अखबार की जिंदगी तीन घंटे की होती है

<div> <div> <span style=color: #800000><b>रामकृपाल सिंह</b><b>, </b><b>संपादक, नवभारत टाइम्स</b></sp

Last Modified:
Friday, 01 January, 2016
Samachar4media
रामकृपाल सिंह, संपादक, नवभारत टाइम्स
नवभारत टाइम्स’ के संपादक रामकृपाल सिंह पिछले 30 सालों से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं और कई मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं। 1990 से 93 तक ‘नवभारत टाइम्स’ लखनऊ में बतौर रेजिडेंट एडिटर भूमिका निभाने के बाद वे 1994 में दिल्ली आ गये और यहां पर 2004 तक सीनियर एडिटर के तौर पर संस्थान के साथ काम करते रहे। 2004 में इन्होंने प्रिंट से टीवी की ओर रुख किया और ‘टीवी टुडे’ ग्रुप के साथ बतौर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जुड़े। 2006-2008 तक ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ में ग्रुप एडिटर की भूमिका निभाई। 2008  में एक बार फिर वापस ‘नवभारत टाइम्स’ में एग्जीक्यूटिव एडिटर बनकर आये। रामकृपाल सिंह साइंस ग्रेजुएट हैं, साथ ही एलएलबी और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री भी हासिल कर चुके हैं। सप्ताह के साक्षात्कार में रामकृपाल सिंह समाचार4मीडिया के एडिटर नीरज सिंह और संवाददाता शिशिर शुक्ला के साथ अपने पत्रकारीय जीवन और ‘नवभारत टाइम्स’ की एडिटोरियल पॉलिसी से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं की चर्चा कर रहे हैं।
 
 
पत्रकारिता के शुरुआती दिनों से लेकर आज तक के सफर को आप किस तरह याद करते हैं?
 
बड़ी लंबी यात्रा है। मैंने अपने कॅरियर की शुरुआत 1977 में दैनिक ‘आज’ के साथ की। ‘आज’ कानपुर में लगभग मैं 6 महीने रहा। 78 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने एक ट्रेनिंग प्रोगाम शुरू किया था जिसके मार्फत मैं ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में आ गया। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ बंबई के बाद यहीं पर ‘नवभारत टाइम्स’ ज्वाइन कर लिया। बंबई से फिर मैं लखनऊ आ गया और ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ बना रहा। यहीं से ‘रविवार’ की ओर रुख किया और फिर ‘चौथी दुनिया’। लेकिन वक्त ने खुद को दोहराया और मैं एक बार फिर ‘नवभारत टाइम्स’ लखनऊ पहुंच गया। इसके बाद टेलीविजन पत्रकारिता का दौर शुरू हुआ जिसकी शुरुआत आज तक के साथ हुई। यहां पर मैं तीन साल रहा। यहां से चैनल हेड के रूप में ‘वायस ऑफ इंडिया’ के साथ जुड़ा जहां तकरीबन सवा साल रहा और फिर ‘नवभारत टाइम्स’ में बतौर संपादक मेरी वापसी हुई। सफर बड़ा लंबा है, यादें भी ढ़ेर सारी हैं।
 
आपने लंबा समय नवभारत टाइम्स में बिताया है। नवभारत टाइम्स लखनऊ दिल्ली और मुंबई में रहे हैं। लेकिन उस दौर में जब में कि अखबार विस्तार कर रहे हैं नवभारत टाइम्स खुद को सिकोड़ रहा है। ऐसा क्यों?
 
देखिए, विस्तार करना या फिर कोई और बदलाव करना यह हाउस की पॉलिसी होती है। जब मैं मुंबई से लखनऊ लौटा तीन महीने बाद ‘एनबीटी’ लखनऊ बंद हुआ। अखबार के विस्तार को लेकर मेरी समझ अलग है। अखबार की जो जिन्दगी होती है वह मात्र 80 किलोमीटर की होती है। मतलब आप जहां से निकलते है उससे 40 किलोमीटर दायें और 40 किलोमीटर बायें जा सकते हैं। वास्तव में अखबार जहां से निकलता है, वहीं का अखबार होता है। क्योंकि ज्यादातर वह बिकता वहीं पर है। आप मुझे एक भी अखबार बता दीजिये जो नेशनल है। राष्ट्रीय वही है जो स्थानीय है। 
 
दूसरे आपका दृष्टिकोण बहुत साफ होना चाहिये कि आप कैसा अखबार निकाल रहे है। आप प्रदेश का अखबार निकाल रहे हैं या देश का अखबार निकाल रहे हैं। अब कोई अखबार राष्ट्रीय नहीं रहा और कभी था भी नहीं। अगर आप मे लोकल स्ट्रेन्थ नही हैं, तो आप सर्वाइव नहीं कर सकते। मेरा मतलब आप जहां से निकलते है वहां के नहीं हैं तो आप कुछ भी नहीं हैं। आप की पहुंच तो हर जगह है, लेकिन पांच कॉपी झुमरी तलैया में और 5 कॉपी कन्याकुमारी में है तो इस तरह के सरकुलेशन से राजस्व नहीं आता है। इसलिए जो पीरीऑडिकल्स थे जैसे ‘दिनमान’ और ‘रविवार’ ये सब खत्म हो गये क्योंकि इनको विज्ञापन नहीं मिला। विज्ञापनदाता इसलिए विज्ञापन नहीं देता है कि उसको 5 लोग यूपी में जान जायें और 5 लोग बिहार में जान जाये। उसे मतलब इस बात से है कि मुझे अगर 4 लाख लोग दिल्ली में जान जायें, तो मेरे लिए यह ज्यादा जरूरी है। और सीधी-सीधी बात है भाई, नुकसान उठाकर अखबार निकालना कोई नहीं चाहता। मैंने बहुतों को सुना है, पर देखा किसी को नहीं। जो बेसिक बात आयी अगर लाभ नहीं हो रहा है तो फिर अखबार निकालने का कोई मतलब भी नहीं बनता। रोज दो अखबार निकलते हैं और दो दिन बाद बंद हो जाते हैं। चूकि ‘नवभारत टाइम्स’ घाटे में भी चल रहा था, इसलिए कुछ जगहों पर उसे बंद करने का फैसला लिया गया। लेकिन मेरा एक मानना है कि चूकि मैं वहां था नहीं, तो मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं जानता ।
 
तो फिर नवभारत टाइम्स को स्थानीय अखबार माना जाए?
 
राष्ट्रीय अखबार का मतलब क्या होता है? यह मुझे आज तक समझ में नहीं आया। वह अखबार राष्ट्रीय है जिसमें राष्टीय खबरें हैं या वह जो पूरे राष्ट्र में बिक रहा है। पूरे राष्ट्र में बिकने वाला कोई अखबार नहीं है। एक समय महानगरों में कुछ ही अखबार हुआ करते थे। मद्रास में ‘द हिन्दू’, मुंबई में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, दिल्ली में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ यही अखबार हुआ करते थे। तब क्या ये स्थानीय अखबार थे। आज जो सारी लड़ाई है वह इस बात को लेकर कि जहां से अखबार निकल रहा है वहां वह किस पोजीशन पर है। मेरठ में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ कितना बिकता है यह मायने नहीं रखता। दिल्ली में नंबर वन कौन है, लड़ाई इस बात की है और फिर विज्ञापनदाता हमेशा नंबर वन के पास जायेगा।
 
जैसे चार बैंक हैं अगर एक बैंक आपको चौदह प्रतिशत रिटर्न देता है, एक बैंक 12 प्रतिशत रिटर्न देता है, एक बैंक 10 प्रतिशत रिटर्न देता है और एक 6 प्रतिशत रिटर्न देता है। तो ग्राहक 10 प्रतिशत वाले या छह प्रतिशत वाले बैंक में खाता क्यों खोलेगा? जाहिर है वह वहां जाएगा जहां उसे सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। इसी तरह जो विज्ञापनदाता है वह भी पहले नंबर वन के पास ही जाएगा। फिर वो नंबर दो के पास जाता है और और यह कोई मेरी राय या उपदेश नहीं है। यह सत्य है, यह तथ्य है जो सबके सामने है।
 
तो क्या पाठक, प्रतिष्ठा और विज्ञापन इसका निर्धारण विज्ञापनदाता ही करते हैं?
 
नहीं यह निर्णय पाठक करता है, विज्ञापनदाता नहीं। विज्ञापनदाता थोड़े ही 5 लाख कॉपी खरीद रहा है। अखबार तो आपके पाठक खरीद रहे हैं। जो अखबार ज्यादा बिक रहा है इसका मतलब वह ज्यादा पढ़ा जा रहा है। अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते है तो आप जनता के फैसले को मानिये। जब विज्ञापनदाता देखता है कि 5 लाख लोग इसको पढ़ रहे हैं तो जैसा मैंने पहले ही कहा कि फिर वह 4 लाख वाले के पास क्यों जायेगा? ‘आज तक’ अगर नंबर वन है तो इसका अर्थ है कि ज्यादा दर्शक उसे देख रहे हैं न कि वह इस बात के लिए नंबर वन है कि उसके पास विज्ञापनदाता ज्यादा हैं। अखबार एक पब्लिक मीडियम है। पब्लिक जो सोचती है उसके फैसले को मानिए। आज चाहे ‘आईआरएस’ है या फिर ‘एबीसी’ सर्वे। जनता से ही तो पूछा जाता है। मेरा ये कहना है कि विज्ञापनदाता तो उसी के पास जायेगा जिसके पास पोटेंशिएल होगा उसके बजाए प्रतिष्ठा तो पाठक ही तय करेगा।
 
अखबार पब्लिक प्लेटफॉर्म है। दरवाजे के अंदर से आपके घर में पहुंचता है, फैसला उस घर का मालिक ही करेगा कि यह चाहिये कि नहीं। 
 
नवभारत टाइम्स के प्रतिष्ठा की बात आपने कही। नवभारत टाइम्स के ऊपर यह आरोप लगया जाता है किhspace=5 अखबारी भाषा को बिगाड़ने का काम सबसे पहले नवभारत टाइम्स ने किया?
 
अगर ‘नवभारत टाइम्स’ की भाषा बिगड़ी हुई भाषा होती तो ‘नवभारत टाइम्स’ का सरकुलेशन गिर गया होता। आखिर ‘नवभारत टाइम्स’ को लोग क्यों पढ़ रहे हैं? क्या लोग बिगड़ी हुई भाषा पढ़ना चाहते हैं। देखिये हम लोगो में से तीन तरह के लोग हैं। एक तो वो जिनके पास 10 प्रतिशत वर्तमान है, 90 प्रतिशत अतीत है। मै 60 का हूं। मेरे पास 90 प्रतिशत अतीत है 10 प्रतिशत वर्तमान है, 5 प्रतिशत भविष्य। ऐसे में मेरा नजरिया और मुझसे कम उम्र वालों के नजरिये से बिल्कुल अलग होगा।
 
परेशानी यह आ रही है कि जिनके पास 80 प्रतिशत अतीत है वो सोचते हैं कि उनको डायबिटीज है, मिठाई खा नहीं सकते तो उनकी चाहत है कि पूरे हिन्दुस्तान में पकवान वही बने जो हम पसंद करें जबकि जो उसके नीचे वाला है उसकी पसंद दूसरी है। तो जो 18-25-35 साल का टारगेट ऑडियन्स है, वह युवा है। वही विक्स वेपोरव का भी है, वही ‘नवभारत टाइम्स’ का भी है। वही समाचार4मीडिया का भी है। क्योंकि उसके पास 80 प्रतिशत भविष्य है, वही आपके साथ रह सकता है। जो श्मशान घाट की ओर मुंह किये खड़ा है उस पर ऊर्जा जाया करने में कोई समझदारी नहीं हैं। कई भाषाविद बैठे हुये है घरों में। वे बोलें की हस्त प्रच्छालन करके आ रहा हूं, उन्हें किसी ने रोका है फिर क्यों नहीं बोलते? अपने घर में आप बोलते हैं न कि आज मेरे लड़के की एक्जाम (परीक्षा) है, परसों रिजल्ट(परिणाम) आयेगा। मैं बाथरूम में फिसल गया। लेकिन जब आप लिखने लगेंगे तो क्या स्कूल की जगह विद्यालय हो जायेगा? हम इस नाटकीयता, इस दोहरेपन से बच रहे हैं। और लोगों ने हमारी भाषा का स्वागत किया है। सही बात करें तो लोगों ने बहुत स्वागत किया है इसलिये ‘नवभारत टाइम्स’ आज नंबर वन अखबार है। आज तमाम सर्वे है या कोई दूसरा भी करा लिया जाए तो यूथ के बीच में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार ‘नवभारत टाइम्स’ ही है।
 
अखबार ज्ञान के लिए नहीं होता है, उसके लिए किताबें है। अखबार तो आता है और तीन घंटे में मर जाता है। अखबार को पुस्तकालय में सजाकर नहीं रखा जा सकता है। सांझ होते-होते मूंगफली रखने के काम आने लगता है। भाषा वही जिंदा रहती है जिसमें जितने ज्यादा मिलावट के चांस हो जो भाषा जितनी मैली-गंदी होगी वह उतनी ही जीवंत होगी। फ्रांसीसी, और संस्कृत जैसी भाषाएं इसलिए खत्म हो गईं क्योंकि आप इसमें न कुछ डाल सकते है, न निकाल सकते हैं।
 
अगर आप प्रगतिशील विचारधारा को नहीं अपनाओगे तो पीछे छूट जाओगे। दुनिया इतनी बदल गयी है कि अब आपका लड़का ब्याज और कर्ज नहीं समझता वो कहता है ये क्या है? उसे लाभ समझ में आता है। आपको जमाने के साथ चलना होगा। वरना बैठकर गाली देते रहिये हाय आज की जनरेशन को क्या हो गया? कोई ठीक-ठाक आदमी मिल जायेगा वो कहेगा कि उनको नहीं आपको क्या हो गया है? आईटी सेक्टर में जो हो रहा है उसे किसी बुजुर्ग ने तो नहीं किया है। उन्हीं नालायकों ने किया जिन्हें आप गाली देते रहे हैं कि इनके चलते सारे मूल्य बेकार टूट रहे हैं।
 
जिन्हें अभी आपने टोपी वाले कहा यानि बुजुर्ग क्या उनके लिए कोई प्रोडक्ट नहीं है?
 
नहीं ऐसा नहीं है। उनके लिए भी प्रोडक्ट है, लेकिन आप कहीं भी जाइए आपका टारगेट तो वही रहेगा, जिसके सहारा आपको ज्यादा फायदा होगा जिनके सहारे आप दूर तक चल सकें। तो बनायेंगे तो आप वही न। देखिये स्वेटर बनते हैं तो तीन ही साइज होते हैं: छोटा (स्मॉल),  मध्यम (मीडियम) और  बड़ा (लार्ज)। दुनिया में ऐसा कहीं नहीं होता कि दो फुट वाले के लिए भी स्वेटर बन रहा है और सात फुट वाले के लिए भी बन रहा है। उसी के भीतर सभी को फिट होना है जो उस साइज से छोटा या बड़ा हो जाता है उसके लिए कितने प्रोडक्ट बनते हैं। आपका जो ग्राहक है उसी को तो ध्यान में रखकर आप चलते हैं। अगर मैं पूर्वाग्रही हूं तो मैं तो वही पढूंगा, तो आप यह पढ़िये कालीदास का अभिज्ञान शाकुन्तलम। मैं तो बेगम अख्तर का बहुत बड़ा फैन हूं आज भी मैं कहीं जाता हूं तो उन्हें खोजता हूं। इतने बड़े गीतकार गुलजार को भी ‘बीड़ी जलाइले जिगर से पिया’ लिखना पड़ा अगर आप जमाने के साथ नहीं चलेंगे तो पीछे छूट जाएंगे
 
नवभारत टाइम्स के ऑनलाइन संस्करण के लिए भी क्या आपका यही मत है?
 
‘नवभारत टाइम्स’ऑनलाइन का मैं संपादक जरूर हूं, लेकिन उसके कंटेट से मेरा वास्ता बहुत ही कम है, इसलिए इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।
 
नवभारत टाइम्स ने कभी अपना संपादकीय पेज बंद करने की बात की थी। डीएनए ने अपना संपादकीय पेज बंद कर दिया तो क्या इसे जमाने की दरकार माना जाए?
 
मैं एक चीज में विश्वास रखता हूं कि किसी शास्त्र में नहीं लिखा है कि अखबार में क्या होना चाहिये या क्या नहीं? यह जो कुछ भी हुआ था एक दौर में जरूरत होती थी। और आज क्या हो इसकी जरूरतें अलग हैं? सवाल इस बात का है कि अगर किसी अखबार में संपादकीय पेज नहीं है तो क्या वह न्यूज पेपर नहीं है? संपादकीय पेज ईश्वर की तरह है देखा किसी ने नहीं बस पूजा कर रहे हैं। कोई भी चीज यदि प्रसिद्ध है तो वह बंद ही नहीं हो सकता। अप्रसिद्ध होगी तो एक न एक दिन उसे बंद होना ही पड़ेगा। आज आप हर चीज को जान सकते हैं कि क्या पढ़ा जा रहा है और क्या नहीं? तो आप ऐसा पायजामा क्यों सिलेंगे जिसे कोई पहनने वाला ही न हो? यह वैज्ञानिक तथ्य है कि पूंछ की जरूरत नहीं रही तो पूंछ खत्म हो गयी। जिस चीज की मांग होगी वो अपने आप बढ़ेगी।
 
नवभारत टाइम्स से गए कुछ वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि यहां ब्रांड की दखल संपादकीय में बहुत ज्यादा है इससे आप सहमत हैं?
 
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में जितनी संपादकीय स्वतंत्रता है उतनी शायद कहीं नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि एक ही मुद्दे पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अलग स्टैंड लेता है और ‘नवभारत टाइम्स’ अलग। जैसा कि आप कह रहे हैं ऐसा होता तो यह कभी संभव ही नहीं हो पाता।
 
रामकृपाल सिंह जी प्रिंटलाइन में बतौर संपादक आते हैं, लेकिन कभी संपादकीय पन्ने पर या त्वरित टिप्पणी के साथ नजर नहीं आते।
 
hspace=5ऐसा होने के पीछे कारण भी है। बहुत लोग सोचते होंगे कि मैं लिख ही नहीं सकता, लेकिन मैं आपको बता दूं कि मैंने एक जमाने में बहुत लिखा है। अखबार में कॉलम लिखता था और आज भी जब जरूरत समझूंगा, तब लिखूंगा। मैं खुद को न्यूज़ का आदमी मानता हूं, इसलिए मैं न्यूज़ में ही रहना चाहता हूं। मैं अपनी जग-हंसाई कराने के लिए नहीं लिखना चाहता और मुझे इसकी निर्थकता का बोध 15 साल पहले ही हो गया था। हालांकि मैं किसी पर टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि आज यह बहुत से लोगों का जीविकोर्पाजन भी है। आप यह भी कह सकते हैं कि उस मोह से मैं बच गया हूं। नहीं तो मैं जितना चाहूं उतना लिखूं। मैं न कभी ब्लॉग पर गया और न ही मुझे इसका कोई मोह है। 
 
आपके सामाजिक जीवन के बारे में लोग कम जानते हैं ऐसा क्यों?
 
अज्ञेय ने एक बार कहा था कि आत्म कथाएं बताने के लिए कम लिखी जाती हैं छिपाने के लिए ज्यादा लिखी जाती हैं। मेरा सामाजिक जीवन कोई अनूठा नहीं है वैसा ही है जैसा एक आम आदमी का होता है, जैसे एक पत्रकार का होता है।
समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
TAGS s4m
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

OTT के खिलाफ अदालती मामलों को लेकर MIB उठा सकता है ये कदम

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
MIB

डिजिटल प्लेटफार्म्स को अपने दायरे में लाने के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) अब कथित तौर पर भारत में OTT प्लेटफार्म्स के खिलाफ सभी अदालती मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए एक याचिका दायर करने की योजना बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया ताकि उन्हें इसके अगले कदम के बारे में सूचित किया जा सके। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ 23 से अधिक अदालती मामले दायर किए गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एमआईबी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों में जाना पड़ता है, लिहाजा मंत्रालय का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के तहत सभी मामलों को लाना बेहतर होगा।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

 Netflix में इस बड़े पद से स्वाति मोहन का इस्तीफा

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग के डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Swati Mohan

नेटफ्लिक्स (Netflix) में मार्केटिंग की डायरेक्टर स्वाति मोहन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर की पुष्टि खुद स्वाति मोहन ने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media.com) से की।

नेटफ्लिक्स में अपने 2.5 साल के कार्यकाल के दौरान  मोहन ने इस प्लेटफॉर्म के लिए भारत में मार्केटिंग की जिम्मेदारियां संभाली और एक मजबूत टीम का निर्माण किया। उन्होंने नए-नए मार्केटिंग कैंपेन्स के जरिए इस स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नेटफ्लिक्स में शामिल होने से पहले, मोहन अप्रैल 2015 से नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) और फॉक्स नेटवर्क्स ग्रुप, इंडिया (Fox Networks Group, India) की कंट्री हेड थीं। जनवरी 2012 से मार्च 2015 के बीच वे इंडिया में फॉक्स इंटरनेशनल चैनल में कंटेंट और प्रोग्रामिंग की वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर इसके कई चैनल्स के लिए प्रोग्रामिंग और कंटेंट पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

उन्हें इस इंडस्ट्री में 16 वर्षों का अनुभव है। इस बीच इन्होंने Group M, O&M, FBC Media and और Endemol जैसी कंपनियों में काम किया।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटाई

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
SC

अमरावती भूमि घोटाले मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर लगाई रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है। यह रोक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने लगाई थी। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को जस्टिस अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने ये स्टे ऑर्डर जारी किया।

बेंच ने इस मामले में एफआइआर की जांच पर रोक सहित हाई कोर्ट के अन्य निर्देशों पर रोक लगाने इनकार कर दिया। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई अगले साल जनवरी में करेगी।

बेंच ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया है कि इस बीच वे हलफनामा दायर करें, साथ ही हाई कोर्ट से भी गुजारिश की है कि इस बीच वे मामले में कोई फैसला न लें।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर मुख्यमंत्री वाइएस जगन मोहन रेड्डी को नोटिस जारी नहीं किया और आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता सहित अन्य से प्रतिक्रिया मांगी, जिनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया था।   

मामले की सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हाई कोर्ट के आदेश को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरिम आदेश को पारित नहीं किया जाना चाहिए था। धवन ने घोटाले के बारे में कुछ तथ्यों का भी हवाला दिया, जो कथित तौर पर पूर्व महाधिवक्ता और अन्य लोगों से जुड़े विभिन्न लेनदेन को लेकर था।

इससे पहले 15 सितंबर को, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने जांच पर रोक लगा दी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद हाई कोर्ट ने यह फैसला लिया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा 2014 में राज्य के विभाजन के बाद अमरावती को राजधानी में स्थानांतरित करने के संबंध में भ्रष्टाचार और अवैध भूमि के लेन-देन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की थी। हाई कोर्ट ने एफआईआर के संबंध में कोई भी सूचना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया में सार्वजनिक नहीं किए जाने का आदेश जारी किया था।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘कादम्बिनी’ पत्रिका के प्रभारी संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा का निधन

कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
rajivkatara

देश में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। वहीं इस बीच कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। कोविड संक्रमण के बाद दिल्ली के बत्रा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा 2006 से हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर के साथ एक लंबी पारी खेल रहे थे। 2 महीने पहले तक वे ‘कादंबिनी’ पत्रिका  के प्रभारी संपादक थे। सौम्य स्वभाव के राजीव कटारा की हर विषय की अच्छी पकड़ थी।

कटारा ‘चौथी दुनिया’, ‘अमर उजाला’ समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे। 1983 में ‘नवभारत टाइम्स’ से ट्रेनिंग लेने के बाद ‘चौथी दुनिया’, ‘संडे ’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘माया’, ‘आजतक’, ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक भास्कर’ में काम करने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े। समाचार4मीडिया से एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि 1986 में ‘चौथी दुनिया’ ने उन्हें पत्रकारिता का बड़ा ब्रेक दिया। वे कहते थे कि कमर वहीद नकवी, रामकृपाल सिंह और संतोष भारतीय की टीम ने बहुत कुछ सिखाया। वो उनकी पत्रकारिता का यादगार दौर था। वहां काम करते वक्त गजब का आत्मविश्वास पैदा होता था।

उन्होंने बताया था कि अजय चौधरी, वीरेंद्र सैंगर, अर्चना झा, आदियोग के साथ उन्होंने वहां खूब काम किया। उसके बाद उदयन शर्मा के साथ ‘संडे ऑब्जर्वर’ के जरिए उन्होंने अपनी पारी आगे बढ़ाई। करीब साढ़े तीन साल वहां काम करने के बाद वे ‘राष्ट्रीय सहारा’ गए। उस दौरान सुमिता, शेषनारायण सिंह जैसे पत्रकार उनके साथी रहे। वहां नौ महीने काम करने के बाद ‘माया’ जॉइन की, पर वहां भी वे नौ महीने ही काम कर पाए। उसके बाद वे ‘आजतक’ चले गए।

इसके बाद 1996 में उनकी जागरण में बतौर फीचर एडिटर दिल्ली में जॉइनिंग हुई। जागरण के साथ उन्होंने फीचर के कई प्रयोग किए। सहस्त्राब्दि अंकों का संयोजन किया। 2001 में ‘अमर उजाला’ के साथ सातों दिनों के फीचर पेज की शुरुआती की। 2003 में सीएसई की फैलोशिप के अंतर्गत बैतूल में उन्होंने काम किया। फिर 2006 में ‘हिन्दुस्तान’ आए और यहां रिसर्च और स्पेशल प्रोजेक्ट के इंजार्च, खेल संपादक के पद पर काम करते हुए ‘कादम्बिनी’ का प्रभार इस वर्ष सितंबर तक संभाला।

पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के देने लिए उन्हें 2013 के ‘गणेश शंकर विद्यार्थी’ सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था। 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

प्रेस की स्वतंत्रता को कुछ यूं सुनिश्चित करेगी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) ने एक कानूनी सलाहकार पैनल नियुक्त किया है। यह पैनल प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर गिल्ड को सलाह मशविरा देगा और मिलकर काम करेगा।

इस बारे में गिल्ड की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, ‘यह कानूनी पैनल सिविल और आपराधिक कानूनों के मामलों में गिल्ड की मदद करेगा।’ पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, राजीव नायर, संजय हेगड़े, मेनका गुरुस्वामी, प्रशांत कुमार और शाहरुख आलम को शामिल किया गया है।

बताया जाता है कि आने वाले समय में पैनल का विस्तार किया जाएगा और इसमें विभिन्न राज्यों से ऐसे कानूनी सलाहकारों को शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया से संबंधित मुद्दों पर काम किया है।

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

The Walt Disney Company को बाय बोल नए सफर पर निकले पवन शर्मा

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 26 November, 2020
Last Modified:
Thursday, 26 November, 2020
Pawan Sharma

‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) इंडिया के नेशनल हेड-रेवेन्यू (branded content and Bindass) पवन शर्मा ने कंपनी को अलविदा कह दिया है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार उन्होंने अब प्रतिष्ठित मीडिया समूह में शामिल नेटवर्क18 (Network 18) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

पवन शर्मा ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ के साथ 11 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। उन्होंने वर्ष 2009 में इस कंपनी को जॉइन किया था। वर्ष 2013 में उन्हें रीजनल सेल्स हेड (UTV Action और World Movies) के पद पर प्रमोट किया गया था।

बता दें कि शर्मा पूर्व में ‘स्टार इंडिया’ (Star India) और ‘रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट’ (Reliance Big Entertainment) के साथ भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कॉरपोरेट के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें Rex Karmaveer Gold Category Award भी मिल चुका है।  

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

HT से अलग होकर इस वेबसाइट की एडिटर-इन-चीफ बनीं मेधा श्री

मेधा श्री ने करीब 50 किताबों लेखक ओम स्वामी की ऑफिशियल वेबसाइट os.me में बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 November, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 November, 2020
MedhaSri

मेधा श्री ने करीब 50 किताबों लेखक ओम स्वामी की ऑफिशियल वेबसाइट os.me में बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है। मेधा श्री हिन्दुस्तान टाइम्स से पहले बीसीसीएल (टाइम्स ऑफ इंडिया), क्रिएटिव नेस्ट मीडिया जैसे मीडिया हाउसों के साथ काम कर चुकी हैं। वे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और मीडिया हाउस के लिए भी लिखती रही हैं।

6.5 साल के कार्यकाल के बाद जनवरी में उन्होंने एचटी से विदाई ली थी। उन पर एचटी सिटी में मनोरंजन व लाइफस्टाइल सप्लीमेंट की जिम्मेदारी थी।

Os.me प्लेटफॉर्म पर वे लेखकों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगी और इंटरनेट पर बेहतर कंटेंट बनाने का काम करेंगी।

इस मौके पर मेधा ने कहा, ‘os.me अच्छे लोगों का एक विशेष समुदाय है जो इस मंच पर अपनी बुद्धिमत्ता और चुनौतियों को साझा करते हैं।’

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

Netflix के 2 अधिकारियों के खिलाफ FIR, जानें मामला

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
Netflix5

वेबसीरिज ‘ए सूटेबल बॉय’ (A Suitable Boy) में आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स  (Netflix) के 2 अधिकारियों पर मध्य प्रदेश में एफआईआर दर्ज कराई गई है। वेबसीरीज के एक सीन को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में नेटफ्लिक्स की वाइस प्रेजिडेंट (कंटेंट) मोनिका शेरगिल और निदेशक (पब्लिक पॉलिसी) अंबिका खुराना का नाम है। 

बता दें कि यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी ने दर्ज करवाई है। फिलहाल रीवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। तिवारी ने नेटफ्लिक्स और इस वेब सीरीज के निर्माताओं से माफी की मांग की है और इससे आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने की मांग है। उनका कहना है कि इस प्रकार के दृश्य लव जिहाद को बढ़ावा देते हैं।

पूरे विवाद पर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘ओटीटी मीडिया प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ रहे एक कार्यक्रम ‘ए सूटेबल बॉय’ में बेहद आपत्तिजनक दृश्य फिल्माए गए हैं जो एक धर्म विशेष की भावनाओं को आहत करते हैं। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इस बात का परीक्षण किया जाए कि क्या इसमें किसिंग सीन मंदिर में फिल्माया गया है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। प्रथमदृश्या जांच में ये पाया गया है कि ये दृश्य एक धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘गौरव तिवारी द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर, नेटफ्लिक्स के अधिकारियों मोनिका शेरगिल और अंबिका खुराना के खिलाफ रीवा में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (ए) (धार्मिक भावनाओं और विश्वासों को अपमानित करने और अपमानित करने के लिए दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत एक एफआईआर दर्ज की जा रही है।’ दरअसल, इस सीन में मंदिर परिसर में किसिंग सीन को दिखाया गया था।

गौतलब है कि वेबसीरिज को लेकर अभी तक कोई सेंसरशिप नहीं है और ना ही इन्हें उसके लिए फिल्म की तरह इजाजत लेनी होती है। हालांकि, हाल में केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस बाबत नोटिफिकेशन जारी कर इसे अपने अंतर्गत लिया है, जिसके बाद आने वाले दिनों में इसके दृश्यों पर सेंशर लग सकते हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर के मामले में एडिटर्स गिल्ड ने कही ये बात

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
EditorsGuild54

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर पैट्रिशिया मुखिम पर दर्ज आपराधिक मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि यह मामला देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े खतरे को प्रदर्शित करता है।

बता दें कि मुखिम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध कानून के विभिन्न प्रावधानों को किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है, मुखिम का मामला इसका उदाहरण पेश करता है।

कुछ दिन पहले ही मुखिम ने एडिटर्स गिल्ड की ‘चुप्पी’ हवाला देते हुए विरोध स्वरूप इस संगठन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने से मना कर दिया था। अदालत ने मुखिम को उनके द्वारा जुलाई में लिखी फेसबुक से सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का दोषी पाया था।

रविवार को जारी किये गए बयान में गिल्ड ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त शिलॉन्ग टाइम्स की एडिटर मुखिम पर उनके द्वारा लिखी गई एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आपराधिक मामला चलाना चिंताजनक है। लॉसेतुन में एक बॉस्केटबाल कोर्ट में आदिवासी और गैर आदिवासी युवकों के बीच झड़प पर जुलाई 2020 में लिखी गई फेसबुक पोस्ट के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। गिल्ड ने कहा, ‘मुखिम का मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बड़े स्तर पर खतरे को प्रदर्शित करता है, जो कानून के अस्पष्ट ढांचे के तहत संचालित होता है और जिसका अकसर असहमति को दबाने के लिए सरकार और एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग किया जाता है।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

TRP को ध्यान में रखकर की जा रही पत्रकारिता का तरीका सही नहीं: सूचना-प्रसारण मंत्री

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी लोगों तक पहुंचाएं।’

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
PrakashJavedkar

‘अनावश्यक सनसनी और टीआरपी केंद्रित पत्रकारिता के जाल में फंसने की बजाय, स्वस्थ पत्रकारिता के गुर सीखें और समाज में जो कुछ अच्छा काम हो रहा है उसे भी समाचार मानकर लोगों तक पहुंचाएं।’ पत्रकारिता के छात्रों को संबोधित करते हुए उक्त बात भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के शैक्षणिक सत्र 2020-21 का सोमवार को ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन करते हुए केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कही।

जावड़ेकर ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलाव का हम सभी को स्वागत करना चाहिए और उसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक के. सतीश नम्बूदिरिपाड सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, दुरुपयोग का साधन नहीं। आपकी स्टोरी में यदि दम है, तो उसके लिए किसी नाटक अथवा सनसनी की जरूरत नहीं है। समाज में अच्छी खबरें इतनी हैं, परन्तु दुर्भाग्य से उन्हें कोई दिखाता नहीं है। रचनात्मक पत्रकारिता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब से सरकार ने खाद की नीम कोटिंग शुरू की, तब से खाद की कालाबाजारी रुकी है। रेलवे का कोई गेट अब ‘अनमैन’ नहीं रहा, इसलिए दुर्घटनाएं बंद हो गई हैं। स्वच्छता की दृष्टि से भी रेलवे में बहुत सुधार हुआ है। पांच हजार रेलवे स्टेशन आज वाई-फाई से जुड़े हैं। करीब 100 नए एयरपोर्ट देश में शुरू हुए हैं, जिनका लाभ लाखों लोग ले रहे हैं। क्या ये सभी खबरें नहीं हैं?

उन्होंने कहा कि करीब दो लाख गांवों तक फाइबर कनेक्टिविटी पहुंची है, जिससे वहां के जीवन में बदलाव आया है। फ्री डिश के माध्यम से अब 104 चैनल और 50 एजुकेशनल चैनल निशुल्क देखे जा सकते हैं। देश में 300 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चल रहे हैं। कभी जाकर देखिए इनसे कितने स्थानीय कलाकारों को अवसर मिल रहा है और उनसे समाज जीवन में कैसा बदलाव आया है। ढाई करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मकान मिले हैं, बारह करोड़ लोगों को टॉयलेट्स मिले हैं, उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन मिले हैं, चालीस करोड़ लोगों के बैंक खाते खुले हैं, पचास करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। क्या ये सब खबरें नहीं हैं?

'हर घर नल से जल' का सपना अब आजादी के 70 साल बाद पूरा होने जा रहा है। प्रत्येक गांव में बिजली पहुंच चुकी है। आज चार-पांच सौ योजनाओं की सब्सिडी और मदद लोगों को डीबीटी के माध्यम से सीधे मिल रही है। इससे एक लाख 75 हजार रुपए की चोरी रुकी है। क्या ये न्यूज नहीं है? दूसरी घटनाएं भी न्यूज हैं, परन्तु ये भी न्यूज है, यह हमें समझना चाहिए। समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में योगदान ही पत्रकारिता का धर्म है।

जावड़ेकर ने कहा कि पत्रकारिता का पहला मंत्र यह है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली सारी घटनाएं खबर हैं, जो ठीक से लोगों तक पहुंचानी हैं। मीडिया की आजादी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आयाम है। इसे संभालकर रखना है। परंतु यह आजादी जिम्मेदारी के साथ आती है। इसलिए हम सभी को जिम्मेदार भी होना है। पत्रकार के रूप में आप सभी पक्ष-विपक्ष को सुनें, परंतु समाज को अच्छी दिशा में ले जाने के लिए ही हमारी पत्रकारिता काम करे। टीआरपी को ध्यान में रखकर जो पत्रकारिता हो रही है, वह सही रास्ता नहीं है। 50 हजार घरों में लगा मीटर 22 करोड़ दर्शकों की राय नहीं हो सकता। हम इसका दायरा बढाएंगे, ताकि इस बात का पता चल सके कि सही मायने में लोग क्या देखते हैं और क्या देखना चाहते हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए