नहीं रहे युवा पत्रकार विवेक: जिसने सुनी ये खबर, आंखों में आ गए आंसू...

हिंदी के प्रतिष्ठित संपादक...

Last Modified:
Tuesday, 24 April, 2018
Samachar4media

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

हिंदी के प्रतिष्ठित संपादक राजकिशोर के पुत्र विवेक का ब्रेन हैमरेज की वजह से अचानक निधन हो गया। वे एबीसी न्यूज के लिए काम करते थे। पिछले कई वर्षों से वे चीन में रह रहे थे और हाल ही में दिल्ली आए थे। हिंदी के सुपरिचित पत्रकार और लेखक  श्री राजकिशोर के पुत्र विवेक राज का 22 अप्रैल की सुबह 6.30 पर निधन हो गया।

विवेक (40 वर्ष) एक सजग पत्रकार और फिल्म तथा वृत्त चित्र निर्माता थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बीबीसी से की थी। बीबीसी में रहते हुए उन्होंने 3 वर्ष तक बीजिंग में काम किया। वे लगभग 12 वर्ष तक बीबीसी में कार्य करते रहे, जहाँ से दक्षिण एशिया के ब्यूरो से जुड़े रहे थे। उसके बाद वे अमेरिका के सबसे लोकप्रिय टीवी चैनल एबीसी के साथ जुड़े और स्वतंत्र रूप से भी काम करते रहे। वे बिल गेट्स की स्वच्छता से संबंधित एक बड़ी परियोजना में काम कर रहे थे।

विवेक की पत्नी थिया एवांस लंदन की एक अंतरराष्ट्रीय कला कंपनी की भारतीय डाइरेक्टर हैं। उनकी बेटी एज्मे आठ वर्ष की और बेटा रेक्स छह वर्ष का है।

विवेक की स्मृति में एक स्मृति-सभा का आयोजन  मंगलवार 24 अप्रैल 2018 को  इंडियन एक्सप्रेस अपार्टमेंट्स, मयूर कुंज, चिल्ला रेगुलेटर, दिल्ली 110096 के सभागार में किया गयाथा। 

विवेक को कई  वरिष्ठ पत्रकारों ने याद करते हुए यूं लिॆखा है...

Om Thanvi : ज़िंदगी की धूप-छांव में क्रूरता भी कम नहीं। हिंदी के प्रतिष्ठित सम्पादक राजकिशोरजी का बेटा अचानक नहीं रहा। वह एबीसी न्यूज़ के लिए काम करता था। बरसों चीन में रहा। अब दिल्ली आ गया था। मैं कल ही अपने पिताजी के पास गाँव आया। राजकिशोरजी का यहाँ फ़ोन आया और पिताजी की तबीयत पूछी। मैंने बताया कि वे अपने बिस्तर अब समेटने लगे हैं। उन्हें सुनकर अफ़सोस हुआ। पर रात उनका संदेश आया कि उनका बेटा बहुत ‘क्रिटिकल’ स्थिति में है। पढ़कर शब्दों पर भरोसा नहीं हुआ। राजकिशोरजी से चालीस साल पुराना संबंध है। तब से जब वे कलकत्ता वाले रविवार में थे और मैं फ़्रीलान्सिंग करता था। चार रोज़ पहले उनके घर गया था। उनकी पोती और पोता पहली बार मिले। वे माँ पर गए हैं जो इंगलैंड से आती हैं। दोनों बच्चों ने हमारे पाँव छुए। फिर खेलने लगे। राजकिशोरजी ने बताया, बच्चे चीन में पैदा हुए जब विवेक वहाँ बीबीसी में काम करता था। विवेक उनका इकलौता बेटा था। और उसके बाद आज सुबह ब्रेन हैमरेज से बेटे की मृत्यु की ख़बर। आप समझ सकते हैं कि राजकिशोरजी, विमलाजी, दोनों मासूम बच्चों और उनकी माँ पर दुख का पहाड़ टूटा है। ऐसे हादसे में कोई कुछ नहीं कर सकता यह भी हम जानते हैं। सिवा इस प्रार्थना के कि वे दुख को झेल सकें। ख़ासकर दो अबोध बच्चों के लिए।

Ashwini Chaudhary : Heartbroken….just read Om Thanvi s post about the sad demise of Vivek Raj, son of senior journalist Raj kishore ji. When I started my Television Production Company in Delhi in nineties Vivek was in my first team of assistants. I still remember when he came to the office for the first time with Raj Kishore ji, fresh out of journalism school, full of dreams and ideas. A ring in his ear and unkept long hair. Later when he trimmed his pony because Raj kishore ji insisted, he framed the pony tail and it was there on the wall of his bedroom for a long time…. I saw a young rebel in him. He worked with

me on our current affair programmes and documentaries for a long time. He first introduced me to sarson ke tail wali fish curry rice which his mother Vimla Ji used to send with him. Kumud my wife learnt the recipe from him and it is still my favourite. Later I moved to Mumbai and Vivek joined BBC then ABC and travelled the world but stayed in touch with me and kumud. He was a young , bright, socially conscious journalist with a spine who always called spade a spade. Rest in peace Vivek…will miss you always.

Jaishankar Gupta : दुखद सूचनाओं का सिलसिला टूटता क्यों नहीं! कुछ दिन पहले वरिष्ठ पत्रकार मित्र नीलाभ, फिर हमारे अभिन्न मित्र पत्रकार हरिमोहन की पत्नी पूनम जो हमारी मुंह बोली बहन की तरह थी, हम सबको छोड़कर अनंत की यात्रा पर चली गई। और आज हमारे अग्रज, रविवार और नवभारत टाईम्स के दिनों में वरिष्ठ सहयोगी रहे राजकिशोर जी के पत्रकार पुत्र विवेक राज के असामयिक निधन की सूचना ने अंदर से हिला दिया। विवेक को हम अस्सी के दशक के पूर्वार्ध में कलकत्ता प्रवास के समय से जानते थे जब वह बच्चे थे। अभी भी हमारे लिए तो वह बच्चे ही थे लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। कल शाम मष्तिकाघात के बाद उनकी हालत जो बिगड़ी तो आज उनके दुखद निधन के रूप में आई सूचना ने सन्न कर दिया। उनके निधन की सूचना भी वरिष्ठ पत्रकार मित्र ओम थानवी जी की पोस्ट से मिली।

दुख और शोक की इस घड़ी में राजकिशोर जी और विमला भाभी, गुड़िया तथा विवेक की पत्नी और उनके दोनों बच्चों की पीड़ा को हम महसूस कर सकते हैं। ईश्वर उन्हें इस असह्य पीड़ा को झेल सकने का साहस और धैर्य प्रदान करे। हम और हमारे परिवार की सहानुभूति और संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

Rajesh Priyadarshi: Dear Vivek Raj today I met your mum and dad who had come back from your funeral, they couldn’t believe you are gone, I couldn’t believe it either. I knew your dad because of his writing and Bahadur Shah Zafar Marg days of early 1990s, I discovered much later that you were Raj Kishore Ji’s son. I was really touched by their grace and poise, they lost their dear and only son but they asked us to take care of ourselves healthwise. I had a limited interaction with you in the office and we worked together briefly but I was impressed with your energy and hard work. All my heart goes out to your parents, family and bereaved friends. Sudden and massive brain haemorrhage didn’t give doctors any chance to revive you. I couldn’t find your picture alone (but your parent’s house was full of your photos from baby Vivek to Daddy Vivek) you always came across as a fun loving family man, it is really hard for your wife Thea and unimaginable for young ones, Esme and Rex. Rest in peace Vivek, may your family find the strength to deal with this extreme loss.

Om Thanvi : ज़िंदगी की धूप-छांव में क्रूरता भी कम नहीं। हिंदी के प्रतिष्ठित सम्पादक राजकिशोरजी का बेटा अचानक नहीं रहा। वह एबीसी न्यूज़ के लिए काम करता था। बरसों चीन में रहा। अब दिल्ली आ गया था। मैं कल ही अपने पिताजी के पास गाँव आया। राजकिशोरजी का यहाँ फ़ोन आया और पिताजी की तबीयत पूछी। मैंने बताया कि वे अपने बिस्तर अब समेटने लगे हैं। उन्हें सुनकर अफ़सोस हुआ। पर रात उनका संदेश आया कि उनका बेटा बहुत ‘क्रिटिकल’ स्थिति में है। पढ़कर शब्दों पर भरोसा नहीं हुआ।

ओम थानवी: राजकिशोरजी से चालीस साल पुराना संबंध है। तब से जब वे कलकत्ता वाले रविवार में थे और मैं फ़्रीलान्सिंग करता था। चार रोज़ पहले उनके घर गया था। उनकी पोती और पोता पहली बार मिले। वे माँ पर गए हैं जो इंगलैंड से आती हैं। दोनों बच्चों ने हमारे पाँव छुए। फिर खेलने लगे। राजकिशोरजी ने बताया, बच्चे चीन में पैदा हुए जब विवेक वहाँ बीबीसी में काम करता था। विवेक उनका इकलौता बेटा था। और उसके बाद आज सुबह ब्रेन हैमरेज से बेटे की मृत्यु की ख़बर। आप समझ सकते हैं कि राजकिशोरजी, विमलाजी, दोनों मासूम बच्चों और उनकी माँ पर दुख का पहाड़ टूटा है। ऐसे हादसे में कोई कुछ नहीं कर सकता यह भी हम जानते हैं। सिवा इस प्रार्थना के कि वे दुख को झेल सकें। ख़ासकर दो अबोध बच्चों के लिए।


वहीं वहीं दूसरी खबर ये है कि राजस्‍थान पत्रिका समूहके कंसल्टिंग एडिटर ओम थानवी के पिता शिवरतन थानवी नहीं रहे। वे क्षेत्र से जुड़े हुए थे और शिक्षा से संबद्धित दो सम्मानित पत्रिकाओं के संपादक थे। कुछ दिनों पहले ही उनकी डायरी के चुनींदा अंश जगदर्शन का मेलाप्रकाशित हुई है जिसकी भूमिका साहित्यकार-शिक्षक प्रो. केदारनाथ सिंह ने लिखी है।


 

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जानिए, क्यों मीडिया की सुर्खियां बनीं अरनब गोस्वामी की 'खामोशी', शुरू हुई राजनीति

‘वरिष्ठ पत्रकार एवं रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी अक्सर सुर्खियों रहते हैं, फिर चाहे वह कुछ करें या न करें।

Last Modified:
Wednesday, 29 January, 2020
arnab

‘वरिष्ठ पत्रकार एवं रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी अक्सर सुर्खियों रहते हैं, फिर चाहे वह कुछ करें या न करें। फिलहाल वह स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के साथ ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्हें लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है।

दरअसल, पूरा मामला मुंबई से लखनऊ जा रही इंडिगो एयरलाइन्स की फ्लाइट से जुड़ा है, जिसमें कुणाल और अरनब दोनों सफर कर रहे थे। विमान के उड़ान भरने के बाद कुणाल कामरा अपनी सीट से उठकर अरनब के पास पहुंचे और उनसे कुछ सवाल पूछने शुरू कर दिए, लेकिन अपने सवालों से सबको खामोश करने वाले अरनब इन सवालों पर पूरी तरह खामोश रहे। उन्होंने कामरा को नजरंदाज करने का प्रयास किया, मगर वह लगातार बोलते गए। इस दौरान कामरा ने कुछ ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया जिसे लेकर उनकी आलोचना हो रही है। स्टैंडअप कॉमेडियन ने अपने सवालों पर अरनब गोस्वामी की चुप्पी का एक विडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं, अरनब आप कायर हैं या पत्रकार हैं। दर्शक आज यह जानना चाहते हैं कि अरनब कायर है या देशभक्त। अरनब यह देश हित में है, मैं टुकड़े टुकड़े गैंग का हिस्सा हूं। आपको मेरी हवा निकालनी चाहिए, आपको देश के दुश्मनों को बाहर निकालना चाहिए। आप यह सुनिश्चित करें कि देश नरेंद्र मोदी के हाथों में सुरक्षित है। आप जानते हैं आप मेरी विनम्रता के काबिल नहीं हैं, यह आपके लिए नहीं हैं। यह रोहित वेमुला की मां के लिए है जिनकी जाति के बारे में आप अपने शो पर चर्चा कर रहे थे। कभी अकेले बैठकर इस बारे में गंभीरता से सोचिएगा। मुझे पता है इसकी अनुमति नहीं है और इसके लिए मैं जेल जाने को भी तैयार हूं।’

उड़ते विमान में हुई इस घटना को लेकर इंडिगो की आलोचना भी की जाने लगी थी, जिसे देखते हुए विमान कंपनी ने स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। कंपनी का कहना है कि मुंबई से लखनऊ जाने वाली एक उड़ान में कुणाल का व्यवहार आपत्तिजनक था जिसके मद्देनजर उन पर ये पाबंदी लगाई गई है। साथ ही, एयर इंडिया ने अगले आदेश तक कामरा के यात्रा करने पर बैन लगाया है। संभव है कि अन्य विमानन कंपनियां भी ऐसा कोई कदम उठायें, क्योंकि केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बाकी एयरलाइंस से कामरा पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की ‘सलाह’ दी है। वहीं, कुछ पत्रकारों ने विमान कंपनियों के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

शोमा चौधरी ने एयर इंडिया को आड़े हाथों लेते हुए अपने ट्वीट में कहा है, ‘इंडिगो फ्लाइट की घटना पर एयर इंडिया का कुणाल कामरा को बैन करना कुछ ऐसा है जैसे देश के सभी स्कूल किसी एक स्कूल में बच्चे के शरारती व्यवहार पर छात्रों को बाहर का रास्ता दिखाएं। क्या एयरइंडिया अब चरित्र प्रमाण पत्र बांटने लगी है’?

इसी तरह व्यंगकार आकाश बनर्जी ने पूरे मामले पर तंज कसते हुए कहा है, ‘कल दीपक चौरसिया थे, आज अरनब गोस्वामी। कल्पना करें कि न्यूज एंकरों को हर बार अपने स्टूडियो से बाहर निकलते ही इस तरह से रियलिटी चेक का सामना करना पड़े’?

हालांकि, न्यूज एजेंसी आईएएनएस की विदेश मामलों की संपादक आरती टिक्कू सिंह ने घटना के लिए कुणाल कामरा की निंदा करते हुए अरनब गोस्वामी का साथ दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘प्रिय अरनब मैं हमेशा आपकी शोरगुल से भरी बहस की आलोचक रही हूं, लेकिन इस बार मैं आपके साथ खड़ी हूं। साथ ही जिस तरह से आप एक मसखरे के सवालों पर शांत रहे, मैं उसकी प्रशंसा करती हूं। आप एक व्यक्ति के रूप में बेहद कूल हैं।’

इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा कामरा को सही ठहराए जाने के बाद भाजपा भी आक्रामक हो गई है। थरूर ने कामरा के विडियो पर कमेंट करते हुए लिखा है ‘सच्चाई तो यह है कि इस वक्त किसी ने उसे (गोस्वामी को) उसी की दवा का स्वाद चखाया है। ये वह शब्द हैं जिनका इस्तेमाल वे अपने निर्दोष पीड़ितों को धमकाने के लिए करते हैं। अंतर केवल इतना है कि वह यह सब इतने धमकी भरे अंदाज में, परेशान करने के अंदाज में और तेज आवाज में करते हैं, जितना कुणाल कामरा अपने विडियो में नहीं करते।’ इस पर भाजपा नेता संबित पत्रा ने उनसे पूछा है, ‘यदि इसी तरह से लोग फ्लाइट में आपसे सुनंदा पुष्कर मामले में सवाल करने लगे तो क्या आप उसे न्याय करार देंगे’?

 

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जानें, क्यों मीडिया पर भड़के कपिल सिब्बल, फिर दी चेतावनी

‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है

Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
Kapil Sibal

‘नागरिकता संशोधन कानून’ (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट को लेकर विवाद गहराता चला जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हिंसा फैलाने के लिए पीपुल फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा फंडिंग की गई थी। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और वकील इंदिरा जयसिंह को भी बड़ा भुगतान किया गया। हालांकि, दोनों ही इसे अपने खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं।

पैसे लेने के आरोपों का खंडन करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोपों में सच्चाई नहीं है और यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। इस मामले में कपिल सिब्बल ने मीडिया को भी आड़े हाथ लिया है। उन्होंने मीडिया को अच्छे से होमवर्क करने की नसीहत दी है। सिब्बल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन समाचार माध्यमों ने इस बारे में उनका नाम लेते हुए स्टोरी की है, अगर उन समाचार माध्यमों ने स्टोरी को नहीं हटाया गया तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 73 बैंक खातों में 120 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा की गई थी, जिनका इस्तेमाल सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध-प्रदर्शन में हुआ था। अपनी सफाई में कपिल सिब्बल का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हदिया केस लड़ा था, लेकिन उसके लिए उन्हें मार्च 2018 में ही भुगतान किया जा चुका था। सिब्बल के अनुसार, उन्हें पीएफआई से मार्च 2018 में पैसे मिले थे, तब सीएए आया ही नहीं था।

इसके अलावा इंदिरा जयसिंह ने भी इनकार किया है कि उन्हें एंटी-सीएए विरोध या किसी अन्य कारण से पीएफआई से पैसा मिला था। वहीं पीएफआई का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में उसका एक भी विंग नहीं है। पीएफआई के महासचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने ईडी की जांच को पूरी तरह से आधारहीन बताया है।

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इस खास रिपोर्टिंग के लिए एक साथ आए दो न्यूज चैनल्स के संपादक

संभवतः यह पहली बार है, जब दो न्यूज चैनलों ने टीआरपी में एक-दूसरे को पछाड़ने की दौड़ से अलग हटकर संयुक्त रूप से किसी मुद्दे पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की है

Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
Reporting

शाहीनबाग पर जहां नेताओं में ‘जुबानी जंग’ चल रही है, वहीं मीडिया के लिए भी यह ‘हॉट’ मुद्दा बन गया है। खासकर वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद से यह इलाका मीडिया सेंटर में तब्दील हो चुका है। तमाम पत्रकार यहां डेरा डाले हुए हैं। इस बीच, ‘जी न्यूज़’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने दीपक चौरसिया के साथ मिलकर जिस तरह से शाहीनबाग में चल रहे विरोध-प्रदर्शन का ‘सच’ तलाशने का प्रयास किया है, उससे यह मुद्दा और भी ज्यादा बड़ा हो गया है।

संभवतः यह पहली बार है, जब दो न्यूज चैनलों ने टीआरपी में एक-दूसरे को पछाड़ने की दौड़ से अलग हटकर संयुक्त रूप से किसी मुद्दे पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इस संयुक्त मिशन की घोषणा के बाद से काफी समय तक सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते रहे। सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से मिलकर बात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। जितनी देर दोनों पत्रकार वहां रहे, उतनी देर तक गो-बैक, गो-बैक के नारे लगते रहे। दोनों ने बार-बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, मगर सफल नहीं हुए।

शाहीनबाग में जहां महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं, वहां से कुछ पहले ही बैरिकेड लगा दिए गए, ताकि सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया धरना स्थल तक न पहुंच सकें। दोनों को दूर से ही अपनी बात महिलाओं तक पहुंचानी पड़ी, लेकिन कोई उन्हें सुनने को तैयार नहीं था। चौधरी ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके इस मसले पर अपना गुस्सा बयां किया है।

उन्होंने लिखा है, ‘आज जब मैं और दीपक शाहीनबाग पहुंचे तो कश्मीर की तर्ज पर Go Back के नारे लगने लगे। पल भर को लगा जैसे हम किसी दूसरे देश में आ गए हैं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि हमें वहां घुसने की इजाजत नहीं है। शाहीन बाग में जाने के लिए अब अलग वीजा लेना होगा? क्या शाहीन बाग में खत्म हो जाती है भारत की सीमा? कश्मीर की तरह यहां Go Back के नारे लग रहे हैं। इतनी असहनशीलता’?

वहीं, दीपक चौरसिया ने लिखा है, ‘टेलिविजन इतिहास में पहली बार दो बड़े टेलिविजन चैनल शाहीन बाग में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चल रहे आंदोलन को देखने गए! लेकिन वहां का नजारा न तो लोकतांत्रिक था और न ही संवैधानिक’!

सुधीर चौधरी ने जहां अपने शो ‘DNA’ में संयुक्त मिशन के जरिये शाहीनबाग के हाल को दर्शकों के समक्ष रखा। वहीं, ‘न्यूज़ नेशन’ ने स्पेशल शो में यह मुद्दा उठाया। इस शो में दीपक चौरसिया के साथ सुधीर चौधरी भी उपस्थित रहे। दोनों पत्रकारों के इस कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है।

उधर, इस महाकवरेज के बीच दीपक चौरसिया अपने विरोधियों पर निशाना भी साध रहे हैं। दरअसल, शाहीनबाग में हुए हमले के बाद से कुछ पत्रकार दीपक चौरसिया की पत्रकारिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर पत्रकार भी एक तरह से दो खेमों में विभाजित हैं। एक खेमा दीपक के समर्थन में है और दूसरा विरोध में। इसी क्रम में पत्रकार श्रीनिवास जैन के एक ट्वीट पर सहमति जताते हुए रोहिणी सिंह ने चौरसिया पर तंज कसा था। उन्होंने लिखा था, ‘बेशक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर हमले को सही करार नहीं दिया जा सकता। और चूंकि उन पर हमला हुआ है, इसलिए वह पत्रकार नहीं हो जाते। शिष्टाचार का दायित्व चौरसिया और उनके हमलावर दोनों को उठाना होगा।’

अब दीपक ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है, ‘रोहिणी मैं एक गरीब पृष्ठभूमि से आकर अपने दम पर पत्रकारिता की। मेरा कसूर सिर्फ इतना है कि मैं आप की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हूं! मेरा वित्त मंत्रालय में परिचय नीरा राडिया ने नहीं कराया! न ही मैंने आजतक किसी सरकार से 3BHK फ़्लैट लेकर खबरें लिखी है’! 

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दोस्त के कुत्ते ने दिखाई 'वफादारी', संपादक के घर हुए हमले को यूं किया नाकाम

चेन्नई की तमिल मैगजीन ‘तुगलक’ के संपादक एस. गुरुमूर्ति के घर रविवार को बाइक सवार 8 लोगों ने पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश की गई।

Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
gurumurthi

चेन्नई की तमिल मैगजीन ‘तुगलक’ (Tughlaq) के संपादक एस. गुरुमूर्ति के घर रविवार को बाइक सवार 8 लोगों ने पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश की गई। हालांकि, कुत्ते के भौंकने और सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता की वजह से हमलावर अपनी मंशा में सफल नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने अब थंथई पेरियार द्रविड़ कषगम (टीपीडीके) के आठ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

पुलिस आयुक्त ए.के. विश्वनाथन ने सोमवार को बताया कि हमले की कोशिश रविवार की सुबह तीन बजे हुई। घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आईसीएफ के जर्नाधन और रॉयपेट्टा के शशिकुमार, बालू, तमीष, प्रशांत, शक्ति, दीपन और वासुदेवन को गिरफ्तार किया गया है। शशिकुमार पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर वूडलैंड्स होटल और सत्यम थिएटर पर पेट्रोल बम फेंकने के भी आरोप हैं।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस रविवार को ही जांच शुरू कर दी थी लेकिन गणतंत्र दिवस की वजह से मीडिया में इसके बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया गया। तमिल पत्रिका ‘तुगलक’ ने तर्कवादी नेता ईवी रामास्वामी पेरियार (EV Ramaswami Periyar) के नेतृत्व वाली 1971 की रैली से जुड़ी कुछ तस्वीरें दोबारा प्रकाशित की थी., जिसके कुछ दिनों बाद चार मोटरसाइकिलों पर सवार आठ लोग रविवार को तड़के तीन बजे गुरुमूर्ति के घर के बाहर पहुंचे और उनके घर पर पेट्रोल बम से हमला करने की कोशिश की। 

जांच के तहत जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाला तो देखा कि आठ लोग चार बाइक पर सवार होकर गुरुमूर्ति के आवास के पास आए। उनमें से एक के पास संदिग्ध बैग भी था। उसके बाद आरोपी गुरुमूर्ति के घर के परिसर में बॉटल फेकने की कोशिश की। इसी दौरान गुरुमूर्ति के घर पर मौजूद कुत्ता भौंकने लगा। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने जब उनका पीछा किया तो हमलावर वहां से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस आयुक्त समेत अन्य उच्च पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मौका मुआयना किया और सीसीटीवी के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई है।

वहीं, गुरुमूर्ति ने हमले के बारे में जानकारी साझा करते हुए ट्वीट किया, 'मेरे परिवार की जीवनशैली कुत्ता रखने की अनुमति नहीं देती, लेकिन मेरे पुराने दोस्त अपने एक कुत्ते को रात दस बजे से सुबह पांच बजे तक मेरे घर पर पहरेदारी के लिए भेज देते हैं। यह सिलसिला पिछले पांच वर्षो से चल रहा है।'

गुरुमूर्ति ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी उन्हें सलाह दे चुके हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। खुफिया विभाग के एक अधिकारी अकसर उनके घर आते हैं और सतर्क करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मारने की यह पहली कोशिश नहीं है, बल्कि यह सिलसिला तो 30 वर्षो से चल रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में भी गुरुमूर्ति के आवास पर ऐसी ही घटना हुई थी।

 

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विवादित ट्वीट के बाद बड़े अखबार ने महिला पत्रकार के खिलाफ लिया कड़ा एक्शन

विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 28 January, 2020
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बास्केटबॉल स्टार अमेरिका के कोबे ब्रायंट की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में रविवार को मौत हो गई, जिसके बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है। लेकिन इस बीच उनके निधन पर विवादित ट्वीट को लेकर एक महिला पत्रकार विवादों में घिर गईं, जिसके बाद संस्थान ने उन्हें निलंबित कर दिया है।   

दरअसल, अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) ने अपनी पत्रकार फेलिसिया सोमेज (Felicia Sonmez) के खिलाफ यह फैसला लिया है। कोबे ब्रायंट के निधन के बाद विवादित ट्वीट पर संस्थान ने पत्रकार को निलंबित कर दिया है।

फेलिसिया सोमेज ने 2016 की ‘डेली बीस्ट’ (Daily Beast) की एक रिपोर्ट के शीर्षक (Kobe Bryant's Disturbing Rape Case: The DNA Evidence, the Accuser's Story, and the Half-Confession) को अपनी पोस्ट में डालते हुए विवादित टिप्पणी की। दरअसल 2016 में एक दुष्कर्म मामले में कोबे का नाम आया था।

हालांकि आलोचनाओं के बाद पत्रकार फेलिसिया सोमेज को यह ट्वीट हटाना पड़ा। उन्होंने एक मीडिया वेबसाइट को बताया कि 10 हजार से ज्यादा लोगों ने उनकी पोस्ट पर आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्हें गलियों भरे मेल भेजे गए और जान मारने की धमकी भी दी गई।

वहीं दूसरी तरफ, वॉशिंगटन पोस्ट को भी पत्रकार फेलिसिया सोमेज को निलंबित करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वॉशिंगटन पोस्ट की मैनेजिंग एडिटर ट्रेसी ग्रांट को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि फेलिसिया सोमेज को जांच हो पूरी हो जाने तक फिलहाल छुट्टी पर भेजा गया है और ये पता लगाया जा रहा है कि क्या उनके ट्वीट ‘न्यूजरूम की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन’ तो नहीं है।

फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स दो ग्रुप्स में बंटे नजर आ रहे हैं। एक ग्रुप का मानना है कि फेलिसिया सोमेज न केवल निलंबित किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्थान से निकाल दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोग वॉशिंगटन पोस्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना ​​है कि यह कदम एक खतरनाक नज़ीर पेश करता है।

गौरतलब है कि रविवार को हेलिकॉप्टर हादसे में कोबे ब्रायंट और उनकी बेटी गियाना मारिया (13) समेत कुल नौ लोगों की मौत हो गई थी। कोबे अपने निजी हेलिकॉप्टर में थे। इस दुखद घटना के कुछ घंटों बाद ही फेलिसिया ने यह ट्वीट किया था।

 

 

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जानिए, क्यों दीपक चौरसिया को लेकर दो खेमों में बंटे पत्रकार

आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
deepak

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर दिल्ली के शाहीनबाग में हुए हमले को भले ही दो दिन गुजर चुके हों, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अभी भी गर्माया हुआ है। कुछ पत्रकारों ने जहां इस घटना की निंदा की है, वहीं कुछ इसके लिए दीपक चौरसिया को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं। दरअसल, चौरसिया को ऐसे पत्रकार के रूप में देखा जाता है जो मोदी सरकार की नीतियों पर प्रहार नहीं करते, इसलिए जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में उन्हें निशाना बनाया गया, तो कई लोगों ने इसे साजिश की तरह से देखा, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर पत्रकार भी पक्ष-विपक्ष की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

‘इंडिया टुडे’ समूह के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने दीपक चौरसिया पर सवाल खड़े करने के लिए ‘द वायर’ की आरफा खानम शेरवानी को आड़े हाथों लिया है। आरफा ने शाहीनबाग की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा था, ‘दीपक चौरसिया के साथ जो कुछ हुआ वह निंदनीय है, लेकिन यह पत्रकार या पत्रकारिता पर हमला नहीं है। सरकार के समक्ष नतमस्तक हो जाना पत्रकारिता नहीं होती। उत्पीड़ित समुदायों का गलत चित्रण पत्रकारिता नहीं कहलाती। एक पत्रकार के विशेषाधिकारों का दावा न करें, क्योंकि आप पत्रकार नहीं हैं’।

इसके जवाब में राहुल ने कहा, ‘बकवास तर्क। दीपक चौरसिया जैसी चाहें, वैसी पत्रकारिता रखने का अधिकार रखते हैं। यदि आपको पसंद नहीं तो न देखें। लेकिन एक पत्रकार पर सिर्फ इसलिए हमला करना क्योंकि आप उसकी बात को पसंद नहीं करते, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की असहिष्णुता को दर्शाता है’।    

     

इसी तरह महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले ने जहां घटना के लिए चौरसिया को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं ‘डीडी न्यूज’ के एंकर अशोक श्रीवास्तव उनके पक्ष में उतर आये हैं। उन्होंने वाघले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है ‘दीपक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि वह शाहीनबाग किसी खास मिशन पर गए थे या नहीं’।

अशोक श्रीवास्तव ने इसे लेकर वाघले पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है ‘ये आदमी खुद को पत्रकार कहता है। आजकल सर्टिफिकेट बांट रहा है कि कौन पत्रकार है, कौन नहीं। मुझे इसने ब्लॉक कर दिया है, आप लोग पूछ लें कि कब सड़क पर नंगे होकर दौड़ लगाएंगे ये। 2019 के चुनावों से पहले इसने ट्वीट किया था कि मोदी जीते तो नंगा होकर सड़क पर दौडूंगा’।

इसके साथ ही श्रीवास्तव ने ‘द प्रिंट’ की पत्रकार जानिब सिकंदर को भी निशाना बनाते हुए लिखा है ‘ये @print से जुड़ीं पत्रकार हैं, जिसके आका @ShekharGupta हैं। इन्हें लगता है कि #ShaheenBagh में पत्रकारों की जो पिटाई "polite" तरीके से हुई। ये वो जमात है जो चाहती है कि इनके पक्ष में जो न बोले उसे लिंच कर दो, मार दो। ये बाबरी मानसिकता वाले पत्रकार हैं’। कई अन्य पत्रकार भी इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच प्रदर्शित करते सोशल मीडिया पर नजर आ रहे हैं।

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पद्म पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट में इन वरिष्ठ पत्रकारों ने भी बनाई अपनी जगह

हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है विभिन्न श्रेणियों में दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की घोषणा

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Padma awards

पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है। देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ के लिए चुने गए दिग्गजों की लिस्ट में तीन पत्रकारों का नाम भी शामिल है। इसके तहत कर्नाटक में मैसूर से निकलने वाले संस्कृत के एकमात्र अखबार ‘सुधर्मा’ (Sudharma) के संपादक-प्रकाशक केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी के अलावा मिजोरम के वरिष्ठ पत्रकार लालबियाक्थंगा पचुआऊ को इस सम्मान के लिए चुना गया है। केवी संपत कुमार, उनकी पत्नी जयलक्ष्मी को संयुक्त रूप से इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 

संस्कृत के विद्वान पंडित वरदराज आयंगर (Pandit Varadaraja Iyengar) ने संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए 15 जुलाई 1970 को सुधर्मा की शुरुआत की थी। अब उनके पुत्र केवी संपत कुमार और उनकी पत्नी जयलक्ष्मी इस अखबार को बचाए रखने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। A-3 आकार में छपने वाले इस अखबार के करीब 3000 सबस्क्राइबर्स हैं, जिनमें से अधिकांशतः विभिन्न संस्थान अथवा लाइब्रेरी हैं, जिन्हें यह अखबार डाक के द्वारा भेजा जाता है। इस अखबार के ई-वर्जन के करीब एक लाख पाठक हैं।

इन दोनों के अलावा, मिजोरम के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने गणतंत्र दिवस पर रविवार को अपने भाषण में कहा कि केंद्र द्वारा पद्मश्री पुरस्कार के लिए शनिवार को घोषित लोगों में पचुआऊ का नाम भी शामिल है। 94 वर्षीय पचुयाऊ ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1953 में छोटे से अखबार जोराम थुपुआन से की थी। वह 1970 से स्थानीय दैनिक अखबार ‘जोराम त्लांगाऊ’ के संपादक हैं। मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) में पचुआऊ तीन बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बता दें कि मिजोरम सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग तथा मिजोरम पत्रकार संघ (एमजेए) ने अक्टूबर 2016 में पचुआऊ को ‘देश में सबसे उम्रदराज श्रमजीवी पत्रकार’ घोषित किया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पचुआऊ 1945 में सेना में शामिल होकर कई सैन्य पुरस्कार भी जीत चुके हैं। यही नहीं, 1980 के दशक में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और केंद्र के बीच शांति वार्ता में पचुआऊ अहम प्रतिनिधि थे।

बता दें कि इस साल सात प्रमुख हस्तियों को पद्म विभूषण, 16 शख्सियतों को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म अवॉर्ड के विजेताओं की लिस्ट आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं। 

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मंत्री ने सरकारी कार्यक्रम से काटा वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा का नाम, फिर बोले ये बात

गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है।

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
Faye D'souza

शॉर्ट विडियो सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘फायरवर्क’ (Firework) के साथ हाल ही में अपनी नई पारी शुरू करने वाली वरिष्ठ पत्रकार फे डिसूजा सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा सरकार ने अपने कार्यक्रम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में फे डिसूजा का नाम स्पीकर की सूची से हटा दिया है। खबरों की मानें तो पत्रकार का प्रोफाइल और स्टैंड देखकर उनका नाम स्पीकर की सूची से हटाया गया है, क्योंकि वे  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करती रही हैं।

इस मामले में गोवा के कला और संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने सफाई भी दी है। उन्होंने कहा, ‘यह सरकार का कार्यक्रम है और आयोजक इसमें किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहते थे इसीलिए यह फैसला लिया गया है।’

बता दें कि 27 से 30 जनवरी को पणजी की कला अकादमी में आयोजित किए गए गोवा सरकार के प्रोग्राम 'डीडी कौशांबी फेस्टिवल ऑफ आइडियाज' में उन्हें बतौर वक्ता बुलाया गया था। डिसूजा को इस कार्यक्रम में 29 जनवरी को भाषण देना था। यह प्रोग्राम कला और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित किया गया है।

संस्कृति मंत्री गोविंद गवाडे ने कहा कि उनका (फाये डिसूजा) का नाम शॉर्टलिस्ट था, लेकिन पता चला कि वह संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ बोलने वाली हैं। उन्होंने आगे कहा कि समझने की कोशिश कीजिए। यह कोई छोटा या निजी इवेंट नहीं है। यह सरकारी कार्यक्रम है और हम नहीं चाहते कि इसमें कोई विवाद हो, इसीलिए स्पीकर के तौर पर उनका नाम हटाने का फैसला किया गया।

वहीं समारोह से डिसूजा का नाम हटाने के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिलने की बात का उन्होंने खंडन किया है। गावडे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हमेशा कहा है कि वे सीएए पर किसी भी तरह की बहस करने को तैयार हैं। इसलिए उनकी तरफ से कोई निर्देश आने का सवाल ही नहीं उठता।

दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां सरकार के इस कदम की आलोचना कर रही है और इसे असंवैधानिक बता रही हैं।

 

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स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर TRAI ने फिर बढ़ाई यह तारीख

ट्राई द्वारा 27 नवंबर को Transparency in Publishing of Tariff Offers पर कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी

Last Modified:
Monday, 27 January, 2020
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने ‘Transparency in Publishing of Tariff Offers’ पर कंसल्टेशन पेपर (परामर्श पत्र) के लिए लिखित रूप से अपने कमेंट्स जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर सात फरवरी 2020 कर दी है।

दरअसल, स्टेकहोल्डर्स ने कंसल्टेशन पेपर पर अपने कमेंट्स भेजने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी,जिस पर ट्राई ने इसकी समय सीमा बढ़ाकर सात फरवरी करने का निर्णय लिया है। वहीं, इन कमेंट्स पर जवाबी कमेंट्स जमा करने की तारीख 21 फरवरी 2020 रखी गई है।

बता दें कि ट्राई द्वारा 27 नवंबर को कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे और स्टेकहोल्डर्स को अपने लिखित कमेंट्स दाखिल करने के लिए 26 दिसंबर 2019 की तारीख दी गई थी, जबकि 9 जनवरी 2020 तक इनके जवाबी कमेंट्स दाखिल किए जा सकते थे।  

बाद में स्टेकहोल्डर्स के अनुरोध पर कमेंट्स जमा करने के लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 23 जनवरी 2020 और इन कमेंट्स के जवाबी कमेंट्स के लिए यह तारीख छह फरवरी कर दी गई थी।

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दीपक चौरसिया के समर्थन में उतरे वरिष्ठ पत्रकार, यूं साधा हमलावरों पर ‘निशाना’

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरना प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया व उनकी टीम के साथ की गई थी बदसलूकी

Last Modified:
Saturday, 25 January, 2020
Deepak Chaurasia

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसे लेकर हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। यहां तक कि मीडिया को भी प्रदर्शनकारी अपना निशाना बना रहे हैं। शाहीन बाग में करीब एक महीने से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी भी शुक्रवार को हिंसा पर उतर आए और वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने गए वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया के साथ बदसलूकी कर दी। यही नहीं उन्होंने न्यूज नेशन के कैमरामैन का कैमरा भी तोड़ दिया।

दीपक चौरसिया से मारपीट और कैमरे छीनने के मामले में कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा 394 (लूट के दौरान चोट पहुंचाने) के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कवरेज के दौरान मीडिया पर इस तरह के हमले काफी चिंता का विषय हैं।

दीपक चौरसिया पर हुए हमले के बाद कई वरिष्ठ पत्रकारों ने दीपक चौरसिया के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और इस घटना का विरोध किया है।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘जी न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने शाहीन बाग में दीपक चौरसिया पर हुए हमले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है, 'यह असहिष्णुता अस्वीकार्य है। शाहीनबाग उनका (हमलावरों का) नहीं है। यह अभी भी लोकतांत्रिक भारत का एक हिस्सा है। मैं सभी संपादकों और प्राइम टाइम एंकरों से आग्रह करता हूं कि वे शाहीन बाग से अपने न्यूज शो करें।'

एक अन्य ट्वीट में उनका यह भी कहना है, 'शाहीन बाग किसी के बाप का नहीं।एक पत्रकार के साथ ऐसी गुंडागर्दी करके प्रदर्शनकारियों ने बता दिया कि वो कितने असहनशील हैं और अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ उनके लिए है। पूरे देश को इस घटना का विरोध करना चाहिए।'

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने भी एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘शाहीन बाग में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ हुई बदसलूकी की घटना काफी निंदाजनक है। यदि आपको (प्रदर्शनकारियों को) मीडिया से कोई दिक्कत है तो वह अपना चैनल बंद कर दें। कैमरों को तोड़ना और पत्रकारों के साथ मारपीट करना गुंडागर्दी है। दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’

'आजतक' के संपादक  सुप्रिय प्रसाद ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा है, 'आप किसी पत्रकार को अपना काम करने से इस तरह नहीं रोक सकते हैं। मैं इस तरह की घटना की घोर भर्त्सना करता हूं।'

‘न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिश देवगन ने भी दीपक चौरसिया पर हुए हमले को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में इस घटना को शर्मनाक बताया है।

‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने भी दीपक चौरसिया पर हमला करने वालों को आड़े हाथ लिया है।

बता दें कि पिछले दिनों इस कानून के विरोध में जेएनयू में गुस्साए छात्रों ने भी मीडिया पर हमला कर दिया था। छात्रों के हमले में कई मीडियाकर्मी घायल हुए थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया था। इसके अलावा हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कैंपस में भी प्रदर्शन को कवर करने पहुंचीं ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम पर प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था और 7 रिपोर्टर्स के साथ धक्का मुक्की की थी। इतना ही नहीं, हमलावरों ने ‘रिपब्लिक टीवी’ की टीम का कैमरा छीनने और जबरदस्ती फुटेज डिलीट करने की भी कोशिश की थी।

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