ये 4 घटनाएं आपको एसपी के व्यक्तित्व से कराती है रूबरू

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा था- क्षमा बड़न को चाहिए...

Last Modified:
Thursday, 27 June, 2019
Samachar4media

निर्मलेंदु

वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा था- क्षमा बड़न को चाहिए। संयम ही एसपी का बहुत बड़ा गुण था। दरअसलउनको इस बात का अहसास था कि बदला लेने की भावना से या किसी को कटु शब्द कहकर अंतत: कुछ ΄प्राप्त नहीं होताइसलिए वे हमेशा मुझे यही समझाते रहते थे कि मुख से हमे कभी भी ऐसा शब्द नहीं निकालना चाहिएजिससे दूसरों का दिल दुखे। शायद यही कारण था कि बड़ी-बड़ी गलतियों को भी वे हंसते हुए नजरंदाज कर दिया करते थे- जी हांमाफ कर देना उनके स्वभाव का अभिन्न अंग था।

शायद उसी में उन्हें आत्मसंतोष होता थालेकिन डांट नहीं मिलने के कारण कुछ ऐसे लोग भी हुआ करते थे रविवार मेंजो बहुत ज्यादा दुखी हो जाया करते थे। इस बात को लेकर परेशान हो जाते थे कि एसपी ने इतनी बड़ी गलती पर कुछ कहा क्यों नहींऐसा क्यों करते थे एसपीएक बार मैंने ΄पूछा भैया आप गलतियों को माफ क्यों कर देते हैंतो उन्होंने मुझसे कहानिर्मलकोई जान-बूझ कर गलती नहीं करता। गलlतियां हो जाती हैंकभी नासमझी की वजह सेतो कभी असर्तकता के कारण। कोई भी जान-बूझ कर डांट खाना नहीं चाहेगा और यदि ऐसा आदमी कोई हैतो मैं समझता हूं कि वह पागल होगा। मैंने कई बार बड़ी गलतियां रविवार में रहते हुए की हैंलेकिन उन्होंने मुझे कभी नहीं डांटा। कुछ लोग ऐसे होते हैंजो क्रोध और कठोर वाणी को नियंत्रण में नहीं रखना जानतेजो सदा दूसरों की भूलों को तलाशने में लगे रहते हैबहाने तलाशते हैं क्रोध निकालने काताकि दूसरों को समझ में आ जाए कि वे बड़े हैं और सच तो यही है कि जब ऐसे लोगों को बहाने नहीं मिलतेतो वे अपने अपने तरीके से बहाने बना भी लेते हैंलेकिन एसपी ने ऐसा कभी नहीं किया। 

दरअसलजिस पद-अधिकारधन-ऐश्वर्यमान-बड़ाई और यश-कीर्ति के लिए हम पागल हो रहे होते हैंसच तो यही है कि इनमे से कोई भी हमें ‘तृप्ति’ नहीं दे सकता। जो तृप्ति दे सकता हैवह है लोगों को क्षमा कर देना और बदले में ΄यार बटोरना'। जी हांएसपी यही करते थे। वे क्षमा करके ΄यार' और 'इज्जत' कमाते थेजिसकी कद्र इंसान के मरने के बाद भी होती है। एसपी को शायद इस बात का अहसास था कि मान-सम्मान और ΄यार-मुहब्बत' से बड़ी कमाई और कुछ है ही नहीं। यही वह जीवन भर कमाते रहे। ऐसे तो अनगिनत ऐसी-ऐसी घटनाएं हैंजहां एसपी मुझे डांट सकते थेलेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया। इसी सिलसिले में कुछ घटनाओं का जिक्र करना यहां उचित हो जाता है।

घटनाक्रम 1

उन दिनों रविवार का कवर पृष्ठ अमूमन मैं ही बनवाया करता था। यानी कवर जिडाइन कैसी होगीटीपी कौन सी जाएगी और उसका डिजाइन कैसे बनेगाइन सभी बिंदुओं पर मैं आर्टिस्ट से बोल करके कवर बनवाया करता था। उस अंक में राजस्थान की राजनीति पर कवर स्टेरी थीइसीलिए एसपी जयपुर गए हुए थे। जाने से पहले उन्होंने मुझसे कहानिर्मल मैं जयपुर से फोन करके तुम्हें बता दूंगा कि कवर स्टोरी कौन सी होगी और कवर कैसे बनाना है। दो दिन बाद वहां से फोन आया और उन्होंने कवर स्टोरी तथा कवर कैसे बनाया जाएउसकी एक सम्यक रूपरेखा बता दी। तत्पश्चात मैंने कवर बनाकर भेज दिया। अंक छप करके निकल आया। एसपी तब तक जयपुर से लौट कर आ भी गए थे। अमूमन गुरुवार को मद्रास ΄प्रेस से कवर पेज छप कर आ जाया करता था। 

उस दिन भी गुरुवार था। मैं अपने काम में व्यस्त था। शायद अगले अंक के फाइनल पेज चेक कर रहा था। मैं अपने काम में इतना मगन था कि मैं देखा ही नहीं कि एसपी मेरे पीछे खड़े हैं। फिर जब ध्यान गयातो उन्होंने मुझसे कहानिर्मलजरा अंदर (केबिन में) आओ। केबिन के अंदर ΄प्रवेश करते वक्त मैंने देखा कि उनके हाथ में रविवार का कवर पेज है। मैंने उत्सुकता जताई कि भैया कैसा हैउत्तर में उन्होंने कवर ΄पृष्ठ को मेरी ओर बढ़ाते हुए कहामैंने जैसा कहा थातुमने ठीक उसका उल्टा कर दिया। मैंने जिस कवर स्टोरी बनाने के लिए कहा थातुमने उसे विशेष रिपोर्ट बना दिया और विशेष रिपोर्ट को ...। सुनते ही मैं परेशान हो गया। उनको पता था कि मैं छोटी-छोटी चीजों से परेशान हो जाता हूंशायद इसीलिए उन्होंने तुरंत कहाकोई बात नहीं ऐसा हो जाता है। मैं बाहर आया। सोचाइतनी बड़ी बात हो गई और उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं कहा। मेरी आंखों में आंसू आ गए। मुझे अब इस बात का डर सताने लगा कि अभी सभी स्टाफ को पता चल जाएगा कि निर्मल से कोई गलती हुई है। 

इसीलिए मैं तुरंत विभाग से बाहर निकल गया। थोड़ी देर बाद जब मन शांत हुआतो मैं अपनी सीट पर लौट आया। काफी देर तक इसी उधेड़बुन पर फंसा रहा कि उन्होंने मुझे डांटा क्यों नहींमैं बहुत भावुक इंसान हूं। उस दिनमुझे याद हैमैं रात भर सो नहीं सका। पत्नी मुझसे ΄पूछती रही कि तुम्हें हुआ क्या हैमैंने उससे कुछ भी नहीं कहा। दूसरे दिन मैं सीधे एसपी के घर गया और कहाभैया मुझे माफ कर दीजिए। वे हंसने लगे। कहातुम बेवकूफ हो! तुम काम करते होइसीलिए तुमसे गलती हुई है। और भविष्य में भी तुमसे गलतियां होती रहेंगी। अगर इसी तरह सिर्फ एक गलती पर हम किसी को बुरा भला कहना शुरू कर देंगेतो वह और ज्यादा गलती करेगा। लेकिन कुछ नहीं कहने पर वह भविष्य में हमेशा उसी तरह का काम दोबारा करते वक्त सचेत रहेगा। इस तरह उन्होंने वहां से समझा बुझाकर और खाना खिलाकर तुरंत ऑफिस जाने के लिए कहा।

घटना नं- 2

गलतियां हर पत्रिका में होती हैंइसलिए एक बार फिर मुझसे एक गलती हो गई। हुआ यूं कि एक दिन ‘रविवार’ के हम सभी साथी बाहर लॉन पर बैठे शाम की चाय पी रहे थे। चूंकि मैगजीन एक दिन पहले पैकअप कर दी थीइसीलिए रिलैक्स मूड में थे। हम लोग बैठे-बैठे हंसी मजाक कर रहे थे कि इतने में एसपी अंदर आए और हंसते हुए मुझसे पूछा कि निर्मलतुम्हारी राशि कौन सी हैमैंने कहामेरी दो राशि है। नाम के अनुसारवृश्चिक और जन्म समय के अनुसार सिंह। उनके हाथ में रविवार का नया अंक था। उन्होंने तुरंत अंक को आगे बढ़ाया और हंसते हुए कहा कि देखो जरा तुम्हारी राशि में क्या हैमैंने शुरू से आखिर तक अच्छी तरह से देखातो बात समझ में आ गई। उसमें सिंह राशि गायब थी। फिर उन्होंने कहामैं सबसे पहले अपनी राशि देखता हूं। इसीलिए पलटते ही जब मैंने देखा कि मेरी राशि नहीं हैतो पहले तो मैं चौंकाफिर समझ में आ गया कि एक राशि कम है। इस वाकये के बाद उन्होंने केवल इतना कहा कि हमेशा बारह राशियां गिन लिया करो। और यह कहते हुए वे अंदर चले गए। आज भी मैं हमेशा बारह राशियां गिन लेता हूं।

घटना नं-3

उस दिन हम लोग रिलैक्स मूड में बैठे थेबल्कि यह कहना उचित होगा कि हम लोग सब शाम को भेल (बांग्ला भाषा में इसे मूड़ि कहते हैं) खा रहे थे। हंसी मजाक में एक दूसरे पर टिका टिप्पणी भी कर रहे थे। तभी एसपी हंसते हुए आए। उस दिन भी उनके हाथ में रविवार का ताजा अंक था। मेरी नजर उनके चेहरे पर पड़ीतो वे मुस्कुराने लगे। फिर उन्होंने राजकिशोर जी की ओर मुड़कर उनसे ΄पूछाकि राजकिशोर जीसुना है आपके यहां कोई नया एडिटर आ रहा है। पहले तो राजकिशोर जी चौंक गएफिर उन्होंने पूछाक्याक्या कह रहे हैं सुरेंद्रजी! एसपी ने मैगजीन आगे बढ़ाते हुए व्यंग्य करते हुए टिप्पणी की- लगता हैमैनेजमेंट ने मुझे निकाल दिया है। इस बार राजकिशोर की ओर मुखातिब होकर कहा कि अब आपके सपने साकार हो जाएंगे। एक निश्छल हंसी थी उनके चेहरे पर। क्योंकि मेरे बाद तो आप ही संपादक बनने के हकदार हैं। हम सभी यह सुनकर परेशान हो गएक्योंकि हम में से किसी को भी यह समझ में नहीं आ रहा था कि एसपी ऐसा क्यों कह रहे हैं?

खैरथोड़ी देर बाद उन्होंने मैगजीन का पहला पन्ना खोला। और हम सभी को दिखाते हुए कहाअब सुरेंद्र प्रताप सिंह इस रविवार के संपादक नहीं रहे। आप लोग अपना अपना बायोडाटा मैनेजमेंट को भेज सकते हैं और यह कह कर वे खूब ठहाके मार मार कर हंसने लगे। मैंने उनके हाथ से मैगजीन ले ली। पहला पन्ना पलटा। देखा कि वहां संपादक के तौर पर एसपी का नाम नहीं हैलेकिन एक स्पेस जरूर छूट गया है। मुझे बात समझ में आ गई। उन दिनों पेस्टिंग का जमाना था। नाम हर बार पेस्टिंग करके लगवाया जाता था। गैली काटकर लगाना होता था। छूटा हुआ स्पेस देखकर मुझे यह समझने में कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई कि नाम कहीं गिर गया है। हालांकि आश्चर्य की बात तो यही है कि एसपी ने इस बड़ी बात को भी बिल्कुल नजरंदाज कर दियाइस तरह से मानो कुछ हुआ ही न हो। वे चाहतेतो इस बात पर पेस्टिंग विभाग से लेकर सभी को लाइनहाजिर करवा सकते थेलेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कियाक्योंकि उन्हें पता था कि इससे नाम तो ΄प्रिंट नहीं हो सकता।

घटना नं-4

घटनाएं तो कई हैंइसलिए सभी घटनाओं का जिक्र करना यहां संभव नहीं है। हांएक घटना जरूर ऐसी हैजिसका जिक्र करना यहां बहुत ही आवश्यक हैएसपी के व्यक्तित्व को समझने के लिए।

यह वाक्या सन् 1982 का है। तब रविवार में विज्ञापन परिशिष्ट का सारा काम मैं ही देखता था। उन्हीं दिनों मध्य प्रदेश पर 40 पेज के विज्ञापन परिशिष्ट का काम चल रहा था। तब मुझे दमे की भयानक शिकायत रहती थी। अमूमन परिशिष्ट की टीम में दो और सहयोगी मेरे साथ होते थे। परिशिष्ट का काम चल रहा थातभी मेरी तबियत खराब होनी शुरू हो गई। धीरे धीरे मेरी तबियत इतनी खराब हो गई कि मुझे अंतत: छुट्टी लेनी पड़ी। ऐसी स्थिति में मैं अपना काम अपने दोनों साथियों (राजेश त्रिपाठी और हरिनारायण सिंह) को समझा बुझा कर चला गया। मेरी तबियत इतनी खराब हो गई कि मुझे 15 दिनों की छुट्टी लेनी पड़ी। छुट्टी से लौटकर आयातो मैंने परिशिष्ट के एवज में बिल बनाकर विज्ञापन विभाग के सीनियर मैनेजर आलोक कुमार को भेज दिया और उसके बाद मैं अपने दैनिक काम में लग गया। अचानक एक दिन राजेश ने मुझसे पूछा कि निर्मल विज्ञापन का पैसा अभी तक नहीं आया क्यामुझे भी लगा कि काफी देर हो चुकी है। अब तक तो चेक आ जाने चाहिए थे।

मैं तुरंत आलोक कुमार से मिला और उनसे पूछाआलोक दाइस बार हमें अभी तक मध्य प्रदेश विज्ञापन परिशिष्ट के ΄पैसे नहीं मिलेपहले उनको शायद समझ में नहीं आयाइसीलिए उन्होंने पूछा, वॉट?

मैंने कहामध्य प्रदेश विज्ञापन परिशिष्ट का ΄पैसा ...मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि उन्होंने जवाब में कहावह पैसा तो आत्मानंद सिंह (विज्ञापन प्रतिनिधि) के नाम पर लग गया है।

मैंने पूछाक्योंआप तो जानते ही हैं कि यह सारा काम मैं करता हूं। मेरे साथ मेरे दो साथी भी होते हैँलेकिन तुम तो बीमार थेउन्होंने पूछा?

मैंने कहामैं बीमार जरूर थालेकिन मैं स्वयं साठ प्रतिशत काम करके गया था और फिर बाकी काम अपने दो साथियों में बांट कर गया था। फिर मैंने विनम्रतापूर्वक कहा कि बिल में मैंने तीन लोगों के बीच पूरे पैसे बांट कर चेक बनाने के लिए आग्रह किया है। ऐसा करिएआप मेरे उन दोनों सहयोगियों को पैसे दे दोक्योंकि उन दोनों ने मेहनत की हैअन्यथा वे भविष्य में हमारा साथ नहीं देंगे। और वैसे भी मैंने वादा किया है। इस पर उन्होंने कहाचेक बन चुका हैइसलिए अब यह संभव नहीं है। दरअसलउनकी बातों से लगा कि वे खुद नहीं चाहतेइसलिए मैंने उनसे पूछा कि क्या आत्मानंद सिंह पेज बनवा सकते हैंसंपादन कर सकते हैंप्रूफ पढ़ सकते हैंअनुवाद कर सकते हैंमैंने दृढ़तापूर्वक कहावे ये सब नहीं कर सकते। यह सब जान बूझकर किया गया है। मुझे गुस्सा आ गया और गुस्से में मैंने कहा कि आप गलत’ लोगों को शह देते हैं। इस पर उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हारे कहने का मतलब यह है कि मैं ‘बायस्ड’ हूं।

मैंने जवाब में कहामैंने आपको बायस्ड नहीं कहा। इस पर वे खड़े हो गए और चिल्लाने लगे कि जानते हो तुम किससे बात कर रहे होउनके इस तरह से चिल्लाने के बाद मैंने कहाहांमैं जानता हूं कि आप विज्ञापन विभाग के सीनियर मैनेजर हैं। इससे क्या होता हैतब तक गुस्सा मेरे सिर पर चढ़ चुका था और मैंने उन्हें फिर चल्लाते हुए कहा कि यदि आपके पिताजी के पास दौलत नहीं होतीतो न ही आप पढ़ लिख पाते और न ही आज आप यहां होते। हो सकता हैआप भी रिक्शा चला रहे होते! गेट आउट कह कर उन्होंने मुझे अपने केबिन से निकाल दिया। मैं अपने विभाग में पहुंचातो भक्त दा (सेवा संपादक)जो कि कान से ऊंचे सुनते थेइशारे से मुझसे कहा कि आपको साहब बुला रहे हैं। मैं एसपी के केबिन में गयातो देखा कि वे फोन पर कह रहे हैं कि निर्मल से तुमने कुछ उल्टी सीधी बात जरूर की होगी। वैसे भी उसने और उसकी टीम ने ही सारा काम किया है। यहां का रजिस्टर गवाह है। फिर तुम्हारे कहने पर मैं उसे क्यों डांटूंयह कहकर उन्होंने फोन रख दिया। अब उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा। मैं बैठ गया।

उन्होंने कहानिर्मल अभी अभी आलोक का फोन आया था। वह बहुत गुस्से में है। अरूप बाबू (उन दिनों आनंद बाजार पत्रिका के जनरल मैनेजर थे। वैसे वे मालिक भी हैं।) से शिकायत करने वाला थालेकिन मैंने उसे कह दिया कि इसमें तुम्हारे विभाग की ही गलती है। तुम ऊपर जाओ। आलोक से अब अच्छी तरह बात कर लो। मैं ऊपर गयातो इस क्षण आलोक कुमार का तेवर ही बदला हुआ था। मेरे पहुंचे ही उन्होंने मुझसे उल्टा कहानिर्मल जो हो गयाउसे भूल जाओ। दोबारा बिल बनाकर दे दो।पैसे मिल जाएंगे। फिर हाथ मिलाया और कोकाकोला भी पिलाया। वैसेयहां यह बता दें कि बाद के दिनों में आलोक कुमार और मेरे बहुत अच्छे संबंध बन गए थे। उन्होंने मेरे कहने पर मेरे एक दोस्त को नौकरी भी दी थीविज्ञापन विभाग में।

यह घटना इस बात का सबूत है कि एसपी सच्चाई का साथ देने में कभी पीछे नहीं हटते थेजबकि हम यह भालीभांति जानते थे कि एसपी और आलोक कुमार में बहुत अच्छी दोस्ती थी। दोनों एक दूसरे के घर में दिन रात पड़े रहते थेलेकिन बात जब सच्चाई की होती थीतो एसपी हमेशा सच्चाई का ही साथ देते थेभले ही इससे उनका बहुत बड़ा नुकसान ही क्यों न हो जाएया फिर दोस्तों के बीच में दरार पड़ जाए?

 

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दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

सहारनपुर में दैनिक जागरण के पत्रकार और उनके भाई की घर में घुसकर गोली मारकर कर दी गई थी हत्या

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 21 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 21 August, 2019
Ashish

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान (24) और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान (20) की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले के तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जाता है कि आरोपितों की गिरफ्तारी मुजफ्फरनगर में तितावी थाना क्षेत्र से हुई है। पकड़े गए आरोपितों में मुख्य आरोपित महिपाल सैनी (45) और उसके दो बेटे सूरज (21) व सन्नी (19) शामिल हैं, जबकि एक नाबालिग पुत्र अभी फरार है। आरोपितों के कब्जे से एक लाइसेंसी बंदूक, एक राइफल और इनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दो तमंचे भी बरामद हुए हैं।

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में फरार चारों आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और पुलिस की कई टीमें संभावित स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों की तलाश में जुटी हुई थीं। महिपाल की पत्नी विमलेश व बेटी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। विमलेश को जेल, जबकि बेटी को सोमवार को बाल संप्रेक्षण गृह, नोएडा भेज दिया गया था। हत्यारोपित के हवाले से एसएसपी ने दावा किया कि उधार के 20 हजार रुपए न चुका पाने के कारण हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

 पढ़ें: छोटी सी बात पर की गई पत्रकार और उसके भाई को गोली मारकर हत्या 

एसएसपी दिनेश कुमार पी के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि महिपाल वर्ष 2011 में पुराना सहारनपुर के माधोनगर में आकर बसा था। इसके बाद आशीष के पिता परिवार के साथ इस मोहल्ले में आए थे। 2015 में मकान में निर्माण कराने के लिए आशीष ने महिपाल से 50 हजार रुपए उधार लिए थे। इसमें से 30 हजार रुपए वह लौटा चुका था, जबकि शेष रकम 500 रुपए प्रति महीना लौटाने की बात कही थी। इसके बाद ही इनके बीच रंजिश शुरू हो गई। 20 हजार रुपए न लौटाने के कारण ढाई-तीन साल से दोनों परिवारों के बीच बोलचाल भी बंद थी।

पढ़ें: आशीष की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार के लिए की ये घोषणा

पुलिस के दावों के अनुसार, रविवार सुबह नाले में गोबर बहाने को लेकर हुए झगड़े के दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव भी हुआ। इसी के चलते महिपाल व उसके बेटों ने गोली मारकर आशीष व आशुतोष की हत्या कर दी।

पढ़ें: दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस ने उठाया कड़ा कदम

गौरतलब है कि मौहल्ला माधव नगर में रहने वाले आशीष व उनके भाई की पड़ोस में रहने वाले महिपाल से लड़ाई हो गई थी। इसके बाद आरोपितों ने घर में घुसकर आशीष व उनके भाई की हत्या कर दी थी। आशीष दैनिक जागरण से पहले हिन्दुस्तान और जनवाणी अखबार में भी काम कर चुके थे।

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इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए रचनाएं आमंत्रित

उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग्य, निबंध एवं बाल साहित्य विधाओं में प्रत्येक विधा के लिए इक्कीस सौ रुपए राशि के पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2019
Awards

22वें अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों के लिए रचनाकारों से साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं। साहित्य सदन, भोपाल द्वारा हर साल यह पुरस्‍कार दिया जाता है। इसके तहत उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग्य, निबंध एवं बाल साहित्य विधाओं में प्रत्येक विधा के लिए इक्कीस सौ रुपए राशि के साहित्य पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे।

इन पुरस्कारों के लिए पुस्तकों की दो प्रतियां, लेखक के दो फोटो एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपए प्रवेश शुल्क भेजना होगा। हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि एक जनवरी 2015 से लेकर 31 दिसंबर 2018 के मध्य होनी चाहिए। दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जाएगा। श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों को भी दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जाएंगे।

इच्छुक रचनाकार 30 दिसंबर 2019 तक श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन, 145 – ए, साईंनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल- 462042 (मप्र) के पते पर पुस्तकें भेज सकते हैं। किसी भी जानकारी के लिए फोन नंबर-09977782777/0755-2494777 अथवा jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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जर्नलिस्ट की मदद को पत्रकारों ने दिखाई एकजुटता, सरकार के सामने रखीं ये मांगें

सहारनपुर में कूड़ा डालने के विवाद में रविवार को दिनदहाड़े दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की कर दी गई थी हत्या

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Journalist Association

सहारनपुर में रविवार को दिनदहाड़े दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की हत्या के बाद प्रदेश भर के पत्रकारों ने इस घटना को लेकर रोष जताया है। इस घटना के विरोध में पत्रकार एसोसिएशन के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जिलाधिकारी, आगरा एनजी रवि कुमार से मिला और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

इस ज्ञापन में पत्रकारों ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता के साथ ही परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग उठाई। जिलाधिकारी से मिलने वाले पत्रकारों में अनुपम पांडेय, नितिन उपाध्याय, संजय सिंह, अनूप जिंदल, गौरव बंसल, निक्की, अजय यादव, गीतम सिंह, ओपी वरुण, बब्ले भारद्वाज, कपिल अग्रवाल, लक्ष्मीकांत पचौरी, विनीत दुबे, आरिफ, एसपी सिंह आदि मौजूद रहे।

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दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस ने उठाया कड़ा कदम

सहारनपुर में घर में घुसकर की गई थी पत्रकार और उनके भाई की हत्या, फरार चल रहे हैं चारों आरोपित

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Ashish Ashutosh

सहारनपुर में कूड़ा डालने के विवाद में दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की हत्या के मामले में पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने इस मामले में चारों आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है।

पुलिस की कई टीमें संभावित स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों की तलाश में जुटी हुई हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद भी ली जा रही है। पुलिस ने इस मामले में किसी तरह का शराब माफिया कनेक्शन होने से इनकार किया है। वहीं सोमवार को आशीष और उनके भाई का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान तमाम पत्रकारों के अलावा सहारनपुर के एसएसपी दिनेश कुमार पी सहित पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे।

 पढ़ें: छोटी सी बात पर की गई पत्रकार और उसके भाई को गोली मारकर हत्या 

एसएसपी के अनुसार, इस मामले में आरोपित महिपाल, उसके बेटे गौरव, सूरज और सन्नी के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के इनाम की घोषणा कर दी गई है और आरोपितों के कुछ रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, महिपाल की पत्नी विमलेश व बेटी वर्षा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 पढ़ें: आशीष की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार के लिए की ये घोषणा

गौरतलब है कि मौहल्ला माधव नगर में रहने वाले आशीष व उनके भाई की पड़ोस में रहने वाले महिपाल से लड़ाई हो गई थी। इसके बाद आरोपितों ने घर में घुसकर आशीष व उनके भाई की हत्या कर दी थी। आशीष दैनिक जागरण से पहले हिन्दुस्तान और जनवाणी अखबार में भी काम कर चुके थे।

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मीडिया संस्थान ने एम्पलॉइज से कहा-सोशल मीडिया पासवर्ड शेयर करें, तभी आएगी सैलरी

पिछले तीन महीने से संस्थान के कहने के बावजूद अधिकांश एम्पलॉइज इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नाराज प्रबंधन ने अब एम्पलॉइज को चेतावनी दी है

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Social Media

देश की न्यूज एजेंसियों में शुमार ‘हिन्दुस्थान समाचार’ सोशल मीडिया पर अपनी पैठ बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटी हुई है। ऐसे में अब संस्थान ने अपने एम्पलॉइज को भी एक नोटिस के जरिए संस्थान के सोशल मीडिया अकाउंट्स को फॉलो करने, लाइक करने और कमेंट करने को कहा है।

पिछले तीन महीने से संस्थान के कहने के बावजूद अधिकांश एम्पलॉइज इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नाराज प्रबंधन ने अब एम्पलॉइज को चेतावनी दी है। संस्थान की ओर से महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अशोक कुमार की ओर से एम्पलॉइज को जारी किए गए नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी पूर्णकालिक और अंशकालीन सहयोगी तीन दिन के अंदर यानी 21 अगस्त से पहले अपने फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम की डिटेल और पासवर्ड प्रबंधन को भेजें।

ये भी कहा गया है कि जब तक एम्पलॉइज अपने सोशल मीडिया अकाउंट का स्क्रीनशॉट भेज नहीं देते हैं, जुलाई और उसके आगे का वेतन या मानदेय नहीं दिया जा सकेगा। आप ये पूरा नोटिस नीचे पढ़ सकते हैं।

 

 

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वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष की किताब को मिली 'बॉलिवुड' में एंट्री

पिछले साल से ही यह कवायद चल रही थी, लेकिन अंतिम फैसला अब हो पाया है

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Sagarika Ghose

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष की किताब ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ अब फिल्म का रूप लेने जा रही है। हालांकि, पिछले साल से ही यह कवायद चल रही थी, लेकिन अंतिम फैसला अब हो पाया है। यह फिल्म बड़े पर्दे पर नहीं, बल्कि वेब सीरीज की शक्ल में लोगों तक पहुंचेगी।

उन्होंने इसके लिए 'लंच बॉक्स' जैसी फिल्म के निर्देशक रितिश बत्रा से हाथ मिला लिया है। फिल्म के निर्माता रॉनी स्क्रूवाला हैं। मशहूर एक्ट्रेस विद्या बालन फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाएंगी।

माना जा रहा है कि अगले साल तक यह फिल्म तैयार हो जाएगी। वैसे 2018 में भी यह खबर आई थी कि सागरिका घोष की इस किताब पर फिल्म बनाने के राइट्स विद्या के पति सिद्धार्थ रॉय कपूर ने खरीद लिए हैं और विद्या इसमें लीड रोल में नजर आएंगी।

सागरिका ने खुद भी ट्वीट करके कहा था कि उन्होंने सिद्धार्थ रॉय कपूर और विद्या बालन प्रोडक्शंस के साथ अपनी किताब के राइट्स को लेकर करार किया है। उनका इरादा इस किताब पर फिल्म बनाने का है। अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि सागरिका की किताब पर वेब सीरीज बनने जा रही है। सागरिका घोष की इस किताब के कवर पेज को आप यहां देख सकते हैं।

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तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को ‘सुप्रीम’ झटका

अपनी सहकर्मी से यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे हैं तरुण तेजपाल

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Tarun Tejpal

अपनी सहकर्मी से यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की याचिका को खारिज करते हुए गोवा की निचली अदालत में सुनवाई पर लगी रोक हटा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को छह महीने में ट्रॉयल पूरा करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि वर्ष 2017 में गोवा की निचली अदालत ने तेजपाल पर रेप और यौन उत्पीड़न सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किये थे, जिसे तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

गौरतलब है कि तेजपाल पर अपनी जूनियर सहकर्मी से यौन उत्पीड़न का आरोप है। मामला साल 2013 का है। तरुण तेजपाल पर आरोप है कि गोवा में 'थिंक फेस्ट' के दौरान होटल की लिफ्ट में उन्‍होंने अपने साथ काम करने वाली पत्रकार का यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर्स से इस घटना का जिक्र किया था और मीडिया में पीड़िता, तेजपाल और तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी के बीच बातचीत की ईमेल भी पब्लिश हुई थी।

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आजतक के युवा पत्रकार के साथ मांझे के चक्कर में हुआ हादसा

दीपक के साथ यह हादसा दिल्ली के मयूर विहार इलाके में हुआ। अस्पताल में कराया गया है भर्ती

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Deepak Kumar

हर साल 15 अगस्त और इसके कुछ दिनों बाद तक दिल्ली-एनसीआर में काफी पतंगबाजी देखने को मिलती है। पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का भी खूब इस्तेमाल होता है। इस चाइनीज मांझे की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसा ही एक हादसा हिंदी न्यूज चैनल आजतक के पत्रकार दीपक कुमार के साथ हुआ है।

जानकारी के मुताबिक बाइक चालते वक्त चाइनीज मांझा दीपक के गले में फंस गया और इस वजह से उनका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में गले पर चोट लगने से खून भी बहा। इसके अलावा पैर में भी चोट आई है। दीपक के साथ यह हादसा दिल्ली के मयूर विहार इलाके में हुआ। 

गौरतलब है कि दीपक आजतक के अलावा ‘दैनिक भास्कर’ और ‘अमर उजाला’ जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। बिहार के सीवान जिले के रहने वाले दीपक की पहचान बतौर युवा बिजनेस पत्रकार है। हाल ही में दीपक तब चर्चा में आए थे, जब उनके फेसबुक छोड़ने की खबर आई। बताया जा रहा है कि लोकसभा नतीजों के बाद से दीपक को लगातार गालियां और धमकी मिल रही थीं।

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महिला पत्रकार ने तिरंगे का अपमान करने वालों को यूं दिया मुंहतोड़ जवाब

पत्रकार पूनम जोशी के इस कदम की सोशल मीडिया पर हो रही है काफी सराहना, लोग कर रहे सैल्यूट

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 19 August, 2019
Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Poonam Joshi

भारतीय पत्रकार पूनम जोशी की देशभक्ति की चर्चा इन दिनों देश-विदेश में हो रही है। आखिर हो भी क्यों न, जब उन्होंने काम ही ऐसा किया है। दरअसल, पूनम जोशी लंदन में तिरंगे का अपमान करने वाले खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों से न सिर्फ भिड़ गईं, बल्कि उनके हाथ से तिरंगा छीन भी लिया। पूनम जोशी के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। ट्विटर से लेकर फेसबुक तक लोग उनकी देशभक्ति और बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। पूनम लंदन में एबीपी न्यूज की संवाददाता है। 

बता दें कि 15 अगस्त को हिंदुस्तान समेत विदेशों में रह रहे भारतीयों ने तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में भी तिरंगा फहराया गया। इस दौरान भारतीय उच्चायोग के बाहर पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे लोग तिरंगे का अपमान करने की कोशिश करने लगे, तभी वहां मौजूद भारतीय पत्रकार पूनम जोशी प्रदर्शनकारियों से भिड़ गईं और उनसे तिरंगा छीन लिया।

इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

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प्रेस एसोसिएशन के चुनाव में इन पत्रकारों को मिली जीत, देखें पूरी लिस्ट

इस अवसर पर एसोसिएशन की पांच सदस्यीय एग्जिक्यूटिव कमेटी की घोषणा भी की गई।

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Sunday, 18 August, 2019
Last Modified:
Sunday, 18 August, 2019
Press Association

प्रेस एसोसिएशन के चुनाव में जयशंकर गुप्ता को लगातार दूसरी बार प्रेजिडेंट चुना गया है। 17 अगस्त 2019 को हुए चुनाव में कुल 328 वोट पड़े, जिनमें से उन्हें 181 वोट हासिल हुए। इस पद के लिए खड़े अन्य उम्मीदवारों में श्रीकृष्णा को 99 और आलोक कुमार को 28 वोट मिले। इस दौरान कुछ वोट रद्द भी हो गये।

मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक टुटेजा और चुनाव अधिकारी रंजीत कुमार व ज्ञान पाठक की देखरेख में हुए इन चुनावों में आनंद मिश्रा को वाइस प्रेजिडेंट और सीके नायक के जनरल सेक्रेट्री चुना गया। आनंद मिश्रा को 206 वोट और सीके नायक को 161 वोट मिले। वहीं, कल्याण बारू (Kalyan Barooah) को जॉइंट सेक्रेट्री और संतोष ठाकुर को कोषाध्यक्ष पद के लिए चुना गया। उन्हें क्रमश: 154 और 142 वोट मिले।

इस अवसर पर एसोसिएशन की पांच सदस्यीय एग्जिक्यूटिव कमेटी की घोषणा भी की गई। इसमें अमलेंदु भूषण खान (155 वोट), अनिल दुबे (139 वोट), हुमा सिद्दीक (139 वोट), केपी मलिक (128 वोट) और शाहिद के. अब्बास (135 वोट) को शामिल किया गया।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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