मीडिया में पिछले कुछ सालों में ये बड़ा बदलाव देखने को मिला है: मिलिंद खांडेकर

प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यू्ज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को...

Last Modified:
Wednesday, 20 February, 2019
Milind Khandekar

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

प्रतिष्ठित ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के 11वें एडिशन का आयोजन 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में किया गया। इस मौके पर देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को ‘इनबा अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मीडिया क्षेत्र की हस्तियों ने विभिन्न पैनल डिस्कशन के जरिये अपने विचार भी व्यक्त किए। इसी के तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और फिल्म प्रड्यूसर भुवन लाल ने बतौर सेशन चेयर ‘Ratings, Propaganda& Perspective in front of editors while telling compelling stories’ विषय पर हुए एक पैनल डिस्कशन को मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘इंडिया न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया, ‘बीबीसी (इंडिया)’ के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर, ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी और ‘न्यूज 24’ के मैनेजिंग एडिटर दीप उपाध्याय शामिल हुए।

भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले की खबर जब आई तो संपादकों की इस पर किस तरह की प्रतिक्रिया रही? बीबीसी (इंडिया) के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर ने कहा,‘पुलवामा की खबर काफी शॉकिंग न्यूज थी। कहा जाता है कि न्यूज रूम में काम करते-करते पत्रकारों की संवेदनाएं मर जाती हैं,क्योंकि हम इस तरह की चीजें आमतौर पर देखते रहते हैं, लेकिन जब ये खबर आई तो पहले तो यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि वहां काफी सुरक्षा रहती है। लेकिन इस घटना के बाद मीडिया ने इसे ठीक से कवर किया है और उस पर परिश्रम भी हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि देश में क्या हुआ है और देश के लोगों की क्या भावनाएं हैं, इस बारे में बताने का मीडिया ने अपना काम किया है।’

मिलिंद खांडेकर का कहना था, ‘पिछले चार-पांच सालों में मीडिया में काफी परिवर्तन आया है। हमने मीडिया में सीखा है कि स्पीकिंग पॉवर ट्रुथ मीडिया का काम है लेकिन मैंने ये महसूस किया है कि हम उन लोगों से सवाल नहीं पूछते हैं, जो सरकार चलाने के लिए जिम्मेदार हैं, बल्कि हम विपक्षियों से सवाल पूछते हैं। मुझे लगता है कि यह मीडिया में बहुत बड़ा परिवर्तन है। पूरा मीडिया ऐसा नहीं कर रहा है, लेकिन फिर भी मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा किसी घटना के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उनसे सवाल न पूछकर किसी और को उस घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। 

भुवन लाल द्वारा पत्रकारिता के दौरान सबसे गौरवशाली पलों के बारे में पूछे जाने पर मिलिंद खांडेकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अभी जिंदगी में बहुत कुछ करना बाकी है और उस बेस्ट पल का इंतजार है। मैं ये नहीं कहूंगा कि इस बात पर मुझे गर्व है, बल्कि ये कहूंगा कि इस बात का सुकून जरूर है कि इंडस्ट्री में जहां हम काम करते हैं, मैं उसे काल कोठरी की तरह कहता हूं और यहां आप बिना दाग के निकल जाइए या ठीक से रह लीजिए, यह बहुत मुश्किल होता है। अब तक इस जगह पर मुझे जो ठीक लगा, वो किया है और कभी कोई इश्यू नहीं उठा, मुझे इस बात का बड़ा सुकून है।’

मिलिंद खांडेकर का कहना था, ‘इस समय हमें संयम दिखाना चाहिए और लड़ाई लड़ना कोई खेल नहीं है। लड़ाई की बात करें तो हम जो टीवी पर कहते हैं और सोशल मीडिया पर कहते हैं, वो बात अलग होती है और इस तरह की लड़ाई अलग होती है, हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए। 2008 के आतंकी हमले के बाद हम सबने मिलकर ही इस तरह की गाइडलाइंस बनाई थी कि हम ऐसी परिस्थिति में क्या करेंगे और मोटे तौर पर इन गाइडलाइंस का पालन किया जाता है। जिस तरह जहां रवि-वहां कवि की बात होती है, उसी तरह जिस प्लेटफॉर्म पर खबर होती है, वहां पत्रकार को होना चाहिए। ऐसे में जिस भी प्लेटफॉर्म पर खबर होगी, फिर चाहे वो वॉट्सऐप हो, ट्विटर हो या फेसबुक हो,हमें खबर देने के लिए तैयार रहना होगा। जैसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऑरकुट था,जो खत्म हो गया, फिर फेसबुक आया। ऐसें में खबर नहीं बदलेगी, खबर वही रहेगी,सिर्फ उसका प्लेटफॉर्म बदलेगा और आज ये कहना मुश्किल है कि अगला प्लेटफॉर्म क्या होगा?’

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