IIMC के DG केजी सुरेश बोले- आज के समय में ऐसे पत्रकारों की है जरूरत

‘समाचार4मीडिया’ व इसकी सहयोगी पार्टनर ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ओर से 22 नवंबर...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 November, 2018
Last Modified:
Saturday, 24 November, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘समाचार4मीडिया’ व इसकी सहयोगी पार्टनर ‘एक्सचेंज4मीडिया’ की ओर से 22 नवंबर, 2018 को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘मीडिया एंड मीडिया एजुकेशन समिट’ (Media & Media Education Summit) में कई पैनल डिस्कशन भी हुए।

‘Conflict between Mainstream Media & Social Media and it’s Impact on Media Education’ शीर्षक से आयोजित पैनल डिस्कशन की अध्यक्षता 'समाचार4मीडिया' के डिप्‍टी एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने की। इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि आज हम किस तरह से मीडिया एजुकेशन को देख रहे हैं? आज इन इंस्टीट्यूट से किस तरह के छात्र आते हैं और इंडस्ट्री में कैसे अपनी उपलब्धता बना पाते हैं?


‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के डायरेक्टर जनरल केजी सुरेश ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को दो खुशखबरी देते हुए कहा, ‘सबसे पहले मैं आपको ब्रेकिंग न्यूज दे दूं कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आईआईएमसी को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया है। इसके अलावा आईआईएमसी एशिया का सबसे बड़ा गेमिंग, कॉमिक्स, ग्राफिक्स, न्यू मीडिया इंस्टीट्यूट शुरू करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सब कवायद के पीछे यही वजह है कि हर साल इस क्षेत्र में हजारों नौकरियां होती हैं, लेकिन हमारे पास कुशल मैनपावर नहीं होती है। एक तरफ तो हम बेरोजगारी की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह भी सही है कि इन क्षेत्रों में स्किल्ड मैनपावर नहीं है। इसलिए हम यह इंस्टीट्यूट शुरू करने जा रहे हैं।’

केजी सुरेश ने कहा, ‘आज हम यहां मीडिया एजुकेशन पर चर्चा के लिए एकत्रित हुए हैं। मेरी चिंता ये है कि आजकल तमाम जगह शिक्षा की दुकानें खुल रही हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बड़ी संख्या में छात्र मीडिया के ग्लैमर से आकर्षित होकर इसमें आना चाहते हैं, जिसका फायदा कई ऐसे शिक्षा संस्थान उठाते हैं। ऐसे लोग इन छात्रों को पूरी तरह इंडस्ट्री के लिए तैयार नहीं कर पाते हैं। इस बारे में मीडिया एजुकेटर्स को सोचने की जरूरत है। हमें मीडिया एजुकेशन को लेकर कुछ मानक तय करने होंगे। आजकल हम कंटेंट समेत न जाने कितनी तरह की चीजों पर बात करते हैं, मैं मानता हूं कि ये सब जरूरी हैं, लेकिन सही शिक्षा को लेकर एक बेंचमार्क होना चाहिए।’

केजी सुरेश के अनुसार, ‘बार काउंसिल के लाइसेंस के बिना आप वकील नहीं बन सकते हैं, मेडिकल काउंसिल के लाइसेंस के बिना आप डॉक्टर नहीं बन सकते हैं, लेकिन पत्रकारिता में ऐसा नहीं है। यहां तक कि दिल्ली विश्वविद्य़ालय में पत्रकारिता के कोर्स हिंदी और अंग्रेजी विभाग द्वारा संचालित किए जाते हैं न कि पत्रकारिता विभाग द्वारा। आखिर इस तरह की चीजें क्यों हो रही हैं। हमें इस मामले में विचार करने की जरूरत है। हमें इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बात करनी होगी। हमें आज के समय में इन मुद्दों को उठाने की जरूरत है।’


उन्होंने बताया कि पहली बार ‘Indian Council of Social Science Research’ की ओर से मीडिया एजुकेशन में रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे दौर में पत्रकारिता की डिग्री-डिप्लोमा की ज्यादा जरूरत नहीं होती थी, हम सब भी इसी तरह पत्रकार बने और बाद में जरूरत के मुताबिक डिग्री-डिप्लोमा हासिल किया, लेकिन आज के दौर में स्पेशलाइजेशन काफी अहम है और इसी के अनुसार इंस्टीट्टूट खोले जाने की जरूरत है। कोई भले ही अच्छा लिखता हो, उसके अंदर पत्रकारों वाले सभी गुण भले ही हों, लेकिन टीवी और न्यू मीडिया की बात करें तो उसके लिए उसे ट्रेनिंग की जरूरत है। इसके अलावा एजुकेटर्स के लिए भी ट्रेनिंग बहुत जरूरी है। इसलिए ही आईआईएमसी ने पिछली साल नेशनल मीडया फैक्लटी डेवलपमेंट सेंटर की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य मीडिया एजुकेशन में सुधार करना और शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है।  

केजी सुरेश का यह भी कहना था कि आज के समय में भाषाई मीडिया का काफी तेजी से विस्तार हो रहा है। आजकल लोग अपनी भाषा में ही मीडिया को देखना, सुनना और पढ़ना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में हमें ये देखना होगा कि एजुकेटर इसे किस रूप में अपना रहे हैं। पिछले ढाई साल में हमने इस दिशा में काफी काम किया है। हमने आईआईएमसी के महाराष्ट्र कैंपस में मराठी भाषा और केरल कैंपस में मलयालम भाषा में पत्रकारिता के कोर्स शुरू किए हैं। इसका कारण यही है कि तेजी से बढ़ती लैंग्वेज मीडिया इंडस्ट्री में प्रशिक्षित लोगों की कमी को पूरा किया जा सके।

उनका कहना था कि आज के समय में देश में अच्छे जर्नल्स और अच्छी किताबों की काफी जरूरत है। हमें इंडस्ट्री के साथ ही एजुकेशन सेक्टर के लोगों को भी प्रोत्साहित करना होगा कि वे ऐसी ऐसी किताबें लिखें जो दुनिया की श्रेष्ठ किताबों में शामिल हों।

आखिर में उन्होंने कहा कि हम सभी को यूजीसी से गुजारिश करनी चाहिए कि वह मीडिया एजुकेशन के लिए नियमों को आसान बनाए, जिससे इंडस्ट्री के अनुभवी लोगों को असिस्टेंट, असोसिएट और प्रोफेसर के तौर पर भर्ती किया जा सके। केजी सुरेश का यह भी कहना था कि एजुकेशन के बिना मीडिया अधूरी है और मीडिया के बिना एजुकेशन पूरी नहीं है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे पत्रकारों की जरूरत है जो प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में समान रूप से काम कर सकें।


पत्रकारिता के छात्र किस तरह अच्छे पत्रकार बन पाएं, इसके बारे में केजी सुरेश का कहना था कि जितना ज्यादा से ज्यादा वे पढ़ेंगे, उतना ही उनके लिए अच्छा होगा। अभिनेत्री विद्या बालन की ‘डर्टी पिक्चर’फिल्म के डायलॉग ‘ऐंटरटेनमेंट, ऐंटरटेनमेंट, ऐंटरटेनमेंट’ का उदाहरण देते हुए केजी सुरेश ने कहा कि चाहे डिजिटल मीडिया में पढ़िए, चाहे प्रिंट में पढ़िए, लेकिन जितना ज्यादा हो सकता है, उतना पढ़िए। यह पढ़ाई भविष्य में बहुत काम आएगी।

 

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