न्यूज एंकर रोमाना ईसार पर भड़के शोएब अख्तर, विडियो वायरल

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर रविवार को टीवी चैनल पर चल रही बहस...

Last Modified:
Thursday, 27 September, 2018
ROMANA

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर रविवार को टीवी चैनल पर चल रही बहस के दौरान तब अपना आपा खो बैठे और भारतीय महिला एंकर भड़क गए, जब उनसे पाकिस्तान टीम की हालिया प्रदर्शन पर एक सवाल पूछ लिया गया।    

दरअसल, भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर यह बहस एबीपी न्यूज पर थी, जिसे जानी-मानी एंकर रोमाना ईसार खान होस्ट कर रहीं थीं। यह डिबेट कार्यक्रम भारत और पाकिस्तान के सुपर-4 राउंड के दौरान हुई भिड़ंत (23 सितंबर) से पहले हुआ, जिसका विडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शोएब अख्तर दुबई से पैनल में गेस्ट के तौर पर मौजूद थे। इसी दौरान टीवी एंकर ने कुछ ऐसा कहा कि जिस पर अख्तर भड़क उठे।

कार्यक्रम के दौरान टीवी एंकर रोमाना ने शोएब अख्तर से कहा,'शोएब, भारत में इन दिनों स्वच्छता अभियान का दूसरा चरण चल रहा है, जो हाल ही में शुरू हुआ है। मुझे लगता है कि इसे शायद टीम इंडिया ने बहुत गंभीरता से ले लिया है क्योंकि 100 घंटे पहले जिस तरह से पाकिस्तान की धुलाई हुई थी, क्या आज फिर से तैयार होकर आ रहे हैं पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ी।’

शोएब अख्तर टीवी एंकर के इस बयान से बेहद नाराज हो गए और भड़कते हुए बोले, 'मुझे नहीं पता आपका नाम क्या है- खातून, मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं और अगर आप अपनी हद में रहकर सवाल करेंगी, तब मैं जरूर आपके सवालों का जवाब दूंगा। लेकिन अगर आप ऐसे शब्दों का प्रयोग करेंगी कि धुलाई होगी और स्वच्छता होगी, तो मुझे माफ कीजिए क्योंकि मैं यहां क्रिकेट संबंधित सवालों के लिए आया हूं और उन्हीं का जवाब दूंगा। मुझे आपकी भाषा समझ नहीं आई, मुझसे क्रिकेट के सवाल पूछें और मैं जवाब दूंगा।' शोएब ने एंकर से भड़कते हुए कहा कि वो सम्मान बरकरार रखें क्योंकि वे किसी लोकल क्रिकेटर से सवाल नहीं कर रहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर से बात कर रही हैं, ऐसे में उन्हें सावधान रहना चाहिए कि वो कैमरे के सामने क्या बोल रही हैं।

बता दें कि इस डिबेट कार्यक्रम के दौरान गेस्ट पैनल में भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर और पूर्व भारतीय खिलाड़ी व चयनकर्ता संदीप पाटिल भी मौजूद थे।  

देखें विडियो:

 

  

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बेटे की 'करतूत' तो देखी, अब बाप की 'बदतमीजी' भी देखिए

बीजेपी नेता के विधायक बेटे ने नगर निगम अधिकारियों पर बैट से कर दिया था हमला

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Kailash-Akash-vijayvargiya

सत्ता का नशा नेताओं पर किस कदर हावी होता है, इसका नमूना मध्य प्रदेश के इंदौर में देखने को मिला। यहां से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम के अधिकारियों पर क्रिकेट बैट से हमला बोला। आकाश विजयवर्गीय के समर्थकों ने भी अपनी स्वामी भक्ति दिखाने के लिए जमकर हाथ चलाये। आकाश भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं।

उम्मीद की जा रही थी वो अपने बेटे की इस करतूत पर माफी मांगेंगे। माफी न भी मांगें तो अफसोस तो जरूर जताएंगे, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि सत्ता का नशा केवल उनके बेटे ही नहीं, उनके सिर चढ़कर भी बोल रहा है। ‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर और सीनियर एंकर मानक गुप्ता ने जब मारपीट की घटना पर कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वह अपना आपा खो बैठे। इतना ही नहीं, उन्होंने तो मानक गुप्ता से उनकी आौकात ही पूछ ली।

दरअसल, मानक गुप्ता ने फोन पर कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क करके जानना चाहा कि वो अपने बेटे की करतूत पर क्या सोचते हैं। मानक गुप्ता ने पूछा,‘ये कौन से विधायक होते हैं तो कानून अपने हाथ में लेते हैं, बल्ला अपने हाथ में लेते हैं। एक विधायक की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था को कायम करने की होती है, लेकिन जब विधायक हाथ में बल्ला लेकर लोगों को मारने निकले तो....आपको अपने बेटे की निंदा करनी चाहिए।’

यह सुनते ही कैलाश भड़क गए। उन्होंने खीजते हुए उल्टा सवाल किया, ‘आप जज हैं क्या? आप जजमेंट कर रहे हैं? जज मत बनिए।’ जब मानक गुप्ता ने कहा कि आप किसी पर बल्ला नहीं उठा सकते तो कैलाश ने जवाब में कहा कि आप भी फैसला नहीं सुना सकते, आप कौन हैं? क्या है आपकी हैसियत, आप ऐसी बात करेंगे किसी विधायक के बारे में, अपनी औकात देखिये पहले।’ इतना कहते ही कैलाश विजयवर्गीय ने फोन काट दिया।

विधायक बेटे की इस गुंडागर्दी पर वरिष्ठ भाजपा नेता का यह बयान दर्शाता है कि उनकी नजर में कानून और मीडिया की कोई हैसियत नहीं है। जो उनके खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे ये लोग इसी तरह हैसियत याद दिलाएंगे।

मानक गुप्ता ने इस बातचीत का विडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं-

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टीवी पत्रकार निशांत चतुर्वेदी के बारे में आई ये खबर

निशांत चतुर्वेदी ने टीवी पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2000 में ‘जी न्यूज’ में बतौर एंकर कम रिपोर्टर से की थी

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Nishant Chaturvedi

हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ के एडिटर और जाने-माने एंकर निशांत चतुर्वेदी ने यहां से बाय बोल दिया है। ‘आजतक’ के साथ उनकी यह दूसरी पारी थी। निशांत चतुर्वेदी का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।

निशांत चतुर्वेदी ने टीवी पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2000 में ‘जी न्यूज’ में बतौर एंकर कम रिपोर्टर से की थी। उसके बाद, उन्होंने ‘दूरदर्शन’ के साथ बतौर एंकर कम करेसपॉन्डेंट काम किया, जहां उन्होंने ‘बीबीसी’ और ‘सीएनएन’ के पत्रकारों से ट्रेनिंग ली। फिर ‘आजतक’ के साथ बतौर एंकर कम प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट जुड़ गये और 2004 का लोकसभा चुनाव कवर किया।

उन्होंने तीन साल ‘सहारा न्यूज’ के लिए भी काम किया और फिर वो ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ पहुंच गये। इसके अलावा वे ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में चैनल हेड और ‘न्यूज24’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर/एंकर के साथ ही ‘इंडिया टीवी’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर/एंकर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के मूल निवासी निशांत चतुर्वेदी दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक हैं। उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से बिजनेस इकनॉमिक्स में मास्टर्स की डिग्री ली है।

19 साल से अधिक के पत्रकारिता करियर में निशांत चतुर्वेदी मार्च 2011 में जापान में आई सुनामी, मुंबई में 9/11 को हुए आतंकी हमले, वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले के साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों को काफी बेहतरी से कवर कर चुके हैं। इसके अलावा वे दुनिया की कई जानी-मानी शख्सियतों का इंटरव्यू भी कर चुके हैं।

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HT डिजिटल की कमान संभाल रहीं नीलांजना भादुड़ी ने उठाया ये बड़ा कदम

पिछले साल ही इस समूह के साथ नीलांजना ने शुरू की थी अपनी पारी

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Nilanjana Jha

‘एचटी’ (HT) समूह से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, 'एचटी डिजिटल स्ट्रीम्स’ (HT Digital Streams) की चीफ कंटेंट ऑफिसर नीलांजना भादुड़ी झा ने 15 महीने की पारी के बाद यहां से अलविदा बोल दिया है।

इससे पहले एचटी डिजिटल के सीईओ राजीब बंसल ने इस साल अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। झा के इस्तीफे को भी इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। नीलांजना झा इससे पहले 'एनडीटीवी कंवर्जेंस' (NDTV Convergence) में चीफ कंटेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं और इस अंग्रेजी वेबसाइट से वे करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं।

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महिला सांसदों को रास नहीं आया मीडियाकर्मियों का रवैया, दी ये 'हिदायत'

तृणमूल कांग्रेस की दो महिला सांसदों ने मंगलवार को संसद में लोकसभा की सदस्यता की शपथ ली

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Nusrat Jahan

कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों के बीच अक्सर धक्का-मुक्की होती रहती है, ऐसे में कई बार सामने वाले को काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां (Nusrat Jahan) और मिमी चक्रवर्ती (Mimi Chakraborty) के साथ मंगलवार को संसद के बाहर कुछ ऐसा ही हुआ, जहां कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों की धक्‍कामुक्‍की से दोनों काफी असहज हो गईं और धक्कामुक्की न करने की बात कहने लगीं।

मीडियाकर्मियों पर गुस्सा जताते हुए दोनों ने आगे बढ़ने के लिए रास्ता देने को कहा। हालांकि, इससे पहले उन्होंने कुछ सवालों के जवाब भी दिए और फोटो भी खिंचवाए, लेकिन जब धक्का-मुक्की होने लगीं तो दोनों काफी असहज हो गईं। नुसरत ने पत्रकारों से यह भी कहा, ‘आप धक्का नहीं मार सकते सर। समझिए बात को।

इसके बाद सुरक्षाकर्मी दोनों सांसदों की मदद के लिए आगे आए और किसी तरह उन्हें गाड़ियों तक पहुंचाया। यहां जब मीडियाकर्मियों ने दोनों से फोटो खिंचवाने को कहा तो उन्होंने फोटोग्राफरों से ठीक-ठाक दूरी बनाकर फोटो खीचने को कहा।

बता दें कि नुसरत जहां पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट से चुनाव जीती हैं और मिमी पश्चिम बंगाल में जाधवपुर की सांसद हैं। दोनों पहली बार सांसद बनी हैं और मंगलवार को शपथ लेने के बाद संसद से बाहर निकल रही थीं। दरअसल, नुसरत अपनी शादी होने के कारण और मिमी इस शादी में शरीक होने के कारण पहले शपथ नहीं ले पाई थीं।

इस घटना से जुड़ा विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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पत्रकार से ‘पंगा’ लेना सलमान खान को कुछ यूं पड़ सकता है भारी

पत्रकार की शिकायत पर मुंबई की अदालत में 12 जुलाई को होगी सुनवाई

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Salman Khan

बॉलिवुड के दबंग यानी सलमान खान एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, JK24x7 न्यूज चैनल के महाराष्ट्र के हेड अशोक पांडे ने सलमान खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ धमकी, दुर्व्यवहार और गालीगलौज करने समेत कई आरोपों में मुंबई के अंधेरी मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट (Metropolitan Magistrate Court) में शिकायत दर्ज कराई है।

अशोक पांडे के वकील नीरज गुप्ता के अनुसार, सलमान खान, उनके सहयोगी विजय और एक अज्ञात के खिलाफ दर्ज इस शिकायत पर 12 जुलाई को सुनवाई होगी। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट यह तय करेगी कि पुलिस को जांच का आदेश दिया जाए अथवा आरोपियों को सम्मन जारी किया जाए।

अपनी शिकायत में पांडे का कहना है कि 24 अप्रैल को वह कैमरामैन सैयद इरफान के साथ अपनी कार से कांदिवली से जुहू जा रहे थे। यहां उन्होंने सलमान खान को दो सुरक्षाकर्मियों के साथ साइकिल चलाते हुए देखा। पांडे के अनुसार उन्होंने दोनों सुरक्षाकर्मियों से अनुमति लेकर अपने मोबाइल से सलमान का विडियो बनाना शुरू कर दिया। इस पर सलमान ने अपने सुरक्षाकर्मियों के जरिये उन्हें ऐसा करने से मना किया। इस दौरान उनकी सुरक्षाकर्मियों से बहस हो गयी। इसके बाद सलमान के बॉडीगार्ड ने कैमरामैन को धक्का भी मारा।

इस बीच सलमान खुद आये और उन्होंने पांडे के हाथ से मोबाइल छीन लिया। इससे नाराज़ पांडे ने जब 100 नंबर डायल किया तो उनका मोबाइल वापस कर दिया गया। इसके बाद पांडे ने मुंबई के डीएन नगर पुलिस स्टेशन में अभिनेता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

इस घटना के करीब दो महीने बाद डीएन नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने यह कहते हुए केस बंद कर दिया कि इस मामले में किसी तरह का अपराध नहीं बनता है। पांडे के अनुसार, इस दौरान सलमान खान की तरफ से जोहैब नामक व्यक्ति ने फोन कर मामले में समझौता करने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद पांडे ने कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई कि इस मामले में पुलिस को जांच का आदेश दिया जाए और आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्यवाही की जाए।

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‘हिन्दुस्तान’ में बड़ा बदलाव, तीरविजय सिंह और केके उपाध्याय का हुआ ट्रांसफर

दिल्ली एडिशन के संपादक प्रताप सोमवंशी वेस्ट यूपी की यूनिटों के साथ ही उत्तराखंड स्टेट की मॉनीटरिंग करेंगे

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Hindustan

हिन्दी के प्रमुख अखबार ‘हिन्दुस्तान’ (Hindustan) अखबार से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, प्रबंधन ने यहां पर कई बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों के तहत बिहार के स्टेट हेड और पटना संस्करण के संपादक तीरविजय सिंह का तबादला कर दिया गया है। अब उन्हें लखनऊ के संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही नहीं, लखनऊ एडिशन के साथ ही वे पूर्वी यूपी, अवध औऱ बुंदेलखंड के छह एडिशंस की भी मॉनीटरिंग करेंगे। बता दें कि सोशियोलॉजी में पीएचडी तीरविजय सिंह ने बनारस से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की है। लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय तीरविजय सिंह ‘अमर उजाला’ के साथ बनारस के आरई के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ के साथ भी काम किया है। वहीं, अखबार के दिल्ली एडिशन के संपादक प्रताप सोमवंशी वेस्ट यूपी की यूनिटों के साथ ही उत्तराखंड स्टेट की मॉनीटरिंग करेंगे।

इसके अलावा यूपी के स्टेट हेड और लखनऊ के संपादक की जिम्मेदारी निभा रहे केके उपाध्याय को अब दो राज्यों बिहार और झारखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पटना से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे और वहीं से बिहार-झारखंड की मॉनीटरिंग करेंगे। केके उपाध्याय ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत 1988 में ग्वालियर से दैनिक स्वदेश से की थी। उसके बाद उन्होंने दैनिक भास्कर ग्वालियर में जनरल डेस्क इंचार्ज के रूप में जॉइन किया।

1996-98 के दौरान केके उपाध्याय ने मध्य प्रदेश के पहले केवल टीवी जीएनटी की शुरुआत की, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते उसे बंद करना पड़ा। फिर उन्होंने दैनिक भास्कर के श्री गंगानगर यूनिट की लॉन्चिंग पर संपादकीय इंचार्ज के पद पर जॉइन किया। एक  साल बाद बीकानेर संस्करण के संपादक बनाये गये। यहां से उन्होंने फिर वर्ष 2000 में अमर उजाला आगरा में डीएनई के पद पर जॉइन किया और यहां से वे दैनिक भास्कर भोपाल में रीजनल कोर्डिनेटर के पद पर पहुंचे। बाद में जयपुर में रहते हुये राजस्थान के स्टेट कोर्डिनेटर भी रहे। बाद में अमर उजाला चंडीगढ़, गोरखपुर और बरेली में रहने के बाद उन्होंने बतौर डिप्टी रेजिडेंट एडिटर हिन्दुस्तान जॉइन कर लिया था। 

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वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा ने अब इस मीडिया समूह के साथ शुरू किया नया सफर

अपने पत्रकारीय करियर में प्रभात मिश्रा कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी

Last Modified:
Wednesday, 26 June, 2019
Prabhat Mishra

वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा ने अपने पत्रकारीय करियर को नई दिशा देते हुए ‘अमर उजाला’ नोएडा के साथ नई पारी की शुरुआत की है। यहां वह क्वालिटी मैनेजमेंट डेस्क पर काम करेंगे। बता दें कि ‘अमर उजाला’ समूह के साथ प्रभात मिश्रा की यह दूसरी पारी है। इससे पहले वह ‘अमर उजाला’ जालंधर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ‘अमर उजाला’ के साथ दूसरी पारी शुरू करने से पहले वह ‘आउटलुक’ मैगजीन के साथ जुड़े हुए थे और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे।

झारखंड में डाल्टनगंज के रहने वाले प्रभात मिश्रा को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। अपने पत्रकारीय करियर में वह कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। प्रभात मिश्रा ने अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत डाल्टनगंज से निकलने वाले दैनिक अखबार ‘राष्ट्रीय नवीन मेल’ से की थी। हालांकि इससे पहले कुछ समय के लिए उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के लिए स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग भी की थी।

इसके बाद उन्होंने ‘अमर उजाला’ जालंधर का दामन थाम लिया। यहां लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वे ‘दैनिक जागरण’ के नोएडा संस्करण से जुड़ गए। ‘दैनिक जागरण’ को अलविदा कहकर ‘नई दुनिया’ और फिर ‘नेशनल दुनिया’ में जिम्मेदारी निभाने के बाद वे ‘आउटलुक’ से जुड़ गए थे। यही नहीं, प्रभात मिश्रा माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस में गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी अपनी सेवाएं देते हैं।  

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अरनब गोस्वामी की बीजेपी सरकार को चेतावनी, विपक्ष नही है तो Republic संभालेगा मोर्चा

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
ARNAB GOSWAMI

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी हरियाणा की भाजपा सरकार से खासे खफा हैं। अपने शो ‘डिबेट विद अरनब’ में उन्होंने न केवल खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि एक तरह से सरकार को चुनौती भी डे डाली कि मीडिया और जनता खामोश नहीं रहेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनके मंत्री बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को जेल से बाहर लाने के लिए बेताब हैं। इसके लिए नियम-कानून को भी ताक पर रखा जा रहा है।

नियमों के मुताबिक, दो साल की सजा पूरी होने के बाद ही किसी कैदी को पैरोल मिल सकती है। गुरमीत राम रहीम को जेल में रहते हुए अभी दो साल पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उसने पैरोल के लिए अर्जी दाखिल कर दी है और सुनारिया जेल प्रशासन ने आवेदन स्वीकार भी कर लिया है। यह सारी कवायद इस साल अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। यदि बाबा बाहर आता है  तो उसके लाखों अनुयायी भाजपा के पक्ष में वोट डालने से नहीं झिझकेंगे। अरनब इस बात को लेकर नाराज हैं कि आखिर पूरी की पूरी सरकार एक ऐसे व्यक्ति का समर्थन करती कैसे नजर आ रही है, जो बलात्कार जैसे गंभीर अपराध का दोषी है।

‘डिबेट विद अरनब’ की शुरुआत में ही गोस्वामी ने जमकर हरियाणा सरकार के मंत्रियों पर हमला बोला। बेहद गंभीर मुद्रा में अरनब ने लोगों से इस विषय पर एकजुट होने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा, ‘बलात्कारी गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आना चाहता है और हरियाणा सरकार इसका समर्थन कर रही है। मैं आप सभी से कहता हूं कि एकसाथ आयें और सुनिश्चित करें कि ऐसा संभव न हो।’

उन्होंने आगे कहा, ‘नेता और तथाकथित बाबा कानून का दुरुपयोग करना अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन यदि हम सब एक साथ खड़े हो जाएं तो हम उन्हें हरा सकते हैं। आप और मैं सभी जानते हैं कि राम रहीम हत्यारा है, किसान नहीं।’ इसके बाद अरनब ने हरियाणा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘हरियाणा सरकार राम रहीम की पैरोल के विरोध के बजाय उसका समर्थन कर रही है, ताकि वो विधानसभा चुनाव में कुछ वोट के लिए उसके साथ सौदेबाजी कर सके और यदि आप और हम एकसाथ अपनी आवाज बुलंद करते हैं  तो हम हरियाणा सरकार को शिकस्त दे सकते हैं और हम ऐसा करके रहेंगे।’

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अरनब ने कहा, ‘हमें अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और तेज आवाज में सरकार से सवाल पूछना होगा। यदि आज राम रहीम को नहीं रोका गया तो कल आसाराम भी इस दावे के साथ जेल से बाहर आ जायेगा कि वो बलात्कारी नहीं, बल्कि व्यापारी है और इसलिए यह समय है कि हम सभी आवाज उठायें।’

इतना ही नहीं, अरनब ने नेताओं को यह चेतावनी भी दे डाली कि यदि उन्होंने सही-गलत में भेद करना नहीं सीखा, तो उन्हें विरोध करना बखूबी आता है। अरनब ने तेज स्वर में कहा, ‘देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन हम हैं। देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन कुछ मीडिया संस्थान अभी भी हैं, देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन लोग हैं और वे राजनीतिक फायदे के लिए इस बलात्कारी को जेल से बाहर निकालने पर खामोश नहीं रहेंगे। दर्शकों मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहूंगा कि इस देश में विपक्ष भले ही न हो, लेकिन मैं और आप हैं और हमारी आवाज नहीं दबेगी।’

शो में बतौर अतिथि मौजूद भाजपा नेता और समर्थक भी अरनब के गुस्से से नहीं बच सके। उन्होंने भाजपा प्रवक्ता से कहा, ‘एक बलात्कारी के साथ राजनीतिक सौदा करके आप उसके पैरोल का विरोध नहीं कर रहे। आप कह रहे हैं कि वो खेती करेगा, एक बलात्कारी को आप किसान कहकर किसानों का अपमान कर रहे हैं। यदि आपको विश्वास है कि आप चुनाव हार जायेंगे, तो हार जाइये। मैं कहूंगा कि हार जाइये, मगर एक बलात्कारी के साथ डील मत कीजिये।’

इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा नेता से पूछा कि क्या आप इसकी गारंटी लेती हैं कि राम रहीम बाहर आने के बाद कोई अपराध नहीं करेगा, देश छोड़कर नहीं भागेगा? आपके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन अपनी अंतरात्मा में झांकिये कि एक बलात्कारी के पास क्या खेती है। आप किस कानून की बात कर रहे हैं, आप उसका विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं’?

अरनब यहीं नहीं रुके, उन्होंने राम रहीम की पैरोल का समर्थन करनी वालीं भाजपा नेता से कहा ‘अनीला सिंह शायद आपको लगता है कि इस चुनाव के बाद देश में विपक्ष नहीं है, लेकिन मैं आपको कह रहा हूं कि ये बलात्कारी बाहर नहीं दिखेगा, लोग खड़े हो जाएंगे। लोग आपकी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे, आप सुधर जाइये, विरोध कीजिये, आप नहीं करेंगे तो करवाया जाएगा। मैं धमकी नहीं दे रहा हूं, आप सुधर जाइये। मुझे दूसरे मीडिया के बारे में पता नहीं, लेकिन रिपब्लिक है, आज यह बलात्कारी निकल गया तो कल आसाराम निकल जाएगा।’ पूरे शो में भाजपा नेता और पैरोल का समर्थन करने वाले अरनब के तीखे सवालों का सामना करते रहे।

अरनब गोस्वामी का ये डिबेट शो आप यहां देख सकते हैं-

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देखें, कैसे अस्पताल से बाहर निकाले गए पत्रकार

पुलिस ने मीडिया कर्मियों को काफी मुश्किल से बार्ड से बाहर निकाला

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Reporting

खतरनाक बीमारी से कई बच्चों की मौत के बाद बिहार में मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल के आईसीयू में बेधड़क घुसकर रिपोर्टिंग करने के मामले में पत्रकारों को तमाम आलोचनाओं का शिकार करना पड़ रहा है। कई पत्रकार तो इस मसले पर अपनी सफाई भी दे चुके हैं।

कुछ ऐसा ही मामला राजस्थान के बाड़मेर जिले से सामने आया है, जहां पर अस्पताल में कुछ मीडियाकर्मी घुस गए और कवरेज करने लगे। हालांकि, वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। काफी देर तक हंगामे के बाद पुलिस अधिकारियों ने इन पत्रकारों को अस्पताल के बार्ड से बाहर किया।

गौरतलब है कि बाड़मेर जिले के बालोतरा कस्बे में रविवार को एक धार्मिक आयोजन के दौरान आंधी के कारण पंडाल गिरने से 16 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और लगभग 55 लोग घायल हो गए थे। घायलों को बाड़मेर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी की रिपोर्टिंग करने के लिए मीडियाकर्मी बाड़मेर के अस्पताल में पहुंचे थे।

इस घटना से जुड़ा विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं-

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अब इन हिंदी पोर्टल्स के संग जुड़े प्रशांत कनौजिया, बोले- 'भारत माता' में यकीन नहीं

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोप में पुलिस ने कुछ दिन पूर्व किया था गिरफ्तार

Last Modified:
Tuesday, 25 June, 2019
Prashant Kanojia

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तारी का सामना कर चुके पत्रकार प्रशांत कनौजिया का कहना है कि उनकी निष्ठा केवल संविधान के प्रति है और वह ‘भारत माता’ जैसी अवधारणा में यकीन नहीं रखते। कनौजिया का यह ताजा बयान विरोधियों को उनके खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे सकता है।

‘द टेलीग्राफ’ को दिए इंटरव्यू में कनौजिया ने 8 जून को हुई घटना का जिक्र करते हुए अपने अनुभव साझा किये। कनौजिया ने बताया कि जब पुलिस उन्हें ले जा रही थी तो उन्हें अपने एनकाउंटर का डर था, क्योंकि यूपी पुलिस का रिकॉर्ड इस मामले में काफी दागदार रहा है।

बकौल कनौजिया, ‘सादा कपड़ों में जब पुलिस वालों ने मुझे पूर्वी दिल्ली से उठाया तो लगा कि वो मुझे दिल्ली या नोएडा के किसी पुलिस स्टेशन ले जाएंगे, मगर जैसे ही गाड़ी ग्रेटर नोएडा से आगे निकली, मेरी चिंताएं बढ़ने लगीं। मेरे मन में ख्याल चलने लगे कि यदि पुलिस ने मेरा एनकाउंटर कर दिया तो? क्या होगा यदि पुलिसवाले मुझे गोली मारकर यह थ्योरी बना दें कि मैं उनकी गिरफ्त से भागने का प्रयास कर रहा था? हालांकि, पुलिस मुझे सीधे लखनऊ ले गई, जहां पेशी के बाद मुझे जेल भेज दिया गया।’

प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद उनके पुराने ट्वीट खंगालकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि वो जात-पांत के नाम पर सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर रहे हैं। सोशल मीडिया के साथ-साथ मेनस्ट्रीम मीडिया में कनौजिया के खिलाफ खबरें दिखाई गईं। मीडिया, खासकर कुछ पत्रकारों के इस रुख से कनौजिया खासे नाराज हैं।

कनौजिया का कहना है, ‘आप मेरे बारे में कुछ भी भला-बुरा बोल सकते हैं, लेकिन जो व्यक्ति कैमरे के सामने 100 करोड़ की रिश्वत मांगते पकड़ा गया हो, क्या वह पत्रकार है? इसी तरह, कठुआ कांड का समर्थन करने वाले खुद को पत्रकार कैसे कह सकते हैं’? कनौजिया का ट्विटर हैंडल विवादस्पद ट्वीट, फोटो से भरा पड़ा है। उनकी भाषा पर भी ऐतराज जताया जाता रहा है। यही वजह है कि जब उनकी गिरफ्तारी हुई  तो इसका समर्थन करने वालों की संख्या भी कम नहीं थी।

कनौजिया दलित हैं और दलितों पर होने वाले अत्याचारों को लेकर मुखर रहते हैं। इस बारे में उनका कहना है, ‘यदि कोई दलित को मारेगा, उसके मुंह में पेशाब करेगा तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। मैं चुभने वाले शब्द इस्तेमाल करूंगा, क्योंकि दलित होने के चलते मैंने भी बहुत कुछ सहा है।’

इस सवाल के जवाब में कि देश और उसके नेताओं के खिलाफ विवादास्पद विचार क्यों? कनौजिया ने कहा, ‘मेरी निष्ठा संविधान के प्रति है, देश और उसके नेताओं के प्रति नहीं। मैं ‘ये धरती मेरी मां है’ जैसी अवधारणा में विश्वास नहीं रखता।’ 8 जून के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कनौजिया ने कहा, ‘मुझे ले जाते हुए पुलिसवाले बोल रहे थे कि तुम वायर वालों को बहुत चर्बी चढ़ गई है, तुमको डालेंगे, फिर तुम्हारे बाप को भी डालेंगे।‘

गौरतलब है कि कनौजिया ‘द वायर’ के साथ काम कर चुके हैं। बकौल कनौजिया ‘लखनऊ में उन्हें मजिस्ट्रेट के घर ले जाया गया, जहां से पुलिस अस्पताल लेकर गई। अस्पताल में 150 पुलिसकर्मी मौजूद थे, डॉक्टर भी उन्हें ऐसे देख रहे थे जैसे वो कोई आतंकवादी हों। इसके बाद उन्हें लखनऊ सेंट्रल जेल ले जाया गया। कनौजिया के मुताबिक, जेल के कैदी भी इस बात को लेकर अचंभित थे कि मुख्यमंत्री पर टिप्पणी के चलते उन्हें जेल भेजा गया है।

प्रशांत कनौजिया फ़िलहाल फ्रीलांस पत्रकार के रूप में ‘द प्रिंट हिंदी और ‘सत्यहिंदी’ के साथ जुड़े हुए हैं।

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