‘द वायर’ के संपादकों ने मांगी माफी, जारी किया ये बयान

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद...

Last Modified:
Monday, 22 October, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 

#MeToo कैंपेन के तहत मशहूर पत्रकार विनोद दुआ का नाम सामने आने के बाद उन्होंने अपने चर्चित शो 'जन गण मन की बात' से फिलहाल खुद को अलग कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ, ‘द वायर’ के संपादकों ने ‘जन गण मन की बात’ के 318वें एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी भी मांगी है। 

दरअसल, दुआ ने अपने संस्थान 'द वायर' से  एक हफ्ते की मोहलत लेते हुए अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने को कहा है। हालांकि इसके बाद ‘द वायर’ ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति भी गठित कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम की अध्यक्षता वाली इस जांच समिति के सदस्यों में पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह और प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय शामिल हैं।

बता दें कि दुआ के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप निष्ठा जैन नाम की एक महिला फिल्म निर्माता ने लगाया है। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए निष्ठा जैन के आरोपों के बाद दुआ ने 'द वायर' पर प्रसारित अपने कार्यक्रम में सफाई पेश की।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निष्ठा जैन के आरोपों के बाद 'द वायर' ने दुआ के 318वें शो को अपलोड होने से ठीक पहले रोक दिया। ‘जन गण मन की बात’  में इस शो का विषय था- ‘राफेल डील और तेलों की बढ़ती कीमतें’। हालांकि यह एपिसोड बुधवार को बेवसाइट पर प्रसारित हुआ, लेकिन कुछ काट-छांट के साथ। शो में से दुआ की वो बातें हटा दी गईं जिनमें उन्होंने #MeToo अभियान को चुनावी साल में लोगों का ध्यान भटकाने का हथकंडा बताया था, लेकिन उनकी कही बातें सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर देखी जा सकती हैं-

 

शो के पहले वाले विडियो में दुआ अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी बात करते हैं। वे कहते हैं, 'इसमें थोड़ा कीचड़ मुझ पर भी उछाला गया है… उसका भी मैं जिक्र करूंगा।' दुआ कहते हैं कि एक ऐसा कीचड़, सेक्सुअल हरासमेंट का तो नहीं है, परेशान करने का है।' दुआ ने कहा, '30 साल पहले किसी महिला को लगा कि मैंने कुछ ऐसा किया जिससे उन्हें परेशानी हुई। अब ये ऐसा कीचड़ है जो किसी पादरी के चोगे पर भी लग सकता है, जज के चोगे पर भी लग सकता है, वकील के चोगे पर भी लग सकता है, पुजारी पर भी लग सकता है, किसी शरीफ आदमी पर भी लग सकता है, डॉक्टर पर भी लग सकता है।'

दुआ ने कहा, 'कीचड़ एक दफे लग गया, तो जिस पर फेंका गया, वो क्या कर सकता है सिवाय इसके कि वो इनकार करे कि ऐसा नहीं हुआ है।' दुआ ने कहा- मैं, जो मुझ पर आरोप लगाए गए हैं, उनको सिरे से नकार रहा हूं, खारिज कर रहा हूं, कि वो बिल्कुल बे-बुनियाद है, कल्पना है किसी की, ऐसा कुछ नहीं हुआ। लेकिन, क्योंकि मैं आपके प्रति जवाबदेह हूं, 'द वायर' के प्रति जवाबदेह हूं, इसलिए आज से... इस कार्यक्रम को सस्पेंड कर रहा हूं एक हफ्ते के लिए। आज 16 तारीख है, 23 तारीख को मैं फिर हाजिर होऊंगा आपके सामने, या तो अपना आखिरी अलविदा कहने के लिए, या इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए ताकि ये जो हफ्ता है 'द वायर' ने अगर कोई जांच करनी हो, तफ्तीश करनी हो, मालूमात करनी हो, तो मेरे बिना वहां रहे कर सकते हैं। 23 तारीख को आपसे फिर मुलाकात होगी।’

वहीं ‘द वायर’ का कहना है कि जब तक कमेटी की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक, विनोद दुआ का कार्यक्रम ‘जन गण मन की बात’ प्रसारित नहीं किया जाएगा।

देखें विडियो-

हालांकि इसके बाद, कार्यक्रम में विनोद दुआ द्वारा सफाई पेश करने को लेकर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए, जैसे कि ‘द वायर’ ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने के लिए मंच क्यों दिया?, निष्ठा जैन के आरोप के लगाने के बाद ‘द वायर’ ने खुद विनोद दुआ का इस्तीफा क्यों नहीं लिया, या फिर उनके शो (जन गण मन की बात) को स्थगित क्यों नहीं किया गया? हालांकि इन सभी सवालों का जवाब ‘द वायर’ के संपादकों ने अपने पोर्टल पर दिया है और ‘जन गण मन की बात’ के पिछले एपिसोड में विनोद दुआ द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए संपादकों ने माफी भी मांगी है।

पढ़िए द वायर द्वारा जारी किया गया बयान-

द वायर  ने #मीटू आंदोलन की रिपोर्टिंग पूरी शिद्दत के साथ की है और संपादकीय स्तर पर इसका पूरा समर्थन किया है, क्योंकि यौन उत्पीड़न हमारे समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।

इस आंदोलन के दरमियान हमारे एक कंसल्टिंग एडिटर विनोद दुआ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। वे सप्ताह में चार दिन मंगलवार से शुक्रवार तक प्रसारित होने वाले लोकप्रिय वीडियो शो ‘जन गण मन की बात’ की एंकरिंग करते हैं।

द वायर  को 2015 में स्थापित किया गया था। निष्ठा जैन के आरोप का संबंध जिस घटना से है, वह 1989 में हुई थी। जिस दिन, रविवार को उनका फेसबुक पोस्ट सार्वजनिक हुआ, उसी दिन द वायर  की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) जिस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने का दायित्व है, की अध्यक्ष ने आईसीसी के अन्य सदस्यों को आरोपों की गंभीर प्रकृति के बारे में बताया और कहा कि समिति को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

अगले ही दिन, यानी सोमवार, 15 अक्टूबर को आईसीसी की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि निष्ठा जैन से आईसीसी के समक्ष एक शिकायत करने की दरख्वास्त की जाए, ताकि इसकी प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू हो सके। निष्ठा ने कहा कि वह जल्दी ही ऐसा करेंगी।

17 अक्टूबर, 2018 को यानी निष्ठा जैन द्वारा आरोप लगाए जाने के तीन दिन के बाद, द वायर  ने उनके आरोपों की जांच करने के लिए एक बाहरी समिति के गठन का फैसला किया।

हम आईसीसी के दायरे के बाहर नजर आने वाली एक घटना को, इसके अधिकार क्षेत्र के मामलों से दूर रखने के लिए इस पहल पर काम कर रहे थे। हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते थे कि यह कार्यवाही प्रश्नों से परे ईमानदार और पक्षपातरहित लोगों द्वारा की जाए।

इस दिशा में तेजी से काम करते हुए हमने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम, पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक और पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह से निष्ठा जैन के आरोपों की एक समयबद्ध जांच कराने के लिए बाहरी समिति का सदस्य बनने के लिए रजामंदी भी ले ली।

ये नाम निष्ठा जैन के साथ साझा किए गए, जिस पर उन्होंने एक और स्त्री सदस्य के तौर पर पांचवें सदस्य को इसमें शामिल करने का अनुरोध किया, जिसे हमने तत्काल स्वीकार कर लिया। प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय इस समिति की पांचवीं सदस्य हैं।

चूंकि इस समिति के सदस्य निष्ठा जैन के आरोपों की जांच करने में द वायर  की मदद करने के लिए अपनी अन्य प्रतिबद्धताओं को स्थगित कर रहे थे, और चूंकि निष्ठा ने भी अपने फेसबुक पोस्ट में इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई थी, इसलिए हमने उन्हें 17 अक्टूबर को इस समिति को लेकर अपनी लिखित रजामंदी देने और अपनी शिकायत 18 अक्टूबर तक लिखित रूप में देने के लिए कहा।

उन्होंने जवाब देते शिकायत दायर करने के लिए 26 अक्टूबर तक का समय देने के लिए कहा, जिसे हमने मान लिया, लेकिन हमने उनसे कम से कम औपचारिक तौर पर अपनी अनुमति देने के लिए अवश्य कहा ताकि हम समिति के सदस्यों के साथ इसकी पुष्टि कर सकें और इस तरह से प्रक्रिया शुरू हो सके। उन्होंने 18 अक्टूबर की शाम को ऐसा किया।

सभी अनुमतियां मिल जाने के बाद, द वायर  ने 20 अक्टूबर को समिति के गठन और इसके सदस्यों के बारे में घोषणा कर दी। निष्ठा जैन से शिकायत मिल जाने के बाद बाहरी समिति अपने कामकाज की समय-सारणी घोषित करेगी।

निष्ठा के आरोपों को द वायर  द्वारा जिस तरह से बरता गया, उसको लेकर हमारे पाठकों, शुभचिंतकों, द वायर  के पब्लिक एडिटरों और हमारे अपने सहकर्मियों द्वारा कई सवाल उठाए गए हैं।

हमारा यह यकीन है कि सबसे अहम सवाल कि आखिर द वायर अपने कंसल्टिंग एडिटर पर निष्ठा जैन द्वारा लगाए गए आरोपों पर किस तरह से कार्रवाई करना चाहती है, इसका जवाब ऊपर दे दिया गया है। लेकिन इसके अलावा पिछले कुछ दिनों में कुछ और सवाल व चिंताएं प्रकट किए गए हैं जिनका जवाब हमने नीचे देने की कोशिश की है।

प्रश्न 1- द वायर  ने विनोद दुआ को बरखास्त क्यों नहीं किया या निष्ठा जैन के आरोपों सामने आने के साथ ही उनके शो को स्थगित क्यों नहीं किया?

मीटू आंदोलन में लगाए गए आरोपों का संबंध विभिन्न तरह की स्थितियों से है, जो अलग-अलग जवाबों की मांग करते हैं। कार्यस्थल पर हाल-फिलहाल के यौन उत्पीड़न की शिकायतें तत्काल कार्य बंटवारे में बदलाव की मांग करती हैं, अगर शिकायतकर्ता और आरोपित उत्पीड़क एक साथ काम करते और अगर उत्पीड़क निरीक्षक (सुपरवाइजरी) पद पर है।

पहले की शिकायत की घटनाएं, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल पर घटित हुईं, वे अलग तरह के कदमों की मांग करती हैं। पुरानी घटनाओं की शिकायतें, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से पूरी तरह से असंबद्ध हैं, और भी भिन्न तरह की प्रतिक्रिया की मांग करती हैं।

वैसी शिकायतें, जो उत्पीड़न, यहां तक कि हिंसा से जुड़ी हैं, खासकर साथी द्वारा की गई हिंसा, जो मीडिया हाउस के कार्यस्थल से जुड़ी हुई नहीं हैं, लेकिन कर्मचारी के चरित्र को कठघरे में खड़ा करती है, वह भिन्न तरह की कार्रवाई की मांग करती हैं।

दूसरे मीडिया घरानों की तरह हमें भी इस मामले में, यानी निष्ठा जैन द्वारा विनोद दुआ के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर, जो कि 1989 की हैं, अपने पास मौजूद विकल्पों के बारे में सोचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हमारे पास इस मामले में अनुसरण करने के लिए कोई नक्शा नहीं था।

अंतरिम उपायों (जैसे किसी व्यक्ति के निलंबन) के बारे फैसला लेते वक्त निर्देशक सिद्धांत कुछ चीजों पर गौर करने के लिए कहते हैं :

क्या चल रहे या संभावित नुकसान को रोकने के लिए व्यक्ति का निलंबन जरूरी है?

क्या उस व्यक्ति का बना रहना, उन लोगों को प्रभावित कर सकता है, जिनके साथ व्यक्ति निरीक्षक (सुपरवाइजर) की भूमिका में है?

क्या व्यक्ति का अपने पद पर बने रहना किसी वर्तमान जांच के नतीजों को किसी तरह प्रभावित कर सकता है?

क्या व्यक्ति का पद पर बने रहना किसी मौजूदा जांच को लेकर सार्वजनिक धारणा को पूर्वाग्रहग्रस्त कर सकता, क्योंकि प्रतिष्ठा का मसला भी यहां दांव पर होता है?

क्या उस निलंबन को स्थायी करने या उसे वापस लेने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप/नक्शा है- जिसकी गैरहाजिरी में यह अनिश्चितकालीन बना रहेगा, जिसे न वापस लिया जा सकेगा और न जिसे निलंबन में तब्दील किया जाएगा?

पहले और दूसरे सवाल के जवाब स्पष्ट तौर पर न में थे। दुआ निरीक्षक/सुपरवाइजर नहीं है। न ही द वायर  में रहते हुए उनके आचरण को लेकर कोई शिकायत आई है। चूंकि कोई जांच शुरू नहीं हुई थी, इसलिए सवाल नंबर 3 और 4 का कोई वजूद ही नहीं था।

अब चूंकि, हमने एक समिति का गठन कर दिया है और निष्ठा जैन ने एक समयबद्ध कार्यवाही को लेकर अपनी अनुमति दे दी है, पांचवें सवाल का जवाब है- हां। अब एक ठोस नक्शा हमारे सामने है। इसलिए विनोद दुआ के कार्यक्रम, जिसे उन्होंने स्वैच्छिक रूप से एक सप्ताह के लिए स्थगित किया था, का प्रसारण नहीं किया जाएगा और यह समिति द्वारा काम पूरा किए जाने तक स्थगित रहेगा।

प्रश्न 2- द वायर  ने विनोद दुआ को अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज करने मंच क्यों दिया?

जिस समय विनोद दुआ ने ‘जन गण मन की बात’ के अपने एपिसोड की रिकॉर्डिंग की, उस समय तक उनके खिलाफ किसी जांच की शुरुआत नहीं हुई थी।

आईसीसी ने 15 अक्टूबर को निष्ठा जैन से संपर्क किया था और उनसे एक औपचारिक शिकायत देने का अनुरोध किया था, ताकि वह अपनी कार्यवाही शुरू कर सके। कोई शिकायत नहीं मिली थी। बाहरी समिति का गठन 17 अक्टूबर को हुआ और हमें निष्ठा से इस बारे में अनुमति मिली।

विनोद दुआ ने द वायर  को निष्ठा जैन के आरोपों- जिसकी रिपोर्टिंग खुद द वायर द्वारा की गई- पर विचार करने के लिए मौका/समय देने के लिए अपने कार्यक्रम के स्थगन की घोषणा की और इसके बाद यह भी कहा कि वे उनके आरोपों से इनकार करते हैं, जो कि एक आरोपित व्यक्ति के तौर पर उनका अधिकार था।

हमारी राय यह थी कि उनके द्वारा द वायर  पर उनके शो के मंच से या किसी दूसरी मीडिया मंच से आरोपों को नकारने का कोई असर उनके खिलाफ की जा रही जांच पर नहीं पड़ेगा।

संभवतः विनोद दुआ इस मामले में अलग से एक बयान जारी कर सकते थे, जो उनके शो से जुड़ा हुआ नहीं होता। लेकिन यह महसूस किया गया कि उन्हें अपने दर्शकों- जो द वायर  के बड़े पाठक समूह का हिस्सा हैं- को यह समझाना होगा कि आखिर वे अपने शो को स्थगित क्यों कर रहे हैं। 

प्रश्न 3- क्या द वायर  विनोद दुआ द्वारा मीटू आंदोलन को नकारने से इत्तेफाक रखता है?

नहीं ऐसा नहीं है। द वायर  का मीटू आंदोलन को समर्थन इसके द्वारा इसकी निरंतर रिपोर्टिंग और संपादकीय लेखों से साफ है। एशियन एज में एमजे अकबर के मातहत काम करने वाली एक पत्रकार के अनुभव का पहला विस्तृत विवरण द वायर द्वारा प्रकाशित किया गया।

प्रश्न 4- अगर द वायर  मीटू का समर्थन करता है, तो इसने विनोद दुआ को उन पर लगे आरोपों को नकारने की इजाज़त कैसे दी?

द वायर  एक मीडिया प्लेटफॉर्म है और मीटू आंदोलन का इसके द्वारा किया गया सारा कवरेज दो सिद्धांतों का अनुकरण करता है :

1- अनाम शिकायतों की कोई रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी और 2- आरोपित व्यक्तियों से संपर्क करके उन्हें अपने बचाव में चाहे जो कहना है, कहने देने, आरोपों को नकाराने, खारिज करने आदि का मौका देना।

अन्य आरोपितों की तरह ही विनोद दुआ को उनके खिलाफ लगे आरोपों को नकारने का अधिकार था। दूसरे आरोपितों के पास भी यह अधिकार है।

प्रश्न 6- विनोद दुआ ने अपने शो को स्थगित क्यों किया और यह क्यों कहा कि वे एक सप्ताह के लिए ऐसा कर रहे हैं?

दुआ को इस बात का इल्म था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप द वायर  को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें स्वैच्छिक तरीके से अपने शो को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया ताकि हमें अपनी इच्छा के मुताबिक उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का मौका/वक्त मिल सके।

उन्होंने कहा कि पहले की तरह अपने शो को रिकॉर्ड करेंगे, लेकिन साथ ही अपने दर्शकों को यह बताएंगे कि उनके खिलाफ एक आरोप लगा है और वे पूरी तरह से उन आरोपों को नकारते हैं, लेकिन वे एक सप्ताह के लिए अपने कार्यक्रम को स्थगित कर रहे हैं ताकि द वायर  को अपने मनमुताबिक इस मामले में कार्यवाही करने के लिए वक्त मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि वे एक सप्ताह के बाद इस बारे में घोषणा करेंगे कि वे अपने कार्यक्रम को जारी रख रहे हैं या नहीं। द वायर  ने उसके बाद एक एक जांच समिति का गठन कर दिया है और जैसा कि हमने बताया, विनोद दुआ का शो इस समिति के काम करने के दरमियान प्रसारित नहीं होगा।

प्रश्न 7- क्या द वायर  विनोद दुआ के इस बयान का समर्थन करता है कि इन आरोपों के रूप में उन पर कीचड़ उछाला गया है?

यौन उत्पीड़न के आरोपित व्यक्ति के तौर पर विनोद दुआ के पास उनके खिलाफ लगे आरोपों को झूठा बताने का अधिकार है और यह उन पर है कि यह कैसे करते हैं। दूसरे आरोपितों ने भी उन पर लगे आरोपों को खारिज किया है, कुछ लोगों ने इसे ज्यादा परिष्कृत तरीके और सूझबूझ के साथ किया है।

यह जरूर है कि मीटू आंदोलन की भी अपनी सीमाएं हैं और इन पर संजीदगी के साथ बहस की जा सकती है, की जानी चाहिए। इसके केंद्र में यौन हिंसा और उत्पीड़न के निजी अनुभवों को बयान करने का स्त्री का संघर्ष छिपा है। ऐसा दूसरे पीड़ितों को प्रोत्साहित करके और थोड़ी जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करके किया जाना है।

यह कहना अनुचित और गलत होगा कि सामान्य तौर पर यह आंदोलन कीचड़ उछालने वाला है। ऐसा नजरिया द वायर  के संपादकीय पक्ष के पूरी तरह से उलट है।

उनका कार्यक्रम बगैर किसी संपादकीय परीक्षा से गुजरे प्रसारित किया गया और यह हमारी तरफ से दूरदृष्टि की एक बड़ी चूक थी। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने मीटू आंदोलन को, भटकाव करार देने वाली, जो कुछ टिप्पणियां कीं उन्हें हमारे नोटिस में लाए जाने के तत्काल बाद संपादित करके हटा दिया गया।

प्रश्न 8- क्या आप विनोद दुआ के इस कथन से सहमत हैं कि उन पर लगाए गए आरोप यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं बल्कि सिर्फ परेशान करनेकी श्रेणी में आते हैं?

इस बहस में गए बिना कि उन पर लगे आरोप सही हैं या गलत- और द वायर  इस बात को दोहराता है कि वह न तो निष्ठा जैन के आरोपों और न विनोद दुआ के इनकार का समर्थन करता है- इस बात में कोई संदेह नहीं है ये आरोप आचरण को संबंधित हैं जो ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी के भीतर आते हैं।

यही कारण है कि निष्ठा के आरोपों पर द वायर की रिपोर्ट का शीर्षक था, ‘विनोद दुआ पर फिल्मकार ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप’।यह बात सबको स्पष्ट होनी चाहिए।

द वायर  के संपादक बिना किसी शर्त के ‘जन गण मन की बात’ के आखिरी एपिसोड में आरोपों को गलत तरह से पेश करने और उसका मखौल बनाने के लिए माफी मांगते हैं।

सिद्धार्थ वरदराजन

सिद्धार्थ भाटिया

एमके वेणु

20 अक्टूबर, 2018

 

 

 

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इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया, मोबाइल की दुनिया में क्यों जरूरी है सीधा संवाद

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों ने रखे अपने विचार

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Dr. Anurag Batra

आजकल स्मार्टफोन का जमाना है। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संवाद करने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब फेस टू फेस बातचीत करने के बजाय वॉट्सऐप और ईमेल पर ज्यादा संवाद करते हैं। ज्यादा से ज्यादा वे फोन कॉल कर लेते हैं। व्यवहार में इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल के साथ ही निजी जिंदगी में भी असर डाल रहा है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली के ‘द ललित’ (The Lalit) होटल में शुक्रवार को ‘WIYLD’ की ओर से 'Real Conversations in Digital Age' पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा की गई कि फेस टू फेस संवाद न करने का कितना विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

इस मौके पर कॉरपोरेट जगत के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार, मनोवैज्ञानिक, ब्रैंड्स और मार्केटिंग से जुड़े दिग्गजों ने इस बारे में अपने-अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि आज के समय में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, लेकिन किसी व्यक्ति से मिलकर बातचीत करने का अपना महत्व है। इससे उन व्यक्तियों के बीच मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनता है जो वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मुश्किल है।

इस मौके पर ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था कि लगातार संवाद की वजह से ही उन्हें मजबूत निजी और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने में मदद मिली है। उनका कहना था कि वह आगे बढ़कर लोगों से संवाद शुरू करने में किसी तरह की झिझक महसूस नहीं करते हैं, फिर चाहे वह मॉल हो, रेस्तरां हो अथवा फ्लाइट हो। युवाओं को सलाह देते हुए डॉ. अनुराग बत्रा का कहना था, ‘किसी भी तरह की झिझक छोड़ दें और अजनबियों के साथ बातचीत करने की अपनी स्टाइल डेवलप करें। आपको तब काफी आश्चर्य होगा और अच्छा लगेगा, जब सामने वाले से भी आपको काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी।’

जानी-मानी मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार का कहना था, ‘रिसर्च से पता चलता है कि दुनियाभर में अच्छी इनकम वाली 75 प्रतिशत नौकरियां सोशल कनेक्ट्स के द्वारा मिलती हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल कनेक्शन होना बहुत जरूरी है। इससे आप तमाम तरह की बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।’ डॉ. रोमा कुमार ने समाज में डिप्रेशन के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंन कहा कि लोगों में संवाद की कमी बढ़ने से अकेलेपन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘WIYLD’ के सीईओ और को-फाउंडर रितु कुमार ओझा का कहना था, ‘स्मार्ट फोन से विभिन्न उम्र के लोगों का व्यवहार बदल रहा है। सोशल मीडिया हमें बनावटी चेहरे दिखाता है, जिसमें व्यक्ति को अपने आसपास की सभी चीजें अच्छी लगती है। ऐसे में लोग वास्तविक दुनिया में संवाद करने से दूर होने लगते हैं, क्योंकि आपको नहीं पता होता है कि सोशल मीडिया के बाहर क्या हो रहा है और कैसे वहां पर आपको तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना है।’

संवाद के दौरान स्टोरीटैलिंग के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बीजेपी प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी का कहना था, ‘हमें स्टोरीटैलिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जब मैं छोटी थी तो मेरे पिताजी विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुझे ईमानदारी और देशसेवा की बात बताया करते थे और अपने बच्चों को भी मैं इसी तरीके से समझाती हूं।’

यह पूछे जाने पर कि लोग लगातार स्क्रीन पर कैसे दिखते हैं, उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंवर्शेसन के दौरान लगातार उस पर ध्यान देना लग्जरी होती जा रही है। सोशल मीडिया पर अगले अपडेट के लिए लगातार अपने फोन को चेक करते रहना हमारे कंवर्शेसन को हमारी आत्मा से काफी दूर ले जाता है।’ कार्यक्रम में मौजूद सभी पैनलिस्ट इस बात से सहमत थे कि सार्थक बातचीत की कमी का बिजनेस पर काफी प्रभाव पड़ रहा है और इस दिशा में बदलाव लाने की जरूरत है।

‘Growthsqapes’ के फाउंडर सात्यकी भट्टाचार्जी का कहना था कि लीडरशिप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक किसी भी लीडर का लगातार संवाद में शामिल होना होता है। यदि लीडर्स लोगों को प्रेरित करने में और सार्थक बातचीत करने में विफल रहते हैं तो वे अच्छे नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते हैं। वहीं, ‘Ishwa Consulting’ के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर अरविंद पंडित का कहना था कि किसी भी लीडर के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपनी टीम से ज्यादा से ज्यादा संवाद करता रहे और उनसे जुड़ा रहे, इससे बिजनेस में बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं।

संवाद के तरीके के महत्व के बारे में सीनियर बिजनेस लीडर शुभ्रांशु नियोगी (Subhrangshu Neogi) ने कहा, ‘लगातार संवाद होते रहना किसी भी संस्थान की आत्मा और उसका दिल है। हमेशा अपने स्टैकहोल्डर्स और कंज्यूमर्स से संवाद बनाए रखें। सकारात्मक संवाद के परिणाम भी अच्छे आते हैं। ऐसे में संवाद को हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।’ हार्वर्ड द्वारा लगातार 80 साल तक की गई स्टडी में पाया गया कि पैसे और प्रसिद्धि से ज्यादा रिश्ते लोगों को जीवनभर खुश रखते हैं। पैनल में शामिल विशेषज्ञों का सुझाव था कि सकारात्मक बातचीत से ही रिश्तों को और मजबूत व सार्थक बनाया जा सकता है।

‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिया’ (Microsoft India) के पूर्व डायरेक्टर (मार्केटिंग) पुनीत मोदगिल (Punit Modhgil) का कहना है, ‘टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी बदल दी है लेकिन इसका इस्तेमाल संवेदनशील रूप से करने की जरूरत है। मोबाइल ने हमारे संवाद करने के तरीके पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है और इसका रिश्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह ब्रैंड्स को भी प्रभावित करेगा।’ ‘Deloitte’ कंपनी द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भावनात्मक लगाव रिश्ते को और आगे बढ़ाता है, जबकि तर्कसंगत विचार इन्हें कम महत्वपूर्ण बनाते हैं। किसी भी ब्रैंड के लिए अपने ऑडियंस से भावनात्मक रूप से जुड़ना काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे लोगों का उस ब्रैंड में भरोसा बढ़ता है और ब्रैंड को आगे बढ़ने व लोकप्रिय बनने में मदद मिलती है।    

इस मौके पर कॉलेज के एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए ‘सिटी बुक लीडर्स’ (City Book Leaders) के चीफ क्यूरेटर और फाउंडर मोहित गुप्ता ने कहा, ‘मनुष्यों के लिए किताबें हमेशा से सार्थक स्टोरीज और संवाद का एक माध्यम रही हैं। अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें और उन लोगों को सुनें जो किताबें पढ़ते हैं।

हम लोगों के साथ जो बातचीत करते हैं, उसकी क्वालिटी का हमारे एनर्जी लेवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ‘परिवर्तन प्रबंधन और व्यापार स्थिरता’ (change management and business sustainability) के बारे में आईआईएम लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है, ‘जब आप क्लास में पढ़ाने के दौरान छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हैं तो पूरे दिन पॉजीटिव एनर्जी से भरे रहते हैं। हम ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम में इस चीज को काफी मिस करते हैं।’ विद्यार्थियों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के बारे में डॉ. सुशील कुमार ने कहा, ‘वर्तमान में विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने के बजाय अच्छे ग्रेड लाने पर ज्यादा फोकस करते हैं।’

अमेरिका में पांच हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में पाया गया है कि 1985 के बाद से करीबी दोस्त न होने के मामले में अमेरिकियों की संख्या तीन गुना बढ़ चुकी है। जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से लगभग एक चौथाई ने किसी पर भी अपना भरोसा न होने की बात कही।

 

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टीवी पत्रकार मानक गुप्ता ने सीएम को दी ये नसीहत

बिजली कटौती के खिलाफ विडियो पोस्ट करने को लेकर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई का ट्वीट कर जताया विरोध

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Manak Gupta

‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर और सीनियर एंकर मानक गुप्ता सोशल मीडिया पर चर्चा का सबब बने हुए हैं। इस चर्चा का कारण उनका वह ट्वीट है, जिसमें उन्होंने बिजली कटौती के बारे में सोशल मीडिया पर एक विडियो पोस्ट करने वाले डोंगरगांव निवासी मांगेलाल अग्रवाल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उस पर राजद्रोह की कार्रवाई किए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी आलोचना की। अपने इस ट्वीट में मानक गुप्ता का कहना था कि चिलचिलाती गर्मी में सरकार बिजली काट रही है और आम आदमी कराह भी नहीं सकता। अपने इस ट्वीट में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांगीलाल को तुरंत रिहा करने की मांग भी उठाई थी।

हालांकि, राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को इस मुद्दे पर मानक गुप्ता का इस तरह ट्वीट करना रास नहीं आया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कहना था कि न्यूज24 चैनल को स्पष्ट करना चाहिए कि यह मानक गुप्ता का विचार है अथवा चैनल का। छत्तीसगढ़ कांग्रेस का यह भी कहना था कि मानक गुप्ता द्वारा फैलाए जा रहे इस झूठ पर चैनल का क्या रुख है।

बात यहीं नहीं थमी, मानक गुप्ता ने छत्तीसगढ़ के इस ट्वीट का जवाब एक और ट्वीट कर दिया। इसमें उन्होंने लिखा, कुछ महीनों में ही जनता का विश्वास क्यों खो दिया...इस पर मंथन करने के बजाय बिजली कटौती से नाराज आम आदमी पर देशद्रोह लगाया...और अब पार्टी के आधिकारिक हैंडल से ट्रोल कर रहे हैं। ऊपर वाला सदबुद्धि दे।

मामला तूल पकड़ते देख मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांगीलाल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज देशद्रोह की धारा हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने की धारा के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन मानक गुप्ता ने इसके बाद अपने ट्विटर हैंडल पर एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने सीएम भूपेश बघेल से ये भी कहा है कि पार्टी के हैंडल से मीडिया को ट्रोल करने के बजाय बड़ा दिल दिखाएं और केस रद्द करवाएं। यही नहीं, इसके तुरंत बाद किए और ट्वीट में मानक गुप्ता ने देशद्रोह की धारा का दुरुपयोग करने वाले बिजलीकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।   

गौरतलब है कि राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मुसरा में रहने वाले 53 वर्षीय मांगीलाल अग्रवाल ने एक विडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। मांगीलाल का कहना था, 'एक इन्वर्टर कंपनी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की सेटिंग हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार को पैसा दिया गया है। करार के मुताबिक घंटे-दो घंटे में 10 से 15 मिनट के लिए बिजली कटौती होती रहेगी तो इन्वर्टर की बिक्री बढ़ेगी।' बाद में बिजली कंपनी के विधिक सलाहकार एनकेपी सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मांगीलाल के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था।

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जानें, क्यों चर्चा में है दीपक चौरसिया की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

किर्गिस्तान के विश्केक में बंद दरवाजों के पीछे की खबर भी निकालकर ले आए दीपक चौरसिया

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Deepak Chaurasia

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा को कवर करने के लिए यूं तो पत्रकारों की पूरी टीम उनके साथ गई थी, लेकिन वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया यहां भी बाजी मारने में सफल रहे। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मोदी के किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँचने के बाद उनसे और सम्मेलन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर से दर्शकों को रूबरू कराया।

बतौर ‘न्यूज नेशन’ रिपोर्टर के रूप में चौरसिया ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस सम्मेलन में पीएम मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की नजरें जरूर मिलेंगी, लेकिन दिल नहीं और हुआ भी ऐसा ही। इतना ही नहीं, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति ने सभी मेहमानों के सम्मान में डिनर दिया था, जिसमें पत्रकारों का प्रवेश वर्जित था, लेकिन चौरसिया बंद दरवाजों के पीछे की खबर भी निकाल लाये। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के मसले पर चीन के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से क्या कहा। इस तरह के अहम मौकों पर अनुभव काफी काम आता है और दीपक चौरसिया के पास इसकी कोई कमी नहीं। वह समय-समय पर खुद को साबित करते रहे हैं।

सम्मलेन में जब सभी राष्ट्राध्यक्ष एक-दूसरे से मुलाकात कर रहे थे, बाहर यह चर्चा चल रही थी कि क्या मोदी ने इमरान से बात की? क्या दोनों नेताओं के बीच संवाद हुआ? चौरसिया ने इस चर्चा पर विराम लगाते हुए सबसे पहले ‘न्यूज नेशन’ के दर्शकों को बता दिया कि दोनों नेताओं ने बस हाथ मिलाया। चौरसिया जानते थे कि पर्दे के पीछे क्या हुआ, इसकी जानकारी वही शख्स दे सकता है जो खुद वहां मौजूद हो, इसलिए उन्होंने मौका मिलते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से सच जान लिया।

चौरसिया ने कुरैशी को उस वक़्त सवालों के जवाब देने के लिए मना लिया, जब वह होटल गोल्डन ड्रैगन से निकलकर अपनी कार में बैठ रहे थे। इसके अलावा भी दीपक चौरसिया ने सम्मेलन से जुड़ी हर खबर देशवासियों तक पहुंचाई। चौरसिया की खासियत यही है कि वो वहां से भी खबरें खोज लाते हैं, जहाँ संभावना नजर नहीं आती और इसके बाद उनके विश्लेषण से ऐसा पैकेज तैयार करते हैं, जो अपने आप में परिपूर्ण होता है। पीएम मोदी के बिश्केक पहुँचते ही चौरसिया ने सम्मलेन में भारत की भूमिका, पाकिस्तान के हाल और उसके प्रभाव के बारे में वह सबकुछ बता दिया, जिसके बारे में देशवासियों को जानना जरूरी है। कुल मिलाकर कहा जाए तो दीपक चौरसिया ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उन्हें ऐसे ही खबरों का बादशाह नहीं कहा जाता।

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पत्रकार पर लगा ये आरोप, पुलिस ने आधी रात को सोते समय घर से उठाया

स्थानीय अदालत ने बाद में पत्रकार को जमानत पर किया रिहा

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Journalist

देश में पत्रकारों के उत्पीड़न की शिकायतों में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले दिनों ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा यूपी के शामली में रिपोर्टिंग के दौरान अमित शर्मा नामक पत्रकार की जीआरपी कर्मियों ने लात-घूंसों से पिटाई की थी। अब इस लिस्ट में छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है।

नया मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले का है, जहां बिजली बंद को लेकर गलत समाचार छापने के आरोप में पुलिस ने एक स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में अदालत ने दिलीप शर्मा को जमानत पर रिहा कर दिया। बताया जाता है कि वेबमोर्चाडाटकाम के नाम पर वेब पोर्टल चलाने वाले पत्रकार दिलीप शर्मा ने पिछले दिनों अपने वेब पोर्टल पर खबर प्रकाशित की थी कि 48 घंटों के दौरान जिले के 50 गावों में ब्लैकआउट की स्थिति है।

इस खबर को गलत और भ्रामक बताते हुए बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके साहू ने दिलीप शर्मा के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी थी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने दिलीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बाद में दिलीप शर्मा को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया। वहीं, जमानत पर रिहा होने के बाद दिलीप शर्मा का कहना था कि उन्होंने जो खबर चलाई, वह सही थी। शर्मा का यह भी कहना था कि सच्चाई सामने लाने के कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। दिलीप शर्मा ने आरोप लगाया कि गुरुवार को आधी रात को पुलिस ने उन्हें अपराधी की तरह घर से उठाया और रात भर थाने में रखा। इस दौरान कारण भी नहीं बताया गया।

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दैनिक भास्कर ग्रुप को बाय बोल पत्रकार सुशील तिवारी ने शुरू की नई पारी

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सुशील तिवारी को मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Sushi tiwari

पत्रकार सुशील तिवारी ने दैनिक भास्कर ग्रुप को बाय बोल दिया है। वह भोपाल में ग्रुप की डिजिटल विंग में न्यूज एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुशील तिवारी ने अब अपना नया सफर ‘एशियानेट’ (asiannet) हिंदी डिजिटल में बतौर एडिटर शुरू किया है। बताया जाता है कि दक्षिण भारत का यह चैनल जल्द ही हिंदी में अपनी वेबसाइट शुरू करने जा रहा है। इसी के लिए सुशील तिवारी की नियुक्ति की गई है।

बता दें कि दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ सुशील तिवारी लंबे समय से काम कर रहे थे। हिंदी पत्रकारिता में सुशील तिवारी के उल्लेखनीय प्रदर्शन की बदौलत उन्हें तमाम अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश में जौनपुर के रहने वाले सुशील तिवारी ने भोपाल की बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी (BU) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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NDTV को झटका, डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर लगा ये बैन

वित्तीय अनियमितताओं और टैक्स में हेराफेरी के आरोपों का सामना कर रहे हैं दोनों

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Prannoy Roy

‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड’ (SEBI) ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के प्रमोटर्स डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर मैनेजमेंट में कोई भी पद लेने पर अगले दो साल तक के लिए रोक लगा दी है। जांच एजेंसी दोनों के खिलाफ टैक्स में हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों की जांच कर रही है। इससे पहले सेबी ने इससे पहले दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। गौरतलब है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को लेकर दोनों कई एजेंसियों के निशाने पर चल रहे हैं। पूर्व में सीबीआई ने इस मामले में कई स्थानों पर छापे मारे थे। छापे के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा भी किया था।

इसके साथ ही सेबी ने दोनों पर दो साल के लिए प्रतिभूति मार्केट (securities market) से जुड़े रहने पर भी रोक लगा दी है। इस अवधि के दौरान दोनों किसी भी तरह की प्रतिभूतियों (securities) की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकते हैं और न ही प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिभूति मार्केट से जुड़े रह सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो डॉ. प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय का मानना है कि सेबी का यह आदेश झूठे और अत्यधिक असमान आकलन पर आधारित है। वे इस मामले में सलाह लेने के बाद कानूनी कार्यवाही करेंगे।

सेबी की ओर से इस बारे में जारी किए गए आदेश की कॉपी आप यहां देख सकते हैं-

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इंडिया न्यूज के पत्रकार के भाई की दिनदहाड़े हत्या, सामने आई ये वजह

पुलिस ने आरोपी के परिजनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Jhamman Chaudhary

कन्हैया शर्मा, पत्रकार।।

'इंडिया न्यूज' के पत्रकार रवि चौधरी के भाई झम्मन चौधरी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया है। यह घटना मथुरा में गोवर्धन के आन्योर इलाके की है। बताया जाता है कि प्रॉपर्टी के विवाद में यह हत्या की गई है और इसे झम्मन चौधरी के साथ काम करने वाले दुर्गपाल सिंह ने अंजाम दिया है। हत्याकांड को अंजाम देने के बाद दुर्गपाल सिंह फरार होने में कामयाब रहा। हत्याकांड के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी के कुछ परिजनो को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।

बताया जाता है कि पत्रकार रवि चौधरी के भाई  झम्मन चौधरी (40) शुक्रवार को आन्योर इलाके में अपनी जमीन पर निर्माण करा रहे थे। इसी बीच वहां पर दुर्गपाल सिंह आया और झम्मन चौधरी को गोली मारकर मौके से फरार हो गया। खून से लथपथ झम्मन चौधरी को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर भेज दिया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि झम्मन चौधरी और दुर्गपाल सिंह का प्रॉपर्टी के लेनदेन को लेकर विवाद था। उसी के चलते दोनों में अनबन थी और इसी वजह से दुर्गपाल ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है।

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मैच जीतने के बाद खिलाड़ी ने महिला रिपोर्टर के साथ कर दी ऐसी हरकत, विडियो वायरल

सोशल मीडिया पर कई लाख बार देखा जा चुका है इस घटना से जुड़ा विडियो

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Reporter

फुटबॉल मैच जीतने के बाद विजेता टीम के खिलाड़ी द्वारा महिला रिपोर्टर के संग की गई एक हरकत आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटना का विडियो वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को कई लाख बार देखा जा चुका है।

दरअसल, इन दिनों यूरो कप 2020 के लिए क्वालीफायर मैच चल रहे हैं। इसी कड़ी में सात जून को यूक्रेन और सर्बिया के बीच मैच खेला गया था। इस मैच को 5-0 से यूक्रेन ने जीत लिया। इस बीच यूक्रेन टीम के 22 वर्षीय खिलाड़ी ओलेग्जेंडर जिनचेनको ने मीडिया से बातचीत के दौरान पत्रकार वलाडा सेडान के गाल पर किस कर दिया।

बता दें कि इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। जिनचेनको की तरह ही बुल्गारिया के हैवीवेट बॉक्सर क्रुबत पुलेव ने कुछ समय पूर्व फाइट की कवरेज के लिए पहुंची महिला रिपोर्टर जैनिफर रावलो को किस कर दिया था। रिपोर्टर ने इस मामले की शिकायत कर दी थी, जिसके बाद क्रुबत को सस्पेंड कर दिया गया था।

जिनचेनको द्वारा महिला रिपोर्टर के गाल पर की गई किस का विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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बीजेपी MLA के कोप का शिकार हुआ पत्रकार, विडियो वायरल

पत्रकार ने दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में की मामले की शिकायत

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
Rajeev Tiwari

पत्रकारों के दिन लगता है इन दिनों खराब चल रहे हैं। पिछले दिनों स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी और उत्तर प्रदेश के शामली में पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकार अमित शर्मा की पिटाई का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और पत्रकार के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। इस बार आरोप लगा है उत्तराखंड में खानपुर से बीजेपी विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन पर। दरअसल, चैंपियन के दो विडियो वायरल हुए हैं, जिनमें से एक विडियो में वह ‘न्यूज18’ के पत्रकार राजीव तिवारी से अभद्रता करते हुए दिख रहे हैं।

आरोप है कि चैनल में दिखाई गई एक खबर से नाराज प्रणव चैंपियन ने राजीव तिवारी को जान से मारने की धमकी भी दी। यही नहीं, पिस्टल दिखाते हुए थप्पड़ भी मारा। बताया जाता है कि यह पूरा वाकया नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन का है। राजीव तिवारी ने दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में शिकायत दर्ज करा दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

राजीव तिवारी का कहना है कि वह न्यूज 18 की तरफ से उत्तराखंड की रिपोर्टिंग करते हैं। गुरुवार की सुबह चैंपियन ने उन्हें मिलने के लिए दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन के कमरा नंबर-204 में बुलाया था। आरोप है कि जब राजीव वहां पहुंचे तो चैंपियन ने अपनी पिस्तौल मंगाई और फिल्मी स्टाइल में टेबल पर रख दी। इसके बाद चैंपियन ने उन्हें धमकी दी कि अगर मेरे खिलाफ खबर चलाओगे तो गोली मार दूंगा।

आरोप है कि कुछ दिन पहले उत्तराखंड सदन में हरिद्वार नंबर के रजिस्ट्रेशन वाली एक गाड़ी पार्क की गई थी। इस गाड़ी का इस्तेमाल चैंपियन अपने काफिले में करते हैं। इस गाड़ी पर अवैध रूप से उत्तराखंड पुलिस लिखवाया हुआ है‌, जबकि यह निजी वाहन है। राजीव का कहना है कि यह खबर चलाने को लेकर चैंपियन उनसे नाराज थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकार को थप्पड़ मारने के आरोपों को चैंपियन ने गलत बताया है। उनका कहना है कि टीवी पत्रकार गुंडई दिखाकर अवैध वसूली करने आए थे। एक पत्रकार ने साजिश के तहत कैमरा ऑन कर उन्हें उकसाने के लिए गालियां दीं। उन्होंने कहा कि वीडियो में जो हाथ उठाने वाली बात दिखाई जा रही है, वह गलत है। वे पत्रकार को चुप कराने के लिए कुर्सी से भय दिखाने के लिए उठे थे और उसे बाहर निकलने का इशारा किया। टीवी पर थप्पड़ मारने की खबर देखने के बाद उन्होंने बहरोड कोतवाली पुलिस को पत्रकार के खिलाफ तहरीर दी है। चैंपियन का कहना है कि उनकी सामाजिक और राजनैतिक प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ऐसा किया गया है।

इस पूरी घटना का विडियो आप यहां देख सकते हैं-  

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पत्रकार की पिटाई मामले में प्रेस काउंसिल ने उठाया ये कदम

उत्तर प्रदेश के शामली में पत्रकार की पिटाई का विडियो हुआ था वायरल

Last Modified:
Friday, 14 June, 2019
PCI

उत्तर प्रदेश के शामली में रेलवे पुलिसकर्मियों द्वारा कुछ दिन पूर्व पत्रकार की बेरहमी से पिटाई किए जाने के मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) हरकत में आ गई है। इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के लिए प्रेस काउंसिल की ओर से दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति में जय शंकर और उत्तम चंद को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

गौरतलब है कि मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरने की घटना के बाद कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकार अमित शर्मा की रेलवे पुलिसकर्मियों ने काफी पिटाई की थी और उन्हें हवालात में बंद कर दिया था। अमित शर्मा ने जीआरपी कर्मियों पर उनके मुंह पर टॉयलेट करने का आरोप भी लगाया था। पत्रकार की बेरहमी से पिटाई का विडियो वायरल हो गया था और कई मीडिया समूहों ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया था। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने जीआरपी एसएचओ समेत एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया था।

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