के आरोप लग चुके हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कोरोना के कहर से नहीं बच सके दुनियाभर के 500 पत्रकार, जानें, भारत का हाल   

एक रिपोर्ट सामने आई है, जो यह बताती है कि कैसे 1 मार्च से 56 देशों के 500 पत्रकार इस महामारी की जद में आ गए और इससे लड़ते-लड़ते अपने घुटने टेक दिए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
Corona

दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच स्विट्जरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया अधिकार निकाय ‘प्रेस एम्ब्लम कैंपेन’ (Press Emblem Campaign) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जो यह बताती है कि कैसे 1 मार्च से 56 देशों के लगभग 500 पत्रकार इस महामारी की जद में आ गए और इससे लड़ते-लड़ते अपने घुटने टेक दिए।

अपनी रिपोर्ट में इस निकाय ने कहा कि नवंबर में ही, दुनियाभर में लगभग 47 मीडियाकर्मी कोरोना वायरस से संबंधित बीमारी का शिकार हो गए, जिसकी वजह से इनकी मृत्यु हो गई।

PEC की जनरल सेक्रेट्री ब्लाइस लेम्पेन (Blaise Lempen) ने कहा कि दुर्भाग्यवश, COVID-19 महामारी मीडिया इंडस्ट्री से और अधिक मीडियाकर्मियों की जान ले सकती है। यह बहुत बड़ा नुकसान है। भारत, ब्राजील, अर्जेंटीना और मैक्सिको जैसे देशों में पत्रकारों के बीच पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है।

ब्लाइस लेम्पेन ने कहा कि लैटिन अमेरिका (Latin America) में आधे से अधिक पीड़ित हैं। वहीं एशिया (Asia) में 125 मौत, यूरोप (Europe) में 38 मौत, उत्तरी अमेरिका (North America) 26 मौत और अफ्रीका (Africa) 24 मीडियाकर्मियों की मौत हुईं हैं।

उन्होंने बताया कि पेरू एक ऐसा देश बन गया है, जहां  COVID-19 से सबसे ज्यादा 93 मीडियाकर्मियों की मौत हुई है। इसके बाद दूसरे नंबर पर है भारत, जहां 51 मीडियाकर्मियों की मृत्यु इस महामारी की वजह से हुई है।

43 मीडियार्मियों की मौत के साथ ब्राजील ने तीसरा नंबर पर है। इसके बाद इक्वाडोर (41), बांग्लादेश (39), मैक्सिको (33), यूएसए (25), पाकिस्तान (12), पनामा (11), यूके (10), नाइजीरिया (8), अफगानिस्तान, डोमिनिकन रिपब्लिक और होन्डुरस तीनों जगह 7-7 मीडियाकर्मियों की मौत हुई है। अर्जेंटीना, निकारागुआ और वेनेजुएला में तीनों जगह 6-6, वहीं, कोलंबिया, फ्रांस, रूस और स्पेन में 5-5 मीडियाकर्मियों की मृत्यु हुई है। वहीं इटली में 4 मीडियाकर्मियों की मौत हुई है।

पीईसी की ओर से भारत की प्रतिनिधि नवीन ठाकुरिया ने कहा, ‘भारत ने हाल ही में पत्रकार राजीव कटारा (60) को खो दिया, जिनकी 26 नवंबर को COVID-19 से मृत्यु हो गई। नई दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

वहीं इससे पहले, नोएडा स्थित वरिष्ठ पत्रकार पंकज शुक्ला (50) की COVID-19 की वजह से जेपी अस्पताल में 20 नवंबर को निधन हो गया था। उनसे पहले हरियाणा के पत्रकार राकेश तनेजा (51) की भी 16 नवंबर को फरीदाबाद के एक अस्पताल में COVID -19 से मौत हो गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह अचानक हुई क्षति के साथ ही मुख्यधारा की मीडिया इंडस्ट्री भी इस महामारी से काफी हद तक प्रभावित हुई है। मीडिया इंडस्ट्री में कई प्रिंट मीडिया मालिकों ने फिजकली न्यूजपेपर प्रकाशित करना बंद कर दिया और डिजिटल स्पेस की ओर रुख कर लिया। कुछ प्रिंट हाउस ने अलग-अलग जगह अपने एडिशन बंद कर दिए, कुछ ने पेजों की संख्या कम कर दी, कुछ लोगों ने वेतन में कटौती की। यहां तक कि कुछ मीडिया हाउस ने विज्ञापन राजस्व में कमी का हवाला देकर वरिष्ठ पत्रकारों सहित कई मीडियाकर्मियों की छुट्टी कर दी।   

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया में हाथरस पीड़िता की तस्वीर छापने पर रोक लगाने की सुनवाई से SC का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस कांड मामले में दायर उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें मीडिया में हाथरस पीड़िता की फोटो छापने पर सवाल उठाया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
SC

सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस कांड मामले में दायर उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें मीडिया में हाथरस पीड़िता की फोटो छापने पर सवाल उठाया गया था और बलात्कार और गंभीर चोटों से संबंधित कानूनों में सुधार की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि हम कानून पर कानून नहीं बना सकते है और याचिकाकर्ता मामले पर सरकार से निवेदन कर सकता है।

याचिका में यौन हिंसा के मामलों की सुनवाई में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीड़िता की तस्वीर छापी गई। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई की। इस बेंच में जस्टिस सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं। बेंच ने कहा कि इन मुद्दों का कानून से कोई लेना-देना नहीं है। लोग ऐसी चीजें करना चाहते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके लिए पर्याप्त कानून है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं होती हैं।

बेंच ने कहा, हम कानून पर कानून नहीं बना सकते। यहां कानून बनाने के लिए अदालत का विवेक सही नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता के इस मामले को हमारे संज्ञान में लाने के प्रयासों की सराहना करते हैं लेकिन हम इस मामले में कानून नहीं बना सकते। कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं और विश्वास करते हैं कि प्रतिवादी इस पर गौर करेंगे।

शीर्ष अदालत ने 27 अक्टूबर को कहा था कि हाथरस मामले में सीबीआई जांच की निगरानी इलाहाबाद उच्च न्यायालय करेगा और सीआरपीएफ पीड़िता के परिवार और गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराएगा। न्यायालय ने अक्टूबर में कुछ याचिकाओं पर फैसला सुनाया था जिसमें घटना और अंतिम संस्कार के तौर तरीकों को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।

आपको बता दें कि 19 सितंबर को हाथरस में चार आरोपियों ने 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था। इसके बाद इलाज के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित तौर पर उसके माता-पिता की सहमति के बिना रात में उसका दाह संस्कार कर दिया था, जिसके बाद देश में इस मामले को लेकर काफी आक्रोश फैल गया था। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया था।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘देशबंधु’ के प्रधान संपादक ललित सुरजन की तबियत बिगड़ी, CM ने की स्वस्थ होने की कामना

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन को ब्रेन हैमरेज होने के कारण मंगलवार शाम नोएडा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 December, 2020
Last Modified:
Wednesday, 02 December, 2020
LalitSurjan

देशबंधु समाचार समूह के प्रधान संपादक व वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन को ब्रेन हैमरेज होने के कारण मंगलवार शाम नोएडा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 74वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार सुरजन अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में हैं। डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वरिष्ठ पत्रकार और देशबंधु पत्र समूह के मुख्य संपादक ललित सुरजन के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार और देशबंधु पत्र समूह के मुख्य संपादत ललित सुरजन जी गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं। मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। वे दीर्घायु हों और हमारा मार्गदर्शन करते रहें।

ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं। वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं। ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सदभाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

तमाम न्यूज पोर्टल्स पर चली PTI की इस खबर को प्रसार भारती ने बताया फेक

‘प्रसार भारती’ के CEO शशि शेखर ने खुद इसका खंडन किया और पीटीआई की इस खबर को फेक न्यूज करार दिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 December, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 December, 2020
Prasar Bharati

तमाम न्यूज वेबसाइट्स पर खबर चलाई गई कि भाकपा सांसद बिनय विश्वम ने केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रसार भारती सरकार द्वारा वित्त पोषित रेडियो और टीवी चैनलों को बंद करने का प्रयास कर रही है। यह खबर वेबसाइट्स पर पीटीआई (PTI) के हवाले से चलाई गई, लेकिन बाद में इस खबर को पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती ने फेक बताया है।

‘प्रसार भारती’ के CEO शशि शेखर ने खुद इसका खंडन किया और पीटीआई की इस खबर को फेक न्यूज करार दिया। उन्होंने कहा कि एक न्यूज संज्ञान में आई है कि पीटाआई ने रिपोर्ट में रेडियो स्टेशन बंद होने का दावा किया है। जोकि फेक है। यह फर्जी खबर है। आकाशवाणी का कोई भी रेडियो स्टेशन न तो केरल में और न ही भारत में कहीं भी बंद किया जा रहा है।  

पीटीआई की ओर से दावा किया गया कि भाकपा सांसद बिनय विश्वम ने केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रसार भारती सरकार द्वारा वित्त पोषित रेडियो और टीवी चैनलों को बंद करने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ऑनलाइन माध्यम इनका विकल्प नहीं हो सकते हैं। पीटीआई की खबर के मुताबिक, विश्वम ने कहा कि यह एक 'गलत' विचार है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय आसानी से इंटरनेट का उपयोग कर सकता है।

इस खबर में आगे बताया गया कि विश्वम ने कहा कि इंटरनेट की उपलब्धता वित्तीय, सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है और इन बाधाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए यह पत्र लिखा है, जिस पर तत्काल आपके हस्तक्षेप की आवश्यकता है। प्रसार भारती सरकार द्वारा वित्त पोषित सूचना माध्यमों के प्रांतीय एवं राष्टीय स्तर के संस्थानों को बंद करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा इसी तरह पहले 2017 में की गई कार्रवाई में 769 टीवी चैनलों को बंद किया गया था।

उनका आरोप था कि सरकार ऐसा मानती है कि अब इन TV और रेडियो चैनलों का संचालन आर्थिक रूप से ठीक नहीं है। वो यहां तक कह बैठे कि नवंबर 18, 2020 को हुई ‘प्रसार भारती’ की एक बैठक में ही इस पर निर्णय लिया गया कि केरल के चैनल्स में काफी मजबूती से कटौती की जाएगी। उन्होंने इन चैनलों के संचालन को मजबूत करने, उचित मात्रा में मानव संसाधन व अन्य संसाधनों को मुहैया कराने की भी अपील की।

हालांकि, ‘प्रसार भारती’ की प्रतिक्रिया के बाद ये स्पष्ट हो गया कि ये आरोप नहीं बल्कि सिर्फ कोरे दावे थे, जिनका सच्चाई से कोई सरोकार था ही नहीं। वहीं इसे पीटीआई ने भी इसे ज्यों का त्यों चला दिया। शशि शेखर ने स्पष्टीकरण के बाद पीटीआई ने दावा किया कि उसने ऐसी कोई खबर चलाई ही नहीं है, बल्कि राज्यसभा सांसद के आरोपों को प्रकाशित किया है।

न्यूज एजेंसी ने कहा कि उसने सीईओ शशि शेखर द्वारा इस खबर को नकारे जाने के बाद उनके स्पष्टीकरण को भी खबर में शामिल किया है। इसके बाद शशि शेखर ने नसीहत दी कि अच्छा होता अगर जल्दबाजी में खबर प्रकाशित करने से पहले पीटीआई ने स्पष्टीकरण ले लिया होता।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि इसी तरह पीटीआई ने जालंधर, भुज और गोरखपुर स्टेशनों को बंद किए जाने की अफवाह फैलाई थी, जबकि इन तीनों ही स्टेशनों से जमीनी, सैटेलाइट और इंटरनेट  इन तीनों ही माध्यमों से कार्यक्रम पेश कर रहे हैं।

‘प्रसार भारती’ के सीईओ ने कहा कि ऑल इंडिया रेडियो एक मात्र ऐसा ब्रॉडकास्टर है जो FM, SW, डिजिटल, डीआरएम और इंटरनेट– इन सभी माध्यमों से रेडियो स्टेशनों का संचालन करता है। साथ ही तमाम बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद देश के कठिन व दुर्गम इलाकों तक अपनी सेवाएं पहुंचाता है। साथ ही कहा कि तकनीक का इस्तेमाल कर के इसे और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा रही है। इसके लिए डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन का सहारा लिया जा रहा है।

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘चैनल 7’ ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया पर लगाए गंभीर आरोप, पहुंचा अदालत

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज का आखिरी मुकाबला बुधवार को मानुका ओवल, कैनबरा में खेला जाएगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 December, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 December, 2020
CA

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज का आखिरी मुकाबला बुधवार को मानुका ओवल, कैनबरा में खेला जाएगा। लेकिन इससे पहले ही एक विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि यह विवाद भारत-ऑस्ट्रेलिया टीमों के बीच नहीं बल्कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) और ‘चैनल 7’ के बीच है, जोकि नया नहीं है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैचों का प्रसारण करने वाले ‘चैनल 7’ ने विवादों के बढ़ने के बाद अब कई बड़े आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘चैनल 7’ क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अदालत चला गया है और उसने ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड पर बीसीसीआई से डरने का आरोप लगा दिया है। ‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ के अनुसार, चैनल ने अदालत में हलफनामा दायर करने की पुष्टि की है। चैनल ने कहा है कि सीए ने बीसीसीआई के हितों के अनुसार सीरीज के कार्यक्रम में बदलाव करके प्रसारण अनुबंध का उल्लंघन किया है।

चैनल की तरफ से कहा गया है कि बोर्ड वही करता है जिससे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को खुशी मिलती है। वह भारतीय क्रिकेट बोर्ड से डरता है और उसको खुश करने के लिए ही उसके मुताबिक टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव करता है।

सेवन वेस्ट मीडिया के मुख्य कार्यकारी जेम्स वारबर्टन ने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को भारत के खिलाफ वनडे और टी20 मैचों की बजाय दिन रात के टेस्ट के साथ श्रृंखला का आगाज करना था जो अब एडिलेड में 17 दिसंबर से खेला जाएगा। उन्होंने कहा, 'यह शर्मनाक है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया बतौर प्रसारक हमारा सम्मान नहीं करता और बीसीसीआई के आगे भीगी बिल्ली बना हुआ है। वह बीसीसीआई से डरता है।'

चैनल का कहना है कि सीए के आला अधिकारी बीसीसीआई और दूसरे घरेलू प्रसारण साझेदार फॉक्सटेल की मर्जी से चल रहे हैं। चैनल ने कहा कि वह दौरे के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के संदर्भ में सीए, बीसीसीआई, फॉक्स्टेल और प्रदेश सरकारों के अधिकारियों के बीच हुए ई-मेल देखना चाहता है।

बता दें विराट कोहली की पैटरनिटी लीव से भी ‘चैनल 7’  को बड़ा झटका लगा है और उसके प्रतिद्धंदी चैनल फॉक्स स्पोर्ट्स को इससे फायदा हुआ है। दरअसल ‘चैनल 7’ के पास चार टेस्ट मैचों की टेस्ट सीरीज के अधिकार हैं, जिसमें विराट कोहली सिर्फ एक टेस्ट मैच खेलेंगे। वहीं फॉक्स स्पोर्ट्स ने भारत-ऑस्ट्रेलिया की वनडे और टी20 सीरीज के अधिकार हासिल किये हैं और विराट कोहली पूरी सीरीज खेल रहे हैं. दोनों चैनलों ने विराट कोहली पर ही सीरीज का पूरा प्रोमो बनाया था लेकिन विराट कोहली की छुट्टियों से चैनल 7 को नुकसान होने की बात कही जा रही है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अपनी जिंदगी से जुड़े तमाम पहलुओं से रूबिका लियाकत यूं कराएंगी रूबरू

‘एबीपी न्यूज’ की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 01 December, 2020
Last Modified:
Tuesday, 01 December, 2020
Rubika

‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अपने बेबाक शैली से रूबिका ने दर्शकों के दिलों पर अपनी खास छाप छोड़ी है। उनके सवालों की बौछार के आगे अच्छे-अच्छे बगलें झांकने लगते हैं, लेकिन अब रूबिका खुद कई सवालों के जवाब देंगी। 

दरअसल, L&T Mutual Fund के सीईओ कैलाश कुलकर्णी के साथ एक बातचीत में रूबिका बताएंगी कि मीडिया इंडस्ट्री में अब तक का उनका सफर कैसा रहा है और इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

वर्चुअल रूप से एक दिसंबर की शाम चार बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में वह अपने अनुभव भी शेयर करेंगी। कार्यक्रम में रजिस्टर करने के लिए http://lntwinnerscircle.com पर क्लिक कर सकते हैं।

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

IPL को लेकर ‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन उदय शंकर ने कही ये बात

18वीं हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में अपने विचार रख रहे थे ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 30 November, 2020
Last Modified:
Monday, 30 November, 2020
IPL

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन उदय शंकर का कहना है कि महामारी के बाद सिनेमा हॉल्स में लोग आना शुरू होंगे और थियेटर का कारोबार बढ़ेगा। 18वीं हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में उदय शंकर का कहना था कि स्ट्रीमिंग थिएटर अनुभव से मुकाबला नहीं कर सकता है।  

वर्चुअल रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में उदय शंकर का यह भी कहना था, ‘हमने महसूस किया कि जब भी आईपीएल हुआ तो यह काफी बड़ा होगा। हालांकि हम ये भी जानते थे कि तमाम चुनौतियां भी सामने आएंगी। यह पहली बार होगा, जब आईपीएल के दौरान स्टेडियम में दर्शक नहीं होंगे। इसलिए हमें पता था कि यह या तो सबसे बड़ा आयोजन हो सकता है अथवा सबसे बेकार। पूर्व के मुकाबले इस बार आईपीएल की व्युअरशिप 25-30 प्रतिशत ज्यादा रही है।’

इस दौरान उदय शंकर ने कहा, ‘बड़े चैनल्स के सामने तमाम तरह की चुनौतियां आई हैं और इसके लिए सिर्फ कोविड-19 को दोषी नहीं दिया जा सकता है। ऐसा देश में विनियामक वितरण (regulatory dispensation) के कारण हुआ है। टेलिविजन विनियामक विचारहीनता (regulatory thoughtlessness) का सबसे ज्यादा शिकार रहा है।’  

ओटीटी रेगुलेशंस के बारे में उदय शंकर का कहना था कि वैश्विक स्ट्रीमिंग सेवाओं को भारत की विविधता और संस्कृति के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए। भारतीय कंज्यूमर्स ज्यादातर नियामकों की तुलना में अधिक विचारशील और परिपक्व हैं और उन्हें हर उस चीज पर फिल्टर की जरूरत नहीं है, जिसे वे देखते हैं।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Securities Market में कारोबार करने पर NDTV के प्रमोटर्स पर लगी रोक, कंपनी करेगी अपील

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर दो साल के लिए प्रतिभूति बाजार (Securities Market) में कारोबार की रोक लगा दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 30 November, 2020
Last Modified:
Monday, 30 November, 2020
ndtv

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर दो साल के लिए प्रतिभूति बाजार (Securities Market) में कारोबार की रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई भेदिया कारोबार (Insider Trading) में संलिप्तता के चलते की गई है। सेबी ने दोनों को 12 साल पहले की भेदिया कारोबार गतिविधियों से अवैध तरीके से कमाए गए 16.97 करोड़ रुपए लौटाने को भी कहा है।

सेबी ने इनके अलावा एक से दो साल के लिए सात अन्य व्यक्तियों एवं निकायों पर भी पाबंदी लगा दी है। इनमें से कुछ को अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील सूचनाओं के जरिये शेयरों में कारोबार के जरिए की गई अवैध कमाई को लौटाने को कहा गया है। सेबी ने सितंबर, 2006 से जून, 2008 के दौरान कंपनी के शेयरों में कारोबार की जांच करने के बाद यह कदम उठाया है। सेबी ने पाया कि उक्त अवधि के दौरान भेदिया कारोबार से संबंधित कई प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।

वहीं एनडीटीवी ने इन आरोपों से इनकार किया है। एनडीटीवी ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसके फाउंडर प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ सेबी का आदेश गलत तथ्यों के आंकलन पर आधारित है और कंपनी तुरंत ही इसके खिलाफ अपील करेगी।

आइए जानते हैं क्या है भेदिया कारोबार (Insider Trading)-

भेदिया कारोबार वैसे मामले को कहा जाता हैं जहां कीमत से जुड़ी अप्रत्याशित संवेदनशील जानकारी अपने पास रखते हुए शेयरों में कारोबार किया जाता है। या यूं कहें कि जब किसी कंपनी के मैनेजमेंट से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति कंपनी की अंदरूनी जानकारी के आधार पर शेयर खरीद या बेचकर गैरकानूनी तरीके से लाभ कमाता है तो वह इनसाइडर ट्रेडिंग की श्रेणी में आता है। सेबी नियमन निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए भेदिया कारोबार पर रोक लगाता है।  

लिहाजा, एनडीटीवी के प्रमोटर्स से सेबी ने भेदिया कारोबार गतिविधियों से अवैध तरीके से कमाए गए पैसे लौटाने को कहा है। सेबी ने 17 अप्रैल, 2008 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत ब्याज के साथ यह राशि अदा करने को कहा है। साथ ही सेबी ने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति व निकाय अकेले या आपस में मिलकर राशि का भुगतान कर सकते हैं।

सेबी ने तीन अलग आदेशों में कहा कि इन सभी निकायों ने भेदिया कारोबार रोक नियमनों का उल्लंघन किया है।

सेबी ने पाया कि नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (एनडीटीवी) में मूल्य को लेकर संवेदनशील जानकारियां रखने योग्य पदों पर रहते हुए प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने भेदिया कारोबार में संलिप्त होकर अवैध तरीके से 16.97 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की। प्रणय रॉय तब कंपनी के चेयरमैन एवं पूर्णकालिक निदेशक थे। राधिका रॉय उक्त अवधि के दौरान कंपनी की प्रबंध निदेशक थीं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए