कोरोना की मीडिया कवरेज को लेकर प्रो. केजी सुरेश ने सुझाईं ये गाइडलाइंस

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में भी कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
KG SURESH

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में भी कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। तमाम वैज्ञानिक इसके टीके और दवा की खोज में दिन रात लगे हुए हैं, ताकि किसी तरह से इसके प्रसार को रोका जा सके। तमाम मीडिया संस्थान कोरोना की लगातार कवरेज में जुटे हुए हैं।
इन सबके बीच लखनऊ में एक सेलिब्रिटी द्वारा दी गई एक पार्टी में कई पत्रकारों की मौजूदगी ने पत्रकारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील की है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवाओं आदि से जुड़े लोग जनता कर्फ्यू के दायरे में नहीं आएंगे। ऐसे में देहरादून की बहु-विषयक और विशेषज्ञता केंद्रित यूनिवर्सिटी ‘यूपीईएस’ (UPES) में ‘स्कूल ऑफ मॉडर्न मीडिया’ (School of Modern Media) के डीन और और ‘आईआईएमसी’ के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर के.जी. सुरेश ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोरोना वायरस की मीडिया कवरेज को लेकर मीडिया संस्थानों और रिपोर्टर्स के लिए कुछ गाइडलाइंस तैयार की हैं और उन्हें लागू करने की सिफारिश की है।

प्रो. केजी सुरेश द्वारा मीडिया संस्थानों लिए तैयार इन गाइडलाइंस के अनुसार,

1. पूरे कार्यालय को सैनिटाइज किया जाए। इनमें सार्वजनिक स्थान (जहां पर कई लोगों का आना-जाना हो), न्यूजरूम्स, प्रॉडक्शन कंट्रोल रूम्स, सर्वर रूम्स, स्टूडियो, कॉरिडोर, लाउंज, कैंटीन, रिसेप्शन और टॉयलेट्स आदि सभी स्थानों को शामिल किया जाए।  

2. प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग गेट का इस्तेमाल किया जाए।

3. बाहरी लोगों के संपर्क में आने वाले स्टाफ (सुरक्षा गार्ड, रिसेप्शनिस्ट आदि) के लिए मास्क का प्रावधान हो।

4. सभी एंट्री और एग्जिट पाइंट्स को सैनिटाइज किया जाए। जो कोई भी इन पाइंट्स से गुजरे, उसके लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना आवश्यक किया जाए।

5. किसी भी व्यक्ति के बिल्डिंग में प्रवेश करने से पूर्व आवश्यक रूप से उसका टेंपरेचर चेक किया जाए।   

6. किसी भी ऐसे एंप्लाई को जो सर्दी, खांसी, बुखार आदि से पीड़ित हो, संस्थान परिसर में प्रवेश की अथवा मौजूद रहने की अनुमति न हो।   

7. जिन एंप्लाईज का ऑफिस आना जरूरी है और उनका काम घर से नहीं हो सकता है, उन्हें छोड़कर अन्य कर्मचारियों के लिए घर से काम करने का विकल्प दिया जाए। (वर्क फ्रॉम होम)

8. लगातार शिफ्ट को कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाए। एक शिफ्ट पूरी हो जाए और उसके एंप्लाई चले जाएं, तब दूसरी शिफ्ट के एंप्लाईज आएं, इस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए।

9. जब तक हालात नहीं सुधर जाते, तब तक स्टूडियो में बैठकर होने वाली चर्चा को टाल दिया जाए। गेस्ट से बातचीत के लिए लाइव व्यू ऐप्स अथवा स्काईप का इस्तेमाल किया जाए।  

10. जहां संभव हो, वहां मोबाइल जर्नलिज्म (Mobile Journalism) को बढ़ावा दिया जाए।

11. ऑफिशियल मीटिंग्स और एक-दूसरे से बातचीत करने के लिए विडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए।

12. हेल्थ मिनिस्ट्री और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार ऑफिस में स्टाफ को उचित दूरी पर बैठाया जाए।

13. न हाथ मिलाएं, न गले मिलें, बल्कि इसके स्थान पर नमस्ते को प्राथमिकता दें।

14. कैश लेन-देन की बजाय डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दें।

15. ओबी वैन, लाइव यू यूनिट्स, पिकअप कैब और असाइनमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाए। इन वाहनों के ड्राइवर मास्क पहनें और अपने हाथों को सैनिटाइज करें।

16. सभी रिपोर्टर्स को एक छोटी किट उपलब्ध कराएं, जिसमें अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर्स और टिश्यू पेपर मौजूद हों।

17. ऑफिस के सभी टॉयलेट्स और कैंटीन में लिक्विड साबुन और टिश्यू पेपर्स रखे जाएं।

18. अस्वस्थ अथवा कमजोर रिपोर्टर्स को हाई रिस्क की कवरेज का काम न सौंपें। उन्हें घर पर रहने की सलाह दें।  

19. स्टाफ के लिए काउंसिलंग की व्यवस्था कराएं।

20. सार्वजनिक परिवहन सेवा की जगह स्टाफ को निजी ट्रांसपोर्ट की सुविधा प्रदान करें। इसके लिए भुगतान भी करें, ताकि वे सार्वजनिक परिवहन सेवा का इस्तेमाल कम से कम करें और कम से कम जोखिम हो।

ड्यूटी पर मौजूद रिपोर्ट्स के लिए गाइडलाइंस

1. फेक न्यूज से बचें। सही और पुष्ट जानकारी जुटाने के लिए ‘My Gov Corona Helpdesk’ वॉट्सऐप नंबर 91 9013151515 का इस्तेमाल करें।

2. अपने साथ हमेशा हैंड सैनिटाइजर्स रखें और जहां पर साबुन व पानी न हो तो इसका इस्तेमाल करें।

3. जब तक बहुत जरूरी न हो, भीड़भाड़ वाले इलाकों में न जाएं।

4. पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करने से परहेज करें और जहां तक संभव हो, आने-जाने के लिए अपने निजी वाहन का इस्तेमाल करें।   

5. यदि आपको अपने अंदर कोरोना पीड़ित जैसे जरा भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ऑफिस मैनेजमेंट को सूचित करें और मेडिकल सहायता लें। यदि आप कोरोना पॉजीटिव किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो अपने आप को क्वारंटाइन (quarantine) कर लें।

6. न्यूज जुटाते समय अपने न्यूज सोर्स से दूरी बनाकर संवाद करें। इसके अलावा जिन लोगों में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, वरिष्ठ नागरिक, बीमार लोगों, कोरोना पीड़ितों के संपर्क में आने वाले लोगों अथवा कोरोना पीड़ितों का उपचार कर रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और हाई रिस्क वाले स्थानों पर काम कर रहे लोगों से बातचीत करते समय उचित दूरी बनाए रखें।

7. क्लिप माइक का इस्तेमाल करने के बजाय एक दूरी पर रहते हुए डायरेक्शनल माइक का इस्तेमाल करें और माइक के ऊपरी कवर्स को समय-समय पर सैनिटाइज करते रहें।  

8. यदि आप किसी हॉस्पिटल अथवा क्वारंटाइन वाली जगह जा रहे हैं तो ग्लब्स, मास्क, डिस्पोजेबल फुटवियर पहनें।

9. अपने उपकरणों को वाइप्स से साफ करते रहें। काम पर जाने से पहले अपने उपकरणों को अच्छे से साफ और सैनिटाइज कर लें। यह भी सुनिश्चित करें कि जो भी इन उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे भी इन बातों से जागरूक हों।   

10. किसी से हाथ न मिलाएं, बल्कि उसके स्थान पर नमस्ते करें।

11 . नॉर्थ ईस्ट के पत्रकारों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कुछ अशिक्षित और अज्ञानी लोग ‘चाइना वायरस’ के नाम पर उन्हें निशाना बना सकते हैं।

12. साइबर सुरक्षा से जुड़ी कंपनी ‘Norton’ के अनुसार, कुछ स्कैमर्स और हैकर्स कथित रूप से लोगों को टार्गेट कर कोरोना वायरस के बारे में गलत और फर्जी ईमेल भेज रहे हैं।

13. स्टोरी सर्च करते समय अथवा सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस संबंधी किसी भी लिंक पर क्लिक सोच-समझकर करें। ये लिंक आपको किसी ऐसी वेबसाइट पर भी ले जा सकते हैं, जो आपकी डिवाइस को मैलवेयर (malware) के द्वारा नुकसान पहुंचा सकते हैं।  

14. अपने परिवार को सुरक्षित रखें। घर में प्रवेश करने से पहले सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करें और सामाजिक स्तर पर लोगों से दूरी बनाए रखें।  

मीडिया कवरेज के लिए गाइडलाइंस

1. कवरेज के सभी सिद्धांतों के बारे में बताया जाना चाहिए और जागरूकता फैलानी चाहिए।

2. कवरेज इस तरह की होनी चाहिए, जिससे जनता में किसी तरह की दहशत अथवा भ्रम नहीं फैले।  

3. किसी भी न्यूज अथवा सूचना को प्रकाशित/प्रसारित करने से पूर्व उसकी पुष्टि जरूर कर लेनी चाहिए।

4. पत्रकारिता के प्रसिद्ध सिद्धांत ‘When in doubt, cut it out’यानी किसी जानकारी में भ्रम है और उसके बारे में पूरी तरह पता नहीं है तो उसे छोड़ देना चाहिए, लेकिन गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए।

5. किसी भी तरह के नीम-हकीम अथवा लोकप्रियता हासिल करने के लिए कोरोना को ठीक करने का दावा करने वालों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए यानी उन्हें बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

6. निर्धारित मानदंडों के विरुद्ध बयान देने वाले समूहों अथवा लोगों का प्रचार न करें।

7. फर्जी बयानों अथवा फर्जी न्यूज को लोगों के सामने उजागर करें।  

8. सैनिटाइज करें न कि सनसनी फैलाएं।

9. विभिन्न प्रोमोज में और प्रोग्राम्स के द्वारा स्वच्छता के नियमों जैसे-हाथ धोना आदि को बढ़ावा दें।

10. कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए सरकार अथवा गैर सरकारी संगठनों की जा रही पहल को सपोर्ट करें।

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कोरोना का खौफ: प्रशासन की कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी

शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भोपाल प्रशासन सकते में है। प्रशासन द्वारा पत्रकारों के घर पर ‘Covid19 डू नॉट विजिट’ पोस्टर चस्पा किये जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इनमें वह पत्रकार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद नहीं थे। इसी बात को लेकर प्रशासन और पत्रकारों में ठन गई है। पोस्टर लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से कई पत्रकारों का विवाद भी हुआ। पत्रकारों का कहना है कि सरकार बिना वजह दहशत फैला रही है। हमने खुद आगे बढ़कर टेस्ट कराने को कहा है, लेकिन वह पोस्टर चिपकाने तक सीमित है। जो पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस में गए भी नहीं थे, उनके भी नाम संदिग्धों की सूची में डाल दिए गए हैं। आखिर ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है?

शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ पत्रकारों के घर पोस्टर लगाने गई थी। इस दौरान उनका पत्रकारों से विवाद भी हुआ। पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेंस में न होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़े विरोध को देखते हुए उन्हें बिना पोस्टर लगाये ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि वह सिर्फ कलेक्टर के आदेश की तालीम कर रहे हैं। उन्हें जिन पत्रकारों की सूची सौंपी गई है, उसी के आधार पर पोस्टर लगाये जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार को पोस्टर लगाने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भगाते हुए दिखाया गया है। विडियो में पत्रकार पूछता है कि क्या कमलनाथ या शिवराज सिंह के घर पर पोस्टर लगाये हैं? नहीं, तो फिर यहां कैसे आये’? इस विडियो के सामने आने के बाद जहां कुछ पत्रकारों उक्त पत्रकार के बर्ताव पर नाराजगी जाता रहे हैं। वहीं कुछ की नजर में यह प्रशासन की बेवकूफी से उपजा गुस्सा है। नाराजगी जताने वालों का कहना है कि भले ही प्रशासन ने गलती की, लेकिन अधिकारियों का गुस्सा कर्मचारियों पर नहीं निकाला जाना चाहिए।
केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज

वहीं, शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सक्सेना के खिलाफ धारा 188, 269, 270 भा.द.वि. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सक्सेना ने न केवल कोरोना संक्रमित होकर लापरवाही की बल्कि इलाज के लिये गए सरकारी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था।

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IBF की बड़ी पेशकश, मुफ्त में देख सकेंगे ये चार टीवी चैनल्स

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ भी आगे आया है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) भी आगे आया है। इसके तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के सदस्यों ने सोनी के चैनल ‘सोनी पल’, स्टार इंडिया के चैनल ‘स्टार उत्सव’ जी टीवी के चैनल ‘जी अनमोल’ और ‘वायकॉम18’ के कलर्स बुके (bouquet) में शामिल चैनल ‘कलर्स रिश्ते’ को दो माह तक मुफ्त में प्रसारित करने की पेशकश की है। ये सभी चैनल पे चैनल्स (pay channels) हैं।

इस पेशकश के तहत अब ये चारों चैनल देश भर में सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल नेटवर्क्स पर दो महीने के लिए मुफ्त में देखने को मिलेंगे। यानी देश भर के दर्शकों को इन चारों चैनल्स को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।     

दरअसल, इन सभी ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि जब लॉकडाउन के कारण लोगों को 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है, ऐसे मे इस कदम से लोगों को थोड़ा एंटरटेनमेंट और स्फूर्तिदायक कंटेंट मिल सकेगा, जो लोगों को काफी राहत प्रदान करेगा।   

बता दें कि कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने लोगों से सोशल डिस्टिंग अपनाने के साथ ही घरों पर ही रहने को कहा है। ऐसे में इन चारों ब्रॉडकास्टर्स ने भी आगे आकर इन चारों चैनल्स के लिए दो महीने तक अपने सभी तरह के टैरिफ और शुल्क को दर्शकों के लिए मुफ्त करने का निर्णय कर कोरोना से ‘जंग’ में अपना साथ दिया है।

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पत्रकारों के लिए सरकार ने शुरू की ये योजना, इस तरह मिलेगा लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Journalist

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना की शुरुआत की है। इसके तहत बिहार के पत्रकारों को हर महीने 6000 रुपए की पेंशन दी जाएगी। फिलहाल राज्य के 48 पत्रकारों को यह पेंशन मिलेगी। यह योजना 14 नवंबर 2019 से प्रभावी की गई है और पेंशन पाने वाले पत्रकारों को एरियर का भुगतान भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को 40 पत्रकारों के खाते में पेंशन की राशि स्थानांतरित कर दी गयी। इन 40 पत्रकारों के अतिरिक्त पांच पत्रकारों को 6 मार्च 2020 तथा तीन पत्रकारों को 16 मार्च 2020 के प्रभाव से पेंशन का लाभ मिलेगा।

जिन 40 पत्रकारों को नवंबर 2019 से लाभ मिलना है, उनके लिए 1.36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, जिन पत्रकारों के पेंशन की स्वीकृति मार्च से दी गयी है, उनके खाते में पेंशन की राशि अगले महीने स्वीकृति के एक माह पूरा होने के बाद जाएगी।

राज्य में पेंशन योजना को स्वीकृत किए जाने के मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार आदि वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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प्रेस एसोसिएशन ने पीएम को लिखा पत्र, पत्रकारों के लिए मांगी ये सुविधा

एसोसिएशन ने पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
Journalist

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, मान्यताप्राप्त पत्रकारों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्रकारों को उस विशेष बीमा योजना में शामिल करने का अनुरोध किया है जिसकी घोषणा सरकार ने गुरुवार को की।

बता दें कि प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए देश के पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने मोदी से अपील की कि सरकार अपनी स्कीम में पत्रकारों को शामिल करें, जिससे पत्रकार निर्भीक होकर अपना काम कर सके।

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‘उस’ प्रेस कांफ्रेंस में नहीं जाने वाले खुद को मान रहे खुशनसीब

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
PC

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे, लिहाजा अन्य पत्रकार भी खौफ में हैं।

बताया जा रहा है कि के.के. सक्सेना कांग्रेस नेता रवि सक्सेना के भाई हैं, ऐसे में उनके के भी संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। पत्रकार होने के नाते सक्सेना का हर रोज काफी लोगों से मिलना रहता था। वह अकसर सघन बसावट वाले पुराने भोपाल भी जाया करते थे, इस वजह से लोगों में घबराहट का माहौल है। वहीं, प्रशासन भी स्थिति की गंभीरता को समझ रहा है।

कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि संक्रमित सक्सेना के कांग्रेस नेता भाई की भी जांच कराई जानी चाहिए और यदि वह पॉजिटिव आती है, तो स्थिति बहुत ही भयानक हो जाएगी, क्योंकि उनका बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना रहता है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद करीब 30 पत्रकारों की स्क्रीकिंग करवाई गई है। अच्छी बात यह है कि एक भी पत्रकार में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी इन पत्रकारों को अगले कुछ दिनों तक होम क्वॉरेंटाइन रहने को कहा गया है।

गौरतलब है कि खुद का अखबार चलाने वाले के.के. सक्सेना भोपाल में कोरोना की पहली महिला मरीज के पिता हैं। उनकी बेटी 18 मार्च को ही लंदन से भोपाल आई थी और उसके नमूनों की जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। लंदन से लौटने के बाद पत्रकार की बेटी 2 दिन तक अपने परिवार के साथ रही थी। स्थानीय पत्रकारों में सक्सेना को लेकर इसलिए नाराजगी है कि उन्होंने सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी विदेश से आई अपनी बेटी के बारे में सूचना नहीं दी, जिसकी वजह से अब कई लोगों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।

कुछ पत्रकारों की मांग है कि के.के. सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कई लोगों की जान को खतरे में डाला है। वहीं, कुछ को उनके प्रति सहानुभूति भी है, लेकिन वह अपने को खुशनसीब मान रहे हैं कि वो कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, ‘मैंने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में न जाने का फैसला लिया और अब मुझे इसकी खुशी है। इतना ही नहीं, उसी रात सक्सेना मुझे भोपाल बाजार में भी दिखाई दिए, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। मेरे लिए तो दोनों ही संयोग बेहद अच्छे रहे’। इससे पहले बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जब सक्सेना के आवास पर पहुंची तो उन्होंने एम्स चलने से इनकार कर दिया। बाद में जब कलेक्टर ने फटकार लगाई तब कहीं जाकर वह एम्स में भर्ती हुए।

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इस वजह से छत्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है।

बता दें कि अभी छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहले विधानसभा की कार्यवाही को 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन गुरुवार यानी आज से विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई।  

विधानसभा के प्रमुख सचिव चंद्रशेखर गंगवाड़े ने बताया, कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी की गई एडवाइजरी व लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए पत्रकार दीर्घा को बंद कर दिया गया है। विधानसभा परिसर में पत्रकारों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। विधानसभा में केवल विधायक अफसर और विधानसभा सचिवालय के अफसर और कर्मचारी ही रहेंगे। विधानसभा की दर्शक दीर्घा को पहले ही बंद किया जा चुका है।

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 छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्रकारों को दी यह सलाह, दिलाया भरोसा

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरुरी जानकारी पहुंचाई जा सके

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
CM

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरूरी जानकारी पहुंचाई जा सके। पत्रकारों के इस जज्बे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा है। वहीं, राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पत्रकारों का ख्याल रखने का प्रयास कर रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने बाकायदा संदेश जारी करके पत्रकारों को महामारी की कवरेज के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही इस विषम परिस्थिति में निर्बाध रूप से खबरें पहुंचाने के लिए उन्हें सराहा है।

जनसंपर्क आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की तरफ से जारी किये गए इस संदेश में कहा गया है कि ‘आम जनता तक सही सूचना पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने में सभी समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब पूरा देश लॉकडाउन में है, आप दिन रात समाज और देश के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कठिन स्थितियों में परिश्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताई है कि कई बार पत्रकार अपने कर्तव्य की पूर्ति के क्रम में अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और इसका विपरीत प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विश्व के कई पत्रकार कोरोना की कवरेज के दौरान इसकी चपेट में आ चुके हैं, लिहाजा सभी पत्रकारों से आग्रह है कि पूरी सावधानी बरतें।’

लॉकडाउन में सभी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को छूट मिली हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। राजधानी दिल्ली में ही कई वरिष्ठ पत्रकारों को पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं को देखते हुए अन्य शहरों के पत्रकार भी आशंका में घिर गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पत्रकारों की इस आशंका को दूर करने का भी प्रयास किया है।

जनसंपर्क आयुक्त की ओर से जारी संदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पत्रकारों को कवरेज के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। संदेश में कहा गया है, ‘माननीय मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पत्रकारों को लॉकडाउन के दौरान समाचार संकलन में किसी तरह की कठनाई न आये’। हालांकि, अब पुलिस इसका कितना पालन करती है यह देखने वाली बात होगी।

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सामने आया पुलिसकर्मियों का अमानवीय चेहरा, रिपोर्टिंग के दौरान ET Now के पत्रकार को पीटा

देश में 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान मीडियाकर्मी को बहाल रखा गया है। बावजूद इसके रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। लेकिन इस दौरान कुछ जरूरी सेवाओं और लोगों को बहाल रखा गया है, जिनमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। बावजूद इसके लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही ताजा मामला महाराष्ट्र के ठाणे से सामने आया है।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET Now) के डिप्टी न्यूज एडिटर उत्कर्ष चतुर्वेदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि ठाणे जिले में लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।

अपने आरोप में उत्कर्ष चतुर्वेदी ने कहा कि पुलिसकर्मिंयों को अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया लेकिन पुलिस वालों ने फिर भी उनके साथ मारपीट की। उन्होंने बताया कि यह घटना ठाणे ग्रामीण पुलिस क्षेत्र के तहत पश्चिम उपनगर में दहिसर पुलिस चौकी के पास हुई।

उत्कर्ष चतुर्वेदी ने ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने घटना के बारे में ठाणे ग्रामीण के एसपी शिवाजी राठौड़ को भी सूचित किया है, लेकिन इस संबंध में की गयी कॉल और भेजे गए मैसेज का उन्होंने जवाब नहीं दिया।

 

 

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कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से क्यों मच रहा हड़कंप, जानें यहां

मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Press Conference

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे एक पत्रकार में कोरोना वायरस (COVID-19) की पुष्टि हुई है। पत्रकार की बेटी भी कोरोना पॉजीटिव मिली है। यह मामला सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सभी पत्रकार अब क्वारंटाइन में जाएंगे। इस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।  

बताया जाता है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों और मंत्रियों समेत तमाम नेता शामिल हुए थे। जिला प्रशासन की ओर से इन सभी लोगों की लिस्ट बनाई जा रही है और सभी को क्वारंटाइन में भेजा जाएगा। वहीं, यह मामला सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को आइसोलेट कर लिया है।  

बता दें कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले 20 मार्च को अपने निवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसे कवर करने के लिए कई पत्रकार पहुंचे थे। इनमें वह पत्रकार भी शामिल था, जिसकी बेटी कोरोना से संक्रमित पाई गई है।

इस बीच खबर है कि कोरोना संक्रमित पत्रकार के संपर्क में आए मीडिया विभाग, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े अभय दुबे ने खुद को होम क्वारंटाइन कर लिया है। दुबे ने मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना पीड़ित पत्रकार से हाथ मिलाया था।

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कोरोना से लड़ाई में सरकार की मदद के लिए सामने आई नेटवर्क18 की टीम

दुनिया में खौफ का सबब बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में पूरा देश एकजुट होने लगा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Network18

दुनिया में खौफ का सबब बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में पूरा देश एकजुट होने लगा है। इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके, इसके लिए प्रधानमंत्री ने एहतियाती कदम उठाते हुए पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है, वहीं लोगों की परेशानी को समझते हुए वित्त मंत्रालय ने भी लोगों को करों में छूट समेत कई रियायतें दी हैं।  

ऐसे में देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) ने लॉकडाउन के दौरान देश के गरीब व निचले तबके के लोगों को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए #IndiaGives कैंपेन शुरू किया है। इस कैंपेन के शुरुआती चरण में ‘नेटवर्क18’ के 6000 से ज्यादा एंप्लाईज ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ (PMNRF) में अपने एक दिन की सैलरी का योगदान दिया है। इसका उद्देश्य उन दैनिकभोगी वर्कर्स को राहत पहुंचाना है, जिनकी आजीविका इस लॉकडाउन के कारण प्रभावित है। ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (Periodic Labour Force Survey) की मई-2019 की रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों भारतीयों के पास किसी तरह की आर्थिक सुरक्षा नहीं है या बहुत कम है। देश के करीब 77.2 प्रतिशत यानी करीब 200 मिलियन घरों में लोग या तो खुद का काम करते हैं अथवा दैनिक वेतनभोगी श्रमिक हैं। कोरोनावायरस के कारण देश में तीन हफ्ते के लॉकडाउन के कारण इनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

इसलिए, ऐसे लोगों की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए नेटवर्क18 समूह के पत्रकार और मीडिया ब्रैंड्स जैसे- न्यूज18इंडिया, सीएनबीसी-टीवी18, सीएनएन न्यूज18, न्यूज18 के सभी प्रादेशिक चैनल्स, सीएनबीसी आवाज, सीएनबीसी बाजार, मनीकंट्रोल, फर्स्टपोस्ट, News18.com और फोर्ब्स इंडिया इन लोगों की स्टोरीज पर विशेष ध्यान देंगे, जिनकी रोजी-रोटी इस लॉकडाउन के कारण सर्वाधिक रूप से प्रभावित होगी।

‘नेटवर्क18’ का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दैनिक वेतनभोगी और अनियोजित श्रमिकों के हितों की रक्षा करने की तत्काल आवश्यकता की बात कही है। ऐसे में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में योगदान महान देशसेवा होगी। ‘नेटवर्क18’ ने देश के आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से #IndiaGives कैंपेन में शामिल होने की अपील भी की है।

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