सुभाष चंद्रा से एक्सचेंज4मीडिया की वार्ता

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Last Modified:
Friday, 01 January, 2016
Samachar4media

सुभाष  चंद्रा- एक परिचय

 

सुभाष चंद्रा का जन्म 30 नवंबर,1950 के हिसार (हरियाणा) में हुआ था। टेलीविजन इंडस्ट्री में आने से पहले वे चावल निर्यात का काम करते थे। सुभाष चंद्रा ने भारत के पहले निजी टेलीविजन चैनल ज़ी टेलीविजन की नींव रखी। एस्सेल समूह और ज़ी के चेयरमैन के रुप में सुभाष चंद्रा ऐसे लोगों में जाने जाते हैं जिसने भारतीय ब्रॉडकास्ट मीडिया इंडस्ट्री का चेहरा ही बदल कर रख दिया और यह हमेशा के लिए परिवर्तित हो गया। उनकी रुचि पैकेजिंग, थीम पार्क्स, लॉटरीज और सिनेमा मल्टीप्लेक्स में भी है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एकाधिकार को चुनौती देते हुए घरेलू 20-20 इंडियन क्रिकेट लीग की शुरुआत की। नवंबर 2009 में अंग्रेजी के अखबार डेली न्यूज़ एनालिसिस (डीएनए) के मैंनेजमेंट की जिम्मेदारी स्वीकारी। डीएनए, अंग्रेज़ी भारत के आठ प्रमुख अखबारों में से एक है और इसका विस्तार काफी तेजी से हो रहा है।

मई 1996 में चंद्रा ने मल्टीमीडिया तालीम रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की। चंद्रा ग्लोबल विपाश्ना फाउंडेशन के प्रेसिडेंट भी हैं। उन्होंने 1990 में विपाश्ना का कोर्स किया था, उसके बाद वे मानसिक शुद्धि का प्रचार भी कर रहे हैं। चंद्रा भारत में एकल विद्यालय फाउंडेशन के चेयरमैन हैं, यह एक धर्मार्थ संस्थान है जो भारत में एकल विद्यालय का संचालन करता है। इसका उद्देश्य 2011 तक भारत के ग्रामीण और आदिवासी इलाके से अशिक्षा मिटाना है। चंद्रा अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन सिविलाइज्ड हारमोनी के संस्थापक चेयरमैन हैं।

 

सुभाष चंद्रा कॅरियर एक नजर में

1990- ग्लोबल विपाश्ना फाउंडेशन की स्थापना

1996- तालीम की स्थापना

1999- बिजनेस स्टैंडर्ड बिजनेसमैन ऑफ दि इयर अवार्ड

2004- ग्लोबल इंडियन एंटरटेंनमेंट पर्सनालिटी ऑफ दि इयर अवार्ड

2005- भारत के 40 धनी व्यवसायी में 16वां स्थान प्राप्त

2005- ब्रिटेन में चौथा धनी एशियाई

 

सुभाष चंद्रा, एस्सेल समूह और ज़ी के चेयरमैन

 

सुभाष चंद्रा बहुत समय पहले चावल का निर्यात किया करते थे, उसके बाद उन्होंने भारत में ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री की नींव रखी। सुभाष चंद्रा ऐसे लोगों में जाने जाते हैं जिसने भारतीय ब्रॉडकास्ट मीडिया इंडस्ट्री का चेहरा ही बदल कर रख दिया और यह हमेशा के लिए परिवर्तित हो गया।

सुभाष चंद्रा को भारतीय पे टीवी इंडस्ट्री का पिता माना जाता है, कि सिर्फ मीडिया सम्राट या या मीडिया बिजनेसमैन। जबकि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंपनियां भारत में व्यवसाय कर रही है, चंद्रा उन लोगों में से हैं जो अमेरिका में अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं।

एस्सेल समूह और ज़ी के चेयरमैन के रुप में चंद्रा को मालूम है कि अगले पल क्या होने वाला है और भविष्य में कहां ग्रोथ होने वाला है। उनका सपना अपने समूह को लेकर तीव्र और स्पष्ट है।

 सुभाष चंद्रा से इस उद्योग के नए खिलाड़ियों, ब्रॉडकास्टिंग को प्रभावित कर रहे मुद्दे, विशेषकर समाचार प्रसारण उद्योग और इसके अलावा कुछ ऐसे सवाल जो उन्हें मीडिया दिग्गजों की कतार में ला खड़ा करता है, पर चर्चा की गई। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:

 

प्र. यह बहस काफी पुरानी हो चली है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंपनियां भारत में काफी मजबूती से ग्रोथ कर रही हैं। आपके विचार से हमारे उद्योग पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

. कुल मिलाकर, भारत आज खुलेपन की नीति पर चल रहा है, और एंटरटेंनमेंट इंडस्ट्री इससे अछूती नहीं है। अंतरराष्ट्रीय लोग इस पर 100 प्रतिशत अधिकार कर सकते हैं, जबसे इसे सभी के लिए खोल दिया गया है। मैं सभी को शुभकामना देता हूं। लेकिन दूसरी तरफ, कुछ भारतीय मीडिया कंपनियां है जो काफी सफल है। वास्तव में, कई लोग इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों ने न्यूज़ के क्षेत्र में प्रवेश किया है। मेरा मानना है कि 70-80 प्रतिशत लोगों ने न्यूज़ के क्षेत्र में कई अन्य कारणों से प्रवेश किया है, और कुछ मामलों में, ऐसा हो सकता है कि यह सिर्फ सुरक्षा के कारणों से हो।    

तब मैं बहुत खुश हुआ था, जब सूचना और प्रसारण मंत्री ने यह घोषणा की कि वे सिफारिश करेंगी कि अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए नए मुद्दे पर सख्ती से विचार किया जाए। मेरा विचार है कि किसी भी भाषा में या किसी भी वर्ग के लिए टेलीविजन स्टेशन चलाने के लिए बहुत सावधानी की जरुरत है, क्योंकि वे लाखों लोगों के घरों में बेडरुम तक पहुंच रहे हैं।  
विशेष रुप से, जब हमारी वितरण प्रणाली अच्छी तरह से नियंत्रित है और ही अच्छी तरह से ऑरगेनाइज भारत में 8000 से ज्यादा, या कई लोगों के अनुसार, 10,000-20,000 केबल ऑपरेटर्स हैं। यह परिवार को प्रभावित करता है, और इसलिए हमें सावधान रहने की जरुरत है।  इस कारण से, उचित मापदंड की जरुरत है। उदाहरण के लिए, बैंक का लाइसेंस किसी भी व्यक्ति को बैंकिंग करने के लिए नहीं दिया जाता है। वे मापदंडों पर खरा उतरने वालों को ही बैंक का लाइसेंस देते हैं। अगर मैं आवेदन करता हूं, तो वे केवल मेरी पहचान की पूरी जांच करेंगे, बल्कि वे यह भी जांच करेंगे कि मैं कहां से धन प्राप्त कर रहा हूं। वे पैसे के स्रोत की जांच करेंगे और ऑरगेनाइजेशन में पैसा कैसे रहा है, इसकी भी जांच करेंगे। कंपनी लॉ संबंधित पार्टियों को भी परिभाषित करता है, और वे संदिग्ध रिकार्ड की भी जांच करते हैं, और आज, ऐसे चैनल मालिक भी हैं जिसका पुलिस रिकार्ड है, और यह सब अच्छा नहीं है।

 

भारतीय न्यूज़ चैनल कुछ चैनलों के कारण अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। मैंने देखा है कि कुछ न्यूज़ चैनल यूट्यूब से कंटेंट डाउनलोडिंग कर रहै हैं और संपूर्ण चैनल चला रहे हैं, वे एक पैसा भी खर्च नहीं कर रहे हैं। इंडस्ट्री के लिए यह सब अच्छा नहीं है।

 

प्र.जबकि, हम सब न्यूज़ के क्षेत्र में हैं, और आपने बैंकिंग इंडस्ट्री का उदाहरण दिया है, लेकिन सरकार से कोई दिशानिर्देश या सिफारिश करेंगे, न्यूज़ क्षेत्र में  जो नए-नए खिलाड़ी रहे हैं उनके लिए?

. मैं बैंकिंग इंडस्ट्री से एक कदम आगे बढ़ना चाहता हूं। उदाहरण के लिए, समाचारपत्र, आज, उन लोगों के लिए है जो पढ़ सकते हैं। लेकिन टेलीविजन में, कुछ भी जरुरत नहीं है यह चलती तस्वीरों के साथ आपकी भाषा में है, कोई भी इसे समझ सकता है। आपको समाचारपत्र की अपेक्षा टेलीविज़न में और अधिक सावधान रहने की जरुरत है।

 

प्र.वास्तव में, पूर्व में, आपको यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि कंटेंट को भी रेगुलेटेट किया जाना चाहिए?

. मेरा विचार है कि रेगुलेशन की जरुरत है। मेरे कुछ मीडिया सहयोगी इससे खुश नहीं होंगे, लेकिन मैं इसके पक्ष में हूं। एक विकल्प यह भी है कि आपको अधिक जिम्मेदार होना पड़ेगा और सेल्फ रेगुलेट करना पड़ेगा। लेकिन आप देखिए 26/11 और यहां तक कि कारगिल, में न्यूज़ चैनल्स थे, वास्तव में वे सूचना प्रसारित कर रहे थे, और मेरा मानना है कि कई चैनल्स ऐसे थे जो आतंकवादियों से बात कर रहे थे। लोगों को गलत सूचना प्रसारित की जा रही थी।

प्र. ऐसे चैनलों को नोटिस भी दी गई थी?

. लेकिन उसके बाद क्या हुआ? कुछ भी नहीं। अगर आप, मीडिया जिम्मेदार नहीं होंगे तो कुछ लोग आगे आयेंगे और कहेंगे कि मीडिया में रेगुलेशन की जरुरत है।

प्र.नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोशिएशन सेल्फ रेगुलेशन के तौर पर काम कर रहा है। क्या आप सोचते हैं कि इसके द्वारा कुछ हासिल किया जा सकता है?

. नहीं, मैं ऐसा नहीं सोचता हूं।

प्र. नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोशिएशन से आपकी क्या उम्मीदें हैं?

. मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि हमने अपने चैनल से अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा है। यह कोई मायने नहीं रखता है कि हमारे चैनल की रेटिंग लो हो। मेरा मानना है कि हम बिल्कुल सही हैं, क्योंकि हमारे एडवरटाइजर्स हमें अभी भी आदर कर रहे हैं।

प्र. आर्थिक मंदी के सवाल पर कुछ लोगों का मानना है कि हम लोग मंदी से बाहर चुके हैं और बहुत सारे लोगों का मानना है कि कुछ भी परिवर्तित नहीं हुआ है?

. सबसे पहले, मंदी पर मेरा विचार है कि हम क्या देखते हैं। यह सब हमारे दिमाग की उपज है। जिस समय आप उदास महसूस करना शुरु करते हो, आपकी सोच में परिवर्तन होना शुरु हो जाता है। उसी तरह से एडवरटाइजर्स ने पैसे बचाना शुरु किया। भारत में मंदी के पीछे यही सोच मूल रुप से जिम्मेदार रहा है, और कुछ विदेशी पैसा भी पूंजी बाजार से बाहर चले जाने के कारण मंदी का प्रभाव पड़ा। हालांकि हमारे विज्ञापन राजस्व में काफी कमी आई, लेकिन दूसरी तरफ मुंबई और दिल्ली के बाहर भारत में मैंने कहीं भी मंदी को महसूस नहीं किया।

प्र.लेकिन हमने वास्तव में देखा कि कई लोगों ने अपनी लागत में कमी की, नौकरी में कटौती और वेतन में कटौती?

. इसके पीछे दो कारण रहे हैं, पहला जब विज्ञापनदाताओं ने सोचा कि राजस्व में कमी करनी है, मीडिया मालिकों के पास सोचने के कारण थे, और दूसरा, कई लोगों ने देखा कि लागत में कमी करने का यह अच्छा अवसर है। यह सब एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था और दीर्घकालीन रुप से इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।

प्र.लेकिन, क्या विज्ञापन राजस्व फिर से वापस गया है?

. हां, यह सही है।

प्र.अभी हाल में ही आपने यह निर्णय लिया है कि, क्षेत्रीय बिजनेस ज़ी न्यूज़ लिमिटेड से ज़ी लिमिटेड में जाएगा। क्या आप इसके पीछे के कारणों को बतायेंगे?

. हमने जेनरल एटरटेंनमेंट चैनल को इसलिए शिफ्ट किया है क्योंकि वे ग्रोथ कर रहे हैं और उनकी प्रकृति अलग है। इससे पहले इन चैनलों में न्यूज़ कंटेंट भी था, जैसे हमारे मराठी चैनल में मराठी न्यूज़ बुलेटिन और जेनरल एंटरटेनमेंट है। लेकिन कुछ समय बाद, हम लोग एक मराठी न्यूज़ चैनल, एक बंगाली न्यूज़ चैनल और कई क्षेत्रीय भाषा के चैनल खोलेंगे। ये चैनल अब पूरी तरह से जेनरल एंटरटेनमेंट चैनल हैं।

प्र.जब हम ज़ी समूह के चैनल के बारे में बात करते हैं, आपको मालूम होगा कि इंडस्ट्री के टॉप तीन प्लेयर्स में कलर्स, स्टार प्लस और ज़ी टीवी का नाम आता है। जब प्रोग्रामिंग और अन्य क्षेत्रों में निवेश की बात आती है तो ज़ी का नाम लिया जाता है। कंटेंट और टैलेंट पर भी आप काफी ध्यान देते हैं। इस पर आप विस्तार से जानकारी देंगे।

. पहले मैं टैलेंट के सवाल पर कहना चाहूंगा। स्वाभाविक रुप से जब कोई हमारी तरह से सफल होता है, लोग सोचते हैं कि इसके पीछे कई लोगों की मेहनत है। यह कुछ हद तक सही है, लेकिन पूरी तरह नहीं। लोग गलत सोचते हैं कि एक आदमी सारा कुछ बदल सकता है। हम अपने लोगों से बहुत खुश हैं जो यहां से जाकर तीन से चार गुणा अधिक वेतन पा रहे हैं। आज, स्टार प्लस, कलर्स और सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन सभी जगह प्रोग्रामिंग हेड ज़ी से गए हैं। इसका अर्थ है कि ज़ी कुछ सही कर रहा है।

प्र. दूसरे चैनल कुछ नहीं कर रहे हैं?

. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि स्टार और कलर्स जो कर रहे हैं वह गलत है। लेकिन ये लोग, और सैलरी तीन चीजों को रेखांकित करती है, कंपनी का कारण, दिशा और अंतिम उद्देश्य। कुछ लोग इस क्षेत्र में पूंजी बाजार का खेल खेल रहे हैं उनके शेयरों की कीमत 100 गुणा तक बढ़ जाती है, जैसे ही वे इस क्षेत्र में निवेश करते हैं। कुछ लोगों के लिए, उनके मालिक उनसे हजारों मील दूर बैठे होते हैं और वे साबित करते हैं कि अच्छा काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य अलग होता है।
 ज़ी समूह अपने शेयर धारकों और हितधारकों के प्रति हमेशा सचेत होता है। हमलोग यहां छह महीना या एक साल के लिए नहीं हैं। जब तक मैं अपने कंपनी को बेचूंगा नहीं, मैं कहां जाने वाला हूं?  लेकिन एक एग्जीक्यूटीव के द्वारा कंपनी को चलाने में नुकसान ही है। एक एग्जीक्यूटीव के लिए यह कोई मायने नहीं रखता है, वे किसी दूसरी जगह जॉब कर सकते हैं और दोगुणा वेतन ले सकते हैं। उनका क्या जाएगा?  लेकिन मैं जो कहना चाहता हूं उसका आशय यह है कि इस बारे में क्या सही है और क्या गलत है। सफलता ज्यादातर छुपी हुई होती है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

प्र. कलर्स ने जिस तरह से सफलता पाई आपको आश्चर्य हुआ?

. नहीं, जिस तरह से वे वितरण, प्रोग्रामिंग और कंसलटेंसी पर पैसा खर्च कर रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि कलर्स सिर्फ कंसल्टिंग पर 12 करोड़ रुपये प्रत्येक साल खर्च कर रहा है।

प्र.रीजनल बिजनेस में स्टार जैसी कंपनी भी संपूर्ण भारत में अपने पांव पसार रही है। इसका ज़ी लिमिटेड पर क्या असर पड़ने वाला है?

. आप खुद इस क्षेत्र में अध्ययन कर सकते हो। मुझे खुशी होती है, सिर्फ आज ही नहीं 1995 में भी जब हमने अपनी कंपनी का विभाजन किया था, तभी से वे वही कर रहे हैं जो ज़ी कर चुका होता है। वे सिर्फ हमारा अनुसरण करते हैं, इसका कारण हो सकता है कि हम सही कर रहे हैं, मैं उन्हें शुभकामना देता हूं।

प्र. आप ज़ी टीवी के लिए सीईओ नियुक्त करने वाले हैं?

. संभव है।

प्र. डीएनए जिस तरह से ग्रोथ कर रहा है, आप खुश हैं?

.  यह हमेशा बेहतर कर सकता है। लेकिन एक चीज जो हमने हासिल की है, वह है मुंबई में टाइम्स ऑफ इडिया के वर्चस्व को तोड़ा है। लेकिन इसे अभी वित्तीय रुप से मजबूत होना होगा।

प्र.हमने देखा है कि बहुत से नए प्लेयर्स आए और चल नहीं पाए। क्या कोई उपाय है जिसे आप इंडस्ट्री के लोगों से शेयर करना चाहते हैं, जिससे इसका बेहतर ढ़ंग से विकास हो सके।

. मैं इसका उतर देना नहीं चाहता, लेकिन यह सही होगा कि आपके प्रश्न का जवाब दे दूं। आप गहरे में जाइये और 10 युवा लोगों से पूछिए कि आप एमबीए या इंजीनियरिंग या मेडिकल क्यों कर रहे हैं तो 90 प्रतिशत का जवाब होगा कि उनसे किसी ने कहा है कि इसकी अभी काफी मांग है। आपने शादी क्यों कितो वे कहेंगे क्या बकबास प्रश्न हैं। यह एक परंपरा है, सभी लोग शादी करते हैं, सो मैंने भी की। टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में ऐसा ही कुछ हो रहा है। सभी लोग एक ही दिशा में जा रहे हैं। 450 भारतीय मूल के टेलीविजन स्टेशन हैं और 180 अभी लंबित हैं। सो, हो यह रहा है कि हर कोई बिना इस उद्योग की कोई जानकारी के, बगैर सोचे-समझे इस इंडस्ट्री में रहे हैं। मैंने देखा है कि इंडियन ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को एक साल में 400-500 मिलीयन डॉलर का घाटा हो रहा है। लोगों को खुद सोचना चाहिए कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। सभी ब्रॉडकास्टर्स को एक साथ आना होगा, उन्हें पता नहीं है कि वे इस व्यवसाय में क्यों आए। विज्ञापनदाता और केबल ऑपरेटर्स एक साथ चुके हैं। लेकिन हम लोग नहीं, हम लोग एक साथ होकर अपने कार्य में तेजी ला सकते हैं। 

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Enterr10 मीडिया में इस बड़े पद से दीप द्रोण ने दिया इस्तीफा

करीब एक साल से इस मीडिया नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे दीप द्रोण

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 March, 2021
Last Modified:
Wednesday, 03 March, 2021
Enterr10

‘एंटर10’ (Enterr10) मीडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर दीप द्रोण (Deep Drona) ने कंपनी को बाय बोल दिया है। वह करीब एक साल से इस कंपनी में कार्यरत थे। बताया जाता है कि वह इस महीने के अंत तक कंपनी के साथ बने रहेंगे।

‘एंटर10’ मीडिया में सीओओ के तौर पर नेटवर्क की पूरी ग्रोथ की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। इस नेटवर्क में Dangal TV, Enterr10 Movies, Bhojpuri Cinema, Fakt Marathi और Enterr10 Bangla चैनल्स शामिल हैं। ‘एंटर10’ मीडिया में दीप द्रोण कंपनी के एमडी मनीष सिंघल को सीधे रिपोर्ट करते थे। फरवरी 2020 में ‘एंटर10’ को जॉइन करने से पूर्व वह ‘ITW Consulting’ में चीफ बिजनेस ऑफिसर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

दीप द्रोण को करीब ढाई दशक का अनुभव है। पूर्व में वह ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (SPNI) में लंबी पारी खेल चुके हैं। ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ से पहले वह ‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ (Sri Adhikari Brothers) टेलिविजन नेटवर्क के साथ जुड़े हुए थे। दीपी द्रोण ने ‘निंबस कम्युनिकेशन’ (Nimbus Communication) से अपने टीवी करियर की शुरुआत की थी। 

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TRAI के साथ बैठक में उठे ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर से जुड़े ये अहम मुद्दे

ट्राई के चेयरमैन पीडी वाघेला और सचिव एसके गुप्ता की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के सीईओ और प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं पर चर्चा की।  

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने सोमवार को तमाम ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के सीईओ और प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं पर चर्चा की।   

ट्राई के चेयरमैन पीडी वाघेला और सचिव एसके गुप्ता की मौजूदगी में हुई इस बैठक में डिश टीवी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर जवाहर गोयल, टाटा स्काई के एमडी और सीईओ हरित नागपाल, डेन नेटवर्क्स के सीईओ एसएन शर्मा, सिटी नेटवर्क्स के सीईओ अनिल मल्होत्रा और एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडेय भी शामिल हुए।  

बताया जाता है कि बैठक में डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स (DPOs) सिस्टम के ऑडिट जैसे-कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS) और सबस्क्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) पर भी चर्चा हुई। ब्रॉडकास्टर्स इस बात से नाखुश थे कि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स ऑडिट संबंधी गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा नेटवर्क कैपेसिटी फीस (NCF) को दो साल तक अपरिवर्तित रहने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में ट्राई के सचिव एसके गुप्ता का कहना था कि यह हर साल की तरह होने वाली एक नियमित बैठक थी, जिसमें ट्राई द्वारा स्टेकहोल्डर्स से तमाम मुद्दों पर चर्चा की जाती है। वहीं, टाटा स्काई के एमडी और सीईओ हरित नागपाल का भी कहना है कि यह बैठक इंडस्ट्री से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी।

नाम न छापने की शर्त पर एक केबल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के हेड ने बताया, ‘यह हर साल होने वाली एक नियमित बैठक थी, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष में उठाए जाने वाले कदमों को लेकर चर्चा की जाती है। ढाई से तीन घंटे चली इस बैठक में ब्रॉडकास्टर्स ने ऑडिट संबंधी मुद्दे उठाए जबकि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स ऑपरेटर्स ने अनुपालन (compliance) संबंधी मुद्दों पर अपनी बात रखी।’ एक अन्य प्रमुख टीवी नेटवर्क के सीनियर एग्जिक्यूटिव के अनुसार, यह बैठक काफी अच्छी रही और इसमें सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच स्वस्थ चर्चा हुई।

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Tam Media Research में इस बड़े पद से विनीता शाह ने दिया इस्तीफा

16 साल से ज्यादा समय से इस कंपनी में अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं विनीता शाह

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Tam Media

‘टैम मीडिया रिसर्च’ (TAM Media Research) की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (TAM Axis & TAM Sports) विनीता शाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह 16 साल से ज्यादा समय से इस कंपनी से जुड़ी हुई थीं।

‘टैम मीडिया रिसर्च’ के साथ अपने इतने लंबे सफर में उन्होंने एनालिटिक्स, टैम स्पोर्ट्स और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाली।

विनीत शाह को मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट, कंसल्टेटिव सेल्स और एनालिटिक्स के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। वर्ष 2004 में टैम के साथ पारी शुरू करने से पहले विनीता Group M, Grey और McCann के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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TRP Case: BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी बड़ी राहत

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ इंडिया के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Partho Dasgupta

टीआरपी (TRP) से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पार्थो दासगुप्ता की अर्जी को मंजूर करते हुए उन्हें जमानत दे दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दासगुप्ता को दो लाख रुपये के पीआर बॉन्ड के भुगतान के बाद जमानत दी गई है। बता दें कि जस्टिस पीडी नाइक की बेंच ने करीब दो सप्ताह पहले दासगुप्ता की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद दासगुप्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

गौरतलब है कि टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले में मुंबई पुलिस ने 24 दिसंबर 2020 को पार्थो दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। टीआरपी घोटाले में उनकी 15वीं गिरफ्तारी थी। टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला अक्टूबर में तब सामने आया था, जब ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए घरेलू पैनल के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ‘हंसा रिसर्च’ (Hansa Research) के अधिकारी नितिन देवकर ने एक शिकायत दर्ज की, जिसमें कहा गया था जिन घरों में बार-ओ-मीटर लगे हैं, उन घरों को भुगतान करके कुछ टीवी चैनल्स दर्शकों की संख्या में हेरफेर कर रहे हैं।

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अब इन वरिष्ठ अफसर ने संभाली PIB की कमान

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक पद पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अफसर जयदीप भटनागर को नियुक्त किया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 02 March, 2021
Jaideep-Bhatnagar575

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक पद पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अफसर जयदीप भटनागर को नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोमवार (28 फरवरी 2021) को निवर्तमान प्रधान महानिदेशक कुलदीप सिंह धतवालिया से पदभार ग्रहण किया।

भटनागर भारतीय सूचना सेवा के 1986 बैच के अधिकारी हैं। इससे पहले वह दूरदर्शन न्यूज में कमर्शियल्स, सेल्स व मार्केटिंग डिविजन के प्रमुख रहे हैं।

भटनागर प्रसार भारती के विशेष संवाददाता के तौर पर पश्चिम एशिया में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 20 देशों को कवर किया। इसके बाद वे आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग के प्रमुख रहे।

प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के प्रधान महानिदेशक के दायित्व से पहले भटनागर पीआईबी में विभिन्न पदों पर छह वर्षों तक रहे हैं। भटनागर ने कुलदीप सिंह धतवालिया के 28 फरवरी 2021 को सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यभार संभाला है।

 

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9X Media से जुड़े आलोक नायर, निभाएंगे यह बड़ी जिम्मेदारी

आलोक नायर पूर्व में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘नेटवर्क18’ और ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड्स में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

Last Modified:
Monday, 01 March, 2021
Alok Nair

म्यूजिक टेलिविजन नेटवर्क ‘9एक्स मीडिया’ (9X Media) ने आलोक नायर को चीफ रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। वह पवन जेलखानी के स्थान पर यह जिम्मेदारी संभालेंगे, जिन्होंने पिछले दिनों अपनी एंटरप्रिन्योरशिप पारी शुरू करने के लिए यहां से इस्तीफा दे दिया है। आलोक नायर ‘9एक्स मीडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप गुहा को रिपोर्ट करेंगे। नेटवर्क को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आलोक नायर ‘9एक्स मीडिया’ की एग्जिक्यूटिव टीम और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ मिलकर काम करेंगे।  

आलोक को मीडिया और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘नेटवर्क18’ और ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया ब्रैंड्स में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।  

आलोक नायर की नियुक्ति के बारे में प्रदीप गुहा का कहना है, ‘महामारी के कारण तमाम उद्धोग धंधे प्रभावित हुए हैं। 9X मीडिया में हमने नई वास्तविकता को अपनाने और प्रतिकूलताओं के ढेर में छिपे अवसरों को तलाश करने के लिए कमर कस ली है। आलोक की नियुक्ति इसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है और कंपनी को उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, आलोक नायर का कहना है, ‘9X मीडिया की युवा और प्रतिभाशाली टीम में शामिल होने पर मैं बहुत खुश हूं। मैं प्रदीप गुहा के साथ काम करने को लेकर काफी उत्सुक हूं और पवन जेलखानी को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

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चर्चित पत्रकार जमाल खगोशी की हत्या के मामले में सामने आई ये चौंकाने वाली रिपोर्ट

अंग्रेजी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। वहीं, सऊदी की सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 27 February, 2021
Last Modified:
Saturday, 27 February, 2021
Jamal Khashoggi

अंग्रेजी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, अमेरिकी खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने ही निर्वासन में रह रहे सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की मंज़ूरी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाइडन प्रशासन ने शुक्रवार को जारी एक खुफिया रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी युवराज ने उस योजना को अपनी सहमति दी थी, जिसके तहत अमेरिका में रह रहे खशोगी को या तो जिंदा पकड़ने या मारने का फैसला किया गया था। यह पहला मौका है जब अमेरिका ने खशोगी की हत्या के लिए सीधे पर तौर सऊदी क्राउन प्रिंस का नाम लिया है, हालांकि सऊदी युवराज इनकार करते रहे हैं कि उन्होंने खशोगी की हत्या के आदेश दिए थे।

वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को लेकर बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है, 'सऊदी की सरकार जमाल खशोगी के मामले में अपमानजनक और गलत निष्कर्ष तक पहुंचने वाली अमेरिकी रिपोर्ट को सिरे से खारिज करती है। हम इस रिपोर्ट को अस्वीकार करते हैं। इस रिपोर्ट में गलत निष्कर्ष निकाला गया है।'

गौरतलब है कि सऊदी अरब के शहजादे के आलोचक रहे खशोगी की दो अक्टूबर 2018 में उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी मंगेतर से शादी रचाने के लिए आवश्यक कागजात लेने इस्तांबुल में अपने देश के वाणिज्य दूतावास में गए थे। इसके बाद से वह लापता हो गए थे। शुरू में उनके लापता होने पर रहस्य बन गया था। तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी अरब पर उनकी हत्या करने और उनके शव को ठिकाने लगा देने का आरोप लगाया था। हालांकि सऊदी अरब ने बाद में यह माना कि खशोगी की हत्या की गई, लेकिन उनकी हत्या में खुद की किसी संलिप्तता से इनकार किया था।

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सोनी म्यूजिक इंडिया से जुड़ीं संगीता अय्यर, निभाएंगी यह भूमिका

करीब दो दशक के अपने करियर में संगीता रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 26 February, 2021
Last Modified:
Friday, 26 February, 2021
Sangeetha Aiyer

‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  (SMI) ने संगीता अय्यर को डायरेक्टर (प्रमोशंस) के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है। अपनी इस भूमिका में संगीता अय्यर मीडिया चैनल्स में ‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  की प्रमोशन स्ट्रैटेजी और एक्टिविटीज का नेतृत्व करेंगी। वह ‘सोनी म्यूजिक इंडिया’  के मैनेजिंग डायरेक्टर रजत कक्कड़  को रिपोर्ट करेंगी।

इस बारे में रजत कक्कड़ का कहना है, ‘कंपनी में संगीता के शामिल होने पर हम बहुत उत्साहित हैं। संगीता को देश के उभरते हुए मीडिया परिदृश्य की गहरी समझ है और कंपनी को उनके अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।’

वहीं, संगीता अय्यर का कहना है, ‘सोनी म्यूजिक इंडिया और इसकी बेहतरीन टीम में शामिल होने पर मैं बहुत खुश हूं। सोनी म्यूजिक के नेतृत्व में भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री एक नए युग का निर्माण करने में जुटी है। यह देश भर में तमाम शैलियों और भाषाओं में गहरी भागीदारी प्रदान करने के साथ ही कलाकारों और प्रशंसकों के लिए आकर्षक कंटेंट प्रदान करती है।’

करीब दो दशक के अपने करियर में संगीता रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘रिलायंस मीडिया नेटवर्क’ और ‘स्टार नेटवर्क’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

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सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकार ने कसी लगाम, जारी कीं ये गाइडलाइंस

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार की दोपहर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 February, 2021
Last Modified:
Thursday, 25 February, 2021
OTT

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (OTT) प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गुरुवार को गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार की दोपहर आयोजित एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इसकी घोषणा की। नई गाइडलाइंस के दायरे में फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्‍स और नेटफ्लिकस, अमेजॉन प्राइम और हॉटस्‍टार जैसे ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स आएंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, 'सरकार का मानना है कि मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए एक लेवल-प्‍लेइंग फील्‍ड होना चाहिए इसलिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा। लोगों की मांग भी बहुत थी।' प्रकाश जावड़ेकर ने कहा जिस तरह फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड हैं, टीवी के लिए अलग काउंसिल बना है उसी तरह ओटीटी के लिए भी नियम लाए जा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने नए नियम लागू करने पर विचार किया है। उनका कहना था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के पास किसी तरह का कोई बंधन नहीं है। इसलिए तमाम आपत्तिजनक सामाग्रियां बिना किसी रोकटोक के दिखाई जाती हैं। इसी के मद्दे नजर सरकार को ये लगता है कि सभी लोगों को कुछ नियमों का पालन करना होगा।

वहीं, रविशंकर प्रसाद का कहना था, ‘सोशल मीडिया कंपनियों का भारत में कारोबार करने के लिए स्‍वागत है। इसकी हम तारीफ करते हैं। व्‍यापार करें और पैसे कमांए। सरकार असहमति के अधिकार का सम्मान करती है लेकिन यह बेहद जरूरी है कि यूजर्स को सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाने के लिए फोरम दिया जाए।’ प्रसाद ने कहा, ’हमारे पास कई शिकायतें आईं कि सोशल मीडिया पर मार्फ्ड तस्‍वीरें शेयर की जा रही हैं। आतंकी गतिविधियों के लिए इनका इस्‍तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म्‍स के दुरुपयोग का मसला सिविल सोसायटी से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।’

सोशल मीडिया के लिए गाइडलाइंस

- इसमें दो तरह की कैटिगरी हैं: सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी।

- सबको शिकायत निवारण व्यवस्था (ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म) बनानी पड़ेगी। 24 घंटे में शिकायत दर्ज करनी होगी और 14 दिन में निपटाना होगा।

- अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्‍मान से खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में कंटेंट हटाना होगा।

- सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को चीफ कम्‍प्‍लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का निवासी होगा।

- एक नोडल कॉन्‍टैक्‍ट पर्सन रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा।

- मंथली कम्‍प्‍लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी।

- सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में सोशल मीडिया कंपनी को बताना पड़ेगा।

- हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक पता होना चाहिए।

- हर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के पास यूजर्स वेरिफिकेशन की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।

- सोशल मीडिया के लिए नियम आज से ही लागू हो जाएंगे। सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को तीन महीने का वक्‍त मिलेगा।

ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए गाइडलाइंस

- ओटीटी और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को अपने बारे में विस्‍तृत जानकारी देनी होगी। रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं है।

- दोनों को ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्‍टम लागू करना होगा। अगर गलती पाई गई तो खुद से रेगुलेट करना होगा।

- ओटीटी प्‍लेटफॉर्म्‍स को सेल्‍फ रेगुलेशन बॉडी बनानी होगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई नामी हस्‍ती हेड करेगी।

- सेंसर बोर्ड की तरह ओटीटी पर भी उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन की व्‍यवस्‍था हो। एथिक्‍स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही रहेगा।

- डिजिटल मीडिया पोर्टल्‍स को अफवाह और झूठ फैलाने का कोई अधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि लंबे समय से नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने पर बहस चल रही थी। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर केंद्र सरकार से अब तक की गई कार्रवाइयों पर जवाब दाखिल करने को कहा था।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि वह ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के मुद्दे पर कुछ कदम उठाने पर विचार कर रही है।

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फर्जी पत्रकार का इस तरह फूटा भांडा, पुलिस ने दिखाया हवालात का रास्ता

पुलिस ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक फर्जी पत्रकार को गिरफ्तार किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 24 February, 2021
Last Modified:
Wednesday, 24 February, 2021
Arrest

पुलिस ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक फर्जी पत्रकार को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पकड़ा गया फर्जी पत्रकार कई बड़े न्यूज चैनल्स और अखबारों के फर्जी आईडी बनवाकर क्षेत्र में अवैध रूप से वसूली कर रहा था।

आरोपी ने अपना एक होर्डिंग भी छपवाकर दतिया व्यापार मेले के बाहर लगा दिया था, जिसमें उसने खुद को मीडिया पार्टनर बताया था। अन्य पत्रकारों ने जब अपने चैनलों का नाम और फर्जी पत्रकार का नाम देखा तो कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने करीब 21 वर्षीय इस फर्जी पत्रकार को उसके घर से कई दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार देर रात स्थानीय पत्रकार ने राजघाट कॉलोनी महावीर वाटिका निवासी अनुज पुत्र अनिल गुप्ता पर फर्जी पत्रकार बनकर लोगों से अवैध वसूली करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसपी अमन सिंह राठौड़ के निर्देश पर सोमवार को पुलिस ने आरोपी के घर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ करने पर अनुज के पास कई चैनलों और अखबारों के साथ पीआरओ का लेटर फ्रेम में जड़ा हुआ मिला। कई युवक-युवतियों को पत्रकार बनाने संबंधी दस्तावेज व नियुक्ति पत्र भी आरोपी के घर से जब्त किए गए। पुलिस अनुज से पूछताछ कर रही है।

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