कलर्स ने हॉंगकॉंग में प्रसारण के लिए नाउटीवी से मिलाया हाथ

<p><strong>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</strong></p> <div>वायकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अपने प्रम

Last Modified:
Friday, 01 January, 2016
Samachar4media

समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो

वायकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अपने प्रमुख चैनल कलर्स को हॉगकांग में लांच करने की घोषणा की है। वायकॉम 18 ने हॉगकॉग के हॉगकॉग नाउ टीवी प्लेटफार्म पर कलर्स को लांच करने के लिए समझौता किया है। कलर्स चैनल वहां ए-ला-कार्टे चैनल के रुप में उपलब्ध रहेगा और इसे सब्सक्राइब करने वालों के लिए दर्शकों को एचके 78 डॉलर खर्च करने पड़ेगे। यह चैनल नाउ टीवी के प्लेटफार्म पर देखा जा सकेगा।
 
नाउ टीवी हॉगकॉग के लीडिंग पे-टीवी ऑपरेटर पीसीसीडब्ल्यू ग्रुप और दुनिया के सबसे बड़े आईपीटीवी के कामर्शियल रुप से विस्तार करने वाले हैं। इस ग्रुप के पास लगभग 190 एचडी और एसडी लोकल चैनल उपलब्ध हैं।
 
हॉगकॉग के दर्शक अब नाउ टीवी की सहायता से अपने पंसदीदा भारतीय फिक्शन शो जैसे बालिका बधू, ना आना इस देश लाड़ो, फुलवा और उतरन भारतीय समयानुसार देख सकते हैं। इसके अलावा वे कलर्स पर प्रसारित होने वाले रियल्टी शो इंडियाज गॉट टैलेंट 3’ और सुपरस्टार सलमान खान और संजय दत्त द्वारा होस्टेट शो  ‘बिग बॉस 5’ कार्यक्रम भी हॉगकॉग में उपलब्ध हैं।
 
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गृहमंत्री अमित शाह बोले, मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से रहना चाहिए दूर

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Amit Shah

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मीडिया ट्रायल्स के खिलाफ अपनी बात रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित शाह का कहना है कि हालांकि मीडिया को समाज में हो रही गलत चीजों को उजागर करने का अधिकार है, लेकिन मीडिया को इस तरह की गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, जिनका उद्देश्य विशुद्ध रूप से टीआरपी को बढ़ाना होता है।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाह का कहना है कि कुछ न्यूज चैनल्स अथवा रिपोर्टर्स द्वारा टीआरपी के लिए बात को बढ़ाना ठीक नहीं है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि जिस तरह तमाम चैनल्स बात को बढ़ाते हैं कि कार में बैठे, पांच मिनट में पहुंचेगे, दायां पैर कार से बाहर निकाला, इस तरह की बातें सही नहीं हैं। 

पिछले दिनों ज्वेलरी ब्रैंड ’तनिष्क’ (Tanishq) के विज्ञापन को लेकर उठे विवाद के बीच गृहमंत्री ने कहा कि इस तरह की अति सक्रियता (over activism) से बचा जाना चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है।

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कंटेंट और क्रिएटिविटी को लेकर ‘वायकॉम18’ के पूर्व COO राज नायक ने कही ये बात

‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में ‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Raj Nayak

‘हाउस ऑफ चीयर’ के संस्थापक और ‘वायकॉम18’ के पूर्व सीओओ राज नायक ने ज्वेलरी ब्रैंड ‘तनिष्क’ द्वारा पिछले दिनों लॉन्च किए गए विज्ञापन को लेकर मचे हंगामे व विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। तनिष्क ने गहनों की नई सीरिज के लिए ‘एकत्वम’ नाम से इस विज्ञापन को जारी किया था, लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध को देखते हुए इसे वापस ले लिया था।

राज नायक के अनुसार इस विज्ञापन का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना था और उन्हें अभी तक नहीं समझ आया कि इस विज्ञापन में ऐसा क्या गलत था जो इसका विरोध हुआ। राज नायक के अनुसार, पूर्व में भी सामाजिक सद्भाव और एकता पर कई अच्छे विज्ञापन आए हैं, लेकिन तब कोई परेशान या नाराज नहीं हुआ। सिर्फ अब लोगों ने इस तरह की चीजें पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।

राज नायक ने यह भी कहा, ‘कोई व्यक्ति चाहे तो वह हर चीज में गलती ढूंढ सकता है। मुझे इस तरह की घटना पर दुख होता है। दुनिया में कहीं पर भी लोगों को एकजुट करने वाली चीज काफी अच्छी बात है। मुझे विज्ञापन अच्छा लगा।’

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में राज नायक ने कहा, ’केवल ट्रोलिंग की वजह से कंपनी को यह विज्ञापन वापस नहीं लेना चाहिए था। मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रदान करना राज्य का काम है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘मास्टरमाइंड्स’ (Masterminds) कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट के दौरान राज नायक ने कहा, ‘आपको इसके कंटेंट को देखना होगा और सभी चीजों को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि आप विज्ञापन के उद्देश्य को देखें तो यह लोगों को एकजुट करने व सामाजिक सद्भाव के बारे में था। अगर इसी तरह की प्रतिक्रियाएं मिलेंगी तो अमर अकबर एन्थॉनी जैसी फिल्में हिट नहीं होंगी। क्रिएटिविटी को दबाया नहीं जाना चाहिए। क्रिएटिविटी को तब तक फ्री करना होगा, जब तक यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रही है।’

तनिष्क के बारे में सोशल मीडिया पर लोगों ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी है, उस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में राज नायक ने कहा कि संभवत: ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म सभी के लिए फ्री है। उन्होंने नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री-ड्रामा 'सोशल डिल्मा' (Social Dilemma) का उदाहरण दिया और कहा कि लोगों के बीच दुश्मनी पैदा करने की कोशिश के पीछे कई निहित स्वार्थ हो सकते हैं।

राज नायक ने कहा कि ‘मैं काफी दुखी महसूस करता हूं, खासकर आज के समय में जब महामारी का प्रकोप फैला हुआ है और लोग तमाम तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में लोगों को मिलकर आगे आना चाहिए। मानवता से बड़ा कुछ नहीं है।’

टेलिविजन और ‘जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स’ (GEC) पर कंटेंट के बारे में राज नायक ने कहा कि करीब 190 मिलियन घरों में टेलिविजन देखा जा रहा है और इसकी स्थिति काफी मजबूत हो, इसे अन्य घरों में भी अपनी जगह बनानी है। चैनल्स की बढ़ती संख्या और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा के कारण इसे अपने कंटेंट के बारे में दोबारा से सोचना होगा।

राज नायक के अनुसार, ‘टीवी और सिनेमा वही दिखाते हैं, जो समाज में हो रहा है। पहले सिर्फ कुछ चैनल्स थे, लेकिन अब बेहतरीन कंटेंट के साथ तमाम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोग तमाम तरह की सामग्री देख रहे हैं और उनकी पसंद भी बदल रही है। टीवी बहुत मजबूत हो रहा है और इंटरनेट का बढ़ना भी जारी है, हालांकि कुछ तकनीकी समस्याएं और पहुंच की दिक्कत के बावजूद ओटीटी प्लेयर्स काफी देखे जा रहे हैं। यदि टीवी ने एक समय अंतराल के अंदर अपने कंटेंट में कुछ बदलाव नहीं किए तो स्थिति बदल सकती है और लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो सकते हैं।’

राज नायक ने कहा कि दूसरी बात यह है कि ब्रॉडकास्ट और ओटीटी (OTT) के बीच की रेखा काफी धुंधली हो रही है। नेटफ्लिक्स, अमेजॉन, हॉटस्टार आदि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर देखने के लिए काफी अच्छे कंटेंट के साथ सब कुछ टीवी पर उपलब्ध है। अब कंज्यूमर्स के ऊपर है कि वह क्या देखना पसंद करते हैं, फिर चाहे वह छोटे पर्दे पर हो अथवा बड़ी स्क्रीन पर।

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की नई टीम गठित, ये वरिष्ठ पत्रकार बनीं प्रेजिडेंट

आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Editors Guild

‘द सिटीजन' की संपादक सीमा मुस्तफा एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) निर्वाचित हुई हैं। संस्था की तरफ से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। सीमा मुस्तफा ‘द सिटीजन’ (The Citizen) वेबसाइट की फाउंडर व एडिटर हैं। वे अब ‘द प्रिंट’ (ThePint) के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता की जगह लेंगी। यह घोषणा 16 अक्टूबर को डिजिटल तरीके से संपन्न हुए चुनावों के नतीजे आने के बाद की गई।

बयान में कहा गया कि ‘हार्डन्यूज' (Hardnews) के एडिटर संजय कपूर महासचिव (जनरल सेक्रेट्री) निर्वाचित हुए हैं। कपूर बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर ए.के. भट्टाचार्य की जगह लेंगे।

‘कारवां’ पत्रिका के एडिटर अनंत नाथ को निर्विरोध कोषाध्यक्ष (Treasurer) चुना गया है। नाथ रेडिफ.कॉम (Rediff.com) की कंट्रिब्यूटिंग एडिटर शीला भट्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे। आम तौर पर सर्वसम्मति से पदाधिकारियों की नियुक्ति की सामान्य व्यवस्था को दरकिनार कर इस बार पदों के लिए चुनाव हुए।

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रिपब्लिक मीडिया के इस बयान पर BARC ने जताई नाराजगी, दिया स्पष्टीकरण

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है

Last Modified:
Sunday, 18 October, 2020
BARC INDIA

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के हाल ही में दिए बयान के बाद स्पष्टीकरण जारी किया है। रिपब्लिक मीडिया ने अपने बयान में कहा था कि बार्क से उसे ऑफिशियल मेल प्राप्त हुआ है। इस मेल में रिपब्लिक टीवी, रिपब्लिक भारत या न्यूज नेटवर्क के किसी अन्य सहयोगी के खिलाफ कोई अनुचित कार्य नहीं पाया गया है।

बार्क इंडिया ने रिपब्लिक नेटवर्क पर उसके गोपनीय संचार का गलत तरीके से खुलासा करने पर नाराजगी जताई है। बार्क इंडिया ने अपने स्टेटमेंट में कहा, ‘उसने इस मामले में जारी जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की है और वह जांच एजेंसियों को जरूरी मदद मुहैया कर रहा है। बार्क इंडिया निजी और गोपनीय संचार का खुलासा करके और उसी को गलत बताते हुए रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाइयों से काफी निराश है। बार्क इंडिया फिर दोहराता है कि उसने इस मामले में जारी जांच पर टिप्पणी नहीं की है। वह रिपब्लिक नेटवर्क की कार्रवाई पर निराशा व्यक्त करता है।’

  

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सरकार पर लगाए ये आरोप, इन दो घटनाओं का किया जिक्र

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने पिछले दिनों हुई घटनाओं को लेकर सरकार पर कई आरोप लगाए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
EGI

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने ‘प्रसार भारती’ द्वारा न्यूज एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (PTI) और ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ (UNI) का सब्सक्रिप्शन रद्द करने के फैसले की आलोचना की है। इसके साथ ही गिल्ड ने ‘ओडिशा टीवी’ (OTV) चैनल के पत्रकार रमेश रथ के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के मामले में भी चिंता जताई है।   

गिल्ड का कहना है कि जिस तरह से सरकार और उनकी एजेंसियों ने हाल ही में मीडिया के साथ बदले की भावना से कार्रवाई की है, उससे वह निराश और चिंतित हैं।

यह भी पढ़ें: प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी PTI व UNI का सबस्क्रिप्शन किया रद्द, इनसे मांगे नए प्रस्ताव

इस बारे में ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में गिल्ड की ओर से कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाई मीडिया संस्थानों के स्वतंत्र तरीके से कामकाज करने के लिए खतरा है और इसे कमजोर करती हैं।

यह भी पढ़ें: पुलिस ने रीजनल चैनल के पत्रकार को हिरासत में लिया, बताई ये वजह

गौरतलब है कि ‘प्रसार भारती’ ने गुरुवार को एक बैठक में ‘दूरदर्शन’ और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ के ‘पीटीआई’ और ‘यूएनआई’ के साथ सबस्क्रिप्शन को खत्म करने का फैसला किया था। पीटीआई द्वारा भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग का साक्षात्कार करने के बाद ही एजेंसी विवादों में थी।

वहीं, ओडिशा में पुलिस ने हाल ही में रीजनल टीवी चैनल 'ओडिशा टीवी' (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को उठा लिया था। पुलिस का कहना था कि रमेश रथ को वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पकड़ा गया है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूरे बयान को आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

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पुलिस ने रीजनल चैनल के पत्रकार को हिरासत में लिया, बताई ये वजह

तलाशी के लिए चैनल के दफ्तर भी पहुंची पुलिस। चैनल ने पुलिस पर व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Detained

ओडिशा के रीजनल टीवी चैनल 'ओडिशा टीवी' (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस का कहना है कि रमेश रथ को वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि पड़ताल में रथ का नाम सामने आया था। रथ पर आरोप है कि उन्होंने ही वीडियो की डिटेल्स मुहैया करवाई।

इस मामले में चैनल का कहना है कि ओडिशा की बीजेडी सरकार को बेनकाब करने के लिए पत्रकार के काम की वजह से उन्हें निशाना बनाने के लिए साजिश रची गई है। वहीं, पुलिस द्वारा 16 अक्टूबर को चैनल परिसर की तलाशी लेने के लिए पहुंचने की खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस एक महिला सांसद के अश्लील वीडियो क्लिप के मामले में चैनल के कार्यालय की तलाशी लेना चाहती थी, जो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रसारित किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ओटीवी के न्यूज एडिटर आर मिश्रा का कहना है कि ओटीवी को पहले भी टार्गेट किया जाता रहा है। आर मिश्रा के अनुसार, ‘रमेश रथ ने सीएम पटनाक के एरियल सर्वे के ऊपर आरटीआई रिस्पॉन्स की न्यूज ब्रेक की थी। इसी के बाद जब अगले दिन वह कार्यालय आने लगे तो पुलिस ने उन्हें वैन में बैठा लिया और उनका मोबाइल सीज करके उन्हें थाने ले गए। किसी को इस बारे में नहीं बताया गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया। उन्होंने पत्रकार के खिलाफ एफआईआर की है। हमें हमारे एंकर से इस संबंध में पता चला, फिर हमने पुलिस आयुक्त से इसकी पुष्टि की।’ इसके साथ ही मिश्रा ने कहा कि ओटीवी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

साल 2019 के मामले पर बात करते हुए आर मिश्रा ने कहा यह मामला एक महिला बीजेडी नेता की अश्लील वीडियो से संबंधित है। इसमें दो ओटीवी पत्रकार और कुछ भाजपा नेता शामिल थे, और मीडिया हाउस ने केवल पड़ताल में साथ दिया था। गौरतलब है कि ओटीवी के सीनियर रिपोर्टर रमेश रथ को पुलिस ने गुरुवार को तलब किया था। बाद में पुलिस ने उनके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया था और जांच के लिए चैनल के कार्यालय भी गई थी। हालांकि, बाद में रमेश रथ को छोड़ दिया गया और उनसे 21 अक्टूबर को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। पुलिस के इस कदम की विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।

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प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी PTI व UNI का सबस्क्रिप्शन किया रद्द, इनसे मांगे नए प्रस्ताव

प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी को पत्र लिखकर अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करने की जानकारी दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
prasar bharati

प्रसार भारती (Prasar Bharati) ने न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (Press Trust of India) से दूरी बना ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती ने न्यूज एजेंसी को पत्र लिखकर अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करने की जानकारी दी है। हालांकि न्यूज एजेंसी यूनिइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के साथ भी सब्सक्रिप्शन को खत्म करने का फैसला किया है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रसार भारती ने 15 अक्टूबर को लिखे पत्र में पीटीआई और यूएनआई को बताया कि उसके बोर्ड ने अंग्रेजी भाषा और अन्य मल्टीमीडिया सेवाओं के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन हेतु सभी घरेलू न्यूज एजेंसीज से नए प्रस्ताव (बोलियां) मंगवाने का फैसला किया है।

प्रसार भारती समाचार सेवा एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रमुख समीर कुमार द्वारा हस्ताक्षर किए गए पत्र में कहा गया, ‘प्रसार भारती द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद पीटीआई भी इसमें हिस्सा ले सकता है।’ इसके अलावा ‘यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ को पत्र भेजकर भी यह जानकारी दी गई है कि नए प्रस्तावों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की जानकारी भी दी गई है कि प्रसार भारती अपने समाचार सब्सक्रिप्शन के लिए पीटीआई को सालाना 6.85 करोड़ रुपए का भुगतान करता है।

देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई, एक बोर्ड द्वारा चलायी जाती है जिसमें प्रमुख अखबार समूहों के मालिक शामिल हैं और यह एक नॉन प्रॉफिट ट्रस्ट है। प्रसार भारती का ये फैसला पीटीआई के भारत-चीन संघर्ष पर कवरेज को अनुचित पाए जाने के चार महीने बाद आया है।

इस साल जून में न्यूज एजेंसी द्वारा कथित राष्ट्र-विरोधी रिपोर्ट पर अपने संबंध को समाप्त करने की धमकी देते हुए प्रसार भारती ने एक पत्र भेजा था। पीटीआई ने चीनी राजदूत सून विडोंग का एक इंटरव्यू किया था, जिसमें उन्होंने भारत-चीन हिंसक गतिरोध के लिए भारत को दोषी ठहराया था, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

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पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, कमिश्नर को दी शिकायत

दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार को पुलिस अधिकारी द्वारा कथित रूप से पीटे जाने का मामला सामने आया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Journalist

दिल्ली में ‘कारवां’ (Caravan) मैगजीन के पत्रकार को पुलिस अधिकारी द्वारा कथित रूप से पीटे जाने का मामला सामने आया है। पत्रकार ने इस मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस.एन.श्रीवास्तव को शिकायत दी है। कारवां’ की ओर से पत्रकार का एक फोटो भी जारी किया गया है, जिसमें उनकी पीठ पर चोटों के निशान हैं।

‘कारवां’ के पत्रकार अहान पेनकर (24) का आरोप है कि शुक्रवार को जब वह उत्तरी दिल्ली में नाबालिग दलित लड़की के बलात्कार और हत्या की घटना को कवर कर रहे थे, तभी एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) अजय कुमार ने उन पर हमला कर दिया और हिरासत में भेज दिया।

बताया जाता है कि इस मामले में कुछ छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता मॉडल टाउन इलाक़े के पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इसी मामले की वह कवरेज कर रहे थे। पेनकर का आरोप है कि इसी दौरान एसीपी ने पुलिस स्टेशन के अंदर उनकी पिटाई कर दी। पेनकर के अनुसार, उन्होंने कई बार एसीपी को बताया कि वह पत्रकार हैं और उन्हें अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया, लेकिन वह नहीं माने।

‘कारवां’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर विनोद जोस ने इस बारे में एक ट्वीट भी किया है। इस ट्वीट में उन्होंने पेनकर के हवाले से बताया है, ‘एसीपी अजय कुमार ने पहले मेरे चेहरे पर लात मारी, इससे मैं ज़मीन पर गिर गया। तभी एसीपी ने मेरी पीठ और कंधों पर लात मारी। जब मैं उठकर बैठा तो एसीपी ने मेरा सिर पकड़कर मुझे गिरा दिया और फिर से मेरी पीठ पर चोट मारी।’

गौरतलब है कि अगस्त में भी न्यूज कवरेज के दौरान तीन पत्रकारों पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। पीड़ित पत्रकारों में एक महिला भी शामिल थी।

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डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति, जानिए फायदे

डिजिटल मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर सरकार ने रास्ता स्पष्ट कर दिया है। इसके लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Digital Media

डिजिटल मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर सरकार ने रास्ता स्पष्ट कर दिया है। इसके लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होगी। सरकार ने डिजिटल मीडिया या वेबसाइट पर सूचनाएं देने वाली कंपनियां या मीडिया ग्रुप्स को समाचार उपलब्ध कराने वाली न्यूज एजेंसीज (News Agencies), न्यूज एग्रीगेटर्स (News Aggregators) को 26 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सीमा नियमों का पालन करने का आदेश दिया है।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के नए आदेश के मुताबिक अब इन सभी कंपनियों को एक साल के भीतर केंद्र सरकार की मंजूरी लेकर 26 परसेंट विदेशी निवेश के कैप का पालन करना होगा। सभी डिजिटल मीडिया न्यूज संस्थानों को शेयरहोल्डिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए एक साल का वक्त दिया गया है।

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा 18 सितंबर, 2019 को केंद्र की तरफ से डिजिटल न्यूज मीडिया को 26 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गई थी। इसको ध्यान में रखकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलने वाली सुविधाएं देने का फैसला हुआ है।  

मीडिया उद्योग के एक वर्ग और विशेषज्ञों ने सरकार से इसे इस नियम को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी। उनका कहना था कि डिजिटल मीडिया में एफडीआई को 26 प्रतिशत पर सीमित रखने से सवाल खड़ा होता है इसे स्पष्ट करने की जरूरत है।

केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार विकास विभाग के निदेशक (एफडीआई) निखिल कुमार कनोडिया की तरफ से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि किसी भी डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म को अधिकतम 26 फीसदी एफडीआई लेने की ही अनुमति मिलेगी और इन प्लेटफार्म की कंपनियां भारत में ही पंजीकृत होनी चाहिए।

जानिए, FDI से क्या होगा फायदा?

पहले से संचालित न्यूज एग्रीगेटर्स, डिजिटल मीडिया कंपनियों को खबरें प्रदान करने वाली न्यूज एजेंसीज और सभी तरह की खबरें या ताजा समाचार वेबसाइट पर अपलोड करने वाली कंपनियों को भी 26 फीसदी एफडीआई के दायरे का पालन करना होगा। इन कंपनियों को अपने पास मौजूद एफडीआई को 26 फीसदी के स्तर पर लाकर एक साल के अंदर केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होगी। एफडीआई नियमों के पालन की जिम्मेदारी निवेश करने वाली कंपनी की होगी।

इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में अधिकतर निदेशक और उसका सीईओ भारतीय नागरिक होना चाहिए। कंपनी को ऐसे सभी विदेशी कर्मचारियों के लिए सरकार से सुरक्षा अनुमति लेनी होगी, जिन्हें साल में 60 दिन से ज्यादा के लिए अपने साथ जोड़ा गया है। यह नियम सलाहकार, अनुबंधित, नियुक्ति या अन्य किसी भी तरह के जुड़ाव के लिए लागू होगा। 

साथ ही इसके तहत डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स भी सरकारी विज्ञापन ले सकेंगे। उनके कर्मचारियों को पीआईबी मान्यता मिलेगी। न्यूज वेबसाइट के कर्मचारी भी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कर्मचारियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं ले सकेंगे।

मंत्रालय ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही डिजिटल मीडिया भी स्व-नियमन संस्थान गठित कर पाएगा, ताकि भविष्य में सरकार के सामने उनका आधिकारिक पक्ष पेश किया जा सके।

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शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया, बॉलिवुड में किस बात का फायदा उठा रहा है मीडिया

विजिनरी टॉक सीरीज के तहत जाने-माने फिल्म अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ विशेष बातचीत में तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
Visionary Talk

जाने-माने बॉलिवुड अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि बॉलिवुड में एकता नहीं है और मीडिया इसका फायदा उठा रहा है। ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा का यह भी कहना था, ‘इंडस्ट्री से जुड़े लोग अथवा उनके समर्थक कुछ सामान्य हितों के लिए तो कभी-कभी एक साथ आ सकते हैं, लेकिन विवाद की स्थिति में वे इसमें शामिल होना नहीं चाहते हैं। मैं आलोचना नहीं कर रहा हूं, हो सकता है कि ऐसा किसी भय के कारण हो अथवा वे किसी को परेशान न करने का उनका अपना नजरिया हो सकता है। लेकिन सही मायनों में बॉलिवुड में एकता, दोस्ती, सौहार्द अथवा आपसी प्रेम नहीं है।’

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा का यह भी कहना था कि एकता, आपसी सम्मान, प्यार और दोस्ती यहां सीमित है और सिर्फ ऑनस्क्रीन दिखाई देती है। जबकि वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं है। इसका उदाहरण देते हुए इस दिग्गज फिल्म स्टार ने कहा, ‘भारत रत्न व ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित जाने-मान फिल्म डायरेक्टर, लेखक और संगीतकार सत्यजीत रे का जब निधन हुआ था तो मुंबई के महबूब स्टूडियो में एक शोक सभा रखी गई थी। मैं यह देखकर हैरान रह गया कि 70 लोग भी वहां मौजूद नहीं थे और कोई भी फिल्म स्टार दिवंगत फिल्म निर्माता को श्रद्धांजलि देने नहीं आया था।’

बॉलिवुड से जुड़े लोगों के खिलाफ मीडिया ट्रायल के विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए तमाम फिल्म स्टार और प्रड्यूसर्स के एक साथ मिलकर कदम उठाने के बारे में सिन्हा ने कहा, ‘मैंने सुना है कि इंडस्ट्री के तमाम लोग एक साथ आगे आए हैं और कुछ न्यूज चैनल्स के खिलाफ आवाज उठाई है। इस बारे में मैं कहना चाहूंगा- बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते। मैं चाहता हूं कि यह एकता बनी रहे, लेकिन प्राय: ऐसा होता नहीं है और वे (मीडिया) इसका फायदा उठाते हैं। पहले ये लोग राजनेताओं का पीछा करते थे।’

उन्होंने कहा कि हालांकि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग डर या किसी अन्य कारण से खुले तौर पर एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए आगे नहीं आते हैं, वास्तव में वे काफी सरल हैं।  

इसके साथ ही न्यूज चैनल्स पर निशाना साधते हुए इस दिग्गज अभिनेता ने कहा कि तमाम न्यूज चैनल्स द्वारा लगातार शालीनता की सीमाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। सनसनीखेज बनाने के लिए मुद्दे को रबर की तरह खींचा जाता है। शत्रुघ्न सिन्हा के अनुसार, ‘यहां काफी निंदा और अनादर होता है। कुछ न्यूज चैनल्स उंगलियां उठाते हैं, फटकार लगाते हैं और चैनल पर अपने गेस्ट से इस तरह पेश आते हैं जैसे कि वे उनके एम्प्लीज हों। कई न्यूज कार्यक्रमों में चीखना-चिल्लाना और अभद्र भाषा के इस्तेमाल के कारण तमाम लोगों ने न्यूज चैनल की ओर से मिलने वाले आमंत्रणों को स्वीकार करना बंद कर दिया है। आखिर अपमान सहने के लिए वहां कौन जाना चाहेगा?’

फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग स्कैंडल के बारे में सिन्हा ने कहा कि तमाम इंड्स्ट्री में बुरे लोग हैं, लेकिन सभी लोगों को एक ही तराजू पर तौलना सही नहीं है। तमाम अच्छे लोग भी हैं। उन्होंने कहा कि चैनल्स सबक सीख रहे हैं और धीरे-धीरे व निश्चित रूप से बदलेंगे। शत्रुघ्न सिन्हा के अनुसार,‘कई मीडिया हाउस, राजनीतिक दल या राजनेताओं द्वारा एजेंडा सेट किया जाता है और यह प्रचार अथवा विरोधी प्रचार का संगम होता है।’  उन्होंने कहा कि न्यूज एंटरटेनमेंट को खुद अपने आप में बदलाव लाना होगा।  

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