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Last Modified:
Friday, 01 January, 2016
Samachar4media

आलोक सांवल ! मीडिया इंडस्ट्री में ऐसा नाम जो सेल्स, सर्विसेज, ब्रांड मैनेजमेंट, मीडिया सर्विस और एडिटोरियल जैसे मीडिया के हर पहलुओं पर काम कर चुके हैं। पिछले 17 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय आलोक सांवल मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन्स एंड एडवरटाइजिंग से पोस्टग्रेजुएट और बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। कॅरियर की शुरुआत, 1993 में की और 3 साल थर्मेक्स लिमिटेड में सीनियर सेल्स इंजीनियर और फिर 6 वर्षों तक जागरण प्रकाशन लिमिटेड के साथ जीएम - ब्रांड डेवलपमेंट के तौर पर काम किया है। इसके अलावा, वे ग्रुपएम में ढ़ाई वर्षों तक उत्तर और पूर्वी भारत के निवेश के हेड के तौर पर काम करते हुए, समूह की सभी एजेंसियों में निवेश के लिए जिम्मेदार थे। जागरण के साथ अपनी दूसरी पारी में सितंबर, 2006  से आलोक सांवल जागरण प्रकाशन लिमिटेड के साथ, समूह के बाइलिंगुल कॉम्पैक्ट डेली– आईनेक्स्ट के साथ बतौर प्रोजेक्ट हेड व एडिटर जुड़े हैं। सप्ताह के साक्षात्कार में आलोक सांवल अपनी पर्सनल लाइफ, इंडस्ट्री के अनुभव व आईनेक्स्ट से जुड़ी यादों को ताजा कर रहे हैं समाचार4मीडिया के असिस्टेंट एडिटर नीरज सिंह के साथ...

 
सबसे पहले अपने व्यक्तिगत और कॅरियर के शुरुआती दिनों के बारे में बताइए?
मेरी स्कूलिंग राठ कस्बे में हुई जोकि बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जिले में आता है में हैं और जिसे कह सकते हैं कि वह इलाका पिछड़ों में भी पिछड़ा है। उसके बाद नवीं से बारहवीं तक की शिक्षा कानपुर से हुई। बारहवीं में यूपी बोर्ड की मेरिट लिस्ट में रहा. बारहवी के बाद इंजीनयरिंग की पढ़ाई की बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी पिलानी से। कैरियर की बुनियाद बिट्स पिलानी से ही बननी शुरू हुई। बिट्स पिलानी में दो प्रेस क्ल्ब थे। एक था ईपीसी यानी इंग्लिश प्रेस क्लब औऱ दूसरा था एचपीसी। हिंदी प्रेस क्लब हिंदी का अखबार और ‘वाणी’ नाम से एक पत्रिका भी निकालता था। मैं कुछ समय तक ‘वाणी’ का एडिटर रहा। अखबार के साथ भी पूरी तरह से जुड़ा रहा। अखबार निकालना और कंटेट जेनरेशन के लिए टीम बनाने सहित कई भूमिकाएं निभाई। उस दौर के जिन साथियों से आज बात-चीत होती है तो वे इस बात पर जरा भी हैरत नहीं जताते की मैं किसी अखबार से जुड़ा हूं। वो कहते हैं कि हां तब भी तो तुम्हारा रुझान इसी ओर था। कोर्स पूरा करने के बाद चार साल मैंने बतौर इंजीनियर काम किया। इस दौरान मुझे महसूस हुआ कि यह प्रोफेशन मेरा कोर डोमेन नहीं है औऱ फिर मैने मशहूर संस्थान माइका से मार्केटिंग कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कोर्से पूरा करने के बाद हालांकि क्रिएटिव एजेंसी उल्का और नेस्ले से ऑफर आया था, लेकिन वहां न जाकर मुझे “जागरण’ आना ज्यादा मीनिंगफुल लगा। ‘जागरण’ के साथ मैं छह साल तक बतौर ब्रांड हेड जुड़ा रहा, उन्हीं छह वर्षों के दौरान जागरण 11 से बढ़कर 25 संस्करण तक पहुंचा। उसी बीच सखी के साथ ही जागरण के बैनर से कुछ और ब्रॉन्ड लॉन्च हुए। उन छह वर्षों में काफी कुछ सीखने को मिला और व्यक्तिगत रूप से मुझे भी काफी ग्रूमिंग मिली। जागरण के बाद मैं ‘ग्रुपएम’ आ गया। इसी दौरान जागरण में आईनेक्स्ट की रूपरेखा बननी शुरु हुई तो फिर आईनेक्स्ट से जुड़ना हुआ। पारिवारिक जीवन के बारे में बताऊं तो 1998 में मेरी शादी हुई। मेरी पत्नी ड्रेस डिजाइनर हैं और दो बच्चे हैं।
 
आपका कॅरियर कभी एक दिशा में चलता नहीं दिख रहा है। यह सब सोचा समझा था या फिर मन किया और निकल लिये वाला फॉर्म्यूला।
(सोचते हुए) देखिए अगर इसे दो हिस्सों में बांटा जाए एक टेक्निकल साइड और दूसरा आर्ट या सोसाइटल स्किल जिसे हम सॉफ्टर स्किल कहते हैं तो मैं खुद को सोसाइटल स्किल के ज्यादा करीब पाता हूं। इसे दूसरे शब्दों में कहें तो मास कम्युनिकेशन है वहां मेरा दिल ज्यादा लगता है। कहते भी हैं कि पानी अपना रास्ता खुद ढूंढ लेता है तो यह उसी तरह था कि जिस काम में मन लग रहा था, उस काम की ओर बढ़ता गया।
 
ऐसा माना जाता है कि आपके पहले जागरण काफी बिखरा हुआ था आलोक सांवल ने उसे ब्रॉन्ड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
देखिए, मैंने जो कुछ भी किया उसकी एक बड़ी वजह थी कि मुझे बहुत अच्छे मेंटर मिले। जैसे क्रेडिट अर्जुन को मिलेगा, लेकिन विजन द्रोणाचार्य का था। क्रेटिड विवेकानंद को मिलेगा, लेकिन काम राम कृष्ण परमहंस का था। जागरण मुझे जिन दो लोगों को डायरेक्ट रिपोर्ट करना होता था वे हैं शैलेश गुप्ता जी और वाई एम गुप्ता जी। शैलेश गुप्ता जी एक्सट्रीम रेस्टलेस विजनरी हैं। चीजों को अचीव करने का उनका विजन बहुत ही स्पष्ट है। उन्हें बहुत बड़ा और सोचने और करने की आदत है। दूसरे, वाई एम गुप्ता जी जो कि उस समय एडवरटाइटिंज हेड थे। वो ऐसे व्यक्ति जो 25 बार गलतियां होने पर भी उतनी ही उर्जा और पेसेंस के साथ गलतियां ठीक कराते थे। मुझे याद है जब हम लोग आईआरएस वगैरह का प्रजेंटेशन बनाते थे तो वो कई बार गलतियां ठीक कराते और हर बार कुछ नया सिखाते। उन्हीं से खीखने को मिला कि छोटी-छोटी चीजों की क्या वैल्यू होती है। अगर आपको ऐसे विजनरी लोगों के साथ काम करने का मौका मिले काम करने का दायरा भी बढ़ता है। और उनको शायद मेरे रूप में एक ऐसा घोड़ा मिल गया जो उनकी दिखाई राह पर अच्छे से चल ले रहा था। इसी तरह महेंद्र मोहन गुप्ता जी में फाइनेंस और बिजनेस को ग्रो करने की जो समझ है वह बुनियादी से लेकर सीनियर मोस्ट लेवल की है। इन सभी ने काम करने का मौका दिया तो मैंने भी जी लगा कर किया। जो कुछ मैंने किया उसका पूरा श्रेय मैं अपने सभी सीनियर को देना चाहूंगा।  जब बड़ा कैनवस मिला तो मैं हर फील्ड में कुछ करने और सीखने की कोशिश करता। हां, एडिटोरियल में मुझे घुसने नहीं दिया जाता था। लेकिन मेरा मन बहुत करता था। मुझे लगता था शायद फीचर डिपार्टमेंट में कुछ बात बन पाए। इसी इच्छा के चलते मैं राजीव सचान जी जो कि अब एसोसिएट एडिटर हैं से मिलता. राजीव जी के साथ मिलकर फीचर सेक्शन पर एक रिसर्च किया। उस प्रोसेस में इन्वॉल्व रहा। तो जो कुछ भी मैने किया उसे मुझे पूरी छूट के साथ करने का मौका दिया गया इसलिये मैं कर पाया।
 
आईनेक्स्ट में जब आप आए तो क्या उसकी रूप-रेखा बन चुकी था या आपने ही शुरुआत की।
आईनेक्स्ट में मेरे आने से पहले जो सबसे बड़ा स्टेप लिया जा चुका था वह यह कि आईनेक्स्ट नाम तय हो चुका था। आई नाम डिसाइड हो चुका था आई के साथ नेक्स्ट लगेगा या कैफे लगेगा या कुछ और इसके ऊपर कुछ टेक्निकल प्वाइंट पर बात चल रही थी। इसके पहले एक नाम न्यूज कैफे भी सुझाया गया था। फाइनली आईनेक्स्ट नाम रखा गया और यह नाम सुझाने में जागरण के जो अब ब्रांड हेड हैं बसंत राठौर और शैलेश जी की भूमिका प्रमुख रही। नाम के अलावा यह भी तय हो चुका था कि यह एक कॉम्पैक्ट डेली होगा। यह मुख्य रूप से शहरों  के बीच में डिस्ट्रीब्यूट होगा यह डिसाइड हो गया था। लेकिन इसमें कंटेट क्या होगा यह निर्धारित नहीं हो पाया था। कुल मिलाकर इसका जो मार्केटिंग पर्सपेक्टिव हो सकता है कि यह इस तरह का अखबार होगा, फ्रंट पेज ऐसा होगा यह डिसाइड हो चुका था। अजय उपाध्याय जी की देख-रेख में सब प्लान बन रहे थे। फिर जब मैं आया तो अजय जी के साथ मिलकर कंटेंट क्या होगा, इस पर डिस्कशन शुरु हुए । एक बार फिर मैं फिर खुशनसीब रहा कि यहां पर अजय उपाध्याय जी जैसा मेंटर मुझे मिला। इन्हीं बातचीत के दौरान एक बार अजय जी ने कहा कि कंटेट सबके लिए एक जैसा नहीं रहने वाला है। पॉपुलर कल्चर में सबकी पसंद का दायरा बढ़ रहा है। ‘लॉन्ग टेल’ किताब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हम ऐसा अखबार शुरु करें जिसका कंटेंट हर तरह के पाठकों की छोटे-छोटे इंट्रेस्ट को पूरा कर सके। इस प्वाइंट को आईनेक्स्ट की कंपोजीशन में हमनें बहुत ध्यान रखा, अभी भी रखते हैं। इस तरह से धीरे-धीरे पूरा कंटेंट आईडेन्टीफाई हुआ और कंटेट को फिट किया गया। 
 
यह कहा जाता है यूथ अखबार पढ़ने में बहुत रुचि नहीं रखता और आप युवाओं को फोकस करते हुए प्रोडक्ट ला रहे थे, तो क्या असफलता का डर नहीं था ?
थ्योरेटिकली मार्केटिंग वाला डर था। पर हम लोग जब अखबार लेकर आए तो हमने इसका फोकस इतना हाई रखा कि यह मेरा टार्गेट रीडर है और ये पाठक यह-यह पढ़ता है। जैसे हमने 18-35 एज ग्रुप को अपना टारगेट रीडर रखा। 18से 25 एक एज ग्रुप है और 25 से 35 एक। 18 से 25 एज ग्रुप में वे लोग हैं जो लोग अपनी लाइफ को सेट करने के तरीके खोज रहे हैं या उस राह पर है। 25 से 35 एज ग्रुप का पाठक वह है जो पारिवारिक दायित्वों को निभाना शुरू कर रहा है, उसकी जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। किसी चीज से मोहभंग तो किसी नई चीज के प्रति झुकाव। लेकिन एक्साइटमेंट जिंदगी का कम नहीं हुआ है। तो ये वह पाठक है जो अखबार में इन उम्मीदों को खोजता है। अगर हम कम एज ग्रुप की ओर गए होते तो यह खतरा हो सकता था। दूसरे हम पूरा का पूरा अखबार ही उनके लिए निकाल रहे थे। अमूमन सारे अखबार अपने अखबार का कुछ हिस्सा यूथ सेंट्रिक रखते हैं, लेकिन हम तो खबर भी उनके लिए लिख रहे हैं। स्पोर्ट भी उनके लिए। हर खबर इस एंगल से कि युवा इसे पढ़ेगा औऱ इसे नहीं। इसलिए हमारा यह डर उतना बड़ा नहीं था।
 
पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग यह कहता है अखबार के भाषायी संस्कार को नवभारत टाइम्स और आईनेक्स्ट खराब कर रहा है? 
मैं इसे एक कॉम्प्लीमेंट की तरह लेता हूं और इसके पक्ष में में मेरा स्ट्रांग आर्ग्यूमेंट भी है। सूचना और खबर के संप्रेषण का माध्यम भाषा है। गुटनबर्ग के पहले जब अखबार छपते नहीं थे तब भी खबर किसी न किसी फॉर्म में तो जाती ही थी। संदेशवाहक होते थे। पत्रवाहक होते थे। तो क्या इन सभी माघ्यमों से पहुचने वाला संदेश शुद्ध हिंदी में होता था। उस समय के देश-काल की जो बोली थी और जिस तरह का संबोधन होता था वैसे ही वह संदेश पहुंचाया जाता था। आप जब चौपाल में बैठकर बातें करते हैं तो कोई यह थोड़े कहता है कि अब मैं खबर सुनाने जा रहा हूं इसलिए मेरी भाषा बदल जाएगी। हमने कभी यह आग्रह नहीं किया कि यह जरूरी है कि स्टोरी को हिंदी इंग्लिश मिक्स ही लिखा जाए। हम तो जिस तरह की भाषा में लोग बातचीत करते हैं उसी भाषा में खबर लिखने की कोशिश करते हैं। हम अपनी तरफ से भाषा नहीं थोपते। अगर कोई साहित्यिक सेक्शन है तो उसकी भाषा उसी रूप में होगी जिस भाषा का इस्तेमाल साहित्य में हो रहा है। लेकिन अगर शहर में कोई मर्डर हुआ है तो उसे हम रक्तरंजित हत्या क्यों कहें? क्या आपके आस-पास में कोई इस तरह से शब्द का इस्तेमाल करता है। इसी थॉट के साथ हम चल रहे हैं। 70-80-90 के दशक में अधिकांश संपादक-पत्रकार हिंदी के बड़े साहित्यकार थे इसलिए यह सहज बात थी अखबार की भाषा पर उनका प्रभाव दिखता। उस समय का भाषायी संस्कार वह था। अब बोलचाल की भाषा बदल रही है तो अखबार की भाषा भी बदल रही है। यह समय की सोच का असर है। मेरी कोशिश रहती है कि खबर में किस्सागोई हो और वह लोगों को सहज लगे।
 
संपादकीय स्तर पर अखबार में आपका क्या रोल रहता है?
डायरेक्शनली अखबार में किन प्रमुख ट्रेंड, मुद्दों और घटनाओं को हम टच करेंगे इनमें मेरी भूमिका रहती है। डे टू डे हमारे सभी एडिशन की स्टोरीज पर मेरे दो सीनियर कलीग हैं उनका उनका इनवालमेंट ज्यादा होता है। इसके साथ ही एक्रॉस एडिशन मॉर्निंग मीटिंग, रिक्रूटमेंट्स के अलावा हम कई वर्कशॉप करते हैं इन सब में मेरा डायरेक्ट रोल होता है। मैं कोशिश भी करता हूं सभी एडिशन की विजिट में सबसे मिलूं और सबके साथ हर बातों पर चर्चा की जाए।
 
कहा जाता है कि आईनेक्स्ट में आई मतलब आलोक सांवल नेक्स्ट मतलब कोई नहीं?
नहीं, यह बिल्कुल सच नहीं है। मेरी नजर में अगर एक ही लीडर नजर आए तो यह संस्थान के लिए सबसे बेहतर है। लोगों को जानकर हैरत होगी कि आईनेक्स्ट में जो भी क्रिएट होता है वह पूरा टीम सेंट्रिक होता है। आईनेक्स्ट आज के समय में कंपलीटली एक सिस्टम है जो ऑटो जेनरेटेड फॉर्म में काम कर रहा है। साथ ही हमारे यहां सेंकेंडलाइन और थर्डलाइन में भी फंटैस्टिक लीडरशिप है। सारे सीनियर कलीग ही यह तय करते हैं कि अखबार में क्या निकलना चाहिए और वही लोग ड्राइव कर रहे हैं। मैं तो इसे कॉम्पलीमेंट के तौर पर लूंगा कि इतने सारे लोगों के जुड़े होने के बावजूद, एक्सटरनल वर्ल्ड में आईनेक्स्ट के चेहरे के तौर पर लोग मुझे देख रहे हैं। इंटरनली सबकी अलग-अलग जिम्मेदारियां है और सबकी प्रमुख भूमिका है।
 
आप कहते हैं कि आईनेक्स्ट को उसके विजन तक ले जाना है। यह विजन है क्या?
हमारा विजन है कि जहां-जहां हमारा पाठक जाएगा हम वहां-वहां जाएंगे। वो अखबार पढ़ेगा तो हम अखबार पढाएंगे। वो नेट पर खबरें पढ़ेगा तो हम उसे नेट पर खबरें देगे। मोबाइल पर पढ़ेगा तो मोबाइल पर खबरें लेकर आएंगे। वो अपने अक्स अगर समाज के बदलते दायरों में तलाशेगा, हम उन बदलते दायरों को उसके पास लेकर आएंगे। हम अपने पाठकों के ऐसे मेच्योर साथी हैं जो कि उसको एक मेच्योर एडल्ट की तरह हम उसको बताएंगे। न ही हम उनपे अपनी बात थोपेंगे, न ही मोरली प्रीच करेंगे। हम जिस पाठक वर्ग को टारगेट कर रहे हैं वह उम्र के उस पड़ाव पर है जहां वह अपनी मंजिल खुद तलाशना चाह रहा है और अपने निर्णय खुद ले रहा है। हम बस उसके मेच्योर और अडल्ट साथी हैं। इस लार्जर डोमेन पर हम काम कर रहे हैं और यही हमारा विजन है।
 
ब्रॉड शीट अखबार की तुलना कॉम्पैक्ट अखबार के क्या चैलेंजेज देखते हैं आप?
सबसे दीगर और बुनियादी चैलेंज है कि कॉम्पैक्ट का फ्रंट पेज एक लीड स्टोरी से बनता है बहुत हुआ तो दो, जबकि ब्रॉडशीट का छह से। इस तरह से ब्रॉशीट के फ्रंटपेज के लिए कम सोचना है। वहां बस यह निर्णय लेना है कि कौन सी खबरें फोल्ड के ऊपर रखें और कौन-सी फोल्ड के नीचे। कॉम्पैक्ट में फ्रंड लीड बनाना बहुत बड़ा चैलेंज है। यह वैसा ही चैलेंज है जैसा टेलीविजन में नौ बजे के प्राइम टाइम स्लॉट पर कौन सी स्टोरी रन करोगे। दूसरी बात अमूमन जगह कम है। तो हमें बहुत क्लीयरली निर्धारित करना होता है कि हम खबरों का चुनाव इस तरह करें कि सीमित जगह में पूरी दुनिया सिमट कर आ जाए। कुछ जिम्मेदारियां शायद ब्रॉडशीट की तुलना में कम भी होती हैं। उन पर गंभीर और संयत होने का दबाव होता है, जबकि कॉम्पैक्ट चुलबुलापन और उतावलापन दिखा सकता है।
 
आईनेक्स्ट के विस्तार की क्या योजनाए हैं?
आईनेक्स्ट के विस्तार की योजनाएं बेहतरीन हैं। दो-चार वर्ष के भीतर ही आईनेक्स्ट के 20-25 एडिशन आने वाले हैं। चूंकि मैं अपने संस्थान के मैनेजमेंट को भी रिप्रेजेंट करता हूं, इसलिए मैं उसी चीज को दोहरा रहा हूं जो मैनेजमेंट का स्टेटमेंट है। बहुत जल्द ही हम आईनेक्स्ट का एक और एडिशन लेकर आने वाले हैं।
 
लंबे समय से मीडिया मार्केट में यह चर्चा है कि आलोक सांवल आईनेक्स्ट छोड़ रहे हैं?
( बीच में ही टोकते हुए )नहीं... नहीं. सवाल ही नहीं उठता। देखिए... आईनेक्स्ट मेरा ड्रीम है। आईनेक्स्ट को हम लोगों ने क्रिएट किया है जेनरेट किया है। अगर, आप ऐसा प्रोडक्ट बना रहे है जिसे आपने नाम दिया और अब वह आपको नाम दे रहा है तो उसे छोड़ने की कोई सहज वजह नहीं दिखती।
 
कविताओं में आपकी रुचि है। बिना किसी परिवेश के यह रुचि कैसे पनपी ?
कविताओं के प्रति रुझान शुरू से ही रहा। इसके अलावा फिल्मों में भी मेरी बहुत रुचि है। फिल्मों में तो इतनी रुचि है कि अगर एक वक्त के मील और फिल्म में विकल्प तलाशना हो तो निश्चित रूप से फिल्म के साथ ही जाऊंगा। कभी मुझे आगे ऐसा मौका मिला जहां फिल्मों से और गहरे से जुड़ने का मौका मिला किसी भी रूप भी में तो मैं उस दिशा में भी बढ़ूंगा।
 
जो आपको व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता उसे लगता होगा कि आपको जीवन में सब कुछ आराम से मिलता चला गया ?
थोड़ा तो ऊपर वाला ज्यादा मेहरबान रहा है, यह बात सच है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत करता रहूं। बिना काम किये तो नहीं मिलेगा, यह तो तय है। जब मुझे कुछ नहीं हासिल हो पाता है तो मुझे लगता है कि मैंने निश्चित तौर पर पूरी मेहनत के साथ कोशिश नहीं की इसलिए मुझे यह हासिल नहीं हो पाया और फिर उसे हासिल करने के लिए मन से लग जाता हूं।
 
मौका मिले तो काम करने का अगला क्षेत्र क्या होगा?
फिल्म और टूरिज्म। दोनों ही मन के बहुत करीब हैं। फिल्मों में भी नैरेशन और स्टोरी टेलिंग है इसलिए फिल्मों के क्षेत्र में जहां भी जुड़ने का मौका मिला मैं जुड़ना चाहूंगा। दूसरा टूरिज्म। ट्रैवल मेरी बर्निंग डिजायर है। ट्रैवल से जुड़ा कोई बिजनेस मॉडल भी अगर बनाने का मौका मिला तो मैं कोशिश करूंगा। अगर मौका मिला तो आईनेक्स्ट को भी उस डोमेन में लेकर जाऊंगा। क्योंकि आईनेक्स्ट तो यूथ सेंट्रिक ब्रॉन्ड है उसके ऊपर कोई रोक तो है नहीं कि उसे केवल न्यूज पेपर बन कर ही रहना है। आईनेक्स्ट तो युवा सोच का आईना है उसमें जो ही फिट हो जाए। अगर मेरे बॉसेज चाहेंगे तो इस पर भी काम किया जाएगा।
 
युवा पत्रकारों के लिए संदेश ?
ज्य़ादा पढ़ना और काम करने का जज्बा। दरअसल अपने देश में सक्सेज को शॉर्टकट से पाने वाले को समझदार माना जाता है। जबकि यह थॉट गलत है। जिंदगी कई तरह से हमें बहुत कुछ देती है। इतना हमें अच्छी लाइफ स्टाइल देकर एक सिगरेट भी थमा देती है जो हमें कैंसर की ओर ले जाती है। मैं यह कहना चाह रहा हूं कि सफलता को जिंदगी के ऊपर न छोड़ें कि हमें जिदगी में यह मिला ही नहीं। मेहनत करें और लड़े फिर जो मिलेगा उसका सुख लंबे समय तक रहेगा।
 
 
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अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ेंगे MRUCI के CEO राधेश उचिल

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के सीईओ राधेश उचिल ने अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2020
RADHESH

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के सीईओ राधेश उचिल ने अपनी वर्तमान भूमिका से निकलकर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है।

2015 में MRUC इंडिया में शामिल होने के बाद, उचिल ने बोर्ड (Board) और टेककॉम (TechComm) के साथ मिलकर IRS स्टडी के दो दौर का सफल क्रियान्वयन करने और उसके डेटा को रिलीज करने में एक महत्वपूर्ण लीडरशिप की भूमिका निभाई। वे काउंसिल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य उद्योग निकायों के साथ नए अवसरों की खोज में सक्रिय रूप से शामिल थे।

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पवन सोनी ने नेशनल जियोग्राफिक को बोला बाय

‘नेशनल जियोग्राफिक’ में वाइस प्रेजिडेंट, प्रोग्रामिंग और मार्केटिंग हेड पवन सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Pawan Soni

‘द वॉल्ट डिज्नी’ (The Walt Disney) और ‘नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी’ (National Geographic Society)  के जाइंट वेंचर ‘नेशनल जियोग्राफिक’ (National Geographic) में वाइस प्रेजिडेंट, प्रोग्रामिंग और मार्केटिंग हेड पवन सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ‘नेशनल जियोग्राफिक’ की AVP (मार्केटिंग और ब्रैंड स्ट्रैटेजी) मिली कपूर ने भी यहां से अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल नोटिस पीरियड पर काम कर रही हैं। हालांकि, इस संबंध में न तो स्टार इंडिया और न ही पवन सोनी व मिली कपूर से इस पर कोई प्रतिक्रिया मिल पाई है।

बता दें कि सोनी करीब दो साल से यहां कार्यरत थे। उन्होंने वर्ष 2018 में ‘नेशनल जियोग्राफिक’ को जॉइन किया था। इससे पहले वह ‘फॉक्स नेटवर्क ग्रुप एशिया’ (Fox Network Group Asia) में बतौर कॉमर्शियल हेड और ‘फॉक्स इंटरनेशनल चैनल्स’ (Fox International Channels) में AVP (मार्केटिंग और ब्रैंड सॉल्यूशंस) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

‘फॉक्स इंटरनेशनल चैनल्स’ को जॉइन करने से पहले वह ‘नेशनल जियोग्राफिक चैनल्स’ में मैनेजर और सीनियर मैनेजर (मार्केटिंग/ट्रेड) के पद पर कार्यरत थे। पूर्व में वह ‘J Walter Thompson Worldwide’ और ‘Promodome Communications’ के साथ भी काम कर चुके हैं। वहीं, कपूर ने वर्ष 2019 में ‘नेशनल जियोग्राफिक’ को जॉइन किया था। यहां वह ‘National Geographic Channel’ और ‘Nat Geo Wild’ के सभी पहलुओं का मैनेजमेंट संभाल रही थीं।

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CM पर आरोपों को लेकर पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द, HC ने दिया ये आदेश

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Court

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लाभ पहुंचाने के लिए नोटबंदी के बाद एक दंपती के बैंक खाते में धन जमा कराये जाने संबंधी सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आरोप लगाने वाले पत्रकार उमेश शर्मा के खिलाफ इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी है।

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने शर्मा के खिलाफ देहरादून के एक थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता से बुधवार दोपहर बाद तक इस मामले के सभी दस्तावेज अदालत में जमा कराने के भी निर्देश दिए। शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत से अपने खिलाफ देहरादून में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की प्रार्थना की थी।

दरअसल, उमेश शर्मा ने 24 जून को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि झारखंड के अमृतेश चौहान ने नोटबंदी के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को निजी लाभ पहुंचाने के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉ. सविता रावत के खाते में पैसे जमा कराए थे।

दावे के समर्थन में बैंक खाते में हुए लेन-देन का विवरण भी पोस्ट में डाला गया था। इस पर हरेंद्र सिंह रावत ने इन आरोपों को झूठा और आधारहीन बताते हुए शर्मा पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था और 31 जुलाई को देहरादून में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने शर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुए उनके द्वारा लगाए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए।

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डीडी न्यूज में अशोक श्रीवास्तव का हुआ प्रमोशन, अब निभाएंगे यह जिम्मेदारी

दूरदर्शन में करीब 18 साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ashok Srivastav

‘डीडी न्यूज़’ के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को प्रमोट किया गया है। उन्हें अब यहां सीनियर कंसल्टिंग एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह यहां पर सीनियर न्यूज एंकर कम करेसपॉन्डेंट के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

मूल रूप से बनारस के रहने वाले अशोक श्रीवास्तव की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई है। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 28-29 साल का अनुभव है। दूरदर्शन में वह करीब 18 साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

समाचार4मीडिया के साथ बातचीत में अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआत में वह ‘नवभारत टाइम्स’, ‘जनसत्ता’, ‘पांचजन्य’ और ‘संडे मेल’ के साथ बतौर फ्रीलॉन्सर जुड़े रहे। इसके बाद वह वरिष्ठ पत्रकार नलिनी सिंह के ‘आंखों देखी’ कार्यक्रम के साथ जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने ‘सूर्या टीवी’ होते हुए ‘दूरदर्शन’ का रुख किया और तब से यहां अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि अशोक श्रीवास्तव पिछले काफी समय से डीडी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं और उनका शो ‘दो टूक’ काफी लोकप्रिय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘नरेंद्र मोदी सेंसर्ड’नामक किताब भी लिखी है। समाचार4मीडिया की ओर से अशोक श्रीवास्तव को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।

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वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार ने कुछ समय के लिए न्यूजरूम से बनाई दूरी, जानें वजह

कोरोना की चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं तमाम लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Navika Kumar

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस वायरस की चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं तमाम लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे तमाम मीडियाकर्मी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें अब ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) की ग्रुप एडिटर (Politics) नविका कुमार भी शामिल हो गई हैं। उन्होंने ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी है।

अपने ट्वीट में नविका कुमार ने लिखा है, ‘मेरा कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया है और कुछ समय तक आप सबसे दूर रहूंगी। उम्मीद है कि जल्द ही वापसी होगी।’ नविका कुमार द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

 

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वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने बताया, पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
AlokMehta

देश के विख्यात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 26 अक्टूबर से नवागत विद्यार्थियों के आत्मीय प्रबोधन और करियर मार्गदर्शन के लिए ‘संत्रारंभ 2020’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से साढ़े 12 बजे के बीच उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा, ‘आज भी पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धातों में कोई अंतर नहीं आया है। अंतर सिर्फ तकनीकी और माध्यम में आया है। उन्होंने कहा कि न्यू मीडिया और डिजिटल मीडिया ने सूचना और समाचारों का लोकतांत्रिकरण एवं विकेंद्रीकरण किया है। प्रो. सुरेश ने कहा कि पत्रकार न विपक्ष का होता है और न ही सत्ता पक्ष का। उसका मात्र एक ही पक्ष होता है और वह है, जनपक्ष।’

वहीं, कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री से अलंकृत व वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि यह कहना सही नहीं कि आज पत्रकारिता के सामने अधिक कठिनाई है। वास्तविकता यह है कि पत्रकारिता में हर युग में चुनौतियां रही हैं। यदि लक्ष्मणरेखा को ध्यान में रखें तभी हम पत्रकारिता में खतरे उठा सकते हैं। आज पत्रकारिता इसलिए सुरक्षित है क्योंकि हमारे प्रारंभिक पत्रकारों एवं संपादकों ने लक्ष्मणरेखा नहीं लांघी।

‘पत्रकारिता की लक्ष्मणरेखा’ पर अपने विचार रखते हुए आलोक मेहता ने कहा कि सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारों को विश्वसनीयता बचाए रखने के प्रयास करने चाहिए। उसे किसी का पक्षकार बनने से बचना चाहिए। जब कोई भरोसा करके आपको सूचना या समाचार देता है, तब उसे लीक नहीं करना चाहिए, उसकी जांच करके प्रकाशित करना चाहिए। पत्रकारों को अपनी पाचनशक्ति को मजबूत रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भ्रम फैलाने वाली खबरों के प्रसारण से बचना चाहिए।

बढ़ गई है डिजिटल मीडिया की खपत :

‘न्यू मीडिया : अवसर और चुनौतियां’ विषय पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मीडिया निदेशक एवं अध्यक्ष उमेश उपाध्याय ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता सामने आई और उसका दायरा भी बढ़ा। इस दौरान न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण भारत में भी डिजिटल कंटेंट देखे जाने की प्रवृत्ति बहुत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत में चीन के मुकाबले प्रति व्यक्ति डेटा की खपत अधिक है। भारत में प्रति व्यक्ति 12 जीबी डेटा की खपत है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डेटा और उसके विश्लेषण की विधि को समझना चाहिए। आज समाचारों की दुनिया मोबाइल फोन में सिमट गई है। दुनिया में 91 प्रतिशत डेटा मोबाइल के माध्यम से उपयोग हो रहा है।

प्रयोगों में कंटेंट नहीं दबना चाहिए :

‘टेलीविजन समाचारों के बदलते प्रतिमान’ विषय पर डीडी न्यूज के सलाहकार संपादक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि तीन दशक में टेलीविजन पत्रकारिता और उसके समाचारों के प्रस्तुतिकरण में व्यापक बदलाव आया है। हर दौर में टेलीविजन में बदलाव आया है और उन बदलावों का विरोध हुआ है। समाचार प्रस्तुतिकरण में होने वाले प्रयोगों से दिक्कत नहीं होनी चाहिए, तकलीफ इस बात की होती है कि इन प्रयोगों में कई बार कंटेंट दब जाता है। उन्होंने कहा कि टीआरपी की व्यवस्था न्यूज चैनल्स के लिए ठीक नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए।

संचार के तरीकों को सरल बनाना है जनसंपर्क :

‘कोविड उपरांत व्यवसाय के लिए जनसंपर्क वैक्सीन’ पर अपनी बात रखते हुए ग्रे मैटर्स कम्युनिकेशन्स के संस्थापक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जनसंपर्क विधा में हम ब्रांड की छवि और उसके प्रति बनी अवधारणा का प्रबंधन करते हैं। अच्छे जनसंपर्क अधिकारी की विशेषता होती है कि वे संचार के तरीकों को सरल बनाते हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में हम संकट के समय में लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं, उनको प्रेरित करते हैं। कोरोना के कारण व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक प्रकार के संकट आए हैं, जिनसे बाहर निकलने में पीआर बहुत उपयोगी साबित होगा।

वहीं कार्यक्रम के तीसरे दिन 28 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे ‘मीडिया मैनेजमेंट’ विषय पर बिजनेस वर्ल्ड  व एक्सचेंज4मीडिया के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा, सुबह 11:30 बजे ‘कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में संभावनाएं’ विषय पर स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस यूपीएस, देहरादून के डीन डॉ. मनीष प्रतीक और दोपहर 2:00 बजे ‘ब्रॉडकास्ट का भविष्य’ विषय पर प्रख्यात आरजे सिमरन कोहली विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी। समापन सत्र में अपराह्न 3:30 बजे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी (बिहार) के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा बतौर मुख्य अतिथि एवं वक्ता उपस्थित रहेंगे। समापन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश करेंगे।

सभी व्याख्यान का प्रसारण विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर होगा-

https://www.facebook.com/mcnujc91

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राष्ट्रपति का ये इंटरव्यू बना चर्चा का विषय, सवालों से परेशान होकर बीच में छोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
trump4

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है। CBS न्यूज के साथ चल रहे इंटरव्यू को बीच में छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है।

दरअसल, कुछ दिनों पहले '60 मिनट' के कार्यक्रम के लिए उन्हें पत्रकार लेस्ली स्टाल के साथ इंटरव्यू करना था। व्हाइट हाउस में नेटवर्क के क्रू ने कैमरा के साथ पूरी तैयारी कर ली थी। डोनाल्ड ट्रंप ने भी सभी सवालों के जवाब देने का संकेत दिया था।

इंटरव्यू शुरू हुआ तो मेजबान लेस्ली स्टाल के साथ ट्रंप करीब 45 मिनट बैठे। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप एंकर के एक सवाल पर नाराज हो गए।

पत्रकार लेस्ली ने राष्ट्रपति से पूछा- 'क्या आपके ट्वीट्स और नाम लेकर बात कहने से लोगों का मोह भंग हो रहा है?'

इसका जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता तो मैं यहां नहीं होता। ट्रंप ने कहा कि वे सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वे इसे नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया फेक है। मैं खुलकर कहूं तो अगर मेरे पास सोशल मीडिया नहीं होता, तो मैं लोगों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाता।'

इंटरव्यू के दौरान लेस्ली ने डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट पर सवाल खड़े किये, साथ ही कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनके ट्वीट सही नहीं हैं। जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो सोशल मीडिया की ताकत के कारण ही राष्ट्रपति बने हैं और वो इसे नहीं बदलेंगे,जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकार को टोका और कहा कि आप जो बिडेन से भी इतने सख्त सवाल क्यों नहीं पूछतीं और वे शो से उठकर चले गये।

इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस भी हो गई। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ये भी आरोप लगाया कि जो बाइडेन से इतने सख्त सवाल नहीं पूछे जाते जितने सख्त सवाल उनसे पूछे जाते हैं। पत्रकार लेजले ने शुरू में ही उनसे पूछा था कि क्या वे सख्त सवालों के लिए तैयार हैं इस पर ट्रंप ने कहा कि 'ये बात करने का तरीका नहीं है।'

जब पत्रकार ने ट्रंप को ये याद दिलाया कि बाइडेन राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि ट्रंप खुद राष्ट्रपति थे। इस बात पर ट्रंप सेट से उठकर चले गए और फिर टीवी शो की दोबारा शूटिंग के लिए नहीं लौटे। 

बाद में ट्रंप ने ट्विटर पर पत्रकार का एक क्लिप शेयर किया, जिसमें ट्रंप को मास्क पहने देखा गया। हालांकि, पत्रकार व्हाइट हाउस में मास्क नहीं लगाए हुई थीं। ट्रंप वीडियो में पत्रकार पर मास्क नहीं पहनने का आरोप लगा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा, ‘मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि रिपोर्टिंग में सत्यता की खातिर मैं लेस्ली स्टाल के साथ अपने इंटरव्यू को प्रसारण से पहले पोस्ट करने की सोच रहा हूं।’ उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हर शख्स को एक झलक मिल सके कि कैसा फर्जी और पक्षपातपूर्ण इंटरव्यू है।

 

इस बीच टीवी इंटरव्यू (TV Interview) को बीच में ही छोड़कर चले जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया (Social Media) पर इस इंटरव्यू का क्लिप तेजी से वायरल हो रही है। साथ ही बराक ओबामा (Barak Obama) सहित विपक्षी नेता भी ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं।  

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, ‘वह पगला गये और 60 मिनट के साक्षात्कार से उठकर चले गये। उन्होंने सोचा कि सवाल बड़े कठिन हैं। यदि वह ‘आप दूसरे कार्यकाल में क्या करना पसंद करेंगे' जैसे कठिन सवाल का जवाब नहीं दे सकते तो हम उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दे सकते।

 

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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के CEO एनपी सिंह ने कुछ यूं समझाया बेहतर कंटेंट का महत्व

विजिनरी टॉक सीरीज के तहत ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के एमडी और सीईओ एनपी सिंह ने अच्छे कंटेंट समेत तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
Visionary Talk

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स’ (Sony Pictures Networks) इंडिया के ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म ‘सोनी लिव’ (SonyLIV) पर नई वेब सीरीज ‘Scam 1992: The Harshad Mehta Story’ की सफलता से उत्साहित सोनी पिक्चर्स नेटवर्क के एमडी और सीईओ एनपी सिंह का कहना है कि आज के समय में स्क्रिप्ट नया हीरो है।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में एनपी सिंह ने वेब सीरीज की सफलता का श्रेय इसके कंटेंट को देते हुए कहा कि इसमें नए एक्टर्स होने के बावजूद सोनी लिव का सबस्क्राइबर बेस काफी बढ़ा है और लोगों का फोकस अब दमदार स्टोरीटैलिंग की ओर हो गया है।  

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान एनपी सिंह ने अन्य सफल वेब सीरीज जैसे- ‘अनदेखी’, ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘पाताल लोक’ का उदाहरण भी दिया, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया है और कहा कि नए चेहरों और कंटेंट की ओर लोगों का रुझान बढ़ना शुरू हो गया है।  

एनपी सिंह के अनुसार, ‘अब फोकस स्टोरीटैलिंग की ओर शिफ्ट हो चुका है। मेरे लिए स्क्रिप्ट हीरो है। हम हमेशा अच्छी क्वालिटी के कंटेंट को बेहतर स्टोरीटैलिंग के साथ पेश करेंगे, जो हमारे व्युअर्स को पसंद आएगी। यदि आपके पास अच्छी क्वालिटी का कंटेंट है और आप सच्चे व मूल विचारों के साथ रहते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।’

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ट्रेडमार्क-टैगलाइन के इस्तेमाल को लेकर Times Network की याचिका पर HC ने दिया ये आदेश

वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप में एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Times Network

दिल्ली हाई कोर्ट ने अरनब गोस्वामी की कंपनी ‘एआरजी आउटलेयर मीडिया’ (ARG Outlier Media Private Limited) द्वारा ‘NEWS HOUR’ अथवा इसके नाम से मिलते-जुलते किसी भी ट्रेड मार्क का इस्तेमाल किए जाने पर अंतरिम तौर पर रोक लगा दी है।   

बता दें कि वर्ष 2017 में बेनेट कोलमैन/टाइम्स नेटवर्क ने अपने ट्रेडमार्क ‘न्यूज आवर’ (News Hour) और ‘नेशन वॉन्ट्स टू नो’ (Nation Wants to Know) के संरक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अरनब गोस्वामी की कंपनी एआरजी आउटलेयर मीडिया के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का एक मुकदमा दायर किया था।

वहीं, ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के बारे में न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने कहा कि सभी सबूतों का विस्तृत परीक्षण किए जाने की जरूरत है, इसलिए तब तक एआरजी आउटलियर को किसी भी न्यूज चैनल पर अपने भाषण/प्रजेंटेशन आदि के हिस्से के रूप में इसके इस्तेमाल की अनुमति है।

हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड किसी भी संबंध में ट्रेडमार्क के समान इसका इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे इस तरह के इस्तेमाल का हिसाब रखने की जरूरत होगी। इस तरह के हिसाब अथवा खातों को हर छह महीने में एक बार एआरजी के निदेशकों में से एक के हलफनामे पर नियमित रूप से अदालत में दायर किया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने ‘NATION WANTS TO KNOW’ टैगलाइन के मालिकाना हक के मामले में किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दी और इसे सबूतों के आधार पर निर्णय के लिए छोड़ दिया। इसी तरह वर्ष 2017 में ‘टाइम्स नेटवर्क’  ने दिल्ली हाई कोर्ट में एआरजी आउटलियर के खिलाफ गोपनीयता भंग के लिए एक मुकदमा दायर किया था। इसमें एआरजी ने कोर्ट में यह वचन दिया था कि वह अपने चैनल पर टाइम्स नाउ की प्रोग्रामिंग सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेंगे और इसके आधार पर उसे राहत प्रदान की गई थी।

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इस वजह से पहले पत्रकार के बेटे का किया अपहरण, फिर कर दी हत्या

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Crime

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक पत्रकार के नौ साल के बेटे का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है। फिरौती के लिये अपहर्ताओं ने 45 लाख रुपए देने की मांग की थी। पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, बच्चे के पिता को जानने वाले 23 वर्षीय मैकेनिक ने बच्चे का 18 अक्टूबर को अपहरण किया था और उसी दिन ही गला दबाकर हत्या करने के बाद बच्चे के शव को पहाड़ी पर जला दिया गया था। पुलिस ने बताया कि अपहर्ताओं को भय था कि बच्चे को छोड़ने पर वह उसकी पहचान उजागर कर देगा, लिहाजा आरोपी ने उसकी हत्या कर दी थी।

बता दें कि महबूबाबाद शहर के कृष्णा कॉलोनी निवासी में रंजीत कुमार का परिवार रहता है। रंजीत कुमार पेशे से पत्रकार हैं। उनका 9 वर्षीय बड़ा बेटा दीक्षित रेड्डी का रविवार शाम 6.30 बजे के आसपास बाइक सवार अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया था, जब वह महबूबाबाद शहर में स्थित अपने घर के बाहर खेल रहा था। अपहर्ता मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये थे और बच्चे को उठा ले गए। पुलिस को शक था कि बच्चा संभवत: उनको जानता था। बाद में अपहर्ताओं ने इंटरनेट के माध्यम से फोन पर बच्चे की मां से संपर्क किया और उसकी रिहाई के लिये  45 लाख रुपए देने की मांग की थी।

पुलिस ने बताया कि बच्चे के पिता द्वारा हाल में संपत्ति खरीदे जाने की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने जल्द से जल्द पैसे कमाने के लिए अपहरण की योजना बनाई, जिसके बाद इस अपराध को अंजाम दिया, ताकि वह अमीरों की तरह जिंदगी जी सके। महबूबाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक कोटी रेड्डी ने बताया कि योजना के तहत आरोपी 18 अक्टूबर को पीड़ित के घर गया और बच्चे को बुलाया। चूंकि अरोपी बच्चे के पिता का जानता था इसलिए बच्चा उसके साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर चला गया। आगे ले जाने के बाद उसे एहसास हुआ कि अकेले बच्चे को संभालना बहुत मुश्किल है। आरोपी सीसीटीवी कैमरे से बचने के लिए बच्चे को अलग रास्ते से शहर से बाहर किसी सूनसान जगह पर ले गया। वहां उसने बच्चे को बंधक बनाकर रखा। वह डर गया था कि बच्चा अपने माता-पिता को सब बता देगा, इसलिए उसने बच्चे की हत्या कर दी।

बच्चे की हत्या करने के बाद भी, उसने घटना के दिन रात नौ बजे उसकी मां वसंता को फोन किया और 45 लाख रुपए की राशि मांगी। अपहर्ता रोज इंटरनेट से बच्चे के परिवार को फोन कर पैसा मांगता था। बुधवार को उसने परिवार से पैसे को मोडू कोटला इलाके में लाने के लिए कहा। एक न्यूज चैनल में काम करने वाले बच्चे के पिता रंजीत रेड्डी पैसों का बैग लेकर पहुंच भी गए, लेकिन अपहरर्ता वहां से बाहर नहीं आया। उन्होंने वहां बुधवार रात तक इंतजार किया।

बाद में परिवार की शिकायत पर अपहरर्ता को पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाया। एसपी ने कहा कि उन्होंने कई संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन जांच से पता चला कि मंदा सागर ने इस घटना को अकेले अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए इलाके के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और आरोपी को बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाने की तस्वीर दिखी, जिसके आधार पर मैकेनिक को गिरफ्तार किया गया। 

पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस अपराध में और लोग तो शामिल नहीं है।

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