नहीं रहे 'दैनिक ट्रिब्यून' के संपादक संतोष तिवारी, पत्रकारिता जगत स्तब्ध

<p style="text-align: justify;"><strong>समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।</strong></p> <p style="text-align: justify;">हिंदी अखबार दैनिक 'ट्रिब्यून’ के संपादक संतोष तिवारी अब हमारे बीच नहीं रहे। वे कल चंडीगढ के पीजीआई अस्पताल में रूटीन चेकअप के लिए गए थे, जहां लीवर में कुछ प्रॉब्लम के चलते उन्हें एडमिट किया गया। पर फिर मल्टीऑर्गन फेल्योर के चलते उनकी मृत्यु

Last Modified:
Monday, 06 March, 2017
santosh-tiwari

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

हिंदी अखबार दैनिक 'ट्रिब्यून’ के संपादक संतोष तिवारी अब हमारे बीच नहीं रहे। वे कल चंडीगढ के पीजीआई अस्पताल में रूटीन चेकअप के लिए गए थे, जहां लीवर में कुछ प्रॉब्लम के चलते उन्हें एडमिट किया गया। पर फिर मल्टीऑर्गन फेल्योर के चलते उनकी मृत्यु हो गई। आज (सोमवार) सुबह ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनका पार्थिव शरीर आज दोपहर 2 से 3 बजे तक चंडीगढ़ के सेक्टर 30 स्थित निवास संख्या 408 में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि उसके बाद पार्थिक शरीर को आज शाम दिल्ली लाया जाएगा और कल उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।

लगभग 4 दशक से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार संतोष तिवारी 31 दिसंबर, 2012 को दैनिक ट्रिब्यून के साथ बतौर संपादक जुड़े थे। वे जागरण प्रकाशन से इस्तीफा देकर यहां पहुंचे थे, जहां वे बतौर डिप्टी एडिटर और ग्रुप फीचर हेड की भूमिका निभा रहे थे। जागरण के साथ वे फरवरी, 2009 में जुड़े थे। इस ग्रुप के साथ वे ‘इंडिया टीवी’ से इस्तीफा देकर पहुंचे थे। इंडिया टीवी में उन्होंने सीनियर एडिटर के तौर पर दो वर्ष तक काम किया था।

संतोष तिवारी जिस भी संस्थान में रहे वहां बदलाव के लिए जाने जाते रहे हैं। उन्होंने हिन्दुस्तान में चीफ रिपोर्टर की भूमिका निभाते हुए पुराने रिपोर्टिंग के तरीके को बदला और फीचर एडिटर की भूमिका निभाते हुए उन्होंने फीचर के लिए भी नई मुद्दों को चुना।

ट्रिब्यून में जुड़ने से पहले उन्होंने समाचार4मीडिया के साथ बातचीत में बताया था कि जब वे हिन्दुस्तान में थे तो वहां पर वहीं पुरानी तरह से रिपोर्टिंग की जाती थी। लेकिन उन्होंने उस ट्रैंड को बदला और नये जमाने की रिपोर्टिंग को लाने की कोशिश की। इसके साथ ही देखा कि उस वक्त फीचर्स में केवल पुराने विषय उठाए जाते थे। उन्होंने यूथ और प्रजेंट टाइम के विषयों को फीचर में लेकर आया और उसको पाठकों का एक अच्छा रिसपोंस मिला। इंडस्ट्री में भी उस ट्रेंड को काफी सराहना मिली।

‘इंडिया टीवी’ से पहले वे दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के साथ काम कर रहे थे। हिन्दुस्तान में उन्होंने करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक काम किया। 1987 में वे हिन्दुस्तान के साथ चंडीगढ़ से बतौर हरियाणा संवाददाता जुड़े थे। फिर 1993 में हिन्दुस्तान, दिल्ली आ गए, जहां पर उन्हें सीनियर रिपोर्टर कम डिप्टी चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई। हिन्दुस्तान में रहते हुए उन्होंने कई सीनियर पदों पर काम किया है। वर्ष 2003 में उन्हें दिल्ली का सिटी एडिटर का पद दिया गया। 2005 में हिन्दुस्तान रीलॉन्चिंग के वक्त उन्हें दिल्ली एडिशन के असोसिएट एडिटर कम फीचर हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई।

कानपुर के डीबीएस डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएट संतोष तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1983 में दिल्ली में टाइम्स ग्रुप की पत्रिका ‘दिनमान’ के साथ की थी। जहां पर वे सब एडिटर कम रिपोर्टर की भूमिका वर्ष 1987 तक निभाते रहे।

उनकी असमायिक मृत्यु से पत्रकारिता जगत स्तब्ध है...

अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार व लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव और नेशनल मीडिया नेटवर्क के संस्थापक प्रधान संपादक दयानंद वत्स ने दैनिक ट्रिब्यून के संपादक संतोष तिवारी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए इसे पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। वत्स ने कहा कि संतोष तिवारी बेहद मिलनसार, मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी पत्रकार थे। उनके निधन का समाचार अत्यंत दुखद और व्यथित करने वाला है।

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