इस पत्रकार का सवाल सुन, उल्टे पांव लौटे मुख्यमंत्री

एससी, एसटी का मुद्दा सरकार के गले की फांस बन गया है...

Last Modified:
Tuesday, 25 September, 2018
shivraj singh


समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

एससी, एसटी का मुद्दा सरकार के गले की फांस बन गया है। बिना जांच गिरफ्तारी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए जब से सरकार ने कानून बनाया है,तब से उसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है,क्योंकि यहां नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। देवकीनंदन ठाकुर जैसे संत भी मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की मुश्किलों को और बढ़ा रहे हैं। इस चौतरफा दबाव को कम करने के लिए शिवराज सिंह ने बीते दिनों ऐलान कर दिया था कि राज्य में बिना जांच के कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। हालांकि, ये दांव उल्टा पड़ गया है। सोशल मीडिया सवाल उठे कि जब देश की संसद कानून बना चुकी है,तो राज्य सरकार उसमें कैसे बदलाव कर सकती है? विपक्षी पार्टियां भी शिवराज सिंह पर हमलावर हो गईं,लेकिन राजधानी भोपाल में बैठे बड़े-बड़े पत्रकारों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से सवाल दागने की जहमत नहीं उठाई। इस मुद्दे पर नेताओं के खामोश रहने की मजबूरी तो समझी जा सकती है, मगर मीडिया की खामोशी समझ से परे है।

राजधानी में पत्रकारों की खामोशी ने संभवतः भाजपा और शिवराज सिंह चौहान को थोड़ी राहत जरूर दी होगी, लेकिन जब वो भोपाल की सीमा से बाहर निकले तो उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। दरअसल,21 सितम्बर को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल प्रदेश के परासिया आए थे,उनकी अगुवानी के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा भी पहुंचे थे। वापसी में जब दोनों पिपरिया रेस्ट हाउस में रुके,तो पत्रकारों ने सबसे पहले प्रभात झा को घेर लिया। सामान्य सवाल-जवाबों के बीच न्यूज चैनल ‘अनादी’ के पत्रकार आलोक हरदेनिया ने एससी-एसटी से जुड़ा वो कठिन सवाल झा से पूछ लिया,जिससे राजधानी के पत्रकार भी बचते आ रहे थे।

हरदेनिया ने पूछा कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी, तो इस संबंध में सरकार नोटिफिकेशन कब तक जारी कर रही है? उम्मीदों के अनुरूप इसका सीधा जवाब देने के बजाए झा ने कहा,‘शिवराज सिंह मेरे नेता हैं, सरकार वो हैं। मैं एक बहुत छोटा सा कार्यकर्ता हूं। शिवराज सिंह ने जो कहा है उसके बारे में मैं क्या कह सकता हूं,बेहतर होगा अगर आप उन्हीं से यह सवाल पूछें।’  

 इसके बाद जब मुख्यमंत्री से पत्रकार संजय दुबे,नीरज श्रीवास्तव और हरदेनिया का सामना हुआ तो उन्होंने तपाक से वही सवाल दोहरा दिया,लेकिन शिवराज कोई जवाब देने के बजाए, चुपचाप वहां से निकल गए। इसका एक विडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। विडियो में साफ तौर पर नजर आ रहा है कि जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि मध्य प्रदेश में एससी, एसटी को लेकर आपने कहा है कि बगैर जांच के कोई गिरफ्तारी नहीं होगी,जबकि संसद कानून बना चुकी है, तो उन्होंने बिना कुछ बोले बस हाथ जोड़े और उल्टे पांव लौट गए।

समाचार4मीडिया से बातचीत में आलोक हरदेनिया ने कहा,एससी-एसटी पर सरकार का सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जाना प्रदेश ही नहीं पूरे देश के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे में जब राज्य सरकार ने केंद्र से अलग कोई घोषणा की तो उस पर सवाल लाजमी था। जनता को यह पता होना चाहिए कि जो कहा जा रहा है,उसमें कितनी हकीकत है, यही हम पत्रकारों का काम भी है। सबसे पहले मेरे साथी संजय दुबे के इस सवाल से सीएम को असहज किया।

आलोक मौजूदा वक्त में हाल ही में लॉन्च हुए न्यूज चैनल ‘अनादी’ के ब्यूरो चीफ हैं, इससे पहले वह ‘साधना न्यूज’ चैनल में भी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

 देखें विडियो-

 

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मीडिया की ‘गैरजिम्मेदार’ रिपोर्टिंग पर सरकार कुछ यूं लगाएगी लगाम

कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी बोले, अच्छी स्टोरी नहीं है तो बंद कर देना चाहिए चैनल

Last Modified:
Monday, 20 May, 2019
Media-Covera

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर लगाम लगाने के लिए एक कानून बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इसकी गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर लगाम लग सके।

मैसूर जिला कन्नड़ साहित्य परिषद की ओर से रविवार को आयोजित एक बुक लॉन्चिंग के मौके पर कुमारस्वामी का कहना था कि मीडिया की इस तरह की गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को देखते हुए उन्होंने पिछले एक महीने से मीडिया से बात करना बंद कर दिया है।

कुमारस्वामी का यह भी कहना था, ‘हालांकि पूर्व मंत्री और जेडी (एस) चीफ एएच विश्वनाथ ने अपने भाषण में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मीडिया को संबोधित करने से डरते हैं, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है। मीडिया के साथ मेरे काफी अच्छे रिश्ते रहे हैं, लेकिन अब चूंकि मीडिया गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग कर रही है, खासकर नेताओं को जोकर्स की तरह दिखाया जाता है, मैं अब मीडिया से उतनी बात नहीं करता हूं।’

कुमारस्वामी ने कहा, ’यदि किसी टीवी चैनल के मुखिया के पास पर्याप्त अच्छी स्टोरी नहीं हैं तो उसे चैनल को बंद कर अपने घर चले जाना चाहिए, लेकिन गलत रिपोर्टंग नहीं करनी चाहिए। इस तरह की फर्जी खबरें और बेकार की डिबेट न तो समाज और न ही लोगों के किसी काम की हैं। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नैतिकता होती थी, लेकिन अब अधिकांश चैनल नैतिकता का पालन नहीं करते हैं। मीडिया को यह समझना चाहिए कि मैं उनकी रिपोर्टिंग के कारण नहीं, बल्कि राज्य की 6.6 करोड़ जनता के कारण अपने पद पर बना हुआ हूं।

मीडिया से अपनी नाराजगी जताते हुए कुमारस्वामी का यह भी कहना था कि मीडिया ने उनके अच्छे कामों की बजाय गलत और झूठी रिपोर्ट्स पर फोकस किया है। उन्होंने कहा, ‘लोग मेरे पास रोजाना विभिन्न परेशानियां लेकर आते हैं और मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं लेकिन मीडिया सूखे समेत लोगों की परेशानियों को हाईलाइट नहीं करना चाहता है, बल्कि उसका पूरा ध्यान सनसनीखेज अथवा झूठी खबरों पर रहता है।’

आखिर में उन्होंने कहा, ‘क्या आपको लगता है कि सरकार चुप बैठी रहेगी। सरकार एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रही है, जिससे इस तरह की गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग पर लगाम लगाई जा सके।’

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Republic TV की महिला पत्रकार के उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस ने उठाया ये कदम

पिछले साल दिल्ली में जिग्नेश मेवानी की रैली के दौरान का है मामला

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
Republic TV

‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) की पत्रकार के साथ बदसलूकी करने और उन्हें परेशान करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दलित नेता जिग्नेश मेवानी के सहयोगी अपूर्व सिंह के खिलाफ शुक्रवार को चार्जशीट दायर कर दी है। उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी अपूर्व सिंह पर आईपीसी की धारा 509, 506, 341 और 34 के तहत पटियाला हाउस कोर्ट में मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट प्रीति परेवा के समक्ष चार्जशीट दायर की गई है।

इस मामले में पिछले साल अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही थी। अब जाकर चार्जशीट दाखिल की गई है। पत्रकार ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2018 में दिल्ली में जिग्नेश मेवानी की हुंकार रैली को कवर करते समय भीड़ ने उन्हें घेर लिया था और अपूर्व सिंह ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था।

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राजनीति के लिए वाकई मील का पत्थर साबित होगी ‘आजतक’ की ये मुहिम

विभिन्न मुद्दों को उठाने के साथ ही इस मंच पर अपने लिए मांगे जा सकते हैं वोट

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
AajTak

देश में राजनीति की क्या हालत है, ये किसी से छिपी नहीं हैं। देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो राजनीति में आना तो चाहते हैं, लेकिन कई बार उन्हें या तो उचित मंच नहीं मिल पाता अथवा अन्य किसी कारण से वे अपना इरादा बदल देते हैं। ऐसे में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ इस चुनावी समर के दौरान ऐसे लोगों के लिए बहुत ही अच्छा मौका लेकर आया है। दरअसल, यह न्यूज चैनल राजनीति में आने वाले लोगों को ‘आजतक जनसंसद’ नाम से एक मंच प्रदान कर रहा है, जिस पर नॉमिनेशन कर वे अपना प्रोफाइल तैयार कर विभिन्न मुद्दों को उठा सकते हैं और अपने लिए वोट मांग सकते हैं।

इसके लिए www.aajtak.in/jansansad पर 18 मई से रजिस्टर कर सकते हैं। इस मंच के माध्यम से चैनल ऐसे लोगों की आवाज को पूरे देश के लोगों तक पहुंचाएगा। इस मंच पर चुने गए 20 टॉप कैंडिडेट्स को चैनल पर आने का और चुने गए सांसद की तरह ही अपनी बात लोगों के सामने रखने का मौका दिया जाएगा।

इस लिंक पर क्लिक कर आजतक की इस मुहिम के बारे में ज्यादा जानकारी ली जा सकती है। 

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मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस को इससे बेहतर कोई बयां नहीं कर सकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अमित शाह के साथ मीडिया से हुए रूबरू

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
coverage

पत्रकारों और विपक्ष की शिकायत रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते। लिहाजा शुक्रवार को जब पीएम मीडिया से रूबरू हुए तो सभी उत्साहित थे। पत्रकारों ने भी उनके लिए कुछ ख़ास सवाल तैयार किये, जिन्हें वह पांच सालों से अपने ज़हन में दबाये बैठे थे। लेकिन जब प्रेस कांफ्रेंस शुरू हुई तो उत्साह पल भर में काफूर हो गया। क्योंकि पीएम मोदी वहां होकर भी नहीं थे। उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया, उनकी तरफ से अमित शाह ही बोलते रहे। ये भी अपने आप में एक बड़ी घटना थी, लिहाजा मीडिया में इस चुप्पी ने भी सुर्खियाँ बंटोरीं। चुनावी ख़बरों के बीच शनिवार के अख़बारों में पीएम की ख़ामोशी छाई रही, मगर इस ख़ामोशी को सबसे अच्छे या कहें कि अलग और मारक अंदाज़ में ‘द टेलीग्राफ’ ही बयां कर पाया।

अख़बार का फ्रंट पेज हर बार की तरह देखने लायक है। पीएम की पहली प्रेस कांफ्रेंस को फोटो के साथ जिस तरह से पेश किया गया है, वो केवल ‘द टेलीग्राफ’ ही कर सकता है। कहने को तो यह खबर लीड है, लेकिन इसकी कोई हेडलाइन नहीं है। इसके बजाय ‘नो हॉर्न’ का एक सिंबल चस्पा किया गया है, जो अपने आप में ही काफी कुछ बयां करता है। इसके नीचे बोल्ड शब्दों में लिखा है, ‘1817 दिनों के इंतजार के बाद वह प्रेस कांफ्रेंस जिसने देश को स्पीचलेस कर दिया। नीचे शुक्रवार को हुई उस प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें हैं, जिसमें 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद नरेंद्र मोदी शामिल हुए।’

इसके बाद टाइम स्टैम्प के साथ नरेंद्र मोदी की अलग-अलग मुद्रा वालीं सात छोटी-छोटी तस्वीरें हैं और कैप्शन में उनके बारे में बताया गया है। मसलन, पहली तस्वीर में लिखा है ’36वां मिनट: मोदी और अमित शाह के बयानों के बाद यह सवालों का समय है।’ दूसरी तस्वीर: 37वां मिनट–शाह ने जवाब दिए, मोदी कमरा निहारते रहे। तीसरी तस्वीर: 41वां मिनट-मोदी से सवाल पूछा गया, लेकिन उन्होंने अमित शाह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मैं अनुशासित सैनिक हूं, पार्टी अध्यक्ष ही मेरे लिए सबकुछ हैं। चौथी तस्वीर: 44वां मिनट-शाह ने जवाब दिया, मोदी यहां-वहां देखते रहे। पांचवी तस्वीर: 45वां मिनट-फिर शाह बोले, मोदी देखते रहे। छठी तस्वीर: 47वां मिनट-शाह ने सवालों के जवाब दिए, मोदी सोच में डूबे रहे। सातवीं तस्वीर: 51वां मिनट-शाह ने जवाब दिए, मोदी गहरी सोच में डूबे रहे।

इसके ठीक नीचे लिखा है ‘52वां मिनट, 48 सेकंड: शाह ने कहा ‘चलिए धन्यवाद। सबका बहुत-बहुत धन्यवाद और मोदी और शाह उठकर चले गए।’ अख़बार की क्रिएटिविटी यहीं ख़त्म नहीं होती, इसके बाद एक बड़ा सा खाली स्पेस छोड़ा गया है। इसके नीचे छोटे अक्षरों में लिखा है, ‘द टेलीग्राफ इस स्पेस को आरक्षित रख रहा है, इसे तब भरा जाएगा जब प्रधानमंत्री किसी प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब देंगे। इस स्पेस को देखें।’

कुल मिलाकर कहा जाए, तो अख़बार की संपादकीय टीम ने मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस और उससे देश को हुई निराशा को बड़ी ही खूबसूरती के साथ बयां किया है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है, जब ‘द टेलीग्राफ’ अपनी रचनात्मकता के लिए तालियाँ बंटोर रहा है। अख़बार के फ्रंट पेज पर लगभग हर रोज़ इस तरह के प्रयोग देखने को मिल जाया करते हैं और यही ‘द टेलीग्राफ’ को दूसरों से अलग बनाते हैं।

‘द टेलीग्राफ’ की स्टोरी को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं-

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पत्रकार दीपक पालीवाल ने अब इस चैनल के साथ शुरू किया नया सफर

लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय दीपक पालीवाल को प्रिंट, ऑनलाइन और टेलिविज़न न्यूज़ का अच्छा अनुभव है

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
Deepak Paliwal

हिंदी न्यूज चैनल ‘सूर्या समाचार’ को बाय बोलने के बाद टीवी पत्रकार दीपक पालीवाल ने अब न्यूज ब्रॉडकास्टर आईटीवी नेटवर्क (iTV Network) के साथ नई पारी शुरू की है। उन्होंने इस समूह के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ में बतौर एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर जॉइन किया है।  

पिछले दिनों जब वरिष्ठ टीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी के नेतृत्व में ‘सूर्या समाचार’ रिलॉन्च हुआ था, तब दीपक पालीवाल भी उनकी टीम में शामिल थे। चैनल की आउट्पुट टीम में उन्हें डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर की भूमिका दी गई थी। दीपक पालीवाल ने उस दौरान नेटवर्क18 में अपनी पारी को समाप्त कर ‘सूर्या समाचार’ में जिम्मेदारी संभाली थी। नेटवर्क18’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज़18 इंडिया’ में बतौर सीनियर प्रड्यूसर वह आठ साल से जुड़े थे। हालांकि कुछ समय बाद ही ‘सूर्या समाचार’ से पुण्य प्रसून की विदाई के साथ ही दीपक पालीवाल ने भी उस चैनल को अलविदा कह दिया था।  

मूल रूप से आगरा के रहने वाले दीपक कुमार पालीवाल 14 साल से ज़्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्हें प्रिंट, ऑनलाइन और टेलिविज़न न्यूज़ का अच्छा अनुभव है।

परदे के पीछे रहकर काम करने वाले दीपक पालीवाल ने जाने माने न्यूज़ एंकर किशोर अजवानी के प्राइम टाइम लोकप्रिय शो ‘सौ बात की एक बात’ को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा वे पुण्य प्रसून बाजपेयी, विनोद दुआ, सुमित अवस्थी और आशुतोष जैसे बड़े एंकर्स के प्राइम टाइम शो की प्रडक्शन टीम में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

दीपक ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में ‘नवभारतटाइमडॉटकॉम’ से की थी, लेकिन इस बीच तुरंत ही रेलवे में चयन होने पर इन्हें परिवार के दबाव में पुणे में रेलवे की नौकरी जॉइन करनी पड़ी। लेकिन पत्रकारिता में गहरी रुचि इन पर इस क़दर हावी थी कि इन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़कर फिर से ख़बरों की दुनिया में क़दम रख दिया। नोएडा में अमर उजाला अख़बार में काम करने के बाद इन्होंने ‘चैनल7’, ‘IBN7’, और सहारा समय नैशनल में काम किया और फिर न्यूज़18 इंडिया का हिस्सा बन गए।

नई पारी के लिए दीपक पालीवाल को समाचार4मीडिया की ओर से शुभकामनाएं...

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दर्शकों को कुछ इस अंदाज में क्रिकेट वर्ल्ड कप की ‘सैर’ कराएगा ABP News

क्रिकेट के इस महाकुंभ की कवरेज के लिए शुरू की नई पहल

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
ABP NEWS

भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट महज एक खेल नहीं, बल्कि एक धर्म की तरह है, क्रिकेट प्रेमियों के लिए क्रिकेट वर्ल्ड कप से बड़ी कोई चीज नहीं है। 30 मई से इंग्लैंड में शुरू हो रहे क्रिकेट के इस महाकुंभ को लेकर एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP NEWS NETWORK) किसी भी तरह की कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहता है। ऐसे में देश के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एबीपी न्यूज नेटवर्क नई पहल करने जा रहा है।बताया जाता है कि ‘#ViratCup’ के नाम से शुरू की जा रही अपनी तरह की इस नई पहल के तहत क्रिकेट वर्ल्ड कप के बारे में दर्शकों को ऐसी कवरेज देखने को मिलेगी, जो उन्होंने पहले नहीं देखी होगी। इसके लिए नेटवर्क की ओर से बतौर क्रिकेट एक्सपर्ट कपिल देव और वीरेंद्र सहवाग दर्शकों को एक नए अंदाज में क्रिकेट वर्ल्ड कप की हर बारीकी से रूबरू कराएंगे।

यह पहली बार होगा, जब पूर्व में भारतीय टीम के कप्तान रह चुके दिग्गजों की विश्व कप से जुड़ी विशेष यादों को खास रूप में प्रसारित किया जाएगा। वर्ल्ड कप के महत्व को देखते हुए एबीपी इंग्लैंड के ओल्ड ट्रेफर्ड मैनचेस्टर में एबीपी की ओर से कई स्पेशल और एक्सक्लूसिव शो शूट किए जाएंगे। यहीं पर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच खेला जाएगा। यही नहीं, कपिल देव लंदन के स्टेडियम में जाएंगे और ट्रॉफी के साथ तीन दशक पुराने विश्व कप की भव्यता को फिर से जीवंत करेंगे।

इस कैंपेन के बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ के सीईओ अविनाश पांडे ने कहा, ‘हमारे देश के लोगों के लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है। अब चुनावी सीजन भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, ऐसे में एबीपी समूह क्रिकेट सीजन पर फोकस करेगा और अपने दर्शकों को एक्सक्लूसिव और इनोवैटिव कंटेंट उपलब्ध कराएगा। इसके लिए हमारी पहल #ViratCup के द्वारा दिग्गज क्रिकेटर कपिल देव और वीरेंद्र सहवाग दर्शकों को इस महा आयोजन से जुड़ी बारीक से बारीक जानकारी देंगे, वर्ल्ड कप के दौरान यह पहल निश्चित रूप के दर्शकों को काफी पसंद आएगी। इस तरह की पहल पहले कभी नहीं हुई है। यह इस टूर्नामेंट की कवरेज को एक नई उंचाई तक ले जाएगी।’

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Network 18 में टॉप लेवल पर हुए कई बदलाव

अविनाश कौल को ग्रुप के सीईओ (ब्रॉडकास्ट) की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह नेटवर्क18 (Network 18) में सीनियर लेवल पर कई बदलाव किए गए हैं। इसके तहत जहां अविनाश कौल को प्रमोट कर ग्रुप के सीईओ (ब्रॉडकास्ट) की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, वहीं पुनीत सिंघवी को प्रेजिडेंट (डिजिटल और कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी) का पदभार सौंपा गया है। इसके अलावा प्रियंका कौल अब प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और स्पेशल इनिशिएटिव) की भूमिका में दिखाई देंगी। प्रियंका कौल को फोर्ब्स के सीईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

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न्यूज24 को दिया मोदी का ये बयान है आज बना चर्चा का बड़ा मुद्दा

चुनाव के दौरान चर्चा में रहने के लिए नेता अक्सर देते रहते हैं विवादित बयान

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
Pragya Modi

इन दिनों चुनावी दौर है और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पार्टियों के नेता कोई भी मौका नहीं चूकना चाहते हैं और चर्चा में रहने के लिए अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं। इस बार के चुनाव प्रचार के दौरान कई नेताओं ने इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया है कि चुनाव आयोग को उन पर प्रचार के लिए प्रतिबंध तक लगाना पड़ा है।

यह मामला थोड़ा अलग है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुस्सा हैं और उनका यह गुस्सा भोपाल लोकसभा सीट से अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर के एक बयान को लेकर है। प्रज्ञा ठाकुर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों और किस कदर गुस्सा हैं, इसका खुलासा हाल में न्यूज24 के साथ पीएम के एक इंटरव्यू के दौरान हुआ।

दरअसल, हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान एक चैनल के साथ बातचीत में प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। हालांकि विवाद होने पर उन्होंने अपने इस बयान पर माफी भी मांग ली थी, लेकिन इस तरह का बयान देने को लेकर पीएम इन दिनों प्रज्ञा ठाकुर से खासे नाराज हैं।

न्यूज24 के साथ बातचीत के दौरान प्रज्ञा के इस बयान का जिक्र होने पर पीएम ने कहा, ‘यह बहुत खराब है और हर प्रकार से घृणा के लायक है। सभ्य समाज के अंदर इस प्रकार की भाषा और इस प्रकार की सोच नहीं चलती है। इसलिए ऐसा करने वालों को सौ बार आगे सोचना पड़ेगा। हालांकि प्रज्ञा ठाकुर ने माफी मांग ली, ये अलग बात है, लेकिन मैं अपने मन से उन्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।’

न्यूज24 के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत का ये विडियो आप यहां देख सकते हैं।

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‘आजतक’ से जल्दबाजी में हुई यह गलती, उड़ा मजाक!

एग्जिट पोल के पूर्वानुमान को लेकर चैनल की ओर से किया गया था ट्वीट

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
AajTak

हिंदी की एक कहावत है, ‘जल्दी का काम शैतान का’, यानी जल्दबाजी में किया गया काम आपको मुश्किल में डाल सकता है। वैसे तो आजकल सबकुछ इतना फ़ास्ट हो गया है कि यदि कहावत पर गौर करने लगे तो बहुत कुछ पीछे छूट जायेगा। खासकर पत्रकारिता में ‘तेजी’ बहुत मायने रखती है, लेकिन फिर भी कभी न कभी हमें इस कहावत का असली अर्थ समझ आ ही जाता है।

‘आजतक’ के सोशल मीडिया अकाउंट को संभालने वाली टीम को भी यह अहसास हो गया होगा। दरअसल, जल्दबाजी में चैनल के ट्विटर हैंडल से एक ऐसा ट्वीट किया गया, जिसे देखने के बाद हंसी रोक पाना मुश्किल था। हालांकि, काम के अत्यधिक दबाव में ऐसी गलतियां हो जाती हैं और लोग भी इस बात को समझते हैं, लेकिन हंसी तो हंसी है, उस पर भला किसका बस चलता है।

 ‘आजतक’ 19 मई को सबसे बड़ा एग्जिट पोल दिखाने जा रहा है। 7 लाख से ज्यादा मतदाताओं से बातचीत के आधार पर यह एग्जिट पोल तैयार किया गया है। इसी सिलसिले में चैनल के ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया गया था, जिसमें एग्जिट पोल के प्रसारण समय की जानकारी के साथ-साथ सटीक पूर्वानुमान का भी जिक्र था। बस यहीं चैनल की टीम से गलती हो गई। इस ट्वीट के साथ जो ग्राफ़िक अटैच था, उस पर लिखा था ‘34 में से 36 सटीक पूर्वानुमान।’ अब भला ये कैसे मुमकिन है? 34 में से 36? संभवतः 36 में से 34 सटीक पूर्वानुमान लिखने की कोशिश होगी, लेकिन जल्दबाजी में उल्टा हो गया। जिसने भी यह ट्वीट देखा, वो कुछ देर तक अपनी हंसी नहीं रोक पाया। जब तक ‘आजतक’ की टीम को इसकी भनक लगती, ट्वीट स्क्रीनशॉट की शक्ल में वायरल हो चुका था।

चर्चा का विषय बने ‘आजतक’ के इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट आप यहां देख सकते हैं-

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जानें, क्यों न्यूज चैनल्स पर मेहरबान हो रहे हैं एडवरटाइजर्स

एफएमसीजी सेक्टर की ओर से न्यूज चैनल्स पर दिए जाने वाले विज्ञापनों में आई है काफी बढ़ोतरी

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
News Channel

न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में इस साल काफी उछाल देखने को मिला है, फिर चाहे वो हिंदी चैनल हों, अंग्रेजी हों अथवा रीजनल चैनल ही क्यों न हों। दरअसल, इस साल कई ऐसी बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में यह इजाफा हुआ है। इनमें हम पुलवामा में हुए आतंकी हमले, पाकिस्तान पर भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक और अब लोकसभा चुनाव का उदाहरण ले सकते हैं। न्यूज चैनल्स ने इन सभी घटनाओं को काफी बड़े स्तर पर कवर किया है और व्युअरशिप बढ़ने से एडवर्टाइजर्स ने भी इस जॉनर में काफी रुचि दिखाई है। यही कारण है कि न्यूज चैनल्स पर ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर्स गुड्स’ (FMCG) ब्रैंड्स के विज्ञापनों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यानी कह सकते हैं कि इसके पीछे सिर्फ चुनाव ही कारण नहीं है, बल्कि अन्य बड़ी घटनाओं के चलते भी ऐसा हुआ है।  

इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने इंडस्ट्री से जुड़े कुछ दिग्गजों से बात की, जिनका कहना है कि फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) के हटने के कारण भी एफएमसीजी ब्रैंड्स की ओर से न्यूज चैनल्स को दिए जाने वाले विज्ञापन में बढ़ोतरी हुई है।

इस ट्रेंड के बारे में ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के सीईओ विकास खनचंदानी का कहना है, ‘न्यूज चैनल्स को बड़ी संख्या में एफएमसीजी ब्रैंड्स के विज्ञापन सिर्फ चुनाव की वजह से नहीं मिल रहे हैं, बल्कि इसके पीछे तमाम कारण है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि हिंदी न्यूज खासकर ‘फ्री टू एयर’ (FTA) चैनल्स की पहुंच आज के दिनों में बहुत ज्यादा है। सबसे खास बात यह है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण ऑडियंस भी इन चैनल्स से जुड़ रहे हैं, क्योंकि बड़े एंटरटेनमेंट चैनल्स फ्रीडिश प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं हैं। हिंदी न्यूज चैनल्स पर एफएमसीजी ब्रैंड्स की मौजूदगी इसलिए भी बढ़ी है कि उनके पास ऑडियंस के लिए चुनिंदा प्लेटफॉर्म ही उपलब्ध हैं। फ्रीडिश पर चुनिंदा मूवीज, न्यूज और म्यूजिक चैनल ही उपलब्ध हैं, ऐसे में इन ब्रैंड्स की व्युअरशिप इस तरह के चैनल्स पर कम है और यही कारण है कि न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप ज्यादा होने से ये ब्रैंड्स इस तरफ का रुख कर रहे हैं।’

एक रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद अपने हिंदी एंटरटेनमेंट चैनल्स को डीडी फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। इनमें ‘कलर्स रिश्ते’ (Colors Rishtey) और ‘जी अनमोल’ (Zee Anmol) जैसे कई चैनल्स शामिल हैं।

इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) के सीईओ अविनाश पांडे ने जोर देकर कहा, ‘एफएमसीजी ब्रैंड्स के लिए न्यूज जॉनर हमेशा से काफी फायदे का सौदा रहा है। जैसे- पतंजलि, इमामी, डाबर आदि न्यूज जॉनर पर काफी खर्च करने वालों में शामिल हैं। यहां तक कि कोलगेट ने भी पिछली साल और उससे भी पिछली साल न्यूज जॉनर में विज्ञापन पर काफी खर्च किया था।‘

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि टियर-टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल्स के आगे बढ़ने में काफी मदद की है। अविनाश पांडे ने कहा, ‘यदि आप आजकल की टीवी की दुनिया को देखें तो डीडी फ्रीडिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूज देखने वालों की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। यदि हम डीडी फ्रीडिश के पैटर्न को देखें तो सबसे पहले इस पर न्यूज जॉनर ही आया था, ऐसे में उसी का विस्तार हुआ है। आखिर, कोई भी सर्विस प्रोवाइडर तभी अपना विस्तार करेगा, जब उसके पास कंटेंट होगा। इसके बाद टियर-टू (Tier-II) शहरों में इस प्लेटफॉर्म पर जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स शामिल हुए, जिन्हें अब हटा लिया गया है। यही कारण है कि इन जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की पहुंच काफी घट गई है।’  

अविनाश पांडे का कहना है, ‘इन दिनों लोकसभा चुनाव की कवरेज के कारण न्यूज जॉनर में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है, ऐसे में डीडी फ्रीडिश पर कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की कमी के कारण एफएमसीजी समेत प्रॉडक्ट निर्माताओं के लिए हिंदी न्यूज काफी बेहतरीन माध्यम बन गया है। यही नहीं, जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के मुकाबले न्यूज चैनल्स पर इन कंपनियों का खर्च भी कम आ रहा है। जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर किए जाने वाले खर्च के लगभग आधे में ही इन ब्रैंड्स की पहुंच 90 मिलियन से 100 मिलियन लोगों तक हो रही है। एडवर्टाइजर्स को यह समझना चाहिए कि यह काफी प्रभावी मॉडल है और निश्चित रूप में टियर टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल का शेयर बढ़ाने में काफी मदद की है।’

इस बारे में ‘इमामी लिमिटेड’ (Emami Ltd) के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मीडिया) बशाब सरकार (Bashab Sarkar) ने बताया कि कैसे उनकी कंपनी के लिए यह एक वरदान की तरह रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि फरवरी के मध्य में हुई डीडी फ्रीडिश की नीलामी में कई बड़े चैनल नेटवर्क्स ने हिस्सा नहीं लिया, जिसका प्रभाव मार्च से उनके फ्री टू एयर जनरल एंटरटेमेंट चैनल की रेटिंग पर पड़ा। ऐसे में फ्रीडिश पर बचे चैनलों को फायदा हुआ। यह इमामी जैसे उन एडवर्टाइजर्स के लिए एक तरह से वरदान साबित हुआ, जो ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस करते हैं। दरअसल चुनाव और अन्य बड़ी घटनाओं के कारण इन क्षेत्रों में हिंदी न्यूज चैनल्स देखने वालों की संख्या काफी बढ़ने से उनके एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी काफी इजाफा है।’

वहीं, ‘डाबर इंडिया लिमिटेड’ (Dabur India Ltd) के हेड (मीडिया) राजीब दुबे ने भी इस बात से सहमति जताई है कि डीडी फ्रीडिश से जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के हटने का असर दिखा है। उन्होंने कहा, हम न्यूज जॉनर में निवेश करना जारी रखेंगे, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इसे देखते हैं। इससे बड़ी संख्या में व्युअरशिप मिलती है।

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