‘द वायर’ के संपादकों ने मांगी माफी, जारी किया ये बयान

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद...

Last Modified:
Monday, 22 October, 2018
the wire

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद उन्होंने अपने चर्चित शो 'जन गण मन की बात' से फिलहाल खुद को अलग कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ, ‘द वायर’ के संपादकों ने ‘जन गण मन की बात’ के 318वें एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी भी मांगी है। 

दरअसल, दुआ ने अपने संस्थान 'द वायर' से  एक हफ्ते की मोहलत लेते हुए अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने को कहा है। हालांकि इसके बाद ‘द वायर’ ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति भी गठित कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम की अध्यक्षता वाली इस जांच समिति के सदस्यों में पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह और प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय शामिल हैं।

बता दें कि दुआ के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप निष्ठा जैन नाम की एक महिला फिल्म निर्माता ने लगाया है। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए निष्ठा जैन के आरोपों के बाद दुआ ने 'द वायर' पर प्रसारित अपने कार्यक्रम में सफाई पेश की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निष्ठा जैन के आरोपों के बाद 'द वायर' ने दुआ के 318वें शो को अपलोड होने से ठीक पहले रोक दिया। ‘जन गण मन की बात’  में इस शो का विषय था- ‘राफेल डील और तेलों की बढ़ती कीमतें’। हालांकि यह एपिसोड बुधवार को बेवसाइट पर प्रसारित हुआ, लेकिन कुछ काट-छांट के साथ। शो में से दुआ की वो बातें हटा दी गईं जिनमें उन्होंने #MeToo अभियान को चुनावी साल में लोगों का ध्यान भटकाने का हथकंडा बताया था, लेकिन उनकी कही बातें सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर देखी जा सकती हैं-

 

शो के पहले वाले विडियो में दुआ अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी बात करते हैं। वे कहते हैं, 'इसमें थोड़ा कीचड़ मुझ पर भी उछाला गया है… उसका भी मैं जिक्र करूंगा।' दुआ कहते हैं कि एक ऐसा कीचड़, सेक्सुअल हरासमेंट का तो नहीं है, परेशान करने का है।' दुआ ने कहा, '30 साल पहले किसी महिला को लगा कि मैंने कुछ ऐसा किया जिससे उन्हें परेशानी हुई। अब ये ऐसा कीचड़ है जो किसी पादरी के चोगे पर भी लग सकता है, जज के चोगे पर भी लग सकता है, वकील के चोगे पर भी लग सकता है, पुजारी पर भी लग सकता है, किसी शरीफ आदमी पर भी लग सकता है, डॉक्टर पर भी लग सकता है।'

दुआ ने कहा, 'कीचड़ एक दफे लग गया, तो जिस पर फेंका गया, वो क्या कर सकता है सिवाय इसके कि वो इनकार करे कि ऐसा नहीं हुआ है।' दुआ ने कहा- मैं, जो मुझ पर आरोप लगाए गए हैं, उनको सिरे से नकार रहा हूं, खारिज कर रहा हूं, कि वो बिल्कुल बे-बुनियाद है, कल्पना है किसी की, ऐसा कुछ नहीं हुआ। लेकिन, क्योंकि मैं आपके प्रति जवाबदेह हूं, 'द वायर' के प्रति जवाबदेह हूं, इसलिए आज से... इस कार्यक्रम को सस्पेंड कर रहा हूं एक हफ्ते के लिए। आज 16 तारीख है, 23 तारीख को मैं फिर हाजिर होऊंगा आपके सामने, या तो अपना आखिरी अलविदा कहने के लिए, या इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए ताकि ये जो हफ्ता है 'द वायर' ने अगर कोई जांच करनी हो, तफ्तीश करनी हो, मालूमात करनी हो, तो मेरे बिना वहां रहे कर सकते हैं। 23 तारीख को आपसे फिर मुलाकात होगी।’

वहीं ‘द वायर’ का कहना है कि जब तक कमेटी की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक, विनोद दुआ का कार्यक्रम ‘जन गण मन की बात’ प्रसारित नहीं किया जाएगा।

देखें विडियो-

हालांकि इसके बाद, कार्यक्रम में विनोद दुआ द्वारा सफाई पेश करने को लेकर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए, जैसे कि ‘द वायर’ ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने के लिए मंच क्यों दिया?, निष्ठा जैन के आरोप के लगाने के बाद ‘द वायर’ ने खुद विनोद दुआ का इस्तीफा क्यों नहीं लिया, या फिर उनके शो (जन गण मन की बात) को स्थगित क्यों नहीं किया गया? हालांकि इन सभी सवालों का जवाब ‘द वायर’ के संपादकों ने अपने पोर्टल पर दिया है और ‘जन गण मन की बात’ के पिछले एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए संपादकों ने माफी भी मांगी है।

पढ़िए द वायर द्वारा जारी किया गया बयान-

द वायर  ने #मीटू आंदोलन की रिपोर्टिंग पूरी शिद्दत के साथ की है और संपादकीय स्तर पर इसका पूरा समर्थन किया है, क्योंकि यौन उत्पीड़न हमारे समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।

इस आंदोलन के दरमियान हमारे एक कंसल्टिंग एडिटर विनोद दुआ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। वे सप्ताह में चार दिन मंगलवार से शुक्रवार तक प्रसारित होने वाले लोकप्रिय वीडियो शो ‘जन गण मन की बात’ की एंकरिंग करते हैं।

द वायर  को 2015 में स्थापित किया गया था। निष्ठा जैन के आरोप का संबंध जिस घटना से है, वह 1989 में हुई थी। जिस दिन, रविवार को उनका फेसबुक पोस्ट सार्वजनिक हुआ, उसी दिन द वायर  की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) जिस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने का दायित्व है, की अध्यक्ष ने आईसीसी के अन्य सदस्यों को आरोपों की गंभीर प्रकृति के बारे में बताया और कहा कि समिति को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

अगले ही दिन, यानी सोमवार, 15 अक्टूबर को आईसीसी की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि निष्ठा जैन से आईसीसी के समक्ष एक शिकायत करने की दरख्वास्त की जाए, ताकि इसकी प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू हो सके। निष्ठा ने कहा कि वह जल्दी ही ऐसा करेंगी।

17 अक्टूबर, 2018 को यानी निष्ठा जैन द्वारा आरोप लगाए जाने के तीन दिन के बाद, द वायर  ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति के गठन का फैसला किया।

हम आईसीसी के दायरे के बाहर नजर आने वाली एक घटना को, इसके अधिकार क्षेत्र के मामलों से दूर रखने के लिए इस पहल पर काम कर रहे थे। हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते थे कि यह कार्यवाही प्रश्नों से परे ईमानदार और पक्षपातरहित लोगों द्वारा की जाए।

इस दिशा में तेजी से काम करते हुए हमने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम, पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक और पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह से निष्ठा जैन के आरोपों की एक समयबद्ध जांच कराने के लिए बाहरी समिति का सदस्य बनने के लिए रजामंदी भी ले ली।

ये नाम निष्ठा जैन के साथ साझा किए गए, जिस पर उन्होंने एक और स्त्री सदस्य के तौर पर पांचवें सदस्य को इसमें शामिल करने का अनुरोध किया, जिसे हमने तत्काल स्वीकार कर लिया। प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय इस समिति की पांचवीं सदस्य हैं।

चूंकि इस समिति के सदस्य निष्ठा जैन के आरोपों की जांच करने में द वायर  की मदद करने के लिए अपनी अन्य प्रतिबद्धताओं को स्थगित कर रहे थे, और चूंकि निष्ठा ने भी अपने फेसबुक पोस्ट में इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई थी, इसलिए हमने उन्हें 17 अक्टूबर को इस समिति को लेकर अपनी लिखित रजामंदी देने और अपनी शिकायत 18 अक्टूबर तक लिखित रूप में देने के लिए कहा।

उन्होंने जवाब देते शिकायत दायर करने के लिए 26 अक्टूबर तक का समय देने के लिए कहा, जिसे हमने मान लिया, लेकिन हमने उनसे कम से कम औपचारिक तौर पर अपनी अनुमति देने के लिए अवश्य कहा ताकि हम समिति के सदस्यों के साथ इसकी पुष्टि कर सकें और इस तरह से प्रक्रिया शुरू हो सके। उन्होंने 18 अक्टूबर की शाम को ऐसा किया।

सभी अनुमतियां मिल जाने के बाद, द वायर  ने 20 अक्टूबर को समिति के गठन और इसके सदस्यों के बारे में घोषणा कर दी। निष्ठा जैन से शिकायत मिल जाने के बाद बाहरी समिति अपने कामकाज की समय-सारणी घोषित करेगी।

निष्ठा के आरोपों को द वायर  द्वारा जिस तरह से बरता गया, उसको लेकर हमारे पाठकों, शुभचिंतकों, द वायर  के पब्लिक एडिटरों और हमारे अपने सहकर्मियों द्वारा कई सवाल उठाए गए हैं।

हमारा यह यकीन है कि सबसे अहम सवाल कि आखिर द वायर अपने कंसल्टिंग एडिटर पर निष्ठा जैन द्वारा लगाए गए आरोपों पर किस तरह से कार्रवाई करना चाहती है, इसका जवाब ऊपर दे दिया गया है। लेकिन इसके अलावा पिछले कुछ दिनों में कुछ और सवाल व चिंताएं प्रकट किए गए हैं जिनका जवाब हमने नीचे देने की कोशिश की है।

प्रश्न 1- द वायर  ने विनोद दुआ को बरखास्त क्यों नहीं किया या निष्ठा जैन के आरोपों सामने आने के साथ ही उनके शो को स्थगित क्यों नहीं किया?

मीटू आंदोलन में लगाए गए आरोपों का संबंध विभिन्न तरह की स्थितियों से है, जो अलग-अलग जवाबों की मांग करते हैं। कार्यस्थल पर हाल-फिलहाल के यौन उत्पीड़न की शिकायतें तत्काल कार्य बंटवारे में बदलाव की मांग करती हैं, अगर शिकायतकर्ता और आरोपित उत्पीड़क एक साथ काम करते और अगर उत्पीड़क निरीक्षक (सुपरवाइजरी) पद पर है।

पहले की शिकायत की घटनाएं, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल पर घटित हुईं, वे अलग तरह के कदमों की मांग करती हैं। पुरानी घटनाओं की शिकायतें, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से पूरी तरह से असंबद्ध हैं, और भी भिन्न तरह की प्रतिक्रिया की मांग करती हैं।

वैसी शिकायतें, जो उत्पीड़न, यहां तक कि हिंसा से जुड़ी हैं, खासकर साथी द्वारा की गई हिंसा, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से जुड़ी हुई नहीं हैं, लेकिन कर्मचारी के चरित्र को कठघरे में खड़ा करती है, वह भिन्न तरह की कार्रवाई की मांग करती हैं।

दूसरे मीडिया घरानों की तरह हमें भी इस मामले में, यानी निष्ठा जैन द्वारा विनोद दुआ के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर, जो कि 1989 की हैं, अपने पास मौजूद विकल्पों के बारे में सोचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हमारे पास इस मामले में अनुसरण करने के लिए कोई नक्शा नहीं था।

अंतरिम उपायों (जैसे किसी व्यक्ति के निलंबन) के बारे फैसला लेते वक्त निर्देशक सिद्धांत कुछ चीजों पर गौर करने के लिए कहते हैं :

क्या चल रहे या संभावित नुकसान को रोकने के लिए व्यक्ति का निलंबन जरूरी है?

क्या उस व्यक्ति का बना रहना, उन लोगों को प्रभावित कर सकता है, जिनके साथ व्यक्ति निरीक्षक (सुपरवाइजर) की भूमिका में है?

क्या व्यक्ति का अपने पद पर बने रहना किसी वर्तमान जांच के नतीजों को किसी तरह प्रभावित कर सकता है?

क्या व्यक्ति का पद पर बने रहना किसी मौजूदा जांच को लेकर सार्वजनिक धारणा को पूर्वाग्रहग्रस्त कर सकता, क्योंकि प्रतिष्ठा का मसला भी यहां दांव पर होता है?

क्या उस निलंबन को स्थायी करने या उसे वापस लेने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप/नक्शा है- जिसकी गैरहाजिरी में यह अनिश्चितकालीन बना रहेगा, जिसे न वापस लिया जा सकेगा और न जिसे निलंबन में तब्दील किया जाएगा?

पहले और दूसरे सवाल के जवाब स्पष्ट तौर पर न में थे। दुआ निरीक्षक/सुपरवाइजर नहीं है। न ही द वायर  में रहते हुए उनके आचरण को लेकर कोई शिकायत आई है। चूंकि कोई जांच शुरू नहीं हुई थी, इसलिए सवाल नंबर 3 और 4 का कोई वजूद ही नहीं था।

अब चूंकि, हमने एक समिति का गठन कर दिया है और निष्ठा जैन ने एक समयबद्ध कार्यवाही को लेकर अपनी अनुमति दे दी है, पांचवें सवाल का जवाब है- हां। अब एक ठोस नक्शा हमारे सामने है। इसलिए विनोद दुआ के कार्यक्रम, जिसे उन्होंने स्वैच्छिक रूप से एक सप्ताह के लिए स्थगित किया था, का प्रसारण नहीं किया जाएगा और यह समिति द्वारा काम पूरा किए जाने तक स्थगित रहेगा।

प्रश्न 2- द वायर  ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने मंच क्यों दिया?

जिस समय विनोद दुआ ने ‘जन गण मन की बात’ के अपने एपिसोड की रिकॉर्डिंग की, उस समय तक उनके खिलाफ किसी जांच की शुरुआत नहीं हुई थी।

आईसीसी ने 15 अक्टूबर को निष्ठा जैन से संपर्क किया था और उनसे एक औपचारिक शिकायत देने का अनुरोध किया था, ताकि वह अपनी कार्यवाही शुरू कर सके। कोई शिकायत नहीं मिली थी। बाहरी समिति का गठन 17 अक्टूबर को हुआ और हमें निष्ठा से इस बारे में अनुमति मिली।

विनोद दुआ ने द वायर  को निष्ठा जैन के आरोपों- जिसकी रिपोर्टिंग खुद द वायर द्वारा की गई- पर विचार करने के लिए मौका/समय देने के लिए अपने कार्यक्रम के स्थगन की घोषणा की और इसके बाद यह भी कहा कि वे उनके आरोपों से इनकार करते हैं, जो कि एक आरोपित व्यक्ति के तौर पर उनका अधिकार था।

हमारी राय यह थी कि उनके द्वारा द वायर  पर उनके शो के मंच से या किसी दूसरी मीडिया मंच से आरोपों को नकारने का कोई असर उनके खिलाफ की जा रही जांच पर नहीं पड़ेगा।

संभवतः विनोद दुआ इस मामले में अलग से एक बयान जारी कर सकते थे, जो उनके शो से जुड़ा हुआ नहीं होता। लेकिन यह महसूस किया गया कि उन्हें अपने दर्शकों- जो द वायर  के बड़े पाठक समूह का हिस्सा हैं- को यह समझाना होगा कि आखिर वे अपने शो को स्थगित क्यों कर रहे हैं। 

प्रश्न 3- क्या द वायर  विनोद दुआ द्वारा मीटू आंदोलन को नकारने से इत्तेफाक रखता है?

नहीं ऐसा नहीं है। द वायर  का मीटू आंदोलन को समर्थन इसके द्वारा इसकी निरंतर रिपोर्टिंग और संपादकीय लेखों से साफ है। एशियन एज में एमजे अकबर के मातहत काम करने वाली एक पत्रकार के अनुभव का पहला विस्तृत विवरण द वायर द्वारा प्रकाशित किया गया।

प्रश्न 4- अगर द वायर  मीटू का समर्थन करता है, तो इसने विनोद दुआ को उन पर लगे आरोपों को नकारने की इजाज़त कैसे दी?

द वायर  एक मीडिया प्लेटफॉर्म है और मीटू आंदोलन का इसके द्वारा किया गया सारा कवरेज दो सिद्धांतों का अनुकरण करता है :

1- अनाम शिकायतों की कोई रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी और 2- आरोपित व्यक्तियों से संपर्क करके उन्हें अपने बचाव में चाहे जो कहना है, कहने देने, आरोपों को नकाराने, खारिज करने आदि का मौका देना।

अन्य आरोपितों की तरह ही विनोद दुआ को उनके खिलाफ लगे आरोपों को नकारने का अधिकार था। दूसरे आरोपितों के पास भी यह अधिकार है।

प्रश्न 6- विनोद दुआ ने अपने शो को स्थगित क्यों किया और यह क्यों कहा कि वे एक सप्ताह के लिए ऐसा कर रहे हैं?

दुआ को इस बात का इल्म था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप द वायर  को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें स्वैच्छिक तरीके से अपने शो को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया ताकि हमें अपनी इच्छा के मुताबिक उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का मौका/वक्त मिल सके।

उन्होंने कहा कि पहले की तरह अपने शो को रिकॉर्ड करेंगे, लेकिन साथ ही अपने दर्शकों को यह बताएंगे कि उनके खिलाफ एक आरोप लगा है और वे पूरी तरह से उन आरोपों को नकारते हैं, लेकिन वे एक सप्ताह के लिए अपने कार्यक्रम को स्थगित कर रहे हैं ताकि द वायर  को अपने मनमुताबिक इस मामले में कार्यवाही करने के लिए वक्त मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि वे एक सप्ताह के बाद इस बारे में घोषणा करेंगे कि वे अपने कार्यक्रम को जारी रख रहे हैं या नहीं। द वायर  ने उसके बाद एक एक जांच समिति का गठन कर दिया है और जैसा कि हमने बताया, विनोद दुआ का शो इस समिति के काम करने के दरमियान प्रसारित नहीं होगा।

प्रश्न 7- क्या द वायर  विनोद दुआ के इस बयान का समर्थन करता है कि इन आरोपों के रूप में उन पर कीचड़ उछाला गया है?

यौन उत्पीड़न के आरोपित व्यक्ति के तौर पर विनोद दुआ के पास उनके खिलाफ लगे आरोपों को झूठा बताने का अधिकार है और यह उन पर है कि यह कैसे करते हैं। दूसरे आरोपितों ने भी उन पर लगे आरोपों को खारिज किया है, कुछ लोगों ने इसे ज्यादा परिष्कृत तरीके और सूझबूझ के साथ किया है।

यह जरूर है कि मीटू आंदोलन की भी अपनी सीमाएं हैं और इन पर संजीदगी के साथ बहस की जा सकती है, की जानी चाहिए। इसके केंद्र में यौन हिंसा और उत्पीड़न के निजी अनुभवों को बयान करने का स्त्री का संघर्ष छिपा है। ऐसा दूसरे पीड़ितों को प्रोत्साहित करके और थोड़ी जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करके किया जाना है।

यह कहना अनुचित और गलत होगा कि सामान्य तौर पर यह आंदोलन कीचड़ उछालने वाला है। ऐसा नजरिया द वायर  के संपादकीय पक्ष के पूरी तरह से उलट है।

उनका कार्यक्रम बगैर किसी संपादकीय परीक्षा से गुजरे प्रसारित किया गया और यह हमारी तरफ से दूरदृष्टि की एक बड़ी चूक थी। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने मीटू आंदोलन को, भटकाव करार देने वाली, जो कुछ टिप्पणियां कीं उन्हें हमारे नोटिस में लाए जाने के तत्काल बाद संपादित करके हटा दिया गया।

प्रश्न 8- क्या आप विनोद दुआ के इस कथन से सहमत हैं कि उन पर लगाए गए आरोप यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं बल्कि सिर्फ परेशान करनेकी श्रेणी में आते हैं?

इस बहस में गए बिना कि उन पर लगे आरोप सही हैं या गलत- और द वायर  इस बात को दोहराता है कि वह न तो निष्ठा जैन के आरोपों और न विनोद दुआ के इनकार का समर्थन करता है- इस बात में कोई संदेह नहीं है ये आरोप आचरण को संबंधित हैं जो ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी के भीतर आते हैं।

यही कारण है कि निष्ठा के आरोपों पर द वायर की रिपोर्ट का शीर्षक था, ‘विनोद दुआ पर फिल्मकार ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप’।यह बात सबको स्पष्ट होनी चाहिए।

द वायर  के संपादक बिना किसी शर्त के ‘जन गण मन की बात’ के आखिरी एपिसोड में आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी मांगते हैं।

सिद्धार्थ वरदराजन

सिद्धार्थ भाटिया

एमके वेणु

20 अक्टूबर, 2018

 

 

 

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दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

सहारनपुर में दैनिक जागरण के पत्रकार और उनके भाई की घर में घुसकर गोली मारकर कर दी गई थी हत्या

Last Modified:
Wednesday, 21 August, 2019
Ashish

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान (24) और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान (20) की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले के तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जाता है कि आरोपितों की गिरफ्तारी मुजफ्फरनगर में तितावी थाना क्षेत्र से हुई है। पकड़े गए आरोपितों में मुख्य आरोपित महिपाल सैनी (45) और उसके दो बेटे सूरज (21) व सन्नी (19) शामिल हैं, जबकि एक नाबालिग पुत्र अभी फरार है। आरोपितों के कब्जे से एक लाइसेंसी बंदूक, एक राइफल और इनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दो तमंचे भी बरामद हुए हैं।

इससे पहले पुलिस ने इस मामले में फरार चारों आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और पुलिस की कई टीमें संभावित स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों की तलाश में जुटी हुई थीं। महिपाल की पत्नी विमलेश व बेटी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। विमलेश को जेल, जबकि बेटी को सोमवार को बाल संप्रेक्षण गृह, नोएडा भेज दिया गया था। हत्यारोपित के हवाले से एसएसपी ने दावा किया कि उधार के 20 हजार रुपए न चुका पाने के कारण हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

 पढ़ें: छोटी सी बात पर की गई पत्रकार और उसके भाई को गोली मारकर हत्या 

एसएसपी दिनेश कुमार पी के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि महिपाल वर्ष 2011 में पुराना सहारनपुर के माधोनगर में आकर बसा था। इसके बाद आशीष के पिता परिवार के साथ इस मोहल्ले में आए थे। 2015 में मकान में निर्माण कराने के लिए आशीष ने महिपाल से 50 हजार रुपए उधार लिए थे। इसमें से 30 हजार रुपए वह लौटा चुका था, जबकि शेष रकम 500 रुपए प्रति महीना लौटाने की बात कही थी। इसके बाद ही इनके बीच रंजिश शुरू हो गई। 20 हजार रुपए न लौटाने के कारण ढाई-तीन साल से दोनों परिवारों के बीच बोलचाल भी बंद थी।

पढ़ें: आशीष की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार के लिए की ये घोषणा

पुलिस के दावों के अनुसार, रविवार सुबह नाले में गोबर बहाने को लेकर हुए झगड़े के दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव भी हुआ। इसी के चलते महिपाल व उसके बेटों ने गोली मारकर आशीष व आशुतोष की हत्या कर दी।

पढ़ें: दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस ने उठाया कड़ा कदम

गौरतलब है कि मौहल्ला माधव नगर में रहने वाले आशीष व उनके भाई की पड़ोस में रहने वाले महिपाल से लड़ाई हो गई थी। इसके बाद आरोपितों ने घर में घुसकर आशीष व उनके भाई की हत्या कर दी थी। आशीष दैनिक जागरण से पहले हिन्दुस्तान और जनवाणी अखबार में भी काम कर चुके थे।

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इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए रचनाएं आमंत्रित

उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग्य, निबंध एवं बाल साहित्य विधाओं में प्रत्येक विधा के लिए इक्कीस सौ रुपए राशि के पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 20 August, 2019
Awards

22वें अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों के लिए रचनाकारों से साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं। साहित्य सदन, भोपाल द्वारा हर साल यह पुरस्‍कार दिया जाता है। इसके तहत उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग्य, निबंध एवं बाल साहित्य विधाओं में प्रत्येक विधा के लिए इक्कीस सौ रुपए राशि के साहित्य पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे।

इन पुरस्कारों के लिए पुस्तकों की दो प्रतियां, लेखक के दो फोटो एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपए प्रवेश शुल्क भेजना होगा। हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि एक जनवरी 2015 से लेकर 31 दिसंबर 2018 के मध्य होनी चाहिए। दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जाएगा। श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों को भी दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जाएंगे।

इच्छुक रचनाकार 30 दिसंबर 2019 तक श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन, 145 – ए, साईंनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल- 462042 (मप्र) के पते पर पुस्तकें भेज सकते हैं। किसी भी जानकारी के लिए फोन नंबर-09977782777/0755-2494777 अथवा jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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जर्नलिस्ट की मदद को पत्रकारों ने दिखाई एकजुटता, सरकार के सामने रखीं ये मांगें

सहारनपुर में कूड़ा डालने के विवाद में रविवार को दिनदहाड़े दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की कर दी गई थी हत्या

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Journalist Association

सहारनपुर में रविवार को दिनदहाड़े दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की हत्या के बाद प्रदेश भर के पत्रकारों ने इस घटना को लेकर रोष जताया है। इस घटना के विरोध में पत्रकार एसोसिएशन के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जिलाधिकारी, आगरा एनजी रवि कुमार से मिला और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

इस ज्ञापन में पत्रकारों ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता के साथ ही परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग उठाई। जिलाधिकारी से मिलने वाले पत्रकारों में अनुपम पांडेय, नितिन उपाध्याय, संजय सिंह, अनूप जिंदल, गौरव बंसल, निक्की, अजय यादव, गीतम सिंह, ओपी वरुण, बब्ले भारद्वाज, कपिल अग्रवाल, लक्ष्मीकांत पचौरी, विनीत दुबे, आरिफ, एसपी सिंह आदि मौजूद रहे।

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दैनिक जागरण के पत्रकार की हत्या के मामले में पुलिस ने उठाया कड़ा कदम

सहारनपुर में घर में घुसकर की गई थी पत्रकार और उनके भाई की हत्या, फरार चल रहे हैं चारों आरोपित

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Ashish Ashutosh

सहारनपुर में कूड़ा डालने के विवाद में दैनिक जागरण के पत्रकार आशीष कुमार धीमान और उनके भाई आशुतोष कुमार धीमान की हत्या के मामले में पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने इस मामले में चारों आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है।

पुलिस की कई टीमें संभावित स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों की तलाश में जुटी हुई हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद भी ली जा रही है। पुलिस ने इस मामले में किसी तरह का शराब माफिया कनेक्शन होने से इनकार किया है। वहीं सोमवार को आशीष और उनके भाई का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान तमाम पत्रकारों के अलावा सहारनपुर के एसएसपी दिनेश कुमार पी सहित पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे।

 पढ़ें: छोटी सी बात पर की गई पत्रकार और उसके भाई को गोली मारकर हत्या 

एसएसपी के अनुसार, इस मामले में आरोपित महिपाल, उसके बेटे गौरव, सूरज और सन्नी के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के इनाम की घोषणा कर दी गई है और आरोपितों के कुछ रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, महिपाल की पत्नी विमलेश व बेटी वर्षा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 पढ़ें: आशीष की मौत के बाद प्रशासन ने परिवार के लिए की ये घोषणा

गौरतलब है कि मौहल्ला माधव नगर में रहने वाले आशीष व उनके भाई की पड़ोस में रहने वाले महिपाल से लड़ाई हो गई थी। इसके बाद आरोपितों ने घर में घुसकर आशीष व उनके भाई की हत्या कर दी थी। आशीष दैनिक जागरण से पहले हिन्दुस्तान और जनवाणी अखबार में भी काम कर चुके थे।

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मीडिया संस्थान ने एम्पलॉइज से कहा-सोशल मीडिया पासवर्ड शेयर करें, तभी आएगी सैलरी

पिछले तीन महीने से संस्थान के कहने के बावजूद अधिकांश एम्पलॉइज इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नाराज प्रबंधन ने अब एम्पलॉइज को चेतावनी दी है

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Social Media

देश की न्यूज एजेंसियों में शुमार ‘हिन्दुस्थान समाचार’ सोशल मीडिया पर अपनी पैठ बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटी हुई है। ऐसे में अब संस्थान ने अपने एम्पलॉइज को भी एक नोटिस के जरिए संस्थान के सोशल मीडिया अकाउंट्स को फॉलो करने, लाइक करने और कमेंट करने को कहा है।

पिछले तीन महीने से संस्थान के कहने के बावजूद अधिकांश एम्पलॉइज इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नाराज प्रबंधन ने अब एम्पलॉइज को चेतावनी दी है। संस्थान की ओर से महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अशोक कुमार की ओर से एम्पलॉइज को जारी किए गए नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी पूर्णकालिक और अंशकालीन सहयोगी तीन दिन के अंदर यानी 21 अगस्त से पहले अपने फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम की डिटेल और पासवर्ड प्रबंधन को भेजें।

ये भी कहा गया है कि जब तक एम्पलॉइज अपने सोशल मीडिया अकाउंट का स्क्रीनशॉट भेज नहीं देते हैं, जुलाई और उसके आगे का वेतन या मानदेय नहीं दिया जा सकेगा। आप ये पूरा नोटिस नीचे पढ़ सकते हैं।

 

 

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वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष की किताब को मिली 'बॉलिवुड' में एंट्री

पिछले साल से ही यह कवायद चल रही थी, लेकिन अंतिम फैसला अब हो पाया है

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Sagarika Ghose

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष की किताब ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ अब फिल्म का रूप लेने जा रही है। हालांकि, पिछले साल से ही यह कवायद चल रही थी, लेकिन अंतिम फैसला अब हो पाया है। यह फिल्म बड़े पर्दे पर नहीं, बल्कि वेब सीरीज की शक्ल में लोगों तक पहुंचेगी।

उन्होंने इसके लिए 'लंच बॉक्स' जैसी फिल्म के निर्देशक रितिश बत्रा से हाथ मिला लिया है। फिल्म के निर्माता रॉनी स्क्रूवाला हैं। मशहूर एक्ट्रेस विद्या बालन फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाएंगी।

माना जा रहा है कि अगले साल तक यह फिल्म तैयार हो जाएगी। वैसे 2018 में भी यह खबर आई थी कि सागरिका घोष की इस किताब पर फिल्म बनाने के राइट्स विद्या के पति सिद्धार्थ रॉय कपूर ने खरीद लिए हैं और विद्या इसमें लीड रोल में नजर आएंगी।

सागरिका ने खुद भी ट्वीट करके कहा था कि उन्होंने सिद्धार्थ रॉय कपूर और विद्या बालन प्रोडक्शंस के साथ अपनी किताब के राइट्स को लेकर करार किया है। उनका इरादा इस किताब पर फिल्म बनाने का है। अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि सागरिका की किताब पर वेब सीरीज बनने जा रही है। सागरिका घोष की इस किताब के कवर पेज को आप यहां देख सकते हैं।

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तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को ‘सुप्रीम’ झटका

अपनी सहकर्मी से यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे हैं तरुण तेजपाल

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Tarun Tejpal

अपनी सहकर्मी से यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की याचिका को खारिज करते हुए गोवा की निचली अदालत में सुनवाई पर लगी रोक हटा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को छह महीने में ट्रॉयल पूरा करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि वर्ष 2017 में गोवा की निचली अदालत ने तेजपाल पर रेप और यौन उत्पीड़न सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किये थे, जिसे तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

गौरतलब है कि तेजपाल पर अपनी जूनियर सहकर्मी से यौन उत्पीड़न का आरोप है। मामला साल 2013 का है। तरुण तेजपाल पर आरोप है कि गोवा में 'थिंक फेस्ट' के दौरान होटल की लिफ्ट में उन्‍होंने अपने साथ काम करने वाली पत्रकार का यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद महिला कर्मचारी ने अपने सीनियर्स से इस घटना का जिक्र किया था और मीडिया में पीड़िता, तेजपाल और तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी के बीच बातचीत की ईमेल भी पब्लिश हुई थी।

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आजतक के युवा पत्रकार के साथ मांझे के चक्कर में हुआ हादसा

दीपक के साथ यह हादसा दिल्ली के मयूर विहार इलाके में हुआ। अस्पताल में कराया गया है भर्ती

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Deepak Kumar

हर साल 15 अगस्त और इसके कुछ दिनों बाद तक दिल्ली-एनसीआर में काफी पतंगबाजी देखने को मिलती है। पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का भी खूब इस्तेमाल होता है। इस चाइनीज मांझे की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसा ही एक हादसा हिंदी न्यूज चैनल आजतक के पत्रकार दीपक कुमार के साथ हुआ है।

जानकारी के मुताबिक बाइक चालते वक्त चाइनीज मांझा दीपक के गले में फंस गया और इस वजह से उनका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में गले पर चोट लगने से खून भी बहा। इसके अलावा पैर में भी चोट आई है। दीपक के साथ यह हादसा दिल्ली के मयूर विहार इलाके में हुआ। 

गौरतलब है कि दीपक आजतक के अलावा ‘दैनिक भास्कर’ और ‘अमर उजाला’ जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। बिहार के सीवान जिले के रहने वाले दीपक की पहचान बतौर युवा बिजनेस पत्रकार है। हाल ही में दीपक तब चर्चा में आए थे, जब उनके फेसबुक छोड़ने की खबर आई। बताया जा रहा है कि लोकसभा नतीजों के बाद से दीपक को लगातार गालियां और धमकी मिल रही थीं।

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महिला पत्रकार ने तिरंगे का अपमान करने वालों को यूं दिया मुंहतोड़ जवाब

पत्रकार पूनम जोशी के इस कदम की सोशल मीडिया पर हो रही है काफी सराहना, लोग कर रहे सैल्यूट

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Poonam Joshi

भारतीय पत्रकार पूनम जोशी की देशभक्ति की चर्चा इन दिनों देश-विदेश में हो रही है। आखिर हो भी क्यों न, जब उन्होंने काम ही ऐसा किया है। दरअसल, पूनम जोशी लंदन में तिरंगे का अपमान करने वाले खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों से न सिर्फ भिड़ गईं, बल्कि उनके हाथ से तिरंगा छीन भी लिया। पूनम जोशी के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। ट्विटर से लेकर फेसबुक तक लोग उनकी देशभक्ति और बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। पूनम लंदन में एबीपी न्यूज की संवाददाता है। 

बता दें कि 15 अगस्त को हिंदुस्तान समेत विदेशों में रह रहे भारतीयों ने तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में भी तिरंगा फहराया गया। इस दौरान भारतीय उच्चायोग के बाहर पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे लोग तिरंगे का अपमान करने की कोशिश करने लगे, तभी वहां मौजूद भारतीय पत्रकार पूनम जोशी प्रदर्शनकारियों से भिड़ गईं और उनसे तिरंगा छीन लिया।

इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

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प्रेस एसोसिएशन के चुनाव में इन पत्रकारों को मिली जीत, देखें पूरी लिस्ट

इस अवसर पर एसोसिएशन की पांच सदस्यीय एग्जिक्यूटिव कमेटी की घोषणा भी की गई।

Last Modified:
Sunday, 18 August, 2019
Press Association

प्रेस एसोसिएशन के चुनाव में जयशंकर गुप्ता को लगातार दूसरी बार प्रेजिडेंट चुना गया है। 17 अगस्त 2019 को हुए चुनाव में कुल 328 वोट पड़े, जिनमें से उन्हें 181 वोट हासिल हुए। इस पद के लिए खड़े अन्य उम्मीदवारों में श्रीकृष्णा को 99 और आलोक कुमार को 28 वोट मिले। इस दौरान कुछ वोट रद्द भी हो गये।

मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक टुटेजा और चुनाव अधिकारी रंजीत कुमार व ज्ञान पाठक की देखरेख में हुए इन चुनावों में आनंद मिश्रा को वाइस प्रेजिडेंट और सीके नायक के जनरल सेक्रेट्री चुना गया। आनंद मिश्रा को 206 वोट और सीके नायक को 161 वोट मिले। वहीं, कल्याण बारू (Kalyan Barooah) को जॉइंट सेक्रेट्री और संतोष ठाकुर को कोषाध्यक्ष पद के लिए चुना गया। उन्हें क्रमश: 154 और 142 वोट मिले।

इस अवसर पर एसोसिएशन की पांच सदस्यीय एग्जिक्यूटिव कमेटी की घोषणा भी की गई। इसमें अमलेंदु भूषण खान (155 वोट), अनिल दुबे (139 वोट), हुमा सिद्दीक (139 वोट), केपी मलिक (128 वोट) और शाहिद के. अब्बास (135 वोट) को शामिल किया गया।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों की लिस्ट आप यहां देख सकते हैं।

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