वीयू क्लिप ला रहा है भारत का पहला मोबाइल मूवी पोर्टल स्टारलाइट सिनेमा

<div>&nbsp;<b>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</b></div> <div>कैलीफोर्निया बेस्ड मूवी मोबाइल वीडियो सर्विस प

Last Modified:
Friday, 01 January, 2016
Samachar4media
 समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
कैलीफोर्निया बेस्ड मूवी मोबाइल वीडियो सर्विस प्रोवाइडर कंपनी यूवीक्लिप अब भारत में स्टारलाइट सिनेमा नाम से पहला मोबाइल मूवी पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। यह पोर्टल उन उपभोक्ताओं के लिए बेहतर ऑप्शन दे रहा है जो ज्यादार समय मोबाइल पर बिताते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से फीचर फिल्म, मूवी क्लिप, गाने फिल्म रिव्यूज और ट्रेलर देखे जा सकेंगे। साथ ही बिना कोई एप्लीकेशन डाउनलोड किए इस पोर्टल से मोबाइल पर फिल्में डाउनलोड भी की जा सकेंगी।
 
शुरुआती में 9,000 भारतीय फिल्मों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा जिनमें हिंदी के अलावा मराठी, भोजपुरी, गुजराती, पंजाबी, उड़िया, राजस्थानी, कश्मीरी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम भाषा की फिल्में भी होंगी। कंपनी ने ट्राई के पास इसके लिए आवेदन भी कर दिया है।
 
पोर्टल इसके लिए कई बड़ी भारतीय प्रोडक्शन हाउस से करार कर रहा है साथ ही कुछ मशहूर हॉलीवुड फिल्में भी मौजूद होंगी। प्रबंधन के मुताबिक 9000 फिल्मों में से तकरीबन 400 फिल्में हिदी की रहेंगी।
 
नोट: समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडिया पोर्टल एक्सचेंज4मीडिया का नया उपक्रम है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें samachar4media@exchange4media.comपर भेज सकते हैं या 09899147504/ 09911612929 पर संपर्क कर सकते हैं। 
 
 
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कोरोना के खौफ के बीच मदद के लिए एबीपी न्यूज नेटवर्क ने की सराहनीय पहल

स्वयंसेवी संगठन ‘रॉबिनहुड आर्मी’ के साथ मिलकर वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ, अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की

Last Modified:
Thursday, 09 April, 2020
ANN

देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ANN) ने कोरोनावायरस (कोविड-19) जैसी महामारी के बीच वरिष्ठ नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। ‘सीनियर पैट्रोल’ (Senior Patrol) नाम से शुरू की गई इस पहल के तहत नेटवर्क ने स्वयंसेवी संगठन ‘रॉबिनहुड आर्मी’ (RHA) के साथ मिलकर समाज के वरिष्ठ एवं अन्य संवेदनशील सदस्यों की मदद करने के लिए उन तक भोजन, दवाएं व अन्य जरूरी चीजें पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।  

बता दें कि कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन किया है। ऐसे में अपने परिवार से दूर अथवा अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक मुश्किल में हैं। उन्हें भोजन, दवाओं व अन्य जरूरी चीजों के लिए मदद की जरूरत है। इनकी लिए ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ और ’ ‘रॉबिनहुड आर्मी’’ ने मिलकर हाथ बढ़ाया है। इस पहल से जुड़े सदस्य सरकारी द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इन जरूरतमंद लोगों तक राशन व दवाएं पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ अपने न्यूज चैनल्स पर इस पहल का प्रमोशन कर अन्य स्वयंसेवियों को इस पहल से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहा है।

इस पहल के तहत जरूरतमंद परिवार एक ऑनलाइन फॉर्म (https://robinhoodarmy.com/seniorpatrol/) भर सकते हैं, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के बारे में पूरा विवरण, दवा व राशन से जुड़ी उनकी जरूरत को दर्ज करना होगा। डिलीवरी पूरी होने के बाद इस पहल से जुड़े स्थानीय सदस्य द्वारा अपडेट भेजा जाएगा। यदि इस पहल से जुड़े वायरस के खतरे को देखते हुए कुछ खास शहरों में मदद पहुंचाने में सक्षम नहीं होते हैं तो वे उन वरिष्ठ नागरिकों के परिवार के सदस्यों को सूचित कर उनकी मदद के लिए वैकल्पिक तरीका तलाशेंगे।

इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है, ‘इस मुश्किल दौर में हम सभी का कर्तव्य है कि जरूरतमंदों की मदद करें। हमें ‘रॉबिनहुड आर्मी’ के साथ मिलकर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग के लिए इस तरह की पहल शुरू कर काफी गर्व हो रहा है। हमें उम्मीद है कि अन्य लोग भी इस पहल के साथ जुड़ेंगे और वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिए आगे आएंगे।’

बता दें कि ‘रॉबिनहुड आर्मी’ ऐसे छात्रों व युवा प्रोफेशनल्स का स्वयंसेवी संगठन है जो रेस्तराओं से बचा हुआ भोजन जुटाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं और अपने तरीके से समाज में बदलाव लाने में मदद करते हैं।

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न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के साथ BJP नेताओं ने भी इस सुझाव को मीडिया के लिए बताया घातक

सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का लगातार विरोध हो रहा है।

Last Modified:
Thursday, 09 April, 2020
Media

सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का लगातार विरोध हो रहा है। न्यूज चैनल्स के संगठनों समेत बीजेपी नेताओं ने भी इन सुझावों को मनमाना और मीडिया के लिए नुकसानदायक बताया है।

इस बारे में झारखंड प्रदेश भाजपा का कहना है कि सोनिया गांधी की यह सलाह कांग्रेस की इमरजेंसी वाली सोच दर्शाती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने भी कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव की कड़ी निंदा की है। प्रतुल का कहना है,‘ एक तरफ महामारी के इस दौर में केंद्र सरकार ने एक लाख 70 हजार करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है, वहीं सोनिया गांधी मीडिया इंडस्ट्री को समाप्त करने पर लगी हैं। इससे पहले भी कांग्रेस का इमरजेंसी में मीडिया के प्रति असली चेहरा सामने उजागर हो गया था। आज फिर उसी सोच के तहत कांग्रेस देश की मीडिया को समाप्त करने में तुली है। कांग्रेस नहीं चाहती कि जनता तक निष्पक्ष खबर पहुंचती रहें।’

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी सोनिया गांधी के इस सुझाव की निंदा की है। सोनिया गांधी की इस मांग को अव्यावहारिक बताते हुए बिहार के डिप्टी सीएम का कहना है कि सोनिया गांधी का यह सुझाव प्रेस की आजादी पर अंकुश लगाने की उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

इसके साथ ही सोनिया गांधी के इस सुझाव पर ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) और ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (Indian Newspaper Society) ने भी अपना विरोध जताते हुए कहा है कि यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है तो इस तरह का फैसला तमाम टीवी चैनल्स के लिए घातक होगा। ‘Indian Newspaper Society’ के प्रेजिडेंट शैलेष गुप्ता ने एक बयान जारी कर सोनिया गांधी के इस सुझाव पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि यह सुझाव एक तरह से आर्थिक सेंसरशिप है। जहां तक इस बारे में ​​सरकारी खर्च का सवाल है, तो यह बहुत कम राशि है, लेकिन यह न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए काफी बड़ी रकम है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है और अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।' 

उनका यह भी कहना है,'आर्थिक मंदी के कारण एडवर्टाइजिंग और सर्कुलेशन रेवेन्यू में कमी होने व डिजिटल के कारण प्रिंट इंडस्ट्री वैसे ही काफी दबाव में है, वहीं लॉकडाउन में इंडस्ट्रीज और अन्य व्यवसाय बंद होने के कारण आर्थिक संकट और गहरा गया है। ऐसे में सोनिया गांधी का मीडिया को मिलने वाले सरकारी विज्ञापनों के बारे में दिया गया सुझाव सही नहीं है।’   

गौरतलब है कि पीएम मोदी को दिए अपने पत्र में सोनिया गांधी ने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाकर यह पैसा कोरोनावायरस से पैदा हुए संकट से निपटने में लगाने को कहा है।

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जानिए, क्यों न्यूज एजेंसी ANI को किया गया ट्रोल

कोरोना वायरस पर अंकुश लगाने को लेकर सरकार तमाम कोशिशें कर रही हैं, बावजूद इसके अफवाहें बंद होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं।

Last Modified:
Thursday, 09 April, 2020
ANI

कोरोना वायरस पर अंकुश लगाने को लेकर सरकार तमाम कोशिशें कर रही हैं, बावजूद इसके अफवाहें बंद होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं। वहीं इसी बीच न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ ने भी एक गलत सूचना दे दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस न्यूज एजेंसी को ट्रोल किया जाने लगा।  

बता दें कि न्यूज एजेंसी 'एएनआई ने 7 अप्रैल को गौतम बुद्ध नगर के डीसीपी संकल्प शर्मा का हवाला देते हुए ट्वीट किया था कि, नोएडा के हरौला के सेक्टर 5 में जो तबलीगी जमात के सदस्यों के संपर्क में आए थे, उन्हें क्वारेंटाइन कर दिया गया है।'

वहीं, इसके बाद न्यूज एजेंसी के इस ट्विट को एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश ने भी ट्विट करते हुए लिखा था कि नोएडा में सुरक्षित रहें।

हालांकि जैसे ही इस ट्वीट की जानकारी, नोएडा के डीसीपी को लगी उन्होंने तुरंत ही ट्वीट का खंडन किया और इसे गलत बताया। डीसीपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एएनआई को टैग करते हुए लिखा कि, 'ऐसे लोग जो कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए थे, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार क्वारेंटाइन किया गया। तब्लीगी जमात का जिक्र नहीं था। आप गलत हवाला देते हुए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।'

हालांकि इसके बाद अपनी गलती सुधारते हुए ANI ने ट्वीट को डिलीट कर दिया और एक अन्य ट्वीट किया। इसमें 'गौतम बुद्ध नगर के डीसीपी संकल्प शर्मा के हवाले से लिखा कि, सुधार- सेक्टर 5 हरौला, (नोएडा) में जो कोरोना पॉजिटिव मामले में संपर्क में आए थे, उन्हें क्वारेंटाइन किया गया है।'

लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और न्यूज एजेंसी लोगों के निशाने पर आ गई थी। लोगों ने एजेंसी को ट्रोल करना शुरू कर दिया।     

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प्रो. केजी सुरेश ने PM को लिखा ओपन लेटर, उठाया ये बड़ा मुद्दा

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है।

Last Modified:
Thursday, 09 April, 2020
Professor KG Suresh

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में चल रहे लॉकडाउन के बीच देहरादून की बहु-विषयक और विशेषज्ञता केंद्रित यूनिवर्सिटी ‘यूपीईएस’ (UPES) में ‘स्कूल ऑफ मॉडर्न मीडिया’ (School of Modern Media) के डीन और ‘आईआईएमसी’ के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर के.जी. सुरेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपन लेटर लिखा है। इस लेटर में उन्होंने लॉकडाउन के कारण छात्रों के सामने आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया है।

इस लेटर में उन्होंने रेडियो की क्षमता के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अंतरमंत्रालयी (inter ministerial) टास्क फोर्स गठित करने की मांग की है, ताकि लॉकडाउन से प्रभावित छात्र इसका फायदा उठा सकें। अपने पत्र में केजी सुरेश ने यह भी कहा है कि इबोला संकट (Ebola Crisis) के दौरान पश्चिमी अफ्रीकी देश सिएरा लियोन (Sierra Leone) में इसी तरह के प्रयोगों को सफलतापूर्वक लागू किया गया था।

अपने लेटर में प्रो. केजी सुरेश का कहना है, ‘पूरी दुनिया आज एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और हमारा देश भी कोरोना के खिलाफ जंग में जुटा हुआ है। कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया हुआ है। लॉकडाउन के दौरान आम आदमी को किसी तरह की दिक्कतें न हों, इसके लिए भी केंद्र व राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी जैसे संस्थानों ने देश के विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थानों के लिए तमाम गाइडलाइंस जारी की हैं, ताकि छात्रों को इस अनिश्चतता भरे माहौल में कुछ राहत दी जा सके।’ 

इसी क्रम में कई संस्थानों, खासकर उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों और निजी स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई की टेक्नोलॉजी को अपनाना शुरू कर दिया है, लेकिन देश में कई ऐसे इलाके और संस्थान हैं, जो इस तरह की सुविधाओं से अछूते हैं, ऐसे में लाखों युवाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में छात्रों की भलाई और उनके भविष्य को देखते हुए सरकार को रेडियो की ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रोफेसर केजी सुरेश द्वारा प्रधानमंत्री के लिखे इस ओपन लेटर को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

Dear Prime Minister Sir,

The world is passing is through an unprecedented crisis and we in India too are engaged in a war on Corona. Both Central and state Governments have taken several steps to alleviate the sufferings of the common man in the wake of the lockdown. The Ministry of Human Resource Development and organisations such as UGC have issued several guidelines to the universities and other educational institutions to provide relief to the students who are facing an uncertain future.

Many institutions, particularly related to higher education, as also private schools have adopted online teaching technologies in a big way to reach out to the beleaguered student community. However, students in the rural and interior areas, which comprise a sizeable part of the country, remain deprived of these facilities. This is affecting the education of lakhs of youngsters, who are the future of the nation.

It may be recalled that after the outbreak and spread of Ebola in the West African country of Sierra Leone in 2014, over one million school going kids were out of class for several months. Subsequently, the Sierre Leone Government partnered with UNICEF and many other voluntary developmental organisations to launch a radio education programme for school going kids. The programmes were run on 41 Government radio stations, as also the country’s state owned TV channel.

Instructors created hour long teaching sessions for younger children – who listen in the morning – and for older students, who would tune in later in the day. According to UNICEF, the lessons became increasingly popular – from less than 20 per cent participation initially to 70 percent coverage at its peak.

Similarly, Radio Mewat, a community radio station operating from the backward Mewat district of Haryana, too is engaged in imparting subject specific classes, which has resulted in improved performance in schools. Many other community radio stations too are engaged in similar exercise. Unfortunately, we have very few community radio stations and they have a limited reach.

Moreover, with the lockdown impacting educational institutions, many radio stations including  Apna Radio 96.9 run by the prestigious Indian Institute of Mass Communication located in the Corona affected South Delhi has been shut down whereas this is the time when they should be operating 24X7 for the benefit of the local populace.

It’s here that All India Radio can play a critical role in imparting subject specific education and information to the students at large.

Broadcast radio (AM) today reaches a staggering 99% of the Indian population, while FM radio reaches 65% . Unlike TV and print, radio is highly interactive, hyper-local in nature, and is free. It’s portability enables one to listen to it even while working in the farms or fishing in the deep seas.

Many people prefer radio as the information provided is crisp and straightforward. Radio helps audiences focus and retains their attention for a longer duration as compared to TV, where pictures and headlines distract the viewer. With radio remaining untouched by the menace of fake news so far, it also remains by far the most credible medium. What’s more, to reach out to the millennials, radio stations are today available on digital platforms as well.

The Hon’ble Prime Minister himself reaches out to millions of citizens every month through his hugely popular ‘Mann Ki Baat’ programme. The importance he has given to the radio was evident from his interaction with Radio Jockeys following the lockdown.

In view of the above, it is humbly submitted that an inter-ministerial Special Task Force be set up with representatives from the Human Resources Development Ministry, Information and Broadcasting Ministry, Telecom Ministry, Prasar Bharati and community radio stations to chalk out a strategy to reach out through Akashvani and community radio to the students who are preparing for their board and various entrance examinations in the coming days as the lockdown is expected to be lifted only in a phased manner over the next few months.

We, at the School of Media, UPES, Dehradun too are willing to extend all possible cooperation to the Government in this regard for at stake is the future of our students and the country.

I am not only hopeful but also confident that you will proactively take up this issue in the larger interests of the student community with whom you have been regularly interacting and counselling on important issues such as Examination Stress.

Thanking you in anticipation

Warm Regards

Prof K G Suresh

Founder Dean, School of Modern Media, University of Petroleum & Energy Studies, Dehradun

Former Director General, Indian Institute of Mass Communication

Former Senior Consulting Editor, Doordarshan News

Former Chief Political Correspondent, Press Trust of India

(M) 9818617350

kgsure@gmail.com

 

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‘TV9 भारतवर्ष’ से जुड़े आशुतोष त्रिपाठी, संभालेंगे यह जिम्मेदारी

देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
ashutosh754

देश के अग्रणी न्यूज नेटवर्क में से एक TV9 ग्रुप से खबर है कि यहां आशुतोष त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है। ‘TV9 भारतवर्ष’ में उन्हें उत्तर और पश्चिम बंगाल के लिए सेल्स का वाइस प्रेजिडेंट बनाया गया है। अपनी इस भूमिका में, त्रिपाठी रेवन्यू बढ़ाने पर जोर देंगे, साथ ही रेवन्यू के अन्य नॉन-ट्रेडिशनल स्ट्रीम्स के लिए भी काम करेंगे।

अपनी नियुक्ति पर, आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि वह इस मौके को एक चुनौती के रूप में लेने के लिए बहुत ही उत्साहित हैं। जहां न्यूज जॉनर पहले से ही बेहतर स्थिति में है, वहीं TV9 अलग और अनूठे तरीके से नई कहानियों/शो को प्रजेंट करने के लिए तैयार है। चैनल टैग लाइन ‘फिक्र आपकी, परवाह देश की’ के साथ एक नए रूप में दिखाई देगा। ऐसे समय पर जब देश में लॉकडाउन है, COVID-19 महामारी के दौरान TV9 सोशल मैसेजेस और प्रोमोज के जरिए बचाव और सुरक्षा कैसे करें, इसे लेकर अपने दर्शकों को जागरुक कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TV9 के प्रोमो के प्रसारण की सराहना की, जिसमें दिखाया गया था कि 5 अप्रैल को अपने घर/बालकनी को 9 बजे 9 मिनट के लिए रोशन करें।  

त्रिपाठी ने जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। उन्हें मीडिया में सेल्स का 15 से भी ज्यादा वर्षों का अनुभव है। वे इससे पहले ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने साढ़े छह साल ऐड सेल्स में काम किया। इसके अलावा उन्होंने ‘इंडिया टीवी’, ‘रेडियो मिर्ची’ में भी काम किया है।

 

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कोरोना संकट के बीच ‘राहत’ पहुंचाने के लिए SONY ने उठाया ये बीड़ा

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने बड़ा निर्णय लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
SONY PICTURES

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन को देखते हुए ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया’ (SPNI) ने मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों (daily wage workers) को सपोर्ट करने के लिए 100 मिलियन रुपए के योगदान का निर्णय लिया है।   

बता दें कि कोरोनावायरस के कारण टीवी, सिनेमा शो और फिल्म प्रॉडक्शन का काम 20 मार्च से ठहर गया है। ऐसे में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर बेरोजगारी से जूझ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स और उनके परिवार पर पड़ा है। ऐसे लोगों की मदद के लिए नेटवर्क संबंधित श्रमिक संगठनों की मदद से इन वर्कर्स से संपर्क कर उन्हें मुफ्त में कूपन उपलब्ध करा रहा है। इन कूपन की मदद से ये वर्कर्स और उनका परिवार चुने गए रिटेल स्टोर्स से खाना और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें ले सकते हैं।

नेटवर्क अपने विभिन्न प्रॉडक्शन हाउस के साथ मिलकर वहां कार्यरत दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को एक महीने की सैलरी देने के लिए भी काम कर रहा है। इसके अलावा नेटवर्क ने ‘स्वदेश फाउंडेशन’ की ओर से शुरू किए गए ‘स्वदेश कोविड फंड’ (Swades COVID Fund) में भी अपना योगदान दे रहा है।     

इस बारे में ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ एनपी सिंह का कहना है, ‘इस वैश्विक महामारी को देखते हुए दुनियाभर के लोग एक साथ मिलकर आगे आ रहे हैं, ताकि इस संकट से छुटकारा पाया जा सके। इस महामारी का मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या दैनिक वेतनभोगी वर्कर्स की है। ऐसे में एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ संस्थान होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों को मदद पहुंचाएं, जिन्होंने नेटवर्क की सफलता में अपना अमूल्य योगदान दिया है।’

इसके अलावा नेटवर्क की ओर से सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल ऑपरेटर्स पर ‘सोनी पल’ (Sony PAL) चैनल व्युअर्स के लिए दो महीने तक मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि लॉकडाउन के कारण घरों में बैठे व्युअर्स को एंटरटेनमेंट में किसी तरह की कमी नहीं आए। इसके अलावा नेटवर्क के विभिन्न चैनल्स पर लोगों को जागरूकता संदेश देने वाले कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

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विडियो कांफ्रेंसिंग मीडिया से मुखातिब हुए CM योगी, कही ये बात

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 08 April, 2020
yogi

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पूरा देश मिलकर जंग लड़ रहा है। इस जंग में मीडिया की भूमिका भी अहम है और वह भी अपना पूरा सहयोग दे रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन के बीच मंगलवार शाम मीडिया से विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की। इस दौरान सीएम योगी ने मीडिया के काम की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ाई में शासन, प्रशासन और आमजन की सहभागिता के साथ ही मीडिया की भूमिका भी बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को सफल बनाने और कोरोना से बचने व रोकथाम में मीडिया जनता को भली-भांति जागरूक कर सकता है। उन्होंने कहा कि अभी तक मीडिया ने अपना पूरा सहयोग दिया है और उम्मीद है कि भविष्य में भी मीडिया अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करता रहेगा।

योगी ने कहा कि मीडियाकर्मियों को फेक न्यूज, अफवाह और अलगाववाद जैसी खबरों से सजग रहना चाहिए। उन्होंने स्वअनुशासन और सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर देते हुए कहा कि इसका कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। मीडिया को भी इसके प्रति जागरुकता में सरकार का सहयोग करना चाहिए।

इस दौरान योगी ने मीडियाकर्मियों के साथ कोरोना से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों व सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को भी साझा किया।

विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीएम योगी ने पत्रकारों से सुझाव भी मांगे। पत्रकारों ने लॉकडाउन खुलने की समय सीमा, कम्युनिटी किचन, सर्विलांस बढ़ाने, जनसहभागिता आदि से संबंधित सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण सुझावों पर गंभीरता से अमल करने का आश्वासन भी दिया है। योगी ने कहा कि लॉकडाउन कब खुलेगा इस पर 11-12 अप्रैल को केंद्र से बातचीत करने के बाद ही फैसला किया जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर कोई खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील भी की।

बता दें कि शाम पांच बजे मुख्ययमंत्री विडियो कांफ्रेंसिंग पर लाइव आए थे। उनसे बात करने के लिए मीडियाकर्मियों को एनआईसी के विडियो कांफ्रेंस हाल में बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने करीब 40 मिनट तक बात की। समय के अभाव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह क्षमा चाहते हैं कि सभी लोगों से बात नहीं कर सकते। इस मौके पर डीएम कुमार प्रशांत, एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

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सोनिया गांधी के इस सुझाव पर NBA ने जताई नाराजगी, रखी ये बात

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मीडिया पर सरकारी विज्ञापनों के बारे में दिए गए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव का विरोध किया है

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस सुझाव को पुरजोर तरीके से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाने की बात कही है।

इस बारे में ‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा का कहना है, ’ऐसे समय में जब मीडियाकर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए महामारी के बीच न्यूज कवर कर अपनी राष्ट्रीय ड्यूटी निभा रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का बयान काफी हतोत्साहित करने वाला है।’  

रजत शर्मा की ओर से कहा गया है, ‘एक तरफ तो आर्थिक मंदी की वजह से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में काफी गिरावट आई है, दूसरी तरफ लॉकडाउन में सभी इंडस्ट्री और बिजनेस बंद होने के कारण भी यह आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसके अलावा न्यूज चैनल्स अपने रिपोर्टर्स और प्रॉडक्शन स्टाफ की सुरक्षा पर काफी ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में सरकार एवं सरकारी उपक्रमों द्वारा मीडिया विज्ञापनों पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगाने का सुझाव न केवल मीडिया को बीमार करने वाला है, बल्कि यह पूरी तरह से मनमाना है ’

रजत शर्मा की ओर से यह भी कहा गया है, ‘स्वस्थ और फ्री मीडिया के हित में ‘एनबीए’ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री को सरकार द्वारा मीडिया को दिए जाने वाले एडवर्टाइजमेंट पर दो साल के लिए रोक लगाने के सुझाव को वापस लेने की मांग करता है।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी को दिए अपने पत्र में सोनिया गांधी ने सरकार और सरकारी उपक्रमों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे विज्ञापनों (टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन) पर दो साल के लिए रोक लगाकर यह पैसा कोरोनावायरस से पैदा हुए संकट से निपटने में लगाने को कहा है।

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इस ग्रुप से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं।

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Tuesday, 07 April, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर को लेकर हाल ही में समाचार4मीडिया ने अपने उच्च स्तरीय स्रोतों से खबर दी थी कि वह जल्द ही इंडिया टुडे ग्रुप में वरिष्ठ पद पर जॉइन कर सकते हैं। बता दें कि अब इस खबर पर मुहर लग गई है। वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर ने तक चैनल्स (Tak Channels) के मैनेजिंग एडिटर के रूप में ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप जॉइन कर लिया है। वे वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर कली पुरी को रिपोर्ट करेंगे।

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खांडेकर के कंधों पर न्यूज और रीजनल के सभी तक चैनल्स की जिम्मेदारी होगी। वे नोएडा के फिल्म सिटी स्थित आईटीजी मीडियाप्लेक्स से ही अपना योगदान देंगे।

खांडेकर इसके पहले  ‘बीबीसी (इंडिया)’ में बतौर डिजिटल एडिटर कार्यरत थे। 13 मार्च को उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से बीबीसी से अलग होने की जानकारी साझा की थी। इस ट्वीट में खांडेकर ने कहा था, ‘बीबीसी इंडिया के साथ मेरा सफर काफी बेहतर रहा। इस दौरान कई नई चीजें सीखने का मौका भी मिला। भारत में बीबीसी ने काफी विस्तार किया है और मैं काफी सौभाग्यशाली हूं जो इसका हिस्सा रहा। मैं अपने सभी साथियों को धन्यवाद देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। अपने अगले कदम के बारे में मैं जरूर जानकारी दूंगा।’

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गौरतलब है कि मिलिंद खांडेकर बीबीसी से पहले एबीपी न्यूज के साथ जुड़े हुए थे। अगस्त, 2018 की शुरुआत में एबीपी न्यूज में अपनी 14 साल की लंबी पारी को विराम दिया था। वे यहां मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत थे।  2016 में उनका कद बढ़ाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। एबीपी न्यूज नेटवर्क में उनका योगदान हिंदी चैनल के साथ शुरू हुआ और धीरे-धीरे एबीपी न्यूज नेटवर्क के डिजिटल और क्षेत्रीय (बंगाली, मराठी और गुजराती) चैनलों की ओर भी बढ़ा।

2016 में ही मिलिंद खांडेकर को टीवी न्यूज इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित अवॉर्ड एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) के तहत बेस्ट एडिटर कैटेगरी के लिए भी चुना गया था।

हिंदी और अंग्रेजी दोनो ही भाषाओं में बराबर की पकड़ होने के बावजूद भी मिलिंद खांडेकर ने शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता की ओर अपना रुख किया। मिलिंद ने पत्रकारिता में अपनी शुरुआत 1992 से ‘नवभारत टाइम्स’ के साथ की। नवभारत में उन्होंने सब-एडिटर और रिपोर्टर के रूप में काम किया। 1995 तक वे यहां रहे। तीन साल काम करने के बाद वे ‘आजतक’ के साथ जुड़ गए। आजतक में उन्होंने कुछ समय तक रिपोर्टर की भूमिका निभाई, जिसके बाद कई विभिन्न पदों पर काम करते हुए वे यहां एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर बन गए और बाद में उन्होंने वेस्टर्न ब्यूरो ऑपरेशन की भी कमान संभाली। 2004 में मिलिंद ने 'आजतक' को अलविदा कह दिया और तब स्टार न्यूज यानी आज के 'एबीपी न्यूज' के साथ जुड़ गए थे। तब से वे एमसीसीएस (एबीपी चैनल का संचालन करने वाली कंपनी) में बतौर मैनेजिंग एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

मिलिंद ने किताब 'दलित करोड़पति-15 प्रेरणादायक कहानियां' भी लिखी । इसमें 15 कहानियां है, जिनमें 15 दलित उद्योगपतियों के संघर्ष को शॉर्ट स्टोरीज की शक्ल में प्रस्तुत किया गया है। ये कहानियां दलित करोड़पतियों की है,जिन्होंने शून्य से शुरू कर कामयाबी के नए आयाम रचे, जिनके पास पेन की निब बदलने के लिए पैसे नहीं थे आज उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन उन्होंने ये कामयाबी कैसे हासिल की, क्या मुश्किलें आई और उन्होंने इन मुश्किलों पर कैसे फतह हासिल की।  

पत्रकारिता जगत में उन्हें दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रतिष्ठित टाइम्स सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज से की है। 1991 में हिंदी में बेस्ट ट्रेनी के लिए उन्हें ‘राजेन्द्र माथुर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया था।

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मीडिया के खिलाफ जमीयत ने उठाया ये कदम, लगाया नफरत फैलाने का आरोप

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।

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Tuesday, 07 April, 2020
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मीडिया जिस तरह से तब्लीगी जमात मामले को लेकर रिपोर्टिंग कर रहा है, उसे लेकर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम का दरवाजा खटखटाया है। उसने देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार ठहराने पर मीडिया के खिलाफ यह याचिका दायर की है।

तब्लीगी जमात के करीबी माने जाने वाले उलेमाओं के इस संगठन ने मीडिया के एक वर्ग पर मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। इस संगठन ने कहा कि इस मुद्दे को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मुसलमान कोरोना फैलाने की मुहिम चला रहे हैं। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से इस तरह की मीडिया कवरेज पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से मीडिया और सोशल मीडिया में झूठी खबर फैलाने वालों पर कार्रवाई का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

अपनी याचिका में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से केंद्र सरकार को दुष्प्रचार रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश देने की अपील भी की है।

जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने दायर की गई याचिका में कहा कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं, जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।

संगठन ने याचिका में यह भी कहा है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में देश के एक बड़े समुदाय को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उसके आर्थिक बहिष्कार की बातें कही जा रही हैं। इससे न सिर्फ समाज में नफरत फैलेगी बल्कि कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई भी कमजोर पड़ेगी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देते हुए तुरंत सुनवाई करे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसमें तब्लीगी जमात में शामिल लोगों और मौलाना साद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस मामले में मौलाना साद के समर्थन में मौलाना अली कादरी सामने आए और उन्होंने न्यूज चैनल्स और उससे जुड़े पत्रकारों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी पत्रकार जमात के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे ऐसा करना बंद कर दे नहीं तो उनके रिपोर्टर्स का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन' (NBA) ने इस धमकी को संजीदगी से लिया और उनकी ओर से एक पत्र जारी किया है जिसमें कहा गया कि  न्यूज चैनल्स के एंकर्स और रिपोर्टर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे- वॉट्सऐप, टिकटॉक और ट्विटर पर विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे विडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें धर्म विशेष के कुछ लोग टीवी न्यूज एंकर्स का नाम ले रहे हैं और उन चैनल्स के रिपोर्टर्स पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा  की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया, ‘समाज के एक वर्ग में फैल रही इस घृणित प्रवृत्ति की एनबीए घोर निंदा करता है और सरकार व कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों से इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने की अपील करता है।’  

पत्र में एनबीए की ओर से ऐसे धार्मिक तत्वों से इस तरह की धमकियां से दूर रहने और न्यूज चैनल्स के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी न करने के लिए भी कहा गया है।  

बता दें कोरोना वायरस के संक्रमण को तेजी से फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात और उनके संपर्क में आए 25 हजार लोगों को पूरे देश में क्वारंटाइन किया गया है।  इसके साथ ही तब्लीगी जमात के लोग हरियाणा के जिन 5 गांवों में गए थे, उन गांवों को भी सील कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि तब्लीगी जमात के कुल 2,083 विदेशी सदस्यों में से 1,750 सदस्यों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में डाला जा चुका है। मालूम हो कि देशभर में अभी तक 4067 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस महामारी से अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है।

   

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