ट्रिब्यून-आधार विवाद में TOI की रिपोर्ट कुछ अलग कहती है...

ट्रिब्यून के रिपोर्टर ने आधार को लेकर जो रिपोर्ट छापी उस पर हंगामा हो गया है...

Last Modified:
Monday, 08 January, 2018
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

ट्रिब्यून के रिपोर्टर ने आधार को लेकर जो रिपोर्ट छापी उस पर हंगामा हो गया है। एडिटर्स गिल्ड ने ही नहीं ब्रॉडकास्टर्स एडिटर्स एसोसिएशन ने भी रिपोर्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की निंदा की है और मांग की है कि जल्द से जल्द ये एफआईआर वापस ली जाए। मीडिया के तमाम जाने पहचाने चेहरों ही नहीं, कई राजनीतिक दिग्गजों ने भी यूआईडीएआई अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं और रिपोर्टर की तारीफ की है।

लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट बताती है कि अभी तक इस एफआईआर में किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है, यहां तक कि खबर लिखने वाली रिपोर्टर रचना खैरा को भी नहीं। TOI ने ये रिपोर्ट जालंधर और दिल्ली के रिपोर्टर्स की जांच के आधार पर छापी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि, उन्होंने अभी तक किसी भी व्यक्ति को इस केस में आरोपी नहीं बनाया है, बल्कि एफआईआर अज्ञात के नाम से लिखी गई है। एफआईआर के पहले पेज पर आरोपी के कॉलम में पुलिस ने अज्ञात दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक ये एफआईआर अभी ‘ओपन एंडेड’ है, यानी बाद में इसमें तब्दीली की जा सकती है। हालांकि पुलिस के मुताबिक यूएडीआईए अथॉरिटी ने पूरे केस की जानकारी दी है, तो रिपोर्टर रचना समेत केस से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम उसमें लिखे हैं, लेकिन वो आरोपी के तौर पर नहीं हैं।

दिल्ली पुलिस का स्टेटमेंट ये है- "On 5.1.18, UIDAI lodged a complaint in the cyber cell that an input had been received through the newspaper Tribune regarding violation of the Grievance Redressal System of UIDAI. Accordingly, the complaint given by UIDAI has been converted into an FIR which is "open ended"... The complaint given by UIDAI has only mentioned the name of the reporter who was purportedly given access. Investigation has been initiated with the present focus on tracing and booking the person who has shared the password." 

अब ये तो जाहिर था कि अगर केस की पूरी जानकारी देनी थी तो उस अखबारी रिपोर्ट और उसको लिखने वाले के साथ उस रिपोर्ट में उल्लेखित लोगों की भी डिटेल देनी थी ताकि पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ा सके।

TOI की रिपोर्ट में यूएडीआईए के हवाले से जो बयान दिया गया है वो भी इसी तरफ इशारा करता है, "duty bound to disclose all details of the case and name everyone who is an active participant in the chain of the events leading to commission of the crime... so that police can conduct proper investigation and bring the real culprit to justice… "It does not mean that all those who are named in the report are necessarily guilty or being targeted. Whether one is guilty or not will be decided after police investigations and trial,"

यूएडीआई का ये भी कहना है कि उन्होंने अखबार से इस बारे में भी जानकारी मांगी थी कि रिपोर्टर को कितने लोगों और किस किस की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट और आइरिश स्कैन की डिटेल मिली थी, वो जानकारी मुहैया करवाएं, लेकिन वो भी अभी तक नहीं मिली है। 

जाहिर है ऐसे में जबकि ये पता करने की जरूरत है कि क्या वाकई ट्रिब्यून रिपोर्टर रचना ने एक बड़ा स्कैम उजागर किया है, क्या वाकई में हर किसी के फिंगर प्रिंट और आइरिश स्कैन पांच सौ रुपए में ऑनलाइन उपलब्ध हैं और कौन गैंग इसमें सेंध लगाकर पैसा बना रहा है और इस चूक के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है

इसके बजाय मसला मीडिया बनाम यूएडीआए के बीच बन गया लगता है। ऐसे में जबकि दिल्ली पुलिस ने जांच तक किसी को आरोपी ना बनाकर और TOI ने सावधानी से हर फैक्ट की जांच कर रिपोर्ट तैयार की है। आप TOI की रिपोर्ट इस हेडिंग पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

‘Open-ended’ FIR filed in Aadhaar leak case



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डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनने का सपना देख रहे युवा प्रफेशनल्स को FB इंडिया के MD की सीख

फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन ने ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ तमाम मुद्दों पर चर्चा की।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
Ajit Mohan

भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था में से एक है, जो चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में 480 मिलियन से ज्यादा एक्टिव इंटरनेट यूजर्स हैं, जो इसे दुनियाभर में एक महत्वपूर्ण विकासशील मार्केट बनाते हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी किस तरह से कंज्यूमर्स के व्यवहार को प्रभावित करती है? और वैश्विक स्तर पर भारत एक महत्वपूर्ण डिजिटल बाजार क्यों है? यह समझने के लिए ‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया गया। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक आयोजित इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से इन मुद्दों पर चर्चा की।

वर्तमान दौर के बारे में अजीत मोहन का कहना था कि भारत इन दिनों मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है और कोरोनावायरस (कोविड-19) से लड़ाई में भारत के सहयोग के लिए फेसबुक आर्थिक के साथ-साथ स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी अपना योगदान देने का प्रयास कर रही है। अजीत मोहन ने कहा, ‘हेल्थ केयर के मोर्चे पर फेसबुक ने सरकार के साथ हाथ मिलाया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां के लोगों के पास स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी उपलब्ध हो। इसके अलावा हमने छोटे व्यवसायों के लिए 100 मिलियन डॉलर का ग्लोबल फंड भी तैयार किया है।’

फेसबुक एमडी के अनुसार, उनकी कंपनी ने ‘कोविड-हब’ (Covid-hub) तैयार किया है, यह एक इंफॉर्मेशन पोर्टल है, जहां पर लोग एक क्लिक कर महामारी से संबंधित सभी सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘करीब दो बिलियन लोगों ने इस हब को देखा है और 350 मिलियन से ज्यादा लोगों ने इस पर क्लिक किया है और सक्रिय रूप से वहां से जानकारी ले रहे हैं।’ अजीत मोहन ने बताया कि भारत के आर्थिक पुनरुद्धार (economic revival) खासकर छोटे व्यवसायों के पुनरुद्धार पर फेसबुक का फोकस है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि छोटे व्यवसायों की मदद करने, बाजारों को सक्रिय करने, कस्टमर्स तक पहुंचने के मामले में यह हमेशा हमारी विशेष ताकत रही है।’   

इस चर्चा के दौरान यह पूछे जाने पर कि कंपनी की वैश्विक योजनाओं में भारत की स्थिति क्या है? अजीत मोहन का कहना था कि फेसबुक के लिए भारत काफी महत्वपूर्ण बाजार है। उन्होंने कहा, ‘हमने ‘जियो’ (Jio) में 5.7 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। इससे साफ पता चलता है कि भारत की ओर हमारा झुकाव कितना है। फेसबुक और वॉट्सऐप पर सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। यहां पर इंस्टाग्राम भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में इन तीनों ऐप्स की भूमिका बहुत ज्यादा है और बड़ी संख्या में यहां के लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हम इस वास्तविकता से इनकार नहीं कर सकते हैं कि अधिकांश लोगों की दिनचर्या वॉट्सऐप से ही शुरू होती है और इससे ही खत्म होती है। फेसबुक भी दोस्तों और परिवार से जुड़ने में काफी महत्वूर्ण भूमिका निभाती है।’

भारत के महत्व पर जोर देते हुए अजीत मोहन ने यह भी कहा, ‘यदि आप पिछले पांच वर्षों को देखें तो पता चलेगा कि भारत को बदलने में डिजिटल की विशेष भूमिका रही है। चीन समेत कोई भी ऐसा देश नहीं है, जहां पर चार सालों में हमने 400-500 मिलियन लोगों को ऑनलाइन आते हुए और मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हुए देखा है। जियो ने इसमें काफी प्रमुख भूमिका निभाई है। भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ी है और इंटरनेट की दरें काफी सस्ती हुई हैं, यह तो सिर्फ शुरुआत है। इससे सभी प्रकार के उद्योगों को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिला है। अभी हम कंज्यूमर्स को ऑनलाइन लेकर आए हैं और हमारा अगला काम 60 मिलियन छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन लेकर आना है।’

अजीत मोहन ने इसके साथ यह भी जोड़ा कि एक अमेरिक टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में फेसबुक का मानना है कि भारत एक खुला लोकतांत्रिक देश है। यहां फेसबुक सभी के लिए एक ओपन प्लेटफॉर्म है। इस दौरान अजीत मोहन ने इंस्टाग्राम में हाल के दिनों में हुई ग्रोथ और पिछले दिनों लॉन्च किए गए इसके शॉर्ट फॉर्म विडियो प्रॉडक्ट ‘रील्स’ (Reels) के बारे में भी बातचीत की। अजीत मोहन का कहना था, ‘देश में इंस्टाग्राम में हुई ग्रोथ अभूतपूर्व है। इसने वैश्विक संस्कृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें शॉर्ट फॉर्मेट के वीडियो तैयार करने में अवसर दिखे हैं और हमने अब इसके लिए रील्स को लॉन्च किया है।‘

इस मौके पर फेसबुक के एमडी ने यह भी बताया कि दुनिया में सबसे पहले रील को कहीं और की जगह भारत में ही क्यों लॉन्च किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब भी हम किसी प्रॉडक्ट को कहीं लॉन्च करने के बारे में सोचते हैं, भारत उस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इस नए प्रॉडक्ट को लॉन्च करने का आइडिया काफी पहले से था, अब इसे लागू करने का सही समय था। यदि हम इंस्टाग्राम की ग्रोथ देखें तो यह काफी तेजी से हुई है।’ अजीत मोहन ने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें बड़े शहरों की तुलना में  छोटे कस्बों और शहरों से कंटेंट निर्माण में बढ़ोतरी देखने को मिली है औऱ इससे उन्हें समझ आया कि इंस्टाग्राम ने सोसायटी में कितनी गहराई तक अपनी जगह बना ली है। मौजूदा समय में इंस्टाग्राम बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी के साथ-साथ उनके फॉलोअर्स के लिए एक जगह बन गया है और यह ऐसा ही रहेगा, पर रील्स ने नए क्रिएटर्स के लिए भी रास्ते खोले हैं।

ऐसे युवा प्रफेशनल्स जो डिजिटल इकनॉमी में बड़ा बनना चाहते हैं और नई चीजें सीखना चाहते हैं, उन्हें सलाह देते हुए सेशन के आखिर में अजीत मोहन ने कहा, ‘चीजों को जानने-समझने और उसके अनुसार निर्णय लेने के साथ सीखने की दक्षता (learning agility) ये दो लीडरशिप स्किल हैं और इनका अभ्यास करना चाहिए।’

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पत्रकार खुदकुशी केस में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने की ये बड़ी कार्रवाई

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2020
aiimstarun54

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (AIIMS)  में एक पत्रकार की खुदकुशी मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स ट्रॉमा सेंटर (जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि 6 जुलाई को कोरोना पाड़ित पत्रकार ने AIIMS के ट्रामा सेंटर की चौथी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पत्रकार की पहचान करीब 34 वर्षीय तरुण सिसोदिया के रूप में हुई थी, जो दिल्ली में दैनिक भास्कर अखबार में बतौर रिपोर्टर कार्यरत थे। सिसोदिया कोरोना पॉजिटिव थे और इलाज के लिए एम्स में भर्ती थे।

हालांकि पत्रकार की आत्महत्या की जांच के लिए केंद्रीय मंत्री ने एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे और 48 घंटे के अंदर जांच की रिपोर्ट मांगी थी। इस जांच समिति में चीफ ऑफ न्यूरोसाइंस सेंटर से प्रोफेसर पद्मा, मनोचिकित्सा विभाग के हेड आरके चड्ढा, डिप्टी डायरेक्टर (एडमिन) डॉ. पांडा और डॉ. यू सिंह शामिल रहे।

4 सदस्यों की इस कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 संक्रमित पत्रकार द्वारा कथित तौर पर की गई आत्महत्या के मामले में एम्स द्वारा की गई जांच में पत्रकार की मौत के पीछे किसी गलत नीयत के होने का प्रमाण नहीं मिला है और न उसके इलाज की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी पाई गई है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स और जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रशासन में आवश्यक बदलाव के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि समिति 27 जुलाई तक अपने सुझाव सौंपेगी।

बता दें कि दिल्ली के भजनपुरा के रहने वाले पत्रकार तरुण को 24 जून को एम्स के ट्रॉमा सेंटर की चौथी मंजिल पर स्थित कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तरुण कथित तौर पर एम्स की चौथी मंजिल से कूद गए। इस घटना में वह बुरी तरह से घायल हो गए। गंभीर हालत में तरुण को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि कुछ दिन पहले एलएनजीपी अस्पताल में उनके ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई थी।  

बताया जाता है कि मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले तरुण पिछले दिनों कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिस कारण वह काफी तनाव में चल रहे थे। करीब तीन साल पहले ही तरुण की शादी हुई थी। उनके दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की उम्र 2 साल है और दूसरे की उम्र मात्र कुछ ही महीने है।

वहीं तरुण की पत्नी मोनिका का कहना है कि मेरे पति को कोरोना वॉरियर का सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी उनके पति अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे। उन्होंने आखिरी वक्त तक कोरोना से जुड़ी जानकारियां समाज तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं की। हमेशा अपने काम को तवज्जो देते रहे। उनकी मौत के बाद दूसरा कोई सहारा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि उनके पति को कोविड वॉरियर का सम्मान मिले जो, उनका अधिकार है।

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BCCI के CEO पद से अलग हुए राहुल जौहरी, इस्तीफा मंजूर

बीसीसीआई का सीईओ बनने से पहले राहुल डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2020
Rahul5454

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सीईओ राहुल जौहरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल जौहरी ने पिछले साल दिसंबर में ही अपना पद छोड़ने का फैसला कर लिया था, जब बीसीसीआई द्वारा गांगुली के नेतृत्व में एक नया प्रशासक चुना गया था, लेकिन तब उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। बताया जाता है कि बोर्ड ने अब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। 

अप्रैल 2016 में बीसीसीआई के सीईओ का पद संभालने वाले राहुल उससे पहले डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और जनरल मैनेजर (दक्षिण एशिया) के पद पर कार्यरत थे। करीब 15 साल तक डिस्कवरी से जुड़े रहने के बाद जौहरी ने बीसीसीआई के सीईओ का पदभार संभाला था।

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BW Dialogue: 10 जुलाई को नजर आएंगे फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन, होगी दिलचस्प चर्चा

​​​​​​​‘बिजनेस वर्ल्ड’ ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
anuragsir8745

‘बिजनेस वर्ल्ड’ (BW Businessworld) ग्रुप की सीरीज ‘बीडब्यू  डायलॉग’ (BW Dialogue) के तहत ‘बीडब्यू  डायलॉग ऑन लीडरशिप एंड इकनॉमी’ (BW Dialogue on Leadershipand Economy) का आयोजन 10 जुलाई 2020 को किया जाएगा। वेबिनार सीरीज के पहले एपिसोड के तहत 10 जुलाई को शाम चार बजे से पांच बजे तक चलने वाले इस एक घंटे कार्यक्रम में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन से चर्चा करेंगे।

बता दें कि ‘बीडब्‍ल्‍यू डायलॉग’ ऐसा मंच है, जिसके जरिये ऐसे प्रख्यात व्यक्तियों, सेलेब्रिटीज और अचीवर्स से बात कर उनसे उनकी जिंदगी, उनके बिजनेस और उनके नेतृत्व क्षमता के बारे में जानने की कोशिश की जाती है, ताकि उनकी सफलता की कहानी को दुनिया के सामने लाया जा सके। ये सेलिब्रिटीज विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े होते हैं फिर चाहे वे किसी स्पोर्ट्स से हों, आर्टिस्ट हों, एक्टर हों या फिर कोई लेखक। ये वे लोग हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, प्रदर्शन और कार्यक्षमता से अपने क्षेत्र में लोहा मनवाया है।

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प्रिंट और डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने कही ये बात

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित फिल्म्स और टीवी के लिए सरकार जल्द करेगी प्रोत्साहन की घोषणा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
Amit Khare

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सेक्रेट्री अमित खरे ने कहा कि सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक स्वतंत्रता लाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के मामले में सरकार प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एक समान व्यवस्था (level playing field) के बारे में भी सोच रही है। खरे का कहना है, ’प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी 26 प्रतिशत एफडीआई लागू होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया पर लागू एफडीआई के नियम न्यूज एग्रीगेटर्स (news aggregators) पर भी लागू होने चाहिए। बता दें कि एग्रीगेटर्स इनशॉर्ट्स और डेलीहंट जैसे ऐप्स या वेबसाइट्स हैं जो अन्य पब्लिशर्स से उनके कंटेंट को क्यूरेट करती हैं और पाठकों के लिए कंटेंट को पर्सनलाइज करने के लिए एल्गोरिदम (algorithms) का इस्तेमाल करती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कहीं और से कंटेंट लेकर उसे अपने यहां इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इसकी घोषणा नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह मेरी भूमिका नहीं है, लेकिन इस बात को लेकर काफी गंभीरता से विचार चल रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रिंट मीडिया के बीच एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। इस बारे में सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही किसी तरह की घोषणा की जाएगी।’

बता दें कि पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी प्रदान की थी। इससे पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए ही यह मंजूरी थी। न्यूज चैनल्स के लिए 49 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी मिली हुई है। फिक्की फ्रेम्स 2020 के 21वें एडिशन (ऑनलाइन) में ‘Shaping the Future of M&E in Today’s Digitalised and Information Driven Economy’ सेशन के दौरान खरे ने कहा कि लेवल प्लेयिंग फील्ड का मतलब मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारी रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के अधीन लाना नहीं है। खरे ने कहा, ‘सरकार द्वारा पिछले छह सालों के दौरान बिजनेस को आसान करने और कम लेकिन प्रभावी रेगुलेशन पर फोकस किया गया है। अब कुछ और नए रेगुलेशंस लाने का विचार है, इन्हें लागू करना आसान होगा और इससे अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।’   

बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय इन दिनों अपने तमाम नियमों और अधिनियमों में संशोधन कर रहा है। जैसे- सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) अधिनियम आदि। खरे का कहना था कि विभिन्न मीडिया के लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं हैं, जैसे-प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और फिल्मों के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड हैं। उन्होंने कहा कि  नेटफ्लिक्स और डिज्नी+हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान व्यवस्था (लेवल प्लेयिंग फील्ड) तैयार किया जाना है, जो अभी तक किसी भी नियामक दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि कम रेगुलेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी स्ट्रक्चर को सिंक (sync) किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दायरे में आते हैं, अब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस तरह के कंटेंट को भी अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

खरे के पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का प्रभार भी है। इस मंत्रालय ने महामारी के मद्देनजर छात्रों की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल को बढ़ावा दिया है। खरे ने कहा कि महामारी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बढ़ गई है। मानव संसाधन विकास को मीडिया और मनोरंजन के साथ जोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग पर कई वीडियो आ गए हैं। उनका कहना था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ज्यादा स्वंतत्रता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है और यह एक नियामक (रेगुलेटर) से अधिक एक सूत्रधार और एजुकेटर के रूप में काम करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो मैसेज के जरिये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित फिल्म और टीवी प्रॉडक्शन के लिए सरकार जल्द ही प्रोत्साहन का ऐलान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिल्म और टीवी शूट्स के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) लेकर आएगी।

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CM, अखबार के संपादक समेत 4 लोगों को 50 करोड़ की मानहानि का मिला नोटिस

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यहां के सीएम हेमंत सोरेन को 50 करोड़ रुपए की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। रघुवर दास ने रांची से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के संपादक को भी नोटिस दिया है। झूठी व भ्रामक खबर फैलाकर उन्हें बदनाम करने को लेकर यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता विनोद कुमार साहू के माध्यम से भेजा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि पूर्व सीएम रघुवर दास पर लगाए गए आरोप में अखबार के संपादक व वर्तमान सरकार की मिलीभगत है। इससे उनकी छवि धूमिल कर बदनाम करने के मकसद से किया गया है। इस कारण लीगल नोटिस सीएम हेमंत सोरेन, अखबार के संपादक समेत चार लोगों पर 50 करोड़ की मानहानि का दावा किया है।

दरअसल मामला यह है कि 27 जून 2020 को एक अखबार ने यह खबर छापी की रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी को 'वंडर कार' बनाने का ऑर्डर दिया था। मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास ने बेंटले कार का ऑर्डर 2018 में इंग्लैंड की एक कंपनी को दिया था, जिसके एवज में उन्हें 40 लाख रुपए एडवांस भुगतान किया था। लेकिन जब इंग्लैंड की कंपनी ने कार बनाने से इनकार किया, तो यह ऑर्डर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की किसी कंपनी को दे दिया।  साथ ही यह खबर प्रकाशित हुई कि नई सरकार के गठन के पश्चात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गाड़ी का मूल्य देखते हुए ऑर्डर को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसे फिजूलखर्ची मानते हैं। वहीं यह बात भी लिखी गई थी कि बेंटले कंपनी ने ऑर्डर के बारे में झारखंड सरकार को ईमेल भेजा है। इसके बाद जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हुई।

 वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को गलत बताया है, जिसके चलते उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हेमंत सोरेन और अखबार के संपादक को लीगल नोटिस भेजा है।

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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के थिंक-टैंक में न्यूज एंकर तरुण नांगिया कुछ यूं देंगे योगदान

IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
TarunNangia

जाने-माने सीनियर न्यूज एंकर तरुण नांगिया को भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले थिंक-टैंक ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स’ (IICA) के लिए गठित मॉनिटरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है। IICA की मॉनिटरिंग कमेटी में तरुण बतौर सदस्य ‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स को संभालेंगे।  

नंगिया के कंधों पर IEPFA को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत निवेशकों की शिक्षा, जागरूकता व सुरक्षा, विवादों से बचने के लिए सलाह, मीडिया प्रसार से संबंधित सलाह और निवेशक जागरूकता और सुरक्षा के लिए अन्य गतिविधि की पेशकश करना शामिल है। इस कार्य में भारतीय निवेशकों के बीच वित्तीय साक्षरता में सुधार करना भी शामिल है, जिससे आर्थिक रूप से लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई जा सके।

‘इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी’ (IEPFA) के तहत टीवी सीरीज के प्रॉडक्शन और टेलिकास्ट से संबंधित प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गठित IICA मॉनिटरिंग कमेटी में नांगिया को एक सदस्य (मीडिया एक्सपर्ट) के रूप में नामित किया गया है।

वर्तमान में तरुण नांगिया बतौर एसोसिएट एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) आईटीवी ग्रुप (ITV Group) से जुड़े हुए हैं और लोकप्रिय साप्ताहिक टेलिविजन शो ‘लीगली स्पीकिंग’ (Legally Speaking), 'पॉलिसी एंड पॉलिटिक्‍स' (Policy & Politics) और ‘ब्रैंड स्टोरी’ (Brand Story) को प्रड्यूस और होस्ट करते हैं। नंगिया ‘द डेली गार्जियन’ अखबार में Legally Speaking, Policy & Politics आर्टिकल भी क्यूरेट और एडिट करते हैं।

बता दें कि IEPFA एक फंड है, जो सेबी और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के गाइडेंस के तहत स्थापित किया जाता है।  

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'मीडिया इंडस्ट्री को आगे ले जाना है, तो यह बदलाव करना होगा जरूरी'

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
uday Shankar

महामारी के इस दौर में जहां एक तरफ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है, वहीं यह अन्य प्रासंगिक मुद्दों से भी पीछे खिसक गई है, जिसके बारे में ध्यान देने की जरूरत है। ये कहना है ‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney Company) कंपनी के एशिया प्रशांत के प्रेजिडेंट व फिक्की के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट उदय शंकर का। उन्होंने कहा कि विज्ञापन पर निर्भरता उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने महामारी के दौरान इसका सामना किया है।

हालांकि, उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस प्रकट किया कि भारतीय मीडिया उद्योग, विशेषकर प्रिंट, टीवी और डिजिटल क्षेत्र व्यापक स्तर पर विज्ञान राजस्व पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से साबित हुआ है कि यह व्यवस्था उद्योग के लिए काफी नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, ‘यदि उद्योग को आगे बढ़ना है तो उसे विज्ञापन पर निर्भरता कम करनी होगी।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महामारी के कारण हम सभी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि यह अस्थायी हैं, पर हम इसे आसानी से दूर कर सकते हैं। फिलहाल हम एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ चीजों में बदलाव करने की जरूरत है और मुझे लगता है कि अगले कुछ वर्षों में हमें इस पर ध्यान जरूर देना चाहिए कि इन सभी को कैसे बदलना है।’

उन्होंने कहा कि विशेषरूप से प्रिंट, टीवी और अब डिजिटल के लिए सबसे बड़ा अभिशाप यह है कि ये विज्ञापन पर कुछ जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं और वह भी इतना कि यह मीडिया को कस्टमर्स के साथ सीधा संबंध बनाने से रोकता है। उदय शंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मीडिया उद्योग उपभोक्ताओं के साथ अपने संबंधों के बल पर आगे बढ़ा है।

फिक्की फ्रेम्स के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह उद्योग बढ़कर 20 अरब डॉलर का हो गया है। इसमें से 10 अरब डॉलर के राजस्व का योगदान अकेले विज्ञापन का है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘हम सभी इसके लिए दोषी हैं। हमने दूरदर्शिता नहीं दिखाई, हमने अपने उत्पाद पर सब्सिडी लेने का प्रयास किया और छोटी चुनौतियों के लिए अड़चनें खड़ी कीं।’ शंकर ने कहा कि मीडिया उद्योग में दूरदर्शिता की कमी की वजह यह है कि बरसों से यह काफी हद तक विज्ञापनों पर कुछ अधिक निर्भर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘यदि हमें उद्योग को अगले स्तर पर ले जाना है, तो एक चीज निश्चित रूप से करने की जरूरत है। वह है, उपभोक्ता जो इस्तेमाल करें, उसके लिए भुगतान करें। इसके लिए हमें अपनी क्षमता का इस्तेमाल करना होगा और इच्छाशक्ति दिखानी होगी, क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे उद्योग बढ़ सकता है।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश में प्रिंट और फिल्में बहुत अच्छा कर रही हों, लेकिन अभी और भी बहुत कुछ किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वह उद्योग की लॉबी से जुड़े हुए हैं और देखा है कि पिछले कुछ साल में चीजें काफी बदल गई हैं।

उदय शंकर ने कहा, ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र रचनात्मक अर्थव्यवस्था का एक अहम भाग है। यह रोजगार और कारोबार पैदा कर सकता है, साथ ही भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।’  

उदय शंकर ने कहा कि इस साल कोविड-19 की वजह से उद्योग को बड़ा झटका लगेगा। विज्ञापन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से इसका प्रभाव और अधिक ‘कष्ट’ देने वाला होगा।

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मीडिया-मनोरंजन सेक्टर में नौकरियों को लेकर वित्त राज्य मंत्री ने कही ये बात

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Anuragthakur

कोरोना महामारी का दौर खत्म होने के बाद मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media And Entertainment Industry) में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा होंगे। ये कहना है केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का। उन्होंने कहा कि घर से काम करने की व्यवस्था (वर्क फ्रॉम होम) आगे भी जारी रहेगी।

ठाकुर ने उद्योग मंडल फिक्की के एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन की स्थिति ने हमें दिखा दिया है कि घर से काम करने की व्यवस्था जारी रहेगी। हमें इस संकट में अवसरों को खोजना चाहिए। यह भारत के लिए आगे बढ़ने का सही समय है। ऐसे में मीडिया और मनोरंजन नौकरी देने वाले बड़े सेक्टर के रूप में उभर सकता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।

उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फिक्की फ्रेम में अपने विचार साझा करते हुए आगे कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से हमें तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बारे में ठाकुर ने कहा कि रचनात्मक कार्यों का क्षेत्र एक उच्च वृद्धि वाला क्षेत्र है। यदि इसको ठीक से पोषित किया जाए तो यह प्रतिस्पर्धा, उत्पादकता, सतत वृद्धि और रोजगार को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है और देश की निर्यात क्षमता को बढ़ा सकता है। भारत के सामने बड़ी चुनौती बौद्धिक संपदा अधिकारों और कॉपीराइट के डिजिटलीकरण, कुशल कार्यबल और वितरण नेटवर्क तक पहुंच की है। मीडिया और मनोरंजन उद्योग पूरी तरह से विज्ञापन पर निर्भर है जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी आय का मुख्य जरिया वितरण नेटवर्क और उपयोक्ताओं से आने वाला पैसा है। इन सभी पहलुओं को साथ लाने की जरूरत है ताकि आय और वृद्धि के नए रास्ते बनाए जा सकें।

ठाकुर ने कहा कि उनका मंत्रालय 20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू कर रहा है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के बेहतर प्रभाव होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोविड-19 संकट से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में उद्योग और नागरिकों के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य उसे इस तरह के अभूतपूर्व संकट से बाहर निकालेगा। 

 

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Vinod Dua

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के मामले घिरे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि मंगलवार को 15 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 16 जुलाई को होगी।

दुआ के खिलाफ उनके यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा के स्थानीय नेता श्याम की शिकायत पर छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने और सार्वजनिक शरारत करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। साथ ही विनोद दुआ को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

स्थानीय नेता का आरोप है कि विनोद दुआ ने अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर वोट हासिल करने के लिये मौत और आतंकी हमलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडार और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की और हिमाचल प्रदेश पुलिस को इस मामले में अभी तक की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह बताए कि जांच के रिकॉर्ड का क्या है। अभी तक इसमें क्या हुआ है? रजिस्ट्री में सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट जमा कराएं।  

वहीं न्यायमूर्ति उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ विनोद दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश की पुलिस को रोक दिया है।

सुनवाई के दौरान दुआ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पत्रकार से वही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं और यह एक तरह से उन्हें परेशान करने जैसा ही है। इस पर पीठ ने कहा कि दुआ को इस मामले में पूरक सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। दुआ इस मामले की डिजिटल माध्यम से जांच में शामिल हुए थे।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 14 जून को रविवार के दिन इस मामले की सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक दुआ को गिरफ्तार करने से हिमाचल प्रदेश पुलिस को रोक दिया था। हालांकि, तब पीठ ने दुआ के खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि दुआ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जांच में शामिल होंगे।

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ‘मुझे बोलने और अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त है और मुझे सरकार की आलोचना का भी अधिकार है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस ने शिकायत के बारे में विवरण देने से इनकार कर दिया है जबकि शीर्ष अदालत ने इस बारे में स्थिति रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि दुआ पहले ही पुलिस द्वारा भेजे गये सवालों के जवाब दे चुके हैं और अब सवालों का नया सेट भेजा गया है। दुआ ने अपनी याचिका में उनके खिलाफ प्राथमिकी निरस्त करने और उन्हें परेशान करने के कारण तगड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध न्यायालय से किया है।

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