दुनिया के सबसे मशहूर टीवी कार्टून कैरेक्टर 'मिक्क माउस' का आज जन्मदिन

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। बच्चों के बीच में लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर मिक्की माउस को शायद ही कोई न जानता हो। लेकिन आज उसका जन्मदिन है, ये कम ही लोगों को पता होगा। 1928 में आज ही के दिन कार्टून कैरेक्टर मिकी माउस पहली बार स्टीमबोट विली फिल्म में दिखाई दिया था। दुनिया के पहले कार्टून कैरेक्टर मिक्की माउस को वॉल्ट डिज्नी की कंपनी

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Published - Wednesday, 18 November, 2015
Last Modified:
Wednesday, 18 November, 2015
mickey
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। बच्चों के बीच में लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर मिक्की माउस को शायद ही कोई न जानता हो। लेकिन आज उसका जन्मदिन है, ये कम ही लोगों को पता होगा। 1928 में आज ही के दिन कार्टून कैरेक्टर मिकी माउस पहली बार स्टीमबोट विली फिल्म में दिखाई दिया था। दुनिया के पहले कार्टून कैरेक्टर मिक्की माउस को वॉल्ट डिज्नी की कंपनी ने बनाया था। मिक्की माउस ने 18 नवंबर, 2015 को अपने 87 साल पूरे कर लिए। पर इतने सालों बाद भी मिक्की माउस का हंसमुख चेहरा दुनिया का सबसे यादगार कार्टून कैरेक्टर है। वॉल्ट डिज्नी को मिसौरी के कन्सास शहर के एक स्टूडियो में डेस्क पर बैठे एक शांत चूहे को देखकर मिक्की माउस बनाने का आइडिया आया। 1925 में वॉल्ट की टीम के एनिमेटर ह्यूग हार्मन ने वॉल्ट डिज्नी की फोटो के किनारे चूहे के कुछ स्कैच बनाए। इससे प्रभावित होकर डिज्नी के लिए वॉल्ट और एनिमेटर युब इवर्क ने मिलकर नए चूहे का कैरेक्टर तैयार किया, जिसे लोग मिक्की माउस के नाम से जानते हैं। स्टीमबोट विली फिल्म में इसकी आवाज खुद वॉल्ट डिज्नी ने दी थी। इसके बाद जिम मैक्डोनॉल्ड ने इस मिक्की माउस के कैरेक्टर को आवाज दी। इसी तारीख को अधिकारिक तौर पर मिक्की माउस का जन्मदिन मनाया जाता है। 1930 में मिकी माउस ने अखबारों में भी अपनी जगह बना ली। मिकी माउस करीब 130 फिल्मों में आया और दुनियाभर के बच्चों का सबसे प्यारा दोस्त बन गया। 1942 में लेंड पॉ फिल्म को ऑस्कर भी मिला। 1955-1996 तक मिकी टीवी सीरीज चलाई गई। यही नहीं मिकी माउस ने विडियो गेम में भी अपनी जगह बनाई।

 

 

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इस वजह से मीडिया वह नहीं कर पा रहा है, जो उसे करना चाहिए: आलोक मेहता

‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व प्रेजिडेंट आलोक मेहता (पद्मश्री) ने तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी है।

Last Modified:
Friday, 25 June, 2021
Governance Now

वरिष्ठ पत्रकार और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व प्रेजिडेंट आलोक मेहता (पद्मश्री) ने इस बात पर क्षोभ जताया है कि सनसनीखेज खबरों के द्वारा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए टैब्लॉयड पत्रकारिता को गंभीर पत्रकारिता के साथ मिला दिया गया है। इसके साथ ही आलोक मेहता का कहना है कि आलोचनाओं के बावजूद भारतीय मीडिया स्वतंत्र और शक्तिशाली है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता को लेकर जो धारणा थी, उसमें कमी आई है।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में आलोक मेहता ने कहा, ‘टैब्लॉयड पत्रकारिता जो पहले काफी शक्तिशाली थी, वह आज के दौर में अखबारों के साथ-साथ टीवी चैनल्स में गंभीर पत्रकारिता के साथ मिल गई है। आज के दौर में एंटरटेनमेंट और सनसनीखेज पत्रकारिता न्यूज के साथ मिल गई है और सेल्स बढ़ाने के लिए हेडलाइंस काफी सनसनीखेज हो गई हैं। हालांकि भारतीय न्यूज मीडिया काफी मजबूत व शक्तिशाली है और उसे काफी स्वतंत्रता प्राप्त है,  लेकिन कुछ वर्षों में इसकी विश्वसनीयता में कमी आई है।‘  

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान आलोक मेहता का कहना था, ‘हालांकि यह कहना सही नहीं है कि चीजें पूरी तरह से खराब हैं, लेकिन आज मीडिया वह नहीं कर पा रहा है, जो उसे करना चाहिए। संपादकों/मीडिया मालिकों को अहंकार से दूर रहना चाहिए और रचनात्मक आलोचना को निष्पक्ष रूप से स्वीकार करना चाहिए।‘

इस बातचीत के दौरान आलोक मेहता का यह भी कहना था कि आजादी के बाद से पिछले पचास वर्षों में मीडिया का काफी विकास हुआ है। देश भर में अखबारों और न्यूज चैनल्स की संख्या में वृद्धि हुई है। अखबारों की पठनीयता के साथ-साथ न्यूज का उपभोग (consumption) भी बढ़ा है। इसके बावजूद मीडिया वह नहीं कर पा रहा है जो उसे करना चाहिए, क्योंकि वह एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

आलोक मेहता के अनुसार, ‘पहले के मुकाबले आज अंतर यह है कि मीडिया का विस्तार हुआ है और लोग यूट्यूब अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करने में सक्षम हैं। इसके बावजूद  प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे के खिलाफ होने की होड़ मीडिया को नुकसान पहुंचा रही है। इसमें इतना राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है, बल्कि आपस में प्रतिस्पर्धा और अपने ही सहयोगियों के खिलाफ आलोचना है, जो मीडिया को नुकसान पहुंचा रही है। हम अपनी कमियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि दौड़ में एक-दूसरे से आगे रहने की होड़ में हैं।‘

कई उदाहरणों का जिक्र करते हुए आलोक मेहता का कहना था कि तमाम परेशानियों के बावजूद उस समय फिर भी काफी सौहार्द था। आज मीडिया की मानसिकता यह है कि या तो आप मेरे साथ हैं या मेरे खिलाफ हैं, जबकि प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए।

कोविड-19 को लेकर रिपोर्टिंग के बारे में आलोक मेहता ने कहा कि महामारी पर रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को स्व-विनियमित (self-regulate) होना चाहिए और इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि इन स्टोरीज का घर पर रह रहे बच्चों व युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जो कोविड पर हो रही काफी निगेटिव रिपोर्टिंग के कारण डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या खबरों की प्रामाणिकता कम हो गई है, आलोक मेहता ने कहा कि रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता के लिए लोग ब्रैंड्स से जुड़ते हैं और वह विश्वसनीयता धूमिल हो गई है। न्यूज विश्लेषण का काम एडिटोरियल पर छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि न्यूज रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। आज भारत में हर कोई खबरों पर कमेंट करना चाहता है। समाचारों का विश्लेषण संपादकीय पर छोड़ देना चाहिए, लेकिन भारत में यह सीमांकन टूट गया है। आज हर कोई खबरों पर कमेंट कर रहा है। रिपोर्टर्स समाचारों पर कमेंट्री कर रहे हैं और समाचार और विश्लेषण के बीच की सीमा रेखा टूट गई है।

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‘द हिन्दू’ से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार एस.अनिल राधाकृष्णन का निधन, राज्यपाल, सीएम ने जताया शोक

वरिष्ठ पत्रकार और अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ के केरल न्यूज ब्यूरो के प्रमुख एस. अनिल राधाकृष्णन का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से उनके आवास पर निधन हो गया।

Last Modified:
Thursday, 24 June, 2021
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वरिष्ठ पत्रकार और अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ के केरल न्यूज ब्यूरो के प्रमुख एस. अनिल राधाकृष्णन का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से उनके आवास पर निधन हो गया। वह 54 साल के थे। उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

राधाकृष्णन के परिवार में उनकी पत्नी सिंधु एस.एस (जो कॉटन हिल स्कूल शिक्षिका हैं) तथा पुत्र नारायण एस. ए. (जो गुजरायत में रिलायंस पेट्रोलियम में कार्यरत हैं।) उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1992 में प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से की थी और इसके बाद 1997 में वे ‘द हिन्दू’ के तिरुवंतरपुरम ब्यूरो से जुड़ गए थे। अनिल ने केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के जिला सचिव और केसरी मेमोरियल ट्रस्ट के प्रमुख के रूप में भी काम किया था।

‘द हिन्दू’ में 23 वर्षों से भी अधिक समय तक उन्होंने पर्यटन, सार्वजनिक परिवहन, एयरलाइन उद्योग, बंदरगाह, सड़क, रेलवे, फाइनेंशियल, इंफ्रास्ट्रक्चर को कवर किया।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राधाकृष्णन के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने कहा, 'उनके काम को नैतिकता, केरल के विकास और जिम्मेदार पर्यटन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता द्वारा चिह्नित किया गया है। ईश्वर उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान करें।'

वहीं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अनिल राधाकृष्णन को मूल्य आधारित पत्रकार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिल का अप्रत्याशित रूप से अलग होना समाज और पत्रकारिता के लिए एक क्षति है।

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इस बड़े पद पर UNI से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अजय कौल

कौल दो दशक से ज्यादा समय से प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Ajay Kaul

देश की जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ (UNI) ने वरिष्ठ पत्रकार अजय कौल को एडिटर-इन-चीफ के पद पर नियुक्त किया है। इससे पहले वह एपीएन न्यूज चैनल में एग्जिक्यूटिव मैनेजिंग एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

कौल दो दशक से ज्यादा समय से ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) से जुड़े रहे हैं। वह पीटीआई के रेजिडेंट एडिटर रह चुके हैं। बाद में उन्होंने ‘इंडो एशियन न्यूज सर्विस’ (IANS)  न्यूज एजेंसी जॉइन कर ली थी, लेकिन यहां उन्होंने सिर्फ नौ महीने की संक्षिप्त पारी खेली और इसके बाद एपीएन न्यूज में आ गए थे। 

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आउटलुक समूह से जुड़े आशीष झा, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

डेढ़ दशक से ज्यादा के अपने करियर में आशीष प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Outlook Group

‘आउटलुक’ (Outlook) ग्रुप से आ रही एक बड़ी खबर के मुताबिक कंपनी ने आशीष झा को आउटलुक ट्रैवलर (Outlook Traveller) का एडिटर नियुक्त किया है।  

डेढ़ दशक से ज्यादा के अपने करियर में आशीष प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और न्यू मीडिया जर्नलिज्म में अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें मीडिया इंडस्ट्री और ऑडियंस की गहरी समझ है। पूर्व में वह ‘ऑटोएक्स‘ (AutoX) और ‘एनडीटीवी कंवर्जेंस‘ (NDTV Convergence) में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुके हैं और विशेष प्रोजेक्ट पर ‘नेशनल जियोग्राफिक ट्रैवलर इंडिया‘ में सहयोग कर चुके हैं। वह मीडिया एजेंसीज Ideate Labs और Publicis Groupe के अलावा ग्लोबल टीवी न्यूज चैनल विऑन (WION) में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

‘आउटलुक ग्रुप‘ के सीईओ इंद्रनील रॉय (Indranil Roy) का कहना है, ‘विकास के अगले चरण में जाना काफी अच्छा है। उम्मीद है कि अपने नेतृत्व में आशीष ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ को एक नई यात्रा पर ले जाएंगे।‘

वहीं, ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ की पब्लिशर मीनाक्षी मेहता का कहना है, ‘न्यूज और मीडिया इंडस्ट्री के लिए पिछले कुछ साल काफी मुश्किल भरे रहे हैं। आशीष के साथ मिलकर हमने आउटलुक ट्रैवलर के बारे में नई सोच तैयार की है और इसके द्वारा हम इसे प्रिंट, डिजिटल और स्पेशल प्रोजेक्ट में काफी आगे ले जाएंगे। आशीष झा को बोर्ड में शामिल करना और नए दृष्टिकोण के साथ ब्रैंड को आगे बढ़ाना बहुत अच्छा है।‘

इस बारे में ‘आउटलुक ट्रैवलर‘ के एडिटर आशीष झा का कहना है, ‘आउटलुक ट्रैवलर जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड के साथ काम करने का अवसर मिलना काफी बड़ी बात है। मैं सभी विभागों के लोगों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं और उम्मीद करता हूं कि सामूहिक रूप से इस प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाऊंगा।‘

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जी न्यूज के पूर्व पत्रकार आनंद दुबे को यूपी बीजेपी की मीडिया टीम में मिली जगह

भारतीय जनता पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव में विजय हासिल करने के लिए अपनी विशेष रणनीति बनाकर उस पर अमल करना शुरू कर दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
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भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विजय हासिल करने के लिए अपनी विशेष रणनीति बनाकर उस पर अमल करना शुरू कर दिया है। लंबे विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने रविवार को नई मीडिया टीम का भी ऐलान कर दिया गया है। बीजेपी मीडिया टीम की कमान फिर से मनीश दीक्षित को सौंपी गई है। प्रदेश भाजपा की नवगठित मीडिया टीम की पहली बैठक बुधवार को हुई।

वहीं इसके अलावा मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया प्रभारी तथा हिमांशु दुबे, धर्मेंद्र राय, प्रियंक पांडेय, व अभय सिंह को प्रदेश सह मीडिया प्रभारी बनाया है। वही प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 15 प्रदेश प्रवक्ता की घोषणा की है, जिसमें मऊ जनपद के निवासी व जी न्यूज के पूर्व पत्रकार आनंद दुबे का नाम भी शामिल है। आनंद दुबे ‘जी न्यूज’ में पांच वर्षों तक रहे। उन्होंने जुलाई, 2014 में जी न्यूज जॉइन किया था। वे यहां सीनियर प्रड्यूसर थे। इसके पहले वे पी7 न्यूज चैनल में दो साल तक रहे।

इसके अतिरिक्त आनंद दुबे ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वे ‘इंडिया टीवी’, ‘सहारा समय’, ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘अमर उजाला’ में काम कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘हिन्दुस्तान’ फ्रीलांसर के तौर पर योगादन दिया है।

वहीं, इस सूची में अन्य प्रवेश प्रवक्ताओं में हरीश चंद्र श्रीवास्तव, समीर सिंह, मनीष शुक्ला, हीरो बाजपेई, आलोक अवस्थी, अशोक पाण्डेय, जुगल किशोर, अनिला सिंह, राकेश त्रिपाठी, प्रशांत वशिष्ठ, संजय चौधरी, साक्षी दिवाकर, आलोक वर्मा और महामेघा नागर का नाम शामिल है।

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इस मामले में पत्रकार राणा अय्यूब को मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में सोमवार को पत्रकार राणा अय्यूब को चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में सोमवार को पत्रकार राणा अय्यूब को चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।

अदालत ने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा अदालत के सामने प्रोटेक्शन मांगी गई है, क्योंकि इस मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और संबंधित कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल अपील के आधार पर चार हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी जा रही है।

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में राणा अय्यूब के अलावा अन्य कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने ट्विटर, ट्विटर इंडिया पर भी केस दर्ज किया था। बुजुर्ग मारपीट मामले में सभी पर फर्जी वीडियो ट्वीट करने और माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। इस वीडियो में एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया था उसे पीटा गया और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा गया। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया कि वीडियो सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए प्रसारित किया गया था।

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153ए (धर्म, वर्ग आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना), 120बी (आपराधिक साजिश) और अन्य के प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अय्यूब के वकील मिहिर देसाई ने सोमवार को न्यायमूर्ति पी.डी. नाइक की एकल पीठ को बताया कि आवेदक एक पत्रकार है जिसने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो को केवल ‘फॉरवर्ड’ किया था। देसाई ने कहा, ‘जब 16 जून को उन्हें पता चला कि वीडियो की सामग्री सही नहीं है, तो उन्होंने उसे हटा दिया।’

उन्होंने कहा कि जिन अपराधों के तहत अय्यूब पर मामला दर्ज किया गया है, उन सभी में केवल तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती हैं और इसलिए, उन्हें राहत पाने के लिए उत्तर प्रदेश में संबंधित अदालत से संपर्क करने का समय दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति नाइक ने कहा कि बाद में पुलिस जांच में पता चला कि कथित तौर पर उसे पीटने और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर करने का दावा करने वाले व्यक्ति का उन लोगों के साथ कुछ विवाद था जिन्होंने उसे किसी अन्य लेनदेन के मामले को लेकर पीटा था।

न्यायमूर्ति नाइक ने कहा, ‘इस अवधि में आवेदक की गिरफ्तारी की स्थिति में उसे 25,000 रुपए के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा।’ साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदक को प्रदान की गई, इस अवधि को बढ़ाया नहीं जाएगा।

अय्यूब के अलावा पुलिस ने ट्विटर इंक, ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया, समाचार वेबसाइट ‘द वायर’, पत्रकारों मोहम्मद जुबैर, कांग्रेस नेताओं सलमान निजामी, मश्कूर उस्मानी, शमा मोहम्मद और लेखिका सबा नकवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर 14 जून को सामने आए वीडियो क्लिप में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल समद सैफी ने आरोप लगाया था कि कुछ युवकों ने उसकी पिटाई की और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा।

हालांकि, गाजियाबाद पुलिस ने इस घटना में किसी भी तरह के सांपद्रायिक होने से इनकार किया और कहा कि आरोपी व्यक्ति उस ‘ताबीज’ को लेकर नाखुश थे जो पीड़ित वृद्ध ने उन्हें बेचा था।

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टीवी जर्नलिस्ट निदा अहमद ने इंडिया न्यूज को कहा अलविदा

टीवी पत्रकार निदा अहमद ने हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) को अलविदा कह दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
Nida Ahmad

टीवी पत्रकार निदा अहमद ने हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (India News) को अलविदा कह दिया है। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद एक फेसबुक पोस्ट के जरिये दी है। निदा अहमद ने करीब तीन महीने पहले ही इस चैनल के साथ अपनी नई पारी शुरू की थी। यहां पर वह एंकर कम प्रड्यूसर की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। हालांकि, उन्होंने अपना नया सफर किस चैनल के साथ शुरू किया है, यह फिलहाल पता नहीं चल पाया है।   

‘इंडिया न्यूज’ में अपनी पारी शुरू करने से पहले निदा अहमद ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में एंकर कम प्रड्यूसर की जिम्मेदारी निभा रही थीं। यहां वह करीब छह महीने तक कार्यरत रहीं। वहीं, ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में शामिल होने से पहले निदा अहमद अक्टूबर 2018 से ‘तेज’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थीं। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ से वह यहां पहुंची थीं। ‘तेज’ में वह सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। ‘समाचार प्लस’ में उन्होंने बतौर एंकर करीब दो साल काम किया।

निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। 'तेज', 'समाचार प्लस', ' जी यूपी-उत्तराखंड ' और 'इंडिया न्यूज' के अतिरिक्त निदा 'ईटीवी नेटवर्क' और 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' में भी काम कर चुकी हैं। निदा ने 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई।

सामाजिक सेवा में भी निदा का ​​योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। गरीब बच्चों की मदद के लिए निदा को स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।  

निदा अहमद द्वारा इंडिया न्यूज से अपने इस्तीफे के बारे में की गई फेसबुक पोस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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टीआरपी मामले में CBI ने दर्ज किए BARC के अधिकारियों के बयान: रिपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने प्रवर्तन निदेशालय से इस मामले में की गई जांच का ब्योरा भी मांगा है।

Last Modified:
Tuesday, 22 June, 2021
TRP

कथित फर्जी टीआरपी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया के कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं। एक प्रमुख मीडिया पोर्टल के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी ने प्रवर्तन निदेशालय से इस मामले में की गई जांच का ब्योरा भी मांगा है।

बता दें कि टीआरपी में कथित हेरफेर के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। टीआरपी किसी टीवी चैनल या कार्यक्रम की लोकप्रियता की जानकारी देने का माध्यीम है। टीआरपी के जरिये ही एडवर्टाइजर्स को व्युअर्स के पैटर्न को समझने में आसानी होती है और टीवी चैनल्स के कार्यक्रमों को विज्ञापन मिलता है।
 

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इस मीडिया कंपनी के साथ संभावित विलय की खबरों को ZEE एंटरटेनमेंट ने सिरे से किया खारिज

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ ने ’वायकॉम18’ के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
Zee

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE ENTERTAINMENT ENTERPRISES LTD) ने ’वायकॉम18’ (Viacom18) के साथ संभावित विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि एक बड़े बिजनेस अखबार ने खबर दी थी कि ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ और ’वायकॉम18’ संभावित विलय के लिए शुरुआती बातचीत के दौर में हैं और यह मिलकर एक बड़ी मीडिया फर्म बना सकते हैं।  

इस बारे में नियामक संस्था को दी गई जानकारी (Regulatory filing) में ’ZEEL’ का कहना है, ’ZEEL’ और ’वायकॉम18’ के संभावित विलय की खबर के बारे में हमारा कहना है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।’

अखबार की रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से जानकारी दी गई थी कि यह विलय शेयर हस्तांतरण (शेयर स्वैप सौदे) के जरिये किया जाएगा और इसमें नकद लेन-देन की संभावना नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि विलय के बाद संयुक्त इकाई में वायकॉम18 के प्रमोटर्स की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी हो सकती है, क्योंकि ZEEL के 65 प्रतिशत से ज्यादा शेयर का स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

सूत्र का यह भी कहना था कि यह डील तभी परवान चढ़ेगी, जब ZEEL के शेयर की कीमत वर्तमान से 15 से 20 प्रतिशत नीचे आ जाएगी। बता दें कि वायकॉम18 जॉइंटवेंचर में रिलांयस और वायकॉम की 51:49 हिस्सेदारी है जबकि ZEEL का अधिकांश स्वामित्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास है।

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प्रेस काउंसिल ने अखबार को भेजा कारण बताओ नोटिस, मांगा जवाब

बीएमएसआईसीएल, पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर जारी किया गया है नोटिस

Last Modified:
Monday, 21 June, 2021
PCI

कोरोना काल में बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग के संबंध में गलत खबर छापने के आरोप में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने बुधवार को दैनिक अखबार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम’(बीएमएसआईसीएल), पटना के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के प्रदीप कुमार की शिकायत पर पटना से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबार के एडिटर के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है।

इसके साथ ही 14 दिनों के अंदर इस नोटिसस का जवाब देने के लिए कहा गया है कि आखिर क्यों काउंसिल उनके खिलाफ कार्रवाई ना करे। बताया जाता है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रेस काउंसिल की जांच समिति अपने स्तर से मामले को देखेगी और उसी के अनुसार फैसला लेगी।

प्रदीप कुमार की ओर से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बुधवार को एक दैनिक अखबार में गलत, तथ्यहीन और भ्रामक खबर छापी गई है। खबर में दी गई जानकारी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में ब्लैक लिस्टेड कंपनी से आरटीपीसीआर जांच वैन भाड़े पर ली, सच्चाई से एकदम दूर है।

पत्र में कहा गया कि विभाग द्वारा जानकारी देने के बावजूद खबर छापने से पहले तथ्यों की सही से जांच नहीं की गई है। ऐसी खबर की वजह से न सिर्फ सरकार और विभाग की क्षवि धूमिल हुई, बल्कि बीते दो महीने से जो स्वास्थ्यकर्मी लगातार काम कर रहे हैं, उनका मनोबल भी घटा है। ऐसे में मामले की जांच कर दैनिक अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।.

दरअसल, बुधवार को पटना से छपने वाले एक दैनिक अखबार में ये खबर छपी थी कि बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच के लिए 29 करोड़ में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से पांच वैन तीन महीने के लिए किराए पर ली। वहीं, ये सवाल भी किया कि एक दागी कंपनी से इतनी ऊंची कीमत पर सरकार ने सौदा क्यों किया? इसी खबर को गलत ठहराते हुए के प्रदीप कुमार की ओर से पीसीआई को पत्र लिखा गया है।

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