कई अहम मुद्दों पर सूचना-प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती के बीच करार, जानिए खास बातें...

देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ को ...

Last Modified:
Friday, 06 April, 2018
Samachar4media

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी प्रसार भारती को अक्‍टूबर 2007 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को वेतन देने के लिए अपने फंड का इस्‍तेमाल करना होगा। दरअसल इसके लिए प्रसार भारती ने 28 मार्च को 'सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय' (MIB) के साथ एक 'एमओयू' (MoU) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। बता दें कि प्रसार भारती 'दूरदर्शन' और 'ऑल इंडिया रेडियो' का संचालन करता है।

इस 'एमओयू' में कई अन्य शर्तें भी शामिल हैं, जिसमें प्रसारण के लिए रेडियो तरंगों और सैटेलाइट का इस्‍तेमाल करने के कारण बकाया पड़े 1800 करोड़ रुपए का भुगतान भी 'प्रसार भारती' को करना होगा। एमओयू में यह भी तय हुआ है कि सातवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के लिए मंत्रालय द्वारा सिर्फ 80 प्रतिशत राशि दी जाएगी।

विभिन्‍न मुद्दों पर लंबे समय से दोनों पक्षों में चल रहे गतिरोध के बीच प्रसार भारती’ के सीईओ शशि शेखर वेम्पती और मंत्रालय में वरिष्‍ठ आर्थिक सलाहकार रोहित कुमार परमार के बीच हुए इस एमओयू पर हस्‍तरक्षर होने के बाद मंत्रालय ने प्रसार भारती के लिए 365 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि प्रसार भारती द्वारा वर्ष 2007 के बाद कितने कर्मचारियों की भर्ती की गई थी और उनके वेतन-भत्‍तों पर कितना खर्च आता है।   

मंत्रालय द्वारा प्रसार भारती को हर महीने 200 करोड़ रुपए जारी किए जाते हैं और इस राशि का अधिकांश हिस्‍सा इस पब्लिक ब्रॉडकास्‍टर के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने में खर्च किया जाता है। लेकिन प्रसार भारती के साथ हुए विवाद के चलते केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उस फंड पर रोक लगा दी थी, जिससे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान होता था। इस दंडात्मककदम के चलते प्रसार भारती ने कर्मचारियों की जनवरी और फरवरी माह का वेतन आकस्मिक निधि से दिया था, जिसकी जानकारी प्रसार भारती बोर्ड के चेयरमैन ए. सूर्यप्रकाश ने एक मीडिया हाउस को दी थी।

इससे पहले मंत्रालय द्वारा प्रसार भारती को वेतन-भत्‍तों आदि के भुगतान के लिए 1989 करोड़ की अनुदान राशि दी गई थी।


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माखनलाल विश्वविद्यालय: रजिस्ट्रार ने दिलीप मंडल व मुकेश कुमार पर लिया ये फैसला

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग पर गठित की गई है कमेटी, 15 दिन में तैयार करेगी अपनी रिपोर्ट

Last Modified:
Saturday, 14 December, 2019
MUC

देश के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCNUJC), भोपाल में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। यहां दो फैकल्टी प्रोफेसर्स के खिलाफ विद्यार्थियों ने काफी देर तक प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि दोनों प्रोफेसर्स विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं और छात्रों को जातिगत तौर पर बांट रहे हैं। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत कराया। 

दरअसल, प्रदर्शन कर रहे विद्य़ार्थियों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी के दो फैकल्टी प्रोफेसर दिलीप मंडल और मुकेश कुमार सोशल मीडिया पर जाति विशेष के नाम पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं और हैशटैग चला रखा है। छात्र दोनों प्रोफेसर्स को निलंबित किए जाने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर विद्यार्थियों ने गुरुवार को भी धरना दिया था। शुक्रवार को भी कुलपति के कार्यालय के बाहर छात्र धरने पर बैठे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समझाने के बावजूद जब विद्यार्थी नहीं माने तब पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने विद्यार्थियों को वहां से हटाया। हंगामे के दौरान तीन छात्र बेहोश भी हो गए, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा था। विद्यार्थियों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को घसीटकर पांचवीं मंजिल से तीसरी मंजिल पर उतारा।

इस मामले में एडिशनल एसपी संजय साहू का कहना है कि छात्रों की मांग पर जांच कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में छात्रों को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। वहीं, रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल का कहना है कि यह कमेटी तथ्यों के आधार पर जांच करेगी। छात्रों ने जिन दो प्रोफेसर्स पर आरोप लगाए हैं, फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच के बाद ही उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा। इस बारे में दिलीप मंडल का कहना है कि विश्वविद्यालय में क्या विरोध हुआ, यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं, मुकेश कुमार ने छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।

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सूचना प्रसारण मंत्रालय में हुई नए सचिव की एंट्री

कई अन्य सचिवों के कार्यक्षेत्र में किया गया है फेरबदल, केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है

Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
MIB

बिहार कैडर के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) में नया सचिव नियुक्त किया गया है। वह अमित खरे का स्थान लेंगे, जिन्हें ‘उच्च शिक्षा विभाग’ (Department of Higher Education) का नया सचिव बनाया गया है। बता दें कि इन दिनों मित्तल वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) में विशेष सचिव के तौर पर काम कर रहे थे। वहीं, सुशील कुमार को खनन सचिव और प्रवीण कुमार को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में सचिव बनाया गया है।

इसके अलावा राजेश भूषण को जहां ग्रामीण विकास विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं सुनील कुमार पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाए गए हैं। बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है।

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स्टार और डिज्नी इंडिया को मिला नया कंट्री हेड

पिछले महीने संजय गुप्ता ने इस पद से दे दिया था इस्तीफा

Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Star disney

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) का नया कंट्री मैनेजर के. माधवन को नियुक्त किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी विभागों के हेड अब माधववन को रिपोर्ट करेंगे। माधवन की रिपोर्टिंग सीधे ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर को होगी।

माधवन इससे पहले ‘स्टार इंडिया’ (Star India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (साउथ बिजनेस) थे। वह वर्ष 2016 से यह जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह वर्तमान में दक्षिण भारत के चार राज्यों में ‘स्टार’ के बिजनेस को देखने के साथ ही मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में प्रादेशिक चैनल्स का कामकाज संभाल रहे थे।

बता दें कि संजय गुप्ता ने पिछले महीने ‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के कंट्री मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ‘गूगल इंडिया’ (Google India) के साथ बतौर अपनी नई पारी शुरू की है, जहां उन्हें कंट्री मैनेजर और वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स और ऑपरेशंस) के पद पर नियुक्त किया गया है। संजय गुप्ता अगले साल की शुरुआत में इस पद को संभालेंगे।

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Zee Media के जवाहर गोयल को Dish TV में फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

जवाहर गोयल को इस साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था

Last Modified:
Friday, 13 December, 2019
Jawahar Goel

डायरेक्ट टू होम टेलिविजन सर्विस ‘डिश टीवी’ (Dish TV) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि जवाहर गोयल को एक बार फिर ‘डिश टीवी’ का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। गुरुवार को हुई कंपनी बोर्ड की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया। उनका कार्यकाल 17 दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2020 तक होगा। बताया जाता है कि मैनेजिंग डायरेक्टर का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी जवाहर गोयल बोर्ड के चेयरमैन बने रहेंगे।

बता दें कि ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के छोटे भाई जवाहर गोयल को इसी साल मार्च में ‘जी मीडिया नेटवर्क’ (Zee Media network) का एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था।

‘जी मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ पद की जिम्मेदारी के साथ ही उन्हें मीडिया नेटवर्क की ‘एडिटोरियल गवर्निंग काउंसिल’(Editorial Governing Council) का चेयरमैन भी बनाया गया था। यह काउंसिल नेटवर्क की सभी प्रमुख एडिटोरियल पॉलिसी को दिशा-निर्देशित करती है।
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हैदराबाद कांड की मीडिया कवरेज पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया ये कदम

शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई

Last Modified:
Thursday, 12 December, 2019
Media Coverage

हैदराबाद कांड में मीडिया की भूमिका पर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के साथ ही ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत चाहती है कि बलात्कार और हत्या जैसे संगीन मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में मीडिया को खास ध्यान रखना चाहिए। 

हालांकि अदालत ने साफ किया है कि उसका इरादा मीडिया को रिपोर्टिंग से रोकने का बिलकुल नहीं है, बल्कि वह जांच के पहलुओं को सार्वजनिक होने से रोकने पर विचार कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने हैदराबाद कांड से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मीडिया में चलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर मीडिया में सुबह से लेकर शाम तक केस से जुड़े सबूत क्यों दिखाए जाते रहे? इस पर तेलंगाना पुलिस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि मीडिया में खबर आने के बाद ही इस बारे में सबको पता चला।

चीफ जस्टिस ने अदालत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगा रहे हैं, हम केवल यही चाहते हैं कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने वेटनरी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या के सभी आरोपितों के एनकाउंटर की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से जांच कराये जाने के आदेश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि मीडिया ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इस फेर में कई मीडिया संस्थानों ने पीड़िता और उसके परिवार की न सिर्फ पहचान उजागर की थी, बल्कि पीड़िता की तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई थी। इसके अलावा, आरोपितों की तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी गई थीं।

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फोटो जर्नलिस्ट के सामने आई ये मजबूरी, कैमरा किनारे रख करनी पड़ रही मजदूरी

स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई

Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
Photo Journalist

मजबूरी इंसान से क्या कुछ नहीं करा लेती। अपनी तस्वीरों से अखबारों में छाए रहने वाले फोटो जर्नलिस्ट मुनीब उल इस्लाम आज मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने को विवश हैं। मुनीब के बुरे दिन कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिली आजादी के साथ शुरू हुए। कुछ दिन तो उन्होंने जैसे-तैसे गुजार लिए, लेकिन जब कोई रास्ता नजर नहीं आया तो उन्हें मजबूरन कैमरा किनारे रखकर ईंट-पत्थरों से भरे तसले उठाने पड़े।

अनंतनाग निवासी मुनीब फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के रूप में पिछले कई सालों से काम कर रहे हैं। स्थानीय सहित राष्ट्रीय अखबारों में भी उनके द्वारा खींची गईं फोटो छपती रही हैं। पांच अगस्त से पहले तक उनकी जिंदगी काफी अच्छी चल रही थी। उन्होंने पिछले साल शादी भी कर ली, मगर एक ही झटके में पूरी तस्वीर ही बदल गई।

दरअसल, अनुच्छेद 370 खत्म करने के साथ ही सरकार ने एहतियात के तौर पर घाटी में कई प्रतिबंध लगा दिए थे। इनमें फोन और इंटरनेट सेवा भी शामिल है। इंटरनेट सेवा तो अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है, जिसका खामियाजा मीडिया और पत्रकारों को भी उठाना पड़ा। खासकर मुनीब जैसे पत्रकार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिन्हें सैलरी नहीं मिलती।

वैसे, श्रीनगर के पत्रकार मीडिया सुविधा केंद्र में इंटरनेट उपयोग कर सकते हैं, लेकिन कश्मीर के अन्य जिलों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसके परिणामस्वरूप पत्रकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घाटी के माहौल के चलते मीडिया संस्थानों को विज्ञापन आदि से होने वाले कमाई में भी गिरावट आई है, इससे निपटने के लिए उनके द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। 

30 वर्षीय मुनीब ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इस तरह मजदूरी करनी पड़ेगी। वह कहते हैं, ‘मैंने पिछले साल शादी की थी। मेरी पत्नी प्रेग्नेंट हैं, जिसकी देखभाल के लिए मुझे पैसों की जरूरत रहती है। यही वजह है कि जब हालात नहीं बदले तो मुझे मजदूरी करने पर विवश होना पड़ा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में से अधिकांश दिन मैं बेरोजगार ही रहा।’

ऐसा नहीं है कि मुनीब ने घाटी की फिजा को कैमरे में उतारना बंद कर दिया है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी उन्होंने सैकड़ों तस्वीरें खींचीं, लेकिन इंटरनेट सेवा बहाल नहीं होने के चलते वह उन्हें किसी पब्लिकेशन को भेज नहीं सके। मुनीब और उनके जैसे पत्रकारों के लिए बार-बार श्रीनगर जाना संभव नहीं है। नतीजतन, उनकी फोटो-खबरें बस उनकी ही होकर रह गई हैं।

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पत्रकार के खिलाफ FIR मामले में प्रेस काउंसिल आई हरकत में, उठाया ये कदम

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में नमक-रोटी दिए जाने की खबर दिखाने पर पत्रकार के खिलाफ दर्ज किया गया था मुकदमा

Last Modified:
Wednesday, 11 December, 2019
PCI

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्‍चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल के मामले में अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) भी हरकत में आ गई है। काउंसिल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। इन अधिकारियों से 18 दिसंबर तक अपना जवाब देने को कहा गया है।  

बता दें कि ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ पहले ही पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को पत्रकारों के खिलाफ क्रूर कदम बताते हुए इसकी निंदा पर चुका है।

गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व मिर्जापुर में हिनौता स्थित एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर नमक-रोटी खिलाने का मामला सामने आया था। पवन जायसवाल ने इस घटना का विडियो बनाकर सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर किया था। वहीं, मिर्जापुर के जिला प्रशासन का आरोप था कि पवन जायसवाल ने फर्जी तरीके से और गलत नीयत से यह विडियो बनाया। इसके बाद प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा उत्पन्न करने, झूठे साक्ष्य और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर के मुताबिक, इस विडियो को रिकॉर्ड करने के लिए गांव के एक अधिकारी ने जायसवाल के साथ साजिश रची थी, क्योंकि उन्हें पता था कि स्कूल में काम करने वाले रसोइए के पास सामान नहीं था।

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वरिष्ठ पत्रकार के घर में दिनदहाड़े घुसा अंजान शख्स, दे गया ये धमकी

पत्रकार ने पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की गुजारिश की है

Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Threat

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि इस धमकी की वजह पिछले दिनों मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया के संबंध में लिखी गई खबर है। रविंद्र जैन ने इस घटना से पुलिस को अवगत करा दिया है। दरअसल, रविंद्र जैन ने अपनी न्यूज वेबसाइट ‘सबकी खबर’ पर 18 नवंबर को एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में बताया गया था कि कैसे जुलानिया ने अपनी बेटी की कंपनी को अरबों के ठेके दिलवाए। इस खुलासे ने प्रदेश में हडकंप मचा दिया था।

‘समाचार4मीडिया’ से बातचीत में जैन ने बताया, ‘8 दिसंबर को एक अंजान शख्स हाथ में फाइल लिए मेरे आवास पर पहुंचा, लेकिन उस वक्त मैं घर पर नहीं था। उसने बताया कि उसे राधेश्याम जुलानिया ने कुछ जरूरी बात करने के लिए भेजा है। इस पर मेरे बेटे ने उसे घर के अंदर बुलाया। कुछ देर यहां-वहां की बातें करने के बाद उसने मेरे बेटे से कहा कि तुम्हारे पिता राधेश्याम जुलानिया को जानते नहीं हैं, जुलानिया उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे, आप भी उनकी लाश नहीं ढूंढ पाओगे। इतना कहने के बाद वो वहां से निकल गया, लेकिन मेरे बेटे ने उसकी एक फोटो खींच ली।’ जैन ने श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज की है।

बता दें कि रविंद्र जैन अब तक कई खुलासे कर चुके हैं। पुलिस और प्रशासन पर गहरी पकड़ रखने वाले जैन ने अपनी धारधार लेखनी की बदौलत सियासी गलियारों में भी जमकर हडकंप मचाया है। भोपाल से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘राज एक्सप्रेस’ में समूह संपादक की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान की नींद उड़ा रखी थी। इसके बाद जब उन्होंने टैबलॉयड अखबार ‘अग्निबाण’ की कमान संभाली, तो तकरीबन रोजाना कोई न कोई विशेष खबर अखबार के फ्रंट पेज पर रहती थी। फिलहाल वह अपने न्यूज पोर्टल पर ध्यान केंद्रित किये हुए हैं और यहां भी उनकी खबरें सुर्खियां बंटोर रही हैं।

लोगों का कहना है कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़ा है, लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि पुलिस क्या कार्रवाई करती है। जैन के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस विषय में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जिस खबर के चलते रविंद्र जैन को धमकी मिली, उसे आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

रविंद्र जैन के बेटे द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत की कॉपी आप यहां पढ़ सकते हैं:

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HT को बाय बोल वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

पूर्व में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं कुमार उत्तम

Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Kumar Uttam

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार कुमार उत्तम ने यहां से बाय बोल दिया है। उन्होंने अब नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित विमान निर्माता कंपनी ‘एयरबस’ (AirBus) का दामन थामा है। खबर है कि यहां उन्हें डायरेक्टर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

बता दें कि कुमार उत्तम पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। मूल रूप से रांची (झारखंड) के रहने वाले कुमार उत्तम ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

कुमार उत्तम ने वर्ष 2000 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में बतौर करेसपॉन्डेंट अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब पौने पांच साल (दिसंबर 2000-सितंबर 2005) यहां काम करने के बाद उन्होंने अक्टूबर 2005 में बतौर प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट ‘डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड’ का दामन थाम लिया। यहां करीब दो साल अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोल दिया और सितंबर 2007 में स्पेशल पॉलिटिकल करेसपॉन्डेंट के तौर पर ‘द पॉयनियर’ से जुड़ गए। यहां करीब साढ़े छह साल तक उन्होंने अपनी सेवाएं दीं और फिर यहां से अलविदा कहकर फरवरी 2014 में एक बार फिर ‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ के साथ जुड़ गए। अब करीब छह साल पुरानी अपनी पारी को विराम देकर कुमार उत्तम ने ‘एयरबस’  के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

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महिला रिपोर्टर के सवाल पर कैसे भड़क गए महेश भट्ट, देखें विडियो

शाहीन भट्ट की बुक लॉन्चिंग के मौके पर मीडिया से मुखातिब था भट्ट परिवार, आलिया भट्ट ने किसी तरह कराया चुप

Last Modified:
Tuesday, 10 December, 2019
Mahesh Bhatt

फिल्म निर्माता व निर्देशक महेश भट्ट एक रिपोर्टर द्वारा पूछे गए एक सवाल पर इतना भड़क गए कि कार्यक्रम में ही चिल्लाने लगे। बाद में उनकी बेटी और बॉलिवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने किसी तरह उन्हें शांत किया। पहले तो आलिया की बात को महेश भट्ट ने नजरअंदाज कर दिया, फिर जवाब देकर शांत हो गए। इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

दरअसल, महेश भट्ट की बड़ी बेटी शाहीन भट्ट की किताब 'आई हैव नेवर बीन (अन) हैपियर' (I’ve Never been (Un)Happier) की लॉन्चिंग के मौके पर भट्ट परिवार मीडिया से मुखातिब हुआ था। इस दौरान डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ को लेकर बातचीत भी हुई।

इसी बीच एक रिपोर्टर ने महेश भट्ट से मनोचिकित्सक को लेकर कुछ सवाल पूछ लिया। बस, फिर क्या था। सवाल सुनते ही महेश भट्ट भड़क गए और चिल्लाने लगे। यह देखकर बगल में बैठी आलिया ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने रिपोर्टर से यह भी कहा, 'मैंने आपको चेतावनी दी थी ऐसा होने वाला है।' इस बीच महेश भट्ट अपनी बात कहकर चुप हो जाते हैं। बता दें कि शाहीन भट्ट लंबे समय तक डिप्रेशन से जूझी हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी के उस दौर पर यह किताब लिखी है।

आप भी यह विडियो यहां देख सकते हैं।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

When daddy gets angry. #maheshbhatt got emotional during #shaheenbhatt book launch #viralbhayani @viralbhayani

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