जल्‍द बदलने जा रही है पत्रकारिता की सूरत व सीरत: शशि शेखर

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के नोएडा सेक्‍टर 62 स्थित स्‍थानीय परिसर में

Last Modified:
Friday, 24 August, 2018
Samachar4media

अभिषेक मेहरोत्रा ।।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय के नोएडा सेक्‍टर 62 स्थित स्‍थानीय परिसर में शुक्रवार को नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि व 'हिन्‍दुस्‍तान मीडिया ग्रुप' के प्रधान संपादक शशि शेखर ने छात्रों को पत्रकारिता की बारीकियों और इसकी चुनौतियों से अवगत कराया। उन्‍होंने कहा कि अपनी व्‍यस्‍तता के बावजूद आज यहां के कार्यक्रम में वह इसलिए आए हैं, क्‍योंकि वह समझते हैं कि नई फसल (नए छात्रों) को 'खाद-पानी' देने की जिम्‍मेदारी हमारी भी है।

अतीत के साथ आगे बढ़ने की भी सोच रखें:  शशि शेखर ने कहा, 'मुझे आज भी वह दिन याद है, जब 1980 में मैं एक अखबार में काम करता था। उस समय उस अखबार के दफ्तर में हिंदी के जाने-माने पत्रकार बाबूराव विष्णु पराड़कर के साथ काम किए हुए कई लोग कार्यरत थे। ऐसे में अपने कामकाज के दौरान दिनभर में वे लोग कई बार पराड़कर जी का नाम लेते थे। इस बात पर फिर मैंने उन्‍हें किसी तरह समझाया। कहने का मतलब है कि वे लोग सिर्फ अतीत पर चल रहे थे, जबकि आगे की नहीं सोच रहे थे। जबकि जीवन में हमेशा आगे बढ़ने की सोच रखनी चाहिए।  


बदलने जा रही है पत्रकारिता की पूरी सूरत : जब मेरी उम्र महज 20 वर्ष थी और मैं एमए में पढ़ता था। उस समय मैं पुरातत्‍ववेत्‍ता (आर्कियोलॉजिस्‍ट) बनने का सपना देखा करता था। तब से लेकर अब तक मेरा मानना है कि हर नई टेक्‍नोलॉजी नौजवानों के लिए उम्‍मीदों के नए दरवाजे खोलती है।मुझसे एक दिन किसी ने कहा कि टेक्‍नोलॉजी चेंज होने वाली है। इसलिए मैंने तय किया कि चलो अब यही काम करते हैं। आज टेक्नोलॉजी ही नहीं, पत्रकारिता की पूरी शक्‍ल-सूरत और सीरत बदलने जा रही है। अब बड़े मीडिया संस्‍थान पहले जैसे नहीं रहे हैं। यहां नौकरियां धीरे-धीरे खत्‍म होती जा रही हैं। आपको ध्‍यान होगा कि पुराने जमाने में जिस तरह डायल करने वाला फोन चलता था, वह अब बिल्‍कुल बदल चुका है। देखते ही देखते डाकिए ने भी घर का दरवाजा खटखटाना बंद कर दिया है। देखते ही देखते टाइपराइटर भी खत्‍म हो गया है। मेरा मानना है कि आज से पांच-छह साल के अंदर आपका मोबाइल ही आपकी जिंदगी बन जाएगा।

हालांकि बन तो यह आज भी गया है लेकिन आने वाले समय में तो पूरी तरह आपकी जिंदगी इसी पर निर्भर होगी। इसमें आपके हाथ में ही एक चिप लगा दी जाएगी और आप अपनी हथेली के द्वारा ही इसे ऑपरेट कर सकेंगे। यानी जिस तरह पुराने जमाने में ऋषि-मुनि कहते थे कि मैं ही ब्रह्म हूं, मुझे ऐसा लगता है कि उसी तरह आपका ब्रह्मांड आपकी हथेली में समाया होगा। आपके पास कैमरा होगा, एडिट करने के साधन होंगे और आप चलते फिरते ऐसे व्‍यक्ति में तब्‍दील हो जाएंगे कि जो चाहे-जैसे चाहे खबर कवर कर लो।

नई दुनिया के सपने देखें : आप सभी को नई टेक्‍नोलॉजी के साथ सामंजस्य बिठाकर चलना है। यदि आपने अभी इसके बारे में नहीं सोचा है तो आज से ही सोचना शुरू कर दें। मेरा मानना है कि जितने आप आने वाली नई दुनिया के सपने देखेंगे, उतने ही आपके लिए रास्‍ते बनेंगे। जब सिकंदर ने विश्‍व विजय के बारे में सोचा और दुनिया के महान दार्शनिकों में शुमार अपने गुरु से इसकी चर्चा की तो गुरु ने ग्‍लोब दिखाते हुए कहा कि इतनी बड़ी दुनिया में तुम कहां जाओगे। इस पर सिकंदर ने अपनी तलवार से उस ग्‍लोब को चीर दिया और कहा कि मैं नया ग्‍लोब बनाऊंगा। कहने का मतलब है कि जब उस जमाने में सिकंदर ने ऐसा सोचा तो आप तो नई पीढ़ी के हैं और सपने देखने के लिए स्‍वतंत्र हैं। इसके अलावा टेक्‍नोलॉजी का सपोर्ट भी हम सभी को मिल रहा है। ऐसे में आपको सपने देखकर उन्‍हें पूरा करना है।


बुरी चीज नहीं है बाजार : आज 'बाजार' शब्‍द को स्‍कूलों में काफी बुरे तरीके से बोला जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि ऐसा करना ठीक नहीं है। आज यदि बाजार सच्‍चाई है तो इस सच्‍चाई से मुंह मोड़ने का कोई मतलब नहीं है। बाजार को गंदा तालाब बनने से रोकना हमारी जिम्‍मेदारी है लेकिन बाजार को गंदा तालाब मानकर उसमें उतरने से संकोच नहीं करना चाहिए। यह दुनिया पलायनवादियों के लिए नहीं है। यह दुनिया किसी पलायनवादी ने नहीं बल्कि उद्यमियों ने बनाई है। इस दुनिया का हिस्‍सा और एक पत्रकार होने के नाते इस बात को याद रखना कि बाजार कोई बुरी चीज नहीं है।

कभी न छोड़ें सच का साथ : आप लोगों को दो बातें जरूर याद रखनी चाहिए। पहली ये कि खबर का अकेला प्राण तत्‍व और उसकी सांस सत्‍य है। ऐसे में जाने-अनजाने किसी भी रूप में प्रोफेशनल तरीके से सत्‍य का संधान करते रहना चाहिए। यानी उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सत्‍य के प्रति आप जितनी आस्‍था बनाकर रखेंगे, उतना ही जनता आपका यकीन करेगी।

हर संघर्ष के पीछे छिपा रहता है नया अवसर : आजकल फेकन्‍यूज का बहुत बोलबाला है। कहा जाता है कि आजकल बड़ा झूठ बोला जा रहा है। ऐसा है तो मेरी नजर में यह अच्‍छा है क्‍योंकि सच बोलने वालों की अहमियत तो तभी पता चलेगी जब झूठ बोलने वाले होंगे। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यदि रावण नहीं होता तो राम को कौन पूछता। यदि कंस नहीं होता तो कृष्‍ण कैसे होते। कभी-कभी मुझे लगता है कि हम अक्‍सर अवसादों को अपने चारों ओर घेरे रहते हैं जबकि हर संघर्ष और हर बुराई और हर कठिन समय हमारे सामने चुनौती देता रहता है और हमें एक अवसर मुहैया कराता है। मैंने आपको नई उमर की नई फसल इसलिए कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि आने वाला समय जब आपका हो और आपको टेक्‍नोलॉजी का भी सपोर्ट मिल रहा हो तो इस अवसर का लाभ जरूर लेना चाहिए।

सोशल मीडिया आपका साथ देगी : आज की युवा पीढ़ी को एक बात और ध्‍यान रखनी चाहिए कि जब दुनिया में कोई आविष्‍कार होता है और दुनिया तेजी से आगे बढ़ती है तो उसके साथ बहुत बुराइयां भी आते हैं। ऐसे में जब आप इनसे लड़ने के लिए पत्रकारिता की मशाल लेकर खड़े होंगे तो फिर चाहे आप अकेले ही क्‍यों न हों, दुनिया के हजारों लोग लाइक और कमेंट्स के जरिये आप का साथ देंगे। ये भूमंडलीयकरण की शुरुआत होगी और आप उस दुनिया का हिस्‍सा बनने के लिए तैयार रहिए।

काम से बनती है पहचान : एक आखिरी बात और आपसे कहना चाहता हूं कि पत्रकारिता न जाने कब और कैसे ग्‍लैमर में तब्‍दील हो गई, पता ही नहीं चला। पत्रकारिता पद व लोकप्रियता आदि से नहीं पहचानी जाती है, क्‍योंकि ये सब चीजें तो आती-जाती रहती हैं। आप लोग शायद ही फिल्मी दुनिया में मशहूर रहे 'मोतीलाल जी' का नाम जानते होंगे, लेकिन मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मोतीलाल जी हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे स्‍टार थे जिन्‍होंने टेक्‍नोलॉजी के हिसाब से लोगों को डायलॉग डिलीवरी सिखाई। राजकपूर और दिलीप कुमार व देवानंद उन्‍हें अपनी फिल्‍मों में लेने के लिए इस कदर बेताब रहते थे जैसे बाद के दिनों में अभिनेता प्राण हो गए थे और आज अमिताभ बच्‍चन हो गए हैं। कहने का मतलब है कि नाम उन्‍हीं लोगों के याद रहते हैं, जिन्‍होंने कुछ ठोस काम किया हो।


सरकार गिरा देती है सच्ची पत्रकारिता : पत्रकारिता और सच्‍चाई का कितना प्रभाव पड़ता है, इसे मैं आपको विएतनाम की एक घटना से बताता हूं। उस समय एक आठ साल की बच्‍ची की फोटो किसी फोटोग्राफर ने खींची थी, जिसमें उसके पीछे बमों के धमाके हो रहे थे आग उठ रहे थे और वह निर्वस्‍त्र दौड़ रही थी। जिस दिन वह फोटो अमेरिकी अखबारों में छपी, उसी दिन तय हो गया अब युद्ध नहीं होगा। अमेरिका के लोग विएतनाम के पक्ष में आ गए थे। इसी तरह द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान छपी एक फोटो से लोगों के मन में हिटलर के प्रति घृणा काफी बढ़ गई थी।

इंसानियत है तो पत्रकारिता है : मैं आप लोगों से कहना चाहता हूं कि इंसानियत है तो पत्रकारिता है और पत्रकारिता है तो आप और हम हैं। और यदि हम और आप हैं तो पत्रकारिता है। साहिर लुधियानवी की चार पंक्तियों से मैं अपनी बात समाप्‍त करना चाहता हूं...

कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले

मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले।

तू अपनी अदाएं बख्‍श इन्हें, मैं अपनी वफाएं देता हूं,

जो अपने लिए सोची थी कभी वो सारी दुआएं देता हूं।

 

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पत्रकार से राजनेता बनीं सुप्रिया श्रीनेत को कांग्रेस ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

करीब छह माह पूर्व टाइम्स नेटवर्क के बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद से दिया था इस्तीफा

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Supriya Shrinate

टाइम्स नेटवर्क के बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET NOW) के एग्जिक्यूटिव एडिटर का पद छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वालीं सुप्रिया श्रीनेत को पार्टी ने अब बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर नियुक्त किया है।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की ओर से शनिवार को एक बयान जारी किया गया है। इसमें बताया गया है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुप्रिया की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने इस बार के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की महराजगंज सीट से सुप्रिया श्रीनेत को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद सुप्रिय श्रीनेत ने ‘ईटी नाउ’ से इस्तीफा दे दिया था। वह टाइम्स ग्रुप से करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं। हालांकि चुनाव में उन्हें भाजपा के पंकज चौधरी से हार का सामना करना पड़ा था। उनके पिता हर्षवर्धन इसी सीट से दो बार सांसद रहे थे।

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अब विदेशी पत्रकारों से मिलेंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत, तय हुई तारीख

अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस कार्यक्रम की विडियो कवरेज की अनुमति मिलेगी या नहीं या केवल बंद कमरे में ही चर्चा होगी

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Mohan Bhagwat

अगर आप किसी भी विदेशी मीडिया समूह के प्रतिनिधि के तौर पर भारत में पत्रकारिता कर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है। दशकों तक मीडिया के लिए पहेली रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस लगातार समाज के अन्य क्षेत्रों के दिग्गजों ही नहीं, मीडिया के लोगों से भी पिछले कुछ सालों से खुलने में लगा हुआ है और शायद ये पहली बार होगा कि कोई संघ प्रमुख केवल विदेशी पत्रकारों से मिलने के लिए कोई खास कार्यक्रम आयोजित करे।

ये कार्यक्रम 24 सितंबर को दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा। इधर, 23 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा कार्यक्रम अमेरिका के ह्यूस्टन शहर मे होना है, जिसका नाम है हाउडी मोदी। ऐसे में मीडिया वालों को 24 तक फुरसत भी मिल जाएगी। मोहन भागवत ने पिछले साल भी सितंबर में ‘भविष्य का भारत’ नाम से तीन दिन की एक लेक्चर सीरीज शुरू की थी, जिसमें समाज के विभिन्न हिस्सों से लोग आए थे। इसमें अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी थी, क्योंकि वो अपनी फिल्म मंटो का प्रीमियर छोड़कर वहां आए थे।

वैसे भी बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल संघ में वापस जाकर सह सम्पर्क प्रमुख बन गए हैं, तो उनका काम होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को संघ के सम्पर्क में लाना, उनकी गलतफहमियां दूर करना आदि। विदेशी मीडिया से जुड़े पत्रकारों से मुलाकात का ये कार्यक्रम खास तौर पर इसी दिशा में रखा गया है। ताकि वो अपने हर सवाल, हर गलतफहमी जो उन्हें संघ के बारे में है, संघ प्रमुख से पूछ सकें।

इस कायर्कम के बारे में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार का कहना है कि, ‘ये कार्यक्रम परस्पर संवाद का है। मोहन भागवतजी इस संवाद में विदेशी मीडिया के पत्रकारों को संघ के कार्य व प्रासंगिक विषयों पर संघ के विचारों से अवगत कराएंगे तथा उनसे इसी संबंध में एक प्रासंगिक चर्चा करेंगे।’ हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि  इस कार्यक्रम की विडियो कवरेज की अनुमति मिलेगी या नहीं या केवल बंद कमरे में ही चर्चा होगी। लेकिन इतना तय है कि उसके बाद कुछ बड़ी हेडलाइंस दुनिया भर के अखबारों, टीवी चैनल्स में बनना तय है।

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गूगल को बाय बोल स्टार इंडिया से जुड़े नितिन बवनकुले, मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में कई बड़ी कंपनियों में निभा चुके हैं भूमिका, ‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को रिपोर्ट करेंगे

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Nitin-Bawankule

‘स्टार इंडिया’ (Star India) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि  नितिन बवनकुले ने यहां पर हेड (एड सेल्स)  के तौर पर जॉइन किया है। वह एक अक्टूबर से यहां अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। वह ‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के कंट्री मैनेजर संजय गुप्ता को रिपोर्ट करेंगे।   

बता दें कि बवनकुले ‘गूगल क्लाउड इंडिया’ (Google Cloud India) से यहां आए हैं, जहां पर वे कंट्री डायरेक्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गूगल से वह आठ साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। बवनकुले ‘स्टार इंडिया’ में अमित चोपड़ा की जगह लेंगे, जिन्होंने इसी साल मई में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

बवनकुले को सेल्स और डिजिटल के क्षेत्र में काम करने का करीब 25 साल का अनुभव है। पूर्व में वह ‘डेल’, ‘मोटोरोला’, ‘व्हर्लपूल इंडिया’ और ‘गोदरेज जी अप्लायंसेज’ जैसे संस्थानों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। बवनकुले ने विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए की पढ़ाई भी की है।   

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मीडिया इंडस्ट्री के लिए कैसे फायदे का सौदा होगा ये सरकारी कदम, पढ़ें यहां

एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है

Last Modified:
Saturday, 21 September, 2019
Media

कारोबारियों को राहत देने के उद्देश्य से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कारपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की घोषणा का फायदा मीडिया जगत को भी मिलने वाला है। दरअसल, सरकार ने शुक्रवार को बेसिक कॉरपोरेट 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी होगा, जबकि सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी दर 25.17 फीसदी हो जाएगी। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में कमी का सामना कर रहे अखबार, टीवी और मीडिया के अन्य सेगमेंट्स के लिए यह काफी अच्छी खबर है।

अंग्रेजी वेबसाइट ‘लाइवमिंट’ (Livemint) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में ‘डेलायट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर जेहिल ठक्कर का कहना है, ‘सरकार के इस फैसले से मीडिया इंडस्ट्री को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से फायदा होगा। डायरेक्टली फायदा इस तरह होगा कि टैक्स में कमी आने से संकट के इस दौर में इंडस्ट्री में कैश का ज्यादा फ्लो होगा। इनडायरेक्टली फायदा ये होगा कि नए प्रॉडक्ट लॉन्च हो सकते हैं अथवा नई कंपनी शुरू हो सकती हैं, जो आने वाले समय में विज्ञापन में बढ़ोतरी का कारण बन सकती हैं।’

ऑडिट एवं परामर्श देने वाली कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने पिछले दिनों मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E) से जुड़ी जो रिपोर्ट जारी की थी, उसके अनुसार कुल एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में प्रिंट मीडिया का जो शेयर वित्तीय वर्ष 2018 (FY18) में 35 प्रतिशत था, वह वर्ष 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। वहीं, ‘फिक्की-ईवाई’ (FICCI-EY) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजपेपर्स का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू एक प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैगजींस के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में आठ प्रतिशत की गिरावट हुई है।

जनवरी की शुरुआत में, सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन द्वारा प्रिंट मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों की दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी थी। इसके बाद प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए एडवर्टाइजिंग की दरों में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई थी।   

अब कॉरपोरेट टैक्स में कटौती किए जाने की सरकार की घोषणा के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (Zee Entertainment Enterprises Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका का कहना है, ‘कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत की कमी किया जाना वास्तव में काफी अच्छा कदम है। इससे भारतीय कंपनियों को काफी फायदा होगा।’

वहीं, ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है, ‘टैक्स में कमी किए जाने से प्रॉफिट बढ़ेगा और बिजनेसमैन के हाथों में पैसा आएगा, जिससे वे आगे निवेश करेंगे। इसका आर्थिक विकास पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।’

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डॉक्टर का यह सवाल सुनते ही रफूचक्कर हुआ अस्पताल में हंगामा कर रहा ‘पत्रकार’

इलाज के लिए राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचा था खुद को पत्रकार बता रहा युवक, धमका रहा था स्टाफ को

Last Modified:
Friday, 20 September, 2019
Journalist

खुद को पत्रकार बताकर अस्पताल कर्मियों को धमका रहा युवक उस समय बैकफुट पर आ गया, जब कार्यवाहक पीएमओ ने उससे पहचान पत्र मांग लिया। पहले तो युवक तमाम बहाने बनाता रहा, फिर मौका देखकर वहां से रफूचक्कर हो गया।

यह मामला है राजस्थान में बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का, जहां गुरुवार सुबर एक युवक इलाज के लिए पहुंचा था। उस दौरान सभी डॉक्टर्स वार्डों में मरीजों को देखने के लिए गए हुए थे। ऐसे में सीट पर डॉक्टरों को न पाकर युवक भड़क गया और खुद को पत्रकार बताते हुए नर्सिंग स्टाफ को धमकाने के साथ ही हंगामा करने लगा।

शोरशराबा सुनकर कार्यवाहक पीएमओ डॉ. सर्वेश बिसारिया मौके पर पहुंचे और हंगामे की वजह पूछी। युवक ने अपना नाम रणजीत सिंह बताते हुए खुद को पत्रकार बताया। इस पर डॉ. सर्वेश ने युवक से पहचान पत्र दिखाने को कहा। पहचान पत्र मांगते ही युवक बैकफुट पर आ गया और खुद को पत्रकार का दोस्त बताने समेत तमाम बहाने करने लगा। इसके बाद वह मौका देखकर वहां से चला गया।

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विधायक के दफ्तर में हुई पत्रकारों की पिटाई, जानें पूरा मामला

किसी मामले में शिकायत करने के लिए अपने साथियों के साथ विधायक के कार्यालय गए थे पत्रकार

Last Modified:
Friday, 20 September, 2019
Attack

पत्रकारों पर हमले का एक और मामला सामने आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी इलाके का है, जहां पर कुछ लोगों ने बीजेपी विधायक के दफ्तर में घुसकर पत्रकारों की जमकर पिटाई कर दी। मारपीट में घायल एक पत्रकार को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जाता है कि लोनी में बलराम नगर स्थित स्टेट बैंक के पास बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर का ऑफिस है। यहां कुछ पत्रकार एक मामले में शिकायत करने पहुंचे थे। तभी 5-6 बदमाशों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। घटना के बाद पत्रकारों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। बॉर्डर थाना प्रभारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि पत्रकार सरताज खान ने शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दरअसल, बुधवार को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के दौरान पत्रकार शौकत अली वहां फोटोग्राफी कर रहे थे। इसी बीच एसडीएम के गनर द्वारा रोके जाने पर उनके साथी पत्रकार सरताज खान का गनर से विवाद हो गया। आरोप है कि इस पर गनर ने सरताज के साथ अभद्रता कर दी।

नाराज दोनों पत्रकार अपने कुछ साथियों के साथ गुरुवार को विधायक के कार्यालय पहुंचे थे। वहां विधायक के प्रतिनिधि ललित शर्मा ने कार्यालय में विधायक के न होने की सूचना दी और इंतजार करने के लिए कहा। आरोप है कि ललित शर्मा के बाहर जाते ही कुछ नकाबपोश बदमाश दफ्तर में घुसे और हॉकी-डंडों से सरताज खान और शौकत अली के साथ मारपीट की। वहीं, इस मामले में विधायक नंद किशोर गुर्जर का कहना है कि अपने दफ्तर में पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना से वह स्तब्ध हैं। उन्होंने आशंका जताई कि शायद पत्रकारों का बाहर विवाद हुआ हो।

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पत्रकारों को लेकर प्रज्ञा ठाकुर के बिगड़े बोल, हो रहा विरोध

बयान से गुस्साए पत्रकारों ने प्रज्ञा ठाकुर से माफी मांगने के साथ ही बीजेपी आलाकमान से उन्हें पार्टी से निकालने की मांग उठाई है

Last Modified:
Thursday, 19 September, 2019
Pragya Thakur

अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वालीं व भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर नए विवाद में फंस गई हैं। अब उन्होंने पत्रकारों को बेईमान बता दिया है। प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान पर पत्रकार काफी गुस्सा हैं और उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर से माफी की मांग की। इसके साथ ही पत्रकारों ने बीजेपी आलाकमान से प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी से निकालने की मांग भी उठाई है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने ये बयान मंगलवार को सीहोर जिले की यात्रा के दौरान दिया। यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 69वें जन्मदिन पर फलों का वितरण करने आई थीं। पत्रकारों ने मध्य प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुददों पर उनकी टिप्पणी चाही थी। इस पर प्रज्ञा का हंसते हुए कहना था, ‘एक भी ईमानदार नहीं है। हां हम बोल रहे हैं, सुनो तुम्हारी तारीफ, जितने भी सीहोर के मीडियावाले हैं, सब बेईमान हैं।’

प्रज्ञा ठाकुर की इस टिप्पणी पर पत्रकार गुस्सा हो गए। इसके बाद स्थानीय पत्रकारों के एक समूह ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रज्ञा ठाकुर से माफी की मांग की। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कैसे मीडियाकर्मियों को बेईमान बताया, वह आप इस विडियो में देख सकते हैं। 

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वरिष्ठ पत्रकार सायना धेनुगारा ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

‘CNBC-TV18’ की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान के साथ मिलकर किताब भी लिख चुकी हैं सायना धेनुगारा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
Syna

‘सीएनबीसी-टीवी18’ (CNBC-TV18) की फीचर एडिटर सायना धेनुगारा ने अब अपने करियर को नई दिशा दी है। उन्होंने बेंगलुरु के स्टार्ट अप ‘लेट्सवेंचर’ (LetsVenture) में बतौर चीफ ब्रैंड ऑफिसर जॉइन किया है। यह एक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है। अपनी नई भूमिका में धेनुगारा ‘लेट्सवेंचर’ के फाउंडर्स शांति मोहन और संजय झा के साथ ही सीनियर लीडरशिप टीम के साथ मिलकर काम करेंगी।   

‘CNBC-TV18’ में रहते हुए धेनुगारा टेक्नोलॉजी, नई अर्थव्यवस्था, पॉलिसी प्रभाव पर काम करने के साथ ही स्टार्ट अप्स व एंटरप्रिन्योरशिप पर बने शो ‘यंग टर्क्स’ को भी संभाल चुकी हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के करियर में वह ‘CNBC-TV18’ की मैनेजिंग एडिटर शीरीन भान के साथ मिलकर ‘Young Turks-Inspiring Stories of Tech Entrepreneurs’ के नाम से किताब भी लिख चुकी हैं। इस किताब में ऊंचा मुकाम पाने वाले 13 एंटरप्रिन्योर की प्रेरक कहानियां हैं।

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लाइव डिबेट में पैनलिस्ट के साथ हुआ कुछ ऐसा, विडियो वायरल

कश्मीर के मुद्दे पर चल रही थी चर्चा, विडियो वायरल होने के साथ ही सोशल मीडिया पर जमकर उड़ाया जा रहा है मजाक

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
Debate Show

कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के ‘GTV’ टेलिविजन चैनल पर हो रही लाइव डिबेट के दौरान एक पैनलिस्ट अचानक अपनी कुर्सी से लड़खड़ाकर गिर पड़ा। इस घटना से जुड़े विडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने इस पैनलिस्ट को निशाने पर ले लिया और जमकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया।

कुछ लोगों ने तो इसकी तुलना कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के दौरान पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख रशीद को लगे करंट से कर दी। कुछ लोगों ने मजाक में यह भी कहना शुरू कर दिया है कि जरूर इस पैनलिस्ट ने भी मोदी का मजाक उड़ाया होगा।  

पाकिस्तान की पत्रकार @nailainayat (नायला इनायत) ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस विडियो को शेयर किया है। आप भी इस विडियो को यहां देख सकते हैं।

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मीडिया से जुड़े मुद्दों का अब इस तरह समाधान करेगी सरकार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Published - Wednesday, 18 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 18 September, 2019
Media

पाकिस्तान में मीडिया से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अब विशेष मीडिया न्यायाधिकरणों (Special Media Tribunals) का गठन किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने इसकी घोषणा की है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की विशेष सहायक (सूचना) फिरदौस आशिक अवान ने मंगलवार को बताया कि ये न्यायाधिकरण पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) की शिकायत परिषद की जगह लेंगे।

उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरणों के गठन के लिए संसद में कानून बनाया जाएगा। इन न्यायाधिकरणों में मीडिया से जुड़े मुद्दे 90 दिन के भीतर सुलझाए जाएंगे और ये न्यायाधिकरण किसी न्यायपालिका के तहत काम करेंगे। ये न्यायाधिकरण सरकारी नियंत्रण या प्रभाव से मुक्त होंगे और सरकारी अधिकारी भी उनके प्रति जवाबदेह होंगे।

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