पढ़िए, क्यों खास है 'न्यूज18 इंडिया' पर अमिश देवगन का ‘ये देश है हमारा’

चुनावी मौसम में शुरू हुए डिबेट शो की दौड़ में ‘ये देश है हमारा’ भी अच्छी रफ़्तार पकड़े हुए है...

Last Modified:
Wednesday, 31 October, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

न्यूज18 हिंदी आजकल टीआरपी के घोड़े पर तेजी से भाग रहा है। ऐसे में चुनावी मौसम में चैनल के चर्चित एंकर अमिश देवग के शुरू हुए डिबेट शो की दौड़ में ‘ये देश है हमारा’ भी अच्छी रफ़्तार पकड़े हुए है। हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज18 इंडिया’ पर प्रसारित होने वाले इस शो में ज्वलंत मुद्दे उठाए जाते हैं, उन पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सवाल-जवाब होता है और दर्शकों को भी अपने जहन में चल रहे प्रश्न दागने की अनुमति दी जाती है। 

प्रत्येक रविवार शाम 5:45 बजे आने वाले ‘ये देश है हमारा’ की खासियत ये है कि इसमें ज़रूरत से ज्यादा चेहरों को शामिल करने की कोशिश नहीं की जाती। कई दूसरे चैनलों पर प्रसारित होने वाले डिबेट शो में इतने मेहमानों को आमंत्रित कर लिया जाता है कि समय की पाबन्दी के चलते कोई भी अपनी बात पूरी नहीं कर पता। इसके साथ ही उनकी आपसी खींचातानी में बहस मुख्य बिंदु से भटककर किसी दूसरी राह पर चल निकलती है। कम से कम ऐसा अभी तक तो इस शो में देखने को नहीं मिला है।

‘ये देश है हमारा’ के अब तक जितने भी एपिसोड प्रसारित हुए हैं, उनमें दो या तीन अतिथियों को ही जगह दी गई है। प्रत्येक मेहमान को शो की शुरुआत में अपनी बात रखने के लिए करीब एक मिनट का समय दिया जाता है, जो कि पर्याप्त है। कई मौकों पर तो पार्टी प्रवक्ता निर्धारित समय से पहले ही अपनी बात पूरी कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें बिना किसी हो-हल्ले के बोलने दिया जाता है। मसलन, 22 अक्टूबर के शो में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा 25 सेकंड शेष रहते ही अपनी बात पूरी कर चुके थे, जब एंकर ने उन्हें इस बारे में याद दिलाया तब उन्होंने बात आगे बढ़ाई।



इस शो की एक और खूबी ये है कि समय की पाबंदी होने के बावजूद मेहमानों को बीच में ही चुप नहीं कराया जाता। वैसे भी हमारे देश में अतिथि को देवता समान माना जाता है और शो का नाम भी ‘ये देश है हमारा’ है, इसलिए उन्हें बोलने की आज़ादी देना तो बनता ही है। लिहाजा ये कहना गलत नहीं होगा कि इस शो के कॉन्सेप्ट को बेहद खूबसूरती से डिज़ाइन किया गया है।

‘ये देश है हमारा’ में अब तक जिन मुद्दों को उठाया गया है, वे काफी ज्वलंत और भारतीय जनमानस पर गहरी छाप रखते हैं। जैसे कि ‘2019 में मज़बूत या मजबूर सरकार?’ इस एपिसोड में महागठबंधन की मजबूरियों और साथर्कता पर बहस की गई, जैसा कि आप ऊपर दिए विडियो में देख सकते हैं।

इसी तरह, क्या पीएम मोदी ने बढ़ाया सरदार का 'क़द' में सरदार वल्लभ भाई पटेल और गांधी परिवार के रिश्तों को रेखांकित किया गया। जबकि, पाक के इरादों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' में सीमा पार के खतरों और भारत सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल जवाब हुए।



यह शो राजनीति और देश से जुड़े प्रश्नों पर नेताओं से उत्तर की चाह रखने वालों के लिए तो अच्छा है ही, साथ ही उन राजनेताओं के लिए भी अपनी पहचान को फिर से स्थापित करने का एक मंच है जो भीड़ में कहीं खो से गए हैं। मसलन, राजीव शुक्ला, राशिद अल्वी और मनीष तिवारी आदि। कांग्रेस के इन नेताओं के साथ ही शाहनवाज हुसैन और सुधांशु त्रिवेदी भी अब ज्यादा टीवी पर नज़र नहीं आते। खासकर राजीव शुक्ला और राशिद अल्वी को किसी डिबेट शो में देखे तो एक अर्सा हो गया था।

‘ये देश है हमारा’ को होस्ट करने की ज़िम्मेदारी अमिश देवगन के कंधों पर है। अमिश की गिनती उन पत्रकारों में होती है, जो साफ़ एवं स्पष्ट बातों में विश्वास रखते हैं।  उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2002 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से की, इसके बाद वह ‘ज़ी न्यूज़’ का हिस्सा बने। 2005 में जब ‘ज़ी न्यूज़’ ने अपना बिज़नेस चैनल शुरू किया, तो अमिश ने वहां अपनी नई पारी शुरू की। ज़ी के साथ अपने 14 सालों के सफ़र में अमिश ने एक अलग ही पहचान स्थापित कर ली थी। वे ज़ी मीडिया का ख़ास चेहरा बन गए थे। 2016 में उन्होंने ज़ी से नाता तोड़कर ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज़18 इंडिया) का हाथ थमा और तब से अब तक यहीं डटे हुए हैं।

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