वरिष्‍ठ पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु ने बनाया ये रिकॉर्ड..

उप्र जर्नलिस्ट एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव में ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट

Last Modified:
Monday, 20 August, 2018
Samachar4media
समाचार4मीडिया ब्‍यूरो ।।  

उप्र जर्नलिस्ट एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव में ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट ने रिकॉर्ड कायम किया है। 

उन्‍हें लगातार चौथी बार निर्विरोध प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर इलाहाबाद के डिप्टी मेयर रतन दीक्षित एवं आगरा के अशोक अग्निहोत्री ताऊ को प्रदेश महामंत्री निर्वाचित किया गया है। कोषाध्यक्ष पद पर चंदौली के संतोष यादव को चुना गया है।

उपमन्यु के लगातार चौथी बार प्रदेश उपाध्यक्ष बनने पर ब्रज क्षेत्र के सभी धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों एवं पत्रकारों ने बधाई दी। उपमन्यु छावनी परिषद के पूर्व वाइस चेयरमैन रहे हैं।

उपमन्यु का कहना कि पत्रकारों का किसी भी स्तर पर उत्पीडऩ नहीं होने दिया जाएगा। पत्रकारों के हित के लिए केन्द्र व प्रांत सरकारों से मूलभूत समस्याओं के निराकरण की सतत पहल होगी। इसके अलावा तहसील स्तर पर पत्रकारों को सरकारी मान्यता दिलाने एवं जिलों में पत्रकार कालोनी बनवाने एवं पत्रकारों का बीमा सरकार से कराने की पहल की जाएगी।
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सुनील लुल्ला बने BARC इंडिया के नए CEO

टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था है 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल

Last Modified:
Tuesday, 22 October, 2019
Sunil Lull Barc India

देशभर में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के पहले चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पार्थो दासगुप्ता ने अपने पद से हटने की घोषणा की है। उनकी जगह सुनील लुल्ला लेंगे, जिन्हें मीडिया और मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करने का 35 साल से ज्यादा का अनुभव है।

इस बारे में पार्थो दासगुप्ता की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘कम से कम संसाधनों में दुनिया की सबसे बड़ी ऑडियंस मीजरमेंट कंपनी को तेजी से स्थापित करने का सफर काफी रोमांचक रहा है। अब मुझे लगता है कि यह समय यहां से हटकर कुछ नया करने का है।’

इसके साथ ही अपने बयान में उन्होंने कहा है, ‘मैं बोर्ड के सदस्यों के साथ ही पुनीत और शशि का खासतौर पर धन्यवाद अदा करना चाहूंगा, जिन्होंने मुझे इतना सहयोग दिया और मार्गदर्शन किया।’

इधर, सुनील लुल्ला का कहना है, ‘आज के समय में चीजें काफी तेजी से बदल रही हैं और ऑडियंस मीजरमेंट को इनके साथ तालमेल बिठाना होगा। कंपनी को इस मुकाम तक लाने के लिए मैं पार्थो का शुक्रिया अदा करता हूं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

वहीं, बार्क इंडिया के चेयरमैन पुनीत गोयनका का कहना है, ‘मैं बार्क इंडिया में सुनील लुल्ला का स्वागत करता हूं। वह बोर्ड मेंबर रह चुके हैं और हम सभी से परिचित हैं। मैं पार्थो को भी धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मुश्किल समय में बार्क की कमान अच्छे से संभाली और एक बेहतर टीम तैयार की। हम पार्थो दासगुप्ता को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

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सरकार के खिलाफ मीडिया ने दिखाई एकजुटता, कुछ यूं किया विरोध

सोमवार को लगभग सभी अखबारों काले रंग में नजर आये। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी अपने प्राइम टाइम के दौरान कुछ भी प्रसारित नहीं किया

Last Modified:
Monday, 21 October, 2019
Media

सरकार की बढ़ती दखलंदाजी के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई मीडिया एकजुट हो गया है। सोमवार को लगभग सभी अखबारों काले रंग में नजर आये। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी अपने प्राइम टाइम के दौरान कुछ भी प्रसारित नहीं किया। ‘राइट टू नो’ अभियान के तहत संपूर्ण मीडिया सरकार के खिलाफ मैदान में उतर आया है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की एकजुटता भारत जैसे देशों के मीडिया संस्थानों के लिए एक उदाहरण हैं, जहां एकजुटता यदा-कदा ही नजर आती है। न्यूज़ कॉर्प ऑस्ट्रेलिया नेटवर्क के अखबार ‘हेराल्ड सन’ के फ्रंट पेज पर काली-काली लाइनें हैं, जिस पर तंज भरे लहजे में लिखा है ‘नॉट फॉर रिलीज...सीक्रेट’, यानी खबर आम जनता के लिए जारी नहीं की जा सकती। इसी तरह सबसे नीचे लिखा है ‘जब सरकार आपसे सच छिपाती है, तो वो क्या छिपा रही है’?

सरकार के खिलाफ मीडिया का यह आंदोलन पिछली कुछ कार्रवाइयों का परिणाम है, जो सरकार की तरफ से पत्रकार और मीडिया संस्थान के विरुद्ध की गईं। ‘हेराल्ड सन’ के मुताबिक, न्यूज़ कॉर्प ऑस्ट्रेलिया नेटवर्क की पत्रकार एनिका ने इस बारे में एक खबर की थी कि सरकार पत्रकारों की जासूसी करने के लिए कई कदम उठाने का मन बना रही है। इसके बाद उनके घर पर दफ्तर पर छापेमारी की गई, इतना ही नहीं, एनिका के खिलाफ अपराधिक मामले भी दर्ज किये जा रहे हैं। न्यूज़ कॉर्प की तरह ABC को भी फेडरल पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। समूह के मुख्यालय पर इसलिए छापा मारा गया क्योंकि उसने अफ्गानिस्तान में ऑस्ट्रेलियाई फौज द्वारा पुरुषों और बच्चों को मारे जाने के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी।

सरकार के इस कदम का ऑस्ट्रेलिया के सभी मीडिया संस्थनों ने विरोध किया और जनता को हकीकत से रूबरू कराने के लिए ‘राइट टू नो’ कैंपेन की शुरुआत की गई। इसके तहत रविवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने मोर्चा संभाला और प्राइम टाइम में कोई कार्यक्रम नहीं दिखाया गया, केवल काली स्क्रीन पर संदेश प्रसारित होते रहे कि सरकार मीडिया पर अंकुश लगाना चाहती है।

वहीं, प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार प्रेस की स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उन्हें जांच के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं, पत्रकारों की यूनियन मीडिया एंटरटेनमेंट एंड आर्ट्स एलायंस के मुख्य कार्यकारी पॉल मर्फी का कहना है कि मीडिया की आजादी पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कानून बनाये जा रहे हैं, जिसके चलते पत्रकारों के लिए सच उजागर करना मुश्किल हो गया है। विश्व भर के मीडिया संस्थनों ने ऑस्ट्रेलिया सरकार की कार्रवाई का विरोध जताते हुए ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का समर्थन किया है।

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सहारा मीडिया: प्रिंट हो या टीवी या डिजिटल, सबके कंटेंट पर रहेगी इनकी नजर

सहारा न्यूज नेटवर्क के सीओओ गौतम सरकार द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक...

Last Modified:
Monday, 21 October, 2019
Sahara

सहारा न्यूज नेटवर्क के सीओओ गौतम सरकार द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक राधेश्याम राय को पूरे नेटवर्क के कंटेट की मॉनिटरिंग का इंचार्ज बनाया गया है। राधेश्याम राय अब सहारा मीडिया हेड उपेंद्र राय को रिपोर्ट करेंगे और उनकी ओर से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल यानी अखबार, न्यूज़ चैनल और वेब पोर्टल के कंटेट की देखरेख करेंगे।

राधेश्याम राय फिलहाल उपेंद्र राय के सेक्रेटेरिएट से संबद्ध हैं। राधेश्याम राय की सहारा मीडिया में ये तीसरी पारी है। वो नेशनल वॉयस, न्यूज वर्ल्ड इंडिया और टी.वी.24 जैसे चैनलों के सीनियर एडिटर रह चुके हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र रहे राधेश्याम राय की पहचान अपने लेखन के चलते रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में टी.वी. सीरियल्स की पटकथा लिखने से की और बेहद कम समय में छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बना ली। बालाजी टेलीफिल्म्स, सिनेविस्ता और यूटीवी जैसे प्रोडक्शन हाउस के साथ बतौर लेखक काम कर चुके राधेश्याम राय ने ‘कहानी घर-घर की’, ‘शगुन’, ‘कुमकुम’ और ‘आती रहेंगी बहारें’ जैसे धारावाहिकों की पटकथाएं लिखीं। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुनील दत्त साहब के साथ भी जुड़े रहे और लंबे समय उनके सहयोगी के तौर पर कार्य किया। साथ ही नेहरू युवा केंद्र से उनका जुड़ाव वर्तमान दौर में युवा मुद्दों को उठाने में सहयोगी होगा।

सहारा समूह के  सभी चैनलों, अखबार और डिजिटल की टीम को राधेश्याम राय के साथ पूर्ण सहयोग करने के लिए सहारा मीडिया परिवार के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर गौतम सरकार की ओर से एक सर्कुलर जारी किया है।
 

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सरकार का ‘प्रेस’ पर पहरा, विदेशी पत्रकार संग किया ऐसा सुलूक

एयरपोर्ट से वापस लौटाए गए पत्रकार का नाम स्टीवन बटलर है और वह कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ)के लिए काम करते हैं...

Last Modified:
Friday, 18 October, 2019
Journalist

कश्मीर में मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले पाकिस्तान ने एक विदेशी पत्रकार को केवल इसलिए बैरंग लौटा दिया, क्योंकि वह अस्मा जहांगीर कांफ्रेंस-रोडमैप फॉर ह्यूमन राइट्स में भाग लेने के लिए लाहौर आया था। 

उल्लेखनीय है कि अस्मा जहांगीर, जिनके नाम पर मानवाधिकार सम्मेलन आयोजित किया जा रहा था, पाकिस्तान के इस्लामीकरण की कट्टर आलोचक थीं। उसने देश के ईश निंदा कानूनों का विरोध किया और जीवन भर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए लड़ाई लड़ी।

एयरपोर्ट से वापस लौटाए गए पत्रकार का नाम स्टीवन बटलर है और वह कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ)के लिए काम करते हैं। बटलर के पास पाकिस्तान का वैध वीजा भी था, इसके बावजूद उन्हें जबरन हवाई अड्डे से ही वापस लौटा दिया गया। इमरान सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा हो रही है। 

CPJ के अनुसार, बटलर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें घेर लिया। उनसे कहा गया कि भले ही उनके पास वैध वीजा है, लेकिन चूंकि वह आंतरिक मंत्रालय के ‘स्टॉप लिस्ट’ में शामिल हैं, उन्हें पाकिस्तान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बटलर का पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त करके उन्हें दोहा (कतर) जाने के लिए मजबूर किया और जब वह दोहा पहुंचे तो वहां से उन्हें वॉशिंगटन जाने वाले विमान में बैठा दिया गया। CPJ के मुताबिक, उड़ान के दौरान स्टीवन बटलर ने संगठन से संपर्क करके बताया कि वह एक तरह प्रिवेंटिव कस्टडी में हैं, अधिकारियों ने उनका बोर्डिंग पास तक जब्त कर लिया है। 

CPJ के कार्यकारी निदेशक जोएल साइमन ने कहा, स्टीवन बटलर को पाकिस्तान में प्रवेश करने से रोकने का अधिकारियों का कदम बेहद चौंकाने वाला है और यह पाकिस्तान के उन लोगों के गाल पर थप्पड़ की तरह है जो प्रेस की स्वतंत्रता पर बड़ी-बड़ी बाते करते हैं। पाक अधिकारियों को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उन्होंने बटलर को किस आधार पर रोका। यदि सरकार प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाना चाहती है, तो उसे इस मामले में तुरंत पारदर्शी जांच करनी चाहिए। 

 

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न्यूज एंकर ने यूं रची पत्नी के मर्डर की साजिश

इटावा में न्यूज एंकर की पत्नी के चर्चित हत्याकांड का खुलासा आखिरकार यूपी पुलिस ने कर दिया है

Last Modified:
Friday, 18 October, 2019
Ajitesh

इटावा में न्यूज एंकर की पत्नी के चर्चित हत्याकांड का खुलासा आखिरकार यूपी पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड के आरोपितों के तौर पर न्यूज एंकर और उसके दोस्त को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। एंकर अजितेश मिश्रा नोएडा से संचालित न्यूज चैनल FM News में काम करता है। उसकी शादी को 4 साल हुए थे। 

जांच में पता चला है कि नोएडा में कार्यरत इस न्यूज एंकर का अपने ऑफिस में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा था, जिसकी भनक इसकी पत्नी को भी हो गई थी, ऐसे में न्यूज एंकर ने रास्ते से पत्नी को हटाने का मन बना लिया था। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि 14 अक्टूबर को नोएडा के निजी चैनल में कार्यरत न्यूज एंकर अजितेश मिश्रा की पत्नी दिव्या का मर्डर इटावा में उसकी ससुराल में हुआ था। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और सर्विलांस की मदद से जांच की, तो कई रहस्य पता चले। इसके लिए तीन टीमें गठित की गई थी। सर्विलांस की मदद से पता चला कि मर्डर से एक घंटे पहले तक दिव्या ने अपने पति से तीन बार बात की थी। एंकर की कॉल डिटेल से पता चला कि वे अपने ही न्यूज चैनल में कार्यरत मेकअप आर्टिस्ट भावना आर्या से काफी बातें करता था। जांच में पता चला कि दोनों के बीच अफेयर है। जब इसकी खबर एंकर की पत्नी हो गई तो एंकर ने अपने दोस्त अखिल के जरिए पत्नी के मर्डर का प्लान बनाया। अखिल को एंकर की पत्नी भाई मानती थी, ऐसे में जब अखिल उसकी पत्नी से मिलने इटावा गया तो वो उसके साथ पति को समझाने की बात करने लगी, पर अखिल ने मौका देखकर उसके सिर पर फूलदान दे मारा। इस बीच दोनों के बीच हाथापाई भी हुई, पर अखिल ने उसके सिर को जमीन पर तब तक मारा,जब तक उसकी मौत न हो गई। 


 

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PTI में कई पदों पर रहे वरिष्ठ पत्रकार का निधन, आज होगा अंतिम संस्कार

बताया गया है कि शुक्रवार को 3.30 बजे दिल्ली स्थित लोधी गार्डन श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा

Last Modified:
Friday, 18 October, 2019
Tribute

वरिष्ठ पत्रकार कंवर सेन जोली का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे गुड़गांव में रहते थे। जोली करीब 86 साल के थे। बताया गया है कि शुक्रवार को 3.30 बजे दिल्ली स्थित लोधी गार्डन श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा

1993 में पीटीई से बतौर डिप्टी जनरल मैनेजर रिटायर हो चुके जोली ने यहां करीब 40 साल की नौकरी की थी। इस दौरान वे कई पदों पर सेवारत रह चुके थे। कई सम्मानों से सम्मानित हो चुके जॉली ने रिटायरमेंट के बाद केपीएमजी के साथ भी काम किया था। 
 

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ये बता रहा है इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स (ICFJ) का नया ग्लोबल सर्वे 

14 भाषाओं में किया गया यह अनोखा सर्वेक्षण, 149 देशों के 4,100 से अधिक न्यूज़ रूम प्रबंधकों और पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है

Last Modified:
Thursday, 17 October, 2019
ICFJ

डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में पत्रकार भी तेजी से आगे बढ़ते जा रहे हैं। 2017 के मुकाबले पत्रकारों ने ऐसे डिजिटल टूल्स का प्रयोग ज्यादा कर दिया है, जो उनकी कई तरह की चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं। जैसे कि भ्रामक या गलत जानकारी। सोशल मीडिया से निकली कोई खबर किस तरह से खबरिया चैनल या न्यूज़ वेबसाइट की सुर्खियां बन जाती है, ये हम कई बार देख चुके हैं। लिहाजा, ऐसी गलतियों को दुरुस्त करने और अपनी सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए मीडिया प्रोफेशनल्स की डिजिटल टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ी है। यह बात सामने आई है इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट (आईसीएफजे) के एक सर्वेक्षण में। 14 भाषाओं में किया गया यह अनोखा सर्वेक्षण, 149 देशों के 4,100 से अधिक न्यूज़ रूम प्रबंधकों और पत्रकारों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। इस अध्ययन को आईसीएफजे की 2017 की रिपोर्ट का अपडेटेड संस्करण कहा जा सकता है, क्योंकि उस वक़्त यह पता चला था कि डिजिटल क्रांति के साथ तालमेल बैठने में पत्रकारों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

‘ग्लोबल न्यूज़रूम में टेक्नोलॉजी की स्थिति 2019’ नामक इस सर्वेक्षण के मुताबिक, पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया वेरिफिकेशन टूल्स का उपयोग दोगुना (11 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत) हो गया है। वहीं, मौजूदा वक़्त में 67 प्रतिशत पत्रकार एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन इस्तेमाल करते हैं, 2017 में यह आंकड़ा 46 फीसदी था। इस बारे में आईसीएफजे के अध्यक्ष जॉय बरनाथन ने कहा, आजकल न्यूज़ आउटलेट्स डिजिटल और भौतिक हमले का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों ने डिजिटल टेक्नोलॉजी पर ज्यादा विश्वास जताना शुरू कर दिया है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष से पता चलता है कि न्यूज़रूम अपने कम्युनिकेशन को सुरक्षित रखने और अपनी जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल उपकरणों को अपना रहे हैं।

सर्वेक्षण के मुताबिक, ऑनलाइन हमलों में वृद्धि के चलते पत्रकार खुद को बचाने के अधिक प्रयास कर रहे हैं। दो-तिहाई से अधिक पत्रकार और न्यूज़ रूम आज साइबर सिक्योरिटी का उपयोग करते हैं, जो 2017 के बाद से लगभग 50% ज्यादा है। इसके अलावा, सुरक्षित संचार के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल में भी इजाफा हुआ है। साइबर सिक्योरिटी के जरिये अपने न्यूज़ रूम को सुरक्षित बनाने में उत्तरी अमेरिकी का नंबर यूरोप के बाद आता है। यहां, 82% न्यूज़रूम डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं। ये आंकड़ा पहले के मुकाबले लगभग दोगुना है। जबकि यूरोप 92% के साथ पहले स्थान पर है। सर्वेक्षण में शामिल 50% से अधिक पत्रकारों का कहना है कि वे नियमित रूप से डिजिटल टूल का उपयोग जानकारी की सत्यता जांचने के लिए करते हैं। जबकि 2017 में केवल 11% ही सोशल मीडिया वेरिफिकेशन टूल इस्तेमाल करते थे।
     
इसी तरह न्यूज़ आर्गेनाईजेशन की बात करें, तो करीब एक तिहाई में ऐसे समर्पित कर्मचारी हैं, जिनका काम सिर्फ फैक्ट-चेकिंग करना है। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष की तुलना में 44% न्यूज़ रूम और 37% पत्रकार पहले से अधिक फैक्ट-चेकिंग गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। यह अध्ययन व्यावहारिक पत्रकारिता अनुसंधान पर आईसीएफजे के विस्तार पर केंद्रित है। ऐसे समय में जब मीडिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर असहमति का माहौल है, आईसीएफजे इंडस्ट्री में प्रमुख रुझानों पर अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए विशिष्ट रूप से कार्य कर रहा है। और अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पत्रकार और मीडिया शोधकर्ता डॉ. जूली पॉसेट्टी को ग्लोबल डायरेक्टर ऑफ रिसर्च के नवनिर्मित पद पर नियुक्त किया है। गौरतलब है कि आईसीएफजे दुनिया भर में पत्रकारों की विशेषज्ञता और स्टोरीटेलिंग के कौशल को निखारने के लिए पत्रकारिता और प्रौद्योगिकी के गठजोड़ के रूप में करता है।
 

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कश्मीर के हालात पर वरिष्ठ पत्रकार के.जी.सुरेश ने लिखा केंद्रीय मंत्री को पत्र

फ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है

Last Modified:
Thursday, 17 October, 2019
kg-suresh

370 से आज़ाद हुए कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन स्कूलों में पसरा सन्नाटा चिंता का विषय है। इसी चिंता को रेखांकित करते हुए प्रोफ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में सरकार को कठघरे में खड़ा नहीं किया है, जैसा कि पहले होता आया है। उन्होंने इस चिंता से निपटने का नायब सुझाव सरकार को दिया है। 

सुरेश ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखा है ‘यह बहुत संतोष की बात है कि कश्मीर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और इस बारे में आवाम को सूचित करने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों कई कश्मीर केंद्रित कार्यक्रम पेश कर रहे हैं, जैसे कि ‘कश्मीर का सच’। लेकिन विरोध या हिंसा के डर से स्कूलों में छात्रों की अनुपस्थिति चिंता का विषय रही है। इससे लाखों युवाओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है, जो इस क्षेत्र और देश का भविष्य हैं’।

2014 में इबोला के खौफ के चलते सिएरा लियोन के स्कूलों से गायब हुए बच्चों की पढ़ाई को लेकर वहां की सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों का जिक्र करते हुए के. जी. सुरेश ने आगे लिखा है ‘यह काबिले गौर है कि 2014 में पश्चिम अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में इबोला के प्रकोप के कारण एक मिलियन से अधिक बच्चों ने कई महीनों तक स्कूल से दूरी बना ली थी। इसके बाद, सिएरा लियोन सरकार ने यूनिसेफ और कई संगठनों के साथ मिलकर रेडियो शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का प्रसारण 41 सरकारी रेडियो स्टेशनों के साथ ही राज्य के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों पर भी किया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों के लिए एक घंटे का शिक्षण सत्र तैयार किया। कुछ ही समय में ये सेशन इतने लोकप्रिय हो गए कि शुरुआत में महज 20 की भागीदारी बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई। 

इसी तरह, हरियाणा के मेवात जिले से संचालित होने वाले सामुदायिक रेडियो स्टेशन ‘रेडियो मेवात’ भी चुनिंदा विषयों पर बच्चों को शिक्षित करने में लगा है और इसके सकरात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। उपरोक्त के मद्देनजर, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर भी राज्य में शैक्षणिक संस्थान, केंद्रीय संगठन जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (दोनों मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं) के साथ मिलकर इसी तरह के कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो ये निश्चित रूप से कश्मीर के छात्रों के लाभकारी होगा’।

अपने पत्र को आगे बढ़ाते हुए सुरेश ने लिखा है ‘आप इस उद्देश्य के लिए केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का उपयोग करने की संभावना का पता लगा सकते हैं, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा अधिक स्टेशनों की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं। आईआईएमसी में महानिदेशक के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान सामुदायिक रेडियो सशक्तिकरण और संसाधन केंद्र की स्थापना की गई थी, जो बच्चों को प्रौद्योगिकी, विषय-वस्तु और संसाधन उत्पादन में प्रशिक्षित करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर सकता है। 
हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने रेडियो की शक्ति का उपयोग करते हुए अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच बनाई है। मुझे विश्वास है कि आपके गतिशील नेतृत्व में, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर छात्रों का भविष्य संवारने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं’।
के. जी. सुरेश एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर रहे हैं, एससीडीआर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वह विजिटिंग प्रोफेसर हैं। इसके अलावा, भारतीय जनसंचार संस्थान में उन्होंने महानिदेशक पद की ज़िम्मेदारी संभाली है। साथ ही वह हील(Heal) फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक और मुख्य संपादक हैं।
 
 

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वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज ने पत्रिका को कहा ‘अलविदा’, अब यहां बने नेशनल ब्यूरो चीफ 

कुमार पंकज को पत्रकारिता के क्षेत्र दो दशक से अधिक का अनुभव है। कुमार पंकज आउटलुक, बिजनेस भास्केर, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं

Last Modified:
Thursday, 17 October, 2019
Kumar Pankaj

दिल्ली, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से प्रकाशित अखबार  'देशबंधु' ने वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें  राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख बनाया है। इससे पहले कुमार पंकज राजस्थान पत्रिका के दिल्ली ब्यूरो में कार्यरत थे। 

कुमार पंकज को पत्रकारिता के क्षेत्र दो दशक से अधिक का अनुभव है। कुमार पंकज आउटलुक, बिजनेस भास्कर, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं।  कई बीट्स पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी उनकी पुस्तक 'दूरदृष्टा नरेंद्र मोदी' काफी चर्चित रही है जो कि साल 2007 में लिखी गई थी। इस पुस्तक का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और कई संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं। कुमार पंकज की अन्य पुस्तकों में 'देश का युवा नेतृत्व ‘, ‘प्रथम महिला राष्ट्रापति प्रतिभा पाटिल’, ‘रिपोर्टिंग’, ‘साक्षात्काार’ आदि शामिल हैं। वे अभी तक करीब 9 पुस्तकें लिख चुके हैं। 

नेशनल फांउडेशन फॉर इंडिया, एक्शन एड सहित कई संस्थारओं से विकास के मुद्दे पर लेखन के लिए फेलोशिप भी मिल चुकी है। इसके अलावा शहीद शंकर गुहा नियोगी, यूनिफेम मीडिया एचिवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं। 

पाकिस्तान, जापान, सीरिया सहित कई देशों की यात्रा कर चुके कुमार पंकज राजनीति के अलावा समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं। 

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले कुमार पंकज इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर हैं।
 
 

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अयोध्या केस की कवरेज को लेकर चैनलों के लिए जारी हुई मीडिया एडवाइजरी

आज अयोध्या केस को लेकर चल रही सुनवाई के पूरी होने के बाद न्यूज चैनलोंके लिए एक एडवाइजरी जारी की है

Last Modified:
Wednesday, 16 October, 2019
Advisory

टीवी न्यूज मीडिया ब्रॉडकास्टर्स के संगठन न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स ऑथरिटी (NBSA) ने आज अयोध्या केस को लेकर चल रही सुनवाई के पूरी होने के बाद न्यूज चैनलों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट कार्यवाही को लेकर कोई भी भ्रामिक खबर न चलाई जाए। सुनवाई को लेकर कोई कयास नहीं लगाए जा।

सुनवाई की खबर दिखाते समय फैक्ट्स यानी तथ्यों का खास ध्यान रखा जाए। मस्जिद विध्वंस की फुटेज का प्रयोग नहीं किया जाए। किसी भी तरह के जश्न की फुटेज नहीं दिखाई जाए और साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाए कि डिबेट शो में किसी भी तरह के अतिवादी विचारों का प्रसारण नहीं किया जाए। 

 

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